पटना, एजेंसियां। बिहार के नालंदा में शीतला माता मंदिर भगदड़ मचने से 8 लोगों की मौत हो गईस जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुख जताया है। साथ ही मृतकों के लिए मुआवजा देने का ऐलान किया है। नीतीश सरकार ने भगदड़ में मरने वाले श्रद्धालुओं के आश्रितों को 6-6 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है वहीं घायलों को मुफ्त इलाज देने की बात कही है। जानकारी के मुताबिक, मृतकों में 7 महिलाएं हैं। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रही है। शीतला अष्टमी पूजा के दौरान हादसा दरअसल यह हादसा मंदिर में शीतला अष्टमी पूजा के दौरान हुई। शीतला अष्टमी पूजा को लेकर मंदिर परिसर में भारी भीड़ जमा थी। इसी दौरान अचानक धक्का-मुक्की का सिलसिला शुरू हुआ और लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए। भीड़ में दबने के कारण आठ लोगों की मौत हो गई। शीतलाष्टमी मेला लगता है यहा दरअसल इस मंदिर की मान्यता है कि इस पूजा के उपलक्ष्य में शीतलाष्टमी मेला लगता है। मेला के दिन मघड़ा और इसके आसपास के दर्जनों गांवों में चूल्हा नहीं जलता है। लोग एक दिन पहले ही खाना बनाकर दूसरे दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। शीतला मंदिर के पुजारी ने बताया कि चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन यहां देश के कोने-कोने से लोग पूजा अर्चना करने आते हैं। व्रत की विशेषता यह कि इसमें शीतला देवी को भोग लगाने वाला पदार्थ एक दिन पहले ही बना लिया जाता है। बासी भोग लगाने की परंपरा है। चैत्र अष्टी के मौके पर मां शीतला की पूजा-अर्चना के लिए सूबे के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, बंगाल और उत्तर प्रदेश से भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं आते हैं। मघड़ा गांव में काफी पुराना मिट्ठी कुआं है। इसी कुएं के पानी से सप्तमी की शाम में बसिऔरा के लिए भोजन तैयार किया जाता है। प्रसाद में अरवा चावल, चने की दाल, सब्जियां, पुआ, पकवान आदि बनाया जाता है। खास बात यह कि मां शीतला मंदिर में दिन में दीपक नहीं जलते हैं। दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु, व्रत-पूजा और वासी भोग की परंपरा निभाने पहुंचे थे। लोगों का कहना है कि इस मंदिर में जाने से चर्म रोग और बच्चों की बीमारियों से निजात मिलता है।
बिहार में एक बार फिर जहरीली शराब की आशंका से हड़कंप मच गया है। Chhapra जिले में संदिग्ध परिस्थितियों में पांच लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में तीन लोग Mashrakh क्षेत्र के हैं, जबकि दो की मौत Panapur में हुई है। परिजनों का आरोप है कि कुछ लोगों ने शराब पी थी, जबकि प्रशासन अभी तक इसे बीमारी से हुई मौत बता रहा है। मृतकों की पहचान मृतकों की पहचान इस प्रकार की गई है: संतोष महतो (मशरक) रघुवर महतो (मशरक) धर्मेंद्र सिंह (मशरक) सुखल नट (पानापुर) धर्मेंद्र राय (पानापुर) बताया जा रहा है कि सबसे पहले बुधवार रात संतोष महतो की मौत हुई थी। इसके बाद गुरुवार रात तक अलग-अलग जगहों से कुल पांच मौतों की खबर सामने आई। परिजनों ने शराब पीने की बात कही संतोष महतो की पत्नी लालमुनि देवी के अनुसार, उनके पति रात में घर आए और खाना खाकर सो गए। सुबह उठने के बाद उन्होंने पेट दर्द और आंखों से दिखाई न देने की शिकायत की। इसके बाद उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं। परिवार वाले उन्हें अस्पताल लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि संतोष महतो ने मरने से पहले शराब पीने की बात कही थी। उनके भतीजे ने भी बताया कि वह मंगलवार को कहीं से शराब पीकर घर लौटे थे और रात में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रशासन ने शराब से मौत से किया इनकार मामले पर Sanjay Kumar Sudhanshu, एसडीपीओ मशरक ने कहा कि फिलहाल शराब पीने से मौत की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और पहली नजर में लीवर खराब होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं जिला जनसंपर्क पदाधिकारी Ravindra Kumar ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि मृतक संतोष महतो पिछले कुछ दिनों से मानसिक तनाव में थे और ठीक से खाना नहीं खा रहे थे। प्रशासन का कहना है कि बीमारी की वजह से मौत हो सकती है। जांच जारी मढ़ौरा अनुमंडल पदाधिकारी Nidhi Raj ने बताया कि अभी तक एक मौत मशरक और एक पानापुर में होने की पुष्टि हुई है। बाकी मामलों की भी जांच की जा रही है। हालांकि स्थानीय लोगों के बीच जहरीली शराब की चर्चा तेज है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी।
