जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में जन्म प्रमाणपत्र के अभाव में आधार कार्ड नहीं बनवा पा रहे 7,238 बच्चों के लिए प्रशासन ने विशेष पहल की है. ऐसे बच्चों के लिए अब विशेष कैंप आयोजित कर जन्म प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इसके बाद बच्चों का आधार कार्ड बनवाने और आधार में जरूरी अपडेट कराने का काम भी तेज किया जाएगा. सोमवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक हुई. बैठक में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति, आधार कार्ड, बैंक खाते, आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था, साइकिल वितरण समेत शिक्षा विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गयी. 7,238 बच्चों का नहीं बन पा रहा आधार समीक्षा के दौरान सामने आया कि जिले के 7,238 बच्चे जन्म प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण आधार कार्ड नहीं बनवा पा रहे हैं. उपायुक्त ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को विशेष कैंप आयोजित करने का निर्देश दिया. इन कैंपों के माध्यम से बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र तैयार कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. साथ ही आधार कार्ड बनाने और अपडेशन के लिए पर्याप्त संख्या में ऑपरेटरों की प्रतिनियुक्ति करने को कहा गया है. कम से कम 70 फीसदी उपस्थिति का लक्ष्य बैठक में चाकुलिया, डुमरिया और मुसाबनी प्रखंडों में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति पर उपायुक्त ने नाराजगी जतायी. उन्होंने सभी प्रखंडों में विद्यार्थियों की कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया. अधिकारियों को स्कूल स्तर पर नियमित निगरानी करने और कम उपस्थिति वाले विद्यालयों में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया. प्राइवेट स्कूलों के रिटायर्ड शिक्षक पढ़ायेंगे सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए निजी स्कूलों के सेवानिवृत्त और इच्छुक शिक्षकों की सेवाएं लेने का निर्णय लिया गया है. उपायुक्त ने कहा कि विषयवार पढ़ाई को मजबूत करने के लिए अनुभवी शिक्षकों की मदद ली जाए. बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन माध्यम का भी उपयोग किया जाएगा, ताकि किसी विषय की पढ़ाई बाधित न हो. आवासीय विद्यालयों के अधूरे भवन जल्द होंगे पूरे बैठक में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गयी. जुलाई में अधिकारियों द्वारा किये गये विद्यालयों के निरीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त ने लंबित भवन निर्माण कार्यों को जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि भवन निर्माण में देरी के कारण विद्यार्थियों के आवासन और पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए. एक माह में खुले 919 बैंक खाते विद्यार्थियों के बैंक खाते खोलने की भी समीक्षा की गयी. अधिकारियों ने बताया कि पिछले महीने जिले में 919 विद्यार्थियों के बैंक खाते खोले गये हैं. उपायुक्त ने बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया में और तेजी लाने को कहा, ताकि पात्र विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं की राशि सीधे उनके बैंक खातों में मिल सके. साथ ही आधार निर्माण और अपडेशन के लिए पर्याप्त ऑपरेटर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. बची हुई साइकिलों का जल्द करें वितरण साइकिल वितरण योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वितरण के बाद कुछ साइकिलें अभी बची हुई हैं. उपायुक्त ने निर्देश दिया कि बची हुई साइकिलों का वितरण सभी पात्र छात्र-छात्राओं के बीच जल्द से जल्द किया जाए. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकारी योजनाओं के पात्र बच्चों को किसी भी स्तर पर लाभ से वंचित नहीं होना चाहिए और योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाए. बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक समेत शिक्षा विभाग के अन्य पदाधिकारी और कर्मी मौजूद रहे.
