रांची: सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख ऊर्जा कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने अपने कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है. कंपनी ने वाहन अग्रिम यानी व्हीकल एडवांस की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी की है. अब वरिष्ठ अधिकारियों को पर्यावरण-अनुकूल सीएनजी और पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए 30 लाख रुपये तक का वाहन अग्रिम मिल सकेगा. नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है. कंपनी के कॉर्पोरेट एचआर विभाग की ओर से जारी सर्कुलर में अलग-अलग ग्रेड के कर्मचारियों के लिए पेट्रोल-डीजल, हाइब्रिड तथा सीएनजी-इलेक्ट्रिक वाहनों की पात्रता राशि में संशोधन किया गया है. खास बात यह है कि ग्रीन व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कई ग्रेड में पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में अधिक राशि निर्धारित की गयी है. वरिष्ठ अधिकारियों को मिलेगा सबसे ज्यादा वाहन अग्रिम सर्कुलर के अनुसार ई-9 और उससे ऊपर के ग्रेड के अधिकारियों के लिए पेट्रोल, डीजल और हाइब्रिड वाहनों की अधिकतम पात्रता राशि 22 लाख से बढ़ाकर 29 लाख रुपये कर दी गयी है. वहीं सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए यह सीमा बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गयी है. ई-8 ग्रेड के अधिकारियों को पेट्रोल-डीजल वाहनों के लिए 26.50 लाख रुपये और सीएनजी-इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 27.50 लाख रुपये तक का वाहन अग्रिम मिलेगा. ई-5 और ई-6 ग्रेड में भी बढ़ी सीमा मिड-लेवल मैनेजमेंट के कर्मचारियों के लिए भी वाहन अग्रिम की सीमा में बदलाव किया गया है. ई-6 ग्रेड: पेट्रोल-डीजल के लिए 21 लाख, सीएनजी-इलेक्ट्रिक के लिए 22 लाख रुपये ई-5 ग्रेड: पेट्रोल-डीजल के लिए 20 लाख, सीएनजी-इलेक्ट्रिक के लिए 21 लाख रुपये ई-4 ग्रेड: पेट्रोल-डीजल के लिए 18 लाख, सीएनजी-इलेक्ट्रिक के लिए 19 लाख रुपये ई-0/ई-1 ग्रेड: पेट्रोल-डीजल के लिए 12 लाख, सीएनजी-इलेक्ट्रिक के लिए 13 लाख रुपये इस बदलाव से कर्मचारियों को अपनी पसंद के वाहन खरीदने में पहले की तुलना में अधिक वित्तीय सहायता मिल सकेगी. गैर-कार्यकारी कर्मचारियों को भी फायदा गेल ने केवल अधिकारियों तक ही यह सुविधा सीमित नहीं रखी है. गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के एस-3 से एस-7 ग्रेड में भी वाहन अग्रिम की सीमा बढ़ायी गयी है. एस-7 ग्रेड के कर्मचारियों को अब अधिकतम 9 लाख रुपये तक वाहन अग्रिम मिल सकेगा. वहीं निचले ग्रेड के कर्मचारियों के लिए भी पात्रता राशि बढ़ाकर 2 लाख से 2.50 लाख रुपये तक की गयी है. ग्रीन व्हीकल को बढ़ावा देने की कोशिश गेल के इस फैसले में पर्यावरण-अनुकूल वाहनों को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया गया है. कंपनी ने सीएनजी, हाइब्रिड और पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अधिक वित्तीय सहायता का प्रावधान किया है. कंपनी के अनुसार, हाइब्रिड वाहन की श्रेणी में ऐसे पेट्रोल या डीजल वाहन शामिल होंगे, जिनमें इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी पैक भी मौजूद हो. तत्काल प्रभाव से लागू हुआ नया नियम सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद सीजीएम (एचआर-पॉलिसी एंड ईआर) भरत मेहता की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है. नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए एसएपी-एचआर मॉड्यूल में भी आवश्यक बदलाव किये जा रहे हैं. हालांकि वाहन अग्रिम से जुड़े कंपनी के अन्य नियम और शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी.
