election update

SIR Deadline
29 जुलाई यानी आज तक चलेगा SIR सत्यापन अभियान

रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का अभियान 30 जून से शुरू हो रहा है। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) 29 जुलाई तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे और उन्हें गणना प्रपत्र उपलब्ध कराएंगे। मतदाताओं को केवल इस प्रपत्र को सही ढंग से भरकर उस पर हस्ताक्षर कर बीएलओ को लौटाना होगा। इस चरण में किसी भी प्रकार का दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र समय पर जमा नहीं किया गया, तो संबंधित व्यक्ति का नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं होगा। बीएलओ प्रपत्र लेने के लिए कम से कम तीन बार घर पहुंचेंगे।   1 अक्टूबर तक 18 वर्ष पूरे करने वाले बन सकेंगे मतदाता चुनाव आयोग ने इस पुनरीक्षण के लिए 1 अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि निर्धारित की है। यानी इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा नए मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकेंगे। नए मतदाताओं को गणना चरण या दावा-आपत्ति अवधि के दौरान फॉर्म-6 भरकर आवश्यक दस्तावेजों और घोषणा-पत्र के साथ जमा करना होगा। वहीं, दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में नाम स्थानांतरित कराने वाले मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-8 भरना होगा।   5 अगस्त को प्रारूप सूची, 7 अक्टूबर को अंतिम प्रकाशन विशेष पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन बनाना है, ताकि कोई पात्र मतदाता छूटे नहीं और अपात्र व्यक्तियों के नाम सूची में शामिल न रहें। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी, जिस पर 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इनके निस्तारण के बाद 7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।   आयोग ने स्पष्ट किया है कि मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत अथवा विदेशी नागरिकता प्राप्त कर चुके लोगों के नाम भी जांच के बाद मतदाता सूची से हटाए जाएंगे, जिससे सूची अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बन सके।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha election
झारखंड राज्यसभा चुनाव: 2 सीटों के लिए शुरू हुई वोटिंग

रांची। झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए गुरुवार सुबह से मतदान शुरू हो गया। चुनाव को लेकर विधानसभा परिसर में सुबह से ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। इस बार दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। सभी विधायकों के वोट पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।   तीन उम्मीदवार मैदान में, एक सीट पर बैजनाथ राम की बढ़त   इंडिया गठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को चुनावी मैदान में उतारा है। दूसरी ओर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।   विधानसभा में किसके पास कितना संख्या बल    •    एनडीए : 24 •    भाजपा : 21 •    आजसू पार्टी : 01 •    जदयू : 01 •    लोजपा-आर : 01 •    कुल : 24 विधानसभा परिसर में हलचल   •    इंडिया गठबंधन : 56 •    झामुमो : 34 •    कांग्रेस : 16 •    राजद : 04 •    भाकपा माले : 02

anjali kumari जून 18, 2026 0
Voter List Mapping
SIR: मतदाता सूची में मैपिंग के लिए 13 व 14 को सभी बूथों पर लगेगा विशेष कैंप

