चतरा: झारखंड के चतरा जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही ने एक व्यक्ति की जान ले ली। वशिष्ठ नगर थाना क्षेत्र के दंतार गांव में गलत इंजेक्शन लगाए जाने के बाद 40 वर्षीय विनोद सिंह की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है। इंजेक्शन लगते ही बिगड़ी हालत मृतक विनोद सिंह, जो मझगांवा के निवासी थे, इलाज के लिए गांव के एक कथित डॉक्टर के पास पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार, इंजेक्शन लगते ही उनकी तबीयत अचानक खराब होने लगी। स्थिति बिगड़ती देख आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में गया रेफर, इलाज के दौरान मौत हालत ज्यादा बिगड़ने पर मरीज को तुरंत बेहतर इलाज के लिए एम्स गया ले जाया गया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अस्पताल में इलाज के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना के बाद आरोपी डॉक्टर फरार घटना के बाद आरोपी झोलाछाप डॉक्टर शिव शंकर शर्मा उर्फ ठाकुरजी मौके से फरार हो गया। बताया जा रहा है कि उसने अपना क्लीनिक बंद किया और पीछे के रास्ते से भाग निकला। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही वशिष्ठ नगर थाना पुलिस हरकत में आ गई। थाना प्रभारी अमित कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश जारी है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या को उजागर कर दिया है। सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण लोग मजबूरी में गैर-प्रशिक्षित लोगों से इलाज कराते हैं, जो कई बार जानलेवा साबित होता है। परिजनों में मातम, कार्रवाई की मांग मृतक के घर में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने प्रशासन से दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं स्थानीय लोगों ने भी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत बताई है।
कैरलीबार पंचायत में सनसनीखेज घटना चतरा जिले के वशिष्ठ नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत कैरलीबार पंचायत में एक ईंट भट्ठा मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान 30 वर्षीय विनोद गंझू के रूप में हुई है, जो करमा पंचायत के मदनपुर गांव का रहने वाला था। काम के लिए गया, घर नहीं लौटा परिजनों के अनुसार, विनोद गंझू गुरुवार को कैरलीबार पंचायत के निमियाटांड़ स्थित एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने गया था। यह भट्ठा विनोद भारती और सोनू भारती नामक दो भाइयों का बताया जा रहा है। काम के सिलसिले में वह वहीं रुक गया, लेकिन रात में घर वापस नहीं लौटा। पार्टी के बाद गायब हुआ मजदूर स्थानीय जानकारी के मुताबिक, भट्ठा जलाने के बाद रात में मजदूरों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी। इस दौरान शराब और मुर्गा की पार्टी भी हुई, जिसमें विनोद गंझू शामिल था। इसके बाद वह अचानक लापता हो गया। सुबह गड्ढे में मिला शव शुक्रवार सुबह विनोद गंझू का शव भट्ठे के पास एक गड्ढेनुमा जगह से बरामद हुआ। शव मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप मृतक की पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों ने ईंट भट्ठा मालिकों पर हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह सामान्य हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश के तहत की गई हत्या है। परिजन दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं। पुलिस जांच में जुटी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। परिजन वशिष्ठ नगर थाना में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया भी की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज फिलहाल यह मामला संदिग्ध मौत का माना जा रहा है, लेकिन परिजनों के आरोपों ने इसे हत्या का मामला बना दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद मजदूरों की सुरक्षा और कार्यस्थल की निगरानी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आने वाली रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे इस रहस्यमयी मौत की सच्चाई सामने आ सके।