मुंबई, एजेंसियां। टाटा समूह में नेतृत्व को लेकर बुधवार, 12 अगस्त 2026 को बड़ी हलचल सामने आई है। Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक (AGM) से पहले पद छोड़ने पर विचार करने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन ने इस संभावना को लेकर अपने करीबी लोगों से चर्चा की है। हालांकि, उनके पद छोड़ने का कोई अंतिम निर्णय आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है। AGM से पहले क्यों बढ़ा विवाद? चंद्रशेखरन का Tata Sons के चेयरमैन के रूप में कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन उनके आगे बने रहने के लिए Tata Sons के बोर्ड में निदेशक के रूप में उनका पुनर्नियुक्त होना जरूरी है। आगामी AGM में इसी को लेकर शेयरधारकों के सामने प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, AGM में उनके पुनर्नियुक्ति को लेकर संभावित अनिश्चितता के बीच चंद्रशेखरन ने स्वेच्छा से पद छोड़ने की संभावना पर विचार किया है। इससे टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। Tata Trusts की बैठक भी अहम इस पूरे घटनाक्रम के बीच Tata Trusts के बोर्ड की 13 अगस्त को बैठक होने वाली है। चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार से जुड़ा मुद्दा इस बैठक के एजेंडे में होने की संभावना है। इसलिए 13 अगस्त की बैठक और 18 अगस्त की AGM, दोनों को इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चंद्रशेखरन के कार्यकाल में Tata Group का विस्तार एन. चंद्रशेखरन ने 2017 में Tata Sons की कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी निर्माण, डिजिटल कारोबार और विमानन जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया। Tata Sons के आधिकारिक दस्तावेजों में भी उन्हें समूह की होल्डिंग कंपनी के चेयरमैन के रूप में दर्ज किया गया है।
जमशेदपुर: Tata Steel में शीर्ष संयुक्त परामर्श परिषद (एपेक्स JCCM) का पुनर्गठन किया गया है. कंपनी प्रबंधन की ओर से नई समिति की सूची जारी कर दी गयी है, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगी. नई समिति में कंपनी प्रबंधन और विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है. टाटा स्टील के सीईओ सह प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन को एपेक्स JCCM का चेयरमैन बनाया गया है, जबकि टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी ‘टुन्नु’ को सह-चेयरमैन की जिम्मेदारी दी गयी है. वहीं, CHRO इंडिया मैन्युफैक्चरिंग जुबिन पेसी पालिया को मेंबर सेक्रेटरी बनाया गया है. प्रबंधन के 31 वरिष्ठ अधिकारी समिति में नई एपेक्स JCCM में कंपनी प्रबंधन की ओर से कुल 31 वरिष्ठ अधिकारियों को जगह दी गयी है. इनमें 23 सदस्य और 8 स्थायी आमंत्रित सदस्य शामिल हैं. प्रबंधन की ओर से समिति में अक्षय खुल्लर, आशीष अनुपम, अत्रेयी सान्याल, चैतन्य भानु, डीबी सुंदर रामम, देवाशीष चौधरी, जयंत बनर्जी, कौशिक चटर्जी, मनीष गर्ग, पीयूष गुप्ता, प्रभात कुमार, प्रोबल घोष, राजेश चिंताक, राजीव मंगल, समिता शाह, संदीप भट्टाचार्य, संदीप कुमार, सुबोध पांडेय, सुधीर कुमार मेहता, उज्ज्वल चक्रवर्ती और उत्तम सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है. यूनियन के 13 प्रतिनिधियों को मिली जगह एपेक्स JCCM में टाटा वर्कर्स यूनियन समेत टाटा स्टील की विभिन्न इकाइयों और सब्सिडियरी यूनियनों के 13 प्रमुख प्रतिनिधियों को सदस्य बनाया गया है. इनमें टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष और सह-चेयरमैन संजीव कुमार चौधरी ‘टुन्नु’, महासचिव सतीश कुमार सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश कुमार सिंह शामिल हैं. इसके अलावा आरसीएमयू जामाडोबा के अध्यक्ष अशोक कुमार राय, टाटा कामगार यूनियन के अध्यक्ष बीके डिंडा, टीएसएल एचएमसी डिवीजन हलदिया के वर्किंग प्रेसिडेंट चंदन दास, टाटा एम्प्लॉइज यूनियन एमएंडएस के अध्यक्ष इंद्रजीत बोस, आरसीएमयू वेस्ट बोकारो के अध्यक्ष मोहन महतो और टाटा स्टील वर्कर्स यूनियन बियरिंग्स के अध्यक्ष मुकेश कुमार को भी सदस्य बनाया गया है. समिति में टीएसके वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रबींद्र कुमार जामुदा, राकेश्वर पांडेय, टाटा मेटालिक्स यूनियन के महासचिव रंजीत कुमार करक और एनएमयू नोवामुंडी के महासचिव संजय कुमार दास भी शामिल हैं. 