पटना: बिहार में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कई अहम पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने युवाओं को बिहार के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार की नई पहल में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए दो राज्यस्तरीय कमेटियों का गठन, चार विभागों से जुड़ी छात्र कल्याण योजनाओं को एक मंच पर लाने के लिए छात्र कल्याण निदेशालय की स्थापना और विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए हर महीने सहयोग शिविर आयोजित करने जैसी योजनाएं शामिल हैं। इन फैसलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं, शैक्षणिक सुविधाओं और परीक्षा से जुड़ी सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है। चार विभागों को जोड़कर बनेगा छात्र कल्याण निदेशालय बिहार सरकार शिक्षा से जुड़े चार विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए छात्र कल्याण निदेशालय बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस प्रस्तावित निदेशालय का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं को अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करना है। अलग-अलग विभागों में बंटी छात्र कल्याण संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर समन्वय के साथ संचालित किए जाने से छात्रों को योजनाओं का लाभ लेने में आसानी हो सकती है। नई व्यवस्था में छात्रों की समस्याओं को चिन्हित करने, सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और जरूरत के मुताबिक सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर रहने की संभावना है। हर महीने आयोजित होंगे छात्र सहयोग शिविर सरकार विद्यार्थियों की समस्याओं को सीधे सुनने के लिए हर महीने सहयोग शिविर आयोजित करने की योजना भी बना रही है। इन शिविरों में छात्र अपनी समस्याएं सीधे संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। छात्रवृत्ति, प्रमाणपत्र, परीक्षा, शैक्षणिक सुविधाओं या अन्य सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को संबंधित विभाग तक पहुंचाने और उनके समाधान की कोशिश की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य छात्रों और सरकारी तंत्र के बीच संवाद को बेहतर बनाना है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो विद्यार्थियों को अपनी शिकायतों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी कम हो सकती है। रात 11 बजे तक ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा बिहार में ऑनलाइन शिक्षा को भी नई व्यवस्था के तहत बढ़ावा देने की तैयारी है। छात्रों को रात 11 बजे तक ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई करने के लिए अतिरिक्त समय देना है। खासकर वे विद्यार्थी जो दिन के समय स्कूल, कॉलेज, कोचिंग या अन्य जिम्मेदारियों के कारण ऑनलाइन शैक्षणिक सामग्री का इस्तेमाल नहीं कर पाते, उन्हें इससे फायदा मिल सकता है। हालांकि इस व्यवस्था की वास्तविक उपयोगिता ऑनलाइन कंटेंट की गुणवत्ता, इंटरनेट सुविधा और विद्यार्थियों तक इसकी पहुंच पर निर्भर करेगी। शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए दो कमेटियां मुख्यमंत्री ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए दो राज्यस्तरीय कमेटियों के गठन की घोषणा की है। इन समितियों के जरिए मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद कमेटियां सुधार के लिए जरूरी सुझाव सरकार को देंगी। परीक्षाओं में समयबद्धता, पारदर्शिता, बेहतर प्रबंधन और विद्यार्थियों का भरोसा बनाए रखना इस प्रक्रिया के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की चिंताओं पर फोकस बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक परीक्षाओं को लेकर समय-समय पर छात्रों की ओर से पारदर्शिता, परीक्षा कार्यक्रम, परिणाम और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे माहौल में परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए राज्यस्तरीय कमेटियों का गठन महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। यदि कमेटियां जमीनी समस्याओं की पहचान कर व्यावहारिक सुझाव देती हैं और उन पर समयबद्ध तरीके से अमल होता है, तो परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में ठोस बदलाव संभव है। सरकार के सामने लागू करने की बड़ी चुनौती छात्र कल्याण निदेशालय, सहयोग शिविर और ऑनलाइन शिक्षा जैसी योजनाओं की घोषणा के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल इनके प्रभावी क्रियान्वयन का है। नई व्यवस्था का लाभ तभी व्यापक स्तर पर छात्रों तक पहुंचेगा, जब विभागों के बीच समन्वय मजबूत हो, शिकायतों का समय पर समाधान हो और विद्यार्थियों को योजनाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने युवाओं को बिहार के भविष्य की ताकत बताया है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे इन बदलावों का वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को कितनी तेजी से समझती और उनका समाधान करती है। आने वाले समय में दोनों राज्यस्तरीय कमेटियों की सिफारिशें और छात्र कल्याण निदेशालय की कार्यप्रणाली