Banking News

Reserve Bank of India headquarters image representing new banking capital and quarterly profit rules.
Reserve Bank of India का बड़ा फैसला, अब बैंक आसानी से तिमाही मुनाफे को बना सकेंगे पूंजी

Reserve Bank of India ने बैंकों को बड़ी राहत देते हुए पूंजी गणना से जुड़े नियमों को आसान बना दिया है। अब बैंक बिना किसी जटिल शर्त के अपनी तिमाही कमाई को मुख्य पूंजी यानी CET1 (Common Equity Tier 1) में शामिल कर सकेंगे। आरबीआई के इस फैसले से बैंकों के लिए अपनी पूंजीगत स्थिति मजबूत दिखाना और कैपिटल मैनेजमेंट करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा। क्या था पुराना नियम? अब तक बैंकों को अपनी तिमाही कमाई को CET1 पूंजी में शामिल करने के लिए एक अहम शर्त पूरी करनी होती थी। नियम के अनुसार, एनपीए (Non-Performing Assets) यानी फंसे हुए कर्ज के लिए की गई प्रोविजनिंग में पिछले चार तिमाहियों के औसत के मुकाबले 25 प्रतिशत से ज्यादा का बदलाव नहीं होना चाहिए था। अगर यह सीमा पार हो जाती थी, तो बैंक अपनी तिमाही कमाई को पूंजी में शामिल नहीं कर पाते थे। अब Reserve Bank of India ने इस 25% वाली शर्त को पूरी तरह खत्म कर दिया है। बैंकों को क्या होगा फायदा? इस बदलाव से बैंकों के लिए अपना Capital to Risk Weighted Assets Ratio (CRAR) बनाए रखना आसान होगा। CRAR यह बताता है कि किसी बैंक के पास संभावित नुकसान झेलने के लिए कितनी मजबूत पूंजी मौजूद है। अब बैंक हर तिमाही के मुनाफे को बिना किसी NPA-लिंक्ड बाधा के अपनी कोर कैपिटल में जोड़ सकेंगे। इससे उनकी बैलेंस शीट मजबूत दिखेगी और फंड मैनेजमेंट में भी आसानी होगी। किन बैंकों पर लागू होंगे नए नियम? Reserve Bank of India ने इस संबंध में तीन अलग-अलग निर्देश जारी किए हैं। ये नए नियम कमर्शियल बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और पेमेंट बैंकों पर लागू होंगे। आरबीआई ने बताया कि यह फैसला 8 अप्रैल 2026 को जारी ड्राफ्ट प्रस्तावों और उस पर मिले सुझावों के बाद लिया गया है। आम लोगों और बैंकिंग सेक्टर पर क्या पड़ेगा असर? विशेषज्ञों के मुताबिक इस कदम से बैंकिंग सिस्टम ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगा। जब बैंकों के लिए पूंजी की गणना आसान होती है, तो उन्हें लोन देने, बिजनेस विस्तार और जोखिम प्रबंधन में बेहतर स्पष्टता मिलती है। इससे बैंकिंग सेक्टर की स्थिरता मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।  

surbhi मई 9, 2026 0
RBI cancels Paytm Payments Bank license, impacting banking services and customer accounts
बड़ा फैसला: Reserve Bank of India ने रद्द किया Paytm Payments Bank Limited का लाइसेंस, ग्राहकों के लिए क्या मायने?

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए Reserve Bank of India (RBI) ने Paytm Payments Bank Limited (PPBL) का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह फैसला 24 अप्रैल 2026 की शाम से प्रभावी हो गया, जिसके बाद बैंक की सभी बैंकिंग गतिविधियों पर पूर्ण रोक लग गई है। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही नियामकीय जांच और बार-बार चेतावनियों के बावजूद सुधार न होने के चलते की गई है। RBI ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम? RBI के अनुसार, Paytm Payments Bank का संचालन जमाकर्ताओं के हित में नहीं पाया गया। बैंक निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करने में विफल रहा मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे बार-बार चेतावनी के बावजूद सुधार नहीं हुआ इसी आधार पर बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 22(4) के तहत लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया गया। अब बैंक का क्या होगा? लाइसेंस रद्द होने के बाद: बैंक किसी भी प्रकार की नई बैंकिंग सेवा नहीं दे सकेगा नए ग्राहक जोड़ना और ट्रांजैक्शन पूरी तरह बंद RBI अब बैंक को बंद (Winding Up) करने की प्रक्रिया शुरू करेगा इसके लिए हाईकोर्ट में आवेदन किया जाएगा सरल शब्दों में, बैंक अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। क्या ग्राहकों का पैसा सुरक्षित है? RBI ने ग्राहकों को राहत देते हुए कहा है कि: बैंक के पास पर्याप्त लिक्विडिटी मौजूद है सभी जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस किया जाएगा रिफंड प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी हालांकि, ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक अपडेट्स पर नजर बनाए रखें और निर्देशों का पालन करें। क्या यह फैसला अचानक लिया गया? यह कार्रवाई अचानक नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम है: मार्च 2022: नए ग्राहक जोड़ने पर रोक जनवरी–फरवरी 2024: डिपॉजिट, वॉलेट टॉप-अप और क्रेडिट ट्रांजैक्शन पर प्रतिबंध लगातार चेतावनियों के बावजूद सुधार न होने पर अंतिम कार्रवाई ग्राहकों के लिए क्या करें? अपने खाते और बैलेंस की जानकारी नियमित रूप से जांचें RBI और बैंक की आधिकारिक घोषणाओं को फॉलो करें किसी भी अफवाह से बचें रिफंड प्रक्रिया शुरू होते ही आवश्यक कार्रवाई करें

