रांची। 135वें इंडियनऑयल डूरंड कप के ग्रुप-सी मुकाबले में SC दिल्ली ने डिफेंडर्स FC को एकतरफा मुकाबले में 7-0 से करारी शिकस्त दी। रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में ब्राजीलियाई फॉरवर्ड रोड्रिगिन्हो ने अपने क्लब डेब्यू को यादगार बनाते हुए पांच गोल दागे। मैच की शुरुआत से ही SC दिल्ली ने आक्रामक खेल दिखाया। रोड्रिगिन्हो ने छठे मिनट में शानदार व्यक्तिगत प्रयास से पहला गोल किया। इसके दो मिनट बाद मोहम्मद ऐमन की थ्रू बॉल पर उन्होंने दूसरा गोल दागा। 12वें मिनट में यांगलेम सनातोंबा सिंह के लो क्रॉस पर गोल करते हुए रोड्रिगिन्हो ने महज 13 मिनट में अपनी हैट्रिक पूरी कर ली। पहले हाफ में 4-0 की बढ़त लगातार तीन गोल से दबाव में आई डिफेंडर्स FC की मुश्किलें 34वें मिनट में और बढ़ गईं। लालरिनलियाना हनामते की लंबी गेंद पर मोहम्मद ऐमन ने गोलकीपर के ऊपर से शानदार चिप लगाकर स्कोर 4-0 कर दिया। पहले हाफ में SC दिल्ली का गेंद पर करीब 61 प्रतिशत कब्जा रहा। डिफेंडर्स FC को गोल करने के ज्यादा मौके नहीं मिले। इंजरी टाइम में कप्तान आरएसी मदुशन की फ्री-किक ही टीम का उल्लेखनीय प्रयास रहा, जो पोस्ट के बाहर निकल गई। आखिरी मिनटों में फिर बरसे गोल दूसरे हाफ में डिफेंडर्स FC ने अपनी रक्षापंक्ति को मजबूत करते हुए दिल्ली के हमलों को कुछ देर तक रोके रखा। SC दिल्ली के कोच ने भी कुछ बदलाव किए, लेकिन मैच के अंतिम चरण में टीम ने फिर आक्रामक रफ्तार पकड़ ली। 89वें मिनट में रोड्रिगिन्हो ने पेनाल्टी बॉक्स के बाहर से बाएं पैर से शानदार कर्लिंग शॉट लगाकर अपना चौथा गोल किया। इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में जुआन सेबास्टियन पेना ने दो डिफेंडरों को छकाते हुए गोल कर स्कोर 6-0 कर दिया। इसके बाद अतिरिक्त समय के पांचवें मिनट में रोड्रिगिन्हो ने अपना पांचवां गोल दागते हुए SC दिल्ली की 7-0 की बड़ी जीत पर मुहर लगा दी। क्वार्टर फाइनल की ओर SC दिल्ली इस शानदार जीत के साथ SC दिल्ली ने डूरंड कप में लगातार दूसरी जीत दर्ज की और छह अंकों के साथ ग्रुप-सी में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। टीम ने क्वार्टर फाइनल के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। वहीं, डिफेंडर्स FC का ग्रुप चरण का अभियान लगातार तीसरी हार के साथ समाप्त हो गया। टीम टूर्नामेंट में अपना खाता नहीं खोल सकी। मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण रोड्रिगिन्हो का पांच गोल का शानदार प्रदर्शन रहा।
डैरिल मिचेल को पीछे छोड़कर शीर्ष स्थान पर पहुंचे भारतीय कप्तान दुबई, एजेंसियां। भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने एक बार फिर आईसीसी पुरुष वनडे बल्लेबाजों की रैंकिंग में नंबर-1 स्थान हासिल कर लिया है। गिल ने न्यूजीलैंड के डैरिल मिचेल को पीछे छोड़ते हुए छह महीने बाद फिर से शीर्ष रैंकिंग अपने नाम की। हालिया शानदार प्रदर्शन का उन्हें सीधा फायदा मिला है। भारत का टॉप-5 में दबदबा ताजा आईसीसी वनडे बल्लेबाजी रैंकिंग में भारत का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। शुभमन गिल पहले स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि विराट कोहली और रोहित शर्मा भी शीर्ष-5 बल्लेबाजों में शामिल हैं। इससे वनडे क्रिकेट में भारतीय बल्लेबाजी की मजबूती एक बार फिर साबित हुई है। लगातार शानदार प्रदर्शन का मिला इनाम इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में बेहतरीन बल्लेबाजी और कप्तानी के दम पर गिल ने रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया। उनकी निरंतरता और बड़े मैचों में प्रभावशाली प्रदर्शन ने उन्हें फिर से दुनिया का नंबर-1 वनडे बल्लेबाज बना दिया। भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि शुभमन गिल के नंबर-1 बनने को भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। टीम प्रबंधन और प्रशंसकों को उम्मीद है कि वह आने वाले प्रमुख टूर्नामेंटों में भी इसी लय को बरकरार रखेंगे और भारत को बड़ी सफलताएं दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
