Bankipur

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधायक के रूप में शपथ ग्रहण की
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधायक के रूप में ली शपथ, बोले- बनाएंगे नया बांकीपुर

पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने सोमवार को विधायक पद की शपथ ली। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के सामने उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। इस दौरान जन सुराज के नेता और कार्यकर्ता भी उनके साथ विधानसभा पहुंचे।   शपथ के बाद बोले- बनाना है नया बांकीपुर     विधायक के रूप में शपथ लेने के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि उनका लक्ष्य एक नया बांकीपुर बनाना है, जहां लोगों को बेहतर शिक्षा, अच्छी सड़कें और रोजगार के अवसर मिल सकें।   उन्होंने कहा कि जिस सदन के सदस्य श्रीबाबू, अनुग्रह नारायण सिंह, कर्पूरी ठाकुर, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, रामविलास पासवान और सुशील कुमार मोदी जैसे नेता रहे हैं, उस सदन का सदस्य बनकर शपथ लेना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने इसे अपने लिए बड़ी जिम्मेदारी बताया।   10 हजार युवाओं को रोजगार दिलाने का किया दावा     प्रशांत किशोर ने कुछ दिन पहले बांकीपुर के 10 हजार युवाओं को रोजगार दिलाने की घोषणा की थी। उन्होंने पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं से अपना बायोडाटा और सीवी कार्यालय में जमा करने को कहा था।   उन्होंने दावा किया था कि अगले एक से दो वर्षों में कम से कम 10 हजार परिवारों के बच्चों को नौकरी दिलाने की व्यवस्था करने की कोशिश की जाएगी। उपचुनाव में जीत के बाद से वह लगातार बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में लोगों के बीच जाकर सभाएं और संवाद कर रहे हैं।   भाजपा प्रत्याशी को 19 हजार से अधिक वोटों से हराया     बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 19 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया था। मतगणना में प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा के नीरज कुमार को 44,827 और राजद की रेखा कुमारी को 14,273 वोट प्राप्त हुए।   इस जीत के साथ प्रशांत किशोर ने अपनी पहली चुनावी परीक्षा में बड़ी सफलता हासिल की और अब वह विधानसभा में बांकीपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
Prashant Kishor meets Bankipur youth and asks them to submit CVs while promising employment opportunities.
बांकीपुर के युवाओं से प्रशांत किशोर ने मांगे CV, 10 हजार रोजगार का वादा; बोले- “जनता ने अपना काम कर दिया, अब मेरी बारी”

पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार क्षेत्र में पहुंचे। अपने आभार कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान के दौरान उन्होंने युवाओं, शिक्षा, राशन और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर कई बड़े वादे किए। सबसे ज्यादा जोर उन्होंने रोजगार पर दिया। प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर की जनता ने चुनाव में अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है और अब उनकी बारी है कि वे क्षेत्र के लोगों के लिए काम करें। उन्होंने अगले एक से दो वर्षों में क्षेत्र के 10 हजार शिक्षित युवाओं को रोजगार दिलाने का प्रयास करने का दावा किया। युवाओं से कार्यालय में CV जमा करने की अपील प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के युवाओं और उनके अभिभावकों से अपने बायोडाटा और CV जनसुराज कार्यालय में जमा करने को कहा। उन्होंने बताया कि पार्टी के संपर्क में मौजूद निजी एजेंसियों और संस्थानों के माध्यम से युवाओं को रोजगार दिलाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि रोजगार का उद्देश्य केवल नौकरी दिलाना नहीं, बल्कि युवाओं को अपने रोजमर्रा के खर्च के साथ परिवार की जिम्मेदारियां उठाने में सक्षम बनाना है। प्रशांत किशोर ने लोगों से लंबे समय के लिए भरोसा रखने की अपील करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में उनके और उनके बच्चों के जीवन में बदलाव दिखाई देने की कोशिश की जाएगी। शिक्षा व्यवस्था सुधारने का भी दावा बांकीपुर दौरे के दौरान शिक्षा को लेकर भी प्रशांत किशोर ने अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं। उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहतर करने और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने की बात कही। उनका कहना था कि क्षेत्र के विकास के लिए रोजगार के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है। राशन कार्ड और पेंशन की समस्याओं पर भी फोकस प्रशांत किशोर ने राशन कार्ड और पेंशन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, इस दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने इसके लिए करीब तीन महीने का समय मांगा और दावा किया कि राशन कार्ड बनवाने जैसी सेवाओं में रिश्वत की शिकायतों को खत्म करने की कोशिश होगी। बोले- “जनता ने अपना काम कर दिया, अब मेरी बारी” कार्यक्रम में प्रशांत किशोर ने अपनी जीत को जनता के भरोसे से जोड़ते हुए कहा कि मतदाताओं ने अपना काम कर दिया है। अब उनकी जिम्मेदारी है कि चुनाव के दौरान किए गए वादों को जमीन पर उतारने का प्रयास करें। उन्होंने बांकीपुर के अलग-अलग वार्डों में लगातार जनसंपर्क अभियान चलाने की बात भी कही। जनसुराज की ओर से बांकीपुर को रोजगार, शिक्षा और विकास के क्षेत्र में एक मॉडल विधानसभा क्षेत्र बनाने का दावा किया जा रहा है। बीजेपी के पुराने गढ़ में जनसुराज की बड़ी जीत अगस्त 2026 में हुए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को करीब 19,324 वोटों के अंतर से हराया था। इस जीत के साथ जनसुराज पार्टी को पहली बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व मिला। बांकीपुर को लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में यहां जनसुराज की जीत को बिहार की राजनीति में अहम बदलाव के संकेत के तौर पर देखा गया। अब चुनावी जीत के बाद प्रशांत किशोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने रोजगार और विकास से जुड़े वादों को धरातल पर उतारने की होगी।  