8 अधिकारी स्थायी आमंत्रित सदस्य नई समिति में 8 वरिष्ठ अधिकारियों को स्थायी आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. इनमें अतुल कुमार भटनागर, अवनीश अरुण, जया सिंह पांडा, राहुल दुबे, साक्षी चौधरी, सोनी सिन्हा, सौरव रॉय और डॉ. विनीता सिंह शामिल हैं. इन अधिकारियों की जिम्मेदारियां कंपनी के मानव संसाधन, औद्योगिक संबंध, कानूनी मामलों, CSR, मेडिकल सर्विसेज और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी हैं. प्रबंधन और यूनियन के बीच समन्वय पर रहेगा जोर एपेक्स JCCM में कंपनी प्रबंधन और कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों को एक साथ शामिल किया गया है. ऐसे में यह परिषद कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों, औद्योगिक संबंधों और कंपनी से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रबंधन और यूनियन के बीच संवाद और समन्वय का महत्वपूर्ण मंच होगी. नई समिति के गठन के साथ टाटा स्टील में प्रबंधन और यूनियन के बीच संयुक्त परामर्श की प्रक्रिया को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
Tata Steel News: टाटा स्टील ने जर्मनी की मार्ट्रेड के साथ करीब 25 साल पुरानी साझेदारी खत्म करने का फैसला किया है। कंपनी जर्मन पार्टनर की 23 फीसदी हिस्सेदारी करीब 335 करोड़ रुपये में खरीदेगी। डील पूरी होने के बाद TM International Logistics में टाटा स्टील की हिस्सेदारी बढ़कर 74 फीसदी हो जाएगी। टाटा ग्रुप की प्रमुख कंपनी टाटा स्टील ने अपने कारोबार और लॉजिस्टिक्स स्ट्रक्चर में एक महत्वपूर्ण बदलाव का ऐलान किया है। कंपनी जर्मनी की मार्ट्रेड के साथ करीब ढाई दशक पुराने जॉइंट वेंचर से बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। इस डील के तहत टाटा स्टील मार्ट्रेड की 23 फीसदी हिस्सेदारी करीब 335 करोड़ रुपये में खरीदेगी। यह जॉइंट वेंचर वर्ष 2001 में टाटा स्टील, जर्मनी की मार्ट्रेड और जापान की NYK के बीच बनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य टाटा स्टील के कच्चे माल और तैयार स्टील की समुद्री आवाजाही से जुड़ी लॉजिस्टिक्स जरूरतों को पूरा करना था। 25 साल पुरानी पार्टनरशिप का होगा अंत टाटा स्टील के अनुसार, कंपनी TM International Logistics में IQ Martrade Holding und Management से 41.4 लाख इक्विटी शेयर खरीद रही है। इस हिस्सेदारी खरीद के बाद दोनों पक्षों के बीच 26 जुलाई 2001 को हुआ जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट समाप्त हो जाएगा। डील पूरी होने के बाद TM International Logistics में टाटा स्टील की हिस्सेदारी मौजूदा 51 फीसदी से बढ़कर 74 फीसदी हो जाएगी। वहीं जापान की NYK की 26 फीसदी हिस्सेदारी बनी रहेगी। इस तरह कंपनी में टाटा स्टील का नियंत्रण और मजबूत होगा, जबकि करीब 25 वर्षों से चली आ रही मार्ट्रेड के साथ साझेदारी समाप्त हो जाएगी। क्या करता है यह जॉइंट वेंचर? TM International Logistics की स्थापना ऐसे समय में हुई थी जब टाटा स्टील अपने समुद्री परिवहन और सप्लाई चेन नेटवर्क को मजबूत कर रही थी। यह कंपनी टाटा स्टील के लिए कच्चे माल और तैयार स्टील के समुद्री परिवहन से जुड़े लॉजिस्टिक्स कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। यह साझेदारी टाटा स्टील के बड़े विदेशी विस्तार, जिसमें कोरस का अधिग्रहण भी शामिल था, से पहले शुरू हुई थी। समय के साथ टाटा स्टील के कारोबार और वैश्विक सप्लाई चेन में बड़े बदलाव आए हैं। ऐसे में हिस्सेदारी बढ़ाने का फैसला कंपनी की मौजूदा रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीलाचल इस्पात में ₹33,873 करोड़ का बड़ा निवेश टाटा स्टील ने सिर्फ जॉइंट वेंचर में हिस्सेदारी बढ़ाने का फैसला नहीं किया है। कंपनी के बोर्ड ने ओडिशा स्थित नीलाचल इस्पात निगम की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 4.8 मिलियन टन करने के लिए 33,873 करोड़ रुपये के बड़े निवेश को भी मंजूरी दी है। नीलाचल इस्पात निगम का अधिग्रहण टाटा स्टील ने सरकार की निजीकरण प्रक्रिया के जरिए किया था। अब कंपनी को टाटा स्टील में विलय की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। कंपनी का मानना है कि क्षमता विस्तार से उसके लॉन्ग प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो को मजबूती मिलेगी। खास तौर पर ब्रांडेड रिटेल प्रोडक्ट्स की मजबूत मांग को देखते हुए यह निवेश टाटा स्टील की भविष्य की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जून तिमाही में टाटा स्टील का