वॉशिंगटन: नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन और रूस के दो कॉस्मोनॉट सफलतापूर्वक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंच गए हैं। सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान से करीब साढ़े तीन घंटे की यात्रा पूरी करने के बाद तीनों का स्टेशन पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों ने शानदार स्वागत किया। इस ऐतिहासिक पल का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ISS पर उनके स्वागत की झलक दिखाई दे रही है। बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से भरी थी उड़ान नासा के अनुसार, सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान ने मंगलवार को भारतीय समयानुसार रात 8:17 बजे कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से उड़ान भरी थी। यह मिशन नासा और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के संयुक्त सहयोग के तहत संचालित किया जा रहा है। अनिल मेनन के साथ रूसी कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी इस मिशन का हिस्सा हैं। अनिल मेनन की पहली अंतरिक्ष यात्रा नासा ने बताया कि यह अनिल मेनन का पहला अंतरिक्ष मिशन है। वहीं, प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना दूसरी बार अंतरिक्ष यात्रा पर गए हैं। ISS पहुंचने के बाद तीनों अंतरिक्ष यात्री वहां पहले से मौजूद अंतरराष्ट्रीय दल के साथ जुड़ गए हैं। इस दल में नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और रोस्कोस्मोस के कई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। आठ महीने तक करेंगे वैज्ञानिक शोध यह मिशन लगभग आठ महीने तक चलेगा। इस दौरान अनिल मेनन और उनकी टीम अंतरिक्ष में कई वैज्ञानिक प्रयोग, जैविक अनुसंधान और नई तकनीकों का परीक्षण करेंगे। इन प्रयोगों का उद्देश्य भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाना है। साथ ही, अंतरिक्ष में किए जाने वाले शोध से चिकित्सा, विज्ञान और नई तकनीकों के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की उम्मीद है, जिनका लाभ धरती पर भी लोगों को मिल सकता है। अप्रैल 2027 में होगी वापसी नासा के कार्यक्रम के अनुसार, अनिल मेनन, प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना की पृथ्वी पर वापसी अप्रैल 2027 में निर्धारित है। मिशन के दौरान वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर विभिन्न वैज्ञानिक परियोजनाओं और तकनीकी परीक्षणों में भाग लेंगे।
Dhamaal 4 Box Office Collection: अजय देवगन स्टारर कॉमेडी फिल्म 'Dhamaal 4' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। रिलीज के सिर्फ पांच दिनों में फिल्म ने भारत में लगभग ₹82.25 करोड़ (नेट) की कमाई कर ली है। शुरुआती ट्रेंड्स के मुताबिक, फिल्म अब हिट की श्रेणी में पहुंच चुकी है और साल 2026 की चौथी हिट फिल्म बन गई है। इससे पहले 'Border 2', 'Dhurandhar 2' और 'Bhooth Bangla' भी बॉक्स ऑफिस पर सफल रही हैं। पांचवें दिन भी कायम रही कमाई की रफ्तार मंगलवार को फिल्म ने लगभग ₹9.50 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। खास बात यह रही कि बिना किसी डिस्काउंट ऑफर के भी फिल्म की कमाई में अच्छी पकड़ देखने को मिली। ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार की एडवांस बुकिंग भी मजबूत रही, जिससे फिल्म के पहले सप्ताह के प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। पहले सप्ताह में ₹100 करोड़ के करीब पहुंचने की उम्मीद अब तक के ट्रेंड्स को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि 'Dhamaal 4' अपने पहले सप्ताह में लगभग ₹96 से ₹97 करोड़ का नेट कलेक्शन कर सकती है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो फिल्म जल्द ही ₹100 करोड़ क्लब में शामिल हो सकती है। तीन सप्ताह तक नहीं मिलेगी बड़ी टक्कर फिल्म के लिए राहत की बात यह है कि आने वाले लगभग तीन सप्ताह तक कोई बड़ी कॉमेडी या फैमिली एंटरटेनर रिलीज नहीं हो रही है। इस दौरान हॉलीवुड फिल्म 'The Odyssey' रिलीज होगी, लेकिन उसका दर्शक वर्ग अलग माना जा रहा है। इसके बाद 'Spider-Man: Brand New Day' की रिलीज तक Dhamaal 4 के पास बॉक्स ऑफिस पर मजबूत पकड़ बनाए रखने का अवसर रहेगा। Dhamaal 4 का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन (भारत) दिन नेट कलेक्शन शुक्रवार ₹14.00 करोड़ शनिवार ₹22.50 करोड़ रविवार ₹28.00 करोड़ सोमवार ₹8.25 करोड़ मंगलवार ₹9.50 करोड़ कुल ₹82.25 करोड़ दर्शकों को पसंद आ रही कॉमेडी फिल्म को फैमिली ऑडियंस से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। वीकेंड में शानदार कमाई के बाद वीकडेज़ में भी फिल्म ने स्थिर प्रदर्शन बनाए रखा है। यही वजह है कि ट्रेड एक्सपर्ट्स इसे साल 2026 की सफल फिल्मों में शामिल मान रहे हैं। अगर मौजूदा रफ्तार जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में 'Dhamaal 4' बॉक्स ऑफिस पर और बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती है।
