Bihar crime

CBI team outside closed house in Jehanabad village during Patna hostel case investigation
पटना हॉस्टल कांड में नई पेचीदगी: गांव पहुंची CBI टीम लौटी खाली हाथ, परिजनों ने नहीं खोला दरवाजा

जहानाबाद में CBI को मिला विरोध पटना के चर्चित हॉस्टल कांड में जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम को एक बार फिर निराशा हाथ लगी। टीम जब जहानाबाद जिले के रतनी स्थित छात्रा के पैतृक गांव पहुंची, तो परिजनों ने दरवाजा खोलने से साफ इनकार कर दिया। करीब 20 मिनट तक इंतजार करने के बाद अधिकारियों को बिना किसी बातचीत के ही लौटना पड़ा। शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है मामला यह मामला शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है, जहां रहकर छात्रा NEET की तैयारी कर रही थी। उसकी संदिग्ध मौत के बाद से ही यह केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मौत के पीछे की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। DSP के नेतृत्व में पहुंची थी टीम गुरुवार को CBI की तीन सदस्यीय टीम, डीएसपी विभा कुमारी के नेतृत्व में गांव पहुंची थी। टीम का मकसद परिजनों से बातचीत कर कुछ अहम जानकारी जुटाना था, लेकिन परिवार ने सहयोग से इनकार कर दिया। परिजनों का कहना है कि कई बार पूछताछ के बावजूद जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है, जिससे उनका भरोसा कमजोर हो गया है। मां की हालत गंभीर, बात करने की स्थिति में नहीं परिवार के अनुसार, बेटी की मौत के बाद उसकी मां की हालत बेहद खराब है। वह मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो चुकी हैं और बार-बार बेहोश हो जाती हैं। ऐसे में परिवार ने उन्हें किसी भी तरह की पूछताछ से दूर रखने का फैसला किया है। पिता से भी नहीं हो सकी मुलाकात गांव से लौटने के बाद CBI टीम शकूराबाद थाना पहुंची और फिर छात्रा के पिता के कार्यस्थल प्लस टू प्रवेशिका विद्यालय शकूराबाद भी गई। लेकिन यहां भी टीम को निराशा मिली, क्योंकि पिता कुछ ही मिनट पहले वहां से निकल चुके थे। जांच में आ रही बाधाएं, बढ़ी उलझन इस मामले में CBI लगातार सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, लेकिन परिजनों का सहयोग न मिलना और अब तक किसी बड़े खुलासे या गिरफ्तारी का न होना जांच को और जटिल बना रहा है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Damaged window of Vande Bharat Express after stone pelting incident in Muzaffarpur Bihar
बिहार में वंदे भारत एक्सप्रेस पर फिर हमला: मुजफ्फरपुर में पत्थरबाजी, कोच का शीशा टूटा, CCTV खंगाल रही पुलिस

मुजफ्फरपुर में फिर निशाने पर वंदे भारत बिहार में एक बार फिर हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस बदमाशों के निशाने पर आ गई। इस बार घटना मुजफ्फरपुर जिले में सामने आई है, जहां अज्ञात लोगों ने चलती ट्रेन पर पत्थर फेंक दिए। राहत की बात यह रही कि इस हमले में कोई यात्री घायल नहीं हुआ, लेकिन ट्रेन की खिड़की का शीशा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कांटी–मोतीपुर के बीच हुई घटना जानकारी के अनुसार, गाड़ी संख्या 26501 गोरखपुर-पाटलिपुत्र वंदे भारत एक्सप्रेस गुरुवार शाम मुजफ्फरपुर-गोरखपुर रेलखंड पर चल रही थी। इसी दौरान कांटी और मोतीपुर के बीच असामाजिक तत्वों ने ट्रेन को निशाना बनाते हुए पत्थरबाजी की। इस हमले में कोच C-5 की खिड़की का कांच पूरी तरह टूट गया। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कवच वाला शीशा भी इस हमले को नहीं झेल सका। पुलिस और RPF जांच में जुटी घटना के बाद मामले को लेकर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने बापूधाम मोतिहारी में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस और रेलवे सुरक्षा एजेंसियां मिलकर पूरे मामले की जांच कर रही हैं। ट्रेन में मौजूद स्कॉर्ट टीम, गार्ड और ट्रेन मैनेजर से पूछताछ की गई है। साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। बताया जा रहा है कि कपरपुरा और कांटी इलाके में सर्च ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है। यात्रियों में बढ़ी दहशत इस घटना के बाद यात्रियों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। वंदे भारत एक्सप्रेस देश की सबसे आधुनिक और तेज ट्रेनों में शामिल है, ऐसे में उस पर बार-बार हो रहे हमले सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं यह पहली बार नहीं है जब वंदे भारत ट्रेन पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई हो। इससे पहले भी बिहार के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह की वारदातें हो चुकी हैं। बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Police raid at Mokama hotel uncovers illegal gas cylinder use and suspicious activities with multiple arrests
मोकामा होटल में छापा: गैस सिलेंडर जांच में खुला ‘रैकेट’, आपत्तिजनक हालत में मिले युवक-युवतियां

