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Tiger Shroff Set for Mumbai FC Football Debut

फिल्मों से फुटबॉल मैदान तक टाइगर श्रॉफ का नया सफर, डूरंड कप 2026 के लिए मुंबई एफसी से जुड़े

surbhi जुलाई 28, 2026 0
Tiger Shroff trains with Mumbai FC ahead of the Durand Cup 2026, preparing for his potential football debut.
Tiger Shroff Joins Mumbai FC for Durand Cup 2026

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ अब बड़े पर्दे के बाद फुटबॉल मैदान पर भी अपनी नई पारी शुरू करने के लिए तैयार हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाइगर श्रॉफ को 135वें डूरंड कप 2026 के लिए मुंबई एफसी की टीम में शामिल किया गया है। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से टीम के साथ नियमित अभ्यास कर रहे हैं और टूर्नामेंट के दौरान मैदान पर भी उतर सकते हैं।

मुंबई एफसी के साथ करेंगे फुटबॉल डेब्यू

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ ने मुंबई एफसी के साथ अपना आधिकारिक पंजीकरण पूरा कर लिया है और टीम के फिटनेस व ट्रेनिंग सत्र में लगातार हिस्सा ले रहे हैं। मुंबई एफसी 30 जुलाई को अपने ग्रुप मुकाबलों के लिए शिलांग रवाना होगी।

यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो टाइगर श्रॉफ ग्रुप स्टेज के अंतिम मुकाबले में टीम की ओर से अपना फुटबॉल डेब्यू कर सकते हैं।

क्लब से पहले से रहा है खास जुड़ाव

टाइगर श्रॉफ का मुंबई एफसी से रिश्ता नया नहीं है। उन्होंने 2024 में इस क्लब के लॉन्च के दौरान अहम भूमिका निभाई थी और वह क्लब के ब्रांड एंबेसडर भी हैं।

उनके जुड़ने के बाद क्लब ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और—

  • महाराष्ट्र स्टेट क्लब लीग चैंपियनशिप का खिताब जीता।
  • आई-लीग 3 में तीसरा स्थान हासिल किया।
  • पहली बार प्रतिष्ठित डूरंड कप के लिए क्वालिफाई किया।

ग्रुप-ई में मुंबई एफसी की चुनौती

डूरंड कप 2026 में मुंबई एफसी को ग्रुप-ई में रखा गया है। टीम का मुकाबला इन क्लबों से होगा—

  • शिलांग लाजोंग एफसी
  • नोंगकसेह स्पोर्ट्स एंड कल्चरल क्लब
  • लांगस्निंग एफसी

ग्रुप चरण के सभी मुकाबले शिलांग में खेले जाएंगे।

जॉन अब्राहम की राह पर टाइगर?

अगर टाइगर श्रॉफ टूर्नामेंट में मैदान पर उतरते हैं, तो वह भारतीय फुटबॉल से सक्रिय रूप से जुड़ने वाले बॉलीवुड सितारों की सूची में शामिल हो जाएंगे। इससे पहले अभिनेता जॉन अब्राहम अपनी इंडियन सुपर लीग (ISL) क्लब नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी के जरिए भारतीय फुटबॉल से जुड़े रहे हैं।

क्या है डूरंड कप?

डूरंड कप एशिया का सबसे पुराना और दुनिया का तीसरा सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट माना जाता है। इसकी शुरुआत 1888 में सर मॉर्टिमर डूरंड ने शिमला में की थी।

इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में इंडियन सुपर लीग (ISL), आई-लीग और भारतीय सशस्त्र बलों की शीर्ष टीमें हिस्सा लेती हैं। पहले ग्रुप स्टेज मुकाबले खेले जाते हैं, जिसके बाद सर्वश्रेष्ठ टीमें नॉकआउट चरण में प्रवेश करती हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। टीम की सबसे बड़ी खबर अनुभवी ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा की वापसी और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले सारांश जैन को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया जाना है।   जडेजा की वापसी, बुमराह फिटनेस पर निर्भर   रविंद्र जडेजा टेनिस एल्बो की चोट से उबरने के बाद टेस्ट टीम में लौटे हैं। वहीं तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को भी टीम में शामिल किया गया है, लेकिन उनका खेलना BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) से मिलने वाली फिटनेस मंजूरी पर निर्भर करेगा। बल्लेबाज साई सुदर्शन भी फिटनेस क्लीयरेंस मिलने पर ही चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे।   सारांश जैन को मिला पहला टेस्ट कॉल-अप   ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है। उन्हें वॉशिंगटन सुंदर की अनुपलब्धता के कारण मौका दिया गया है। मध्य प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले सारांश ने रणजी ट्रॉफी और इंडिया-ए के लिए लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है, जिसके बाद चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा जताया।   शुभमन गिल कप्तान, राहुल उपकप्तान   श्रीलंका दौरे पर भारतीय टीम की कमान शुभमन गिल के हाथों में रहेगी, जबकि केएल राहुल को उपकप्तान बनाया गया है। टीम 7 अगस्त से कोलंबो में चार दिवसीय अभ्यास मैच खेलेगी, जिसके बाद 15 अगस्त से गॉल में पहला टेस्ट शुरू होगा। यह सीरीज ICC विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 का हिस्सा होगी।   भारत की टेस्ट टीम (श्रीलंका दौरा): शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), साई सुदर्शन* (फिटनेस क्लीयरेंस के अधीन), ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, सारांश जैन, जसप्रीत बुमराह* (फिटनेस क्लीयरेंस के अधीन), मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़ और देवदत्त पडिक्कल।  

