रांची। झारखंड के बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की अपराध अन्वेषण विभाग (CID) ने पशुपालन विभाग के खाते से करोड़ों रुपये की अवैध वेतन निकासी मामले में मुख्य आरोपी और प्रधान लिपिक मुनिंद्र कुमार के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी के अनुसार, मुनिंद्र ने सरकारी वित्तीय प्रबंधन प्रणाली 'कुबेर' पोर्टल की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़ा किया और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। फर्जी आईडी और बिल बनाकर किया करोड़ों का गबन CID की जांच में सामने आया है कि मुनिंद्र कुमार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच कांके स्थित पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान में लेखापाल रहते हुए मूल वेतन संबंधी आंकड़ों में हेरफेर की। उसने पूर्व कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों और यहां तक कि मृत कर्मचारियों के नाम पर भी फर्जी आईडी तैयार कीं। इन फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर नकली वेतन बिल बनाए गए और उन्हें कोषागार से स्वीकृत कराकर करोड़ों रुपये अपने तथा अपने करीबी लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर करा दिए। कई थानों के मामलों की जांच CID के जिम्मे यह मामला सबसे पहले रांची के कोतवाली थाना में दर्ज हुआ था, जहां से आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में रामगढ़ और खेलगांव थानों में दर्ज संबंधित मामलों को भी CID ने अपने हाथ में ले लिया। जांच एजेंसी का कहना है कि घोटाले का दायरा बड़ा है और इसकी तह तक पहुंचने के लिए अनुसंधान अभी जारी है। तकनीकी खामियों का उठाया फायदा चार्जशीट में CID ने अदालत को बताया है कि आरोपी ने 'कुबेर' पोर्टल की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर सरकारी भुगतान प्रणाली से छेड़छाड़ की। बताया गया कि फ्रोजन सीमेन बैंक, होटवार में पदस्थापना के दौरान भी उसने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
नई दिल्ली: अगर आप WhatsApp Web या WhatsApp Desktop का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। साइबर सुरक्षा एजेंसी CyberDost (I4C) ने व्हाट्सऐप यूजर्स को एक नए और खतरनाक साइबर स्कैम को लेकर चेतावनी जारी की है। इस नए फ्रॉड में हैकर्स फर्जी डॉक्यूमेंट, फोटो या जरूरी फाइल का झांसा देकर ऐसी फाइलें भेज रहे हैं, जिन्हें खोलते ही आपका सिस्टम और व्हाट्सऐप सेशन साइबर अपराधियों के नियंत्रण में जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह हमला खासतौर पर उन लोगों को निशाना बना रहा है जो लैपटॉप या कंप्यूटर पर WhatsApp Web या Desktop App का उपयोग करते हैं। क्या है नया WhatsApp Scam? साइबर अपराधी अनजान नंबरों से यूजर्स को PDF, फोटो, इनवॉइस, रिज्यूमे, ऑफिस डॉक्यूमेंट या अन्य जरूरी फाइल का नाम देकर .exe और .dll जैसी एक्सिक्यूटेबल फाइलें भेज रहे हैं। पहली नजर में ये फाइलें सामान्य डॉक्यूमेंट जैसी दिखाई देती हैं, लेकिन इन्हें डाउनलोड कर ओपन करते ही इनमें मौजूद खतरनाक कोड एक्टिव हो जाता है। इसके बाद हमलावर आपके सिस्टम और WhatsApp सेशन तक पहुंच बना सकते हैं। कैसे काम करता है यह साइबर फ्रॉड? स्कैमर्स बेहद चालाकी से यूजर्स को फंसाते हैं। अनजान नंबर से फर्जी डॉक्यूमेंट या फोटो भेजते हैं। फाइल का नाम इस तरह रखा जाता है कि वह असली लगे। फाइल डाउनलोड और ओपन करते ही सिस्टम में मैलवेयर एक्टिव हो सकता है। इसके बाद हमलावर WhatsApp Web या Desktop Session पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं। चैट हिस्ट्री, फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट और कॉन्टैक्ट लिस्ट तक पहुंच बनाई जा सकती है। कई मामलों में अपराधी आपके अकाउंट से आपके दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज भेजकर पैसों की ठगी भी करते हैं। किन फाइलों से सबसे ज्यादा खतरा? Cyber सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इन फाइल एक्सटेंशन से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। .exe .dll .zip .bat यदि किसी फाइल का नाम document.pdf.exe या photo.jpg.exe जैसा दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल भी डाउनलोड या ओपन न करें। कई बार फाइल का असली एक्सटेंशन छिपा होता है, जिससे यूजर धोखा खा जाता है। खुद को ऐसे रखें सुरक्षित साइबर हमलों से बचने के लिए इन बातों का हमेशा ध्यान रखें। किसी भी अनजान नंबर से आई फाइल डाउनलोड न करें। फाइल का पूरा नाम और एक्सटेंशन जरूर जांचें। WhatsApp के Linked Devices सेक्शन को नियमित रूप से चेक करें। कोई अनजान डिवाइस दिखाई दे तो तुरंत Log Out करें। अपने WhatsApp पर Two-Step Verification (2FA) हमेशा चालू रखें। कंप्यूटर और एंटीवायरस को नियमित रूप से अपडेट रखें। संदिग्ध फाइल मिलने पर उसे तुरंत डिलीट करें और भेजने वाले नंबर को ब्लॉक करें। अगर ठगी का शिकार हो जाएं तो क्या करें? यदि आपको लगता है कि आपका WhatsApp या सिस्टम हैक हो गया है, तो तुरंत कार्रवाई करें। सभी Linked Devices से लॉग आउट करें। WhatsApp का Two-Step Verification सक्रिय करें। अपने महत्वपूर्ण पासवर्ड बदलें। तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें। cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
