Chirag Paswan

Bihar cabinet expansion buzz as new ministers may take oath soon
बिहार में कैबिनेट विस्तार की उलटी गिनती, 3 या 6 मई को शपथ ले सकते हैं नए मंत्री

बिहार : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की वोटिंग खत्म होते ही बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक 3 मई या 6 मई को नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। शपथ की तारीख पर मंथन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कैबिनेट विस्तार की तारीख भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगी। पश्चिम बंगाल से मिलने वाले राजनीतिक फीडबैक के आधार पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। अगर स्थिति अनुकूल रही तो 6 मई को विस्तार संभव है, जबकि किसी भी अनिश्चितता की स्थिति में यह प्रक्रिया 3 मई को पहले ही पूरी की जा सकती है। कितने मंत्री बन सकते हैं? बिहार में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। हालांकि, सभी पद एक साथ भरे जाने की संभावना कम है। पहले की तरह कुछ सीटें खाली रखी जा सकती हैं, ताकि भविष्य में राजनीतिक संतुलन साधा जा सके। क्या होगा सीट बंटवारे का फॉर्मूला? नई सरकार में भले ही मुख्यमंत्री भाजपा से हों, लेकिन जनता दल यूनाइटेड को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। पुराने फॉर्मूले के तहत जदयू को संख्या और अहम मंत्रालयों में प्राथमिकता मिल सकती है। चर्चा है कि भाजपा के करीब 14 और जदयू के 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। किन नेताओं की हो सकती है वापसी? पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की वापसी लगभग तय मानी जा रही है। उन्हें कौन सा विभाग मिलेगा, इसे लेकर अभी अटकलें जारी हैं। राजस्व, भूमि सुधार और पथ निर्माण जैसे बड़े मंत्रालयों पर उनकी दावेदारी मानी जा रही है। सहयोगी दलों को भी मिलेगा मौका एनडीए के सहयोगी दलों को भी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को पहले की तरह जगह मिल सकती है। इन दलों से जुड़े प्रमुख नेता जैसे जीतन राम मांझी, चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा के करीबी चेहरों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। नजरें पहली कैबिनेट पर अब बिहार की राजनीति में सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी अपनी पहली कैबिनेट में किन चेहरों को शामिल करते हैं और कौन से अहम विभाग किस दल के हिस्से में जाते हैं।  

surbhi मई 1, 2026 0
Archana Gautam reveals her one-sided crush on Raghav Chadha during an interview
अर्चना गौतम का खुलासा: राघव चड्ढा पर था एकतरफा प्यार, इंटरव्यू में कही दिल की बात

रियलिटी शो Bigg Boss 16 से चर्चा में आईं Archana Gautam ने हाल ही में अपने निजी जीवन को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि उन्हें कभी Raghav Chadha पर एकतरफा क्रश था। अर्चना ने साफ शब्दों में कहा, “क्रश तो था, लेकिन फिर उन्होंने शादी कर ली।” उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। बिग बॉस में भी किया था इशारा अर्चना गौतम ने बताया कि जब उन्होंने बिग बॉस 16 के दौरान एक सांसद को लेकर इशारा किया था, तब उनके मन में राघव चड्ढा ही थे। उस समय यह बात साफ नहीं हो पाई थी, लेकिन अब उन्होंने खुद इसका खुलासा कर दिया है। अपने पसंदीदा लाइफ पार्टनर को लेकर क्या बोलीं? फिल्मीज्ञान को दिए इंटरव्यू में अर्चना ने अपनी पर्सनल पसंद के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे लड़के पसंद हैं जो “धाकड़, राउडी और दबंग” पर्सनैलिटी के हों। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका मतलब गलत तरीके के ‘गुंडे’ से नहीं है, बल्कि ऐसे व्यक्ति से है जो मजबूत हो और जिसके सामने कोई गलत बात न कर सके। इसके अलावा उन्होंने Chirag Paswan की तारीफ करते हुए उन्हें अच्छा इंसान बताया। “अब मैं खुद बनना चाहती हूं ‘गुंडी’” अर्चना ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब वह खुद भी “गुंडी” बनने पर फोकस कर रही हैं, ताकि दूसरों की रक्षा कर सकें। उनका मानना है कि आज के समय में निडर और बोल्ड व्यक्तित्व वाले लोग ही आगे बढ़ते हैं। अर्चना गौतम का सफर अर्चना गौतम का करियर काफी विविध रहा है। 2018 में मिस बिकिनी इंडिया का खिताब जीता फिल्मों में काम: ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’, ‘हसीना पार्कर’ बिग बॉस 16 से मिली असली पहचान ‘खतरों के खिलाड़ी’, ‘सेलिब्रिटी मास्टरशेफ’ जैसे शोज में हिस्सा 2022 में हस्तिनापुर से चुनाव भी लड़ा उनकी बेबाक और खुलकर बोलने वाली छवि उन्हें बाकी सितारों से अलग बनाती है।  