मुनाफा बढ़ा टाटा स्टील के हालिया वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 19 फीसदी बढ़कर 2,385 करोड़ रुपये हो गया। वहीं ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 15 फीसदी बढ़कर 60,412 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने जून तिमाही के दौरान कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत खर्च पर 3,579 करोड़ रुपये खर्च किए। इस प्रदर्शन और नए निवेश फैसलों को देखते हुए टाटा स्टील एक तरफ अपने मौजूदा कारोबार को मजबूत करने और दूसरी तरफ उत्पादन क्षमता तथा लॉन्ग प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ती नजर आ रही है। टाटा स्टील के लिए क्यों अहम है यह फैसला? मार्ट्रेड की हिस्सेदारी खरीदने से TM International Logistics में टाटा स्टील की हिस्सेदारी 74 फीसदी हो जाएगी। इससे कंपनी को अपने लॉजिस्टिक्स कारोबार पर पहले के मुकाबले ज्यादा नियंत्रण मिलेगा। वहीं नीलाचल इस्पात में प्रस्तावित 33,873 करोड़ रुपये का निवेश कंपनी के भारत में स्टील उत्पादन विस्तार की रणनीति को दर्शाता है। एक तरफ लॉजिस्टिक्स में हिस्सेदारी बढ़ाई जा रही है, तो दूसरी तरफ उत्पादन क्षमता में बड़े निवेश की तैयारी है। ऐसे में 31 जुलाई 2026 को घोषित ये फैसले टाटा स्टील की दीर्घकालिक कारोबारी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने एलन मस्क और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के बीच हुए समझौते को मंजूरी दे दी है। हालांकि अदालत ने इस समझौते को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठाए और कहा कि इसमें कुछ "रेड फ्लैग" यानी चिंताजनक पहलू दिखाई देते हैं। यह मामला 2022 में Twitter (अब X) के शेयरों की खरीद से जुड़ा है, जिसमें मस्क पर अपनी हिस्सेदारी की जानकारी तय समय से देर से सार्वजनिक करने का आरोप था। क्या था पूरा मामला? SEC के अनुसार, एलन मस्क ने मार्च और अप्रैल 2022 में Twitter के शेयर खरीदे थे, लेकिन नियमानुसार जानकारी देने में 11 दिनों की देरी की। नियामक का दावा था कि इस देरी के कारण मस्क निवेशकों को जानकारी मिलने से पहले कम कीमत पर शेयर खरीदते रहे, जिससे उन्हें लगभग 150 मिलियन डॉलर का वित्तीय लाभ हुआ। बाद में मस्क ने अक्टूबर 2022 में करीब 44 अरब डॉलर में Twitter का अधिग्रहण किया और इसका नाम बदलकर X कर दिया। समझौते के तहत कितना देना होगा जुर्माना? समझौते के अनुसार, एलन मस्क के नाम से जुड़े एक ट्रस्ट की ओर से 15 लाख डॉलर (1.5 मिलियन डॉलर) का भुगतान किया जाएगा। इसके साथ ही SEC द्वारा लगाए गए इस मामले के दावों का निपटारा हो जाएगा। मस्क का कहना है कि जानकारी देने में हुई देरी जानबूझकर नहीं, बल्कि अनजाने में हुई थी। जज ने SEC की कार्रवाई पर उठाए सवाल मामले की सुनवाई करने वाली अमेरिकी जिला अदालत की जज स्पार्कल सूकनानन ने कहा कि अदालत का काम केवल यह देखना है कि समझौता कानूनी रूप से उचित और निष्पक्ष है या नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि SEC ने मस्क से कथित आर्थिक लाभ की वसूली (Disgorgement) की मांग क्यों छोड़ दी। जज ने यह भी पूछा कि आखिर समझौता सीधे मस्क की बजाय उनके ट्रस्ट के साथ क्यों किया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि इससे यह धारणा बन सकती है कि मस्क सार्वजनिक रूप से खुद को पूरी तरह निर्दोष बता सकें। SEC ने समझौते का किया बचाव SEC ने अदालत में कहा कि यह समझौता किसी तरह की मिलीभगत का परिणाम नहीं है। आयोग के अनुसार, 1.5 मिलियन डॉलर का जुर्माना इस तरह के मामलों में अब तक की सबसे बड़ी सिविल पेनल्टी है। नियामक ने यह भी कहा कि समझौते के तहत जारी आदेश भविष्य में मस्क पर भी लागू रहेगा, भले ही वे अपने ट्रस्ट के माध्यम से निवेश करें। राजनीतिक पहलू भी आया चर्चा में अपने आदेश में जज ने यह भी टिप्पणी की कि यह तय करना जनता का अधिकार है कि क्या सरकार ने इस मामले में एलन मस्क की पर्याप्त जवाबदेही तय की या नहीं। एलन मस्क पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार रह चुके हैं। वहीं इस मामले की सुनवाई करने वाली जज की नियुक्ति पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में हुई थी। क्या होगा आगे? अदालत की मंजूरी के साथ यह मामला फिलहाल समाप्त हो गया है, लेकिन फैसले में की गई टिप्पणियों ने SEC की कार्यप्रणाली और हाई-प्रोफाइल मामलों में नियामकीय पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