रांची। मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए 13 और 14 जून को सभी बूथों पर विशेष कैंप लगेगा। इस दौरान वोटर्स की मैपिंग की जायेगी। रांची के मतदाताओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक बार फिर 'विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम' के तहत विशेष कैंप का आयोजन किया जाएगा। डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने जिले के सभी मतदान केंद्रों (बूथों) पर 13 और 14 जून को दो दिवसीय विशेष कैंप लगाने का निर्देश दिया है। सुबह 8 से दोपहर 4 बजे तक तैनात रहेंगी बीएलओ इस विशेष अभियान के तहत सभी बूथों पर सुबह 8:00 बजे से दोपहर 4:00 बजे तक बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मतदाता सूची के साथ उपस्थित रहेंगी। हालांकि, जो बीएलओ जनगणना कार्य में भी लगी हुई हैं, वे दोपहर 1:00 बजे तक ही कैंप में मौजूद रहेंगी। मतदाताओं और उनके परिवार की होगी मैपिंग डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक, त्रुटिहीन और अप-टू-डेट (अद्यतन) करने के लिए यह महाअभियान चलाया जा रहा है। कैंप के दौरान मतदाताओं के निवास, पहचान एवं अन्य आवश्यक जानकारियों का भौतिक सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया जाएगा।   कागजात लाना अनिवार्य   जिन मतदाताओं ने अभी तक अपनी और अपने परिवार की मैपिंग नहीं कराई है, वे इस कैंप में जाकर इसे पूरा करा सकते हैं। इसके लिए मतदाताओं को बीएलओ द्वारा मांगे गए आवश्यक दस्तावेजों (पहचान और पते का प्रमाण) के साथ अपने-अपने मतदान केंद्र पर पहुंचना होगा। 15 जून तक चलेगी मैपिंग की प्रक्रिया इधर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि राज्य में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (रिवीजन) से पूर्व मतदाताओं की मैपिंग की यह प्रक्रिया 15 जून तक जारी रहेगी। इसके बाद अगले चरण में इन्यूमरेशन फॉर्म (Enumeration Form) की छपाई और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) का कार्य शुरू किया जाएगा।

anjali kumari जून 12, 2026 0
Parimal Nathwani
परिमल नाथवानी के नामांकन को हरी झंडी, राज्यसभा चुनाव के तीसरे प्रत्याशी

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर है। सत्तापक्ष और विपक्ष की ओर से हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामा देखने को मिल रहा है। भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी के नामांकन दाखिल करने के बाद चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन होल्ड पर रख दिया था। उनके नाम को लेकर भ्रम की स्थिति थी, क्योंकि कहीं उनका नाम परिमल नाथवानी तो कहीं नाथवानी परिमल दर्ज था। इसी को लेकर कांग्रेस की ओर से विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने आपत्ति जताई थी। जिसके बाद परिमल नाथवानी का नामांकन होल्ड पर रख दिया गया था, लेकिन दो दिनों तक चले विवाद के बाद आखिरकार परिमल नाथवानी का नामांकन मंजूर कर लिया गया है। रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके नामांकन को हरी झंडी दे दी है।  राज्यसभा की दो सीटों के लिए अब 3 प्रत्याशी झारखंड से राज्यसभा की दो सीटें खाली हैं, लेकिन उम्मीदवार तीन हैं। परिमल नाथवानी एक निर्दलीय उम्मीदवार हैं, जिन्हें भाजपा समर्थन दे रही है। वहीं, गठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा चुनावी मैदान में हैं। नामांकन पर आपत्ति के बाद मचा था घमासान नामांकन होल्ड पर किए जाने की खबर मिलते ही परिमल नाथवानी विधानसभा पहुंचे थे और अपनी ओर से सफाई दी थी। वहीं, निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार भी विधानसभा पहुंचे थे और पूरे मामले की जानकारी ली थी।  बुधवार को सुबह से ही कांग्रेस समर्थक नाथवानी का नामांकन रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं, बीजेपी कार्यकर्ताओं को गेट के बाहर ही रोक दिया गया था। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक सीनियर वकील भी पहुंचे थे। इधर, कांग्रेस के वरीय नेता सलमान खुर्शीद भी दिल्ली से रांची पहुंच गये। यहां वह सीधे विधानसभा पहुंचे। विधानसभा के गेट के बाहर भाजपा कार्यकताओं ने उन्हें रोका और जमकर नारेबाजी की। करीब एक बजे मामले में बहस पूरी हुई और रिटर्निंग ऑफिसर ने नाथवानी के नामांकन पत्र को सही घोषित कर दिया।

anjali kumari जून 10, 2026 0
Rajya Sabha Elections 2026
राज्यसभा चुनाव 2026: जेएमएम-कांग्रेस उम्मीदवारों ने भरा नामांकन

