CJP Protest

Abhijeet Deepke addressing supporters at Jantar Mantar, stating CJP protest will continue despite Dharmendra Pradhan's resignation.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी CJP का आंदोलन जारी, अभिजीत दीपके बोले- दो अहम मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगे

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद भी जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन समाप्त नहीं होगा। कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं और जब तक उन पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। हालांकि, CJP नेतृत्व ने इसे आंदोलन की अंतिम जीत मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह केवल उनकी मांगों की दिशा में पहला कदम है। अभिजीत दीपके ने रखीं दो प्रमुख मांगें अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बावजूद संगठन अपनी दो महत्वपूर्ण मांगों पर अडिग है। पहली मांग उन छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की है, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा विवाद के दौरान आत्महत्या की। दीपके ने मांग की कि ऐसे प्रत्येक परिवार को एक करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा दिया जाए। दूसरी मांग 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर है। उन्होंने कहा कि जिन पुलिस अधिकारियों ने बल प्रयोग किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। "आंदोलन तब तक जारी रहेगा" दीपके ने कहा कि उनकी मांगें केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं थीं। उनका कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप में उनकी सभी मांगों पर निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई दिनों से लोग यह मान रहे थे कि इस्तीफा संभव नहीं है, लेकिन छात्रों के लगातार आंदोलन और दबाव के कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक आंदोलन की सफलता बताया और कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से बदलाव संभव है। छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग CJP ने यह भी मांग उठाई कि 20 जुलाई के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों पर यदि कोई कानूनी मामले दर्ज किए गए हैं तो उन्हें वापस लिया जाए। संगठन का कहना है कि छात्रों के खिलाफ दर्ज कार्रवाई उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है, इसलिए सरकार को इस दिशा में भी सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। इसके अलावा, दीपके ने रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। आंदोलन पर आगे क्या? संगठन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में सरकार के साथ बातचीत के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल प्रदर्शन जारी रहेगा और CJP का कहना है कि जब तक सभी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। उधर, NEET परीक्षा विवाद और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर देशभर में छात्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से अलग-अलग स्तर पर आवाज उठाई जा रही है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर बनी हुई है.  

anmol जुलाई 25, 2026 0
Supreme Court to hear petitions over alleged police lathicharge on NEET protestors
NEET Protest: छात्रों पर लाठीचार्ज मामले में SC सख्त, CJP की याचिकाओं पर सोमवार को होगी सुनवाई

NEET Protest: NEET-UG पेपर लीक के विरोध में संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार (27 जुलाई) को सुनवाई करेगा। अदालत ने पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। याचिकाकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती की न्यायिक जांच और कार्रवाई की मांग की है। संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को दी चुनौती यह मामला प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष उठाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और गोपाल शंकरनारायणन ने याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। याचिकाओं में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी गई है। उस दिन CJP के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र और युवा कथित NEET पेपर लीक के विरोध में तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। परीक्षा सुधारों पर केंद्र और NTA से रिपोर्ट तलब इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को परीक्षा प्रणाली में किए जा रहे सुधारों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से इन प्रमुख बिंदुओं पर प्रगति रिपोर्ट मांगी है: परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुरक्षा व्यवस्था प्रशासनिक सुधार मानव संसाधन प्रबंधन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रणाली यह निर्देश फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया। स्थायी सुधारों पर सुप्रीम कोर्ट का जोर केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठा रही है तथा जल्द ही विस्तृत हलफनामा दाखिल करेगी। इस पर जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने कहा कि सुधार केवल अस्थायी उपायों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि परीक्षा प्रणाली में स्थायी और संस्थागत बदलाव जरूरी हैं। NTA से 10 क्षेत्रों में मांगी जानकारी सुप्रीम कोर्ट ने NEET सुधारों के लिए गठित उच्चाधिकार समिति (HPC) की सिफारिशों को लागू करने की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। अदालत ने परीक्षा के तीनों चरणों से जुड़े सुधारों पर जानकारी देने को कहा है— परीक्षा से पहले की व्यवस्था परीक्षा के दौरान सुरक्षा और निगरानी परीक्षा के बाद की प्रक्रिया इसके अलावा प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था तथा राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। डिजिटल सुरक्षा और पहचान सत्यापन पर भी सवाल सुप्रीम कोर्ट ने प्रश्नपत्रों और परीक्षा डेटा की सुरक्षा को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर सुरक्षा में चूक पूरी परीक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने डेटा ट्रांसफर, स्टोरेज, साइबर सुरक्षा और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही, उम्मीदवारों की पहचान सत्यापन के लिए डिजियात्रा जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है। सुधार प्रक्रिया पर रहेगी सुप्रीम कोर्ट की नजर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह NEET परीक्षा प्रणाली में सुधार की पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी करेगा। अदालत का कहना है कि उद्देश्य केवल वर्तमान विवाद का समाधान नहीं, बल्कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है।  

kalpana जुलाई 25, 2026 0
CJI Suryakant
छात्र प्रदर्शन मामले में CJI सूर्यकांत ने मीडिया रिपोर्टों को बताया गलत, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल दखल से किया इनकार