ट्रेड सीक्रेट्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज की भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक Tata Consultancy Services (TCS) को अमेरिका में चल रहे ट्रेड सीक्रेट्स विवाद में बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की अपील सुनने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद TCS को 70 मिलियन डॉलर (करीब 590 करोड़ रुपये) का अतिरिक्त एकमुश्त खर्च दर्ज करना पड़ेगा। इस फैसले के बाद मामले में कंपनी की कुल वित्तीय देनदारी लगभग 220 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। पहली तिमाही में दर्ज होगा विशेष खर्च TCS ने अपने बयान में कहा कि वह वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 70 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त "एक्सेप्शनल चार्ज" दर्ज करेगी। इसमें हर्जाना, ब्याज और कानूनी खर्च शामिल होंगे। कंपनी पहले ही इस मामले के लिए 150 मिलियन डॉलर का प्रावधान कर चुकी थी। अब नए प्रावधान के साथ कुल राशि 220 मिलियन डॉलर हो जाएगी। DXC टेक्नोलॉजी के पक्ष में रहा फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 15 जून को DXC Technology के पक्ष में दिए गए 168 मिलियन डॉलर के हर्जाने के फैसले को बरकरार रखा। यह मामला DXC की पूर्ववर्ती कंपनी Computer Sciences Corporation (CSC) द्वारा 2019 में दायर किए गए मुकदमे से जुड़ा है। क्या है पूरा विवाद? मुकदमे के अनुसार, TCS पर आरोप लगाया गया था कि उसने बीमा कंपनी Transamerica के लगभग 2,200 कर्मचारियों को नियुक्त किया और उनके आंतरिक सिस्टम तक पहुंच का उपयोग करते हुए जीवन बीमा प्रबंधन के लिए एक प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म विकसित किया। DXC का दावा था कि इस प्रक्रिया में उसके ट्रेड सीक्रेट्स और गोपनीय व्यावसायिक जानकारियों का अनुचित इस्तेमाल किया गया। 2023 में जूरी ने लगाया था 210 मिलियन डॉलर का जुर्माना साल 2023 में अमेरिकी जूरी ने TCS को जानबूझकर ट्रेड सीक्रेट्स चोरी करने का दोषी मानते हुए 210 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने की सिफारिश की थी। हालांकि बाद में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ने इस राशि को घटाकर 168 मिलियन डॉलर कर दिया था। इसमें: 56 मिलियन डॉलर क्षतिपूर्ति (Compensatory Damages) 112 मिलियन डॉलर दंडात्मक हर्जाना (Punitive Damages) शामिल था। इसके बाद 2025 में अमेरिकी अपीलीय अदालत ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट में क्या थी TCS की दलील? TCS का कहना था कि DXC ने वास्तविक वित्तीय नुकसान साबित नहीं किया है, इसलिए उसे अनुचित लाभ (Unjust Enrichment) के आधार पर हर्जाना नहीं मिलना चाहिए। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि दंडात्मक हर्जाने की राशि अत्यधिक है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया, जिससे निचली अदालतों का फैसला प्रभावी हो गया। मुनाफे पर कितना असर? TCS का जनवरी-मार्च तिमाही का शुद्ध लाभ 137.18 अरब रुपये (लगभग 1.45 अरब डॉलर) रहा था। विश्लेषकों के अनुसार 70 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त प्रावधान कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति के मुकाबले सीमित प्रभाव डालेगा, लेकिन यह एक बार का बड़ा खर्च जरूर माना जाएगा। निवेशकों की नजर अगले नतीजों पर अब निवेशकों की निगाह TCS के आगामी तिमाही परिणामों पर रहेगी, जहां यह विशेष खर्च कंपनी की आय और लाभ पर असर डालता दिखाई देगा। हालांकि कंपनी का मुख्य व्यवसाय और परिचालन प्रदर्शन फिलहाल मजबूत बना हुआ है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक Tata Consultancy Services (TCS) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ा विजन पेश किया है। कंपनी के चेयरमैन Natarajan Chandrasekaran ने घोषणा की है कि अगले तीन वर्षों में टीसीएस में कार्यरत AI एजेंट्स यानी डिजिटल वर्कर्स की संख्या कंपनी के इंसानी कर्मचारियों के बराबर हो सकती है। टीसीएस की 31वीं वार्षिक आम बैठक में बोलते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि AI तकनीक को लेकर नौकरी जाने की आशंकाएं बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही हैं। उनके अनुसार, AI आईटी उद्योग के लिए अब तक का सबसे बड़ा अवसर साबित होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की