defense news

Iran claims shooting down US F-35 fighter jet amid rising Middle East tensions with debris visuals
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान का बड़ा दावा, एक और F-35 फाइटर जेट गिराने की बात

मिडिल ईस्ट में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने एक और अमेरिकी एयरफोर्स के अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान का दावा: पायलट के बचने की संभावना कम ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी के अनुसार, देश की सेना के मुख्यालय ‘खतम अल-अंबिया’ के प्रवक्ता ने बताया कि F-35 को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि हादसे में पायलट गंभीर रूप से घायल हुआ और उसके बचने की संभावना बेहद कम है। ईरान की ओर से कुछ तस्वीरें भी जारी की गई हैं, जिनमें कथित तौर पर विमान के मलबे को दिखाया गया है। अमेरिका की ओर से नहीं हुई पुष्टि हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक अमेरिकी सैन्य कमान United States Central Command की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इससे पहले भी ईरान ने इसी तरह का दावा किया था, जिसे अमेरिका ने खारिज करते हुए कहा था कि विमान सुरक्षित लैंड कर गया था। कितना खतरनाक है F-35? F-35 Lightning II अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे दुनिया के सबसे उन्नत फाइटर जेट्स में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘स्टील्थ टेक्नोलॉजी’ है, जिससे यह दुश्मन के रडार से लगभग छिपा रहता है। यह विमान दुश्मन के भारी एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने, सटीक हमले करने और मल्टी-रोल मिशन को अंजाम देने में सक्षम है। पहले भी हो चुका है ऐसा दावा ईरान इससे पहले 19 मार्च को भी एक F-35 को मार गिराने का दावा कर चुका है। हालांकि उस समय अमेरिका ने साफ कहा था कि विमान ने सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कर ली थी। ऐसे में इस बार भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और दोनों देशों के दावों के बीच सच्चाई की पुष्टि होना बाकी है। बढ़ सकता है वैश्विक तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह अमेरिका-ईरान तनाव को और बढ़ा सकता है। इसका असर न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि वैश्विक सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
US Army Chief Randy George during military briefing amid leadership change and Iran tension
ईरान युद्ध के बीच बड़ा फैसला: US आर्मी चीफ को जबरन रिटायर, क्या है इसके पीछे की असली वजह?