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बरुराज थाना क्षेत्र अंतर्गत नुनियाडीह गांव में चोरों ने पंचायत सचिव के घर बड़ी चोरी की घटना को अंजाम दिया। बदमाश खिड़की तोड़कर घर में घुसे और परिवार के सदस्यों को बाहर से कमरे में बंद कर करीब 12 से 15 लाख रुपये की संपत्ति चोरी कर फरार हो गए। घटना के बाद पूरे परिवार में दहशत का माहौल है। खिड़की तोड़कर घर में घुसे चोर पीड़ित पंचायत सचिव सुमित कुमार (पिता–विनोद कुमार सिंह) ने बताया कि देर रात चोर खिड़की तोड़कर घर के अंदर घुस आए। इसके बाद उन्होंने घर के चार कमरों को निशाना बनाया। चोरों ने उनके भाई और पिता के कमरे की अलमारी समेत कई जगहों को खंगाला और नकदी व जेवरात सहित करीब 12 से 15 लाख रुपये की संपत्ति लेकर फरार हो गए। रात में किसी को नहीं लगी भनक परिवार का कहना है कि चोरों ने इतनी शातिराना तरीके से वारदात को अंजाम दिया कि रात में घर के किसी सदस्य को इसकी भनक तक नहीं लगी। सुबह जब दरवाजा बाहर से बंद मिला तो परिवार को शक हुआ। रिश्तेदारों ने खोला दरवाजा परिजनों ने तुरंत अपने एक रिश्तेदार को फोन कर बुलाया। जब उन्होंने बाहर से बंद दरवाजा खोला, तब घर के अंदर चोरी की घटना का पता चला। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। जांच में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। डायल 112 के एएसआई रमेश कुमार ने बताया कि पंचायत सचिव के घर चोरी की सूचना मिली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और बदमाशों की तलाश की जा रही है। पुलिस के अनुसार, घटना की जानकारी वरीय अधिकारियों को भी दे दी गई है और जल्द ही चोरों को पकड़ने के लिए डॉग स्क्वॉड टीम को भी लगाया जाएगा।
सुपौल: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को सुपौल जिले के निर्मली से समृद्धि यात्रा के तीसरे चरण की शुरुआत करेंगे। इस दौरान वह जिले को 569.36 करोड़ रुपये की 213 विकास योजनाओं की सौगात देंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुबह 10:45 बजे निर्मली पहुंचे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा नामांकन के बाद पहली बार किसी बड़े कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वह सुबह 10:45 बजे हेलीकॉप्टर से निर्मली अनुमंडल कार्यालय परिसर स्थित हेलीपैड पर पहुंचे। इसके बाद वह निर्मली स्थित रिंग बांध के जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण करेंगे और अनुमंडल कार्यालय परिसर में लगाए गए विभिन्न विभागों के स्टॉल का अवलोकन करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न हितधारकों और स्थानीय लोगों से भी बातचीत करेंगे। 213 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास मुख्यमंत्री जिले के विकास से जुड़ी कुल 569.3677 करोड़ रुपये की 213 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें 434.469 करोड़ रुपये की 84 योजनाओं का शिलान्यास और 134.8987 करोड़ रुपये की 129 योजनाओं का उद्घाटन शामिल है। इसके बाद वह निर्मली अनुमंडल सभागार में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे और आम लोगों से जनसंवाद भी करेंगे। दोपहर में मधेपुरा के लिए होंगे रवाना निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 1:22 बजे हेलीकॉप्टर से मधेपुरा के लिए रवाना होंगे। इस तरह सुबह 10:45 बजे से दोपहर 1:22 बजे तक वह करीब दो घंटे 37 मिनट निर्मली में रहेंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सोमवार को निर्मली में डीएम सावन कुमार और एसपी शरथ आरएस की संयुक्त अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में कार्यक्रम को सुरक्षित और सफल तरीके से संपन्न कराने के लिए विस्तृत चर्चा की गई। डीएम ने अधिकारियों को रूट चार्ट, आगमन-प्रस्थान व्यवस्था, सभा स्थल की तैयारी, यातायात नियंत्रण, वीआईपी मूवमेंट और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े सभी बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था के सख्त निर्देश एसपी शरथ आरएस ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड और रूट लाइन पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखी जाए। भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और वीआईपी सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि कार्यक्रम से पहले स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा करें और किसी भी कमी को तुरंत दूर करें, ताकि समृद्धि यात्रा का कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
