1678 – फ्रांसीसी सेना ने वाइप्रेस शहर पर कब्जा किया। 1707 - आलमांसा की लड़ाई; फ्रांस और स्पेनिस ने ब्रिटिश और पुर्तगाली को हराया। 1846 - मैक्सिकन-अमेरिकी युद्ध: टेक्सास की सीमाओं के सीमा विवादों से खुला संघर्ष शुरू हुआ। 1859 – स्वेज़ नहर की खुदाई आरंभ हुई। दस वर्ष के निर्माण के बाद 17 नवम्बर , 1869 ईसवी को स्वेज़ नहर का उद्घाटन हुआ। 1867 – जापान की राजधानी टोक्यो में विदेशी व्यापार की अनुमति दी गई। 1898 – यूएस ने स्पेन में युद्ध घोषित किया। 1891 - अमेरिकी राष्ट्रपति बेंजामिन हैरिसन सैन फ्रांसिस्को की यात्रा की। 1901 - न्यूयॉर्क ऑटोमोबाइल, लाइसेंस प्लेटों का पहला अमेरिकी राज्य बना। 1905 – दक्षिण अफ्रीका में श्वेतों को मताधिकार मिला। 1925 – पॉल वाेन हिंडनबर्ग जर्मनी के राष्ट्रपति चुने गये। 1936 - ओगडेन की लड़ाई में इटली की जीत हुई। 1945 – इटली को फ़ासीवादी सेना के वर्चस्व से स्वतंत्रता मिली। 1950 - कम्युनिस्ट जासूस जूडिथ कॉपल का परीक्षण न्यूयॉर्क शहर में शुरू हुआ। 1953 – कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के दो वैज्ञानिकों ने डीएनए की संरचना के बारे में व्याख्या दी। 1954 – बेल लैब्स ने न्यूयार्क में पहली बार सोलर बैटरी बनाने की घोषणा की। 1957 – सोडियम परमाणु रिएक्टर पहली बार प्रायोगिक तौर पर संचालित किया गया। 1970 - हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको , HUDCO) भारत सरकार स्वामित्व की स्थापना हुई। 1971 – वियतनाम में अमरीका की सैनिक कार्रवाई के विरोध में लगभग 2 लाख अमरिकीयों ने वाशिंगटन में प्रदर्शन किया। 1975 – तत्कालीन सोवियत रूस ने भूमिगत परमाणु परीक्षण किया। 1980 – अमरीकी सेना का तेहरान में अमरीकी दूतावास में बंघकों को छुड़ाने की कोशिश नाकामयाब हुई। 1981 – जापान के सुरूग में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र में मरम्मत कार्य के दौरान 100 से अधिक मजदूर परमाणु विकिरण का शिकार हो गये। 1982 – दिल्ली में टेलीविजन पर पहली बार रंगीन प्रसारण की शुरुआत हुई। 1983 – जर्मन पत्रिका स्टर्न ने हिटलर की विवादास्पद डायरी छापी लेकिन बाद में यह डायरी नकली पाई गई। 1999 - वेस्टइंडीज के आल राउंडर खिलाड़ी कार्ल हूपर द्वारा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्न्यास की घोषणा । 1999 - वाशिंगटन में तीन दिवसीय नाटो शिखर सम्मेलन समाप्त । 1999 - इस्रायल के राष्ट्रपति आईजर विजमैन चीन की सात दिवसीय राजकीय यात्रा पर बीजिंग पहुँचे। 2003 - फ़िलिस्तीन में नये मंत्रिमंडल के गठन पर सहमति होने के साथ ही अमेरिका समर्थित शांति योजना का रास्ता साफ। 2004 - जिम्बाव्वे में श्रीलंका के ख़िलाफ़ एक दिवसीय मैचों में न्यूनतम 35 रनों का रिकार्ड बनाया। 2004 - यूनानी साइप्रस ने एकीकरण योजना ठुकराई। 2004 - चीन में सार्स की बीमारी एक बार फिर से फैलने की पुष्टि हुई। 2005 – जापान के अमागासाकी में एक रेल दुर्घटना में 107 लोग मारे गये। 2007 - विरला इंस्टीट्यूट आफ़ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज का नया परिसर पनामा (बहरीन) में खुला। 2008- बालीवुड के प्रसिद्ध कलाकार व निर्देशक आमीर ख़ान को सिनेमा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान का विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया। 2010 – दक्षिण अमेरिकी राज्य मिसीसिपी में आए तूफान के कारण तीन बच्चों सहित दस लोगों की मौत हो गई। 2010 - भारतीय नौसेना ने पुराने हो चुके चेतक हेलीकाप्टरों की जगह नए लाइट यूटिलिटी हेलीकाप्टर (एलयूएच) ख़रीदने की प्रक्रिया शुरू की। 2013 – ब्रिटेन ने सोमालिया में अपना दूतावास 22 वर्षां के अंतराल के बाद पुन: खोला। 2013 – रूस के रामेन्स्की में एक अस्पताल में लगी भीषण आग में 38 लोग मारे गए। 2015 - नेपाल में भीषण भूकंप - राजधानी काठमांडू के नजदीक आए भूकंप से जानमाल का बड़ा नुकसान हुआ। 2018 - उन्नत भारत अभियान 2.0 की शुरुआत हुई। 2019 - बाल यौन उत्पीड़न से जुड़े वीडियो साझा करने पर आईटी मंत्रालय ने व्हाट्सएप को पत्र लिखा। 2019 - श्रीलंका आत्मघाती हमला : राष्ट्रपति सिरिसेना की मांग पर रक्षा सचिव ने इस्तीफा सौंपा । 2019 - चीन के बीजिंग में चल रहे आईआईएसएफ विश्व कप (राइफल/पिस्टल) में भारतीय स्टार शूटर सौरभ चौधरी और मनु भाकर ने गोल्ड मेडल जीता। 2020 - असम सरकार ने धनवंतरी योजना की शुरुआत की जिसमें बाजार में अनुपलब्ध दवाएं सीधे रोगियों को घर पर उपलब्ध होंगी। 2020 - उत्तर प्रदेश वर्चुअल कोर्ट के जरिए अदालतों में सुनवाई शुरू करने वाला बना। 