Anthony Albanese

Prime Minister Narendra Modi addresses a large gathering at Melbourne's Marvel Stadium during the 'Melbourne Meets Modi' event, as organizers reject allegations that attendees were paid to participate.
मेलबर्न इवेंट के आयोजकों का कांग्रेस पर पलटवार, बोले- भीड़ किराए की नहीं, अपनी इच्छा से पहुंचे थे 30 हजार लोग

मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस के उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए लोगों को पैसे दिए गए थे। आयोजकों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी मांगने और आरोप वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं को भेजा पत्र कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर कहा कि 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया गया था। पत्र में कहा गया कि सिडनी से चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था सामुदायिक सहयोग से की गई थी और इसका खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया और न ही किसी सरकारी एजेंसी ने। क्या था कांग्रेस का आरोप? कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं, जिनमें पवन खेड़ा भी शामिल थे, ने आरोप लगाया था कि यह एक "मैनेज्ड इवेंट" था। उनका दावा था कि लोगों को पैसे देकर कार्यक्रम में बुलाया गया और उनके लिए विशेष चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था की गई। कांग्रेस नेताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया था। आयोजकों ने आरोपों को बताया निराधार कार्यक्रम के आयोजकों में शामिल अमित करंथ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के आरोप पूरी तरह निराधार और निराशाजनक हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोग अपनी इच्छा से पहुंचे थे और किसी को भी पैसे देकर नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों ने अपने यात्रा, रहने और अन्य खर्च स्वयं वहन किए। कुछ लोगों की यात्रा व्यवस्था स्थानीय भारतीय समुदाय के स्वयंसेवकों और सामुदायिक सहयोग से हुई थी। 30 हजार लोगों ने लिया था हिस्सा आयोजकों के अनुसार, 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में करीब 30 हजार लोग शामिल हुए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन ने भी लोगों को संबोधित किया। आयोजकों ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते संबंधों तथा ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के योगदान का उत्सव था। माफी की मांग आयोजकों ने अपने पत्र में कांग्रेस नेताओं से मांग की है कि वे भीड़ को "पैसे देकर जुटाई गई" बताने वाले आरोप वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उनका कहना है कि इस तरह के आरोपों से कार्यक्रम में शामिल हजारों भारतीय मूल के लोगों और स्वयंसेवकों का अपमान हुआ है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Narendra MODI
प्रधानमंत्री मोदी ने तीन देशों की सफल यात्रा पूरी की, भारत लौटे; रक्षा, व्यापार और इंडो-पैसिफिक सहयोग को मिली नई मजबूती

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की अपनी छह दिवसीय तीन देशों की यात्रा पूरी कर भारत लौट आए हैं। इस दौरे के दौरान भारत ने रक्षा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौते किए। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की लगभग 40 वर्षों बाद न्यूजीलैंड की पहली द्विपक्षीय यात्रा भी रही।   तीनों देशों के साथ रणनीतिक रिश्ते हुए मजबूत   इंडोनेशिया में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर अहम सहमति बनी। दोनों देशों ने भारत में विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल की खरीद से जुड़े रक्षा सहयोग को भी आगे बढ़ाया।   ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री ने अपने समकक्ष एंथनी अल्बनीज़ के साथ वार्ता कर रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, निवेश और व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया। वहीं न्यूजीलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ बैठक में मुक्त व्यापार, कृषि, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित कई विषयों पर चर्चा हुई।   इंडो-पैसिफिक पर रहा खास फोकस   पूरे दौरे के दौरान भारत ने एक्ट ईस्ट नीति, महासागर (MAHASAGAR) विज़न और मुक्त एवं सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्रालय के अनुसार इस यात्रा से भारत के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई गति मिलेगी और क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी।

