Delhi Protest

Rahul Gandhi meets injured student alleging pellet gun use during Jantar Mantar protest
राहुल गांधी ने घायल छात्र से की मुलाकात, बोले- तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहा था, पुलिस ने चलाई पैलेट गन

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक युवक को मीडिया के सामने पेश कर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी का दावा है कि युवक शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहा था, तभी उस पर पैलेट गन चलाई गई, जिससे उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। राहुल गांधी का सरकार पर हमला एएनआई के मुताबिक राहुल गांधी ने कहा कि सरकार पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर रही है, जबकि घायल युवक की एक आंख की रोशनी जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का भी इस्तेमाल हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ इस तरह की कार्रवाई बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पुलिस भर्ती परीक्षा और पेपर लीक का उठाया मुद्दा राहुल गांधी ने बताया कि घायल युवक ने पुलिस भर्ती परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक के कारण उसका भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरी और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे युवाओं की आवाज को बल प्रयोग के जरिए दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पैलेट गन को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल भारत में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर पहले भी विवाद होता रहा है। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के मामलों में कई लोगों की आंखों की रोशनी जाने की घटनाएं सामने आई थीं। मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने समय-समय पर इसके इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। अब जंतर-मंतर में छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। सरकार और विपक्ष आमने-सामने राहुल गांधी के आरोपों के बाद छात्र आंदोलन का मुद्दा फिर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार पहले ही प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार कर चुकी है। फिलहाल इस मामले में आधिकारिक जांच और तथ्यों का इंतजार है। जांच के नतीजों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।  

kalpana जुलाई 25, 2026 0
Metro Stations Closed
दिल्ली में छात्र प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा बढ़ी, 17 मेट्रो स्टेशन बंद; राजधानी में अलर्ट

नई दिल्ली, एजेंसियां। छात्र आंदोलन और संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सुरक्षा कारणों से मध्य दिल्ली के 17 मेट्रो स्टेशनों को लगातार तीसरे दिन बंद रखने का फैसला किया है। इन स्टेशनों पर यात्रियों की एंट्री और एग्जिट रोक दी गई है।   राजीव चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट समेत कई प्रमुख स्टेशन प्रभावित   DMRC के अनुसार, बंद किए गए स्टेशनों में राजीव चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, सुप्रीम कोर्ट, मंडी हाउस, आईटीओ, जनपथ, बाराखंभा रोड, खान मार्केट और लोक कल्याण मार्ग समेत कई प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। ये स्टेशन शुक्रवार सुबह 7:30 बजे से अगले आदेश तक बंद रखने का निर्णय लिया गया।   जंतर-मंतर और संसद क्षेत्र में बढ़ाई गई सुरक्षा   छात्र संगठनों के प्रदर्शन और संसद मार्च के आह्वान को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और संसद परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है। पुलिस ने भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। कुछ प्रदर्शनकारियों को एहतियात के तौर पर हिरासत में भी लिया गया है।   यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह   मेट्रो स्टेशन बंद होने से मध्य दिल्ली के यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। DMRC ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मेट्रो सेवाओं की स्थिति जांच लें और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें।   सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत पर नजर   छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी जारी है। हालांकि प्रदर्शनकारी परीक्षा सुधार और पेपर लीक मामलों पर ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
Police use tear gas as clashes erupt between protesters and security personnel near Jantar Mantar and Parliament Street in New Delhi.
जंतर-मंतर पर बवाल: पथराव, आंसू गैस और इंटरनेट बंद, संसद मार्ग पर देर रात तक हंगामा