अजय देवगन स्टारर कॉमेडी फिल्म 'धमाल 4' बॉक्स ऑफिस पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। रिलीज के महज चार दिनों में फिल्म ने दुनियाभर में 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है। वीकेंड के बाद भी सोमवार को फिल्म की पकड़ मजबूत रही और इसने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई दर्ज की। चार दिन में 100 करोड़ क्लब में शामिल हुई फिल्म बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार (चौथे दिन) फिल्म ने भारत में करीब 8.35 करोड़ रुपये (नेट) का कारोबार किया। इसके साथ ही भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 73.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं, भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन लगभग 87.85 करोड़ रुपये रहा। विदेशी बाजारों से चौथे दिन करीब 1.50 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जिसके बाद ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन 14.50 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह फिल्म की कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कमाई 102.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वीकेंड में मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स फिल्म ने पहले दिन 14 करोड़ रुपये से शुरुआत की थी। दूसरे दिन शनिवार को कमाई बढ़कर 22.50 करोड़ रुपये हो गई, जबकि रविवार को फिल्म ने 28.50 करोड़ रुपये का कारोबार किया। पहले तीन दिनों में ही फिल्म ने भारत में 65 करोड़ रुपये नेट और दुनियाभर में 92 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया था। सोमवार को कैसी रही ऑक्यूपेंसी? वीकेंड के मुकाबले सोमवार को सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या में कुछ गिरावट जरूर देखने को मिली, लेकिन फिल्म ने स्थिर प्रदर्शन बनाए रखा। सोमवार को हिंदी 2D शो की कुल ऑक्यूपेंसी करीब 17.79 प्रतिशत दर्ज की गई। सुबह के मुकाबले शाम और रात के शो में दर्शकों की संख्या अधिक रही, जिससे फिल्म को अच्छा सपोर्ट मिला। कॉमेडी फिल्मों की रेस में निकली आगे पहले चार दिनों की कमाई के मामले में 'धमाल 4' हालिया कॉमेडी फिल्मों से थोड़ा आगे निकल गई है। धमाल 4: 73.35 करोड़ रुपये (4 दिन) वेलकम टू द जंगल: 72.50 करोड़ रुपये भूत बंगला: 61 करोड़ रुपये इन आंकड़ों से साफ है कि 'धमाल 4' ने शुरुआती चार दिनों में अपने प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर प्रदर्शन किया है। फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी ओपनिंग 'धमाल' सीरीज की यह नई फिल्म शुरुआती वीकेंड कलेक्शन के मामले में फ्रेंचाइजी की सबसे सफल फिल्म बन गई है। धमाल (2007): 8 करोड़ रुपये (ओपनिंग वीकेंड) डबल धमाल (2011): 22.78 करोड़ रुपये टोटल धमाल (2019): 62.40 करोड़ रुपये धमाल 4 (2026): 65 करोड़ रुपये इस प्रदर्शन के साथ 'धमाल 4' ने फ्रेंचाइजी का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। आगे भी बनी रह सकती है रफ्तार चार दिनों में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने के बाद फिल्म की बॉक्स ऑफिस यात्रा मजबूत दिखाई दे रही है। यदि वीकडेज़ में भी दर्शकों का समर्थन इसी तरह बना रहता है, तो आने वाले दिनों में फिल्म कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती है।