2020 - पाकिस्तान की नौसेना ने उत्तरी अरब सागर में एंटी-शिप मिसाइलों का सफल परीक्षण किया। 2021 - भारत व फ्रांस की नौसेनाओं के द्विपक्षीय अभ्यास 'वरुण-2021' के 19वें संस्करण का अरब सागर में आयोजन शुरू हुआ ( 25 - 27 अप्रैल, 2021)। 2021 - इराक के बगदाद में इब्न अल-खतीब अस्पताल में (24 से 25 अप्रैल की रात को) आग लगने से लगभग 82 लोग मारे गए और 110 लोग घायल हुए। 2022 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मामलों पर भारत के प्रमुख सम्मेलन रायसीना डायलॉग के 7वें संस्करण का उद्घाटन किया। 2022 - डॉ. मनसुख मंडाविया ने फार्मा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र 2022 विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के 7वें संस्करण का उद्घाटन किया। 2023 - प्रधानमंत्री ने दमन में नमो पथ, देवका सीफ्रंट राष्ट्र को समर्पित किया , केरल की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई , देश के पहले वाटर मेट्रो सर्विस का उद्घाटन किया व पहले डिजिटल साइंस पार्क की नींव भी रखी। 2023 - भारत-मोजाम्बिक संयुक्त रक्षा कार्य समूह की चौथी बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई। 2023 - युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर इंफाल में संपन्न हुआ। 2024 - अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण लैंड स्लाइड, NH-313 का बड़ा हिस्सा ढहा। 2024 - वायु सेना का टोही विमान जैसलमेर में क्रैश हुआ। 2024 - पटना के एक होटल में आग लगने 6 की मौत व 20 घायल हुए। 25 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति 1900 - ग्लेडविन जेब - संयुक्त राष्ट्र के प्रथम महासचिव के चुनाव तक कार्यवाहक महासचिव थे। 1904 - चन्द्रबली पाण्डेय, साहित्यकार। 1919 - हेमवती नंदन बहुगुणा - उत्तर प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहने वाले जानेमाने राजनीतिज्ञ और राजनेता थे। 1969 - आई. एम. विजयन - भारत के प्रसिद्ध फ़ुटबॉल खिलाड़ी हैं। 1977 – दक्षिण अफ्रीका के टेनिस खिलाड़ी जैफ कोएत्ज़ी का जन्म हुआ। 25 अप्रॅल को हुए निधन 1960 – अफ़ग़ानिस्तान के नरेश अमानुल्लाह ख़ान का देहान्त हुआ। उन्होंने वर्ष 1923 में अफ़ग़ानिस्तान को पहला संविधान दिया। वर्ष 1926 में उन्होंने अमीर के बजाए शाह की उपाधि चुनी। 1968 - बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ - शास्त्रीय गायक। 1992 - उज्ज्वला मजूमदार - भारत की प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारियों में से एक थीं। 2000 - पण्डित मुखराम शर्मा - भारतीय हिन्दी फ़िल्मों के सुप्रसिद्ध कथा, पटकथा और कहानी लेखक। 2005 - टांगुटूरी सूर्यकुमारी - तेलुगू सिनेमा में एक भारतीय फिल्म गायिका, अभिनेत्री और नृत्यांगना थी। 2020 - बिहार और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल देवानंद कोंवर का निधन। 2021 - पद्म भूषण पंडित राजन मिश्रा ( शास्त्रीय गायक) का कोरोना के कारण 70 वर्ष की उम्र में निधन हुआ। 2021 - मोहन मल्लिकार्जुनगौड़ा शांतनगौदर - एक भारतीय विधिवेत्ता और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश थे । 2021 - सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के पूर्व प्रमुख अरुण चौधरी का कोविड-19 से निधन हुआ। 2021 - स्वास्थ्य मंत्रालय के मीडिया प्रमुख वरिष्ठ आईआईएस अधिकारी मणिकांत ठाकुर का कोरोना से निधन हुआ। 2023 - पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह (95) बादल का निधन हुआ। 2023 - रूसी एथलीट वेरा क्रेपकिना (90) का निधन हुआ। 2024 - इंग्लिश संगीतकार माइक पिंडर (82) का निधन हुआ। 25 अप्रॅल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव श्री भोजजी महाराज पुण्य तिथि यात्रा - अजनसुरा (वर्धा)। संत शिरोमणि सेन महाराज जयन्ती (725वीं , वैशाख कृष्ण द्वादशी)। आचार्य श्री बाहुबली सागर जी समाधि (जैन , वैशाख कृष्ण द्वादशी)। श्री मुनिसुव्रनाथ भगवान जन्मकल्याणक (जैन , वैशाख कृष्ण द्वादशी)। श्री हेमवती नंदन बहुगुणा जयन्ती। हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको) 55वाँ स्थापना दिवस। विश्व मलेरिया दिवस। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में एन्जैक दिवस (Anzac Day)। अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि दिवस (International Delegate's Day)। विश्व पेंगुइन दिवस (World Penguin Day)। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।