बिहार की शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा तय कर सकती है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों और सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए भोजन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने मरीजों के भोजन पर होने वाला दैनिक खर्च लगभग दोगुना कर दिया है। वहीं, पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना के तहत प्राथमिक और प्री-प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के भोजन की लागत भी बढ़ा दी गई है। नई दरें 1 अगस्त से लागू होंगी। मरीजों के भोजन पर अब 110 रुपये खर्च राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार, सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती मरीजों के दैनिक भोजन पर होने वाला खर्च 56.64 रुपये से बढ़ाकर 110 रुपये कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई राशि से मरीजों को अधिक पौष्टिक, संतुलित और बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इस संबंध में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक निर्देश जारी किया। स्कूलों में मिड-डे मील के लिए 10 रुपये पीएम पोषण योजना के तहत प्री-प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालयों में मिलने वाले मिड-डे मील की प्रति छात्र लागत भी बढ़ा दी गई है। पहले प्रति छात्र भोजन पर 6.78 रुपये खर्च किए जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है। बढ़ी हुई 3.22 रुपये की अतिरिक्त राशि राज्य सरकार अपने बजट से वहन करेगी। सरकार का कहना है कि महंगाई बढ़ने के कारण मौजूदा राशि में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा था। 2017 के बाद पहली बार बढ़ीं दरें सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, भोजन पर होने वाले खर्च में आखिरी बार संशोधन वर्ष 2017 में किया गया था। लगभग नौ वर्ष बाद अब इन दरों में वृद्धि की गई है। सरकार का कहना है कि बदलती कीमतों और पोषण संबंधी जरूरतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार ने बताया फैसले का उद्देश्य राज्य सरकार के मुताबिक, इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराना और सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण मिड-डे मील सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि संतुलित और पौष्टिक भोजन मरीजों के जल्द स्वस्थ होने में मदद करेगा, जबकि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी बेहतर पोषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अहमदाबाद, एजेंसियां। गुजरात की राजधानी अहमदाबाद ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। अहमदाबाद नगर निगम ने मात्र एक घंटे में 3.61 लाख पौधे लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। यह मेगा वृक्षारोपण अभियान 12 जुलाई को शहर के भदाज क्षेत्र में आयोजित किया गया, जिसमें 25,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। मियावाकी तकनीक से लगाया गया मिनी जंगल इस अभियान में मियावाकी (Miyawaki) पद्धति का इस्तेमाल किया गया, जिसके तहत कम जगह में घने जंगल विकसित किए जाते हैं। लगभग 76,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 35 देशी प्रजातियों के पौधे लगाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में एक घने शहरी जंगल के रूप में विकसित होगा, जिससे जैव विविधता बढ़ेगी और शहर का हरित क्षेत्र मजबूत होगा। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रेरित पहल यह वृक्षारोपण अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "एक पेड़ मां के नाम" अभियान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की "हरियाली लोकसभा" पहल के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अमित शाह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस अभियान का लक्ष्य गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरित आवरण बढ़ाना है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम अहमदाबाद नगर निगम ने कहा कि यह रिकॉर्ड केवल संख्या का नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी का प्रतीक है। अभियान के तहत लगाए गए पौधे भविष्य में कार्बन उत्सर्जन कम करने, तापमान नियंत्रित रखने, जैव विविधता बढ़ाने और शहर को अधिक हरित एवं स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पटना ,एजेंसियां। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक और कड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के वेतन सत्यापन कोषांग में कार्यरत अवर सचिव अमोद मिश्रा को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। यह कार्रवाई पटना के गर्दनीबाग इलाके में मिनिस्टर एन्क्लेव मोड़ के पास की गई। एरियर भुगतान के बदले मांगी जा रही थी रकम मामले में सामने आया है कि शिकायतकर्ता उमा शंकर उमरेबी (नालंदा जिला, नई सराय) ने आरोप लगाया था कि उनके एरियर भुगतान से जुड़े कार्य को आगे बढ़ाने के लिए उनसे अवर सचिव द्वारा 20 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत निगरानी ब्यूरो से की। जांच में शिकायत सही मिलने पर बिछाया गया ट्रैप शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले की प्रारंभिक जांच कराई, जिसमें आरोपों की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और जैसे ही रिश्वत की रकम ली गई, अधिकारी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। कार्रवाई के बाद दफ्तर में हड़कंप गिरफ्तारी के बाद संबंधित विभाग में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। निगरानी टीम अब आगे की जांच में जुटी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं इस पूरे मामले में और लोग शामिल तो नहीं हैं।