जामताड़ा। झारखंड के जामताड़ा में पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ही दिन में नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई दो अलग-अलग छापेमारी अभियानों के दौरान की गई। आरोपियों के कब्जे से 27 मोबाइल फोन और 39 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार अपराधी फर्जी कस्टमर केयर नंबर, कैशबैक ऑफर और बैंक अधिकारी बनकर लोगों से एटीएम, सीवीवी और ओटीपी की जानकारी हासिल कर देशभर के लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाते थे। जानकारी के मुताबिक जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को जामताड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) शंभू कुमार सिंह को गुप्त सूचना मिली कि जिले के सियाटांड़ और मठटांड़ क्षेत्र के जंगल में कुछ साइबर अपराधी सक्रिय हैं। सूचना मिलते ही एसपी ने एक विशेष टीम का गठन कर छापेमारी के निर्देश दिए। पुलिस जब जंगल में पहुंची तो अपराधियों में अफरा-तफरी मच गई और वे भागने लगे, लेकिन पहले से घेराबंदी कर चुकी टीम ने पीछा कर पांच आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। पहली कार्रवाई के बाद मिली दूसरी सूचना, चार और आरोपी दबोचे पहले चरण की कार्रवाई के बाद पुलिस गिरफ्तार आरोपियों को लेकर लौट रही थी, तभी एसपी को एक और गुप्त सूचना मिली। इसके बाद छापेमारी दल तुरंत जामताड़ा थाना क्षेत्र के पोसोई मार्ग पहुंचा, जहां चार अन्य संदिग्ध साइबर अपराधी सक्रिय मिले। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों को भी मौके से गिरफ्तार कर लिया। इस प्रकार एक ही दिन में कुल नौ साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिली। इस पूरे अभियान का नेतृत्व उपाधीक्षक (साइबर अपराध) अमित ने किया। एसपी शंभू कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से दो के खिलाफ पहले से साइबर अपराध के मामले दर्ज हैं। पुलिस अब इनके नेटवर्क, सहयोगियों और ठगी से जुड़े अन्य मामलों की भी जांच कर रही है। इस अभियान में साइबर थाना प्रभारी राजेश मंडल, निरीक्षक नितिश कुमार, अवर निरीक्षक बिनोद सिंह समेत पुलिस बल के अन्य जवान शामिल रहे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। विज्ञान, तकनीक और अपराध जांच में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए फॉरेंसिक साइंस तेजी से उभरता हुआ करियर विकल्प बन रहा है। साइबर अपराध, डिजिटल फ्रॉड और जटिल आपराधिक मामलों में लगातार बढ़ोतरी के कारण प्रशिक्षित फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में 12वीं के बाद इस क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) और विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, जैसे Coursera, कई उपयोगी कोर्स उपलब्ध करा रहे हैं। फॉरेंसिक साइंस क्या है ? फॉरेंसिक साइंस वह विज्ञान है, जिसमें अपराधों की जांच के लिए वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग क्राइम सीन की जांच, डीएनए प्रोफाइलिंग, फिंगरप्रिंट विश्लेषण, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सटीक प्रमाण उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। इसके अलावा बैंकिंग, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए छात्रों को 12वीं विज्ञान संकाय (फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी या मैथ्स) से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके बाद बीएससी इन फॉरेंसिक साइंस या संबंधित विषयों में स्नातक किया जा सकता है। आगे एमएससी, विशेष डिप्लोमा या विशेषज्ञता वाले कोर्स करके बेहतर करियर बनाया जा सकता है। इस क्षेत्र में सफलता के लिए वैज्ञानिक सोच, तार्किक विश्लेषण, धैर्य, सूक्ष्म निरीक्षण क्षमता और आधुनिक तकनीकों की समझ जरूरी मानी जाती है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला कैसे होता है ? अधिकांश केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर प्रवेश कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) के माध्यम से होता है। राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) भी अपने कई स्नातक कार्यक्रमों में CUET-UG स्कोर के आधार पर प्रवेश देता है, जबकि कुछ कोर्स के लिए अलग पात्रता और चयन प्रक्रिया लागू हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में साइबर अपराध और वैज्ञानिक जांच की बढ़ती जरूरत को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस आने वाले वर्षों में रोजगार के सबसे संभावनाशील क्षेत्रों में शामिल होगा। ऐसे में सही कोर्स और प्रशिक्षण के साथ छात्र इस क्षेत्र में उज्ज्वल भविष्य बना सकते हैं।
नई दिल्ली: देश की कई प्रमुख सुरक्षा और रणनीतिक संस्थाओं को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ईमेल मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में पुलिस ने गाजियाबाद निवासी एक संदिग्ध से पूछताछ की है। शुरुआती जांच में सभी धमकियां फर्जी पाई गई हैं, हालांकि पुलिस ईमेल भेजने के उद्देश्य और पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कर रही है। 