पहली बार रांची में हो रहा एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन, बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में उमड़ रहे दर्शक रांची। झारखंड की राजधानी रांची में पहली बार आयोजित हो रहे प्रतिष्ठित डूरंड कप (Durand Cup) को लेकर फुटबॉल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में टूर्नामेंट के मुकाबलों को लेकर दर्शकों की भीड़ और फुटबॉल का जुनून देखने को मिल रहा है। रांची को पहली बार मिली मेजबानी 135वें इंडियनऑयल डूरंड कप के तहत रांची को पहली बार मेजबान शहर बनाया गया है। यहां ग्रुप-सी के मुकाबले और एक क्वार्टर फाइनल मैच खेले जा रहे हैं। रांची में 26 जुलाई से 16 अगस्त तक बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में कई मुकाबलों का आयोजन होना है। उद्घाटन समारोह में दिखी झारखंड की संस्कृति डूरंड कप के रांची आगमन पर भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और सैन्य परंपराओं की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। Jamshedpur FC के शानदार प्रदर्शन से बढ़ा रोमांच रांची में खेले गए मुकाबले में जमशेदपुर FC ने श्रीलंका की Defenders FC को 5-0 से हराकर शानदार शुरुआत की। इस मैच में रेनियर फर्नांडिस ने हैट्रिक लगाकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। मोरहाबादी में फुटबॉल का माहौल टूर्नामेंट को लेकर शहर में खासा उत्साह है। बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रशंसक स्टेडियम पहुंच रहे हैं। दर्शकों के लिए प्रवेश को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे स्थानीय खेल प्रेमियों को मैच देखने का मौका मिल रहा है।
रांची। 135वें इंडियन ऑयल डूरंड कप 2026 के ग्रुप-सी मुकाबले में भारतीय वायुसेना फुटबॉल टीम (Indian Air Force FT) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका की डिफेंडर्स एफसी को 2-1 से हरा दिया। मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से अंत तक खेल पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और तीन महत्वपूर्ण अंक हासिल किए। 25वें मिनट में सोमनंदा ने दिलाई बढ़त मैच के शुरुआती मिनटों से ही भारतीय वायुसेना ने आक्रामक खेल दिखाया। लगातार दबाव के बीच 25वें मिनट में डिफेंडर्स एफसी के खिलाड़ी सम्पत कुमारा की गलती का फायदा उठाते हुए नाओरेम सोमनंदा सिंह ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। डूरंड कप में यह उनका तीसरा गोल रहा। आत्मघाती गोल से मजबूत हुई बढ़त दूसरे हाफ में भी भारतीय टीम ने आक्रमण जारी रखा। 68वें मिनट में बाएं छोर से आए खतरनाक क्रॉस को क्लियर करने की कोशिश में डिफेंडर्स एफसी के डिफेंडर के.डी.एस. संकल्पा ने गलती से गेंद अपने ही गोल में डाल दी। इस आत्मघाती गोल के साथ भारतीय वायुसेना की बढ़त 2-0 हो गई। डिफेंडर्स एफसी की वापसी की कोशिश नाकाम दो गोल से पिछड़ने के बाद श्रीलंका की टीम ने वापसी का प्रयास किया। 70वें मिनट में एन.एम. अफलाल ने शानदार काउंटर अटैक पर गोल कर स्कोर 2-1 कर दिया। हालांकि, इसके बाद भारतीय टीम की मजबूत रक्षापंक्ति ने डिफेंडर्स एफसी को बराबरी का कोई मौका नहीं दिया और मैच अपने नाम कर लिया। आंकड़ों में भी भारतीय टीम का दबदबा पूरे मुकाबले में भारतीय वायुसेना का प्रदर्शन हर विभाग में बेहतर रहा। टीम ने 66 प्रतिशत समय तक गेंद पर कब्जा बनाए रखा और 20 शॉट लगाए, जबकि डिफेंडर्स एफसी पूरे मैच में केवल तीन शॉट ही लगा सकी। इस जीत के साथ भारतीय वायुसेना एफटी ने डूरंड कप अभियान को मजबूती दी, जबकि डिफेंडर्स एफसी को लगातार दूसरी हार का सामना करना पड़ा।
नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ अब बड़े पर्दे के बाद फुटबॉल मैदान पर भी अपनी नई पारी शुरू करने के लिए तैयार हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाइगर श्रॉफ को 135वें डूरंड कप 2026 के लिए मुंबई एफसी की टीम में शामिल किया गया है। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से टीम के साथ नियमित अभ्यास कर रहे हैं और टूर्नामेंट के दौरान मैदान पर भी उतर सकते हैं। मुंबई एफसी के साथ करेंगे फुटबॉल डेब्यू रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ ने मुंबई एफसी के साथ अपना आधिकारिक पंजीकरण पूरा कर लिया है और टीम के फिटनेस व ट्रेनिंग सत्र में लगातार हिस्सा ले रहे हैं। मुंबई एफसी 30 जुलाई को अपने ग्रुप मुकाबलों के लिए शिलांग रवाना होगी। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो टाइगर श्रॉफ ग्रुप स्टेज के अंतिम मुकाबले में टीम की ओर से अपना फुटबॉल डेब्यू कर सकते हैं। क्लब से पहले से रहा है खास जुड़ाव टाइगर श्रॉफ का मुंबई एफसी से रिश्ता नया नहीं है। उन्होंने 2024 में इस क्लब के लॉन्च के दौरान अहम भूमिका निभाई थी और वह क्लब के ब्रांड एंबेसडर भी हैं। उनके जुड़ने के बाद क्लब ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और— महाराष्ट्र स्टेट क्लब लीग चैंपियनशिप का खिताब जीता। आई-लीग 3 में तीसरा स्थान हासिल किया। पहली बार प्रतिष्ठित डूरंड कप के लिए क्वालिफाई किया। ग्रुप-ई में मुंबई एफसी की चुनौती डूरंड कप 2026 में मुंबई एफसी को ग्रुप-ई में रखा गया है। टीम का मुकाबला इन क्लबों से होगा— शिलांग लाजोंग एफसी नोंगकसेह स्पोर्ट्स एंड कल्चरल क्लब लांगस्निंग एफसी ग्रुप चरण के सभी मुकाबले शिलांग में खेले जाएंगे। जॉन अब्राहम की राह पर टाइगर? अगर टाइगर श्रॉफ टूर्नामेंट में मैदान पर उतरते हैं, तो वह भारतीय फुटबॉल से सक्रिय रूप से जुड़ने वाले बॉलीवुड सितारों की सूची में शामिल हो जाएंगे। इससे पहले अभिनेता जॉन अब्राहम अपनी इंडियन सुपर लीग (ISL) क्लब नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी के जरिए भारतीय फुटबॉल से जुड़े रहे हैं। क्या है डूरंड कप? डूरंड कप एशिया का सबसे पुराना और दुनिया का तीसरा सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट माना जाता है। इसकी शुरुआत 1888 में सर मॉर्टिमर डूरंड ने शिमला में की थी। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में इंडियन सुपर लीग (ISL), आई-लीग और भारतीय सशस्त्र बलों की शीर्ष टीमें हिस्सा लेती हैं। पहले ग्रुप स्टेज मुकाबले खेले जाते हैं, जिसके बाद सर्वश्रेष्ठ टीमें नॉकआउट चरण में प्रवेश करती हैं।
रांची। एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट 135वें डूरंड कप 2026 को लेकर राजधानी रांची में उत्साह चरम पर है। बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में आयोजित होने वाले मुकाबलों के लिए बुधवार से दर्शकों को फ्री 'जीरो टिकट' का वितरण शुरू हो गया। पहले ही दिन टिकट काउंटरों पर फुटबॉल प्रेमियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। सभी मैचों में दर्शकों के लिए मुफ्त प्रवेश राज्य सरकार ने डूरंड कप के सभी मुकाबलों में दर्शकों के लिए नि:शुल्क प्रवेश की व्यवस्था की है। हालांकि, स्टेडियम में प्रवेश के लिए जीरो टिकट अनिवार्य होगा। इससे बड़ी संख्या में खेल प्रेमियों को बिना किसी शुल्क के अंतरराष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल मुकाबलों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा। 