चतरा: झारखंड के चतरा जिले में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की राशि नहीं मिलने से हजारों महिलाएं परेशान हैं। जनवरी और फरवरी महीने की किस्त अब तक खातों में नहीं पहुंची है, जिससे लाभुक महिलाएं बैंक और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। दूसरे जिलों में भुगतान, चतरा में अब भी इंतजार लाभुक महिलाओं का कहना है कि राज्य के कई अन्य जिलों में योजना की राशि जारी कर दी गई है। वहां महिलाओं के खातों में एक साथ दो महीने की करीब 5-5 हजार रुपये की राशि पहुंच चुकी है, लेकिन चतरा जिले में अब तक भुगतान नहीं हुआ है। इससे महिलाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बैंक और कार्यालयों के चक्कर से बढ़ी परेशानी राशि की उम्मीद में महिलाएं रोजाना अपने बैंक पहुंच रही हैं और खाता अपडेट करवा रही हैं। इसके अलावा वे सामाजिक सुरक्षा कार्यालय और प्रखंड कार्यालयों में भी जानकारी लेने जा रही हैं, लेकिन हर जगह से उन्हें एक ही जवाब मिल रहा है-“अभी भुगतान नहीं आया है”। 1.74 लाख से ज्यादा महिलाएं प्रभावित जानकारी के अनुसार, चतरा जिले में इस योजना के करीब 1 लाख 74 हजार 491 लाभुक हैं। इतनी बड़ी संख्या में भुगतान लंबित होना प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। महिलाओं का कहना है कि यह राशि उनके घर के खर्च और जरूरतों के लिए बेहद जरूरी है। तकनीकी समस्या बनी देरी की वजह जिला सामाजिक सुरक्षा पदाधिकारी सुकरमनी लिंडा ने बताया कि तकनीकी समस्या के कारण भुगतान में देरी हो रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही समस्या दूर होगी, जनवरी और फरवरी दोनों महीनों की राशि एक साथ लाभुकों के खातों में भेज दी जाएगी। जल्द भुगतान की उठी मांग लाभुक महिलाओं ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि यह योजना उनके आर्थिक सशक्तिकरण का अहम हिस्सा है, ऐसे में भुगतान में देरी से उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उम्मीद पर टिकी निगाहें फिलहाल चतरा की महिलाएं इस उम्मीद में हैं कि जल्द ही उनके खातों में योजना की राशि पहुंच जाएगी। लेकिन जब तक भुगतान नहीं होता, तब तक उनका इंतजार और परेशानी दोनों जारी रहने वाली है।
चतरा। झारखंड के चतरा शहर में इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत से लोग परेशान हैं। गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण कई घरों में खाना बनाना मुश्किल हो गया है। चार दिन बाद शहर में गैस सिलेंडरों से भरा ट्रक पहुंचा, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग खाली सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े हो गए। जानकारी के अनुसार बंशीधर इंडेन गैस एजेंसी का ट्रक चार दिन बाद चतरा पहुंचा। गैस सिलेंडरों की बिक्री पुलिस लाइन के आगे स्थित मैदान में की गई। ट्रक आने की खबर मिलते ही सुबह से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जुटने लगी और लोग करीब साढ़े छह बजे से ही लाइन में लग गए। घंटों धूप में इंतजार करने के बावजूद सभी को नहीं मिला सिलेंडर करीब नौ बजे गैस से लदा ट्रक पहुंचने के बाद एक-एक कर लोगों को सिलेंडर दिया जाने लगा। हालांकि मांग ज्यादा होने के कारण कई लोगों को घंटों धूप में इंतजार करना पड़ा। इसके बावजूद सभी उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिल सकी और कई लोग खाली सिलेंडर लेकर ही वापस लौट गए। लकड़ी और कोयले के चूल्हे का सहारा गैस की कमी के कारण शहर के कई घरों में लोग लकड़ी और कोयले के चूल्हों पर खाना पकाने को मजबूर हैं। वहीं कुछ परिवारों ने बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। महिलाओं का कहना है कि नियमित गैस आपूर्ति नहीं होने से रोजमर्रा के कामकाज में काफी परेशानी हो रही है। प्रशासन से की नियमित आपूर्ति की मांग गैस संकट से परेशान उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन से जल्द समाधान निकालने और नियमित गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि लोगों को रसोई गैस के लिए घंटों लाइन में खड़ा न रहना पड़े।
चतरा: झारखंड के चतरा जिले में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। चतरा–गया मुख्य मार्ग पर स्थित संघरी घाटी में कोयला लदा हाईवा अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे चालक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद पीछे से आ रहे कई वाहनों की आपस में टक्कर हो गई और सड़क पर लंबा जाम लग गया। मृत चालक की पहचान मृतक चालक की पहचान Aditya Rana के रूप में हुई है। वह झारखंड के Latehar जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र के सेरम पंडरिया गांव के निवासी थे और भोला राणा के पुत्र बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार आदित्य राणा कोयला लदा हाईवा लेकर चतरा–गया मार्ग से गुजर रहे थे, तभी संघरी घाटी के पास वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया। घाटी में पलटा हाईवा, कई वाहनों की टक्कर बताया जा रहा है कि घाटी के मोड़ के पास हाईवा अचानक नियंत्रण खो बैठा और पलट गया। भारी वाहन के पलटते ही पीछे से आ रहे कई छोटे-बड़े वाहन समय पर ब्रेक नहीं लगा सके और आपस में टकरा गए। दुर्घटना के बाद सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को घटना की सूचना दी। सड़क पर लगा लंबा जाम हादसे के बाद चतरा–गया मुख्य मार्ग पर लंबा जाम लग गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई घंटों तक यातायात बाधित रहा। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने का काम शुरू किया। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया सदर थाना प्रभारी Avdhesh Kumar Singh ने बताया कि हादसे में चालक की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। अस्पताल पहुंचे परिजन, मचा कोहराम घटना की जानकारी मिलते ही मृतक चालक के परिजन अस्पताल पहुंचे। शव देखकर परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और अस्पताल परिसर में शोक का माहौल बन गया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि संघरी घाटी क्षेत्र में अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं, इसलिए यहां सड़क सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए जाने की जरूरत है।
चतरा। झारखंड के चतरा जिले में गुरुवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में चार किशोरों की मौत हो गई। यह घटना पिपरवार थाना क्षेत्र के चिरैयाटांड़ इलाके में हुई, जहां तेज रफ्तार और अनियंत्रित स्कॉर्पियो ने एक मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद स्कॉर्पियो चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। पुलिस के अनुसार पुलिस के अनुसार, चारों किशोर एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर मैट्रिक परीक्षा देने के बाद घूमने निकले थे। इसी दौरान चिरैयाटांड़ के पास सामने से आ रही तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार तीन किशोरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चौथे किशोर ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। परिजनों के अनुसार मृतकों की पहचान बाराडीह गांव के मंजीत कुमार (14), विकास कुमार (15), प्रताप कुमार (15) और हफुआ गांव के सोनू कुमार (14) के रूप में हुई है। सभी छात्र ज्ञानदीप विद्या निकेतन स्कूल के विद्यार्थी थे। परिजनों के अनुसार, चारों दोस्त गुरुवार शाम करीब तीन बजे घर से घूमने जाने की बात कहकर निकले थे। कुछ ही घंटों बाद हादसे में उनकी मौत की खबर गांव पहुंची, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोगों ने चिरैयाटांड़-कल्याणपुर-चतरा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। सूचना मिलने पर पिपरवार थाना प्रभारी अभय कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो और मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया है। इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
चतरा। चतरा जिले के सदर थाना क्षेत्र स्थित संघरी घाटी में शुक्रवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया। घाटी के खतरनाक मोड़ पर एक कंटेनर अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया, जिसके बाद पीछे आ रहे कई भारी वाहन आपस में टकरा गए। आधा दर्जन हाईवा ट्रक एक-दूसरे से भिड़े प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कंटेनर के पलटते ही उसके पीछे आ रहे करीब आधा दर्जन हाईवा ट्रक एक-दूसरे से भिड़ गए। हादसे के बाद सड़क पर अफरा-तफरी मच गई और कई वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। घटना के दौरान चालक और सहचालकों में दहशत फैल गई। दुर्घटना के कारण चतरा–डोभी मुख्य मार्ग पर लंबा जाम लग गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। क्रेन की मदद से पलटे कंटेनर और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके। हादसे में एक व्यक्ति की मौत की भी खबर है। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है। स्थानीय लोगों के स्थानीय लोगों का कहना है कि संघरी घाटी का यह इलाका पहले भी कई सड़क हादसों के लिए जाना जाता रहा है। लोगों ने प्रशासन से यहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण लगाने की मांग की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।