अमेरिकी सेना में उस समय बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जब ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। इसी बीच अमेरिका के आर्मी चीफ रैंडी ए. जॉर्ज को अचानक पद से हटाकर तत्काल रिटायर होने के लिए कहा गया है। यह फैसला अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने लिया, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। अचानक क्यों लिया गया यह फैसला? पेंटागन की ओर से इस फैसले की पुष्टि तो कर दी गई, लेकिन इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। जानकारों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी प्रशासन के भीतर चल रहे बड़े सैन्य पुनर्गठन का हिस्सा हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन लगातार सेना के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव कर रहा है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे के अनुरूप नई रणनीति लागू की जा सके। नए आर्मी चीफ की नियुक्ति रैंडी ए. जॉर्ज के हटने के बाद, वाइस चीफ ऑफ स्टाफ क्रिस्टोफर ला-नेव को कार्यवाहक आर्मी चीफ बनाया गया है। ला-नेव इससे पहले कई महत्वपूर्ण सैन्य पदों पर रह चुके हैं और उन्हें रक्षा मंत्री के करीबी अधिकारियों में भी गिना जाता है। ट्रंप प्रशासन क्यों कर रहा लगातार बदलाव? विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। कई वरिष्ठ अधिकारियों को पहले ही हटाया जा चुका है कुछ को समय से पहले रिटायर किया गया ‘डाइवर्सिटी, इक्विटी और इंक्लूजन’ (DEI) नीतियों को खत्म करने की कोशिश जारी है सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन उन अधिकारियों को हटाने की कोशिश कर रहा है, जिन्हें पिछली सरकार की नीतियों से जुड़ा माना जाता है। क्या युद्ध के बीच यह फैसला सही? ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इस तरह का नेतृत्व परिवर्तन कई विशेषज्ञों को चौंका रहा है। उनका मानना है कि: इससे सैनिकों का मनोबल प्रभावित हो सकता है रणनीतिक फैसलों में अस्थिरता आ सकती है युद्ध के दौरान नेतृत्व में बदलाव जोखिम भरा हो सकता है हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को तेजी से पूरा करना चाहता है और इसी दिशा में यह बदलाव किया जा रहा है। रैंडी जॉर्ज का सैन्य करियर रैंडी ए. जॉर्ज एक अनुभवी इन्फैंट्री अधिकारी रहे हैं। वेस्ट प्वाइंट मिलिट्री अकादमी के स्नातक गल्फ वॉर, इराक और अफगानिस्तान में सेवा 2023 में आर्मी चीफ नियुक्त सामान्य कार्यकाल 2027 तक था यानी उनका कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ था, लेकिन उन्हें समय से पहले ही हटाया गया। आगे क्या हो सकता है? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में अमेरिकी सेना और प्रशासन में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह भी संभावना जताई जा रही है कि कुछ और वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया या रिटायर किया जा सकता है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Viral video shows US F-15 chasing alleged Iranian drone amid Middle East conflict and explosion visuals
सस्ते ईरानी ड्रोन ने अमेरिकी F-15 को दिया चकमा?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को ईरानी ड्रोन का पीछा करते हुए दिखाया गया है। दावा किया जा रहा है कि कम कीमत वाला ईरानी ड्रोन अमेरिकी जेट को चकमा देने में सफल रहा। हालांकि, इस वीडियो की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। क्या दिख रहा है वायरल वीडियो में? आसमान में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट ईरान के कथित शाहेद ड्रोन का पीछा इसके बाद जमीन पर जोरदार धमाका और धुएं का गुबार सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का दावा है कि अमेरिकी जेट ड्रोन को रोकने में नाकाम रहा, जिससे सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। एरबिल में तेल प्लांट पर हमला रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना इराक के एरबिल शहर में एक ब्रिटिश कंपनी के मोटर ऑयल प्लांट पर हुए हमले से जुड़ी हो सकती है। प्लांट में भीषण आग लगी आसमान में काला धुआं फैल गया सुबह के समय तीन ड्रोन से हमला किए जाने की बात बताया जा रहा है कि यह प्लांट एक ब्रिटिश ब्रांड का था, जिसे सरदार ग्रुप संचालित करता है। आधिकारिक पुष्टि नहीं अब तक अमेरिका, ब्रिटेन या किसी सहयोगी देश की ओर से इस हमले या वायरल वीडियो की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में दावों की सत्यता पर सवाल बने हुए हैं। इराक में बढ़ता तनाव मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर इराक पर भी साफ दिख रहा है: अमेरिका और ईरान समर्थित समूहों के बीच टकराव बढ़ा कई सैन्य ठिकानों पर हमले इराक सरकार संतुलन बनाने की कोशिश में इराक ने कुछ समूहों को आत्मरक्षा की अनुमति दी है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि अमेरिकी हितों पर हमले करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। क्या संकेत देता है यह मामला? यदि वायरल दावे सही साबित होते हैं, तो यह दिखाता है कि कम लागत वाले ड्रोन भी बड़ी सैन्य चुनौती बन सकते हैं पारंपरिक फाइटर जेट्स के सामने नई रणनीतिक चुनौतियां उभर रही हैं

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Russian An-26 military transport aircraft crash
क्रीमिया में रूस का सैन्य विमान An-26 क्रैश, 29 लोगों की मौत

रूस का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान An-26 मंगलवार को क्रीमिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 29 लोगों की मौत हो गई। हादसे में 23 यात्री और 6 क्रू मेंबर शामिल थे। दुर्घटना के बाद किसी के भी जीवित बचने की खबर नहीं है। रूसी न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, विमान से पहले संपर्क टूट गया था। इसके कुछ समय बाद पता चला कि विमान चट्टान से टकराकर क्रैश हो गया। हादसे के कारणों की जांच जारी है, हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में तकनीकी खराबी की आशंका जताई गई है। जांच जारी, तकनीकी खराबी की आशंका रूसी अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के पीछे असली कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल तकनीकी खामी को संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। An-26 विमान की खासियत An-26 सोवियत दौर का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान है, जिसे एंटोनोव कंपनी ने विकसित किया था। इसकी पहली उड़ान 1969 में हुई थी। इस विमान का इस्तेमाल मुख्य रूप से सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामान के परिवहन के लिए किया जाता है। यह विमान अपनी खास क्षमता के लिए जाना जाता है, जिसमें छोटे और खराब रनवे से भी उड़ान भरने की क्षमता शामिल है। यही कारण है कि इसका उपयोग दुर्गम और युद्ध क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता रहा है। इसके पीछे मौजूद बड़े कार्गो दरवाजे से एयरड्रॉप ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं। पुराना डिजाइन, उठते रहे हैं सवाल करीब 50 साल पुराने डिजाइन वाले इस विमान की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पहले भी इस तरह के विमानों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं। हालांकि, आज भी कई देशों की वायुसेनाएं इसका उपयोग कर रही हैं, लेकिन धीरे-धीरे इन्हें आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमानों से बदला जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
F-35 stealth fighter jet in flight amid global debate over performance and reliability issues
F-35 पर उठे सवाल: क्या भारत का फैसला सही था? पांचवीं पीढ़ी के जेट की क्षमता पर नई बहस