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां सोमवार को चरम पर रहीं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि पर सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र जमा कर दिया। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की ओर से बैद्यनाथ राम और कांग्रेस की ओर से प्रणव झा ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश की। दोनों उम्मीदवारों के नामांकन के साथ ही राज्य की राजनीति में चुनावी माहौल और गर्म हो गया है।   मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी रही खास नामांकन प्रक्रिया के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे। उन्होंने दोनों प्रत्याशियों का स्वागत करते हुए गठबंधन की मजबूती और एकजुटता का संदेश दिया। उनके साथ गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की एकजुटता का स्पष्ट संकेत है।   जीत को लेकर उम्मीदवारों ने जताया भरोसा नामांकन दाखिल करने के बाद बैद्यनाथ राम और प्रणव झा ने अपनी जीत को लेकर विश्वास जताया। दोनों नेताओं ने कहा कि उन्हें गठबंधन के सभी विधायकों का समर्थन प्राप्त है और वे राज्य के हितों को राज्यसभा में मजबूती से उठाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने महागठबंधन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का भरोसा भी दिया।   समर्थकों की रही भारी मौजूदगी नामांकन केंद्र के बाहर सुबह से ही समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भीड़ देखने को मिली। चुनावी नारों और उत्साह के बीच दोनों उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान गठबंधन के नेताओं ने विपक्ष को भी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की।   अब चुनावी समीकरणों पर टिकी निगाहें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राजनीतिक दलों और पर्यवेक्षकों की नजर आगामी चुनावी प्रक्रिया पर टिकी है। राज्यसभा सीटों के लिए संख्या बल और समर्थन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। गठबंधन को उम्मीद है कि उसके उम्मीदवार आसानी से जीत दर्ज करेंगे, जबकि विपक्ष भी अपनी रणनीति पर नजर बनाए हुए है।

Unknown जून 8, 2026 0
Rajya Sabha Elections
राज्यसभा चुनावः JMM नाराज, कांग्रेस मांग रही माफी

रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने जा रहे चुनाव के लिए कांग्रेस ने प्रवीण झा को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इसके बाद से ही झारखंड का सियासी गलियारा गरमाया हुआ है। अंदर खाने से खबरें आ रही हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा कांग्रेस के इस कदम से नाराज हैं। इसके बाद से ही प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं की नींद उड़ी हुई है। कई कांग्रेस नेता तो सार्वजनिक रूप माफी भी मांग रहे हैं। उधर विपक्षी खेमा इसे लेकर मजे ले रहा हैं।  दरअसल, राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद से ही कांग्रेस एक सीट की मांग कर रही थी। वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साफ इशारा दे दिया था कि उसे दोनों सीटें चाहिए। कांग्रेस प्रभारी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2-3 दिन में जबाव देने की बात कही थी, लेकिन उनकी चुप्पी भी मामले में सस्पेंस बढ़ाती जा रही थी। इसी बीच कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली से ही झारखंड में प्रत्याशी दिये जाने की घोषणा कर दी।  कांग्रेस द्वारा दिल्ली से राज्यसभा प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद झामुमो ने नाराजगी व्यक्त की। झामुमो और कांग्रेस में तनातनी बढ़ गई है। गुरुवार रात कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा के बाद शुक्रवार को झामुमो विधायकों ने दोनों सीटों पर दावा ठोक दिया। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्‌टाचार्य ने कहा कि एकतरफा प्यार कब तक चलेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सभी सरकारी कार्यक्रमों को स्थगित कर अपने आवास पर पार्टी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक की। केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन फैसला लेने के लिए अधिकृत करीब दो घंटे चली बैठक में सभी नेताओं ने एक सुर में दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने का सुझाव दिया। साथ ही केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन को इस पर फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया। इन दोनों सीटों पर उम्मीदवार कौन होंगे, यह निर्णय भी मुख्यमंत्री लेंगे। अब झामुमो में अंजनी सोरेन, विनोद कुमार पांडेय, फागू बेसरा और प्रणव वर्मा के नाम पर चर्चा शुरू हो गई है। झामुमो नेता कांग्रेस से नाराज बैठक के बाद मंत्री हफीजुल हसन और योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि हमने अपनी भावनाओं से केंद्रीय अध्यक्ष को अवगत करा दिया है। इसमें दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने की सलाह दी गई है। इसके लिए हेमंत सोरेन को अधिकृत कर दिया गया है। वहीं पूर्व मंत्री बैजनाथ राम के अनुसार-कांग्रेस ने कहा था कि मुख्यमंत्री की पसंद का प्रत्याशी होगा। फिर अचानक प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी। कांग्रेस के इस कदम पर सबने नाराजगी जताई। हम पूरे त्याग के साथ एकतरफा प्यार करते आ रहे हैं : सुप्रियो झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्‌टाचार्य ने कहा कि महागठबंधन में हम पूरे त्याग के साथ एकतरफा प्यार करते आ रहे हैं। वर्ष 2019 में सिर्फ एक विधायक वाले राजद के सत्यानंद भोक्ता को मंत्री बनाया। कांग्रेस को चार मंत्री पद मिले। वर्ष 2024 में भी कांग्रेस को चार मंत्री पद मिले। इसके बावजूद इन दोनों दलों ने बिहार विधानसभा चुनाव में वादाखिलाफी की। पहले राजद ने दरकिनार किया, फिर कांग्रेस ने भी साथ नहीं दिया। असम विधानसभा चुनाव में भी हमें दरकिनार किया गया। 2024 का लोकसभा चुनाव में झामुमो की बदौलत कांग्रेस को दोनों सीटें मिलीं। विधानसभा चुनाव में भी हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली महागठबंधन को 56 सीटें आईं। इस हिसाब से दोनों सीटों पर झामुमो का दावा बनता है। कांग्रेस ने जब कहा था कि सीएमओ की पंसद का उम्मीदवार होगा, तो अंतिम निर्णय पर पहुंचने के पहले प्रत्याशी क्यों घोषित कर दिया गया। झामुमो से दूरी पाटने के लिए सीएम से मिलेंगे : प्रदीप... कांग्रेस विधायक दल की शुक्रवार शाम बैठक हुई। इसमें राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति तय की गई। बैठक के बाद विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि झामुमो के साथ जो थोड़ी बहुत दूरी दिख रही है, उसे दूर करने के लिए कांग्रेस नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलेंगे। कांग्रेस का तर्क उधर, झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्‌टाचार्य के एक तरफा प्यार वाले बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा-प्रत्याशी की घोषणा से पहले प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्‌टी विक्रमार्क ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी मुख्यमंत्री से बात की थी। इसके बाद प्रत्याशी की घोषणा की गई। कमलेश ने कहा कि गठबंधन से राज्यसभा चुनाव के लिए दो प्रत्याशी होंगे और दोनों ही जीतेंगे।  कांग्रेस नेताओं ने मांगी माफी इधर, झारखंड मुक्ति मोर्चा की  नाराजगी पर कांग्रेस के कई नेताओं ने माफी मांग ली है। प्रदेश प्रभारी के राजू के साथ कांग्रेस विधायक दल के नेताओं की हुई बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री का दिल दुखा है, तो हम क्षमा प्रार्थी हैं। उन्होंने गठबंधन में किसी दरार से साफ इंकार किया। वहीं, बोकारो से कांग्रेस की विधायक श्वेता सिंह ने भी लगभग इसी प्रकार का बयान दिया। उन्होंने कहा कि झामुमो का दिल दुखा है, तो वह  क्षमा प्रार्थी हैं। वहीं विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो के बीच की खाई को पाटने की कोशिश की जा रही है। अब प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू मुख्यमंत्री से मिल कर गिला-शिकवा दूर करने की कोशिश करेंगे, ताकि गठबंधन में आयी दरार के नहीं पटने पर भी राज्य की जनता के बीच यह संदेश जा सके कि कांग्रेस ने गठबंधन को बनाए रखने के लिए अपना धर्म निभाया। अब गठबंधन धर्म का पालन करने की जिम्मेदारी झामुमो पर है।

Unknown जून 6, 2026 0
Jharkhand Assembly
जिस कांग्रेस ने परिसीमन का विरोध किया, उसी के नेता ने झारखंड में विधानसभा सीटें बढ़ाने के लिए पीएम को पत्र लिखा

रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव विनय सिन्हा दीपू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य विधानसभा की सीटों की संख्या 81 से बढ़ाकर 150 करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे आदिवासी, मूलवासी, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति समेत सभी वर्गों को बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। दिलचस्प बात है कि पिछले दिनों लोकसभा में परिसीमन को लेकर पेश बिल का कांग्रेस और विपक्षी दलों ने विरोध किया था, जिसके कारण यह बिल पास नहीं हो सका। अब उसी कांग्रेस के नेता झारखंड सीटें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।  आदिवासी-मूलवासी हितों के लिए सीटें बढ़ाने की मांग विनय सिन्हा दीपू ने कहा कि आगामी परिसीमन को लेकर राज्य के आदिवासी और मूलवासी समाज में चिंता है। उनका मानना है कि जनसंख्या के बदलते आंकड़ों के कारण कई पारंपरिक जनजातीय सीटों पर असर पड़ सकता है, जिससे इन समुदायों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होने की आशंका है। विनय सिन्हा दीपू ने पत्र में लिखा है कि झारखंड का क्षेत्रफल करीब 79 हजार वर्ग किलोमीटर है और राज्य के कई हिस्से जंगलों व पहाड़ी इलाकों में स्थित हैं। मौजूदा व्यवस्था में एक विधानसभा क्षेत्र का दायरा काफी बड़ा है जिससे जनप्रतिनिधियों के लिए सभी क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। विधानसभा सीटें बढ़ाने के पीछे का तर्क कांग्रेस नेता विनय सिन्हा दीपू का तर्क है कि विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने से क्षेत्रों का आकार छोटा होगा और जनप्रतिनिधि लोगों की समस्याओं पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। साथ ही संताल परगना, कोल्हान और दक्षिणी छोटानागपुर जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में आरक्षित सीटों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से झारखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।

Unknown जून 2, 2026 0
Rajya Sabha Seat
राज्यसभा की एक सीट रहेगी सोरेन परिवार के पास!