surbhi अप्रैल 30, 2026 0
cabinet expansion discussions after Bengal elections
बंगाल चुनाव के बाद बिहार कैबिनेट विस्तार, बदल सकते हैं सत्ता समीकरण

पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होते ही मुख्यमंत्री Samrat Choudhary अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं। इससे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। चुनाव के बाद होगा बड़ा फैसला सूत्रों के अनुसार, अभी भाजपा के कई बड़े नेता बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं। जैसे ही चुनावी प्रक्रिया पूरी होगी, बिहार में कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप दिया जा सकता है। फिलहाल सरकार का कामकाज मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Choudhary और Bijendra Prasad Yadav संभाल रहे हैं। 36 मंत्रियों की सीमा संवैधानिक नियमों के तहत बिहार में अधिकतम 36 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। ऐसे में: जातीय संतुलन क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व राजनीतिक समीकरण इन सभी को साधना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। कुछ मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी कैबिनेट विस्तार के दौरान कुछ पुराने चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कमजोर प्रदर्शन वाले मंत्रियों पर गाज गिर सकती है नए चेहरों को मौका देकर सरकार संदेश देना चाहती है जवाबदेही और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी भाजपा का बढ़ सकता है दबदबा इस बार कैबिनेट में एक बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि भाजपा की हिस्सेदारी बढ़े। कई अहम विभाग अभी मुख्यमंत्री के पास हैं विस्तार के बाद इनका बंटवारा सहयोगी दलों में होगा इससे सत्ता संतुलन में बदलाव देखने को मिल सकता है। सहयोगी दलों की भी अहम भूमिका मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले कुछ नाम सहयोगी दलों पर निर्भर करेंगे: Upendra Kushwaha अपने खेमे से नाम तय करेंगे Chirag Paswan के पास LJP (रामविलास) कोटे का फैसला रहेगा बिहार कैबिनेट विस्तार सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक संदेश भी होगा। इससे यह तय होगा कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति किस दिशा में जाएगी और किन चेहरों पर सरकार भरोसा जताती है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Poster outside BJP office in Patna demanding Chirag Paswan as Bihar Chief Minister
“बिहार का CM सिर्फ चिराग हो” – पटना में BJP कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर से तेज हुई सियासी हलचल

