Dhanbad crime news

IG Shailendra Sinha
धनबाद में अपराधियों पर शिकंजा कसने के निर्देश, आईजी शैलेंद्र सिन्हा ने की हाईलेवल समीक्षा

धनबाद। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) शैलेंद्र कुमार सिन्हा मंगलवार को धनबाद पहुंचे, जहां उन्होंने समाहरणालय में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक में एसएसपी प्रभात कुमार, सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी समेत जिले के अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। बैठक से पहले एसएसपी प्रभात कुमार ने आईजी का स्वागत किया।   अपराधियों के नेटवर्क को खत्म करना प्राथमिकता बैठक के दौरान आईजी ने संगठित अपराध, रंगदारी, अवैध कारोबार और सक्रिय आपराधिक गिरोहों के खिलाफ लगातार और प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अपराधियों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। समीक्षा बैठक में जिले में लंबित मामलों की जांच, फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की विस्तार से समीक्षा की गई।   संवेदनशील इलाकों में बढ़ेगी निगरानी आईजी शैलेंद्र सिन्हा ने अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने और आम लोगों के बीच सुरक्षा का भरोसा मजबूत करने के लिए सक्रिय पुलिसिंग अपनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस की नियमित गश्त, त्वरित कार्रवाई और खुफिया तंत्र को मजबूत कर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।   प्रिंस खान पर कार्रवाई जारी बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में आईजी से फरार गैंगस्टर प्रिंस खान द्वारा सांसद ढुल्लू महतो और निरसा विधायक अरूप चटर्जी को कथित धमकी दिए जाने के मामले में सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि प्रिंस खान के खिलाफ पुलिस पहले से लगातार कार्रवाई कर रही है। उसके विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया जारी है और उसे कानून के दायरे में लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।   आईजी ने स्पष्ट किया कि किसी भी अपराधी को जिले की शांति और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि धनबाद पुलिस संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभियान आगे भी जारी रखेगी और जिले में शांति, सुरक्षा तथा कानून का राज हर हाल में कायम रखा जाएगा।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
Gangster Prince Khan
Gangster प्रिंस खान ने धनबाद SSP को लिया टारगेट पर  कहा- प्रभात कुमार की संपत्ति की जांच ED से करायें

धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें बताया जा रहा है कि प्रिंस खान ने विदेश से यह वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में प्रिंस खान ने धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। एसएसपी प्रभात कुमार पर कार्रवाई की मांग प्रिंस खान ने एसएसपी पर कोल माफिया को संरक्षण देने, भूमाफिया से साठ गांठ और व्यापारियों को धमकाने समेत कई आरोप लगाए हैं। इस वीडियो को झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री से धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार को तत्काल हटाने और विधिसंवत कार्रवाई की मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने निष्पक्ष जांच की मांग की नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान की ओर से विदेश से जारी कथित वीडियो को लेकर राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस वीडियो ने राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो का संपादित हिस्सा साझा करते हुए कहा कि वीडियो में धनबाद के एसएसपी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। माफिया और प्रशासन के गठजोड़ की आशंका नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वीडियो में गरीबों और कमजोर लोगों की जमीन पर कब्जा कराने, माइनिंग माफियाओं से सांठगांठ और वर्दी तथा सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर भय का माहौल बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि अपराधी प्रिंस खान के इन आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाया कि जिन अधिकारियों पर इतने गंभीर आरोप लग रहे हों, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों सौंपी जा रही हैं। इससे जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि सत्ता और प्रभाव के आगे न्याय व्यवस्था कमजोर पड़ रही है।   क्या माफियाओं का प्रभाव बढ़ा है मरांडी ने मुख्यमंत्री से सवालिया लहजे में पूछा कि क्या झारखंड का प्रशासनिक तंत्र माफियाओं के प्रभाव में काम कर रहा है? उन्होंने कहा कि राज्य की जनता यह देख रही है कि सरकार कानून के शासन के साथ खड़ी है या फिर माफिया तंत्र के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता का विश्वास बनाए रखना है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। मुख्यमंत्री को देंगे पूरा वीडियो बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्होंने एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए संयम बरता है। समाज में भय और अराजकता का माहौल न बने, इसलिए वीडियो का केवल संपादित अंश ही सार्वजनिक किया गया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल पूरा वीडियो वह मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध कराएंगे, ताकि बाद में यह नहीं कहा जा सके कि सरकार को मामले की जानकारी नहीं थी।   जांच की हो न्यायिक निगरानी बाबूलाल मरांडी ने मांग की कि संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए। साथ ही माइनिंग माफिया, भूमि कब्जा और प्रशासनिक संरक्षण से जुड़े सभी आरोपों की न्यायिक निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग को भी टैग किया है। इससे इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि झारखंड सरकार इसपर क्या एक्शन लेती है।