अधिकांश कंपनियां आने वाले वर्षों में तकनीक पर अपना निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं और इसका बड़ा हिस्सा AI पर खर्च होगा। AI कारोबार में तेज़ी से बढ़ रही कमाई टीसीएस के अनुसार, कंपनी की AI आधारित आय हर तिमाही लगभग 22 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही तक AI से होने वाली वार्षिक कमाई 2.5 बिलियन डॉलर (करीब 20 हजार करोड़ रुपये) तक पहुंच गई है। पांच रणनीतिक क्षेत्रों पर फोकस कंपनी ने AI आधारित भविष्य की तैयारी के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इनमें पुरानी तकनीकों का आधुनिकीकरण, सप्लाई चेन और ग्राहक सेवाओं में AI का उपयोग, AI एजेंट्स का सुरक्षित संचालन, सरकारों के लिए सॉवरेन AI सिस्टम विकसित करना और फैक्ट्रियों व गोदामों में रोबोटिक्स आधारित फिजिकल AI का इस्तेमाल शामिल है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन टीसीएस का कारोबार भी लगातार मजबूत बना हुआ है। वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल आय 4.6 प्रतिशत बढ़कर 2.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि शुद्ध मुनाफा 8.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 52,820 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसके अलावा कंपनी को 40.7 बिलियन डॉलर से अधिक के नए ऑर्डर मिले हैं, जो उसके मजबूत भविष्य की ओर संकेत करते हैं।
टीसीएस के नासिक कार्यालय में महिला कर्मचारी के कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण प्रयास मामले में दाखिल चार्जशीट में कई गंभीर खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने पीड़िता को मानसिक रूप से प्रभावित करने के लिए सुनियोजित तरीके से धार्मिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया। पीड़िता ने बयान में लगाए गंभीर आरोप चार्जशीट के अनुसार, पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि उसे पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील और विवादित इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के वीडियो देखने के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा, उसे इस्लामिक धार्मिक व्याख्यानों के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की गई। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि इस्लाम अपनाने से उसका मानसिक तनाव कम हो जाएगा। मंदिर जाने और धार्मिक गतिविधियों से रोका गया बयान के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़िता से मंदिर जाना और धार्मिक भजन सुनना बंद करने के लिए कहा। उसे बार-बार यह समझाने की कोशिश की गई कि धार्मिक परिवर्तन से उसकी मानसिक स्थिति में सुधार होगा। शादी का झांसा और निजी जानकारी के दुरुपयोग का आरोप चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि मुख्य आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर कथित रूप से उसका शोषण किया। इसके साथ ही पीड़िता के बैंक खाते और यूपीआई पिन से जुड़ी जानकारी लेने का भी आरोप लगाया गया है। साजिश और नेटवर्क का दावा जांच में यह दावा किया गया है कि तौसीफ अत्तार और निदा खान ने पीड़िता को इस्लामिक धार्मिक सामग्री और वीडियो दिखाने में मदद की। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित मानसिक और धार्मिक प्रभाव बनाने की रणनीति का हिस्सा थी। AIMIM पार्षद का नाम भी चार्जशीट में चार्जशीट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर से AIMIM पार्षद मतीन पटेल पर भी आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने एक आरोपी को गिरफ्तारी से बचाने के लिए शरण दी थी। 106 गवाहों के बयान शामिल पुलिस द्वारा अदालत में दाखिल चार्जशीट में कुल 106 गवाहों के बयान शामिल हैं। महाराष्ट्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। टीसीएस की प्रतिक्रिया टीसीएस ने कहा है कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या जबरदस्ती के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाता है। कंपनी ने कथित रूप से शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है। जांच जारी फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और जांच एजेंसियां सभी आरोपों की विस्तृत जांच कर रही हैं।