  नीतीश कुमार के नामांकन के बाद बदला राजनीतिक माहौल मुख्यमंत्री Nitish Kumar द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच एनडीए खेमे के भीतर से एक नई मांग सामने आई है, जिसने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।   चिराग पासवान को CM बनाने की मांग लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री Chirag Paswan को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाई है। राजधानी Patna में Bharatiya Janata Party के कार्यालय के बाहर इस मांग को लेकर कई पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टर सामने आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चा का दौर तेज हो गया है।   पोस्टर में लिखे गए नारे बने चर्चा का विषय पोस्टरों में लिखा गया है- “ना दंगा हो, ना फसाद हो, बिहार का CM सिर्फ चिराग हो।” इसके साथ ही एक अन्य पंक्ति में लिखा गया है- “सजाओ इनके सर पर ताज, तभी आएगा बिहार में स्वर्ण काल।” इन नारों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि यदि बिहार में एनडीए की सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री पद के लिए चिराग पासवान को आगे किया जाना चाहिए।   ‘मोदी के हनुमान’ वाला संदेश भी शामिल पोस्टर में आगे लिखा गया है- “मोदी जी का मिला अपने हनुमान को आशीर्वाद, चिराग होंगे बिहार के नए सरताज।” इसके अलावा यह भी लिखा गया है कि “बिहार मांग रहा है चिराग, अब समय आ गया है युवा मुख्यमंत्री बनाने का। NDA की होगी सरकार, CM होगा सिर्फ चिराग।”   LJP (रामविलास) नेताओं की पहल जानकारी के अनुसार, ये पोस्टर Lok Janshakti Party (Ram Vilas) के पटना जिला अध्यक्ष इमाम गजाली की ओर से लगवाए गए हैं। पोस्टर लगने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या भविष्य में एनडीए गठबंधन चिराग पासवान को मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में आगे बढ़ा सकता है।   राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा हालांकि इस मांग पर अभी तक NDA के शीर्ष नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पोस्टर के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Chirag Paswan dismisses speculation about Nitish Kumar moving to Rajya Sabha and leadership change in Bihar
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर विराम: चिराग पासवान बोले – ‘बिहार में नेतृत्व परिवर्तन का सवाल ही नहीं’

राजनीतिक चर्चाओं के बीच NDA नेताओं का स्पष्ट संदेश बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar के संभावित राज्यसभा जाने की खबरों से सियासी हलचल तेज हो गई थी। लेकिन अब केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख Chirag Paswan ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। चिराग पासवान ने साफ शब्दों में कहा, “मुख्यमंत्री बदलने को लेकर कोई चर्चा नहीं है। नीतीश कुमार ही बिहार का नेतृत्व करते रहेंगे। हमारी डबल इंजन सरकार मजबूती से काम कर रही है।” राज्यसभा उम्मीदवार पर चर्चा जारी, पांचवां नाम तय नहीं चिराग पासवान ने बताया कि NDA गठबंधन की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए पांचवें उम्मीदवार का नाम अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के भीतर नामों को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है और अब चुनाव नजदीक आने के साथ प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने यह भी बताया कि भाजपा की सूची जारी हो चुकी है और Nitin Nabin को बड़ी जिम्मेदारी मिलने पर बधाई दी। हालांकि NDA की ओर से पांचवां नाम अभी तय नहीं हुआ है और बातचीत जारी है। निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर क्या कहा? मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की अटकलों पर भी चिराग पासवान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से निशांत कुमार, उनके परिवार और उनकी पार्टी का व्यक्तिगत निर्णय है। “जब तक वह सार्वजनिक जीवन में नहीं आते, तब तक इस पर बयान देना ठीक नहीं है। जब यह फैसला गठबंधन के स्तर पर आएगा, तब हम अपनी बात रखेंगे। मैं युवाओं का राजनीति में स्वागत करता हूं, हमारे प्रधानमंत्री भी युवाओं को आगे बढ़ने का मौका देते हैं,” पासवान ने कहा। जेडीयू सूत्रों से उठी थीं चर्चाएं इससे पहले Janata Dal (United) के कुछ सूत्रों के हवाले से खबरें आई थीं कि नीतीश कुमार राज्यसभा जा सकते हैं। यह चर्चा तब तेज हुई जब Election Commission of India ने राज्यसभा की द्विवार्षिक चुनाव प्रक्रिया की घोषणा की। हालांकि केंद्रीय मंत्री Giriraj Singh ने भी इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा, “होली के समय ऐसी मजाकिया बातें चलती रहती हैं। नीतीश कुमार हमारे मुख्यमंत्री हैं।” 16 मार्च को मतदान, 37 सीटों पर होगा चुनाव चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना सहित 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होगा। इन राज्यों से चुने गए सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 मार्च तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। मतदान 16 मार्च को होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना भी पूरी कर ली जाएगी। फिलहाल स्थिर है बिहार की राजनीति NDA नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की कोई योजना नहीं है। राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी तरह का आधिकारिक बदलाव सामने नहीं आया है।  

surbhi मार्च 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0