Chennai News

Rescue teams and emergency personnel outside a seafood processing unit in Tamil Nadu after an ammonia gas leak killed seven women workers.
तमिलनाडु में बड़ा हादसा: सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट में अमोनिया गैस लीक, सात महिला कर्मियों की मौत, 67 कर्मचारी प्रभावित

  चेन्नई/तिरुवल्लूर: तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में रविवार (21 जून) को एक निजी समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई (सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट) में अमोनिया गैस रिसाव की बड़ी घटना सामने आई है। हादसे में सात महिला कर्मियों की मौत हो गई, जबकि 67 अन्य कर्मचारी गैस की चपेट में आकर बीमार पड़ गए। कई प्रभावित कर्मचारियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। यह घटना पेरियापालयम के पास मंजंगरनई स्थित एक निजी फूड प्रोसेसिंग यूनिट में हुई। गैस रिसाव की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे और प्रभावित कर्मचारियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। 67 कर्मचारी अस्पताल में भर्ती तिरुवल्लूर की जिलाधिकारी एस. कविता ने बताया कि गैस रिसाव से प्रभावित कुल 67 कर्मचारियों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। 46 कर्मचारियों का इलाज वेल्स अस्पताल में चल रहा है। 21 लोगों को वेंकटेश्वर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, गंभीर रूप से प्रभावित नौ कर्मचारियों को चेन्नई के सरकारी स्टैनली मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उनका विशेष उपचार जारी है। सात महिला कर्मियों की मौत से शोक हादसे में सात महिला कर्मचारियों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। पुलिस मृतकों की पहचान और उनके परिवारों को सूचना देने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। अमोनिया गैस रिसाव बना हादसे की वजह प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में अमोनिया गैस के रिसाव के कारण यह दुर्घटना हुई। अमोनिया गैस का इस्तेमाल आमतौर पर कोल्ड स्टोरेज और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में किया जाता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। अधिक मात्रा में इसके संपर्क में आने से सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, फेफड़ों को नुकसान और गंभीर मामलों में मौत तक हो सकती है। प्रशासन ने दिए जांच के आदेश प्रशासन और पुलिस ने घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों के पालन, गैस रिसाव की वजह और संभावित लापरवाही की जांच के आदेश दिए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन या किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इलाके में पुलिस बल तैनात घटना के बाद एहतियात के तौर पर फैक्ट्री परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित कर्मचारियों को हरसंभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। तमिलनाडु के इस औद्योगिक हादसे ने एक बार फिर उद्योगों में सुरक्षा मानकों और खतरनाक रसायनों के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Former Tamil Nadu BJP leaders resign and join Annamalai’s new political movement in Chennai
तमिलनाडु बीजेपी में बढ़ी टूट, अन्नामलाई के बाद उपाध्यक्ष और प्रदेश सचिव ने भी छोड़ी पार्टी