दुनिया के सबसे आधुनिक माने जाने वाले लड़ाकू विमानों में शामिल F-35 Lightning II एक बार फिर विवादों में है। हालिया रिपोर्ट्स और घटनाओं ने इस फिफ्थ जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर की क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे भारत के इसे न खरीदने के फैसले पर नई चर्चा शुरू हो गई है। बार-बार हादसे और तकनीकी खामियां पिछले कुछ वर्षों में F-35 से जुड़ी कई दुर्घटनाएं सामने आई हैं। अलग-अलग देशों के बेड़े में शामिल इन विमानों को तकनीकी खराबी, ट्रेनिंग मिशन या लैंडिंग के दौरान नुकसान झेलना पड़ा है। केरल में ब्रिटिश नेवी के F-35B की इमरजेंसी लैंडिंग जैसी घटनाओं ने भी इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। ईरान के दावे से बढ़ी बहस हालिया घटनाक्रम में ईरान ने दावा किया है कि उसने अपने एयर डिफेंस सिस्टम से F-35 को इंटरसेप्ट कर नुकसान पहुंचाया। हालांकि, अमेरिका ने विमान के नष्ट होने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस दावे ने स्टेल्थ टेक्नोलॉजी की वास्तविक क्षमता पर चर्चा तेज कर दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कोई स्टेल्थ जेट आसानी से ट्रैक या हिट हो सकता है, तो उसकी तकनीकी बढ़त पर सवाल उठना स्वाभाविक है। भारत क्यों रहा सतर्क? भारत को लंबे समय से आधुनिक 5th जेनरेशन फाइटर जेट की जरूरत है, खासकर चीन की बढ़ती सैन्य ताकत को देखते हुए। अमेरिका ने कई बार भारत को F-35 बेचने की कोशिश की, खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इस पर जोर दिया गया। लेकिन भारत ने अब तक इस डील पर अंतिम निर्णय नहीं लिया। इसके पीछे कई अहम कारण रहे- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर सीमाएं   हथियार सिस्टम के इंटीग्रेशन की चुनौती   लागत और मेंटेनेंस का बोझ   और अब उभरते तकनीकी सवाल   क्या JF-17 से भी तुलना सही? कुछ रिपोर्ट्स में F-35 की तुलना JF-17 Thunder से की जा रही है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे अतिशयोक्ति मानते हैं। JF-17 एक हल्का मल्टी-रोल फाइटर है, जबकि F-35 अत्याधुनिक स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर के लिए डिजाइन किया गया है। दोनों की श्रेणी और क्षमताएं अलग हैं, इसलिए सीधी तुलना तकनीकी रूप से सटीक नहीं मानी जाती। भारत के पास क्या विकल्प? भारत फिलहाल अपने स्वदेशी और विदेशी विकल्पों पर समानांतर काम कर रहा है- Su-57 जैसे विकल्पों पर नजर   और स्वदेशी 5th जेनरेशन प्रोजेक्ट (AMCA) पर तेजी   भारत का लक्ष्य केवल खरीद नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता भी है। F-35 पर उठते सवालों के बीच यह साफ है कि भारत बेहद सतर्क रणनीति अपना रहा है। रक्षा खरीद में जल्दबाजी के बजाय दीर्घकालिक रणनीतिक फायदे को प्राथमिकता दी जा रही है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0