सिलेंडर जांच पहुंची पुलिस, सामने आया चौंकाने वाला मामला बिहार के मोकामा में पुलिस की एक सामान्य कार्रवाई के दौरान बड़ा खुलासा हुआ। नीलम किचन होटल में घरेलू गैस सिलेंडर की जांच करने पहुंची पुलिस को छापेमारी के दौरान आपत्तिजनक गतिविधियों का पता चला, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। होटल में मिला संदिग्ध गतिविधियों का सुराग पुलिस को सोशल मीडिया पर मिली शिकायत के आधार पर स्टेशन रोड स्थित होटल में घरेलू गैस सिलेंडर के अवैध इस्तेमाल की जांच के लिए भेजा गया था। जांच के दौरान होटल के कमरों में संदिग्ध स्थिति पाई गई, जिसके बाद पूरे परिसर की तलाशी ली गई। 8 लोग गिरफ्तार, होटल संचालक भी शामिल छापेमारी के दौरान पुलिस ने होटल संचालक सियाराम सिंह समेत कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें तीन युवक और चार युवतियां शामिल हैं, जिन्हें आपत्तिजनक हालत में पाया गया। पुलिस ने मौके से आपत्तिजनक सामान भी बरामद किया है। छापेमारी के दौरान भागने की कोशिश कार्रवाई के दौरान कुछ युवतियां होटल की छत के रास्ते भागने की कोशिश करती हुई नजर आईं, लेकिन पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद पांच कमरों की तलाशी ली गई, जहां से कई संदिग्ध वस्तुएं मिलीं। होटल के कमरे सील, रजिस्टर जब्त पुलिस ने होटल के पांचों कमरों को सील कर दिया है और जांच के लिए होटल का रजिस्टर भी जब्त किया गया है। मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। 4 घरेलू गैस सिलेंडर भी जब्त छापेमारी के दौरान होटल से चार घरेलू गैस सिलेंडर भी बरामद किए गए, जिनका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। इस पर भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का अभियान जारी पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बिहार में गैस सिलेंडर की किल्लत का फायदा उठाकर कुछ लोग जमाखोरी और अवैध उपयोग कर रहे हैं। इसी को रोकने के लिए राज्यभर में अभियान चलाया जा रहा है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
shooting in Muzaffarpur where youth was shot dead by criminals
मुजफ्फरपुर में अपराधियों का आतंक: युवक को गोलियों से भूना, चार महीने में आठवीं हत्या से दहशत

  बाजार से घर लौट रहे युवक की गोली मारकर हत्या बिहार के Muzaffarpur जिले में अपराधियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बेखौफ बदमाशों ने एक युवक को गोलियों से भूनकर हत्या कर दी, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। यह घटना रामपुर हरि थाना क्षेत्र के कोइली भराव गांव की है। मृतक की पहचान वार्ड संख्या-2 निवासी दिनेश राय के 35 वर्षीय पुत्र रणधीर कुमार के रूप में हुई है। युवक की हत्या के बाद परिवार में कोहराम मच गया और गांव में भय का माहौल बन गया।   रास्ते में घेरकर मारी तीन गोलियां मिली जानकारी के अनुसार रणधीर कुमार बाजार से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए हथियारबंद अपराधियों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। इसके बाद बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी और रणधीर कुमार को तीन गोलियां मार दीं। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी मौके से आराम से फरार हो गए।   अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल युवक को इलाज के लिए Sri Krishna Medical College and Hospital (SKMCH) लाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।   पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही रामपुर हरि थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास के इलाकों में सुराग तलाश रही है और अपराधियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। इस मामले में Alay Vats ने बताया कि बाजार से घर लौट रहे युवक को अपराधियों ने गोली मार दी। पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और आरोपियों को जल्द पकड़ने की कोशिश की जा रही है।   पूर्व विधायक ने उठाए कानून व्यवस्था पर सवाल घटना की जानकारी मिलते ही मीनापुर विधानसभा क्षेत्र से राजद के पूर्व विधायक Munna Yadav भी SKMCH पहुंचे और मृतक के परिजनों को सांत्वना दी। इस दौरान उन्होंने जिले की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों में जिले में यह आठवीं हत्या की घटना है, लेकिन अब तक किसी भी मामले में अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।   इलाके में बढ़ी दहशत पूर्व विधायक ने कहा कि लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं के कारण जिले में अपराधियों का मनोबल बढ़ गया है और आम लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0