नई दिल्ली, एजेंसियां। जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कुछ मीडिया रिपोर्टों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि अदालत के रुख और टिप्पणियों को सही संदर्भ में पेश किया जाना चाहिए।   वीडियो देखने और स्वत: संज्ञान लेने की मांग पर कोर्ट का रुख   सुनवाई के दौरान एक वकील ने प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की थी। इस पर CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि केवल वीडियो के आधार पर तुरंत कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।   "समय बर्बाद न करें" टिप्पणी पर विवाद   कुछ रिपोर्टों में CJI की टिप्पणी को अलग तरीके से पेश किए जाने पर विवाद हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के पास हर वायरल वीडियो देखने का समय नहीं है और न्यायिक प्रक्रिया के तहत उचित तरीके से मामला लाया जाना चाहिए।   छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मामला   CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर आरोप लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनके साथ सख्ती हुई, जबकि प्रशासन का पक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा है। इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।   CJI ने मीडिया रिपोर्टिंग में सावधानी की बात कही   CJI सूर्यकांत ने इससे पहले भी कहा है कि न्यायिक टिप्पणियों को संदर्भ से हटाकर पेश करने से गलत धारणा बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों के नाम से चलने वाली गलत सूचनाओं से भी सावधान रहने की अपील की है।

abhishek singh जुलाई 24, 2026 0
Pakistan Foreign Ministry responds to questions on the CJP protest in India, calling it an internal matter
CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला

Pakistan on CJP Protest: दिल्ली में नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन और छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज पर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान ने इस पूरे विवाद को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान ने क्या कहा? पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी से प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पूछा गया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को क्या वह मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा। पेपर लीक पर सरकार की तैयारी नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों की तेज सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों को जल्द सख्त सजा दिलाने की घोषणा की है। सरकार परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए कानून में संशोधन की तैयारी भी कर रही है। CJP ने उठाए व्यवस्था पर सवाल प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP ने कहा कि केवल दोषियों को सजा देने से समस्या खत्म नहीं होगी। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि पेपर बार-बार लीक क्यों हो रहे हैं। रांका ने आरोप लगाया कि व्यवस्था में जवाबदेही की कमी है। उन्होंने कहा कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, सिस्टम को मजबूत नहीं बनाया जाएगा और दोषियों के मन में कानून का डर पैदा नहीं होगा, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। सरकार और CJP के बीच गतिरोध केंद्र सरकार का कहना है कि वह आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे के दौरान CJP को चार बार बातचीत का प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन संगठन की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों से उनके कार्यालय या आवास सहित किसी भी उपयुक्त स्थान पर चर्चा के लिए तैयार है। हिंसा में शामिल लोगों पर कार्रवाई की तैयारी सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। जिन लोगों की हिंसा में संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ पासपोर्ट रद्द करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। सुरक्षा के मद्देनजर बढ़ाई गई सतर्कता दिल्ली में प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में एहतियात के तौर पर कई दुकानें, कार्यालय और रेस्तरां निर्धारित समय से पहले बंद कराए गए हैं। वहीं CJP ने ऐलान किया है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Hollywood actor John Cusack shares a social media post supporting the CJP-led student protest over the NEET paper leak in India.
John Cusack Supports CJP Protest: CJP आंदोलन के समर्थन में उतरे हॉलीवुड स्टार जॉन कुसैक, सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस

John Cusack on CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिलने लगा है। हॉलीवुड अभिनेता जॉन कुसैक (John Cusack) ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जारी छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उनके इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। जहां कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन बताया, वहीं कई यूजर्स ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में दखल करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई। जॉन कुसैक ने शेयर की छात्र आंदोलन से जुड़ी पोस्ट 'सेरेंडिपिटी', 'हाई फिडेलिटी', 'कॉन एयर' और '2012' जैसी फिल्मों के लिए मशहूर हॉलीवुड अभिनेता जॉन कुसैक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय का एक लेख साझा किया। इस लेख में संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग की आलोचना की गई थी। पोस्ट साझा करते हुए कुसैक ने लिखा कि उन्हें अपने "पसंदीदा साथी कॉकरोच" की ओर से अच्छी खबर मिली है और उन्होंने आंदोलन से जुड़ी रिपोर्ट को साझा किया। इसके बाद उनका पोस्ट तेजी से वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया जॉन कुसैक की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा नजर आया। कुछ यूजर्स ने उनके समर्थन का स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर की। कई यूजर्स ने लिखा कि किसी विदेशी अभिनेता को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें पहले अपने देश के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं कुछ प्रतिक्रियाओं में लिखा गया कि भारतीय राजनीति और छात्र आंदोलनों पर बाहरी हस्तक्षेप उचित नहीं है। पहले भी भारत के मुद्दों पर रख चुके हैं राय यह पहली बार नहीं है जब जॉन कुसैक ने भारत से जुड़े किसी मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी हो। इससे पहले वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उन्होंने सोशल मीडिया पर छात्रों का समर्थन किया था और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। क्या है CJP का आंदोलन? दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की है। हाल के दिनों में 'चलो संसद' मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे थे। इस दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने भी कार्रवाई की। प्रधानमंत्री मोदी ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामले पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और विद्यार्थियों का एक वर्ष खराब न हो, इसलिए प्राथमिकता के आधार पर 22 लाख छात्रों की परीक्षाएं कराई गईं। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।  

surbhi जुलाई 24, 2026 0
CJP founder Abhijeet Deepke addresses supporters during the ongoing protest at Jantar Mantar
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा CJP, अभिजीत दीपके बोले- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रहेगा जारी

