मुंबई, एजेंसियां। रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर 2' कानूनी विवाद में घिर गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और सेंसर बोर्ड (CBFC) को फिल्म के खिलाफ लगी याचिका की जांच करने के निर्देश दिए हैं। सशस्त्र सीमा बल (SSB) के एक जवान ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि फिल्म में सेना के ऑपरेशन से जुडी गुप्त जानकारियां दिखाई गई हैं। सुरक्षा से जुड़ी सूचनाएं अहम कोर्ट ने कहा कि फिल्म भले ही काल्पनिक हो, लेकिन सुरक्षा से जुड़ी की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सेंसर बोर्ड करेगा जांच चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को इस याचिका पर विचार कर फैसला लेने को कहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि भले ही यह फिल्म मनोरंजन के लिए बनाई गई एक काल्पनिक कहानी है, लेकिन इसके प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसे ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के उल्लंघन के आरोपों के तहत जांचने के लिए कहा है। एसएसबी जवान ने उठाए सुरक्षा पर सवाल यह याचिका एसएसबी में हेड कांस्टेबल दीपक कुमार ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म में सेना के ऑपरेशन्स की बारीक जानकारियां दिखाई गई हैं, जिससे देश की सुरक्षा और अखंडता को खतरा हो सकता है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, फिल्म में कुछ खास जगहों और किरदारों को इस तरह दिखाया गया है जो बड़े अधिकारियों और शहीद सैनिकों से मेल खाते हैं। इतनी साफ जानकारियां दिखाना देश की सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय को सौंपा केस हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया। बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जो मुद्दे उठाए हैं, उन पर सही तरीके से विचार करना और उनका समाधान निकालना जरूरी है। कोर्ट ने इस रिट याचिका को एक प्रजेंटेशन (अभ्यावेदन) मानकर सूचना और प्रसारण मंत्रालय को सौंप दिया है। अब सरकार और सेंसर बोर्ड को इस पर मिलकर आखिरी फैसला लेना होगा। भारत की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई करते हुए भारत में दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनने का रिकॉर्ड बनाया। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने अब तक भारत में करीब ₹1145 करोड़ नेट कलेक्शन और दुनियाभर में लगभग ₹1797 करोड़ ग्रॉस कमाई कर ली है। ग्रॉस कलेक्शन टिकट से कुल कमाई और नेट कलेक्शन टैक्स के बाद की कमाई होती है।
मुंबई,एजेंसियां। फिल्म धुरंधर 2 की सफलता के बाद जहां रणवीर सिंह की जमकर तारीफ हो रही है, वहीं दीपिका पादुकोण की चुप्पी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई थी। फैंस लगातार यह सवाल उठा रहे थे कि दीपिका ने अब तक फिल्म या रणवीर के प्रदर्शन को लेकर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। सोशल मीडिया पर उठे सवाल, ट्रोलिंग भी हुई फिल्म के हिट होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर दीपिका को लेकर तरह-तरह के कमेंट सामने आ रहे थे। कई यूजर्स यह सवाल कर रहे थे कि जब पूरी इंडस्ट्री रणवीर की तारीफ कर रही है, तो दीपिका की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई। इसी वजह से उन्हें ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। पोस्ट पर रिएक्शन देकर तोड़ी चुप्पी इन तमाम सवालों के बीच दीपिका ने सीधे बयान देने के बजाय एक अलग तरीका अपनाया। उन्होंने रणवीर सिंह की तारीफ से जुड़े एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी, जिसे उनके जवाब के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर उनकी चुप्पी को लेकर चल रही बहस को नया मोड़ मिल गया। पहले भी उठ चुका है मुद्दा यह पहली बार नहीं है जब दीपिका की चुप्पी चर्चा में आई हो। इससे पहले भी जब उन्होंने किसी अन्य फिल्म से जुड़ा पोस्ट साझा किया था, तब यूजर्स ने उनसे धुरंधर 2 को लेकर प्रतिक्रिया न देने पर सवाल उठाए थे। उस समय भी कमेंट सेक्शन में इस मुद्दे पर काफी बहस देखने को मिली थी। रणवीर की फिल्म को मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया गौरतलब है कि धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है और रणवीर सिंह के अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से सराहना मिल रही है। ऐसे में दीपिका की प्रतिक्रिया को लेकर फैंस की दिलचस्पी और भी बढ़ गई थी।
मुंबई, एजेंसियां। मशहूर सिंगर सोनू निगम एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई नया गाना या शो नहीं, बल्कि 2004 के कराची बम धमाके से जुड़ी उनकी पुरानी और दर्दनाक याद है। हाल ही में सोनू निगम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर उस खौफनाक घटना को याद किया, जब पाकिस्तान दौरे के दौरान उनकी जान बाल-बाल बची थी। शो से कुछ घंटे पहले हुआ था धमाका रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2004 में सोनू निगम पाकिस्तान टूर पर गए थे। उसी दौरान कराची में उनके कॉन्सर्ट वेन्यू के पास बम ब्लास्ट हुआ था। यह धमाका शो शुरू होने से कुछ घंटे पहले हुआ, जिसमें काफी नुकसान हुआ और कई लोगों की जान भी गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव और डर का माहौल बन गया था। भारी सुरक्षा के बीच हुआ था कॉन्सर्ट हालात गंभीर होने के बावजूद, कॉन्सर्ट को भारी सुरक्षा के बीच आयोजित किया गया। आयोजकों के अनुसार, धमाके के बाद सिक्योरिटी बेहद कड़ी कर दी गई थी और सोनू निगम को पाकिस्तानी रेंजर्स की सुरक्षा में वेन्यू तक पहुंचाया गया था। इस तनावपूर्ण माहौल के बावजूद सोनू निगम ने हिम्मत नहीं हारी और मंच पर पहुंचकर परफॉर्म किया। सोनू निगम का भावुक बयान परफॉर्मेंस से पहले सोनू निगम ने दर्शकों से भावुक अंदाज में कहा था कि वह कोशिश करेंगे कि सबका मनोरंजन हो। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच प्यार और अपनापन बढ़ने की दुआ भी की थी। सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था -“मुझ पर हमला यहां हुआ, लेकिन मुझे बचाया भी पाकिस्तानी ने ही है।” क्यों फिर चर्चा में आई यह घटना? हालिया सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह पुरानी घटना फिर से चर्चा में आ गई है। उस दौर में भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में कुछ नरमी देखने को मिल रही थी और दोनों देशों के कलाकार एक-दूसरे के यहां परफॉर्म करने लगे थे। सोनू निगम की यह याद सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत की मिसाल भी बन गई है।
फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ (Dhurandhar 2) को लेकर चल रहे विवाद के बीच दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने आलोचकों पर तीखा पलटवार किया है। फिल्म को ‘प्रोपेगेंडा’ बताने वालों को लेकर उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे लोगों को इग्नोर करना ही बेहतर है। क्या है पूरा मामला? रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ एक तरफ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसके कुछ सीन को लेकर इसे ‘पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा’ बता रहे हैं। हाल ही में ‘सैयारा’ एक्ट्रेस अनीत पड्डा की बहन ने भी फिल्म पर निशाना साधते हुए इसे प्रोपेगेंडा बताया था। इसके साथ ही उन्होंने ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर भी टिप्पणी की थी। ‘लोग मूर्ख नहीं हैं’ - अनुपम खेर दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 में अनुपम खेर ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा- “हमें उन लोगों को इग्नोर करना चाहिए, जो सिनेमा को प्रोपेगेंडा बताते हैं। हम उनकी बकवास बातों में अपनी एनर्जी वेस्ट करते हैं।” आगे उन्होंने दर्शकों का जिक्र करते हुए कहा- “लोग मूर्ख नहीं हैं। अगर रात 12 बजे भी शो हाउसफुल जा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि लोगों को फिल्म पसंद आ रही है।” यहीं नहीं, उन्होंने तंज कसते हुए कहा- “जो लोग इसे प्रोपेगेंडा कह रहे हैं, उन्हें ‘रेस्ट इन पीस’ (RIP) कहना चाहिए।” ‘सिनेमा एक बिजनेस भी है’ अनुपम खेर ने सिनेमा के प्रभाव पर बात करते हुए कहा कि: सिनेमा लोगों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह हर दर्शक पर निर्भर करता है फिल्म इंडस्ट्री भी एक बिजनेस है अच्छी फिल्म हमेशा दर्शकों को कुछ न कुछ सीख या अनुभव देकर जाती है अपनी फिल्म ‘Tanvi The Great’ पर भी बोले अनुपम खेर ने अपनी फिल्म ‘तन्वी द ग्रेट’ का जिक्र करते हुए बताया कि: फिल्म को रिलीज हुए 25 हफ्ते पूरे हो चुके हैं यह फिल्म अब सिल्वर जुबली मना रही है लिमिटेड रिलीज के बावजूद फिल्म का इतना लंबा चलना एक बड़ी उपलब्धि है
मुंबई, एजेंसियां। Dhurandhar 2 बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है और रिलीज के साथ ही करीब 145 करोड़ रुपये की ओपनिंग दर्ज कर चुकी है। फिल्म में Ranveer Singh मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं। हालांकि, इसकी कहानी के एक किरदार को लेकर अब राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। ‘आतिफ अहमद’ किरदार पर उठे सवाल फिल्म में ‘आतिफ अहमद’ नाम का एक किरदार दिखाया गया है, जिसे समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद Atiq Ahmed से प्रेरित बताया जा रहा है। फिल्म में इस किरदार के पाकिस्तान की ISI और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंध दिखाए गए हैं। साथ ही, उसे भारत में जाली नोट सप्लाई और साजिशों में शामिल बताया गया है। इसी प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है। सपा ने बताया नफरत फैलाने की कोशिश Samajwadi Party के नेता एसटी हसन ने फिल्म पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब फिल्म की कमाई बढ़ाने के लिए किया गया है। उनके मुताबिक, इस तरह के किरदारों के जरिए समाज में नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है। AIMIM और कांग्रेस की भी आपत्ति All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen के नेता वारिस पठान ने आरोप लगाया कि फिल्म के जरिए एक समुदाय को बदनाम किया जा रहा है। वहीं Indian National Congress के नेता राशिद अल्वी ने भी फिल्म की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की फिल्मों से समाज पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। राजनीतिक बनाम सिनेमाई बहस फिल्म को लेकर यह विवाद अब राजनीतिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच बहस का विषय बन गया है। एक ओर जहां फिल्म निर्माता इसे काल्पनिक कहानी बता सकते हैं, वहीं विपक्षी दल इसे प्रोपेगेंडा करार दे रहे हैं। बॉक्स ऑफिस पर असर नहीं विवाद के बावजूद फिल्म की कमाई पर फिलहाल कोई असर नहीं दिख रहा है। बल्कि, बढ़ते विवाद से इसकी चर्चा और तेज हो गई है, जिससे दर्शकों की दिलचस्पी भी बढ़ रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।