रांची। राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड की सियासत में इस बार पारिवारिक प्राथमिकता दिखनेवाली है। झामुमो ने अपनी रणनीति में गुरुजी की खाली सीट उनके परिवार में ही रखने की सोची है। संकेत मिल रहे हैं कि गुरुजी की खाली हुई सीट पर उनका ही परिवार दावा मजबूत कर रहा है। किसी महिला सदस्य को मिल सकता है मौका जानकारी के मुताबिक पार्टी इस बार परिवार की किसी महिला सदस्य को राज्यसभा भेजने की तैयारी में है। आधिकारिक तौर पर भले ही चुप्पी साधी गई हो, लेकिन अंदरखाने यह लगभग तय माना जा रहा है कि यह मौका परिवार के भीतर ही जाएगा। परिवार की महिलाओं के नाम पर मंथन पार्टी के अंदर जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें गुरुजी की बेटी अंजलि सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन और बसंत सोरेन की पहली पत्नी हेमलता सोरेन प्रमुख हैं। इन तीनों में से कोई भी अब तक राज्यसभा नहीं पहुंची हैं, ऐसे में पार्टी एक नया चेहरा सामने लाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। ऐसे में सीएम हेमंत की बहन अंजलि सोरेन का दावा मजबूत दिखता है।  रूपी सोरेन दौड़ से बाहर गुरुजी की पत्नी रूपी सोरेन का नाम भी संभावित दावेदारों में आ सकता था, लेकिन उनकी लगातार खराब सेहत के कारण फिलहाल उन्हें इस दौड़ से बाहर माना जा रहा है। यही वजह है कि पार्टी अन्य महिला सदस्यों पर फोकस कर रही है। अंदरखाने में बात हो रही पक्की हालांकि पार्टी के नेता सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन अनौपचारिक बातचीत में अधिकतर पदाधिकारियों ने स्वीकार किया है कि इस बार परिवार की महिला सदस्य को ही प्राथमिकता मिलेगी। कौन हैं अंजलि सोरेन मुख्यमंत्री की बड़ी बहन अंजलि सोरेन ओडिशा में सक्रिय राजनीति में जुड़ी हुई हैं। वे वहां लंबे समय से झामुमो की ओडिशा इकाई के साथ काम कर रही हैं। वह मयूरभंज जिले के रायरंगपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं। मयूरभंज क्षेत्र में वे आदिवासी समुदायों के बीच काम करने, उनकी संस्कृति को बढ़ावा देने और स्थानीय मुद्दों को उठाने के लिए जानी जाती हैं। जेएमएम और राज्यसभा सदस्य का पुराना नाता राज्यसभा और जेएमएम सदस्यों का पुराना नाता है।  बात सोरेन परिवार की करें तो शिबू सोरेन सोरेन परिवार में सबसे अधिक गुरुजी तीन अलग-अलग अवधि में उच्च सदन में रहे हैं। उनका अंतिम कार्यकाल अगस्त 2025 तक था। वहीं गुरुजी के दूसरे बेटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 2009 में राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके बाद वे सक्रिय राजनीति में राज्य स्तर पर केंद्रित हो गए। बसंत सफल नहीं रहे, पर पत्नी का हो सकता है गुड लक इनके अलावा बसंत सोरेन ने 2016 में राज्यसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वे जीत नहीं सके। पार्टी से बात करें तो केडी सिंह झामुमो के कोटे से राज्यसभा सांसद थे। 2014 में इस्तीफा दे दिया था। वहीं स्टीफन मरांडी भी सदस्य रहे हैं। इनका कार्यकाल समय से पहले ही समाप्त हो गया था। वर्तमान में झामुमो से महुआ माजी और सरफराज अहमद राज्यसभा सदस्य हैं। सीएम से मिले धीरज, नाथवाणी भी संपर्क मे कांग्रेस नेता धीरज साहू ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से एक-दो बार मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि धीरज साहू ने मुख्यमंत्री से राज्यसभा की दूसरी सीट देने का आग्रह किया है। वहीं उद्योगपति परिमल नाथवाणी भी झामुमो से संपर्क की कोशिश में हैं। नाथवाणी ने कहा कि झामुमो ने सहयोग किया कि तो वे एक बार फिर झारखंड से राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।

Unknown मई 25, 2026 0
Jharkhand voter list
झारखंड में वोटर लिस्ट सुधार अभियान शुरू, फर्जीवाड़ा करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

रांची। झारखंड में मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग 20 जून 2026 से ‘विशेष गहन सुधार और जांच कार्यक्रम’ (SIR) शुरू करने जा रहा है। रांची स्थित निर्वाचन सदन में आयोजित सर्वदलीय बैठक में राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रविकुमार ने इस अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य वोटर लिस्ट में मौजूद गड़बड़ियों को दूर करना है, लेकिन किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम बिना जांच और सुनवाई के नहीं हटाया जाएगा।   23 मई से बूथों पर लगेगी अनमैप्ड वोटरों की सूची निर्वाचन आयोग के अनुसार वर्तमान मतदाता सूची का पुरानी सूची से मिलान किया जा रहा है। जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो सकी है, उनकी सूची 23 मई से अगले दो सप्ताह तक संबंधित बूथों पर चिपकाई जाएगी। ऐसे मतदाता अपने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर जानकारी सही करा सकेंगे।   5 अगस्त को जारी होगी ASDD सूची 5 अगस्त 2026 को चुनाव आयोग नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करेगा। इसी दिन एब्सेंट, शिफ्टेड, मृत और डुप्लिकेट मतदाताओं की ASDD सूची भी प्रकाशित की जाएगी। यह सूची राजनीतिक दलों को मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी और आम लोग भी इसे आयोग की वेबसाइट पर देख सकेंगे।   झूठी जानकारी देने पर होगी FIR मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने चेतावनी दी कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या सुधार के लिए झूठी जानकारी देने वालों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत FIR दर्ज की जाएगी। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों ने निष्पक्ष जांच और मतदाताओं की सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।