वैशाली: बिहार में शराबबंदी के बावजूद तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर कानून को चुनौती दे रहे हैं। वैशाली जिले में पुलिस ने एक ट्रक से करीब 25 लाख रुपये मूल्य की विदेशी शराब बरामद कर बड़ी कार्रवाई की है। शराब को ट्रक के अंदर बनाए गए गुप्त तहखाने में छुपाया गया था, जबकि ऊपर चूने की बोरियां लादकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई थी। गुप्त सूचना पर पुलिस की कार्रवाई मामला वैशाली जिले के बेलसर थाना क्षेत्र का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि नगमा हनुमान चौक के पास एक ट्रक कई घंटों से संदिग्ध स्थिति में खड़ा है। सूचना मिलते ही बेलसर थाना अध्यक्ष प्रवीण कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ट्रक की जांच शुरू की। चूने की बोरियों के नीचे मिला तहखाना पहली नजर में ट्रक में चूने की बोरियां लदी हुई दिखाई दीं। लेकिन पुलिस को शक होने पर जब बोरियां हटाई गईं तो नीचे एक गुप्त तहखाना बना मिला। तहखाने को खोलने पर पुलिस भी हैरान रह गई। उसमें करीब 235 कार्टन विदेशी शराब छुपाकर रखी गई थी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस को देखते ही फरार हुए तस्कर बताया जा रहा है कि पुलिस की गाड़ी को आते देख ट्रक चालक और अन्य तस्कर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर थाने में खड़ा कर दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पंजाब से लाई जा रही थी शराब की खेप प्राथमिक जांच में सामने आया है कि शराब की यह खेप पंजाब से लाई जा रही थी। ट्रक मुजफ्फरपुर की ओर से वैशाली में प्रवेश किया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब की डिलीवरी कहां होनी थी और इस तस्करी के पीछे कौन सा गिरोह सक्रिय है। तस्करों के नए हथकंडों से पुलिस के सामने चुनौती बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद भी तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपनाकर शराब की तस्करी करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि वैशाली पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई के बाद शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क का पता लगाने और फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है।
पटना: राजधानी पटना में चोरों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। ताजा मामला कंकड़बाग थाना क्षेत्र का है, जहां बिहार के पूर्व मंत्री अशोक कुमार सिंह की बहन के घर में बड़ी चोरी की घटना सामने आई है। बदमाशों ने घर से करीब डेढ़ लाख रुपये नकद, लगभग तीन लाख रुपये के गहने, लाइसेंसी रायफल की गोलियां और चार महंगी घड़ियां चोरी कर लीं। यह घटना पीसी कॉलोनी स्थित डी-128 मकान में हुई। घर खाली मिलने का उठाया फायदा जानकारी के अनुसार, पूर्व मंत्री की बहन और उनके पति ललितेश्वर प्रसाद सिंह किसी काम से खगड़िया गए हुए थे। वहीं उनका बेटा शशांक कुमार होली मनाने के लिए लखनऊ स्थित अपने ससुराल गया हुआ था। घर खाली होने का फायदा उठाकर बदमाशों ने इस वारदात को अंजाम दिया। दो बाइक से पहुंचे छह बदमाश बताया जा रहा है कि रविवार देर रात दो बाइक पर सवार छह बदमाश मकान के पास पहुंचे। इनमें से दो बदमाश गेट फांदकर अंदर घुस गए। इसके बाद उन्होंने गेट से लेकर घर के कमरों तक लगे पांच अलग-अलग तालों को काट दिया। तीन घंटे तक घर में करते रहे चोरी बदमाश करीब तीन घंटे तक घर के अंदर रहे। इस दौरान उन्होंने अलमारी, पलंग और बक्सों को तोड़कर नकदी, गहने, घड़ियां और लाइसेंसी रायफल की गोलियां चोरी कर लीं। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। CCTV फुटेज में कैद हुए आरोपी घटना की जानकारी मिलने के बाद कंकड़बाग थाने में मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, जिसमें छह संदिग्ध बदमाश नजर आए हैं। पुलिस का मानना है कि इस चोरी के पीछे किसी स्थानीय लाइनर की भूमिका हो सकती है, जिसने घर के खाली होने की जानकारी बदमाशों को दी। पुलिस ने तेज की जांच मामले की सूचना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और डीजीपी को भी दे दी गई है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बदमाशों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
