बिहार

₹25 Lakh Liquor Seized in Vaishali

ट्रक में बना था गुप्त तहखाना, ऊपर चूना और नीचे 25 लाख की विदेशी शराब; पुलिस को देख तस्कर फरार

surbhi मार्च 10, 2026 0
Secret chamber found in truck carrying illegal foreign liquor in Vaishali Bihar
Vaishali Truck Liquor Smuggling Case

 

वैशाली: बिहार में शराबबंदी के बावजूद तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर कानून को चुनौती दे रहे हैं। वैशाली जिले में पुलिस ने एक ट्रक से करीब 25 लाख रुपये मूल्य की विदेशी शराब बरामद कर बड़ी कार्रवाई की है। शराब को ट्रक के अंदर बनाए गए गुप्त तहखाने में छुपाया गया था, जबकि ऊपर चूने की बोरियां लादकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई थी।

 

गुप्त सूचना पर पुलिस की कार्रवाई

मामला वैशाली जिले के बेलसर थाना क्षेत्र का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि नगमा हनुमान चौक के पास एक ट्रक कई घंटों से संदिग्ध स्थिति में खड़ा है। सूचना मिलते ही बेलसर थाना अध्यक्ष प्रवीण कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ट्रक की जांच शुरू की।

 

चूने की बोरियों के नीचे मिला तहखाना

पहली नजर में ट्रक में चूने की बोरियां लदी हुई दिखाई दीं। लेकिन पुलिस को शक होने पर जब बोरियां हटाई गईं तो नीचे एक गुप्त तहखाना बना मिला। तहखाने को खोलने पर पुलिस भी हैरान रह गई। उसमें करीब 235 कार्टन विदेशी शराब छुपाकर रखी गई थी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है।

 

पुलिस को देखते ही फरार हुए तस्कर

बताया जा रहा है कि पुलिस की गाड़ी को आते देख ट्रक चालक और अन्य तस्कर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर थाने में खड़ा कर दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

 

पंजाब से लाई जा रही थी शराब की खेप

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि शराब की यह खेप पंजाब से लाई जा रही थी। ट्रक मुजफ्फरपुर की ओर से वैशाली में प्रवेश किया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब की डिलीवरी कहां होनी थी और इस तस्करी के पीछे कौन सा गिरोह सक्रिय है।

 

तस्करों के नए हथकंडों से पुलिस के सामने चुनौती

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद भी तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपनाकर शराब की तस्करी करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि वैशाली पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई के बाद शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क का पता लगाने और फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

बिहार

View more
Bihar EOU
बिहार में शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर के ठिकानों पर EOU की छापेमारी

पटना, एजेंसियां। बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड के उप निदेशक अजय कुमार सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। EOU की अलग-अलग टीमों ने पटना और बेगूसराय में तीन ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की। जांच एजेंसी के अनुसार, सत्यापन में उनकी ज्ञात आय से करीब ₹3.43 करोड़ अधिक संपत्ति होने के प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिले हैं।   3.43 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति का आरोप   EOU के मुताबिक, अजय कुमार सिंह के खिलाफ 19 अगस्त 2026 को आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया। सत्यापन के दौरान ₹3,43,78,300 की कथित अतिरिक्त संपत्ति का प्रथमदृष्टया पता चला, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 90.04 प्रतिशत अधिक बताई गई है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।   तीन ठिकानों पर एक साथ पहुंची EOU की टीम   विशेष निगरानी अदालत, पटना से तलाशी वारंट मिलने के बाद EOU ने तीन स्थानों पर कार्रवाई शुरू की। इनमें पटना के खाजपुरा स्थित आवास, मीठापुर स्थित बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड का उनका कार्यालय कक्ष और बेगूसराय के साहेबपुर कमाल स्थित पैतृक मकान शामिल हैं।   दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच   तलाशी के दौरान EOU की टीमें संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री की जांच कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी पूरी होने के बाद बरामद सामग्री और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।   जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर   फिलहाल यह मामला जांच के स्तर पर है। EOU ने अजय कुमार सिंह पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया है। छापेमारी से बरामद सामग्री और आगे की जांच के आधार पर मामले में अगली कार्रवाई तय होगी।

abhishek singh अगस्त 20, 2026 0
बिहार पुलिस के सभी जिलों में बनने वाली एंटी-रायट फोर्स की तैयारी

बिहार पुलिस सभी जिलों में बनाएगी एंटी-रायट फोर्स, 20 मिनट में मौके पर पहुंचेगा दस्ता

बिहार में 11 लाख से ज्यादा परिवारों के लिए PM आवास मंजूर

बिहार में 11 लाख से ज्यादा परिवारों को PM आवास की मंजूरी, शिवराज सिंह चौहान ने बताया बड़ा कदम

Greenfield Expressway

बिहार में बक्सर से भागलपुर तक बनेगा 336 किमी लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, कैबिनेट ने 13 प्रस्तावों को दी मंजूरी

Patna Municipal Corporation
पटना नगर निगम ने 26,745 मकान मालिकों को भेजा नोटिस, मेयर सीता साहू का घर भी कार्रवाई की जद में