राजधानी दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान 22 जुलाई की रात संसद मार्ग और जंतर-मंतर के आसपास का इलाका हिंसा की चपेट में आ गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस के गोले दागे जाने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हालात को काबू में करने के लिए भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक जवानों की तैनाती करनी पड़ी। घटना में दो एसीपी समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रमुख बातें जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव और झड़प। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। दो एसीपी सहित पांच पुलिसकर्मी घायल। मध्य दिल्ली के कई इलाकों में इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद। संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई। संसद मार्ग पर अचानक बिगड़े हालात मंगलवार रात जंतर-मंतर से सटे संसद मार्ग पर प्रदर्शन के दौरान अचानक स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पार्क होटल के पास मौजूद प्रदर्शनकारियों का एक समूह उग्र हो गया और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते कनॉट प्लेस और संसद मार्ग के आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक दोनों पक्षों के बीच तनाव बना रहा। CJP वॉलंटियर्स ने संभाला मोर्चा स्थिति को शांत कराने के लिए पुलिस ने CJP के स्वयंसेवकों की मदद ली। लाउडस्पीकर से लैस एक पुलिस बस पर वॉलंटियर को बैठाकर प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील कराई गई। वॉलंटियर्स ने कहा कि हिंसा से आंदोलन की छवि खराब होगी और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखना जरूरी है। पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले भीड़ के लगातार उग्र होने के बाद पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने कार्रवाई शुरू की। प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए और हल्का बल प्रयोग भी किया गया। इस दौरान दो एसीपी, एक इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और एक कॉन्स्टेबल घायल हो गए। सभी घायल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी, सुरक्षा बढ़ी पुलिस कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। हालात को देखते हुए जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। दंगा-रोधी वाहन और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद हिंसा और अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए प्रशासन ने मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं। कई लोगों के मोबाइल फोन पर इंटरनेट सेवा बंद होने के संदेश आने लगे। सुरक्षा एजेंसियां पूरी रात हालात पर नजर बनाए रहीं। पुलिस कर रही मामले की जांच पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर उपद्रवियों की पहचान शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इलाके में सुरक्षा व्यवस्था अभी भी कड़ी रखी गई है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Abhijeet Deepke alleges BJP workers orchestrated stone pelting during the CJP protest at Jantar Mantar.
CJP Protest: अभिजीत दीपके का आरोप- BJP के लोग कर रहे पत्थरबाजी, इंटरनेट बंद कर कार्रवाई की तैयारी का भी दावा

जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन के बीच संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बीजेपी और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहर से लोगों को भेजा जा रहा है और पत्थरबाजी कराई जा रही है। साथ ही उन्होंने इंटरनेट सेवा बंद किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों और इंटरनेट बंद होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुख्य बातें (Key Points) CJP का प्रदर्शन 34वें दिन भी जंतर-मंतर पर जारी। अभिजीत दीपके ने बीजेपी से जुड़े लोगों पर पत्थरबाजी कराने का आरोप लगाया। दावा किया कि पहले से पत्थर जमा किए गए और बाद में उपद्रव कराया गया। पुलिस पर भी प्रदर्शनकारियों के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप। इंटरनेट सेवा बंद किए जाने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। इंटरनेट बंद होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 'आंदोलन को बदनाम करने की हो रही कोशिश' अभिजीत दीपके ने कहा कि CJP पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रही है। उनके मुताबिक, जैसे-जैसे आंदोलन को जनसमर्थन मिल रहा है, कुछ लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को हिंसक दिखाने की साजिश रची जा रही है। BJP पर लगाए गंभीर आरोप दीपके ने दावा किया कि बीजेपी से जुड़े लोग पत्थरबाजी कर रहे हैं और बाद में इसका आरोप CJP कार्यकर्ताओं पर लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन स्थल के आसपास पहले से पत्थर जमा किए गए थे और बाद में कुछ लोगों ने उनका इस्तेमाल कर हिंसा भड़काने की कोशिश की। उन्होंने पुलिस पर भी ऐसे लोगों का साथ देने का आरोप लगाया। 'इंटरनेट बंद कर बड़ी कार्रवाई की तैयारी' अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इंटरनेट बंद करना आंदोलन को दबाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इंटरनेट सेवा बंद किए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस और सुरक्षाबलों से की अपील दीपके ने प्रदर्शन स्थल पर तैनात दिल्ली पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मी किसी भी प्रकार के बल प्रयोग से बचें और प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहने दें। सोनम वांगचुक को लेकर क्या बोले दीपके? अभिजीत दीपके ने बताया कि CJP का धरना 34वें दिन में पहुंच चुका है, जबकि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 26वें दिन भी जारी है। उन्होंने कहा कि संगठन अपनी मांगों पर कायम रहेगा, लेकिन उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील भी की। दीपके ने कहा कि वह उनकी जान को किसी भी खतरे में नहीं देखना चाहते।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Clashes erupt between protesters and police near Parliament Road during CJP protest in Delhi
CJP Protest: जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक हिंसा, पथराव-आंसू गैस और इंटरनेट बंद; जानिए 22 जुलाई की रात क्या-क्या हुआ