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार अपनी बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' की रिलीज से ठीक पहले माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जम्मू पहुंचे। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में अभिनेता हाथ जोड़कर श्रद्धा के साथ मंदिर की ओर जाते नजर आए। उन्होंने पैदल सीढ़ियां चढ़कर माता रानी के दर्शन किए और इस दौरान उनके साथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था भी मौजूद रही। वायरल हुए दर्शन के वीडियो अक्षय कुमार की इस आध्यात्मिक यात्रा के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। पारंपरिक परिधान में नजर आए अभिनेता को देखकर फैंस काफी उत्साहित दिखाई दिए। फिल्म की रिलीज से पहले उनकी यह यात्रा शुभ संकेत के रूप में देखी जा रही है। 26 जून को रिलीज होगी 'वेलकम टू द जंगल' अहमद खान के निर्देशन में बनी 'वेलकम टू द जंगल' 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। यह लोकप्रिय 'वेलकम' फ्रेंचाइजी का नया भाग है, जिसमें कॉमेडी, कन्फ्यूजन और मनोरंजन का भरपूर तड़का देखने को मिलेगा। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ कई बड़े सितारे नजर आएंगे, जिनमें शामिल हैं: सुनील शेट्टी अरशद वारसी दिशा पाटनी जैकलीन फर्नांडीज रवीना टंडन लारा दत्ता जैकी श्रॉफ उर्वशी रौतेला परेश रावल जॉनी लीवर राजपाल यादव श्रेयस तलपड़े तुषार कपूर कृष्णा अभिषेक कीकू शारदा दलेर मेहंदी ट्रेलर में दिखा कॉमेडी का जबरदस्त तड़का फिल्म का ट्रेलर पहले ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। इसमें कई किरदारों के बीच हास्यास्पद परिस्थितियां, तेज रफ्तार कॉमेडी और पुराने 'वेलकम' वाले अंदाज की झलक देखने को मिली है। ट्रेलर में ओरिजिनल फिल्म के मशहूर 'मजनू भाई' की याद दिलाने वाले कई पल भी शामिल किए गए हैं, जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद किया। अक्षय-सुनील की जोड़ी फिर करेगी धमाल फिल्म की सबसे बड़ी खासियत अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी की जोड़ी को माना जा रहा है। 'हेरा फेरी' जैसी फिल्मों में अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का दिल जीतने वाली यह जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर नजर आएगी। दोनों की नोकझोंक और केमिस्ट्री ट्रेलर में भी दर्शकों को खूब पसंद आई है। फैंस को है बड़ी उम्मीदें बड़ी स्टारकास्ट, पुराने 'वेलकम' फ्रेंचाइजी की पहचान और अक्षय कुमार की कॉमिक वापसी को देखते हुए दर्शकों में फिल्म को लेकर जबरदस्त उत्साह है। अब देखना होगा कि 26 जून को रिलीज के बाद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना कमाल दिखाती है।
कॉमेडी, कन्फ्यूजन और फुल ऑन एंटरटेनमेंट से भरपूर दिखा टीजर Welcome To The Jungle का बहुप्रतीक्षित टीजर आखिरकार रिलीज हो गया है। लंबे समय से इस फिल्म का इंतजार कर रहे दर्शकों को अब हंसी और मस्ती से भरपूर दुनिया की पहली झलक देखने को मिल गई है। टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है। करीब 1 मिनट 30 सेकंड के इस टीजर में पुराने ‘वेलकम’ फ्रेंचाइज़ी वाला वही पागलपन, कॉमिक कन्फ्यूजन और मजेदार माहौल देखने को मिलता है, जिसने पहले भी दर्शकों को खूब एंटरटेन किया था। अक्षय कुमार के डायलॉग ने लूटी महफिल टीजर की शुरुआत Akshay Kumar के मजेदार डायलॉग से होती है। वह कहते हैं: “सूचना, इस फिल्म के निर्माण में किसी भी जानवर का इस्तेमाल नहीं किया गया है… सिवाय कुछ घोड़ों के और हम गधों के।” यह डायलॉग सुनते ही दर्शकों की हंसी छूट जाती है और यहीं से फिल्म का कॉमिक अंदाज शुरू हो जाता है। सुनील शेट्टी और अक्षय की कॉमिक टाइमिंग ने जीता दिल टीजर में Suniel Shetty और अक्षय कुमार की जुगलबंदी सबसे ज्यादा पसंद की जा रही है। एक सीन में सुनील शेट्टी, अक्षय कुमार पर गन तानकर पूछते हैं: “तू मरता क्यों नहीं?” इस पर अक्षय जवाब देते हैं: “मैं मरने में जान डाल रहा हूं।” फिर सुनील कहते हैं: “अरे मरने में कोई जान डालता है क्या?” यह सीन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कॉमेडी और अफरा-तफरी से भरपूर होगी फिल्म टीजर देखकर साफ हो जाता है कि फिल्म में: जबरदस्त कॉमेडी लगातार कन्फ्यूजन पागलपन भरे ट्विस्ट और फैमिली एंटरटेनमेंट भरपूर देखने को मिलेगा। फिल्म को एक बड़े एंटरटेनमेंट पैकेज के रूप में तैयार किया गया है, जहां हर किरदार किसी न किसी मजेदार गड़बड़झाले में फंसा नजर आएगा। कब रिलीज होगी फिल्म? फिल्म का निर्देशन Ahmed Khan ने किया है और निर्माता Firoz A. Nadiadwala हैं। ‘Welcome To The Jungle’ 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। क्यों खास है यह फिल्म? हाल के समय में गंभीर फिल्मों के बीच यह फिल्म दर्शकों को हल्की-फुल्की कॉमेडी और फैमिली एंटरटेनमेंट देने का वादा करती है। यही वजह है कि फैंस इसे लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।