29 जून को मिला था धमकी भरा ईमेल 29 जून को विभिन्न सरकारी और सुरक्षा एजेंसियों को एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया था। इसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), नागरिक उड्डयन मंत्रालय और दिल्ली-न्यूयॉर्क एयर इंडिया फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। ईमेल मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। संबंधित सभी कार्यालयों और परिसरों की तत्काल जांच कराई गई, लेकिन कहीं भी कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। तकनीकी जांच के बाद गाजियाबाद पहुंची पुलिस धमकी भरे ईमेल की तकनीकी जांच के आधार पर दिल्ली पुलिस गाजियाबाद के संयोग नगर स्थित बैंक कॉलोनी पहुंची। यहां 36 वर्षीय निशांत त्यागीसे पूछताछ की गई। पुलिस ने संदिग्ध के घर की तलाशी भी ली, लेकिन वहां से कोई विस्फोटक या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया? पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि संदिग्ध वर्ष 2008 से एक गंभीर बीमारी से पीड़ित है और कई प्रतिष्ठित अस्पतालों में उसका इलाज हो चुका है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धमकी भरा ईमेल किस उद्देश्य से भेजा गया था और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है या नहीं। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ISRO मुख्यालय में मच गया था हड़कंप धमकी भरे ईमेल के बाद सबसे अधिक सतर्कता ISRO मुख्यालय में बरती गई। ईमेल मिलते ही अधिकारियों ने तत्काल इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर परिसर खाली कराया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। बम निरोधक दस्ता, सुरक्षा एजेंसियां और जांच टीमों ने पूरे परिसर की गहन तलाशी ली, लेकिन जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। जांच जारी दिल्ली पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब ईमेल की तकनीकी जांच, डिजिटल ट्रेल और संदिग्ध की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
कोलकाता , एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए राज्य के सभी पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क स्थापित करने का फैसला किया है। सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना, उनकी शिकायतों का त्वरित निस्तारण करना और पुलिस तक उनकी आसान पहुंच सुनिश्चित करना है। सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से होगी शुरुआत गृह विभाग के अनुसार, राज्य के सभी जिलों के पुलिस थानों में चरणबद्ध तरीके से महिला हेल्प डेस्क स्थापित की जाएगी। प्रत्येक हेल्प डेस्क पर प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती होगी, जो घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, साइबर अपराध और महिलाओं से जुड़े अन्य मामलों में तत्काल सहायता प्रदान करेंगी। 'दुर्गा स्क्वाड' और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को भी मिलेगी मजबूती महिला सुरक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने 'दुर्गा स्क्वाड' के विस्तार और आपातकालीन हेल्पलाइन 112 को मजबूत करने का भी निर्णय लिया है। संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने और त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश सरकार ने सभी पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि महिलाओं से जुड़ी शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाए। साथ ही प्रत्येक मामले की नियमित निगरानी कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। महिला सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से महिलाओं का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा। महिला हेल्प डेस्क के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को कानूनी सलाह, आवश्यक सहायता और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान बनाया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि यह पहल महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत करने और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई नई पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने नबान्न सभागार से ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’, साइबर क्राइम हेल्प डेस्क और महिला हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि महालया से राज्यभर में डायल-112 आपातकालीन सेवा शुरू होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि 112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस किसी भी थाना क्षेत्र में पांच मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचे। क्या है ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’? ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए गठित एक विशेष पुलिस इकाई है। यह टीम सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों, कॉलेजों और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त करेगी तथा महिला सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करेगी। सरकार के अनुसार, इस स्क्वाड का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है। एक साल में 5 मिनट रिस्पॉन्स टाइम का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में पुलिस की औसत प्रतिक्रिया समय लगभग तीन घंटे है, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पुलिस औसतन छह मिनट के भीतर मौके पर पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार अगले एक वर्ष के भीतर पश्चिम बंगाल में भी पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम घटाकर पांच मिनट करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। इसके लिए इस वर्ष के बजट में प्रत्येक थाने को डायल-112 सेवा के लिए एक वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अगले बजट में इन वाहनों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। 