12 काउंटरों से हो रहा टिकट वितरण टिकट वितरण के लिए खेल विभाग और आर्मी विंग की ओर से 12 काउंटर बनाए गए हैं। इनमें गेट नंबर-11 से 13 के बीच 10 काउंटर और गेट नंबर-23 के पास दो अतिरिक्त काउंटर संचालित किए जा रहे हैं। टिकट सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक दिए जा रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अधिकतम चार टिकट मिल रहे हैं और इसके लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य है। फुटबॉल प्रेमियों ने सराही व्यवस्था टिकट लेने पहुंचे दर्शकों ने राज्य सरकार और खेल विभाग की व्यवस्थाओं की सराहना की। उनका कहना है कि कई काउंटर बनाए जाने से भीड़ के बावजूद टिकट आसानी से मिल रहे हैं। खेल प्रेमियों का मानना है कि डूरंड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की मेजबानी झारखंड के लिए गर्व की बात है और इससे राज्य में फुटबॉल संस्कृति को नई पहचान मिलेगी। 26 जुलाई को होगा उद्घाटन मुकाबला खेल निदेशक छवि रंजन ने बताया कि डूरंड कप के सफल आयोजन के लिए सुरक्षा, पार्किंग, चिकित्सा सुविधा, टिकट वितरण और दर्शकों की अन्य व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि 26 जुलाई को शाम 5 बजे बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में उद्घाटन मुकाबले के साथ टूर्नामेंट की शुरुआत होगी। राज्यवासियों से बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने की अपील भी की गई है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची 135वें डूरंड कप-2026 की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। फुटबॉल प्रेमियों के लिए अच्छी खबर यह ह कि 26 जुलाई से शुरू होने वाले मुकाबलों का आनंद लेने के लिए उन्हें कोई टिकट शुल्क नहीं देना होगा। जिला प्रशासन ने ‘फ्री टिकट’ व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत दर्शकों को केवल निःशुल्क प्रवेश टिकट प्राप्त करना होगा। इन टिकटों का वितरण 22 जुलाई से मोरहाबादी स्टेडि परिसर में शुरू किया जाएगा। 12 काउंटरों से मिलेगा मुफ्त प्रवेश टिकट जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में आयोजन की तैयारियों का जायजा लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि मोरहाबादी स्टेडियम में बनाए गए 12 काउंटरों से प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक ‘जीरो टिकट’ वितरित किए जाएंगे। टिकट लेने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को वैध पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। प्रशासन का उद्देश्य अधिक से अधिक फुटबॉल प्रेमियों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से स्टेडियम में प्रवेश दिलाना है। मुख्यमंत्री करेंगे उद्घाटन मुकाबले का शुभारंभ खेल निदेशक छवि रंजन ने बताया कि 26 जुलाई को रांची चरण के उद्घाटन मुकाबले का शुभारंभ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे। भारतीय सेना के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि प्रतियोगिता का सफल आयोजन सुनिश्चित किया जा सके। सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष जोर प्रशासन ने आयोजन के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। टिकट काउंटरों पर पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती, पार्किंग, ट्रैफिक नियंत्रण, सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा जांच और कंट्रोल रूम की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके अलावा खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षित आवाजाही, एंबुलेंस, मेडिकल टीम, फायर ब्रिगेड, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और शौचालय जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन का लक्ष्य दर्शकों को सुरक्षित, सुगम और यादगार फुटबॉल अनुभव उपलब्ध कराना है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची पहली बार एशिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप की मेजबानी करने जा रही है। 