  चेन्नई: तमिलनाडु भाजपा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष कारू नागराजन और राज्य सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं के फैसले ने राज्य इकाई में राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। अन्नामलाई के नए अभियान के साथ जुड़े कारू नागराजन भाजपा छोड़ने के बाद कारू नागराजन ने स्पष्ट किया कि वह अन्नामलाई के नए राजनीतिक अभियान का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अपने समर्थकों के साथ विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है। मीडिया से बातचीत में नागराजन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी नेता या पार्टी की आलोचना करना नहीं है, बल्कि वे अन्नामलाई की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित हैं। उनके अनुसार, अन्नामलाई एक ऊर्जावान और जनसरोकारों से जुड़े नेता हैं, जिनके साथ मिलकर वे काम करना चाहते हैं। प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी दिया इस्तीफा अन्नामलाई के इस्तीफे के कुछ ही समय बाद तमिलनाडु भाजपा की प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना इस्तीफा साझा करते हुए प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने की जानकारी दी। उनके इस्तीफे को भी राज्य भाजपा में बढ़ते असंतोष और अन्नामलाई के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। युवा मोर्चा के नेता ने भी छोड़ा साथ भाजपा युवा मोर्चा की तमिलनाडु इकाई के कानूनी संयोजक अभिलाष गोपीनाथ ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि अन्नामलाई के नेतृत्व, ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन के प्रति समर्पण ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वे अन्नामलाई के राजनीतिक विजन और विचारों का समर्थन करते रहेंगे। नई राजनीति का दावा कर रहे हैं अन्नामलाई पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने भाजपा छोड़ने के बाद एक नए राजनीतिक आंदोलन की घोषणा की है। उनका कहना है कि यह पहल व्यक्ति-पूजा, चाटुकारिता और वंशवादी राजनीति से अलग आम लोगों की राजनीति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि विचार और सामाजिक परिवर्तन पर आधारित होगा। उन्होंने अपने अभियान का मूल मंत्र “मारुवोम, मातृवोम” (खुद को बदलें, बदलाव लाएं) बताया। किसी दल से टकराव नहीं, वैकल्पिक राजनीति पर जोर अन्नामलाई ने स्पष्ट किया है कि उनका नया राजनीतिक अभियान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों को अपने विचार रखने का अधिकार है और उनका उद्देश्य केवल जनता के सामने एक वैकल्पिक राजनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर आंदोलन की नीतियों और कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। वेबसाइट लॉन्च होते ही हजारों समर्थक जुड़े अपने नए राजनीतिक अभियान को संगठित करने के लिए अन्नामलाई ने एक विशेष वेबसाइट भी लॉन्च की है। उनके अनुसार, वेबसाइट शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 8.9 लाख लोगों ने स्वयंसेवक के रूप में पंजीकरण कराया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा से लगातार हो रहे इस्तीफे और अन्नामलाई के नए अभियान को मिल रहा शुरुआती समर्थन तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत हो सकता है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
TMC Former MLA
बम विस्फोट मामले में फरार चल रहे TMC के पूर्व विधायक को NIA ने किया गिरफ्तार

कोलकाता, एजेंसियां।  एनआईए की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बम विस्फोट मामले में फरार चल रहे टीएमसी के पूर्व विधायक को गिरफ्तार कर लिया है। एनआईए की टीम ने पश्चिम बंगाल के चर्चित भांगड़ बम विस्फोट मामले में यह कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मामले के मुख्य संदिग्ध और फरार चल रहे पूर्व विधायक शौकत मोल्ला को दक्षिण 24 परगना जिले से गिरफ्तार किया है। चुनाव से पहले बम बनाते समय हुआ था धमाका एनआईए की जांच के मुताबिक, यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले का है। जब अवैध रूप से क्रूड बम (कच्चा बम) बनाने के दौरान एक जोरदार विस्फोट हुआ था। इस धमाके में बम बनाने वाले एक शख्स की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। साजिश रचने और सबूत मिटाने का आरोप शौकत मोल्ला इस पूरे मामले में चौथे आरोपी हैं, जिन्हें गिरफ्तार किया गया है। एनआईए की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि पूर्व विधायक ही इस पूरी साजिश के मुख्य सूत्रधार थे। उन्होंने ही अन्य आरोपियों को बम बनाने के निर्देश दिए थे। यही नहीं, विस्फोट होने के बाद कानून के शिकंजे से बचने के लिए मोल्ला ने आरोपियों को घटनास्थल से सबूत मिटाने और दृश्य के साथ छेड़छाड़ करने का भी आदेश दिया था।

Unknown जून 6, 2026 0
Tamil Nadu Chief Minister Joseph Vijay announces support for Congress in Rajya Sabha bypoll
राज्यसभा चुनाव से पहले विजय का बड़ा फैसला, सहयोगी कांग्रेस को सौंपी सीट

