CRPF

CAPF personnel deployed in West Bengal for law and order duties after elections under central government approval.
बंगाल में 20 जून तक तैनात रहेंगी CAPF की 500 कंपनियां, गृह मंत्रालय ने दी मंजूरी

पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) की 500 कंपनियां फिलहाल राज्य में तैनात रहेंगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने गृह मंत्रालय से 180 दिनों तक केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखने का आग्रह किया था। केंद्र सरकार ने फिलहाल 20 जून तक इसकी मंजूरी दी है। चुनाव के बाद भी तैनात रखे गए थे केंद्रीय बल विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद पश्चिम बंगाल में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीएपीएफ की 500 कंपनियों को राज्य में तैनात किया गया था। पिछले चुनावों के बाद हुई हिंसक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार मतदान खत्म होने के बाद भी केंद्रीय बलों को नहीं हटाया गया था। गत सप्ताह राज्य की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद गृह मंत्रालय ने इन बलों को चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू की थी। पहले चरण में 100 कंपनियों यानी करीब 10 हजार जवानों को हटाने का आदेश जारी किया गया था। गृह मंत्रालय ने जारी किया नया आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार, अब 20 जून तक राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रहेगी। आदेश में कहा गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न बलों की कुल 500 कंपनियां पश्चिम बंगाल में मौजूद रहेंगी। इनमें: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 200 कंपनियां सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 150 कंपनियां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 50 कंपनियां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 50 कंपनियां सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 50 कंपनियां शामिल हैं। राज्य सरकार को करनी होगी व्यवस्थाएं गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बलों की तैनाती के दौरान ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक सपोर्ट और जवानों के ठहरने की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी होगी। साथ ही बलों की सभी ऑपरेशनल जरूरतों का भी ध्यान रखने को कहा गया है। पहले चरण में हटनी थीं 100 कंपनियां गृह मंत्रालय ने पहले चरण में 100 कंपनियों को वापस बुलाने का फैसला लिया था। इनमें CRPF की 40, BSF की 30, CISF की 10, ITBP की 10 और SSB की 10 कंपनियां शामिल थीं। आदेश के मुताबिक 15 मई से इन कंपनियों को कानून व्यवस्था ड्यूटी से हटाया जाना था। सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया फैसला राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुई समीक्षा बैठक में पश्चिम बंगाल गृह विभाग और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए थे। खुफिया एजेंसियों से भी विशेष रिपोर्ट मांगी गई थी। समीक्षा में बताया गया कि चुनाव के बाद फिलहाल राज्य में स्थिति शांतिपूर्ण है और बड़े राजनीतिक प्रदर्शन या हिंसा की घटनाएं नहीं हुई हैं। वहीं बांग्लादेश सीमा से लगने वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। सीमा सुरक्षा बल घुसपैठ रोकने के लिए लगातार सतर्क है और कई इलाकों में फेंसिंग का काम भी शुरू किया जा रहा है।  

surbhi मई 21, 2026 0
CRPF personnel seize cash during West Bengal Assembly Election 2026 polling operations
बंगाल चुनाव में बड़ी कार्रवाई: पोलिंग एजेंट से नकदी बरामद, अब तक 481 करोड़ की जब्ती