Unknown मई 23, 2026 0
Assam elections 2026
असम में चला तीर-धनुष, JMM का धमाकेदार प्रदर्शन

रांची। असम में भले ही बीजेपी की शानदार जीत हुई है, लेकिन वहां तीर-धनुष भी खूब चला है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम में शानदार प्रदर्शन किया है।  असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के ताजा आंकड़ों ने झारखंड मुक्ति मोर्चा यानी JMM  के लिए उत्साहजनक संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ‘एकला चलो’ रणनीति रंग लाती दिख रही है। ताजा रुझानों के अनुसार, JMM न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, बल्कि मजबात और डिगबोई जैसी सीटों पर दूसरे स्थान पर बरकरार रहकर मुकाबले को रोचक बना दिया है।   मजबात और डिगबोई सीट पर झामुमो का अच्छा प्रदर्शन मजबात और डिगबोई से झामुमो के लिए अच्छी खबर सामने आई है, जहां पार्टी के उम्मीदवार दूसरे स्थान पर हैं। इन सीटों पर ये अच्छे वोट हासिल करते दिखाई पड़ रहे हैं। मजबात सीट से प्रीति रेखा बारला ने 26,252 वोट हासिल किए हैं और डिगबोई से भारत नायक ने भी सबको चौंकाते हुए 6,433 वोट पाकर दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। अन्य सीटों पर JMM उम्मीदवारों का स्कोरकार्ड भेरगांव: प्रभात दास पानिका – 10,997 वोट मारगेरिटा: जरनैल मिंज – 6,846 वोट रंगापाड़ा: मैथ्यू टोपनो – 4,810 वोट चबुआ: भूपेन सिंह मुरारी – 4,190 वोट बरचला: अबुल माजन – 3,748 वोट बिस्वनाथ: तेहारु गौर – 3,581 वोट सोनारी: बलदेव तेली – 3,432 वोट खुमटाई: अमित नाग – 3,039 वोट नहरकटिया: संजय बाघ – 2,754 वोट तिंगखोंग: महाबीर बास्के – 2,619 वोट डुलियाजान: पीटर मिंज – 1,919 वोट

Unknown मई 4, 2026 0
EC fixes technical glitch in West Bengal voter list
बंगाल वोटर लिस्ट में तकनीकी गड़बड़ी, EC ने माना- 2 घंटे में ठीक हुई समस्या

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में आई तकनीकी गड़बड़ी को लेकर चुनाव आयोग (EC) ने सफाई दी है। आयोग ने बुधवार को स्वीकार किया कि डिस्प्ले एरर के कारण कई मतदाताओं का नाम “जांच के दायरे में” दिख रहा था, जबकि वे पहले से ही फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल थे। क्या थी गड़बड़ी? मंगलवार शाम को जब लोगों ने EPIC नंबर के जरिए अपना वोटर स्टेटस चेक किया, तो: उनके नाम के आगे “जांच के दायरे में” दिख रहा था यह समस्या उन वोटरों के साथ भी हुई, जिनका नाम पहले से फाइनल लिस्ट में था 2 घंटे में ठीक हुई समस्या चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक: यह पूरी तरह तकनीकी (टेक्निकल) गड़बड़ी थी टेक्निकल टीम ने करीब 2 घंटे में इसे ठीक कर दिया फिलहाल आयोग इस मामले की जांच कर रहा है TMC ने उठाए सवाल इस गड़बड़ी पर सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कांग्रेस) ने सवाल उठाए: पार्टी ने कहा कि इससे ऐसा लग रहा था जैसे सभी वोटरों पर शक किया जा रहा है हालांकि, चुनाव आयोग ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक डिस्प्ले एरर था, किसी भी तरह की जांच या कार्रवाई से इसका कोई संबंध नहीं है। क्या है स्थिति अब? तकनीकी समस्या को ठीक कर दिया गया है वोटर स्टेटस अब सामान्य रूप से दिख रहा है आयोग मामले की विस्तृत जांच कर रहा है

surbhi मार्च 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0