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन का अनशन समाप्त किए जाने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ कर दिया है कि जंतर-मंतर पर उनका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन खत्म नहीं होगा। NEET प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर CJP के नेतृत्व में छात्र पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, जवाबदेही तय करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अभिजीत दीपके ने क्या कहा? CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने अपने साहस और त्याग से देश का ध्यान छात्रों के मुद्दों की ओर आकर्षित किया। उन्होंने लिखा कि देश के लिए सोनम वांगचुक का जीवन बेहद महत्वपूर्ण है और उनके अनशन खत्म होने से राहत मिली है। हालांकि दीपके ने स्पष्ट किया, "CJP का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन अभी खत्म नहीं होगा। जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।" 'Charging up...' पोस्ट से बढ़ी चर्चा अभिजीत दीपके ने एक अन्य पोस्ट में "Charging up..." लिखते हुए एक तस्वीर साझा की, जिसमें एक व्यक्ति के हाथ में ड्रिप लगी हुई दिखाई दे रही है। इस पोस्ट को आंदोलन जारी रहने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सोनम वांगचुक ने खत्म किया 26 दिन का अनशन सोनम वांगचुक ने गुरुवार (23 जुलाई) देर रात 26 दिनों से जारी अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद यह फैसला लिया गया। सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा करने और कथित पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों को राहत देने जैसे मुद्दों पर विचार करने का भरोसा दिया है। CJP अपनी मांगों पर कायम सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बावजूद CJP का कहना है कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Security tightened near Jantar Mantar as CJP protest continues and several Delhi Metro stations remain closed
CJP Protest Live: 17 मेट्रो स्टेशन बंद, आज सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच हो सकती है बातचीत

NEET पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का आंदोलन शुक्रवार (24 जुलाई) को भी जारी है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन का आमरण अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन CJP ने साफ कर दिया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रहेगा। इस बीच आज सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होने की संभावना है। दिल्ली में 17 मेट्रो स्टेशन बंद सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने शुक्रवार सुबह 17 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है। इससे पहले गुरुवार को 16 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। आज सरकार और CJP के बीच हो सकती है बैठक एएनआई के मुताबिक, CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि आज दोपहर 12:30 बजे सरकार के प्रतिनिधिमंडल और CJP के बीच बातचीत हो सकती है। हालांकि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके पहले कह चुके हैं कि बातचीत केवल जंतर-मंतर पर ही होगी। बैठक का स्थान अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ अनशन सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात वीडियो संदेश जारी कर कहा कि सरकार पहले भी आश्वासन दे रही थी, लेकिन इस बार उन्हें लिखित आश्वासन मिला है। इसके बाद उन्होंने 26 दिन से जारी अपना आमरण अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। 25 से अधिक छात्र हिरासत में गुरुवार को जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे 25 से अधिक छात्रों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इनमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र भी शामिल थे। पुलिस के अनुसार, छात्रों के पास प्रदर्शन से जुड़े पोस्टर थे और उन्हें एहतियात के तौर पर हिरासत में लेकर दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन CJP ने 20 जून से जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था। हालांकि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses students through a video message on paper leak reforms and stricter laws
छात्रों के नाम PM मोदी का वीडियो संदेश, बोले- पेपर लीक पर कैबिनेट में होंगे और सख्त फैसले

NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि सरकार पेपर लीक को बेहद गंभीरता से ले रही है और 24 जुलाई को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर और कड़े कानूनी प्रावधानों वाले मसौदे पर चर्चा की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। सरकार दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पेपर लीक पर बनेगा और सख्त कानून प्रधानमंत्री ने बताया कि संबंधित विभागों ने प्रस्तावित विधेयक का मसौदा तैयार कर लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे संसद के मौजूदा सत्र में पेश करने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि नए कानून में— पेपर लीक के आरोपियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान होगा। मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी। परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए प्रावधान जोड़े जाएंगे। "22 लाख छात्रों का साल बचाना हमारी प्राथमिकता थी" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार का पहला लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो। इसी वजह से कम समय में दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई, जिसमें करीब 22 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि पुनर्परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया जा चुका है। "दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया" प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। पेपर लीक मामलों में शामिल कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और जांच लगातार जारी है। उन्होंने दोहराया कि सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगी। CJP ने उठाए सवाल प्रधानमंत्री के संदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कहा कि केवल दोषियों को सजा देने की घोषणा पर्याप्त नहीं है। संगठन का कहना है कि असली सवाल यह है कि बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही कब तय होगी। CJP ने दोहराया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा। आशुतोष रांका बोले- समस्या की जड़ पर कार्रवाई हो CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया स्वागतयोग्य है, लेकिन इससे मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि केवल दोषियों को सजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिससे भविष्य में पेपर लीक की घटनाएं ही न हों। उनके अनुसार, लगातार हो रहे पेपर लीक परीक्षा प्रणाली की गंभीर खामियों की ओर संकेत करते हैं। बातचीत पर भी CJP की शर्त CJP ने बताया कि सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिला है, लेकिन संगठन चाहता है कि बैठक जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर हो। संगठन का आरोप है कि सरकार केवल अपने कार्यालय में बैठक चाहती है, जिसे CJP ने स्वीकार नहीं किया। संगठन का कहना है कि बातचीत तभी सार्थक होगी, जब मांगों पर स्पष्ट निर्णय और उन्हें लागू करने की समयसीमा तय की जाए। 20 जून से जारी है आंदोलन CJP ने 20 जून से जंतर-मंतर पर कथित परीक्षा अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। इस आंदोलन में विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी भागीदारी रही है।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
CJP leaders addressing media amid ongoing protest at Jantar Mantar over NEET paper leak and education reforms
CJP Protest: 'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक नहीं रुकेगा आंदोलन', सरकार और CJP के बीच आज हो सकती है अहम बैठक

CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, सरकार और CJP के बीच शुक्रवार को बातचीत होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के प्रतिनिधि दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि सरकार की ओर से इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। CJP का दावा- सरकार पर बढ़ा दबाव CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देर रात छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी करना इस बात का संकेत है कि सरकार पर आंदोलन का दबाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना चाहिए। रांका ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती। उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दोपहर में सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत प्रस्तावित है। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हो सकती है बातचीत सूत्रों के मुताबिक, CJP की मांग पर सरकार न्यूट्रल स्थान पर बातचीत के लिए तैयार हुई है और कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बैठक होने की संभावना है। इस बैठक में आंदोलन से जुड़ी मांगों, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित नीट पेपर लीक मामले और आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। CJP का कहना है कि वह केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि लिखित आश्वासन और समयबद्ध कार्रवाई चाहता है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट पर केजरीवाल का सवाल इस बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक मामले में कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया को जमानत मिल चुकी है और सीबीआई ने अदालत में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने की बात कही थी। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यदि असली दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तो केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने सरकार पर पेपर लीक माफिया को बचाने का भी आरोप लगाया। बातचीत पर टिकी निगाहें जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। ऐसे में सरकार और CJP के बीच प्रस्तावित बैठक को आंदोलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता है या प्रदर्शन आगे भी जारी रहता है। विपक्ष भी लगातार सरकार पर हमलावर है और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
CJP आंदोलन पर सरकार की बातचीत की पेशकश और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का बयान
CJP आंदोलन पर सरकार का बातचीत का प्रस्ताव, मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- किसी भी समय चर्चा को तैयार

नई दिल्ली, एजेंसियां। पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बातचीत के लिए आगे आने की अपील की है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि सरकार प्रदर्शनकारी संगठन के प्रतिनिधियों को चार बार औपचारिक बातचीत का प्रस्ताव भेज चुकी है और किसी भी समय, किसी भी स्थान पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, सरकार के अनुसार CJP नेतृत्व ने अब तक इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है।   डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बना रही है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और वह स्वयं प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि बैठक जेपी नड्डा के कार्यालय, उनके आवास या प्रदर्शनकारियों की सुविधा के अनुसार किसी भी स्थान पर आयोजित की जा सकती है। उनका कहना है कि सरकार छात्रों के हित में सभी मुद्दों पर संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहती है।   वर्तमान विवाद पेपर लीक के मामलों, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर है। आंदोलन में शामिल युवा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग कर रहे हैं। इस बीच, 25 दिनों से अनशन पर बैठे शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने संकेत दिया है कि यदि आंदोलन में शामिल युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाते हैं, तो वह प्रदर्शनकारियों से आंदोलन स्थगित कर सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील करेंगे।   उधर, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने पेपर लीक के मामलों में समय पर कार्रवाई की है। उनके अनुसार आरोपियों की गिरफ्तारी, दोबारा परीक्षा का आयोजन और समय पर परिणाम घोषित कर छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा की गई। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार इस मुद्दे पर सक्रिय है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।   फिलहाल, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बरकरार है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत की पहल से इस विवाद का कोई समाधान निकल पाएगा।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
International media highlights the CJP student protest at Jantar Mantar in New Delhi
World Media on CJP Protest: विदेशी मीडिया में गूंजा CJP आंदोलन, The Guardian बोला- लाठीचार्ज के बाद भी नहीं रुके छात्र

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के बाद यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया की भी सुर्खियों में है। 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज, आंसू गैस और इंटरनेट प्रतिबंध के बाद भी आंदोलन जारी रहने पर दुनिया के कई प्रमुख मीडिया संस्थानों ने इसे अलग-अलग नजरिए से कवर किया है। किसी ने इसे युवाओं के बढ़ते असंतोष की आवाज बताया, तो किसी ने इसे सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा। मुख्य बातें (Key Points) 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद भी जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी। BBC ने इसे Gen Z के विरोध के नए तरीके के रूप में बताया। The New York Times ने बेरोजगारी और पेपर लीक को आंदोलन की बड़ी वजह माना। The Guardian ने पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्रों के पीछे न हटने पर जोर दिया। Financial Times ने इसे मोदी सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बताया। Al Jazeera ने इसे 2014 के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी युवा चुनौती करार दिया। पाकिस्तान के Dawn ने इसे विपक्ष के लिए राजनीतिक अवसर बताया। BBC: Gen Z के विरोध का नया तरीका BBC की रिपोर्ट के अनुसार यह सिर्फ एक छात्र आंदोलन नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी के विरोध दर्ज कराने का बदला हुआ तरीका है। रिपोर्ट में कहा गया कि आज के युवा केवल सड़कों पर उतरकर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया, मीम्स और इंस्टाग्राम रील्स के जरिए भी अपनी बात रख रहे हैं। BBC ने पुलिस कार्रवाई, इंटरनेट बंद होने और सरकार का पक्ष भी रिपोर्ट में शामिल किया है। The New York Times: बेरोजगारी और पेपर लीक से उपजा गुस्सा The New York Times ने CJP आंदोलन को नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं की नाराजगी से जोड़कर देखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में शुरू हुआ "Cockroach" आंदोलन धीरे-धीरे लाखों युवाओं की आवाज बन गया। अखबार ने कहा कि आर्थिक विकास के दावों के बावजूद युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और असंतोष ने आंदोलन को गति दी। The Guardian: पुलिस कार्रवाई के बाद भी नहीं रुके प्रदर्शनकारी ब्रिटेन के अखबार The Guardian ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को प्रमुखता से जगह दी। रिपोर्ट के अनुसार, लाठीचार्ज, आंसू गैस और इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे। अखबार ने इसे अब केवल शिक्षा सुधार का मुद्दा नहीं, बल्कि युवाओं की व्यापक राजनीतिक भागीदारी का संकेत बताया। Financial Times: सरकार के लिए बढ़ती राजनीतिक चुनौती Financial Times ने लिखा कि NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा अब केंद्र सरकार के लिए एक गंभीर राजनीतिक चुनौती बन गया है। रिपोर्ट में पुलिस कार्रवाई, सुरक्षा व्यवस्था और सरकार की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए कहा गया कि अब बहस केवल परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों तक पहुंच चुकी है। Al Jazeera: 2014 के बाद सबसे बड़ी युवा चुनौती Al Jazeera ने इस आंदोलन को 2014 के बाद मोदी सरकार के सामने उभरी सबसे बड़ी युवा चुनौती बताया। रिपोर्ट में संसद के भीतर विपक्ष के विरोध, देशभर में फैलते प्रदर्शनों, पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रियाओं का उल्लेख किया गया। चैनल के अनुसार, शिक्षा सुधार से शुरू हुआ आंदोलन अब सरकार की जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। Dawn: विपक्ष के लिए राजनीतिक अवसर पाकिस्तान के अखबार Dawn ने इस आंदोलन को विपक्ष के लिए युवाओं तक पहुंच बनाने का अवसर बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस कार्रवाई के बाद विपक्ष खुलकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आया है, जिससे उसे राजनीतिक लाभ मिल सकता है। हालांकि अखबार ने यह भी कहा कि यदि आंदोलन पर राजनीति हावी हुई, तो शिक्षा सुधार, पेपर लीक और रोजगार जैसे मूल मुद्दे पीछे छूट सकते हैं। भारत में भी जारी है आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार ने पेपर लीक मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की है, लेकिन आंदोलनकारी अपनी प्रमुख मांगों पर अब भी कायम हैं।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Police use tear gas as clashes erupt between protesters and security personnel near Jantar Mantar and Parliament Street in New Delhi.
जंतर-मंतर पर बवाल: पथराव, आंसू गैस और इंटरनेट बंद, संसद मार्ग पर देर रात तक हंगामा

