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मंधाना टी-20 में 600 चौके लगाने वाली पहली बैटर, दीप्ति ने झूलन की बराबरी की

abhishek singh जून 18, 2026 0
Smriti Mandhana Deepti Sharma Record
Smriti Mandhana Deepti Sharma

लीड्स, एजेंसियां। भारत ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में नीदरलैंड को 95 रन से हरा दिया। लीड्स में स्मृति मंधाना ने 74 रन की पारी में कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। वे मेंस और विमेंस टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 600 चौके पूरे करने वाली पहली बल्लेबाज बनीं।


बुधवार को मंधाना ने मिताली राज और हरमनप्रीत कौर को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने टूर्नामेंट में भारत के लिए सबसे ज्यादा अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। दूसरी ओर दीप्ति शर्मा ने इंटरनेशनल क्रिकेट में झूलन गोस्वामी के सबसे ज्यादा विकेट के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Lionel Messi
फीफा वर्ल्ड कप में मेसी सिर्फ एक गोल दूर विश्व रिकॉर्ड बनाने से

नई दिल्ली, एजेंसियां। अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी फीफा वर्ल्ड कप के 96 साल के इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित करने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। मेसी अब विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनने से सिर्फ एक गोल दूर हैं। यदि वह अर्जेंटीना के अगले मुकाबले में गोल करने में सफल रहते हैं तो जर्मनी के दिग्गज मिरोस्लाव क्लोजे का रिकॉर्ड टूट जाएगा।   अर्जेंटीना ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए 16 जून को अल्जीरिया को 3-0 से हराया। इस मैच में टीम की जीत के सबसे बड़े नायक मेसी रहे, जिन्होंने हैट्रिक लगाकर तीनों गोल दागे। इस प्रदर्शन के साथ मेसी के विश्व कप में कुल 16 गोल हो गए और उन्होंने क्लोजे के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।   22 जून को रिकॉर्ड पर होगी सबकी नजर अब अर्जेंटीना का अगला मुकाबला 22 जून को ऑस्ट्रिया से होगा। इस मैच में यदि मेसी एक और गोल करते हैं तो वह फीफा वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे सफल गोल स्कोरर बन जाएंगे। फुटबॉल प्रेमियों की नजर अब इसी मुकाबले पर टिकी हुई है।   एम्बापे भी दौड़ में शामिल रिकॉर्ड की इस दौड़ में फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एम्बापे भी पीछे नहीं हैं। 27 वर्षीय एम्बापे अब तक विश्व कप में 14 गोल कर चुके हैं और वह भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के करीब पहुंच रहे हैं। वहीं ब्राजील के दिग्गज रोनाल्डो नाजारियो 15 गोल के साथ सूची में तीसरे स्थान पर हैं।   विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी   16 गोल – मिरोस्लाव क्लोजे (जर्मनी) 16 गोल – लियोनेल मेसी (अर्जेंटीना) 15 गोल – रोनाल्डो नाजारियो (ब्राजील) 14 गोल – किलियन एम्बापे (फ्रांस) यदि मेसी अगले मैच में गोल करते हैं, तो विश्व कप इतिहास का सबसे बड़ा व्यक्तिगत रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हो।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Smriti Mandhana Deepti Sharma Record

मंधाना टी-20 में 600 चौके लगाने वाली पहली बैटर, दीप्ति ने झूलन की बराबरी की

Ishan Kishan Shubhman Gill

पहली बार कोई टीम 400 रन बनाकर ऑलआउट

England batter Joe Root celebrates after reaching a milestone during a Test cricket match.

जो रूट के नाम अद्भुत रिकॉर्ड, विराट कोहली और रोहित शर्मा भी पीछे, सचिन तेंदुलकर का बड़ा रिकॉर्ड निशाने पर

Lionel Messi celebrates after scoring a hat-trick in Argentina's 3-0 win over Algeria at FIFA World Cup 2026.
ARG vs ALG Highlights: लियोनेल मेसी की हैट्रिक से अर्जेंटीना की धमाकेदार जीत, अल्जीरिया को 3-0 से हराया