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Fast bowler Yash Dayal during a cricket match as he prepares to represent Chhattisgarh in the 2026-27 domestic season.
Yash Dayal: यूपी छोड़ अब छत्तीसगढ़ से खेलेंगे यश दयाल, घरेलू क्रिकेट में नई शुरुआत की तैयारी, जानिए वजह

भारतीय तेज गेंदबाज यश दयाल आगामी 2026-27 घरेलू क्रिकेट सीजन में नई टीम के साथ मैदान पर उतर सकते हैं। उत्तर प्रदेश की ओर से खेलने वाले बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अब छत्तीसगढ़ क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी में हैं। जानकारी के अनुसार, उनके नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की प्रक्रिया जारी है और वह पहले ही कर्नाटक के अलूर में आयोजित छत्तीसगढ़ टीम के प्री-सीजन कैंप से जुड़ चुके हैं। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब पिछले एक वर्ष से अधिक समय से यश दयाल का क्रिकेट करियर विभिन्न कारणों से प्रभावित रहा है। अब वह नई टीम के साथ अपने करियर को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे। छत्तीसगढ़ के लिए खेलने की तैयारी सूत्रों के अनुसार, यश दयाल आगामी घरेलू सीजन में छत्तीसगढ़ की ओर से खेलने के लिए तैयार हैं। बीसीसीआई के नियमों के तहत किसी अन्य राज्य की टीम से खेलने के लिए खिलाड़ी को अपने मौजूदा राज्य संघ से NOC प्राप्त करना होता है और इसी प्रक्रिया पर फिलहाल काम चल रहा है। दयाल ने छत्तीसगढ़ के प्री-सीजन कैंप में भी हिस्सा लिया है, जहां टीम नए घरेलू सत्र की तैयारियों में जुटी हुई है। पिछले कुछ समय से क्रिकेट से रहे दूर यश दयाल का आखिरी बीसीसीआई से जुड़ा सीनियर मुकाबला आईपीएल 2025 का फाइनल था, जिसमें रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पंजाब किंग्स को हराकर पहली बार आईपीएल खिताब जीता था। इसके बाद वह लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहे और घरेलू क्रिकेट में भी नियमित रूप से मैदान पर नजर नहीं आए। कानूनी मामलों के कारण प्रभावित हुआ करियर हाल के समय में यश दयाल दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में लगे आरोपों के कारण चर्चा में रहे। इन मामलों में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोप लगाए गए थे, जबकि एक मामले में पॉक्सो अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई थीं। यश दयाल ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। मामलों की कानूनी प्रक्रिया अपनी दिशा में चलती रही, जिसका असर उनके क्रिकेट करियर पर भी पड़ा। इन्हीं परिस्थितियों के बीच उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ ने उन्हें 2025 की यूपी टी20 लीग में शामिल नहीं किया था। आईपीएल 2026 में भी नहीं खेल सके रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने विवादों के बावजूद आईपीएल 2026 से पहले यश दयाल को अपनी टीम में बरकरार रखा था। हालांकि वह पूरे सीजन टीम के साथ नहीं जुड़े। उस समय आरसीबी के क्रिकेट निदेशक मो बोबाट ने कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए खिलाड़ी और टीम—दोनों के हित में यही फैसला उचित माना गया। बाद में यश दयाल ने भी संकेत दिया था कि आईपीएल से दूर रहने का निर्णय पूरी तरह उनका व्यक्तिगत फैसला नहीं था। यूपी टी20 लीग में भी नहीं मिली जगह जून 2026 में उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के अधिकारियों ने संकेत दिए थे कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें NOC देने में कोई बाधा नहीं होगी। गोरखपुर लायंस ने उन्हें अपनी टीम में बरकरार भी रखा था और वह अभ्यास सत्र में शामिल हुए थे। हालांकि अंतिम टीम घोषित होने पर उनका नाम 18 खिलाड़ियों की सूची में शामिल नहीं था। इस संबंध में उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ की ओर से कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया। नई शुरुआत की उम्मीद यश दयाल ने पिछले कुछ वर्षों में आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में अपनी तेज गेंदबाजी से अलग पहचान बनाई थी। अब छत्तीसगढ़ के लिए खेलना उनके करियर का नया अध्याय साबित हो सकता है। छत्तीसगढ़ टीम के प्री-सीजन कैंप में अनुभवी ऑफ स्पिनर जयंत यादव और ऑलराउंडर धर्मेंद्र सिंह जडेजा भी शामिल हैं। टीम के मुख्य कोच पूर्व भारतीय बल्लेबाज अमय खुरासिया हैं, जिनके मार्गदर्शन में टीम आगामी घरेलू सीजन की तैयारी कर रही है। यदि सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं, तो यश दयाल नए सत्र में छत्तीसगढ़ की जर्सी में मैदान पर वापसी करते नजर आ सकते हैं।  

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