Electric Scooters

Electric vehicles charging at a public EV station in Delhi after the government approved its new EV policy with tax exemptions and purchase incentives.
दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना हुआ सस्ता, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ; नई EV पॉलिसी को मंजूरी

  नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति के तहत अब 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहन खरीदने पर खरीदारों को 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट मिलेगी। सरकार का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य राजधानी में वायु प्रदूषण कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है। वहीं, इस योजना के तहत हाइब्रिड वाहनों को किसी भी तरह का प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर मिलेगी सब्सिडी नई EV नीति के तहत इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक खरीदने वालों को चरणबद्ध तरीके से सब्सिडी मिलेगी। पहले वर्ष: 30,000 रुपये दूसरे वर्ष: 20,000 रुपये तीसरे वर्ष: 10,000 रुपये इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने पर भी मिलेगा लाभ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (ऑटो) खरीदने वालों के लिए भी सरकार ने विशेष प्रोत्साहन की घोषणा की है। पहले वर्ष: 50,000 रुपये दूसरे वर्ष: 40,000 रुपये तीसरे वर्ष: 30,000 रुपये कमर्शियल इलेक्ट्रिक ट्रक पर 1 लाख रुपये तक का फायदा माल ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले N1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक कमर्शियल ट्रक खरीदने वालों को सरकार की ओर से 1 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का होगा पंजीकरण नई नीति के अनुसार— 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा का नया पंजीकरण होगा। पेट्रोल और CNG दोपहिया वाहनों का पंजीकरण चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा। 1 अप्रैल 2028 से राजधानी में केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का ही नया रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। पुरानी गाड़ियों पर स्क्रैपिंग इंसेंटिव मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने के लिए सरकार स्क्रैपिंग प्रोत्साहन भी देगी। इसके तहत— पुरानी बाइक/स्कूटर: 10,000 रुपये पुराना ऑटो: 25,000 रुपये ग्रामीण सेवा वाहन: 15,000 रुपये छोटा ट्रक (N1): 50,000 रुपये पुरानी कार: 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि यह लाभ नई गाड़ी खरीदने पर मिलेगा। चार वर्षों में 15,000 करोड़ रुपये होंगे खर्च मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, सरकार अगले चार वर्षों में 15,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह राशि टैक्स छूट, सब्सिडी और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर खर्च की जाएगी। 2030 तक 30% स्कूल बसें होंगी इलेक्ट्रिक नई EV नीति का लक्ष्य मार्च 2030 तक दिल्ली की 30 प्रतिशत स्कूल बसों को इलेक्ट्रिक बनाना है। यह नीति 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी और राजधानी को शून्य-उत्सर्जन (Zero Emission) परिवहन प्रणाली की ओर ले जाने का लक्ष्य रखती है। वाहनों से होता है सबसे ज्यादा प्रदूषण सरकार के अनुसार, दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष सर्दियों के दौरान स्थानीय PM2.5 प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी 46 से 53 प्रतिशत के बीच रही थी। इसी वजह से सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर प्रदूषण में कमी लाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Popular electric scooters with low seat height designed for comfortable riding and easy handling in city traffic.
कम हाइट वाले लोगों के लिए बेस्ट हैं ये इलेक्ट्रिक स्कूटर्स, ट्रैफिक और पार्किंग में मिलेगी आसान राइड

Low Seat Height Electric Scooters: भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदते समय केवल रेंज, टॉप स्पीड और फीचर्स ही नहीं, बल्कि सीट हाइट भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर बन चुकी है। खासकर कम हाइट वाले राइडर्स के लिए ऐसा स्कूटर चुनना जरूरी होता है, जिसमें दोनों पैर आसानी से जमीन तक पहुंच सकें। इससे ट्रैफिक में बार-बार रुकने, यू-टर्न लेने और तंग पार्किंग स्पेस में स्कूटर संभालना काफी आसान हो जाता है। अगर आप भी कम सीट हाइट वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो ये मॉडल आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। Bajaj Chetak सीट हाइट: 760 mm बजाज चेतक भारत के सबसे कम सीट हाइट वाले मेनस्ट्रीम इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में शामिल है। इसकी 760 मिमी सीट हाइट कम कद वाले राइडर्स के लिए बेहद सुविधाजनक साबित होती है। ट्रैफिक में बार-बार रुकने और चलने के दौरान दोनों पैर आसानी से जमीन पर टिक जाते हैं। इसके अलावा स्कूटर में TFT डिस्प्ले, कनेक्टेड फीचर्स और वेरिएंट के अनुसार 120 किलोमीटर से अधिक की दावा की गई रेंज मिलती है। खास बातें 760 mm सीट हाइट 120 km+ रेंज TFT डिस्प्ले कनेक्टेड टेक्नोलॉजी TVS iQube सीट हाइट: 770 mm TVS iQube अपनी आरामदायक सीट और आसान राइडिंग पोजिशन के लिए जाना जाता है। इसकी 770 मिमी सीट हाइट लंबी और रोजमर्रा की यात्रा को सुविधाजनक बनाती है। कंपनी इसे अलग-अलग बैटरी विकल्पों के साथ पेश करती है और टॉप वेरिएंट में 140 किलोमीटर से अधिक की रेंज का दावा किया गया है। खास बातें 770 mm सीट हाइट 140 km+ रेंज आरामदायक राइडिंग पोजिशन शहर के ट्रैफिक के लिए उपयुक्त Ather Rizta सीट हाइट: 780 mm एथर रिज्टा को फैमिली और कम्फर्ट को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसकी लंबी और चौड़ी सीट लंबी दूरी की यात्रा को आरामदायक बनाती है। 780 मिमी सीट हाइट लगभग हर प्रकार के राइडर्स के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसमें बड़ा अंडर-सीट स्टोरेज, ट्रैक्शन कंट्रोल और स्मार्ट कनेक्टेड फीचर्स भी मिलते हैं। टॉप वेरिएंट में 159 किलोमीटर तक की IDC रेंज का दावा किया गया है। खास बातें 780 mm सीट हाइट 159 km तक की रेंज बड़ा स्टोरेज स्पेस ट्रैक्शन कंट्रोल और स्मार्ट फीचर्स Hero Vida V1 सीट हाइट: 780 mm हीरो Vida V1 भी 780 मिमी सीट हाइट के साथ आता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत रिमूवेबल बैटरी है, जिसे घर या ऑफिस में आसानी से चार्ज किया जा सकता है। यह उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जिनके पास पार्किंग में चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होती। स्कूटर में टचस्क्रीन डिस्प्ले, कई राइड मोड्स और बेहतर रेंज जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं। खास बातें 780 mm सीट हाइट रिमूवेबल बैटरी टचस्क्रीन डिस्प्ले मल्टीपल राइड मोड्स कौन सा स्कूटर है सबसे बेहतर? अगर आपकी प्राथमिकता सबसे कम सीट हाइट है, तो Bajaj Chetak सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं, अधिक रेंज और फैमिली कम्फर्ट चाहने वाले ग्राहकों के लिए Ather Rizta और TVS iQube बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। जिन लोगों के पास फिक्स्ड चार्जिंग की सुविधा नहीं है, उनके लिए Hero Vida V1 काफी उपयोगी रहेगा।  

