ISRO में 462 पदों पर भर्ती का मौका, विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर ने अप्रेंटिस भर्ती की घोषणा की तिरुवनंतपुरम, एजेंसियां। अंतरिक्ष क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बड़ा अवसर दिया है। ISRO के प्रमुख केंद्र विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) ने 2026-27 अप्रेंटिस ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए 462 पदों पर भर्ती की घोषणा की है। चयन प्रक्रिया वॉक-इन के माध्यम से आयोजित की जाएगी। ग्रेजुएट और टेक्नीशियन अप्रेंटिस के पद शामिल इस भर्ती अभियान में ग्रेजुएट अप्रेंटिस और टेक्नीशियन अप्रेंटिस के पद शामिल हैं। इंजीनियरिंग, डिप्लोमा और संबंधित तकनीकी योग्यता रखने वाले उम्मीदवार इस अवसर के लिए आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को VSSC में एक साल की अप्रेंटिस ट्रेनिंग दी जाएगी। 25 जुलाई को होगा वॉक-इन चयन VSSC के अनुसार, अप्रेंटिस चयन के लिए 25 जुलाई 2026 को वॉक-इन प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। उम्मीदवारों को निर्धारित स्थान पर पहुंचकर दस्तावेज सत्यापन और चयन प्रक्रिया में शामिल होना होगा। कौन कर सकता है आवेदन इस भर्ती में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट, डिप्लोमा धारक और संबंधित ट्रेड के योग्य उम्मीदवार भाग ले सकते हैं। उम्मीदवारों के लिए National Apprenticeship Training Scheme (NATS) में रजिस्ट्रेशन जरूरी बताया गया है। स्पेस सेक्टर में अनुभव हासिल करने का मौका VSSC, ISRO का एक प्रमुख केंद्र है जो लॉन्च व्हीकल और अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े कार्यों पर काम करता है। अप्रेंटिसशिप के दौरान युवाओं को स्पेस टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। उम्मीदवारों को ये दस्तावेज साथ लाने होंगे वॉक-इन चयन में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पहचान पत्र, फोटो और जरूरत के अनुसार जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज साथ लाने होंगे। ISRO ने उम्मीदवारों को केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही भर्ती संबंधी जानकारी लेने की सलाह दी है।
रांची। एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम की घोषणा के साथ ही चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और हॉकी इंडिया की चयन समिति की सदस्य असुंता लकड़ा ने टीम चयन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चयन समिति की सदस्य होने के बावजूद उन्हें पूरी चयन प्रक्रिया से अलग रखा गया और उनकी राय नहीं ली गई। असुंता लकड़ा ने कहा असुंता लकड़ा ने कहा कि मार्च 2026 के बाद से चयन समिति की किसी भी ऑनलाइन या ऑफलाइन बैठक की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि एशियन गेम्स के लिए टीम घोषित होने की सूचना भी उन्हें आधिकारिक बैठक के बजाय मीडिया के माध्यम से मिली। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय की भावना का पालन नहीं किया गया, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि उन्होंने टीम में शामिल खिलाड़ियों के चयन पर कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने झारखंड की चार खिलाड़ियों सलीमा टेटे, निक्की प्रधान, ब्यूटी डुंगडुंग और संगीता कुमारी को टीम में जगह मिलने पर खुशी जाहिर की। उनका कहना है कि उनका विरोध खिलाड़ियों से नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया की कार्यशैली से है। पूर्व कप्तान ने यह भी आरोप लगाया पूर्व कप्तान ने यह भी आरोप लगाया कि महिला खिलाड़ियों के हित और उनके साथ होने वाले कथित अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार यदि चयन समिति के सदस्यों को ही फैसलों से दूर रखा जाएगा, तो पारदर्शी और निष्पक्ष चयन संभव नहीं हो सकेगा। वहीं, हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हॉकी इंडिया हमेशा असुंता लकड़ा का सम्मान करता रहा है और चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों तथा मानकों के अनुरूप पूरी की गई है। उनके मुताबिक लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। इस विवाद के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम के चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि टीम एशियन गेम्स की तैयारियों में जुट चुकी है, लेकिन चयन समिति की सदस्य द्वारा उठाए गए सवालों ने हॉकी प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर हॉकी इंडिया की आगे की कार्रवाई और इस मामले के संभावित समाधान पर टिकी है।
