Apple iPhone 18 Pro को लेकर नई लीक सामने आई है, जिसमें इसके कैमरा सिस्टम में दो बड़े बदलावों की चर्चा है। अगर ये रिपोर्ट सही साबित होती है, तो iPhone 18 Pro मोबाइल फोटोग्राफी के अनुभव को एक नए स्तर पर ले जा सकता है।
Apple अपने Pro मॉडल में पहली बार Variable Aperture तकनीक दे सकता है। अभी तक iPhone में फिक्स्ड अपर्चर मिलता है, लेकिन इस नए फीचर से कैमरा रोशनी के हिसाब से अपने लेंस को एडजस्ट कर सकेगा।
कम रोशनी में ज्यादा लाइट सेंसर तक पहुंचेगी, जिससे तस्वीरें अधिक ब्राइट और डिटेल्ड आएंगी। वहीं, तेज रोशनी में ओवरएक्सपोजर से बचाव होगा। इसके अलावा, यूजर्स को बैकग्राउंड ब्लर पर भी बेहतर कंट्रोल मिलेगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple एक नया Three-Layer Stacked Image Sensor इस्तेमाल कर सकता है। माना जा रहा है कि यह सेंसर Samsung Electronics के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।
इससे शटर लैग कम होगा, लो-लाइट फोटोग्राफी बेहतर होगी और चलती वस्तुओं की तस्वीरें ज्यादा साफ आएंगी। साथ ही Dynamic Range में भी बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
नया सेंसर कम रोशनी में नॉइज को कम करेगा। यही नहीं, तेज गति से चलती चीजों की फोटो लेने पर भी इमेज ज्यादा शार्प और क्लियर नजर आएगी।
लीक्स के मुताबिक, Apple भविष्य के iPhone मॉडल्स के लिए 200MP पेरिस्कोप कैमरा, बड़ा मेन सेंसर और बेहतर अल्ट्रा-वाइड स्टेबलाइजेशन जैसी तकनीकों पर भी काम कर रहा है। हालांकि, ये फीचर्स आने में अभी कुछ साल लग सकते हैं।
यदि ये दोनों अपग्रेड iPhone 18 Pro में मिलते हैं, तो यह उन यूजर्स के लिए शानदार विकल्प होगा जो स्मार्टफोन कैमरे को प्राथमिकता देते हैं। Apple इस बार सिर्फ मेगापिक्सल बढ़ाने के बजाय असली फोटोग्राफी अनुभव को बेहतर बनाने पर फोकस कर रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली। iQOO भारत में अपनी Z11 सीरीज का विस्तार करने की तैयारी में है। Z11x 5G और Z11 Lite के बाद अब कंपनी जल्द ही iQOO Z11 को भारतीय बाजार में लॉन्च कर सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्मार्टफोन अगस्त 2026 में दस्तक दे सकता है और इसका भारतीय वर्जन चीन में लॉन्च किए गए मॉडल से कुछ मामलों में अलग होगा। भारतीय मॉडल में मिलेगा नया प्रोसेसर जानकारी के मुताबिक, चीन में लॉन्च iQOO Z11 में MediaTek Dimensity 8500 प्रोसेसर दिया गया है, जबकि भारत में आने वाले मॉडल में MediaTek Dimensity 7500 Turbo चिपसेट मिलने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो यह इस चिपसेट के साथ भारत में लॉन्च होने वाला पहला स्मार्टफोन होगा। 3D कर्व्ड डिस्प्ले की भी उम्मीद रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय वेरिएंट में 3D कर्व्ड डिस्प्ले दिया जा सकता है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इसके फीचर्स और लॉन्च डेट की पुष्टि नहीं की है। चाइनीज मॉडल में मिलते हैं दमदार फीचर्स चीन में लॉन्च iQOO Z11 में 6.83 इंच का AMOLED डिस्प्ले, 165Hz रिफ्रेश रेट और 300Hz टच सैंपलिंग रेट मिलता है। स्मार्टफोन में 16GB तक रैम, 512GB तक स्टोरेज, 9,020mAh की बड़ी बैटरी और 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट दिया गया है। कैमरे की बात करें तो इसमें OIS के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा और 16MP का फ्रंट कैमरा मिलता है। कीमत पर रहेगी नजर चीन में iQOO Z11 की शुरुआती कीमत CNY 2,299 (करीब ₹31,200) रखी गई है। अब भारतीय बाजार में यह स्मार्टफोन किस कीमत और किन बदलावों के साथ लॉन्च होगा, इस पर टेक यूजर्स की नजर बनी हुई है।
हैदराबाद, एजेंसियां। स्मार्टफोन यूजर्स के लिए बड़ी खबर है। गूगल ने पुष्टि कर दी है कि उसकी आने वाली Pixel 11 सीरीज पिछले मॉडल्स के मुकाबले महंगी होगी। कंपनी ने इसकी वजह मेमोरी चिप यानी RAM की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी को बताया है। मेमोरी चिप की बढ़ती लागत बनी कीमत बढ़ने की वजह गूगल डिवाइसेज एंड सर्विसेज के वाइस प्रेसिडेंट शकील बरकत ने बताया कि कंपनी अब तक सप्लाई चेन की चुनौतियों का असर ग्राहकों तक पहुंचने से रोक रही थी, लेकिन मौजूदा हालात में कीमत बढ़ाना जरूरी हो गया है। इसका असर Pixel फोन के साथ-साथ Pixel Watch समेत पूरी Pixel फैमिली पर पड़ सकता है। RAM की कीमत में छह गुना तक हुआ इजाफा कंपनी के अनुसार, RAM की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। 