सहरसा में घास काटने गई महिला की गोली मारकर हत्या बिहार के सहरसा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। Saharsa के सलखुआ थाना क्षेत्र के कोपरिया गांव में अज्ञात अपराधियों ने एक 20 वर्षीय तलाकशुदा महिला की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतका की पहचान कोपरिया पंचायत के वार्ड-13 निवासी धीरेन्द्र यादव की पुत्री शुषम कुमारी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह गांव के पास स्थित गुलडाही बहियार में घास काटने गई थी, तभी अपराधियों ने उसके गले में गोली मार दी, जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। महिलाओं ने खेत में देखा खून से लथपथ शव जानकारी के अनुसार, गांव की कुछ महिलाएं घास काटकर वापस लौट रही थीं। इसी दौरान उनकी नजर खेत में खून से लथपथ पड़े शव पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने शोर मचाया और गांव वालों को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही मृतका के परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और सनसनी का माहौल बन गया। तीन साल पहले हुआ था विवाह, बाद में हो गया था तलाक मृतका के पिता ने बताया कि करीब तीन साल पहले उनकी बेटी की शादी हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद उसका तलाक हो गया। परिवार वाले अब उसकी दूसरी शादी की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच इस दर्दनाक घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मक्के के खेत से शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर हत्या के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। सीवान में 5 महीने से लापता युवक का कंकाल मिला इधर Siwan जिले में करीब पांच महीने से लापता युवक का कंकाल मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान दारौंदा थाना क्षेत्र के उजाय गांव निवासी राजेंद्र यादव के रूप में हुई है। कंकाल गांव के पास एक खेत से बरामद हुआ है। 26 सितंबर को भैंस चराने निकले थे घर से परिजनों के अनुसार, राजेंद्र यादव 26 सितंबर 2025 को सुबह करीब 11 बजे घर से भैंस चराने के लिए निकले थे, लेकिन इसके बाद वह वापस घर नहीं लौटे। परिवार ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया। मोबाइल और सामान मिलने से हुई पहचान बीती रात गांव के एक व्यक्ति ने परिजनों को सूचना दी कि गांव के पूर्व दिशा में स्थित चंवर में लाठी और छाता पड़ा हुआ है। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और पुलिस को भी इसकी जानकारी दी। पुलिस की मौजूदगी में जब आसपास खोजबीन की गई तो वहां से मोबाइल फोन जेब में रखा पैसा खैनी की चुनौटी गमछा और लाठी मानव हड्डियां बरामद हुईं। इन सामानों के आधार पर कंकाल की पहचान राजेंद्र यादव के रूप में की गई। हत्या की आशंका, जांच में जुटी पुलिस परिजनों का आरोप है कि राजेंद्र यादव की हत्या कर शव को खेत में फेंक दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई और जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा।