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत की है। पहले मुकाबले में अर्जेंटीना ने अल्जीरिया को 3-0 से हराकर टूर्नामेंट में अपनी ताकत का जोरदार प्रदर्शन किया। इस जीत के सबसे बड़े नायक कप्तान लियोनेल मेसी रहे, जिन्होंने शानदार हैट्रिक लगाकर मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया। मेसी के शानदार प्रदर्शन ने न सिर्फ अर्जेंटीना को जीत दिलाई, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स भी उनके नाम दर्ज हो गए। 200वें अंतरराष्ट्रीय मैच में रचा इतिहास यह मुकाबला लियोनेल मेसी के करियर का 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच था। खास बात यह रही कि उन्होंने इस ऐतिहासिक मैच को अपने पहले विश्व कप हैट्रिक के साथ और भी यादगार बना दिया। 38 साल की उम्र के बाद भी मेसी की फिटनेस, ड्रिब्लिंग और गोल करने की क्षमता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अब भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल हैं। इसके साथ ही मेसी उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए जिन्होंने छह अलग-अलग फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है। वर्ल्ड कप में गोलों का नया कीर्तिमान इस मुकाबले से पहले फ्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे के नाम विश्व कप में 14 गोल दर्ज थे। वहीं मेसी के खाते में 13 गोल थे। अल्जीरिया के खिलाफ तीन गोल दागने के बाद मेसी के कुल विश्व कप गोलों की संख्या 16 पहुंच गई। इसके साथ ही उन्होंने जर्मनी के दिग्गज मिरोस्लाव क्लोस के 16 गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली और विश्व कप इतिहास में संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। 17वें मिनट में खोला खाता अर्जेंटीना ने शुरुआत से ही मैच पर अपना दबदबा बनाए रखा। खेल के 17वें मिनट में रोड्रिगो डी पॉल के शानदार पास पर मेसी ने बेहतरीन फिनिशिंग करते हुए पहला गोल दागा और टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। 60वें मिनट में किया दूसरा गोल दूसरे हाफ में भी मेसी का जादू जारी रहा। 60वें मिनट में निकोलस गोंजालेज के क्रॉस पर मैक एलिस्टर का शॉट गोलकीपर ने रोक दिया, लेकिन रिबाउंड पर मौजूद मेसी ने कोई गलती नहीं की और गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाकर अपना दूसरा गोल कर दिया। 76वें मिनट में पूरी की हैट्रिक खेल के 76वें मिनट में मेसी ने एक और शानदार मूव बनाया। उन्होंने बीच मैदान से गेंद को आगे बढ़ाया और निकोलस गोंजालेज के साथ बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाया, जो सीधे नेट के निचले कोने में जाकर लगा। इस गोल के साथ मेसी ने अपनी हैट्रिक पूरी की और अर्जेंटीना की 3-0 की शानदार जीत पर मुहर लगा दी। टूर्नामेंट में अर्जेंटीना ने दिए मजबूत इरादों के संकेत डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना की इस शानदार जीत ने बाकी टीमों को साफ संदेश दे दिया है कि टीम इस बार भी खिताब बचाने के इरादे से मैदान में उतरी है। वहीं लियोनेल मेसी का शानदार फॉर्म अर्जेंटीना के प्रशंसकों के लिए बड़ी खुशखबरी है।  

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Bilaspur Bulls players celebrating early after mistakenly thinking they had won the CCPL 2026 match.

क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा ब्लंडर! मैच खत्म होने से पहले ही जश्न मनाने मैदान में घुसे खिलाड़ी, वायरल हुआ वीडियो

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फीफा वर्ल्ड कप 2026: आंसुओं के बीच मेसी का ऐतिहासिक प्रदर्शन, अल्जीरिया को रौंदकर की क्लोजे के 'महारिकॉर्ड' की बराबरी

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भारत-अफगानिस्तान दूसरा वनडेः जीत के साथ सीरीज जीतने उतरेगी टीम इंडिया

cricket match controversy
कैच, विवाद और जीवनदान: अंपायर के उस 'नॉट आउट' फैसले की पूरी कहानी, जिसने अफगान टीम को कर दिया हैरान