abhishek singh जुलाई 12, 2026 0
Big Bash League
भारत में गूंजेगा बिग बैश का रोमांच, मेलबर्न से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली/मेलबर्न, एजेंसियां। भारत और ऑस्ट्रेलिया के खेल संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) से संबोधित करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित टी-20 प्रतियोगिता बिग बैश लीग (BBL) के शुरुआती मुकाबले पहली बार भारत में आयोजित किए जाएंगे। यह क्रिकेट इतिहास का एक अनूठा अवसर होगा, जब किसी प्रमुख विदेशी फ्रेंचाइजी लीग के आधिकारिक मैच भारतीय मैदानों पर खेले जाएंगे।   प्रधानमंत्री मोदी ने बताया प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दिसंबर में चेन्नई में आयोजित होने वाले 'जी-डे नमस्ते' समारोह के दौरान बिग बैश लीग के शुरुआती मुकाबलों का आयोजन किया जाएगा। इस फैसले से भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को अपने देश में बिग बैश का रोमांच देखने का अवसर मिलेगा, जबकि ऑस्ट्रेलियाई लीग को दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी।   मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने इस अवसर पर इंडिया-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन रोडमैप का भी शुभारंभ किया। इस रोडमैप का उद्देश्य दोनों देशों के बीच खेलों में दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करना है।   नई साझेदारी के तहत  नई साझेदारी के तहत खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स साइंस, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, कोचिंग, खेल अनुसंधान और आधुनिक खेल अवसंरचना के विकास में सहयोग बढ़ाया जाएगा। दोनों देशों के खिलाड़ी और विशेषज्ञ अनुभव साझा करेंगे, जिससे खेल प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर मिल सकेंगे।   विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बिग बैश लीग के मुकाबलों का आयोजन क्रिकेट के वैश्विक विस्तार की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। इससे न केवल भारत-ऑस्ट्रेलिया खेल संबंध और मजबूत होंगे, बल्कि भारतीय दर्शकों को विश्वस्तरीय फ्रेंचाइजी क्रिकेट का नया अनुभव भी मिलेगा। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह घोषणा किसी बड़े उत्सव से कम नहीं मानी जा रही है।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Aarav Murder Case
41 दिन में इंसाफ: डेढ़ साल के मासूम आरव के हत्यारे को मिली फांसी की सजा

फिरोजाबाद, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने महज 41 दिनों के भीतर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। जनपद न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने इस जघन्य अपराध को "दुर्लभ से दुर्लभतम" श्रेणी का मानते हुए मृत्युदंड का आदेश दिया।   क्या है मामला? यह घटना 30 मई को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में हुई थी। आरोप के अनुसार, रिश्ते का चाचा विराज एकतरफा प्रेम के कारण बच्चे की मां पर शादी का दबाव बना रहा था। महिला द्वारा इंकार किए जाने और बच्चे का हवाला देने से नाराज होकर उसने डेढ़ वर्षीय आरव को जमीन पर कई बार पटककर उसकी हत्या कर दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।   पुलिस ने घटना के छह घंटे के भीतर आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। जांच एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मात्र छह दिनों में 13 गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। अदालत ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित सुनवाई की और गुरुवार को आरोपी को दोषी करार देने के बाद शुक्रवार को सजा सुनाई।   जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह पेश किया गया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अपराध की क्रूरता को देखते हुए माना कि इस मामले में मृत्युदंड से कम कोई अन्य सजा न्यायोचित नहीं होगी।   फैसला आने के बाद आरव की मां ने  क्या कहा? फैसला आने के बाद आरव की मां रति ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि बेटे के हत्यारे को कड़ी सजा मिलेगी। उन्होंने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताते हुए कहा कि अब उनके बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी। वहीं प्रशासन ने भी इस मामले में त्वरित जांच और सुनवाई को न्याय व्यवस्था की प्रभावी कार्यप्रणाली का उदाहरण बताया।

anjali kumari जुलाई 10, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and Australian Prime Minister Anthony Albanese at the Melbourne Cricket Ground (MCG), highlighting India-Australia sports cooperation and strategic partnership.
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पहुंचे पीएम मोदी, क्रिकेट के जरिए भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को दी नई उपमा

मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीन दिवसीय ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान ऐतिहासिक मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने खेल सहयोग को बढ़ावा देने और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा की। क्रिकेट से समझाया भारत-ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता एमसीजी में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी की तुलना क्रिकेट से करते हुए कहा कि दोनों देशों की कूटनीति भी क्रिकेट की तरह है। उन्होंने कहा, "जब हम मेलबर्न में हैं तो क्रिकेट की बात न करना ऐसा होगा जैसे टॉस के बाद मैच ही शुरू न हो।" पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों का एजेंडा वनडे मैच की तरह स्पष्ट और केंद्रित, फैसले टी-20 की तरह तेज, जबकि साझेदारी टेस्ट मैच की तरह लंबी, मजबूत और भरोसेमंद है। क्रिकेट दोनों देशों के लोगों को जोड़ता है प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम है। उन्होंने कहा कि एमसीजी का नाम सुनते ही हर भारतीय के मन में भारत-ऑस्ट्रेलिया मुकाबलों की कई यादें ताजा हो जाती हैं। खेल सहयोग को मिलेगा नया आयाम पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करेंगे। भारत वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच: खेल अवसंरचना में सहयोग खिलाड़ियों के प्रशिक्षण खेल तकनीक निवेश और खेल उद्योग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई गति मिलेगी। खेल के जरिए मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि खेल दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के जुड़ाव को और मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया खेल, शिक्षा, व्यापार, रक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में मिलकर नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे। एमसीजी दौरे को भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जा रहा है, जहां क्रिकेट के साझा जुनून के जरिए दोनों देशों ने अपने रिश्तों को और मजबूत बनाने का संदेश दिया।  

Deepshikha जुलाई 10, 2026 0
Sudhanshu Pandey speaks during a live session while reacting to controversial content from Lock Upp 2 on OTT.
Lock Upp 2 के कंटेंट पर भड़के सुधांशु पांडे, बिना नाम लिए सुनीता आहूजा पर साधा निशाना?

Netflix के रियलिटी शो 'Lock Upp 2' में लगातार बढ़ते विवादों के बीच अब टीवी अभिनेता सुधांशु पांडे की प्रतिक्रिया भी चर्चा में है। अभिनेता ने सोशल मीडिया पर एक लाइव सेशन के दौरान शो में दिखाई जा रही भाषा और व्यवहार पर सवाल उठाए। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन सोशल मीडिया पर कई यूजर्स का मानना है कि उनका इशारा गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा की ओर था। 'देश में क्या हो रहा है?' 'अनुपमा' में वनराज की भूमिका निभा चुके सुधांशु पांडे ने लाइव सेशन में कहा कि आजकल सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जिस तरह का कंटेंट लोकप्रिय हो रहा है, वह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि लोग ऐसी चीजों को क्यों पसंद कर रहे हैं, जिन्हें वह समाज के लिए सही नहीं मानते। उनके मुताबिक, केवल नई पीढ़ी ही नहीं बल्कि पिछली पीढ़ियां भी इस तरह के कंटेंट को सामान्य मानने लगी हैं। गाली-गलौज को लेकर जताई चिंता सुधांशु पांडे ने कहा कि उन्होंने हाल ही में एक ओटीटी शो की कुछ क्लिप देखीं, जिनमें प्रतिभागी लगातार अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर आश्चर्य होता है कि आजकल कुछ लोग गाली-गलौज को "कूल" समझने लगे हैं। अभिनेता के अनुसार, यह प्रवृत्ति समाज और खासकर युवा दर्शकों के लिए अच्छा संदेश नहीं देती। 'सीनियर एक्टर की पत्नी' वाले बयान से बढ़ी चर्चा अपने लाइव सेशन के दौरान सुधांशु पांडे ने कहा कि उन्होंने एक शो में एक वरिष्ठ अभिनेता की पत्नी को भी दूसरों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते देखा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि यदि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग ही ऐसा व्यवहार करेंगे, तो युवा पीढ़ी के सामने गलत उदाहरण जाएगा। हालांकि अभिनेता ने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इसे सुनीता आहूजा से जोड़कर देख रहे हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म से की अपील सुधांशु पांडे ने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स से भी अपील की कि ऐसे कंटेंट पर ध्यान दिया जाए, जिसमें अनावश्यक गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल होता है। उनका कहना था कि मनोरंजन के नाम पर ऐसी चीजों को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses the Indian community in Melbourne during the 'Melbourne Meets Modi' event, highlighting India-Australia ties, Operation Sindoor and India's global role.
ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी भारतीयों से बोले पीएम मोदी: ऑपरेशन सिंदूर का दुनिया में गूंजा संदेश, भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी पर दिया जोर

मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय के भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पूरी दुनिया को भारत की रक्षा क्षमता और आतंकवाद के खिलाफ उसकी जीरो-टॉलरेंस नीति का संदेश दिया है। कार्यक्रम के दौरान भारतीय समुदाय में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और पूरा सभागार "मोदी-मोदी" के नारों से गूंज उठा। ऑपरेशन सिंदूर का दुनिया में गया मजबूत संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतता। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकियों के ठिकानों पर की गई कार्रवाई की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी और इससे स्पष्ट संदेश गया कि भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भारत की जीरो-टॉलरेंस नीति केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश ने इसे अपने कार्यों से भी साबित किया है। "हम भारतीय दूध में चीनी की तरह हैं" प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां प्रेम, सहयोग और अपनी संस्कृति की मिठास फैलाते हैं। उन्होंने कहा, "हम भारतीय दूध में चीनी की तरह हैं। हम जहां भी जाते हैं, वहां अच्छाई और अपनापन लेकर जाते हैं।" उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों के घरों में दूध भले ऑस्ट्रेलिया का हो, लेकिन चाय भारतीय ही होती है। उनके इतना कहते ही सभागार "मोदी-मोदी" के नारों से गूंज उठा। 'भजन क्लबिंग' का किया जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय हो रहे 'भजन क्लबिंग' ट्रेंड का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी आधुनिक तरीके से आध्यात्म और संस्कृति को अपना रही है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीयों की भी सराहना करते हुए कहा कि यहां भी सप्ताहांत धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से भरे रहते हैं। उन्होंने कहा कि सत्यनारायण कथा, गुरुद्वारों में अरदास, बच्चों का भांगड़ा और भरतनाट्यम सीखना तथा भारतीय फिल्म महोत्सव जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए हुए हैं। शिक्षा और नवाचार में बढ़ रहा सहयोग प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि हजारों भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं अब ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भी भारत में अपने कैंपस शुरू कर रहे हैं। उन्होंने डीकिन और वोलोंगोंग विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई अन्य संस्थान भी भारत आने की तैयारी में हैं। भारत-ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती दोनों देशों के लिए फायदेमंद कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से अभिवादन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के हित में है। उन्होंने व्यापार समझौते, तकनीक, रक्षा, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को दोनों देशों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। स्टार्टअप और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की नई उड़ान प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने बताया कि अब पहली बार एक भारतीय निजी स्पेस स्टार्टअप अपने स्वयं के रॉकेट से उपग्रह लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि नवाचार, कौशल विकास और तकनीक के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। दुनिया के संकट में सबसे पहले मदद के लिए खड़ा होता है भारत प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत जब भी किसी देश की मदद करता है तो वह किसी का पासपोर्ट, धर्म या रंग नहीं देखता, बल्कि इंसानियत को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में वेनेजुएला में आए भूकंप सहित तुर्किये, सीरिया, म्यांमार और श्रीलंका जैसे देशों में भारत ने तेजी से राहत और बचाव सहायता पहुंचाकर पूरी दुनिया का भरोसा जीता है। उन्होंने कहा कि भारत जितना मजबूत होगा, उतना ही पूरी मानवता को उसका लाभ मिलेगा।  

Deepshikha जुलाई 10, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and Australian Prime Minister Anthony Albanese exchange agreements during the India-Australia leaders' summit in Melbourne.
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच कई अहम समझौते, परमाणु ऊर्जा से रक्षा तक बढ़ेगा सहयोग; पीएम मोदी-अल्बनीज ने दिए बड़े संकेत

मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, साइबर तकनीक, अंतरिक्ष, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। रक्षा साझेदारी को मिलेगा नया आयाम शिखर वार्ता के बाद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की है। इसके तहत रक्षा संबंधों को और व्यावहारिक बनाया जाएगा तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। समझौते के तहत नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा मामलों पर रणनीतिक परामर्श और दोनों सेनाओं की इंटरऑपरेबिलिटी (साझा संचालन क्षमता) को मजबूत करने पर सहमति बनी है। परमाणु ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा पर बढ़ेगा सहयोग भारत और ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी फैसला किया है। दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन के विकास पर मिलकर काम करेंगे। दोनों नेताओं ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन भविष्य की साझेदारी के प्रमुख स्तंभ होंगे। समुद्री सुरक्षा और साइबर क्षेत्र पर भी जोर बैठक में हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंथनी अल्बनीज ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने कहा कि किसी भी रूप में आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा वार्ता में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। शिक्षा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में नई साझेदारियों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते आर्थिक और रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा करेंगे। इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति बैठक के दौरान दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। नेताओं ने कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य टकराव के बजाय संवाद, सहयोग और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाकर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक स्थिरता को नई दिशा दी जा सकती है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Sri Sri Ravi Shankar demonstrates Sudarshan Kriya breathing technique for stress management and healthy ageing.
क्या है सुदर्शन क्रिया? श्री श्री रविशंकर ने बताया सांसों से तनाव कम कर कैसे मिल सकती है बेहतर उम्रदराज़ी की राह

हाल ही में आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया— "Reverse Ageing With Your Breath!"। इसके बाद सुदर्शन क्रिया (Sudarshan Kriya) एक बार फिर चर्चा में आ गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक उम्र को वास्तव में पीछे नहीं ले जाती, लेकिन तनाव कम करके स्वस्थ जीवन और बेहतर उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) में सहायक हो सकती है। क्या है सुदर्शन क्रिया? सुदर्शन क्रिया एक विशेष लयबद्ध श्वास (Rhythmic Breathing) तकनीक है, जिसे श्री श्री रविशंकर ने वर्ष 1981 में विकसित किया था। इस अभ्यास में धीमी, मध्यम और तेज गति से सांस लेने की निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस तकनीक को प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा सिखाया जाता है और इसका उद्देश्य शरीर, मन और भावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करना माना जाता है। सांस और भावनाओं का क्या है संबंध? श्री श्री रविशंकर के अनुसार, हर भावना का संबंध सांस लेने के तरीके से होता है। तनाव, चिंता और गुस्से की स्थिति में सांस तेज और छोटी हो जाती है, जबकि शांत मन की अवस्था में सांस स्वतः गहरी और धीमी होती है। इसी सिद्धांत के आधार पर माना जाता है कि यदि सांसों की गति को नियंत्रित किया जाए, तो मानसिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। तनाव का उम्र बढ़ने से क्या संबंध है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाला तनाव (Chronic Stress) केवल मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करता है। लगातार तनाव रहने से— नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है। शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ सकती है। उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ सकता है। हृदय और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। शरीर की जैविक उम्र (Biological Ageing) पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में तनाव कम करने वाली तकनीकें शरीर को बेहतर तरीके से रिकवर करने में मदद कर सकती हैं। शोध क्या कहते हैं? अब तक हुए कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि सुदर्शन क्रिया से: तनाव और चिंता कम हो सकती है। मूड बेहतर हो सकता है। नींद की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है। भावनात्मक संतुलन मजबूत हो सकता है। समग्र मानसिक स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके दीर्घकालिक प्रभावों को पूरी तरह समझने के लिए बड़े स्तर पर और अधिक शोध की आवश्यकता है। क्या सुदर्शन क्रिया वास्तव में उम्र कम कर सकती है? विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि सुदर्शन क्रिया या कोई भी ब्रीदिंग तकनीक वास्तविक (Chronological) उम्र को कम या उल्टा कर सकती है। लेकिन नियमित श्वास अभ्यास तनाव कम करने, मानसिक शांति बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मददगार हो सकता है। यही कारण है कि इसे स्वस्थ उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) का एक सहायक अभ्यास माना जा रहा है। बेहतर उम्रदराज़ी के लिए क्या जरूरी है? विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए केवल ब्रीदिंग एक्सरसाइज ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ इन बातों का पालन भी जरूरी है— संतुलित और पौष्टिक भोजन नियमित व्यायाम पर्याप्त और अच्छी नींद तनाव का प्रभावी प्रबंधन सकारात्मक सामाजिक संबंध नियमित स्वास्थ्य जांच सुदर्शन क्रिया इन आदतों के साथ मिलकर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक भूमिका निभा सकती है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
murder of a five-year-old Indigenous girl
ऑस्ट्रेलिया में 5 साल की बच्ची की हत्या के बाद हिंसा, गुस्साई भीड़ ने मचाया बवाल