रांची के प्रतिष्ठित BIT Mesra से बीटेक (कंप्यूटर साइंस) करने वाले कुशाग्र सहाय को LinkedIn से करीब ₹1.4 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय जॉब ऑफर मिला है। हालांकि इस बड़ी उपलब्धि के बावजूद कुशाग्र का कहना है कि छात्रों को केवल बड़े पैकेज के पीछे नहीं भागना चाहिए। उनके अनुसार मजबूत तकनीकी नींव, लगातार सीखने की आदत और वास्तविक समस्याओं पर काम करने वाले प्रोजेक्ट ही लंबे समय में सफलता दिलाते हैं। पैकेज नहीं, सीखने की क्षमता सबसे बड़ी पूंजी कुशाग्र सहाय का कहना है कि ₹1.4 करोड़ का ऑफर उनकी मंजिल नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि छात्रों को सिर्फ सैलरी पर ध्यान देने के बजाय Computer Science की मजबूत समझ, Problem Solving Skills, Data Structures and Algorithms (DSA) और अच्छे प्रोजेक्ट्स पर फोकस करना चाहिए। यही चीजें भविष्य में बड़े अवसरों के दरवाजे खोलती हैं। BIT Mesra में मिली सही दिशा कॉलेज के शुरुआती दिनों में कुशाग्र ने उन सीनियर्स से सलाह ली, जो पहले से बड़ी टेक कंपनियों में काम कर रहे थे। लगभग सभी ने उन्हें एक जैसी सलाह दी— अच्छा CGPA बनाए रखें। DSA की नियमित प्रैक्टिस करें। Operating Systems, DBMS, Computer Networks और OOP जैसे Core Computer Science विषयों में मजबूत पकड़ बनाएं। केवल कॉलेज प्रोजेक्ट्स नहीं, बल्कि वास्तविक उपयोग वाले प्रोजेक्ट तैयार करें। उन्होंने पूरे कॉलेज जीवन में इसी रणनीति का पालन किया। ऐसे प्रोजेक्ट बनाए जिनका लोग वास्तव में इस्तेमाल करते हैं कुशाग्र ने केवल अकादमिक प्रोजेक्ट्स तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपनी हाउसिंग सोसाइटी के लिए Society Management Platform विकसित किया, जबकि BIT Mesra के कंप्यूटर साइंस विभाग के लिए Academic Management Platform भी तैयार किया। उनका कहना है कि LinkedIn इंटरव्यू के दौरान इंटरव्यूअर ने उनके प्रोजेक्ट्स के डिजाइन, डेटाबेस, बैकएंड आर्किटेक्चर और स्केलेबिलिटी पर विस्तार से सवाल पूछे। इससे उन्हें समझ आया कि रिज्यूमे में जो भी प्रोजेक्ट लिखा जाए, उसकी हर तकनीकी जानकारी उम्मीदवार को अच्छी तरह पता होनी चाहिए। Google से रिजेक्शन मिला, लेकिन हार नहीं मानी सफलता का यह सफर आसान नहीं था। कुशाग्र Google के Internship Interview के अंतिम चरण तक पहुंचे, लेकिन उन्हें चयन नहीं मिला। उन्होंने माना कि उस समय निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी। बाद में उन्होंने दूसरी इंटर्नशिप की, फिर LinkedIn में Internship हासिल की। इसी इंटर्नशिप के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें Pre-Placement Offer (PPO) मिला, जो आगे चलकर ₹1.4 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय पैकेज में बदला। LinkedIn इंटरव्यू में क्या पूछा गया? LinkedIn की भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में हुई, जिसमें शामिल थे— ऑनलाइन Coding Assessment Data Structures and Algorithms इंटरव्यू Managerial Interview Computer Science Fundamentals Projects और Behavioural Questions कुशाग्र के अनुसार सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा अपने प्रोजेक्ट्स के पीछे लिए गए तकनीकी फैसलों को विस्तार से समझाना था। इंजीनियरिंग छात्रों के लिए कुशाग्र की सलाह कुशाग्र का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय पैकेज की खबरें आकर्षक जरूर लगती हैं, लेकिन वास्तविक CTC और हाथ में मिलने वाली वार्षिक सैलरी में काफी अंतर होता है। उन्होंने छात्रों को ये सुझाव दिए— Programming Fundamentals मजबूत करें। DSA की नियमित प्रैक्टिस करें। Core Computer Science विषयों में गहराई से पढ़ाई करें। Real-world Projects बनाएं। AI का इस्तेमाल सीखने के लिए करें, सोचने की जगह नहीं। अच्छा CGPA बनाए रखें। सीनियर्स और प्रोफेसर्स से मार्गदर्शन लें। मेहनती और सीखने वाले साथियों के बीच रहें। Communication Skills पर भी काम करें। रिजेक्शन से घबराने के बजाय उससे सीखें। सफलता का असली मंत्र कुशाग्र सहाय का मानना है कि करियर की सफलता केवल बड़े पैकेज से नहीं मापी जानी चाहिए। उनका संदेश है कि यदि छात्र लगातार सीखते रहें, अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाते रहें और उत्कृष्टता को लक्ष्य बनाएं, तो बड़े अवसर अपने आप मिलते हैं।