राजधानी दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान 22 जुलाई की रात संसद मार्ग और जंतर-मंतर के आसपास का इलाका हिंसा की चपेट में आ गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस के गोले दागे जाने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हालात को काबू में करने के लिए भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक जवानों की तैनाती करनी पड़ी। घटना में दो एसीपी समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रमुख बातें जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव और झड़प। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। दो एसीपी सहित पांच पुलिसकर्मी घायल। मध्य दिल्ली के कई इलाकों में इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद। संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई। संसद मार्ग पर अचानक बिगड़े हालात मंगलवार रात जंतर-मंतर से सटे संसद मार्ग पर प्रदर्शन के दौरान अचानक स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पार्क होटल के पास मौजूद प्रदर्शनकारियों का एक समूह उग्र हो गया और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते कनॉट प्लेस और संसद मार्ग के आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक दोनों पक्षों के बीच तनाव बना रहा। CJP वॉलंटियर्स ने संभाला मोर्चा स्थिति को शांत कराने के लिए पुलिस ने CJP के स्वयंसेवकों की मदद ली। लाउडस्पीकर से लैस एक पुलिस बस पर वॉलंटियर को बैठाकर प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील कराई गई। वॉलंटियर्स ने कहा कि हिंसा से आंदोलन की छवि खराब होगी और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखना जरूरी है। पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले भीड़ के लगातार उग्र होने के बाद पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने कार्रवाई शुरू की। प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए और हल्का बल प्रयोग भी किया गया। इस दौरान दो एसीपी, एक इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और एक कॉन्स्टेबल घायल हो गए। सभी घायल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी, सुरक्षा बढ़ी पुलिस कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। हालात को देखते हुए जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। दंगा-रोधी वाहन और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद हिंसा और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए प्रशासन ने मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं। कई लोगों के मोबाइल फोन पर इंटरनेट सेवा बंद होने के संदेश आने लगे। सुरक्षा एजेंसियां पूरी रात हालात पर नजर बनाए रहीं। पुलिस कर रही मामले की जांच पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर उपद्रवियों की पहचान शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इलाके में सुरक्षा व्यवस्था अभी भी कड़ी रखी गई है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, याचिका खारिज

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि हर मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाय उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।   प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का आरोप   यह याचिका जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों के साथ कार्रवाई को लेकर दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ सख्ती बरती गई और उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ।   याचिका में अदालत से पुलिस कार्रवाई की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।   सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल दखल से किया इनकार   सुप्रीम कोर्ट ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि अदालत के सामने आने से पहले संबंधित कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि हर प्रशासनिक कार्रवाई को सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की प्रक्रिया उचित नहीं है।   छात्र आंदोलन को लेकर पहले से जारी है विवाद   NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली में छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो।   प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया था।   CJP आंदोलन से जुड़ा है मामला   यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उससे जुड़े प्रदर्शनकारियों के आंदोलन से संबंधित बताया जा रहा है। संगठन की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के अधिकारों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है।   सुप्रीम कोर्ट के रुख पर चर्चा तेज   सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जहां कुछ लोग इसे न्यायिक प्रक्रिया के पालन की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं, वहीं आंदोलन से जुड़े लोगों ने अदालत से अधिक संवेदनशील रुख अपनाने की उम्मीद जताई है।   फिलहाल छात्र प्रदर्शन, परीक्षा सुधार और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखी शर्त, छात्र प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने की मांग
CJP Protest: सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने के लिए सरकार के सामने रखी शर्त, छात्र प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने की मांग