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान 22 जुलाई की रात संसद मार्ग और कनॉट प्लेस क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति पर काबू पाने के लिए भारी पुलिस बल और अर्द्धसैनिक जवानों की तैनाती की गई। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दीं। मुख्य बातें (Key Points) जंतर-मंतर के पास संसद मार्ग पर 22 जुलाई की रात हिंसक झड़प। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल। झड़प में 2 ACP समेत 5 पुलिसकर्मी घायल। CJP वॉलंटियर्स ने पुलिस बस से प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल व दंगा-रोधी वाहन तैनात। प्रशासन ने अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कीं। संसद मार्ग पर अचानक भड़की हिंसा 22 जुलाई की रात जंतर-मंतर से सटे संसद मार्ग पर अचानक हालात बिगड़ गए। पार्क होटल के पास बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिसके बाद कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस बस से वॉलंटियर्स ने की शांति की अपील स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने CJP के स्वयंसेवकों की मदद ली। लाउडस्पीकर लगी पुलिस बस पर सवार होकर वॉलंटियर्स ने प्रदर्शनकारियों से हिंसा रोकने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि पथराव और हिंसा से पूरे आंदोलन की छवि प्रभावित होगी। लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले हालात बेकाबू होने पर पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान दो एसीपी, एक इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और एक कॉन्स्टेबल सहित कुल पांच पुलिसकर्मी घायल हुए। सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी, सुरक्षा घेरा और बैरिकेडिंग झड़प के बाद कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए। इसके बाद पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल, दंगा-रोधी वाहन और अर्द्धसैनिक जवान तैनात किए गए। जंतर-मंतर से संसद मार्ग की ओर जाने वाले रास्तों को बैरिकेड लगाकर पूरी तरह सील कर दिया गया ताकि हालात दोबारा न बिगड़ें। इंटरनेट सेवाएं बंद, पूरे इलाके में हाई अलर्ट स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जंतर-मंतर, संसद मार्ग और मध्य दिल्ली के आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं। अधिकारियों का कहना था कि यह कदम अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया। पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई और देर रात तक पुलिस बल तैनात रहा।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Viral video falsely claims Agniveers are joining Delhi student protests
Fact Check: क्या अग्निवीर छात्रों के समर्थन में दिल्ली आ रहे हैं? वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में अग्निवीर की वर्दी पहने कुछ लोग छात्रों के समर्थन में बयान देते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अग्निवीर आंदोलन के समर्थन में दिल्ली पहुंचने वाले हैं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि किसी भी आधिकारिक स्रोत से नहीं हुई है। क्या है वायरल दावा? इंस्टाग्राम पर 'Breakingsatya' नाम के अकाउंट से साझा किए गए वीडियो में कुछ लोग अग्निवीर जैसी वर्दी पहने दिखाई देते हैं। वीडियो में एक व्यक्ति दावा करता है कि भारतीय सेना छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी है। वहीं दूसरा व्यक्ति कहता है कि अग्निवीरों की नई बैच आने के बाद स्थिति बदल जाएगी और दिल्ली पुलिस को जवाब मिलेगा। वीडियो में मौजूद लोगों ने अपने चेहरे मास्क से ढके हुए हैं, जिससे उनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो पा रही है। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? वायरल वीडियो की जांच में इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक बयान या विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिली। भारतीय सेना की ओर से ऐसा कोई बयान जारी नहीं किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने भी इस संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं की है। किसी प्रमुख समाचार एजेंसी या विश्वसनीय मीडिया संस्थान ने भी इस दावे की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा अप्रमाणित है और वीडियो भ्रामक या फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है। छात्र आंदोलन के बीच वायरल हुआ वीडियो यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है। हाल के दिनों में संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस की घटनाएं भी सामने आई हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Delhi Police personnel deployed during CJP Parliament march protest in New Delhi
दिल्ली प्रोटेस्ट पर पुलिस सख्त: 48 घंटे में 10 FIR दर्ज, RAF जवान पर हमले का भी मामला