500 थानों में महिला हेल्प डेस्क सरकार ने राज्य के 500 पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क की शुरुआत भी की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिलाओं से जुड़े मामलों में किसी भी शिकायत को नजरअंदाज न किया जाए और प्रत्येक शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साइबर अपराध से निपटने के लिए विशेष हेल्प डेस्क राज्य के सभी थानों में साइबर क्राइम हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड से जुड़े मामलों की त्वरित शिकायत दर्ज करना और जांच प्रक्रिया को तेज करना है। पुलिस के आधुनिकीकरण का भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल को राष्ट्रीय स्तर की आधुनिक एजेंसियों के अनुरूप विकसित किया जाएगा और पुलिस के कामकाज में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होने दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाना और आम नागरिकों को तेज एवं भरोसेमंद पुलिस सहायता उपलब्ध कराना है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित 'यूजरनेम' फीचर को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर इस फीचर के रोलआउट पर सवाल उठाए हैं और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक उसके सभी सुरक्षा संबंधी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक भारत में यह फीचर लॉन्च नहीं किया जा सकेगा। नोटिस में क्या कहा गया? सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि WhatsApp का यूजरनेम फीचर ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पहचान वाले साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकता है। नोटिस के अनुसार, यदि लोग केवल यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेंगे, तो साइबर अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाकर लोगों को निशाना बनाना अधिक आसान हो जाएगा। कानूनी कार्रवाई की चेतावनी सरकार ने मेटा से पूछा है कि जब कंपनी को इस फीचर से संभावित साइबर अपराधों का अंदेशा है, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। मेटा को इस संबंध में लिखित और विस्तृत जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। सरकार की प्रमुख चिंताएं सरकार ने नोटिस में कई संभावित जोखिमों का उल्लेख किया है। डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन स्कैम: सरकार का मानना है कि बिना फोन नंबर साझा किए केवल यूजरनेम के जरिए संपर्क की सुविधा मिलने पर साइबर अपराधियों के लिए लोगों तक पहुंचना आसान हो सकता है। फर्जी पहचान का खतरा: धोखेबाज किसी व्यक्ति, कंपनी या सरकारी संस्था से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। सरकारी एजेंसियों की नकल: आशंका जताई गई है कि अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, बैंक या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर सकते हैं। यूजरनेम फीचर क्या है? WhatsApp जिस फीचर पर काम कर रहा है, उसके तहत उपयोगकर्ता अपने मोबाइल नंबर के बजाय एक यूजरनेम के जरिए दूसरों से जुड़ सकेंगे। इससे फोन नंबर साझा किए बिना बातचीत करने का विकल्प मिलेगा। यह सुविधा पहले से कई अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। भारत सरकार का मानना है कि इस फीचर को लागू करने से पहले पर्याप्त सुरक्षा उपाय और पहचान सत्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। फिलहाल मेटा की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार के जवाब की समीक्षा के बाद ही भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आज का समय डिजिटल ज़माने का है। डिजिटल युग में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। फर्जी कॉल, UPI फ्रॉड, ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग लिंक और सोशल मीडिया हैकिंग जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। ऐसे में यदि आप साइबर क्राइम का शिकार हो जाते हैं, तो घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। समय पर शिकायत करने से कई मामलों में पैसे वापस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर करें कॉल अगर आपके बैंक खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसे निकल गए हैं, तो सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी ही जल्दी संबंधित बैंक खाते को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ेगी। तुरंत ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें फोन करने के साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। शिकायत करते समय घटना का पूरा विवरण, लेनदेन की जानकारी, स्क्रीनशॉट और अन्य जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। बैंक को तुरंत सूचित करें यदि आपके खाते से पैसा निकला है, तो अपने बैंक की कस्टमर केयर और नजदीकी शाखा को तुरंत जानकारी दें। कई बैंक समय रहते कार्रवाई कर संदिग्ध ट्रांजैक्शन को रोकने या आगे की प्रक्रिया शुरू करने में मदद करते हैं। सभी सबूत सुरक्षित रखें फर्जी मैसेज, कॉल रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन आईडी, UPI रेफरेंस नंबर, ईमेल और चैट जैसे सभी डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें। जांच एजेंसियों के लिए ये महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। पासवर्ड और UPI PIN तुरंत बदलें यदि आपको लगता है कि आपका अकाउंट या मोबाइल हैक हो गया है, तो तुरंत बैंकिंग ऐप, ईमेल, सोशल मीडिया और अन्य महत्वपूर्ण खातों के पासवर्ड बदल दें। साथ ही UPI PIN भी बदलें और जहां संभव हो वहां टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करें। पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं गंभीर साइबर अपराध की स्थिति में अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन या स्थानीय थाने में भी शिकायत दर्ज कराएं। ऑनलाइन शिकायत का नंबर और सभी दस्तावेज अपने साथ रखें। भविष्य में ऐसे रहें सुरक्षित किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। OTP, UPI PIN, CVV या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। खुद को CBI, पुलिस, RBI या बैंक अधिकारी बताने वाले वीडियो कॉल या फोन कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। केवल आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें। मोबाइल और बैंकिंग ऐप को हमेशा अपडेट रखें। समय पर कार्रवाई है सबसे जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कराता है, तो धोखाधड़ी की राशि को रोकने या वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में देरी न करें और तुरंत संबंधित एजेंसियों से संपर्क करें।
जामताड़ा, एजेंसियां। साइबर अपराध के लिए बदनाम जामताड़ा से ठगी का एक और नया तरीका सामने आया है। पुलिस ने तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कैशबैक ऑफर और फर्जी बैंक कॉल के जरिए लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ा रहे थे। आरोपियों के खुलासों ने साइबर ठगी के नए और खतरनाक तरीकों की जानकारी दी है। गिरिडीह के साइबर डीएसपी अमित रविदास ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर करमाटाड़ थाना क्षेत्र में छापेमारी कर समीम अंसारी (24), कैफ अंसारी (19) और मुस्तकीम अंसारी (38) को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान उनके पास से छह मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। कैशबैक ऑफर के नाम पर ठगी पुलिस पूछताछ में सामने आया कि समीम और कैफ अंसारी ‘Ease My Deal’ नामक ऐप का इस्तेमाल कर लोगों के PhonePe खातों पर ₹1999 कैशबैक का आकर्षक संदेश भेजते थे। संदेश देखकर कई लोग इसे असली ऑफर समझकर लिंक पर क्लिक कर देते थे। जैसे ही पीड़ित लिंक पर क्लिक करता, उसके खाते से रकम ट्रांसफर हो जाती। ठग इस पैसे से ऑनलाइन गिफ्ट कार्ड खरीदते और बाद में उन्हें कमीशन पर बेचकर नकदी हासिल करते थे। पुलिस का कहना है कि यह तरीका तेजी से लोगों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। फर्जी SBI अधिकारी बनकर करता था कॉल गिरफ्तार तीसरा आरोपी मुस्तकीम अंसारी खुद को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करता था। वह पीड़ितों को डराता था कि उनका क्रेडिट कार्ड जल्द बंद होने वाला है और उसे चालू रखने के लिए कुछ जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद वह मोबाइल में एक APK फाइल डाउनलोड करवाता था। यह फाइल जासूसी सॉफ्टवेयर की तरह काम करती थी और इंस्टॉल होते ही कार्ड नंबर, ओटीपी तथा अन्य गोपनीय जानकारियां अपराधियों तक पहुंच जाती थीं। इसके बाद खाते से रकम निकाल ली जाती थी। पुराने नेटवर्क की तलाश में पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मुस्तकीम अंसारी पहले भी साइबर ठगी के मामलों में शामिल रह चुका है। पुलिस अब उसके पुराने नेटवर्क, सहयोगियों और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी कैशबैक लिंक, अज्ञात ऐप या APK फाइल पर भरोसा न करें और बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल जहां लोगों की जिंदगी आसान बना रहा है, वहीं साइबर अपराधी भी इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। हाल के दिनों में AI की मदद से बनाए गए फर्जी वीडियो और नकली आवाज के जरिए लोगों को ठगने के मामले में तेजी आई हैं। एक ताजा मामले में कोलकाता के 81 वर्षीय बुजुर्ग को AI से तैयार किए गए फर्जी वीडियो के जरिए 17.8 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया है। फर्जी वीडियो देखकर लगाया पैसा जानकारी के अनुसार, ठगों ने एक वीडियो में केंद्रीय वित्त मंत्री की AI से बनाई गई नकली छवि का इस्तेमाल किया और लोगों को निवेश का लालच दिया। वीडियो पर भरोसा कर बुजुर्ग ने लाखों रुपये निवेश कर दिए, लेकिन बाद में यह पूरा मामला धोखाधड़ी का निकला। AI Fraud क्यों बन रहा है बड़ा खतरा? विशेषज्ञों का कहना है कि अब AI की मदद से किसी भी व्यक्ति की आवाज और चेहरा हूबहू तैयार किया जा सकता है। ऐसे में आम लोगों के लिए असली और नकली कंटेंट में फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। साइबर अपराधी इसी कमजोरी का फायदा उठा रहे हैं। ऐसे करें अपनी सुरक्षा किसी भी निवेश योजना पर तुरंत भरोसा न करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले वीडियो की सत्यता को जांचें। केवल आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का उपयोग करें। OTP, बैंकिंग जानकारी और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। किसी बड़े निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। सरकार और एजेंसियां भी सतर्क देश में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियां डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने पर काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्यों से साइबर अपराध मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को तेजी से लागू करने का आग्रह किया है। डिजिटल युग में सतर्क रहना जरूरी तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराध के तरीके भी उतनी ही तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में किसी भी