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) आंदोलन के बीच पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने के लिए केंद्र सरकार के सामने शर्त रखी है। वांगचुक ने कहा है कि अगर सरकार हालिया छात्र प्रदर्शन में शामिल युवाओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट आश्वासन देती है, तो वह अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं।   25 दिनों से जारी है सोनम वांगचुक का अनशन   सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनका आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे CJP प्रदर्शन के समर्थन में है। लंबे अनशन के कारण उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।   छात्र प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने की मांग   वांगचुक ने केंद्र सरकार से अपील की है कि हालिया "संसद चलो" मार्च और अन्य प्रदर्शनों में शामिल युवाओं के खिलाफ मुकदमे या अन्य कार्रवाई न की जाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए।   सरकार से बातचीत के संकेत   इस मामले को लेकर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की कोशिशें जारी हैं। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने वांगचुक की मांगों पर सरकार की ओर से जवाब देने का आश्वासन दिया है। हालांकि, आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि जब तक ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनकी मांगें जारी रहेंगी।   स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती   अनशन के दौरान स्वास्थ्य खराब होने के बाद सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया था। इस कदम को लेकर उनके समर्थकों और परिवार ने सवाल उठाए थे, जबकि प्रशासन का कहना था कि यह कदम चिकित्सा सलाह और स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए उठाया गया। बाद में उन्हें बेहतर निगरानी के लिए अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।   CJP आंदोलन में बढ़ी राजनीतिक हलचल   सोनम वांगचुक के समर्थन में कई राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आवाज उठाई है। विपक्षी नेताओं ने भी सरकार से छात्रों की मांगों पर बातचीत करने और आंदोलन को लेकर संवेदनशील रुख अपनाने की अपील की है।   आगे की रणनीति पर नजर   अब सबकी नजर केंद्र सरकार के जवाब और सोनम वांगचुक के अगले कदम पर है। यदि सरकार की ओर से छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने को लेकर स्पष्ट आश्वासन मिलता है, तो वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं। वहीं, आंदोलनकारी संगठन शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर अपना प्रदर्शन जारी रखने की बात कह रहे हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
Abhijeet Deepke alleges BJP workers orchestrated stone pelting during the CJP protest at Jantar Mantar.
CJP Protest: अभिजीत दीपके का आरोप- BJP के लोग कर रहे पत्थरबाजी, इंटरनेट बंद कर कार्रवाई की तैयारी का भी दावा

जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन के बीच संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बीजेपी और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहर से लोगों को भेजा जा रहा है और पत्थरबाजी कराई जा रही है। साथ ही उन्होंने इंटरनेट सेवा बंद किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों और इंटरनेट बंद होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुख्य बातें (Key Points) CJP का प्रदर्शन 34वें दिन भी जंतर-मंतर पर जारी। अभिजीत दीपके ने बीजेपी से जुड़े लोगों पर पत्थरबाजी कराने का आरोप लगाया। दावा किया कि पहले से पत्थर जमा किए गए और बाद में उपद्रव कराया गया। पुलिस पर भी प्रदर्शनकारियों के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप। इंटरनेट सेवा बंद किए जाने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। इंटरनेट बंद होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 'आंदोलन को बदनाम करने की हो रही कोशिश' अभिजीत दीपके ने कहा कि CJP पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रही है। उनके मुताबिक, जैसे-जैसे आंदोलन को जनसमर्थन मिल रहा है, कुछ लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को हिंसक दिखाने की साजिश रची जा रही है। BJP पर लगाए गंभीर आरोप दीपके ने दावा किया कि बीजेपी से जुड़े लोग पत्थरबाजी कर रहे हैं और बाद में इसका आरोप CJP कार्यकर्ताओं पर लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन स्थल के आसपास पहले से पत्थर जमा किए गए थे और बाद में कुछ लोगों ने उनका इस्तेमाल कर हिंसा भड़काने की कोशिश की। उन्होंने पुलिस पर भी ऐसे लोगों का साथ देने का आरोप लगाया। 'इंटरनेट बंद कर बड़ी कार्रवाई की तैयारी' अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इंटरनेट बंद करना आंदोलन को दबाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इंटरनेट सेवा बंद किए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस और सुरक्षाबलों से की अपील दीपके ने प्रदर्शन स्थल पर तैनात दिल्ली पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मी किसी भी प्रकार के बल प्रयोग से बचें और प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहने दें। सोनम वांगचुक को लेकर क्या बोले दीपके? अभिजीत दीपके ने बताया कि CJP का धरना 34वें दिन में पहुंच चुका है, जबकि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 26वें दिन भी जारी है। उन्होंने कहा कि संगठन अपनी मांगों पर कायम रहेगा, लेकिन उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील भी की। दीपके ने कहा कि वह उनकी जान को किसी भी खतरे में नहीं देखना चाहते।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Clashes erupt between protesters and police near Parliament Road during CJP protest in Delhi
CJP Protest: जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक हिंसा, पथराव-आंसू गैस और इंटरनेट बंद; जानिए 22 जुलाई की रात क्या-क्या हुआ