surbhi जून 23, 2026 0
Popular electric cars and scooters for daily commuting displayed on Indian city roads
भारत में डेली कम्यूट के लिए बेस्ट EVs, कम खर्च और आसान पार्किंग के साथ मिलेंगे बड़े फायदे

भारत के बड़े शहरों में बढ़ता ट्रैफिक, महंगे पेट्रोल-डीजल और पार्किंग की परेशानी अब लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ तेजी से आकर्षित कर रही है। रोजाना ऑफिस, कॉलेज या लोकल ट्रैवल के लिए अब इलेक्ट्रिक कार, स्कूटर और ई-साइकिल किफायती और सुविधाजनक विकल्प बनते जा रहे हैं। अगर आप भी डेली कम्यूट के लिए नया EV खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो ये मॉडल्स आपके लिए अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं। शहरों के ट्रैफिक के लिए बेस्ट इलेक्ट्रिक कारें MG Comet EV कॉम्पैक्ट डिजाइन, आसान पार्किंग और कम रनिंग कॉस्ट की वजह से यह शहरों के लिए बेहद लोकप्रिय बन रही है। छोटे परिवार और सिटी ड्राइव के लिए इसे अच्छा विकल्प माना जाता है। Tata Tiago EV बेहतर सर्विस नेटवर्क और फैमिली यूज के लिए यह कार तेजी से पसंद की जा रही है। इसकी ड्राइविंग रेंज और प्रैक्टिकल डिजाइन इसे मजबूत विकल्प बनाते हैं। Vayve Eva यह माइक्रो EV अपने कॉम्पैक्ट साइज और संभावित सोलर चार्जिंग सपोर्ट की वजह से चर्चा में है। छोटी दूरी के लिए यह काफी किफायती साबित हो सकती है। डेली ट्रैवल के लिए लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटर्स Ola S1 Air बड़े बूट स्पेस, स्मार्ट फीचर्स और टेक्नोलॉजी आधारित इंटरफेस की वजह से युवा ग्राहकों के बीच इसकी मांग बढ़ रही है। Ather 450S प्रीमियम बिल्ड क्वालिटी और स्मूद राइड एक्सपीरियंस के लिए जाना जाता है। इसमें स्मार्ट कनेक्टिविटी फीचर्स भी मिलते हैं। TVS iQube आरामदायक राइड और भरोसेमंद सर्विस नेटवर्क इसे डेली कम्यूटर्स के बीच बेहद लोकप्रिय बनाता है। कम बजट वालों के लिए बाइक और ई-साइकिल विकल्प Revolt RV1 अगर आप बाइक जैसा एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो यह इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल अच्छा विकल्प हो सकती है। शहरों में इसकी हैंडलिंग आसान मानी जाती है। Hero Electric Optima कम बजट में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने वालों के लिए यह काफी लोकप्रिय विकल्प है। EMotorad Doodle Pro यह फोल्डेबल ई-साइकिल छोटे सफर और मेट्रो कनेक्टिविटी के लिए डिजाइन की गई है। इसकी चार्जिंग कॉस्ट बेहद कम है और इसे आसानी से स्टोर किया जा सकता है। नए कॉन्सेप्ट EV भी बढ़ा रहे विकल्प Strom R3 यह कॉम्पैक्ट थ्री-व्हील EV छोटे शहरों और सिंगल यूजर ट्रैवल के लिए अलग पहचान बना रहा है। इसकी रनिंग कॉस्ट काफी कम बताई जाती है। क्यों तेजी से बढ़ रही EV की डिमांड? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में EV अपनाने की रफ्तार और तेज होगी। सरकार की नई EV पॉलिसी, बढ़ता चार्जिंग नेटवर्क और महंगे ईंधन लोगों को इलेक्ट्रिक विकल्पों की तरफ आकर्षित कर रहे हैं। कम चार्जिंग खर्च, आसान पार्किंग और कम मेंटेनेंस कॉस्ट की वजह से छोटे और किफायती EV अब डेली कम्यूट का बड़ा हिस्सा बन सकते हैं।  

surbhi मई 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 26, 2026 0