26 जुलाई से 16 अगस्त तक मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में कुल सात मुकाबले खेले जाएंगे। टूर्नामेंट का औपचारिक उद्घाटन 26 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे। उद्घाटन समारोह में कई वीवीआईपी और विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। छह लीग मैच और एक क्वार्टर फाइनल इस आयोजन के तहत ग्रुप-सी के छह लीग मैच और एक क्वार्टर फाइनल मुकाबला रांची में खेला जाएगा। राज्य सरकार, भारतीय सेना, जिला प्रशासन और खेल विभाग ने आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। करीब 30 हजार दर्शकों की क्षमता वाले बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। मैदान की पिच, फ्लडलाइट, खिलाड़ियों के ड्रेसिंग रूम और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया गया है ताकि खिलाड़ियों और दर्शकों को विश्वस्तरीय अनुभव मिल सके। टूर्नामेंट में फुटबॉल प्रेमियों को जमशेदपुर एफसी के स्टार विंगर ऋत्विक दास और अनुभवी डिफेंडर प्रतीक चौधरी सहित कई प्रमुख खिलाड़ियों का खेल देखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा श्रीलंका की डिफेंडर्स एफसी की भागीदारी से प्रतियोगिता को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप भी मिलेगा। ग्रुप-सी में जमशेदपुर एफसी, इंडियन एयर फोर्स, एससी दिल्ली और डिफेंडर्स एफसी आमने-सामने होंगे। सभी मैचों में प्रवेश निशुल्क रहेगा दर्शकों के लिए सभी मैचों में प्रवेश निशुल्क रहेगा, लेकिन स्टेडियम में प्रवेश केवल फ्री टिकट के माध्यम से ही मिलेगा। टिकट वितरण के लिए स्टेडियम परिसर में विशेष काउंटर बनाए गए हैं और क्षमता के अनुसार ही टिकट जारी किए जाएंगे। खेल विभाग ने सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की भी व्यवस्था की है। 26 जुलाई को शाम 5 बजे उद्घाटन मुकाबले में जमशेदपुर एफसी का सामना डिफेंडर्स एफसी (श्रीलंका) से होगा। रांची में पहली बार हो रहे इस आयोजन से न केवल फुटबॉल प्रेमियों को रोमांचक मुकाबले देखने का अवसर मिलेगा, बल्कि झारखंड के युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों से सीखने और प्रेरणा लेने का भी सुनहरा मौका मिलेगा।
रांची। रांची में एशिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप को लेकर उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को डूरंड कप की प्रतिष्ठित ट्रॉफी राजधानी रांची पहुंचेगी। ट्रॉफी टूर के तहत शहर के चार प्रमुख स्थानों पर इसे आम लोगों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा, जहां फुटबॉल प्रेमी ट्रॉफी का दीदार करने के साथ उसके साथ फोटो और सेल्फी भी ले सकेंगे। आयोजन समिति का मानना है कि यह ट्रॉफी टूर शहर में फुटबॉल के प्रति उत्साह को और बढ़ाएगा तथा अधिक से अधिक दर्शकों को टूर्नामेंट से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। न्यूक्लियस मॉल से शुरू होगा ट्रॉफी टूर ट्रॉफी टूर की शुरुआत शनिवार दोपहर 3:30 बजे न्यूक्लियस मॉल से होगी। इसके बाद शाम 4:30 बजे ट्रॉफी मोरहाबादी मैदान पहुंचेगी। शाम 5:30 बजे इसे फिरायालाल चौक ले जाया जाएगा और शाम 6:30 बजे सुजाता चौक पर आम लोगों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। इसके बाद ट्रॉफी दीपाटोली मिलिट्री स्टेशन के लिए रवाना होगी। मोरहाबादी मैदान, फिरायालाल चौक और सुजाता चौक पर विशेष प्रदर्शन की व्यवस्था की गई है, जहां बड़ी संख्या में खेल प्रेमियों के पहुंचने की संभावना है। सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम ट्रॉफी टूर के दौरान भीड़ को देखते हुए प्रशासन और आयोजन समिति ने सुरक्षा, यातायात प्रबंधन तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यापक तैयारी की है। विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। रांची में फिर गूंजेगा डूरंड कप का रोमांच इस वर्ष भी डूरंड कप के मुकाबले रांची के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में खेले जाएंगे। ट्रॉफी टूर का उद्देश्य राजधानी के खेल प्रेमियों को टूर्नामेंट से जोड़ना और स्टेडियम तक अधिक से अधिक दर्शकों को आकर्षित करना है। फुटबॉल की समृद्ध परंपरा वाले रांची में डूरंड