उद्योगपति Anil Ambani से जुड़े रिलायंस एडीए (ADA) समूह के मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पहली चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत में पेश की गई, जिसमें कुल 16 आरोपियों को नामजद किया गया है। सीबीआई की इस कार्रवाई को रिलायंस समूह से जुड़े कथित बैंक ऋण घोटाले और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 16 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट चार्जशीट में Reliance Communications Limited, कंपनी के पांच वरिष्ठ अधिकारियों और तीन बैंकों के 10 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। इन अधिकारियों का संबंध State Bank of India, Bank of Maharashtra और पूर्ववर्ती Syndicate Bank से बताया गया है। आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक गबन और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध करने के आरोप लगाए गए हैं। किन बैंक ऋणों की जांच कर रही है CBI? सीबीआई की जांच मुख्य रूप से विभिन्न बैंकों द्वारा स्वीकृत बड़ी ऋण सुविधाओं के कथित दुरुपयोग से जुड़ी है। जांच में शामिल प्रमुख वित्तीय सुविधाएं: SBI द्वारा स्वीकृत 1,200 करोड़ रुपये का टर्म लोन बैंक ऑफ महाराष्ट्र द्वारा स्वीकृत 500 करोड़ रुपये की लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधा सिंडिकेट बैंक द्वारा स्वीकृत 350 करोड़ रुपये की लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधा जांच एजेंसी का आरोप है कि इन ऋणों और बैंकिंग सुविधाओं के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिससे बैंकों को नुकसान पहुंचा। SBI की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला सीबीआई ने SBI की शिकायत के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी की गतिविधियों से बैंक को लगभग 2,929 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। एफआईआर के अनुसार, SBI के नेतृत्व वाले बैंक कंसोर्टियम ने रिलायंस कम्युनिकेशंस को बड़े पैमाने पर ऋण उपलब्ध कराया था। 19,694 करोड़ रुपये से अधिक की कुल देनदारी जांच दस्तावेजों के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस पर कुल 19,694.33 करोड़ रुपये की देनदारी थी। इस कर्ज में 17 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शामिल थे। सीबीआई यह भी जांच कर रही है कि ऋण राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए किया गया था या नहीं तथा कहीं सार्वजनिक धन का दुरुपयोग तो नहीं हुआ। आगे भी हो सकती है बड़ी कार्रवाई सीबीआई ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी अन्य संभावित साजिशकर्ताओं और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। इसके अलावा रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों से जुड़े मामलों में भी कई एफआईआर दर्ज हैं, जिनकी जांच जारी है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही है। सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और अन्य इकाइयों से जुड़े कुल सात मामलों की जांच शुरू की है। ऐसे में पहली चार्जशीट दाखिल होने के बाद आने वाले दिनों में इस पूरे मामले में और महत्वपूर्ण कानूनी व जांच संबंधी घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
अडानी ग्रुप के खिलाफ अमेरिकी जांच मामले में बड़ा अपडेट Gautam Adani और उनके भतीजे Sagar Adani से जुड़े अमेरिकी कानूनी मामले में बड़ी राहत मिलने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (U.S. Securities and Exchange Commission) अडानी ग्रुप से जुड़े केस को सेटल करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, गौतम अडानी और सागर अडानी इस मामले को निपटाने के लिए कुल 18 मिलियन डॉलर यानी लगभग 172.7 करोड़ रुपये देने पर सहमत हुए हैं। क्या है पूरा मामला? SEC ने नवंबर 2024 में अडानी ग्रुप से जुड़े कुछ अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि भारत में सोलर प्रोजेक्ट्स से जुड़े ठेके हासिल करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत दी गई और बाद में अमेरिकी निवेशकों से यह जानकारी छिपाई गई। हालांकि, अडानी ग्रुप लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है। समूह का कहना है कि उसके किसी भी अधिकारी पर अमेरिकी Foreign Corrupt Practices Act के तहत औपचारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं। कौन कितना देगा? फेडरल कोर्ट में दाखिल प्रस्तावित समझौते के मुताबिक: गौतम अडानी: 6 मिलियन डॉलर सागर अडानी: 12 मिलियन डॉलर यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह अडानी ग्रुप के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी राहत मानी जाएगी। क्या अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट भी हटाएगा आरोप? रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि United States Department of Justice भी गौतम अडानी के खिलाफ कुछ धोखाधड़ी संबंधी आरोप वापस लेने पर विचार कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो अडानी ग्रुप की अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में वापसी आसान हो सकती है और कंपनी अपने वैश्विक विस्तार की रणनीति को फिर गति दे सकती है। अडानी ग्रुप का क्या कहना है? Adani Group ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि: समूह या उसकी कंपनियों के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है Adani Green Energy इस कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है कंपनी कानूनों और नियामकीय मानकों का पालन करती है कितना बड़ा है अडानी साम्राज्य? अडानी ग्रुप का कारोबार कई प्रमुख सेक्टर्स में फैला हुआ है: पोर्ट्स एयरपोर्ट्स एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा औद्योगिक समूह माना जाता है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार: गौतम अडानी की कुल संपत्ति: 109 अरब डॉलर 2026 में नेटवर्थ में बढ़ोतरी: 24.5 अरब डॉलर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति दुनिया के अमीरों की सूची में 17वें स्थान पर
कर्मचारियों के लिए शेयर आवंटन को बोर्ड की मंजूरी रिटेल सेक्टर की प्रमुख कंपनी Vishal Mega Mart Limited ने अपने कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से Employee Stock Options Plan (ESOP) 2019 के तहत 1,15,000 इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। कंपनी के बोर्ड की सिक्योरिटीज़ अलॉटमेंट कमेटी ने 6 मार्च 2026 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह शेयर कंपनी और उसकी सहायक इकाई के पात्र कर्मचारियों द्वारा स्टॉक ऑप्शन एक्सरसाइज करने के बाद जारी किए गए। दो अलग-अलग कीमतों पर जारी हुए शेयर कंपनी ने कर्मचारियों द्वारा एक्सरसाइज किए गए स्टॉक ऑप्शंस के आधार पर दो अलग-अलग कीमतों पर शेयर जारी किए हैं। यह कीमतें उस समय के अनुसार तय की गई थीं जब कर्मचारियों को ऑप्शन दिए गए थे। पहला ट्रांच: 16,500 शेयर – ₹18.07 प्रति शेयर दूसरा ट्रांच: 98,500 शेयर – ₹65 प्रति शेयर कुल आवंटन: 1,15,000 इक्विटी शेयर इन स्टॉक ऑप्शंस के माध्यम से कंपनी को कुल ₹67,00,655 की राशि प्राप्त हुई है। प्रत्येक स्टॉक ऑप्शन को ₹10 फेस वैल्यू वाले एक पूर्ण रूप से चुकता इक्विटी शेयर में बदला गया। कंपनी की पूंजी संरचना में बदलाव नए शेयर जारी होने के बाद कंपनी की पेड-अप शेयर कैपिटल और कुल शेयरों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है। आवंटन से पहले: पेड-अप कैपिटल – ₹46,73,00,28,060 कुल इक्विटी शेयर – 4,67,30,02,806 आवंटन के बाद: पेड-अप कैपिटल – ₹46,73,11,78,060 कुल इक्विटी शेयर – 4,67,31,17,806 SEBI नियमों के तहत पूरी प्रक्रिया कंपनी ने यह पूरा आवंटन SEBI (Share Based Employee Benefits and Sweat Equity) Regulations, 2021 के नियमों के अनुसार किया है। इसके लिए कंपनी ने आवश्यक जानकारी NSE और BSE में पहले ही दाखिल कर दी थी। नए शेयरों को मिलेंगे सभी अधिकार कंपनी द्वारा जारी किए गए नए इक्विटी शेयरों को पुराने शेयरों के समान सभी अधिकार मिलेंगे। इनमें डिविडेंड का अधिकार भी शामिल है और ये शेयर बाजार में स्वतंत्र रूप से ट्रेड किए जा सकेंगे। इन शेयरों पर किसी तरह का लॉक-इन पीरियड लागू नहीं है। कर्मचारियों को प्रेरित करने का अहम साधन Vishal Mega Mart Employees Stock Options Plan 2019 के तहत कर्मचारियों को दिए गए ऑप्शंस को जारी होने की तारीख से 10 वर्षों के भीतर एक्सरसाइज किया जा सकता है। कंपनी का मानना है कि ESOP योजना कर्मचारियों को कंपनी के विकास से सीधे जोड़ने और उन्हें लंबे समय तक संगठन से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करने का प्रभावी माध्यम है। शेयर प्रदर्शन पर एक नजर हाल के समय में कंपनी के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 1 दिन: -1.75% 5 दिन: -11.63% 1 महीना: -8.41% 6 महीने: -26.09% 1 साल: +7.20% 5 साल: +0.69%
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।