2025 में जहां एक गीगाबाइट RAM की कीमत करीब 2.80 डॉलर थी, वहीं 2026 में यह बढ़कर लगभग 12 डॉलर तक पहुंच गई है। इससे स्मार्टफोन बनाने की लागत काफी बढ़ गई है। AI डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से बढ़ा मेमोरी संकट मेमोरी चिप की कीमतों में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण AI डेटा सेंटर की बढ़ती मांग बताई जा रही है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की ज्यादा जरूरत के चलते चिप निर्माता कंपनियां अपनी क्षमता का बड़ा हिस्सा AI सेक्टर के लिए इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे स्मार्टफोन मेमोरी की सप्लाई प्रभावित हुई है। Pixel 11 की कीमत में हो सकती है 100 डॉलर तक बढ़ोतरी गूगल 12 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में होने वाले Made by Google इवेंट में Pixel 11 सीरीज लॉन्च करेगा। लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक, Pixel 11 की शुरुआती कीमत 899 डॉलर हो सकती है, जो पिछले Pixel 10 के 799 डॉलर से करीब 100 डॉलर ज्यादा है। 128GB मॉडल हटाकर 256GB को बनाया जा सकता है बेस वेरिएंट रिपोर्ट्स के अनुसार, गूगल Pixel 11 सीरीज में 128GB स्टोरेज विकल्प को हटाकर 256GB को बेस मॉडल बना सकता है। वहीं Pixel 11 Pro और Pro XL मॉडल्स की कीमतों में भी करीब 100 डॉलर की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। सैमसंग और एपल भी बढ़ा चुके हैं कीमतें RAM और स्टोरेज संकट का असर सिर्फ गूगल तक सीमित नहीं है। सैमसंग, एपल, वीवो और ओप्पो जैसी कंपनियां भी बढ़ती लागत के कारण अपने स्मार्टफोन की कीमतों में बदलाव कर रही हैं। सैमसंग ने अपनी नई Galaxy सीरीज में कुछ मॉडल्स की कीमत बढ़ाई है। क्वालकॉम ने भी चिप कीमत बढ़ाने का दिया संकेत स्मार्टफोन इंडस्ट्री को चिप सप्लाई करने वाली कंपनी क्वालकॉम ने भी ग्राहकों को कीमतों में बढ़ोतरी की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार, 1 सितंबर के बाद भेजी जाने वाली चिप शिपमेंट्स पर दो अंकों की प्रतिशत वृद्धि हो सकती है। गूगल कम RAM में बेहतर परफॉर्मेंस पर कर रहा काम गूगल का कहना है कि वह एंड्रॉयड और ऐप इकोसिस्टम में मेमोरी की जरूरत कम करने पर काम कर रहा है। कंपनी Tensor चिप, एंड्रॉयड सॉफ्टवेयर और ऑन-डिवाइस AI मॉडल्स के जरिए कम RAM में भी बेहतर परफॉर्मेंस देने का दावा कर रही है। स्मार्टफोन बाजार पर पड़ेगा सीधा असर RAM की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आने वाले समय में स्मार्टफोन बाजार पर दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, फ्लैगशिप फोन के साथ-साथ अन्य प्रीमियम डिवाइस भी महंगे हो सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय स्मार्टफोन कंपनी Lava ने अपना नया स्मार्टफोन Lava Virat V1 5G भारत में लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे बजट सेगमेंट के यूजर्स को ध्यान में रखते हुए पेश किया है। फोन में बड़ी बैटरी, 5G कनेक्टिविटी और क्लीन एंड्रॉयड अनुभव जैसे फीचर्स दिए गए हैं। Lava Virat V1 5G की कीमत और बिक्री Lava Virat V1 5G को भारत में ₹11,999 की शुरुआती कीमत के साथ लॉन्च किया गया है। इसके साथ ही कंपनी ने इसका 4G मॉडल Lava Virat V1 भी पेश किया है, जिसकी कीमत करीब ₹8,999 रखी गई है। दोनों स्मार्टफोन की बिक्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और Lava की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से शुरू होगी। 6000mAh बैटरी और 5G कनेक्टिविटी मुख्य आकर्षण Lava Virat V1 5G की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6000mAh की बड़ी बैटरी है। कंपनी का दावा है कि यह फोन लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए बेहतर बैकअप देगा। इसमें 5G नेटवर्क सपोर्ट दिया गया है, जिससे यूजर्स तेज इंटरनेट स्पीड का अनुभव कर सकेंगे। फोन में वर्चुअल रैम एक्सपेंशन, IP64 रेटिंग और स्टॉक एंड्रॉयड अनुभव जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं। कंपनी ने इसमें अनावश्यक ऐप्स (Bloatware) को कम रखने पर जोर दिया है। कैमरा और डिस्प्ले पर भी कंपनी का फोकस Lava Virat V1 5G में 13 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है। कंपनी ने इसे युवाओं और बजट स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है। बड़े डिस्प्ले और बेहतर बैटरी बैकअप के साथ यह फोन रोजमर्रा के उपयोग, सोशल मीडिया और मनोरंजन के लिए तैयार किया गया है। भारतीय स्मार्टफोन बाजार में Lava की वापसी की कोशिश Lava लगातार बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कंपनी का लक्ष्य भारतीय ग्राहकों को किफायती कीमत में बेहतर फीचर्स वाले फोन उपलब्ध कराना है। Virat सीरीज इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। बजट 5G फोन बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा भारत में ₹10,000 से ₹15,000 के बीच 5G स्मार्टफोन की मांग तेजी से बढ़ रही है। Lava Virat V1 5G की एंट्री के बाद इस सेगमेंट में पहले से मौजूद अन्य कंपनियों के साथ मुकाबला और बढ़ने की उम्मीद है।