surbhi अगस्त 14, 2026 0
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में नौकरी पेंशन शिक्षा और राशन को लेकर ऐलान किए
Prashant Kishor: बांकीपुर जीत के बाद 4 बड़े ऐलान, नौकरी-पेंशन से लेकर शिक्षा तक पर फोकस

पटना। बांकीपुर विधानसभा सीट जीतने के बाद प्रशांत किशोर अब अपने क्षेत्र में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में सक्रिय नजर आ रहे हैं। लोगों से मुलाकात और मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने युवाओं, शिक्षा, राशन व्यवस्था और बुजुर्गों की पेंशन को लेकर चार बड़े ऐलान किए हैं। प्रशांत किशोर ने इन योजनाओं के लिए समयसीमा भी बताई है।   10 हजार युवाओं को नौकरी दिलाने का लक्ष्य     प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के 10 हजार बेरोजगार युवाओं को प्राइवेट नौकरी दिलाने की कोशिश करने की बात कही है। उन्होंने युवाओं से अपना अपडेटेड CV और बायोडेटा अपने कार्यालय में जमा करने को कहा है।   उनका लक्ष्य अगले एक से दो वर्षों में कम से कम 10 हजार युवाओं को रोजगार से जोड़ना है। इसके लिए देशभर में अपने संपर्कों के जरिए युवाओं को कंपनियों से जोड़ने की बात कही गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत में कुछ युवाओं को नौकरी के लिए बिहार से बाहर जाना पड़ सकता है।   मार्च 2027 तक स्कूल फीस कम कराने की कोशिश     शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा कि बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है। उन्होंने बांकीपुर में बड़ी संख्या में परिवारों के बच्चों के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने का जिक्र करते हुए फीस का मुद्दा उठाया।   उन्होंने कहा कि मार्च 2027 तक प्राइवेट स्कूल संचालकों से बातचीत कर ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश की जाएगी, जिससे स्कूल फीस का बोझ कम हो सके और अधिक परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकें।   तीन महीने में राशन कार्ड व्यवस्था सुधारने का दावा     प्रशांत किशोर ने राशन कार्ड और मुफ्त अनाज वितरण को लेकर भी बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें तीन महीने का समय दिया जाए तो राशन कार्ड बनवाने के नाम पर रिश्वतखोरी को रोकने की कोशिश की जाएगी।   उन्होंने मुफ्त अनाज वितरण में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि गरीबों को उनके हिस्से का पूरा 5 किलो अनाज मिलना चाहिए। उनका दावा है कि मौजूदा व्यवस्था में लाभार्थियों तक पूरा अनाज नहीं पहुंच रहा है।   बुजुर्गों को 1100 रुपये पेंशन दिलाने का दावा     बुजुर्गों की पेंशन को लेकर भी प्रशांत किशोर ने घोषणा की। उन्होंने कहा कि जिन बुजुर्गों को 1100 रुपये की पेंशन नहीं मिल रही है, वे उनके कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें पेंशन दिलाने की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा।     बीजेपी ने साधा निशाना     प्रशांत किशोर के इन ऐलानों के बाद बिहार की राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई है। खासकर रोजगार के मुद्दे पर बीजेपी ने उन्हें निशाने पर लिया है। बीजेपी की ओर से सवाल उठाया गया कि बिहार से पलायन रोकने की बात करने वाले प्रशांत किशोर युवाओं को नौकरी के लिए राज्य से बाहर जाने की बात क्यों कर रहे हैं।   वहीं, प्रशांत किशोर ने भी इन आरोपों पर पलटवार किया है। अब उनके सामने बांकीपुर की जनता से किए गए इन वादों को जमीन पर उतारने की चुनौती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
Prashant Kishor addresses Bankipur voters and promises private sector jobs for 10,000 educated unemployed youths.
MLA बनते ही प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, बांकीपुर के 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने का दावा

बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के युवाओं को लेकर बड़ा रोजगार वादा किया है। जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि वह बांकीपुर से विधायक बनते हैं, तो क्षेत्र के कम से कम 10 हजार पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने की व्यवस्था करने की कोशिश करेंगे। प्रशांत किशोर ने कहा कि उनका फोकस सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर भी रहेगा। उन्होंने बांकीपुर के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को निजी कंपनियों में रोजगार से जोड़ने की बात कही। 10 हजार युवाओं को रोजगार दिलाने का लक्ष्य जनता को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के कम से कम 10 हजार युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने की व्यवस्था करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए रोजगार उपलब्ध कराने वाली निजी कंपनियों और युवाओं के बीच संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जाएगी। उनके इस ऐलान के बाद बांकीपुर के युवाओं के बीच रोजगार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। खासकर पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के लिए निजी क्षेत्र में नौकरी उपलब्ध कराने का दावा कितना प्रभावी होगा, यह आगे देखने वाली बात होगी। रोजगार के मुद्दे पर फोकस बिहार में बेरोजगारी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लंबे समय से राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर का यह ऐलान बांकीपुर के मतदाताओं के बीच रोजगार को केंद्र में लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि 10 हजार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए किस तरह की योजना बनाई जाएगी, किन कंपनियों से संपर्क किया जाएगा और नौकरी के लिए किन योग्यताओं को आधार बनाया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। वीडियो में क्या बोले प्रशांत किशोर? जनता को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था करने की बात कही। उन्होंने कम से कम 10 हजार युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने की कोशिश का भरोसा जताया। अब इस घोषणा के बाद बांकीपुर के युवाओं की प्रतिक्रिया और राजनीतिक स्तर पर इसकी चर्चा पर नजर रहेगी। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि चुनावी वादे के रूप में किए गए इस ऐलान को आगे चलकर किस तरह की ठोस योजना में बदला जाता है।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
Bankipur Vidhan Sabha
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होगा उपचुनाव, चुनाव आयोग ने जारी किया कार्यक्रम

पटना, एजेंसियां। चुनाव आयोग ने बिहार की हाई-प्रोफाइल सीट मानी जाने  वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। आयोग के अनुसार, इस सीट पर 30 जुलाई 2026 को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। बांकीपुर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की सीट मानी जाती है और इस उपचुनाव पर पूरे राज्य की राजनीतिक नजरें टिकी हैं।   नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट   बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद विधायक पद से इस्तीफा देने के कारण रिक्त हुई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव का कार्यक्रम जारी किया है।   जानिए पूरा चुनाव कार्यक्रम   चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, 6 जुलाई को अधिसूचना जारी होगी। 13 जुलाई नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि होगी, 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और 16 जुलाई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 30 जुलाई को होगा और 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।   प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस   उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जन सुराज पार्टी ने घोषणा की है कि वह 5 जुलाई को अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान करेगी। हालांकि पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर खुद चुनाव लड़ेंगे या नहीं, इस पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है।   राजनीतिक दलों ने शुरू की तैयारियां   उपचुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा, राजद, कांग्रेस और जन सुराज समेत सभी प्रमुख दलों ने चुनावी रणनीति तेज कर दी है। बांकीपुर सीट को बिहार की सबसे चर्चित सीटों में से एक माना जा रहा है और इस चुनाव के नतीजों पर पूरे राज्य की राजनीतिक निगाहें टिकी रहेंगी।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Prashant Kishore
बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं प्रशांत किशोर, जन सुराज में जल्द होगा अंतिम फैसला

पटना, एजेंसियां। जन सुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर के आगामी बिहार उपचुनाव में पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार इस पर अंतिम निर्णय जल्द लिया जाएगा, और उम्मीदवार को लेकर तस्वीर 4–5 जुलाई तक साफ हो सकती है।   जन सुराज की बैठक के बाद होगा अंतिम निर्णय   सूत्रों के मुताबिक, जन सुराज की एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी पर चर्चा होगी, जिसके बाद औपचारिक घोषणा की जाएगी। पार्टी के अंदर इस बात को लेकर सहमति बन रही है कि उन्हें सीधे चुनावी मैदान में उतारा जाए।   बांकीपुर सीट पर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी   बांकीपुर विधानसभा सीट पहले से ही राजनीतिक रूप से अहम मानी जाती है, और यहां से प्रशांत किशोर के संभावित चुनाव लड़ने की खबर के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह सीट लंबे समय से बीजेपी का गढ़ रही है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।   पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी   यदि यह फैसला होता है, तो प्रशांत किशोर पहली बार सीधे चुनावी राजनीति में उतरेंगे। अब तक वे रणनीतिकार की भूमिका में रहे हैं, लेकिन इस कदम से बिहार की राजनीति में नया समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana अगस्त 11, 2026 0