NEET पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले 48 घंटों में राजधानी के पांच अलग-अलग थानों में कुल 10 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें कनॉट प्लेस में तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान पर कथित हमले का मामला भी शामिल है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 20 जुलाई को आयोजित प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था भंग करने, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हिंसा से जुड़े मामलों में विभिन्न एफआईआर दर्ज की गई हैं। सभी मामलों की जांच जारी है। किन थानों में दर्ज हुईं FIR? दिल्ली पुलिस के अनुसार, अब तक पांच थानों में कुल 10 एफआईआर दर्ज की गई हैं। संसद मार्ग थाना – 4 FIR कनॉट प्लेस (सीपी) थाना – 3 FIR मंदिर मार्ग थाना – 1 FIR बाराखंभा रोड थाना – 1 FIR कर्तव्य पथ थाना – 1 FIR RAF जवान पर हमले का मामला मंगलवार शाम कनॉट प्लेस क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान एक RAF जवान पर कथित हमले के मामले में भी अलग से एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। बाराखंभा थाने की FIR में गंभीर धाराएं बाराखंभा रोड थाने में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा डालना, सरकारी आदेश की अवज्ञा, लोक सेवक पर हमला, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, दंगे के लिए उकसाना, हत्या के प्रयास, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम (PDPP Act) की धारा 3 शामिल हैं। पुलिस की जांच जारी दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी मामलों की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। जरूरत पड़ने पर आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
Abhijeet Deepke addresses supporters at Jantar Mantar during CJP protest
CJP Protest: जंतर-मंतर पहुंचे अभिजीत दीपके, समर्थकों से मांगी माफी; आज RML जाएंगे केजरीवाल

CJP Protest Updates: दिल्ली में CJP के संसद मार्च के बाद जारी विरोध प्रदर्शन के बीच मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर एक बार फिर हलचल तेज हो गई। CJP प्रमुख अभिजीत दीपके सुबह-सुबह धरना स्थल पहुंचे और सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों, खासकर घायल छात्राओं से माफी मांगी। वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने घायल छात्रों से मिलने राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल जाने और सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का ऐलान किया। इस बीच सोनम वांगचुक ने कहा कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को देखते हुए वह अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे। अभिजीत दीपके ने समर्थकों से मांगी माफी CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वह उन सभी समर्थकों से माफी मांगते हैं, जो प्रदर्शन के दौरान घायल हुए, विशेषकर उन छात्राओं से जिनके साथ कथित तौर पर पुलिस ने मारपीट की। उन्होंने लिखा कि, "हम और बेहतर कर सकते थे। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से आपको बचाने के लिए मैं और अधिक प्रयास कर सकता था।" उन्होंने घायल प्रदर्शनकारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने की भी अपील की। केजरीवाल करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस, फिर जाएंगे RML अस्पताल आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ अपनी बात रखेंगे। इसके बाद वह संसद मार्च के दौरान घायल हुए छात्रों से मिलने राम मनोहर लोहिया अस्पताल जाएंगे। मनीष तिवारी ने छात्रों के आंदोलन का किया समर्थन कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक शेर साझा किया। उन्होंने लिखा— "संघर्षों के साए में, असली आज़ादी पलती है, इतिहास उधर मुड़ जाता है, जिस ओर जवानी चलती है।" इसके साथ उन्होंने लिखा कि आंदोलित छात्र ही मजबूत राष्ट्र की पहचान हैं। संजय राउत बोले- 20 जुलाई लोकतंत्र के लिए काला दिन शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है और 20 जुलाई को भारतीय लोकतंत्र के लिए "काला दिवस" के रूप में याद रखा जाएगा। कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत? डॉक्टरों के अनुसार सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन वह अभी भी मेडिकल निगरानी में हैं। उनका ब्लड शुगर सामान्य से कम है और शरीर में पोटैशियम का स्तर 3.2 mEq/L दर्ज किया गया है। जांच में एनीमिया और सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या भी कम पाई गई है। डॉक्टरों ने IV फ्लूइड और ग्लूकोज लेने की सलाह दी है, लेकिन वांगचुक ने इसे लेने से इनकार कर दिया है। फिलहाल वह ORS और पोटैशियम की दवा ले रहे हैं। CJP का दावा- गीतांजलि के साथ हुई बदसलूकी CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि के साथ पुलिस ने बदसलूकी की। उनका दावा है कि उन्हें बाल पकड़कर वाहन से बाहर खींचा गया और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया। हालांकि, दिल्ली पुलिस पहले ही ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस ने किसी महिला प्रदर्शनकारी के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया और लोगों से भ्रामक जानकारी न फैलाने की अपील की है। अनशन जारी रखने पर अड़े सोनम वांगचुक सोनम वांगचुक ने कहा कि छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त नहीं करेंगे। इससे जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Delhi Police remove CJP protest site at Jantar Mantar after Parliament March
संसद मार्च के बाद CJP पर पुलिस का एक्शन, जंतर-मंतर से हटाया धरना; दिनभर चला हाईवोल्टेज ड्रामा