ट्राई नेशन ए सीरीज के 'करो या मरो' मुकाबले में आईसीसी के 'क्लीन कैच' नियम ने वैभव सूर्यवंशी को पवेलियन लौटने से बचाया, लेकिन युवा बल्लेबाज के लिए खराब फॉर्म और विवादों का दबाव अब भी बरकरार है। क्रिकेट के मैदान पर कई बार एक फैसला मैच के साथ-साथ खिलाड़ियों की मनोदशा भी बदल देता है। बुधवार, 17 जून 2026 को भारत ए और अफगानिस्तान ए के बीच खेले गए अहम मुकाबले में कुछ ऐसा ही नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। ट्राई नेशन ए सीरीज के फाइनल की रेस में बने रहने के लिए भारत ए के लिए यह मुकाबला 'करो या मरो' का था। इस अत्यधिक दबाव वाले मैच की शुरुआत ही एक बड़े विवाद और भारी ड्रामे के साथ हुई, जिसके केंद्र में थे भारत के युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी।   पारी की 9वीं गेंद (दूसरे ओवर की तीसरी गेंद) पर वैभव ने पॉइंट की दिशा में एक तेज शॉट खेला। अफगान फील्डर ने फुर्ती दिखाते हुए डाइव लगाई और कैच पकड़ने का जबरदस्त दावा पेश किया। मैदान पर अफगानिस्तान ए के खिलाड़ियों का जश्न शुरू हो चुका था और प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा था कि भारतीय टीम ने अपना एक अहम विकेट सस्ते में गंवा दिया है। लेकिन आधुनिक क्रिकेट में तकनीक ही असली निर्णायक होती है।   जब यह मामला फाइनल चेक के लिए थर्ड अंपायर के पास पहुंचा, तो रिप्ले ने कहानी का दूसरा ही पहलू उजागर कर दिया। आईसीसी के नियमों के अनुसार, कैच तभी वैध माना जाता है जब गेंद पर फील्डर का पूर्ण नियंत्रण हो और वह किसी भी स्थिति में जमीन को न छुए। टीवी रिप्ले के अलग-अलग एंगल में स्पष्ट हुआ कि डाइव लगाते समय गेंद फील्डर के बाएं हाथ से फिसल रही थी। इसके बाद थर्ड अंपायर ने अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए कहा, "गेंद का कुछ हिस्सा जमीन को छू रहा है, मैंने अपना फैसला ले लिया है।" 'बेनिफिट ऑफ डाउट' बल्लेबाज के पक्ष में गया और वैभव को एक बड़ा जीवनदान मिला, जिससे अफगान खिलाड़ी पूरी तरह अवाक और निराश रह गए।   हालांकि, शून्य के करीब मिले इस बड़े मौके का वैभव सूर्यवंशी कोई खास फायदा नहीं उठा सके। वह अपनी पारी को ज्यादा लंबा नहीं खींच पाए और 4 चौकों व 2 छक्कों की मदद से 38 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।   यह घटनाक्रम सिर्फ एक कैच छूटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैभव सूर्यवंशी के मौजूदा करियर ग्राफ की भी गवाही दे रहा है। आईपीएल 2026 में सबसे ज्यादा रन बनाकर सुर्खियों में आए इस युवा बल्लेबाज का बल्ला इस ट्राई सीरीज में पूरी तरह खामोश रहा है। पिछले तीन मुकाबलों में उनके खाते में महज 79 रन आए हैं। श्रीलंका ए के खिलाफ दो मैचों में उन्होंने केवल 35 रन बनाए और एक सुपर ओवर में भी वह 27 रनों के लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम रहे थे।   महज 15 साल के वैभव के लिए यह समय दोहरी चुनौती का है। एक तरफ रनों का सूखा है, तो दूसरी तरफ हाल ही में श्रीलंकाई खिलाड़ियों के साथ हुई तीखी नोकझोंक के बाद उन पर सोशल मीडिया की पैनी नजरें हैं। अत्यधिक उम्मीदों और आलोचनाओं के बीच, अफगानिस्तान के खिलाफ मिला यह जीवनदान उनके लिए फॉर्म में लौटने का एक मौका था, जिसे वह भुना नहीं सके। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय टीम इस करो या मरो के दबाव से कैसे उबरती है और आने वाले मैचों में यह युवा प्रतिभा खुद को कैसे साबित करती है।

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