कप का यह ट्रॉफी टूर खेल प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं माना जा रहा है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप के 135वें संस्करण की मेजबानी पहली बार रांची को मिली है। इस आयोजन के तहत 26 जुलाई से 16 अगस्त तक बिरसा मुंडा स्टेडियम में कुल 16 मुकाबले, जिनमें लीग चरण के मैच और एक क्वार्टर फाइनल शामिल है, खेले जाएंगे। इससे राज्य के फुटबॉल प्रेमियों को देश-विदेश की नामी टीमों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। डूरंड कप आयोजन समिति ने इस वर्ष टूर्नामेंट में भाग लेने वाली 24 टीमों और पांच मेजबान शहरों की घोषणा कर दी है। इस बार मुकाबले कोलकाता, रांची, इंफाल, गुवाहाटी और शिलांग में आयोजित किए जाएंगे। मेजबान शहरों की सूची में पहली बार रांची का नाम शामिल होना झारखंड के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जमशेदपुर एफसी पर रहेंगी खास नजरें रांची में होने वाले मुकाबलों में इंडियन सुपर लीग (ISL) की टीम जमशेदपुर एफसी पर खास नजरें रहेंगी। इसके अलावा स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली, भारतीय वायुसेना फुटबॉल टीम और श्रीलंका आर्म्ड फोर्सेज की डिफेंडर्स एफसी जैसी टीमें भी मैदान में उतरेंगी। इन मुकाबलों से स्थानीय दर्शकों को उच्च स्तरीय फुटबॉल देखने का मौका मिलेगा और युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी। इस स्टेडियम में पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की है बिरसा मुंडा स्टेडियम पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी कर चुका है, लेकिन डूरंड कप जैसे ऐतिहासिक टूर्नामेंट का आयोजन इसकी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ेगा। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इससे झारखंड में फुटबॉल संस्कृति को नई मजबूती मिलेगी और राज्य में खेल पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। डूरंड कप 2026 की शुरुआत 25 जुलाई से होगी, जबकि टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला 23 अगस्त को कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में खेला जाएगा। रांची में होने वाले मुकाबलों को लेकर फुटबॉल प्रेमियों में अभी से खासा उत्साह देखा जा रहा है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची पहली बार एशिया के सबसे पुराने और दुनिया के पांचवें सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप 2026 की मेजबानी करने जा रही है। यह ऐतिहासिक टूर्नामेंट 26 जुलाई से शुरू होगा और राज्य के खेल इतिहास में एक नई उपलब्धि के रूप में दर्ज होगा। डूरंड कप का गौरवशाली इतिहास वर्ष 1888 में शिमला से शुरू हुए इस टूर्नामेंट का नाम तत्कालीन भारत के विदेश सचिव सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड के नाम पर रखा गया था। इसमें ISL के प्रमुख क्लब, आई-लीग की टीमें और भारतीय सशस्त्र बलों की टीमें हिस्सा लेती हैं। मोहन बागान और ईस्ट बंगाल इस टूर्नामेंट के सबसे सफल क्लब रहे हैं। बिरसा स्टेडियम का कायाकल्प बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। पिच उन्नयन के साथ-साथ फ्लडलाइट, ड्रेसिंग रूम, मीडिया सेंटर और दर्शक दीर्घा में नई सीटें लगाई जा रही हैं। सुरक्षा, यातायात, पार्किंग और चिकित्सा सुविधाओं की भी व्यापक व्यवस्था की जा रही है। उद्घाटन समारोह होगा खास उद्घाटन समारोह में सेना के जवानों का साहसिक प्रदर्शन और देशभक्ति से भरपूर बैंड प्रस्तुति होगी। साथ ही झारखंड की जनजातीय और लोक संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। खेल निदेशक छवि रंजन ने कहा कि यह आयोजन झारखंड के युवा खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय फुटबॉल से सीखने का मौका देगा और राज्य में खेल पर्यटन को भी नई गति मिलेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।