ISRO ISTRAC Recruitment 2026: अगर आप भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में नौकरी करने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए शानदार मौका है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) के ISTRAC (ISRO Telemetry, Tracking and Command Network) ने ग्रुप 'A' और ग्रुप 'B' के कई पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 30 जून 2026 से शुरू होंगे, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। इस भर्ती अभियान के तहत टेक्निकल असिस्टेंट, साइंटिफिक असिस्टेंट, लाइब्रेरी असिस्टेंट, टेक्नीशियन, ड्राफ्ट्समैन और कुक जैसे पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। महत्वपूर्ण तारीखें इवेंट तारीख नोटिफिकेशन जारी 27 जून 2026 ऑनलाइन आवेदन शुरू 30 जून 2026 आवेदन की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 परीक्षा तिथि जल्द घोषित होगी किन पदों पर होगी भर्ती? इस भर्ती अभियान के तहत निम्नलिखित पदों पर आवेदन मांगे गए हैं: टेक्निकल असिस्टेंट साइंटिफिक असिस्टेंट लाइब्रेरी असिस्टेंट-ए टेक्नीशियन-बी ड्राफ्ट्समैन-बी कुक-ए शैक्षणिक योग्यता हर पद के लिए अलग-अलग योग्यता निर्धारित की गई है। टेक्नीशियन-बी: संबंधित ट्रेड में ITI प्रमाणपत्र। टेक्निकल असिस्टेंट: संबंधित विषय में इंजीनियरिंग डिप्लोमा। साइंटिफिक असिस्टेंट: संबंधित विषय में प्रथम श्रेणी के साथ B.Sc. लाइब्रेरी असिस्टेंट-ए: लाइब्रेरी साइंस में मास्टर डिग्री। कुक-ए: संबंधित कार्य का अनुभव आवश्यक। आयु सीमा उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 35 वर्ष (20 जुलाई 2026 तक) निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। आवेदन शुल्क टेक्निकल असिस्टेंट सभी उम्मीदवार: ₹750 UR/OBC/EWS उम्मीदवारों को CBT परीक्षा में शामिल होने पर ₹500 वापस किए जाएंगे। SC/ST/PwBD और महिला उम्मीदवारों को पूरी फीस रिफंड की जाएगी। टेक्नीशियन सभी उम्मीदवार: ₹500 UR/OBC/EWS उम्मीदवारों को CBT परीक्षा के बाद ₹400 वापस किए जाएंगे। SC/ST/PwBD और महिला उम्मीदवारों को पूरी फीस रिफंड मिलेगी। सैलरी पद पे लेवल शुरुआती वेतन टेक्निकल असिस्टेंट लेवल-7 ₹44,900 + भत्ते साइंटिफिक असिस्टेंट लेवल-7 ₹44,900 + भत्ते लाइब्रेरी असिस्टेंट-ए लेवल-7 ₹44,900 + भत्ते टेक्नीशियन-बी लेवल-3 ₹21,700 + भत्ते ड्राफ्ट्समैन-बी लेवल-3 ₹21,700 + भत्ते कुक-ए लेवल-2 ₹19,900 + भत्ते आवेदन कैसे करें? ISRO की आधिकारिक भर्ती वेबसाइट पर जाएं। ISTRAC Recruitment 2026 लिंक पर क्लिक करें। नया रजिस्ट्रेशन करें। आवेदन फॉर्म में सभी जरूरी जानकारी भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करें। फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।
नई दिल्ली: देश की प्रतिष्ठित रक्षा अनुसंधान संस्था Defence Research and Development Organisation (DRDO) में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए शानदार अवसर सामने आया है। DRDO के Defence Scientific Information and Documentation Centre ने विभिन्न ट्रेड में अप्रेंटिसशिप के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। चयनित अभ्यर्थियों को एक वर्ष की ट्रेनिंग के साथ आकर्षक मासिक स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। यह अवसर विशेष रूप से उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है जिन्होंने हाल ही में अपनी डिग्री या डिप्लोमा पूरा किया है और रक्षा अनुसंधान क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करना चाहते