वीडियो, कॉल या निवेश प्रस्ताव पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और अब ठगों का नया हथियार SIM Swap Fraud बनता जा रहा है। इस फ्रॉड में अपराधी बिना मोबाइल छुए आपका नंबर अपने कब्जे में ले लेते हैं और फिर बैंक OTP हासिल कर खाते से पैसे निकाल सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में इस तरह के मामलों में तेजी देखी गई है। SIM Swap Fraud क्या है? इस फ्रॉड में ठग आपकी निजी जानकारी जुटाकर टेलीकॉम कंपनी को धोखे से यह विश्वास दिलाते हैं कि वे असली ग्राहक हैं। इसके बाद आपका मोबाइल नंबर एक नए SIM पर ट्रांसफर कर दिया जाता है। जैसे ही आपका SIM बंद होता है, OTP और बैंकिंग संदेश ठगों के पास पहुंचने लगते हैं। अचानक नेटवर्क गायब हो जाए तो हो जाएं सतर्क विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपके फोन में अचानक नेटवर्क आना बंद हो जाए, कॉल और SMS न आएं, तो इसे सामान्य तकनीकी समस्या मानकर नजरअंदाज न करें। यह SIM Swap Fraud का संकेत हो सकता है। करोड़ों रुपये की ठगी के मामले सामने आए हाल ही में कई बड़े साइबर फ्रॉड मामलों में SIM और OTP का दुरुपयोग सामने आया है। जांच एजेंसियों ने ऐसे नेटवर्क का भी खुलासा किया है जिनमें हजारों SIM कार्ड का इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जा रहा था। ऐसे करें खुद का बचाव SIM पर PIN लॉक लगाएं। बैंक अलर्ट SMS के साथ ईमेल पर भी प्राप्त करें। किसी भी पोर्टिंग या SIM बदलने वाले संदेश को गंभीरता से लें। OTP और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें। अचानक नेटवर्क बंद होने पर तुरंत टेलीकॉम कंपनी से संपर्क करें।
जामताड़ा। झारखंड के जामताड़ा जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से 9 मोबाइल फोन तथा 22 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक शंभु कुमार सिंह को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई। इसके बाद साइबर डीएसपी अमित कुमार के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी टीम गठित की गई। जंगल में छापेमारी कर दबोचे गए आरोपी पुलिस टीम ने जामताड़ा थाना क्षेत्र के सुपाईडीह और शेखपुरा के बीच स्थित जंगल में छापेमारी कर दो आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया, जबकि एक अन्य आरोपी को बाद में दबोचा गया। मौके से बरामद मोबाइल और सिम कार्ड का उपयोग कथित रूप से साइबर ठगी की वारदातों में किया जा रहा था। बड़े नेटवर्क की आशंका, जांच जारी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इनके पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह तो नहीं काम कर रहा। शुरुआती जांच में कई अहम सुराग मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में साइबर अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और ऐसे मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को देने को कहा गया है, ताकि साइबर ठगी की घटनाओं को रोका जा सके।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में साइबर अपराधी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना अहिल्यापुर थाना क्षेत्र के चिकसोरिया गांव की है, जहां पुलिस की छापेमारी के दौरान ग्रामीणों और आरोपित के परिजनों ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया। इस हमले में पुलिस का वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। गुप्त सूचना पर पहुंची थी साइबर पुलिस जानकारी के अनुसार, चामलिटी गांव निवासी साइबर अपराधी चुरामण मंडल अपने ससुराल चिकसोरिया गांव में छिपकर रह रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद गिरिडीह साइबर थाना की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गांव पहुंची थी। पुलिस ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, चुरामण मंडल को इसकी भनक लग गई। भीड़ ने किया विरोध, आरोपी भाग निकला पुलिस के पहुंचते ही आरोपी और उसके सहयोगियों ने ग्रामीणों को इकट्ठा कर विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया गया। हमले के दौरान पुलिस वाहन का शीशा टूट गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी मौके का फायदा उठाकर चुरामण मंडल अपने साथियों के साथ फरार हो गया। कई लोगों पर दर्ज हुआ मामला अहिल्यापुर थाना प्रभारी ऐनुल हक खान ने बताया कि साइबर अपराधी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही थी, लेकिन ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस कार्रवाई में बाधा डालते हुए हमला कर दिया। इस मामले में 5 से 7 नामजद और 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, पुलिस पर हमला करने और अपराधी को भगाने में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फरार साइबर अपराधी चुरामण मंडल और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए जिलेभर में लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।
गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। यह धमकी अज्ञात ईमेल के जरिए भेजी गई, जिसके बाद पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड ने शुरू की तलाशी सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंची। बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad), डॉग स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस ने तीनों स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह धमकी भरा ईमेल बुधवार सुबह एक सरकारी ईमेल आईडी पर प्राप्त हुआ, जिसमें तीनों प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की बात कही गई थी। घंटों चली जांच, कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली सीएमओ, एएमसी और आरएसएस कार्यालयों में कई घंटों तक तलाशी अभियान चला, लेकिन अभी तक किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है। सुरक्षा के मद्देनजर सभी परिसरों के आसपास आने-जाने वालों की सघन जांच की जा रही है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू कर दी है और ईमेल भेजने वाले के आईपी एड्रेस को ट्रेस किया जा रहा है। फर्जी धमकी की आशंका, पहले भी मिल चुके हैं ऐसे मेल पुलिस कमिश्नर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह किसी शरारती तत्व की हरकत प्रतीत हो रही है, किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी गुजरात के कई स्कूलों और एयरपोर्ट को इसी तरह के धमकी भरे ईमेल मिल चुके हैं, जो जांच में फर्जी साबित हुए थे। मामला दर्ज, साइबर जांच तेज पुलिस ने ईमेल के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है और साइबर टीम को जांच सौंपी गई है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें।
मुंबई में तैनात एक CISF कॉन्स्टेबल के साथ साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है जिसने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। आमतौर पर डिजिटल फ्रॉड के मामलों में फर्जी लिंक, ओटीपी शेयरिंग या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इस मामले में घटनाक्रम बिल्कुल अलग और अधिक चिंताजनक दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 34 वर्षीय CISF जवान का स्मार्टफोन अचानक अपने आप रीसेट (फॉर्मेट) हो गया। फोन के रीस्टार्ट होने के बाद उसमें मौजूद सभी एप्लिकेशन गायब हो चुके थे। शुरुआत में इसे तकनीकी खराबी समझा गया, लेकिन जब जवान ने दोबारा फोन सेटअप कर जरूरी ऐप्स इंस्टॉल किए और बैंक बैलेंस चेक किया, तो उनके होश उड़ गए। उनके बैंक खाते से कुल 95,668 रुपये निकाले जा चुके थे। कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम? मामले की जानकारी के अनुसार, जवान एक चीनी ब्रांड के स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे थे। अचानक फोन फॉर्मेट हो गया और उसमें मौजूद सभी ऐप्स हट गए। इसके बाद उन्होंने फोन को दोबारा सेटअप किया और जरूरी एप्लिकेशन, जिनमें पेमेंट और बैंकिंग ऐप्स भी शामिल थे, फिर से डाउनलोड किए। जब उन्होंने अपने खाते का बैलेंस चेक किया, तब पता चला कि बड़ी रकम पहले ही ट्रांसफर की जा चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्हें किसी संदिग्ध कॉल, लिंक, ओटीपी या बैंकिंग अलर्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जवान ने तुरंत उठाया यह कदम धोखाधड़ी का पता चलते ही CISF कॉन्स्टेबल ने बिना देर किए अपने बैंक से संपर्क कर खाते को ब्लॉक कराया। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और मामले की सूचना पुलिस को दी। समय रहते कार्रवाई करने से आगे होने वाले संभावित नुकसान को रोका जा सका। जांच में क्या सामने आया? पुलिस जांच में पता चला कि जिस खाते में रकम ट्रांसफर हुई, वह एक ऐसे मोबाइल नंबर से जुड़ा हुआ था जिसके बारे में पीड़ित को कोई जानकारी नहीं थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फोन का अचानक फॉर्मेट होना तकनीकी खराबी थी या किसी साइबर हमले का हिस्सा। जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या किसी मैलवेयर, स्पाइवेयर या रिमोट एक्सेस तकनीक के जरिए फोन पर नियंत्रण हासिल किया गया था। क्यों बढ़ी चिंता? यह मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें पारंपरिक साइबर फ्रॉड के संकेत नहीं मिले। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आजकल ऐसे एडवांस्ड मैलवेयर मौजूद हैं जो स्मार्टफोन को रिमोटली कंट्रोल कर सकते हैं, डेटा चुरा सकते हैं और बैंकिंग गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। यदि फोन का फॉर्मेट होना किसी साइबर हमले का हिस्सा साबित होता है, तो यह डिजिटल ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका हो सकता है। खुद को कैसे सुरक्षित रखें? फोन में इंस्टॉल सभी ऐप्स की नियमित जांच करें। केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें। अनजान स्रोतों से APK फाइल इंस्टॉल न करें। फोन की परमिशन सेटिंग्स समय-समय पर चेक करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 से संपर्क करें। मोबाइल और बैंकिंग ऐप्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें। फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और सुरक्षा अपडेट नियमित रूप से इंस्टॉल करें। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके विकसित कर रहे हैं। ऐसे में केवल ओटीपी या लिंक से सावधान रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने स्मार्टफोन की सुरक्षा पर भी लगातार नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Jamal Siddiqui को व्हाट्सएप के जरिए कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी गई है। धमकी देने वाले ने उनसे भारी रकम की फिरौती भी मांगी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। व्हाट्सएप संदेशों में मांगी गई फिरौती पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, 25 से 27 मई के बीच एक मोबाइल नंबर से कई धमकी भरे संदेश भेजे गए। इन संदेशों में 50 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक की रकम यूपीआई और बैंक ट्रांसफर के जरिए देने की मांग की