झारखंड

झारखंड राज्यसभा चुनाव: 2 सीटों के लिए शुरू हुई वोटिंग

anjali kumari जून 18, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha election
Jharkhand Rajya Sabha election

रांची। झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए गुरुवार सुबह से मतदान शुरू हो गया। चुनाव को लेकर विधानसभा परिसर में सुबह से ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। इस बार दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। सभी विधायकों के वोट पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

 

तीन उम्मीदवार मैदान में, एक सीट पर बैजनाथ राम की बढ़त

 

इंडिया गठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को चुनावी मैदान में उतारा है। दूसरी ओर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

 

विधानसभा में किसके पास कितना संख्या बल 

 

•    एनडीए : 24
•    भाजपा : 21
•    आजसू पार्टी : 01
•    जदयू : 01
•    लोजपा-आर : 01
•    कुल : 24


विधानसभा परिसर में हलचल

 

•    इंडिया गठबंधन : 56
•    झामुमो : 34
•    कांग्रेस : 16
•    राजद : 04
•    भाकपा माले : 02

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

झारखंड

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Dhanbad Police
धनबाद पुलिस के बेड़े में शामिल हुईं 40 नई बोलेरो, गश्ती व्यवस्था होगी मजबूत

धनबाद। झारखंड सरकार ने धनबाद पुलिस को 40 नई बोलेरो गाड़ियां उपलब्ध कराई हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की स्वीकृति के बाद इन वाहनों को धनबाद पुलिस लाइन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। नई गाड़ियों को जिले के विभिन्न थानों में गश्ती और पुलिसिंग कार्य के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।   थानों में भेजी जाएंगी नई बोलेरो   नई गाड़ियों को जरूरत के अनुसार जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में लगाया जाएगा। इससे पुलिस टीमों को नियमित गश्त, क्षेत्र में निगरानी और घटनास्थल तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। धनबाद जैसे बड़े और औद्योगिक जिले में पुलिस की लगातार पेट्रोलिंग महत्वपूर्ण है। नए वाहनों से पुलिस बल की आवाजाही की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।   अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को मिलेगी मजबूती   पुलिस बेड़े में वाहनों की संख्या बढ़ने से संवेदनशील इलाकों में गश्त को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। किसी घटना की सूचना मिलने पर पुलिस टीमों को मौके तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी। नई गाड़ियों का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस के नियमित परिचालन कार्यों में भी किया जाएगा।   मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद मिली गाड़ियां   रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड सरकार की ओर से धनबाद पुलिस के लिए इन 40 बोलेरो वाहनों की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद इन्हें पुलिस लाइन से रवाना किया गया।पुलिस प्रशासन को उम्मीद है कि नए वाहनों से जिले में गश्ती व्यवस्था और पुलिस की कार्यक्षमता को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

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रांची के सबसे महंगे बाजार की 35 दुकानों का 13 साल से नहीं लिया गया किराया, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

रांची। रांची के सबसे व्यस्त और महंगे व्यावसायिक इलाकों में शामिल अल्बर्ट एक्का चौक के पास स्थित 35 दुकानों के किराया विवाद का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। पिछले 13 वर्षों से इन दुकानों का किराया किसी भी सरकारी एजेंसी ने नहीं लिया है। इस स्थिति से चिंतित दुकानदारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, रांची नगर निगम, उपायुक्त, सदर अस्पताल प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (RRDA) से जवाब तलब किया है।   2012 के बाद बंद हो गई किराया वसूली   याचिकाकर्ता रंजीत कुमार समेत 15 दुकानदारों ने कोर्ट में बताया कि इन 35 दुकानों का निर्माण RRDA ने कराया था, जबकि आवंटन रांची नगर निगम ने किया था। वर्ष 2012 तक नगर निगम नियमित रूप से किराया वसूलता रहा, लेकिन उसके बाद बिना किसी स्पष्ट आदेश के किराया लेना बंद कर दिया गया। तब से न नगर निगम और न ही सदर अस्पताल प्रशासन ने किराया वसूला।   अधिकार क्षेत्र के विवाद में फंसे दुकानदार   दुकानदारों की ओर से पेश अधिवक्ता अनुराग कश्यप ने कहा कि किराया जमा नहीं होने के लिए दुकानदार जिम्मेदार नहीं हैं। विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद के कारण किराया जमा नहीं हो सका। दुकानदार लगातार संबंधित विभागों से किराया लेने की मांग करते रहे, लेकिन किसी ने स्पष्ट जिम्मेदारी नहीं ली।   बेदखली की आशंका से कोर्ट पहुंचे व्यापारी   दुकानदारों का कहना है कि वर्षों से किराया जमा नहीं होने के कारण उन्हें डर है कि भविष्य में लंबित किराये का हवाला देकर दुकानें खाली कराने की कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि समय-समय पर नगर निगम की टीम नापी करने पहुंचती है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ जाती है।   सदर अस्पताल परिसर में बनी हैं दुकानें   दुकानदारों के अनुसार ये दुकानें सदर अस्पताल की बाउंड्री के भीतर स्थित हैं। पूर्व की सुनवाई में सदर अस्पताल प्रबंधन भी यह स्वीकार कर चुका है कि जमीन अस्पताल की है और दुकानों को अतिक्रमण नहीं माना जा सकता। दुकानों का निर्माण नियमानुसार हुआ था, जबकि अधूरा निर्माण दुकानदारों ने अपने खर्च पर पूरा कराया था।   हाईकोर्ट ने मांगा विस्तृत जवाब   हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत अब यह तय करेगी कि इन दुकानों का वास्तविक प्रबंधन किस एजेंसी के पास है और भविष्य में किराया वसूलने का अधिकार किस विभाग को होगा। इस फैसले से वर्षों से अनिश्चितता झेल रहे दुकानदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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जयराम महतो कोर्ट में सरेंडर
डुमरी विधायक जयराम महतो ने कोर्ट में किया सरेंडर, वेदांता स्टील प्लांट आंदोलन मामले में मिली जमानत

धनबाद। डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता जयराम महतो ने वेदांता स्टील प्लांट आंदोलन से जुड़े मामले में शुक्रवार को अदालत में सरेंडर किया। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। मामला 2023 में चास के वेदांता स्टील प्लांट के पास हुए आंदोलन से जुड़ा बताया जा रहा है।   वेदांता स्टील प्लांट आंदोलन से जुड़ा है मामला   जयराम महतो के खिलाफ यह मामला वेदांता स्टील प्लांट से जुड़े आंदोलन के दौरान दर्ज हुआ था। मामले में आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर आरोप लगाए गए थे। इसी मामले में अदालत की ओर से जारी प्रक्रिया के तहत विधायक ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया।   कोर्ट ने जयराम महतो को दी जमानत   अदालत में सरेंडर करने के बाद जयराम महतो की ओर से जमानत की मांग की गई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी। जमानत मिलने के बाद उनके समर्थकों में राहत देखी गई।   विधायक की राजनीतिक सक्रियता पर नजर   जयराम महतो झारखंड की राजनीति में प्रमुख युवा चेहरों में शामिल हैं और डुमरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उनके खिलाफ दर्ज मामलों और अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रियाओं पर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।   आगे भी अदालत में जारी रहेगी प्रक्रिया   जमानत मिलने के बावजूद मामले की कानूनी प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है। आगे की सुनवाई में मामले से जुड़े आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर अदालत में प्रक्रिया जारी रहेगी। जयराम महतो की ओर से भी मामले में अपना पक्ष रखा जाएगा।

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