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान 22 जुलाई की रात संसद मार्ग और कनॉट प्लेस क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति पर काबू पाने के लिए भारी पुलिस बल और अर्द्धसैनिक जवानों की तैनाती की गई। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दीं। मुख्य बातें (Key Points) जंतर-मंतर के पास संसद मार्ग पर 22 जुलाई की रात हिंसक झड़प। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल। झड़प में 2 ACP समेत 5 पुलिसकर्मी घायल। CJP वॉलंटियर्स ने पुलिस बस से प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल व दंगा-रोधी वाहन तैनात। प्रशासन ने अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कीं। संसद मार्ग पर अचानक भड़की हिंसा 22 जुलाई की रात जंतर-मंतर से सटे संसद मार्ग पर अचानक हालात बिगड़ गए। पार्क होटल के पास बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिसके बाद कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस बस से वॉलंटियर्स ने की शांति की अपील स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने CJP के स्वयंसेवकों की मदद ली। लाउडस्पीकर लगी पुलिस बस पर सवार होकर वॉलंटियर्स ने प्रदर्शनकारियों से हिंसा रोकने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि पथराव और हिंसा से पूरे आंदोलन की छवि प्रभावित होगी। लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले हालात बेकाबू होने पर पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान दो एसीपी, एक इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और एक कॉन्स्टेबल सहित कुल पांच पुलिसकर्मी घायल हुए। सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी, सुरक्षा घेरा और बैरिकेडिंग झड़प के बाद कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए। इसके बाद पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल, दंगा-रोधी वाहन और अर्द्धसैनिक जवान तैनात किए गए। जंतर-मंतर से संसद मार्ग की ओर जाने वाले रास्तों को बैरिकेड लगाकर पूरी तरह सील कर दिया गया ताकि हालात दोबारा न बिगड़ें। इंटरनेट सेवाएं बंद, पूरे इलाके में हाई अलर्ट स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जंतर-मंतर, संसद मार्ग और मध्य दिल्ली के आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं। अधिकारियों का कहना था कि यह कदम अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया। पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई और देर रात तक पुलिस बल तैनात रहा।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Delhi High Court to hear PIL alleging foreign funding behind CJP Parliament protest
दिल्ली प्रोटेस्ट में विदेशी फंडिंग के आरोप, हाई कोर्ट करेगा तत्काल सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने CJP के 'चलो संसद' मार्च के दौरान कथित विदेशी फंडिंग और हिंसा के आरोपों से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन में विदेशी फंडिंग पाने वाले संगठनों और राजनीतिक तत्वों की घुसपैठ हुई, जिससे आंदोलन हिंसक हो गया। अदालत इस मामले पर 24 जुलाई (शुक्रवार) को सुनवाई करेगी। याचिका में क्या-क्या आरोप लगाए गए? याचिका में कहा गया है कि CJP के 'चलो संसद' मार्च के दौरान कुछ ऐसे संगठन सक्रिय थे, जिन्हें कथित तौर पर विदेशी फंडिंग मिलती है। आरोप है कि इन तत्वों ने शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को हिंसक रूप देने की कोशिश की। याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने की मांग की है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, पत्रकारों के साथ मारपीट हुई, आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई और संसद की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश की गई। इसमें कई पुलिसकर्मियों के घायल होने का भी उल्लेख किया गया है। पहले लाठीचार्ज वाली याचिका पर क्या हुआ था? इससे पहले छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि हर मामले में कोर्ट को बीच में नहीं लाया जाना चाहिए, हालांकि याचिका को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया था। 22 जुलाई की सुनवाई में कोर्ट के निर्देश 22 जुलाई को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज और पुलिस बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए, ताकि जांच के दौरान उनका इस्तेमाल किया जा सके। इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को निर्धारित की गई है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Delhi Police personnel deployed during CJP Parliament march protest in New Delhi
दिल्ली प्रोटेस्ट पर पुलिस सख्त: 48 घंटे में 10 FIR दर्ज, RAF जवान पर हमले का भी मामला

NEET पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले 48 घंटों में राजधानी के पांच अलग-अलग थानों में कुल 10 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें कनॉट प्लेस में तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान पर कथित हमले का मामला भी शामिल है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 20 जुलाई को आयोजित प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था भंग करने, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हिंसा से जुड़े मामलों में विभिन्न एफआईआर दर्ज की गई हैं। सभी मामलों की जांच जारी है। किन थानों में दर्ज हुईं FIR? दिल्ली पुलिस के अनुसार, अब तक पांच थानों में कुल 10 एफआईआर दर्ज की गई हैं। संसद मार्ग थाना – 4 FIR कनॉट प्लेस (सीपी) थाना – 3 FIR मंदिर मार्ग थाना – 1 FIR बाराखंभा रोड थाना – 1 FIR कर्तव्य पथ थाना – 1 FIR RAF जवान पर हमले का मामला मंगलवार शाम कनॉट प्लेस क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान एक RAF जवान पर कथित हमले के मामले में भी अलग से एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। बाराखंभा थाने की FIR में गंभीर धाराएं बाराखंभा रोड थाने में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा डालना, सरकारी आदेश की अवज्ञा, लोक सेवक पर हमला, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, दंगे के लिए उकसाना, हत्या के प्रयास, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम (PDPP Act) की धारा 3 शामिल हैं। पुलिस की जांच जारी दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी मामलों की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। जरूरत पड़ने पर आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
CJP Protest
CJP Protest: छात्रों के समर्थन में उतरे दिलजीत दोसांझ, कई बॉलीवुड सितारों ने उठाई आवाज