Unknown मई 8, 2026 0
coal trader attacked
धनबाद में अपराधियों का तांडव, कोयला कारोबारी पर किया जानलेवा हमला, कई लोग घायल

धनबाद। धनबाद में अपराधियों के हौसले एक बार फिर बुलंद नजर आए, जब तेतुलमारी थाना क्षेत्र के शक्ति चौक के पास देर रात कोयला कारोबारी के वाहन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। इस हमले में कोयला कारोबारी मनीष सिंह समेत कई लोगों के घायल होने की सूचना है।   घात लगाकर बैठे थे हमलावर मिली जानकारी के अनुसार, अपराधी पहले से ही शक्ति चौक के पास घात लगाकर बैठे थे। जैसे ही मनीष सिंह अपने वाहन से वहां पहुंचे, बदमाशों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। हमले से बचने के लिए चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए वाहन को तेज रफ्तार में भगाया और किसी तरह मुख्य सड़क की ओर निकल गया।   कई लोगों के घायल होने की आशंका फायरिंग के दौरान वाहन में सवार मनीष सिंह और अन्य लोगों को गोली लगने की बात सामने आई है। हालांकि घायलों की स्थिति और संख्या को लेकर पुलिस ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।   पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी तेतुलमारी थाना प्रभारी विवेक कुमार ने बताया कि मनीष सिंह की पत्नी शिवानी सिंह की शिकायत पर अज्ञात अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और हमलावरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।   संदिग्ध वाहन भी बरामद इसी बीच बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के किसान चौक के पास पुलिस पेट्रोलिंग के दौरान एक संदिग्ध वाहन बरामद हुआ है, जिस पर फायरिंग के निशान पाए गए हैं। हालांकि वाहन में कोई मौजूद नहीं था।   जांच में जुटी पुलिस पुलिस अब दोनों घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है। इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और अपराधियों की तलाश जारी है। इस घटना ने एक बार फिर धनबाद में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Unknown अप्रैल 16, 2026 0
Coal mafia in dhanbad
धनबाद में कोयला चोरों की दबंगई, पुलिसकर्मी दंपति को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

धनबाद। धनबाद के केंदुआडीह थाना क्षेत्र में कोयला चोरों की दबंगई देखने को मिली है। झरिया-केंदुआ मार्ग स्थित कुमार मंगलम स्टेडियम के समीप स्पेशल ब्रांच के सहायक अवर निरीक्षक अनुज कुमार और उनकी पत्नी काजल देवी के साथ मारपीट की गई है। दोनों स्कूटी से झरिया जा रहे थे।   रास्ता जाम कर रखा था कोयला चोरों ने रास्ते में कोयला चोरी कर रहे लोगों ने रास्ता जाम कर रखा था। उन्होंने रास्ता देने की बात कही। इसी क्रम में विवाद बढ़ गया। मामला मारपीट तक जा पहुंचा। इसी बीच जब मदद करने को लोग पहुंचे तो कोयला चोर भाग निकले।   पहले गाली दी, फिर लाठी-रॉड से मारा घटना के संबंध में एएसआई की पत्नी काजल देवी ने बताया कि स्टेडियम के पास असामाजिक तत्व हाइवा को सड़क पर रोककर जबरन कोयला उतार रहे थे। उनके पति ने स्कूटी को किनारे से निकालने की बात कही, जिस पर आरोपित गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर सभी ने मिलकर लाठी-रॉड से हमला कर दिया। हमलावरों ने दोनों को जमीन पर गिराकर बेरहमी से पीटा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। मामलों की हो रही जांच घटना की सूचना मिलते ही केंदुआडीह पुलिस और CISF के जवान मौके पर पहुंचे। घायल एएसआई और उनकी पत्नी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। बाद में स्पेशल ब्रांच के डीएसपी भी घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। बताया गया कि एएसआई अनुज कुमार की पीठ और उनकी पत्नी के शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें आई हैं। फिलहाल दोनों का इलाज चल रहा है।   घटनास्थल पर सैकड़ों टन कोयला, आरोपी फरार घटना के बाद सभी आरोपित मौके से फरार हो गए। केंदुआडीह थाना प्रभारी प्रमोद पांडेय ने बताया कि मामले की सूचना मिल चुकी है, हालांकि अभी तक लिखित शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि हमलावरों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। रास्ते में होती है कोयला चोरी  बीसीसीएल की खदानों से निकलने वाला कोयला हाइवा के माध्यम से बीएनआर रेलवे साइडिंग भेजा जाता है, लेकिन रास्ते में कोयला चोर जबरन वाहन रोककर कोयला उतार लेते हैं। घटनास्थल पर सैकड़ों टन कोयला पड़े होने से इस अवैध गतिविधि की गंभीरता साफ नजर आती है।