पटना, एजेंसियां। पटना नगर निगम ने आवासीय मकानों में बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां चलाने के मामलों पर सख्ती शुरू कर दी है। निगम की ओर से शहर के अलग-अलग इलाकों में ऐसे 26,745 मकान मालिकों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें पटना की मेयर सीता साहू का आवास भी शामिल है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 12 हजार से अधिक मकान मालिकों को नोटिस दिया जा चुका है।   आवासीय मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई   नगर निगम ने शहर के सभी छह अंचलों में सर्वे कराया था। इसमें ऐसे आवासीय भवनों की पहचान की गई, जहां आवश्यक अनुमति के बिना व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। निगम अब संबंधित मकान मालिकों को नोटिस जारी कर जवाब मांग रहा है।   मेयर सीता साहू के घर पर भी चस्पा हुआ नोटिस   इस कार्रवाई की खास बात यह है कि पटना की मेयर सीता साहू के बड़ी पटन देवी गली स्थित आवास पर भी नगर निगम की टीम ने नोटिस चस्पा किया है। उनके बेटों को भी नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।   एक सप्ताह में बाकी नोटिस देने का लक्ष्य   नगर निगम ने प्रत्येक वार्ड में रोजाना 100 से अधिक नोटिस जारी करने का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों के मुताबिक, शेष मकान मालिकों को भी अगले कुछ दिनों में नोटिस देने की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है। बांकीपुर और कंकड़बाग अंचल में ऐसे मामलों की संख्या अधिक बताई गई है।   सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी सख्ती   नगर निगम की कार्रवाई ऐसे समय में तेज हुई है जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद पटना में अनधिकृत निर्माण और भवनों के इस्तेमाल को लेकर प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा है। हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में मकान मालिक को दोषी साबित नहीं करता; संबंधित पक्ष को जवाब देने और प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है।

anjali kumari अगस्त 20, 2026 0
Bhagalpur to Ranchi Bus

सावन के बाद भागलपुर से रांची और बोकारो के लिए चलेंगी 4 नई सरकारी बसें

अहमदाबाद और भागलपुर के बीच 26 अगस्त से शुरू होने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस

अहमदाबाद-भागलपुर के बीच नई अमृत भारत एक्सप्रेस 26 अगस्त से शुरू, 36 घंटे में पूरा होगा सफर

Patna DRM Office

पटना DRM ऑफिस में रेलवे नौकरी का झांसा, फर्जी कागजात के साथ दो आरोपी पकड़े गए

बिहार सरकार की डिजिटल कंटेंट क्रिएटर भुगतान नीति में 1 लाख व्यूज पर ₹10,000 तक
बिहार सरकार ने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए बढ़ाया कमाई का मौका, 1 लाख व्यूज पर मिलेंगे ₹10,000 तक

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और सरकारी उपलब्धियों को सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को प्रोत्साहित करने का फैसला किया है। राज्य कैबिनेट ने बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया नीति/नियमावली-2026 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत पात्र और सूचीबद्ध क्रिएटर्स को सरकारी योजनाओं से जुड़े कंटेंट के प्रदर्शन के आधार पर 1 लाख व्यूज पर अधिकतम ₹10,000 तक भुगतान किया जा सकता है।   10 लाख व्यूज पर ₹1 लाख तक का प्रावधान   नई व्यवस्था के तहत यदि पात्र सरकारी कंटेंट को 10 लाख व्यूज मिलते हैं, तो निर्धारित दर के आधार पर भुगतान ₹1 लाख तक पहुंच सकता है। हालांकि, यह राशि हर वायरल वीडियो या पोस्ट पर स्वतः नहीं मिलेगी। भुगतान कंटेंट की पात्रता, गुणवत्ता, प्लेटफॉर्म और आधिकारिक रूप से सत्यापित व्यूज जैसे मानकों पर निर्भर करेगा।   क्रिएटर्स को कराना होगा एम्पैनलमेंट   इस व्यवस्था का लाभ लेने के लिए सोशल मीडिया क्रिएटर्स और ऑनलाइन मीडिया संस्थानों को सरकार के संबंधित विभाग के साथ एम्पैनल यानी सूचीबद्ध होना होगा। सामान्य तौर पर बनाए गए किसी भी वीडियो को केवल अधिक व्यूज मिलने के आधार पर सरकारी भुगतान का अधिकार नहीं मिलेगा।   YouTube, Facebook और Instagram समेत प्लेटफॉर्म पर नजर   संशोधित नीति में सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है। साथ ही सूचीबद्ध सोशल मीडिया हैंडल, पेज और चैनलों के फॉलोअर्स की समय-समय पर जांच का भी प्रावधान किया गया है। विस्तृत अधिसूचना के बाद अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर व्यूज की गणना और आवेदन प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।   सरकारी योजनाओं के प्रचार को मिलेगा डिजिटल विस्तार   बिहार सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया के जरिए जनहितकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचाना है। इस फैसले से राज्य के डिजिटल क्रिएटर्स के लिए सरकारी अभियानों से जुड़कर काम करने का नया अवसर पैदा हो सकता है। हालांकि, ₹10,000 प्रति लाख व्यूज अधिकतम संभावित भुगतान है, निश्चित भुगतान नहीं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
केंद्र की ₹13,041 करोड़ की रेलवे और बिहार हाईवे परियोजनाएं

केंद्र ने पांच राज्यों में रेलवे और हाईवे परियोजनाओं के लिए ₹13,041 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी दी

बिहार में 11 लाख राशन कार्ड लक्ष्य के विरोध में आपूर्ति अधिकारियों का आंदोलन

बिहार में 11 लाख राशन कार्ड का लक्ष्य बना विवाद, आपूर्ति अधिकारियों ने जताया विरोध

बिहार के छात्रों के लिए विद्या साथी ऐप और 24 घंटे लाइव शिक्षक सुविधा

बिहार सरकार का ‘विद्या साथी’ ऐप, कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों को मिलेगी 24 घंटे शिक्षकों की सुविधा

0 Comments

Top week

Share Market
फाइनेंस

शेयर बाजार में गिरावट, Sensex 71 अंक टूटा; Nifty 24,400 के नीचे बंद

abhishek singh अगस्त 14, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?