बांका, एजेंसियां। बिहार में गर्मी के छुट्टी के ख़त्म होने के बाद सरकारी स्कूल के खुलने के साथ ही शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। बांका जिले में निरीक्षण के दौरान 487 शिक्षक बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए। मामले को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा स्थापना कार्यालय ने सभी शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर जवाब मांगा है। निरीक्षण के दौरान सामने आई बड़ी लापरवाही शिक्षा विभाग की जांच के दौरान कई स्कूलों में शिक्षक ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिले। अधिकारियों का कहना है कि बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों से निर्धारित समय के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी भी तय विभाग ने संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को भी निर्देश दिया है कि वे शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें। भविष्य में इस तरह की लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। शिक्षा व्यवस्था सुधारने की पहल शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। शिक्षकों की उपस्थिति पर विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। आगे भी जारी रहेगा अभियान अधिकारियों के अनुसार, राज्य के अन्य जिलों में भी स्कूलों का औचक निरीक्षण जारी रहेगा। बिना सूचना अनुपस्थित पाए जाने वाले कर्मचारियों और शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार के प्राथमिक स्कूलों में अब B.Ed शिक्षक नहीं पढ़ा पढ़ाएंगे। इसे लेकर स्कूली शिक्षा व्यवस्था में जल्द बड़ा बदलाव होने जा रहा है। शिक्षा विभाग नई ट्रांसफर नीति लाने जा रहा है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के कैडर आधारित पुनर्गठन और व्यापक स्थानांतरण नीति पर काम शुरु कर दिया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत B.Ed डिग्रीधारी शिक्षकों को प्राथमिक विद्यालयों यानी कक्षा (1-5) से हटाकर मध्य और माध्यमिक स्कूलों में पदस्थापित किया जाएगा। प्राथमिक विद्यालयों में केवल प्राथमिक स्तर के प्रशिक्षित शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। शिक्षा विभाग की ये है पॉलिसी दरअसल शिक्षा विभाग की नई स्थानांतरण नीति का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों का पुनर्समायोजन करना है। वर्तमान में बड़ी संख्या में B.Ed योग्यताधारी शिक्षक प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे शिक्षकों को उनकी शैक्षणिक योग्यता और विषय विशेषज्ञता के आधार पर मध्य या माध्यमिक विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने और विषयवार असंतुलन को खत्म करने में मदद मिलने की उम्मीद है। विभाग का मानना है कि इससे छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। विभाग का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति और विभिन्न न्यायिक निर्देशों के अनुरूप लिया जा रहा है। इससे शिक्षकों की योग्यता के अनुसार उनकी नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी। तीन स्तरों पर व्यवस्थित होंगे स्कूल इस नई व्यवस्था के तहत राज्य के स्कूलों को तीन स्तरों में व्यवस्थित किया जाएगा। कक्षा (1-5) तक केवल PRT टीचर पढ़ाएंगे, जबकि कक्षा (6-10) तक TGT टीचर पढ़ाएंगे। वहीं कक्षा 11वीं-12वीं में PGT शिक्षक तैनात होंगे। शिक्षा विभाग का कहना है कि प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के लिए अलग प्रकार की शिक्षण दक्षता और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, जबकि उच्च कक्षाओं में विषय विशेषज्ञता अधिक महत्वपूर्ण होती है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार 25 जून तक इस पूरी प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा।
रांची। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह सोमवार को मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट की समीक्षा करेंगे। सचिव ने बताया कि कुछ जिलों के डीसी और डीईओ ने अपने स्तर पर प्राचार्यों को शोकॉज किया है। विभागीय स्तर पर सोमवार को यह निर्णय लिया जाएगा कि किन-किन बिंदुओं पर प्राचार्यों को शोकॉज किया जाए। सभी जिलों के खराब रिजल्ट वाले हाई स्कूलों के प्राचार्यों और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वेतन भी रोका जा सकता है। बैठक में कई शिक्षा अधिकारी मौजूद रहेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।