Unknown अप्रैल 6, 2026 0
Dhanbad police arrest
बंगाल सीमा पर 2.5 लाख रुपये के साथ धराये धनबाद के थाना प्रभारी, 5 घंटे पूछताछ

धनबाद। झारखंड-पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित देबूडीह चेकपोस्ट पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बंगाल पुलिस और चुनाव आयोग की टीम ने धनबाद जिले में पदस्थापित एक थानेदार की गाड़ी से भारी मात्रा में नकदी बरामद की। विधानसभा चुनाव को लेकर बरती जा रही सख्ती के बीच हुई इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे को असहज कर दिया है। चेकपोस्ट पर जांच के दौरान पकड़ी गई रकम जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है। देबूडीह चेकपोस्ट पर बंगाल पुलिस और निर्वाचन अधिकारियों की टीम आने-जाने वाले हर संदिग्ध वाहन की तलाशी ले रही थी। इसी दौरान जीटी रोड किनारे स्थित धनबाद के एक थानेदार की निजी गाड़ी को रोका गया। तलाशी के दौरान वाहन के भीतर से ढाई लाख नकद बरामद हुए,चूंकि चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण भारी मात्रा में कैश ले जाने पर सख्त पाबंदी है, इसलिए अधिकारियों ने तुरंत इस रकम को अपने कब्जे में ले लिया। 5 घंटे तक चली पूछताछ बरामदगी के बाद इंस्पेक्टर को हिरासत में लेकर लगभग पांच घंटे तक पूछताछ की गई। चुनाव अधिकारियों ने उनसे पैसे के स्रोत, उसे ले जाने के उद्देश्य और गंतव्य के बारे में सवाल पूछे. बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी इस बड़ी राशि के बारे में कोई ठोस दस्तावेज या संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। पुलिस गलियारों में चर्चा है कि यदि मामला केवल स्थानीय पुलिस के बीच होता, तो शायद इसे दबाने की कोशिश की जाती, लेकिन चुनाव आयोग के फ्लाइंग स्क्वाड की मौजूदगी के कारण नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की गई।

Unknown मार्च 30, 2026 0
Dhanbad restaurant firing Case
धनबाद रेस्टोरेंट फायरिंग मामले में प्रिंस खान गैंग का गुर्गा बोला- स्टॉफ को डराना था मारना नही

धनबाद। धनबाद के भागाबांध इलाके में हुए चर्चित रेस्टोरेंट फायरिंग केस में पुलिस पूछताछ के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। गैंगस्टर प्रिंस खान के गुर्गों ने कबूल किया है कि उनका इरादा केवल डराने का था, लेकिन घटना में रेस्टोरेंट कर्मी की मौत हो गई।   डराने की थी योजना, लेकिन चली जानलेवा गोली गिरफ्तार आरोपी अमन सिंह उर्फ कुबेर और अफजल अमन ने बताया कि ‘द टीटोज फैमिली रेस्टोरेंट’ के संचालक को धमकाने के लिए गोलीबारी की साजिश रची गई थी। कुबेर ने यह भी स्वीकार किया कि उसने प्रिंस खान के निर्देश पर अफजल को पैसे दिए थे। अफजल ने वासेपुर इलाके से हथियार और शूटर की व्यवस्था की, लेकिन शूटर ने डराने के बजाय सीधे गोली मार दी, जिससे कर्मचारी मनीष की मौत हो गई।   कम उम्र के युवाओं को जोड़ रहा था गिरोह पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह में कम उम्र के युवकों को शामिल किया जा रहा था। उन्हें पैसे और कमीशन का लालच देकर आपराधिक गतिविधियों में लगाया जाता था। गिरोह के हर सदस्य को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती थीं।   मुठभेड़ के बाद हुई गिरफ्तारी यह घटना 7 मार्च को रांची के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के कुटियातू स्थित रेस्टोरेंट में हुई थी। इसके बाद पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही थी। 16 मार्च को धनबाद में रांची पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।   आगे की जांच जारी पुलिस को आरोपियों से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल अन्य अपराधियों की तलाश जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

Unknown मार्च 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0