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई के बाद मनोरंजन जगत के कई प्रमुख कलाकार छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें 118 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए। घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई फिल्मी हस्तियों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शांतिपूर्ण संवाद और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग की।   दिलजीत बोले- छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ सख्ती नहीं बरती जानी चाहिए और प्रशासन को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दिलजीत ने यह भी याद दिलाया कि किसानों के आंदोलन के दौरान समर्थन करने पर उन्हें आलोचना और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था तथा कई बार उन्हें 'राष्ट्र-विरोधी' कहा गया।   वीर दास ने कलाकारों की चुप्पी पर उठाए सवाल कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास ने कलाकारों से सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कलाकार जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप रहते हैं, तो बाद में उनसे समर्थन और टिकट खरीदने की उम्मीद करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, युवाओं का भरोसा और समर्थन ही लाइव एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ताकत है।   हुमा, भूमि और अन्य सितारों ने जताई चिंता अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने घटना की तस्वीरों को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि ऐसे दृश्य लंबे समय तक याद रहेंगे। उन्होंने बल प्रयोग के बजाय संवाद और धैर्य की आवश्यकता पर जोर दिया। भूमि पेडनेकर ने लिखा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है और लोकतंत्र में बातचीत सबसे प्रभावी रास्ता है। अनुराग कश्यप ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि अदिति राव हैदरी, सोनाक्षी सिन्हा, सोहा अली खान, रितेश देशमुख और जेनेलिया ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। कलाकारों की इन प्रतिक्रियाओं ने एक बार फिर लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और युवाओं की आवाज को लेकर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया। 

anjali kumari जुलाई 21, 2026 0
Parliament March
संसद मार्च के बाद सरकार पर सीजेपी का हमला, अभिजीत दीपके बोले- ‘हमें बातचीत के बहाने उलझाया गया’

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद  (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बातचीत के लिए उनकी पार्टी के प्रतिनिधियों को बुलाया, लेकिन चर्चा के बजाय उन्हें कई घंटों तक आवास पर ही नजरबंद रखा गया। दीपके के अनुसार, इस दौरान उनके प्रतिनिधियों के फोन भी ले लिए गए, जिससे पार्टी का उनसे संपर्क टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के बहाने उन्हें उलझाया गया, जबकि बाहर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।   लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि यदि भीड़ को नियंत्रित करना उद्देश्य था तो पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया जा सकता था, लेकिन इसके बजाय आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया गया। उन्होंने दावा किया कि कई छात्र घायल हुए और इस कार्रवाई से अनावश्यक हिंसा हुई।   महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप दीपके ने दिल्ली पुलिस के कुछ पुरुष कर्मियों पर महिला प्रदर्शनकारियों और छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार तथा हिंसा का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ बल प्रयोग किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।   सोनम वांगचुक जारी रखेंगे अनशन दीपके ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो अनशन समाप्त करने पर विचार कर रहे थे, अब इसे जारी रखेंगे। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई से वांगचुक आहत हैं और उन्होंने अपनी पत्नी के माध्यम से संदेश भेजकर अनशन जारी रखने का निर्णय लिया है। सीजेपी ने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन फिलहाल समाप्त नहीं होगा और संगठन जल्द ही अपने अगले आंदोलन की रणनीति की घोषणा करेगा।

anjali kumari जुलाई 21, 2026 0
Sonam Wangchuk receiving treatment at Safdarjung Hospital during hunger strike
अनशन के 24वें दिन भी अस्पताल में सोनम वांगचुक, ब्लड शुगर-पोटैशियम कम; डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में इलाज

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को 24वें दिन में पहुंच गई। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेहत पर लगातार नजर रखना जरूरी है। लंबे समय तक भोजन नहीं करने और शरीर में पानी की कमी के कारण मेडिकल टीम उनकी नियमित जांच कर रही है। क्या है सोनम वांगचुक का ताजा हेल्थ अपडेट? डॉक्टरों के मुताबिक सोनम वांगचुक की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। ब्लड शुगर सामान्य से कम बना हुआ है, जिससे कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बना हुआ है। जांच में पोटैशियम का स्तर 3.2 mEq/L पाया गया है, जो सामान्य सीमा से कम है। खून की जांच में एनीमिया के लक्षण मिले हैं। सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) की संख्या भी कम पाई गई है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे उपवास के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की स्थिति बनी हुई है, इसलिए उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। इलाज कैसे चल रहा है? डॉक्टरों की सलाह पर सोनम वांगचुक फिलहाल ORS और पोटैशियम सप्लीमेंट ले रहे हैं। मेडिकल टीम ने उन्हें शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी दूर करने के लिए IV फ्लूइड और ग्लूकोज लेने की सलाह दी है, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। सफदरजंग अस्पताल और AIIMS के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम उनकी स्वास्थ्य स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जरूरत के अनुसार सभी चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 28 जून से जारी है भूख हड़ताल सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया है। 18 जुलाई को बिगड़ी थी तबीयत लगातार तीन सप्ताह तक भूख हड़ताल करने के बाद 18 जुलाई को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज शुरू किया गया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने की इच्छा जताई थी। उन्होंने CJP के 'संसद चलो मार्च' में शामिल होने के लिए अस्पताल से डिस्चार्ज करने की भी मांग की थी, लेकिन डॉक्टरों ने स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल में ही रहने की सलाह दी। एक नजर में पूरा हेल्थ अपडेट अनशन का आज: 24वां दिन अस्पताल: सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली हालत: फिलहाल स्थिर ब्लड शुगर: सामान्य से कम पोटैशियम: 3.2 mEq/L एनीमिया: जांच में पुष्टि WBC: सामान्य से कम क्या ले रहे हैं: ORS और पोटैशियम की दवा क्या लेने से इनकार किया: IV फ्लूइड और ग्लूकोज इलाज: सफदरजंग और AIIMS के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम की निगरानी में डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल वांगचुक की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लंबे समय तक जारी भूख हड़ताल के कारण किसी भी तरह की चिकित्सीय जटिलता से बचने के लिए 24 घंटे निगरानी और नियमित मेडिकल जांच बेहद जरूरी है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0