गई। संदेश भेजने वाले ने कथित तौर पर चेतावनी दी कि यदि रकम नहीं दी गई तो जमाल सिद्दीकी और उनके परिवार को गंभीर नुकसान पहुंचाया जाएगा। बम धमाकों और टारगेट किलिंग का भी जिक्र एफआईआर के मुताबिक, धमकी भरे संदेशों में बम विस्फोट और राजनीतिक नेताओं की टारगेट किलिंग का भी उल्लेख किया गया है। संदेश भेजने वाले ने दावा किया कि कुछ नेताओं द्वारा उसका अपमान किए जाने के कारण वह इस तरह की घटनाओं को अंजाम देगा। पुलिस ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच जारी है। कई बड़े नेताओं के नाम भी शामिल धमकी देने वाले व्यक्ति ने अपने संदेशों में Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra, Sachin Pilot और Mallikarjun Kharge समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के नामों का भी उल्लेख किया है। इस वजह से मामले को सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त संवेदनशीलता के साथ देख रही हैं। पुलिस ने दर्ज किया मामला जमाल सिद्दीकी ने पुलिस को व्हाट्सएप चैट, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सबूत सौंपे हैं। शिकायत के आधार पर नागपुर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ आपराधिक धमकी, जबरन वसूली और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। साइबर फोरेंसिक जांच शुरू पुलिस अब संबंधित मोबाइल नंबर के स्रोत का पता लगाने में जुटी है। इसके लिए कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण, आईपी एड्रेस ट्रैकिंग और साइबर फोरेंसिक जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीमें जांच में लगाई गई हैं और आरोपी की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।
रांची। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में नौकरी दिलाने के नाम पर झारखंड में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। डकरा, खलारी, पिपरवार, टंडवा और हजारीबाग समेत कई इलाकों के करीब 200 लोगों से लगभग 20 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है। मामले की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है, जबकि आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। कांग्रेस नेत्री से 24 लाख की ठगी डकरा निवासी कांग्रेस नेत्री इंदिरा देवी ने खलारी थाना में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे और भतीजे को BCCL में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 24 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते हुए भरोसा जीत लिया और फर्जी ज्वाइनिंग लेटर तक दिखाए। मेडिकल जांच और ट्रेनिंग का नाटक पीड़ितों के अनुसार, युवकों को धनबाद बुलाकर होटल में ठहराया गया और फिर मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद बायोमीट्रिक हस्ताक्षर और कथित ट्रेनिंग प्रक्रिया भी पूरी कराई गई। अभ्यर्थियों को पोस्टिंग लिस्ट दिखाकर विश्वास दिलाया गया कि उनकी नौकरी पक्की हो चुकी है, लेकिन बाद में किसी को ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला। नेटवर्क मार्केटिंग की तरह चला गिरोह जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पूरी ठगी को नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल की तरह चलाया। लोगों को पहले नौकरी का लालच दिया गया और फिर उनसे नए उम्मीदवार जोड़ने को कहा गया। इसी तरह रिश्तेदारों और परिचितों से पैसे जुटाकर करोड़ों रुपये इकट्ठा किए गए। बंगाल और धनबाद से जुड़े तार मामले में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी निवासी सागर चक्रवर्ती और धनबाद के सिजुआ निवासी मुस्तकीम अंसारी के नाम सामने आए हैं। दोनों खुद को राजनीतिक प्रभाव वाला व्यक्ति बताते थे। पुलिस के अनुसार, कई आरोपियों के मोबाइल बंद हैं और उनकी तलाश जारी है। खलारी थाना पुलिस ने कहा है कि पैसों के लेनदेन का सत्यापन किया जा रहा है और जल्द आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Rajkot में एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब ₹2500 करोड़ के इस घोटाले में निजी बैंकों के अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। पुलिस ने अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं। फर्जी खातों के जरिए होता था खेल पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान के आधार पर कई बैंक खाते खुलवाए। इन खातों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन के लिए किया जाता था, जिससे करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। बैंक अधिकारियों की मिलीभगत जांच में सामने आया है कि Yes Bank, Axis Bank और HDFC Bank के कुछ अधिकारियों ने इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने में मदद की। आरोप है कि इन अधिकारियों ने: संदिग्ध खातों को खोलने और सक्रिय रखने में सहयोग किया बैंक के अलर्ट सिस्टम को नजरअंदाज किया बड़े ट्रांजैक्शन को छिपाने में मदद की 85 खाते चिन्हित, 535 शिकायतें दर्ज पुलिस के अनुसार, अब तक इस रैकेट से जुड़े 85 बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है। वहीं, साइबर क्राइम पोर्टल पर 535 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। हवाला नेटवर्क से जुड़ाव जांच में यह भी सामने आया है कि खातों से निकाली गई रकम को हवाला चैनलों के जरिए आगे ट्रांसफर किया जाता था, जिससे इस घोटाले का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है। पुलिस की कार्रवाई जारी पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।