चुनाव आयोग की सख्ती, पूरे राज्य में अवैध धन और सामग्री पर कड़ा प्रहार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बाद निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य भर में चलाए गए सघन अभियान के दौरान अब तक 481 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थ और अन्य सामग्री जब्त की गई है। पोलिंग एजेंट के पास से नकदी बरामद सबसे चौंकाने वाली घटना मुर्शिदाबाद जिले के मुराराई विधानसभा क्षेत्र में सामने आई, जहां मतदान के दिन ही CRPF जवानों ने एक पोलिंग एजेंट के पास से 1.65 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद किए। यह कार्रवाई बूथ संख्या 137 पर की गई। 181 जगहों पर छापेमारी, नशीले पदार्थ भी जब्त चुनाव से पहले और मतदान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने राज्यभर में 181 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान शराब, बीयर और स्पिरिट सहित बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए, जिनकी कीमत करीब 55 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। अब तक 481 करोड़ से ज्यादा की जब्ती चुनाव आयोग के अनुसार, 15 मार्च 2026 से शुरू हुई कार्रवाई में अब तक: 29 करोड़ रुपये नकद 108 करोड़ रुपये से अधिक के नशीले पदार्थ 107 करोड़ रुपये से ज्यादा की शराब 57 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं 179 करोड़ रुपये के फ्रीबीज (मुफ्त वितरण सामग्री) जब्त किए जा चुके हैं। हथियार और विस्फोटक भी बरामद सुरक्षा एजेंसियों ने चुनावी माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी जब्त किए हैं। अब तक: 384 अवैध हथियार 1232 बम 595 कारतूस 216 किलो से अधिक विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। लाखों पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के तहत पूरे राज्य में अभियान चलाकर लाखों अवैध पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई है। कोलकाता, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई है। चुनाव आयोग की सख्त निगरानी जारी निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि आगामी चरणों में भी आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाएगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
108 Naxalites surrender in Chhattisgarh as part of ‘Naxal Mukt Bharat’ campaign, with reward payouts.
छत्तीसगढ़ में 108 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, 3.95 करोड़ का इनाम; ‘नक्सल मुक्त भारत’ अभियान को बड़ी सफलता

  रायपुर: छत्तीसगढ़ में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान के अंतिम चरण में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 108 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक इन नक्सलियों पर कुल मिलाकर करीब 3.95 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। हाल के वर्षों में इसे नक्सलियों के सबसे बड़े सामूहिक सरेंडर में से एक माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह कदम देश में चल रहे ‘नक्सल मुक्त भारत’ मिशन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अभियान को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने आगे बढ़ाया है और केंद्र सरकार ने इसे 31 मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।   कई जिलों में एक साथ सरेंडर अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली राज्य के अलग-अलग जिलों से जुड़े थे। जिलावार आंकड़े इस प्रकार हैं: बीजापुर: 37 नक्सली   नारायणपुर: 4 नक्सली   बस्तर: 16 नक्सली   कांकेर: 3 नक्सली   सुकमा: 18 नक्सली   दंतेवाड़ा: 30 नक्सली   इतनी बड़ी संख्या में एक ही दिन में हुए आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।   इनाम की राशि भी थी बड़ी सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर सरकार ने अलग-अलग स्तर के इनाम घोषित कर रखे थे। अधिकारियों के मुताबिक: 22 नक्सलियों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था   31 नक्सलियों पर 5-5 लाख रुपये   1 नक्सली पर 3 लाख रुपये   9 नक्सलियों पर 2-2 लाख रुपये   43 नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपये   इनाम की इस बड़ी राशि को देखते हुए यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि सरेंडर के दौरान माओवादियों की निशानदेही पर एक बड़ा माओवादी हथियार डंप भी बरामद किया गया है, जिसे अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।   पहले भी हो चुके हैं कई सरेंडर इससे पहले हाल ही में छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में भी 15 माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। इनमें 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल थे। इन नक्सलियों ने पुलिस के सामने 3 एके-47 राइफल, 2 एसएलआर और 2 इंसास राइफल समेत कई हथियार जमा कराए थे। यह समूह ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय बलांगीर-बरगढ़-महासमुंद कमेटी से जुड़ा हुआ था।   अभियान के अंतिम चरण में सुरक्षा बल सतर्क इसी बीच Central Reserve Police Force (CRPF) के महानिदेशक G P Singh ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के कई फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस का दौरा किया था। उन्होंने जवानों को अभियान के अंतिम चरण में पूरी सतर्कता बरतने और “जीरो कैजुअल्टी” के लक्ष्य के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से नक्सलियों द्वारा लगाए जाने वाले छिपे हुए आईED (IED) को सबसे बड़ा खतरा बताया और सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया।   ‘नक्सल मुक्त भारत’ की दिशा में बड़ा कदम विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण यह संकेत देता है कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति का असर जमीन पर दिखाई देने लगा है। यदि इसी तरह अभियान आगे बढ़ता रहा तो 31 मार्च 2026 तक ‘नक्सल मुक्त भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में यह एक अहम उपलब्धि साबित हो सकती है।

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
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भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0