  तमिलनाडु की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने राज्यसभा की रिक्त सीट अपने सहयोगी दल कांग्रेस को देने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, आगामी राज्यसभा उपचुनाव में गठबंधन की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया जाएगा। सरकार गठन में कांग्रेस ने निभाई थी अहम भूमिका हालिया विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या से पीछे रहने के बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों का समर्थन देकर विजय के नेतृत्व वाली सरकार के गठन का रास्ता साफ किया था। इसके बाद अन्य सहयोगी दलों ने भी समर्थन देकर गठबंधन को मजबूत किया। इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट यह उपचुनाव ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के वरिष्ठ नेता सी. वी. शनमुगम के इस्तीफे के कारण कराया जा रहा है। विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते यह सीट रिक्त हो गई और उपचुनाव की आवश्यकता पड़ी। 18 जून को होगा मतदान निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, इस सीट के लिए मतदान 18 जून को कराया जाएगा। नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार निर्धारित तिथि तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद नामांकन की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। गठबंधन राजनीति को मिलेगा नया संदेश राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस को राज्यसभा सीट देने का निर्णय टीवीके और कांग्रेस के बीच मजबूत होते राजनीतिक संबंधों का संकेत है। यह कदम न केवल गठबंधन सहयोगियों के बीच विश्वास बढ़ाने वाला माना जा रहा है, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीतियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यसभा में कांग्रेस की स्थिति मजबूत करने की कोशिश कांग्रेस को यह सीट मिलने से उच्च सदन में उसकी उपस्थिति को मजबूती मिल सकती है। वहीं, टीवीके ने इस फैसले के जरिए सहयोगी दलों के साथ सामंजस्य और साझेदारी की राजनीति को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस इस सीट के लिए किस उम्मीदवार को मैदान में उतारती है और चुनावी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Tamil Nadu CM Vijay administers cabinet expansion as IUML and VCK MLAs take oath as ministers
तमिलनाडु में सीएम विजय का फिर कैबिनेट विस्तार, IUML और VCK के विधायक बने मंत्री

C. Joseph Vijay ने शुक्रवार को अपने मंत्रिमंडल का एक और विस्तार किया। इस विस्तार के साथ तमिलनाडु सरकार में मंत्रियों की संख्या संविधान द्वारा निर्धारित अधिकतम सीमा तक पहुंच गई है। इस बार Indian Union Muslim League (IUML) और Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) के एक-एक विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। ए.एम. शाहजहां और वन्नी अरासु ने ली मंत्री पद की शपथ आईयूएमएल विधायक A. M. Shahjahan और वीसीके विधायक Vanni Arasu ने शुक्रवार को मंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar ने लोक भवन में आयोजित समारोह में दोनों नेताओं को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शाहजहां Papanasam विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जबकि वन्नी अरासु Tindivanam सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। मंत्रियों की संख्या पहुंची 35 नए विस्तार के बाद मुख्यमंत्री विजय समेत मंत्रियों की कुल संख्या 35 हो गई है, जो राज्य में संवैधानिक सीमा के बराबर मानी जा रही है। इस विस्तार के जरिए विजय सरकार ने अपने सहयोगी दलों को भी सत्ता में प्रतिनिधित्व देने की रणनीति को आगे बढ़ाया है। गुरुवार को भी हुआ था बड़ा विस्तार इससे पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री विजय ने अपने मंत्रिमंडल में 23 मंत्रियों को शामिल किया था। इनमें 21 विधायक उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) से थे, जबकि दो मंत्री कांग्रेस कोटे से बनाए गए थे। वहीं, 10 मई को जब विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उनके साथ नौ विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी। कैसे बनी विजय सरकार? तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इस बार टीवीके को बड़ी सफलता मिली, लेकिन पार्टी पूर्ण बहुमत से करीब 10 सीट पीछे रह गई। इसके बाद Indian National Congress ने विजय को समर्थन दिया। बाद में कम्युनिस्ट पार्टी, मुस्लिम लीग और वीसीके ने भी सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया। अब सहयोगी दलों के नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर विजय ने गठबंधन को और मजबूत करने का संकेत दिया है। कम्युनिस्ट पार्टी अब भी बाहर सरकार को समर्थन देने वाली पार्टियों में से अभी तक कम्युनिस्ट पार्टी को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं कि आने वाले समय में कैबिनेट में और बदलाव हो सकते हैं।  

surbhi मई 22, 2026 0
Tamil Nadu Chief Minister C Joseph Vijay with newly inducted ministers during cabinet expansion ceremony in Chennai.
विजय सरकार का बड़ा विस्तार आज, 23 नए मंत्री लेंगे शपथ

सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार आज अपने मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार करने जा रही है। गुरुवार सुबह चेन्नई में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 23 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री की सिफारिश पर राज्यपाल ने सभी नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है। यह शपथ ग्रहण समारोह सुबह 10 बजे चेन्नई के लोक भवन में आयोजित होगा। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नए मंत्रियों के शामिल होने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस की सरकार में वापसी इस कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी राजनीतिक खासियत कांग्रेस की सरकार में एंट्री मानी जा रही है। लंबे समय बाद तमिलनाडु में किसी क्षेत्रीय दल के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस को प्रतिनिधित्व मिला है। कांग्रेस के दो विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं। ये विधायक बनेंगे मंत्री नई कैबिनेट में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। मंत्री पद की शपथ लेने वालों में थूथुकुडी से श्रीनाथ, अविनाशी से कमाली एस, कुमारपालयम से सी विजयलक्ष्मी और कांचीपुरम से आरवी रंजीतकुमार शामिल हैं। इसके अलावा कुंभकोणम से विनोद, तिरुवदानई से राजीव, कडलूर से बी राजकुमार, अरक्कोनम से वी गांधीराज और ओट्टापिडारम से मथन राजा पी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। सूची में राजपालयम से जगदेश्वरी के, किल्लियूर से कांग्रेस विधायक राजेश कुमार एस, ईरोड ईस्ट से एम विजय बालाजी, रासीपुरम से लोगेश तमिलसेल्वन डी और सेलम साउथ से विजय तमिलन पार्थिबन ए के नाम भी शामिल हैं। इसके साथ ही श्रीरंगम से रमेश, मेलूर से कांग्रेस विधायक पी विश्वनाथन, वेलाचेरी से कुमार आर, श्रीपेरंबदूर से थेन्नारासु के और कोयंबटूर नॉर्थ से वी संपत कुमार भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। अंतिम सूची में अरंथांगी से मोहम्मद फरवास जे, तांबरम से डी सरथकुमार, डॉ. राधाकृष्णन नगर से एन मैरी विल्सन और किनाथुकादावु से विग्नेश के को भी शामिल किया गया है। सरकार को मिलेगी नई ऊर्जा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विस्तार के जरिए विजय सरकार संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की रणनीति इस कैबिनेट विस्तार में साफ दिखाई दे रही है।  

surbhi मई 21, 2026 0
MK Stalin and actor Vijay filing nomination in Tamil Nadu elections 2026 with supporters gathered
Assembly Election 2026: तमिलनाडु में चुनावी मुकाबला तेज, एम.के. स्टालिन और विजय ने भरा नामांकन

देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। तमिलनाडु समेत असम, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी में चुनाव प्रचार तेज हो गया है। इस बीच तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और अभिनेता से नेता बने विजय ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया। स्टालिन ने कोलाथुर से भरा पर्चा, जताया भरोसा डीएमके प्रमुख स्टालिन ने चेन्नई की कोलाथुर सीट से नामांकन दाखिल किया। यह सीट वे 2011 से लगातार जीतते आ रहे हैं। नामांकन के बाद उन्होंने रोड शो भी किया और दावा किया कि उनकी पार्टी इस बार भी भारी बहुमत से सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के वादों पर जनता को भरोसा है और पिछले कार्यकाल में किए गए कामों का फायदा उन्हें चुनाव में मिलेगा। विजय का सियासी डेब्यू, पेरंबूर से मैदान में तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार विजय ने भी पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल कर राजनीति में औपचारिक एंट्री कर ली है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। विजय के नामांकन के दौरान भारी भीड़ और समर्थकों का उत्साह देखने को मिला। वे इस चुनाव के जरिए अपनी लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदलने की कोशिश करेंगे। चुनावी मैदान में बढ़ी टक्कर विजय की एंट्री ने तमिलनाडु चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ सत्ताधारी डीएमके अपनी उपलब्धियों के दम पर मैदान में है, वहीं दूसरी ओर नए चेहरे के रूप में विजय का करिश्मा भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अन्य राज्यों में भी तेज प्रचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चुनावी राज्यों में सक्रिय हैं और ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत संवाद’ अभियान के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ रहे हैं। बीजेपी को असम और पुडुचेरी में जीत का भरोसा जताया गया है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Bihar Assistant Professor
जॉब्स

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0