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
RBI ordered by Bombay High Court to exchange old Rs 500 demonetised notes
नोटबंदी के 10 साल बाद RBI को पुराने ₹500 के नोट बदलने का आदेश, जानिए क्या है पूरा मामला

नोटबंदी को लगभग दस साल बीत चुके हैं, लेकिन उससे जुड़े कुछ मामले आज भी अदालतों में पहुंच रहे हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प मामला महाराष्ट्र से सामने आया है, जहां Bombay High Court की नागपुर बेंच ने Reserve Bank of India को 2016 में जब्त किए गए पुराने ₹500 के नोट नई करेंसी में बदलने का आदेश दिया है। यह फैसला इसलिए खास है, क्योंकि नोटबंदी के बाद पुराने नोट बदलने की समयसीमा कब की समाप्त हो चुकी है। क्या है पूरा मामला? यह मामला महाराष्ट्र के गिरीश मलानी से जुड़ा है। 1 दिसंबर 2016 को, जब देश में नोटबंदी लागू थी, मलानी माहूर जा रहे थे। उस दौरान स्थानीय निकाय चुनावों के चलते पुलिस ने जांच के दौरान उनके पास से ₹500 के 400 पुराने नोट, यानी कुल ₹2 लाख, जब्त कर लिए थे। महत्वपूर्ण बात यह है कि उस समय पुराने नोट बदलने की आधिकारिक समयसीमा अभी समाप्त नहीं हुई थी। यानी अगर रकम जब्त न होती, तो मलानी नियमानुसार बैंक में जमा या बदल सकते थे। आयकर जांच में रकम निकली वैध पुलिस द्वारा जब्त की गई राशि की जांच बाद में आयकर विभाग ने की। जांच में पाया गया कि यह पैसा पूरी तरह वैध था और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध लेनदेन का कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि, आयकर विभाग की जांच पूरी होने तक पुराने नोट जमा या बदलने की सरकारी समयसीमा समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद मलानी ने RBI से पुराने नोट बदलने का अनुरोध किया, लेकिन केंद्रीय बैंक ने नियमों का हवाला देते हुए उनकी मांग ठुकरा दी। हाई कोर्ट ने क्या कहा? मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ कहा कि जब नोट बदलने की समयसीमा चल रही थी, उस दौरान रकम पुलिस की हिरासत में थी। ऐसे में याचिकाकर्ता को देरी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि जब आयकर विभाग ने रकम को वैध घोषित कर दिया है, तो केवल तकनीकी कारणों से किसी नागरिक को उसकी वैध कमाई से वंचित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने RBI को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नई मुद्रा जारी करने का आदेश दिया। क्या यह फैसला सभी पर लागू होगा? यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। इसका सीधा जवाब है–नहीं। यह आदेश एक विशेष मामले में, खास परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है। अगर किसी व्यक्ति के पुराने नोट सरकारी एजेंसी की कार्रवाई, न्यायिक प्रक्रिया या अन्य वैध कारणों से समयसीमा के भीतर जमा नहीं हो सके थे, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब आम नागरिक पुराने नोट लेकर RBI पहुंच सकते हैं। क्यों अहम है यह फैसला? यह फैसला बताता है कि अदालतें तकनीकी नियमों से ऊपर न्याय के मूल सिद्धांत को प्राथमिकता देती हैं। यदि किसी व्यक्ति की गलती न हो और उसकी वैध संपत्ति प्रशासनिक प्रक्रिया में फंस जाए, तो न्यायपालिका राहत दे सकती है। नोटबंदी के वर्षों बाद आया यह फैसला उन मामलों के लिए मिसाल बन सकता है, जहां सरकारी कार्रवाई के कारण लोग अपने वैध धन से वंचित रह गए थे।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Gold and silver bars with banking documents representing new DGFT import rules in India
Gold-Silver Import Rules 2026: विदेशी बैंकों से लेकर SBI तक–अब किनके पास है सोना-चांदी मंगाने का अधिकार

  नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोने और चांदी के इंपोर्ट को अधिक पारदर्शी और संगठित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने नई अधिसूचना जारी कर उन बैंकों की सूची में बदलाव किया है, जिन्हें विदेशों से कीमती धातुएं मंगाने की अनुमति होगी। यह फैसला Foreign Trade Policy 2023 के तहत लिया गया है। कब से लागू होंगे नए नियम? नई संशोधित सूची 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रहेगी। यानी अगले तीन वर्षों के लिए सरकार ने सोना-चांदी के इंपोर्ट का एक स्पष्ट और नियंत्रित ढांचा तय कर दिया है। 15 बैंकों को ‘डबल’ अधिकार: सोना और चांदी दोनों का इंपोर्ट Reserve Bank of India (RBI) ने कुल 15 बैंकों को सोना और चांदी दोनों के इंपोर्ट की अनुमति दी है। इनमें शामिल हैं: प्राइवेट सेक्टर बैंक: HDFC Bank ICICI Bank Axis Bank Kotak Mahindra Bank IndusInd Bank Federal Bank Yes Bank RBL Bank Karur Vysya Bank सरकारी बैंक: State Bank of India Punjab National Bank Bank of India Indian Overseas Bank विदेशी बैंक: Deutsche Bank Industrial and Commercial Bank of China सिर्फ सोना इंपोर्ट करने का अधिकार किनके पास? सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी बैंक दोनों धातुओं का इंपोर्ट नहीं कर सकते। इन बैंकों को केवल सोना (Gold) इंपोर्ट करने की अनुमति दी गई है: Union Bank of India Sberbank आम लोगों पर क्या होगा असर? सरकार के इस फैसले का सीधा असर बाजार की पारदर्शिता और कीमतों की स्थिरता पर पड़ेगा। जब सोना-चांदी का इंपोर्ट केवल अधिकृत बैंकों के जरिए होगा, तो: अवैध इंपोर्ट पर लगाम लगेगी कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव कम होगा शुद्धता और सप्लाई चेन बेहतर होगी Directorate General of Foreign Trade ने इस बदलाव को ‘हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर 2023’ के तहत लागू किया है, जिससे पूरे सिस्टम को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाया जा सके।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Kaizad Bharucha, senior HDFC Bank executive, during corporate meeting amid leadership transition discussion
HDFC बैंक का नया संकटमोचक: कौन हैं कैजाद भरूचा जिन पर बैंक जता रहा सबसे ज्यादा भरोसा?

देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक HDFC Bank इन दिनों नेतृत्व से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर चर्चा में है। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस बीच, बैंक ने केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, इन सभी घटनाओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा को लेकर हो रही है, जिन्हें अब संगठन में और बड़ी भूमिका मिलने के संकेत दिए गए हैं। तीन दशक का अनुभव, गहरी पकड़ कैजाद भरूचा का HDFC बैंक के साथ जुड़ाव करीब 30 साल पुराना है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1986 में SBI कमर्शियल एंड इंटरनेशनल बैंक से की थी और 1995 में HDFC बैंक से जुड़े। तब से लेकर आज तक उन्होंने बैंक के भीतर कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। फिलहाल भरूचा बैंक के एसेट बिजनेस को संभाल रहे हैं, जिसमें लोन और अन्य क्रेडिट गतिविधियां शामिल हैं। बोर्ड और मैनेजमेंट दोनों स्तरों पर उनकी मजबूत पकड़ और अनुभव उन्हें बैंक के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में शामिल करता है। RBI की मंजूरी, तीन साल का कार्यकाल जनवरी 2026 में Reserve Bank of India (RBI) ने कैजाद भरूचा की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी थी। अप्रैल 2026 से वे अगले तीन वर्षों तक पूर्णकालिक निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। यह कदम बैंक के नेतृत्व में स्थिरता लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। लगातार बढ़ता कद पिछले एक दशक में कैजाद भरूचा का कद लगातार बढ़ा है। 2014 में उन्हें एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया   होलसेल और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग की जिम्मेदारी दी गई   2023 में उन्हें डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर (DMD) बनाया गया   यह पद पिछले पांच वर्षों से खाली था, जिसे भरूचा को सौंपना बैंक के भीतर उनके बढ़ते प्रभाव का संकेत माना गया। DMD बनने के बाद उन्हें रिटेल बैंकिंग की जिम्मेदारी भी दी गई, जिससे उनका दायरा और व्यापक हो गया। संकट के दौर में भरोसे का चेहरा बैंक के शीर्ष स्तर पर हुए बदलावों के बीच, केकी मिस्त्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा की जा रही है और कैजाद भरूचा को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि वे इस चुनौतीपूर्ण दौर में बैंक के लिए “संकटमोचक” की भूमिका निभा सकते हैं।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

RIMS hostel death
झारखंड

रिम्स हॉस्टल में एमबीबीएस छात्र की मौत, फंदे से लटका शव बरामद

Anjali Kumari मई 16, 2026 0