CJP Parliament March: दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के बाद राजधानी में पूरे दिन हाईवोल्टेज राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल खाली करा दिया। हालांकि देर शाम प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर लौट आए और सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। इस दौरान पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन के लिए बनाया गया मंच भी हटा दिया और धरना स्थल से ट्रैम्पोलिन, गद्दे, कालीन समेत अन्य सामान जब्त कर लिया। संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव सोमवार सुबह हजारों प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक मामलों में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर से संसद की ओर निकले। संसद मार्ग के पास पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च को रोकने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। जंतर-मंतर से हटाया गया धरना संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल को खाली कराया। पुलिस ने सोनम वांगचुक के अनशन के लिए बनाया गया मंच हटाने के साथ-साथ वहां रखा अन्य सामान भी जब्त कर लिया। हालांकि शाम होते-होते प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर लौट आए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने लाउडस्पीकर के जरिए प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। सरकार और CJP के बीच हुई बातचीत तनावपूर्ण माहौल के बीच केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की पहल भी की। CJP के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सोनम वांगचुक पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई रोकने की मांग रखी। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि मांगों पर विचार कर उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें? प्रदर्शनकारी संगठन ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं— सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी प्रतिबंध के रिहा किया जाए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। कथित NEET 2026 पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। कई छात्र संगठनों का मिला समर्थन इस आंदोलन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) सहित कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र, शिक्षक और कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद भड़की झड़प सुबह करीब 11 बजे संसद मार्ग पुलिस थाने के पास प्रदर्शनकारियों ने लगाए गए प्रमुख बैरिकेड को हटाने की कोशिश की। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए। पुलिस के अनुसार, कुछ उपद्रवियों ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकी, जिससे कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए बल प्रयोग किया। हिरासत, इंटरनेट बंद और धारा 163 लागू अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के बाहर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस दौरान 20 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। एहतियात के तौर पर नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। दोपहर बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर सार्वजनिक सभा और प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई। राजधानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था प्रदर्शन को देखते हुए संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, केंद्रीय सचिवालय सहित पूरे लुटियंस दिल्ली इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए। दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियां भी तैनात रहीं। दंगा-रोधी उपकरणों से लैस जवानों को संवेदनशील स्थानों पर लगाया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। विपक्षी नेताओं ने भी जताया समर्थन प्रदर्शन के दौरान नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद और समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव भी जंतर-मंतर पहुंचे। दोनों नेताओं ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की। पांच मेट्रो स्टेशन रहे बंद सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखा। स्थिति सामान्य होने के बाद चरणबद्ध तरीके से मेट्रो सेवाएं बहाल कर दी गईं।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Rahul Gandhi criticizes police action against students during Delhi protest
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी का हमला, बोले- 'मोदी देश के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री'

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की मांगें सुनने के बजाय उनके खिलाफ बल प्रयोग कर रही है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी "भारतीय इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री" हैं। 'शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी नहीं ले सकते' राहुल गांधी ने अपने वीडियो में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक "नाकाम शिक्षा मंत्री" से इस्तीफा तक नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय छात्रों पर कार्रवाई कर रही है। पेपर लीक पर सरकार को घेरा कांग्रेस नेता ने दावा किया कि देश में पिछले वर्षों में 152 पेपर लीक की घटनाओं से करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, लेकिन किसी भी दोषी को सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय मिलने के बजाय उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है और उनकी आवाज दबाई जा रही है। 'छात्र अपराधी नहीं, अपने अधिकार मांग रहे हैं' राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्र अपराधी नहीं हैं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर छात्र का अधिकार है कि उसे ऐसी शिक्षा व्यवस्था मिले जो ईमानदार, निष्पक्ष और जवाबदेह हो। लाठीचार्ज और आंसू गैस पर उठाए सवाल राहुल गांधी ने छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि सरकार को बल प्रयोग करने के बजाय छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था संकट में है और इस मुद्दे पर युवाओं का आक्रोश स्वाभाविक है। आरएसएस और सरकार पर भी लगाए आरोप अपने बयान में राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने शिक्षा व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों पर प्रभाव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उनका अपमान कर रही है। हालांकि, इन आरोपों पर केंद्र सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Delhi Protest
संसद मार्च में बवाल: प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प, आंसू गैस व लाठीचार्ज; कई पुलिसकर्मी घायल

नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान सोमवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। जंतर-मंतर से निकले प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच संसद मार्ग के पास झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए।   दिल्ली पुलिस के अनुसार दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की और पुलिस पर पथराव किया। झड़प में एक सब-इंस्पेक्टर समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। वहीं प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अनावश्यक बल प्रयोग का आरोप लगाया।   घटनास्थल पर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की गाड़ी को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगा। संगठन का दावा है कि पुलिस ने उन्हें गाड़ी से उतारने की कोशिश की, जबकि बाद में CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने स्पष्ट किया कि अभिजीत दीपके को न तो हिरासत में लिया गया और न ही गिरफ्तार किया गया। उस समय गाड़ी में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि और दक्षिण भारत के एक अभिनेता भी मौजूद थे।   आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने  क्या कहा  इस बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि न्याय की मांग कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से छात्रों की बात सुनने की अपील की। वहीं, आप सांसद संजय सिंह, आतिशी और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और आंदोलन का समर्थन किया।   उधर, CJP प्रतिनिधियों और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के बीच बातचीत भी जारी रही। संगठन ने वांगचुक की रिहाई, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और कथित रूप से आत्महत्या करने वाले NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजे की मांग दोहराई। फिलहाल राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है।

anjali kumari जुलाई 20, 2026 0
student protests in Delhi
दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के बीच डिंपल यादव समेत कई सपा सांसद हिरासत में

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली में छात्रों के समर्थन में हुए प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) ने दावा किया है कि मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव, कैराना से सांसद इकरा हसन समेत पार्टी के कई सांसदों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बयान जारी कर इसे अलोकतांत्रिक करार देते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया गया।   पार्टी ने क्या कहा? पार्टी ने कहा कि छात्र अपनी समस्याओं और निष्पक्ष परीक्षा की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया। सपा ने भाजपा सरकार पर छात्रों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन हर नागरिक का अधिकार है।   इस मुद्दे पर सपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसदों को पुलिस स्टेशन में रखा गया, जबकि बाहर छात्रों पर कार्रवाई की जा रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नीट परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है। अखिलेश ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने और उनकी समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है, जिसके कारण छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।   अखिलेश यादव ने क्या कहा? अखिलेश यादव ने कहा कि इतिहास गवाह है कि विरोध की आवाज को सुना जाना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेज भी प्रदर्शनकारियों की बात सुनते थे और आज पूरी दुनिया गांधीजी का सम्मान करती है। उन्होंने सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने की सलाह दी।   वहीं, डिंपल यादव ने कहा कि देशभर के छात्र केवल निष्पक्ष परीक्षा और न्याय की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, किसान, युवा और पर्यावरण जैसे कई मुद्दों पर लोग परेशान हैं, लेकिन सरकार न तो शिकायतें सुन रही है और न ही समाधान निकाल रही है। फिलहाल पुलिस की ओर से हिरासत के दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

anjali kumari जुलाई 20, 2026 0
Students and activists gather at Jantar Mantar during CJP protest over alleged examination irregularities.
जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन पर कुमार विश्वास का कटाक्ष, बोले- सोशल मीडिया के जरिए देश की दिशा तय करने की कोशिश

  नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर जाने-माने कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बिना किसी व्यक्ति या संगठन का नाम लिए कहा कि विदेशों में बैठे कुछ लोग सोशल मीडिया और डिजिटल प्रभाव के जरिए भारत की दिशा प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। नैनीताल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुमार विश्वास ने कहा कि कुछ लोग विदेशों में रहकर ऑनलाइन अभियानों और सोशल मीडिया समर्थन के सहारे देश के युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों की राह पर ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि देश के युवाओं को अपने विवेक और संस्कारों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्रों, युवाओं और अभिभावकों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन में कई लोग कॉकरोच के मुखौटे पहनकर पहुंचे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार तथा जवाबदेही की मांग करते हुए नारेबाजी की। अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन सफल रहा और इसमें बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। दीपके ने कहा कि अब आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है। देशव्यापी अभियान की तैयारी प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में दीपके ने कहा कि संगठन आने वाले दिनों में देशभर में अभियान चलाएगा। उनके अनुसार, यदि सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। संगठन ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो विभिन्न राज्यों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। किन मुद्दों को उठा रही है CJP? कॉकरोच जनता पार्टी खुद को युवाओं के नेतृत्व वाला ऑनलाइन और सामाजिक आंदोलन बताती है। संगठन विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, परीक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन प्रक्रिया और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रहा है। इस अभियान में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता भी हुए शामिल जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk भी शामिल हुए। इसके अलावा विभिन्न छात्र संगठनों, युवा समूहों और वामपंथी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी और पुलिस की निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0