बिहार के Madhubani जिले में गुरुवार को एक भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की जान चली गई। National Highway 27 पर Phulparas थाना क्षेत्र के खोपा चौक के पास स्कॉर्पियो और ट्रक की जोरदार टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में स्कॉर्पियो सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो हरियाणा नंबर की बताई जा रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि स्कॉर्पियो दरभंगा की ओर से आ रही थी। जैसे ही वाहन खोपा चौक के पास पहुंचा, चालक ने डिवाइडर पार कर गाड़ी को विपरीत दिशा की लेन में मोड़ दिया। उसी समय सामने से आ रहा ट्रक तेज रफ्तार में स्कॉर्पियो से टकरा गया। आमने-सामने हुई इस टक्कर में स्कॉर्पियो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी दुर्घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और देखा कि स्कॉर्पियो में सवार लोग अंदर बुरी तरह फंसे हुए थे। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही Bihar Police की टीम फुलपरास थाना से घटनास्थल पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक चारों की मौत हो चुकी थी। मृतकों की पहचान में जुटी पुलिस फुलपरास थाना पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अभी तक मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस स्कॉर्पियो के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर वाहन मालिक का पता लगाने की कोशिश कर रही है, ताकि मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों को सूचना दी जा सके। जांच में जुटी पुलिस पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह गलत दिशा में वाहन चलाना प्रतीत हो रही है। हालांकि दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। ट्रक चालक से भी पूछताछ की जा रही है। सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में शोक के साथ-साथ आक्रोश भी है। लोगों का कहना है कि NH-27 पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की अटकलें सामने आईं। इन खबरों के बाद उनकी पार्टी Janata Dal (United) के भीतर असंतोष की स्थिति दिखने लगी है। गुरुवार सुबह पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता जमा हो गए और उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना था कि यदि नेतृत्व में बदलाव करना है तो जनता के बीच जाकर दोबारा चुनाव कराया जाए। उनका दावा है कि जनता ने नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया था, इसलिए वे अपना कार्यकाल पूरा करें। मंत्री पर हमला, सुरक्षा बढ़ाई गई प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री आवास के पास माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस बीच राज्य के मंत्री Surendra Mehta जब आवास परिसर में प्रवेश कर रहे थे, तब उन पर कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा हमला किए जाने की खबर सामने आई। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती बढ़ा दी गई। मौके पर आईजी, एसएसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि राज्य के डीजीपी भी मुख्यमंत्री आवास में मौजूद बताए गए। कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी जेडीयू नेता Rajiv Ranjan Patel के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री राज्यसभा के लिए नामांकन भरने जाते हैं तो वे उन्हें ऐसा करने से रोकने का प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है और वे चाहते हैं कि वे ही राज्य की कमान संभाले रखें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई राजनीतिक फैसला लिया जाता है तो उसमें कार्यकर्ताओं की राय भी ली जानी चाहिए। उनका सुझाव था कि नीतीश कुमार की जगह किसी और को भेजना हो तो उनके बेटे Nishant Kumar को राज्यसभा भेजा जा सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर बदलाव नहीं होना चाहिए। पार्टी नेतृत्व का अलग रुख वहीं जेडीयू के एक अन्य नेता Sanjay Singh ने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार हैं और यदि उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला लिया है तो कार्यकर्ताओं को उसका सम्मान करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि राज्य की बड़ी आबादी चाहती है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर ही बने रहें। बेटे की राजनीति में एंट्री की चर्चा इसी बीच यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं और पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं। इस संभावना ने भी जेडीयू के अंदर राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार वास्तव में राज्यसभा जाते हैं तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, क्योंकि लंबे समय से वे राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।