Violence in Australia: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और नॉर्दर्न टेरिटरी क्षेत्र में उस समय तनाव फैल गया, जब 5 साल की एक आदिवासी बच्ची की हत्या के मामले ने हिंसक रूप ले लिया. बच्ची की हत्या के आरोप में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आये और कई जगहों पर हिंसा व झड़पें देखने को मिलीं. बच्ची की हत्या से भड़का गुस्सा रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची शनिवार देर शाम लापता हो गयी थी. बाद में पुलिस ने उसका शव बरामद किया. नॉर्दर्न टेरिटरी के पुलिस कमिश्नर मार्टिन डोल ने बताया कि जेफरसन लुईस नामक व्यक्ति पर बच्ची के अपहरण और हत्या का आरोप है. बताया गया कि आरोपी खुद एलिस स्प्रिंग्स के एक टाउन कैंप में पहुंचा था, जिसके बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा फैल गया. आरोपी की भीड़ ने की पिटाई गुस्साई भीड़ ने आरोपी को पकड़कर बुरी तरह पीटा, जिससे वह बेहोश हो गया. बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसी दौरान अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग जमा हो गये. रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 400 लोगों की भीड़ ने इलाके में विरोध प्रदर्शन किया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प प्रदर्शन के दौरान हालात हिंसक हो गये. भीड़ ने पत्थरबाजी की और पुलिस वाहनों, एंबुलेंस तथा फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया. झड़प में कई पुलिसकर्मी और मेडिकल स्टाफ घायल हुए. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया. “पेबैक” की मांग ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग “पेबैक” की मांग कर रहे थे. आदिवासी समुदायों में “पेबैक” का मतलब पारंपरिक या शारीरिक सजा से होता है. घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आये, जिनमें भीड़ आरोपी के खिलाफ गुस्सा जाहिर करती दिखाई दी. जंगल में चला सर्च ऑपरेशन बच्ची के लापता होने के बाद सैकड़ों लोगों ने घने जंगलों में तलाशी अभियान चलाया था. बाद में पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से बच्ची का शव बरामद किया गया. पुलिस ने सुरक्षा कारणों से आरोपी जेफरसन लुईस को नॉर्दर्न टेरिटरी की राजधानी डार्विन भेज दिया है. पीएम ने की शांति की अपील ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री Anthony Albanese ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि वह लोगों के गुस्से और दर्द को समझते हैं. उन्होंने समुदाय से शांति और एकजुटता बनाये रखने की अपील की. वहीं पुलिस कमिश्नर मार्टिन डोल ने भी लोगों से कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की है. पूरे इलाके में तनाव फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है. इस घटना ने ऑस्ट्रेलिया में आदिवासी समुदायों की सुरक्षा, सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है.  

surbhi मई 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Prashant Kishor addresses Bankipur voters and promises private sector jobs for 10,000 educated unemployed youths.
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MLA बनते ही प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, बांकीपुर के 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने का दावा

surbhi अगस्त 12, 2026 0