हैं। किन पदों पर होगी भर्ती? DESIDOC द्वारा कुल 20 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती की जाएगी। पद रिक्तियां लाइब्रेरी एवं इंफॉर्मेशन साइंस 16 कंप्यूटर साइंस 02 फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी 02 कुल 20 कौन कर सकता है आवेदन? लाइब्रेरी एवं इंफॉर्मेशन साइंस किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस में 1 वर्षीय डिग्री कंप्यूटर साइंस कंप्यूटर साइंस में बीई/बीटेक या कंप्यूटर साइंस में 3 वर्षीय डिप्लोमा फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी में ITI प्रमाणपत्र या संबंधित क्षेत्र में 3 वर्षीय डिप्लोमा महत्वपूर्ण पात्रता शर्त केवल वे उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने: वर्ष 2024 या 2025 में अपनी डिग्री/डिप्लोमा पूरा किया हो। 2024 से पहले पास आउट उम्मीदवार आवेदन के पात्र नहीं हैं। पोस्टग्रेजुएट अभ्यर्थी भी इस अप्रेंटिसशिप के लिए योग्य नहीं हैं। आयु सीमा अधिकतम आयु: 28 वर्ष SC/ST उम्मीदवारों को 5 वर्ष की छूट OBC उम्मीदवारों को 3 वर्ष की छूट अनुभव की आवश्यकता नहीं इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी प्रकार के कार्य अनुभव की आवश्यकता नहीं है। फ्रेशर्स सीधे आवेदन कर सकते हैं और DRDO विशेषज्ञों से प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। कितना मिलेगा स्टाइपेंड? योग्यता मासिक स्टाइपेंड ग्रेजुएट/बीई उम्मीदवार ₹12,300 डिप्लोमा/आईटीआई उम्मीदवार ₹10,900 चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन निम्न चरणों के आधार पर किया जाएगा: शैक्षणिक अंकों के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग लिखित परीक्षा या इंटरव्यू अंतिम मेरिट सूची आवेदन की अंतिम तिथि 1 जुलाई 2026 इच्छुक उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन भेजना होगा। आवेदन कैसे करें? इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन रखी गई है। आवेदन की प्रक्रिया DRDO की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन फॉर्म डाउनलोड करें। NATS रजिस्ट्रेशन नंबर भरना अनिवार्य है। सभी शैक्षणिक और व्यक्तिगत जानकारी भरें। आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें। लिफाफे पर संबंधित पद का नाम लिखें। आवेदन निम्न पते पर भेजें:
देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक IIT BHU ने एक बार फिर अपने शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड से सुर्खियां बटोरी हैं। 2025-26 के प्लेसमेंट सीजन की शुरुआत ही इतनी दमदार रही कि पहले ही दिन 17 छात्रों को 1 करोड़ रुपये से अधिक के पैकेज ऑफर किए गए। यह उपलब्धि न सिर्फ संस्थान के लिए बल्कि पूरे देश के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है। प्लेसमेंट में रिकॉर्डतोड़ शुरुआत इस साल के प्लेसमेंट ड्राइव में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। Amazon, Adobe, Oracle, Deloitte, Flipkart, DRDO और TCS जैसी दिग्गज कंपनियों ने छात्रों को आकर्षक ऑफर दिए। संस्थान के अनुसार, इस सत्र में अब तक का सबसे बड़ा पैकेज 1.67 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो IIT BHU की मजबूत इंडस्ट्री कनेक्टिविटी और अकादमिक गुणवत्ता को दर्शाता है। क्यों खास है IIT BHU Banaras Hindu University का हिस्सा रहा IIT BHU देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में गिना जाता है। बेहतरीन फैकल्टी, रिसर्च सुविधाएं और कैंपस लाइफ इसे छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती हैं। NIRF रैंकिंग 2025 में इंजीनियरिंग कैटेगरी में IIT BHU को 10वां स्थान मिला है, जो इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण है। एडमिशन प्रोसेस और कोर्स IIT BHU में विभिन्न कोर्सेस के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं होती हैं: BTech: JEE Advanced BArch: JEE Advanced + AAT MTech: GATE MSc: IIT JAM MBA: CAT PhD: GATE / NET / JRF योग्यता और कटऑफ BTech में एडमिशन के लिए छात्रों को 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के साथ कम से कम 75% अंक लाना जरूरी होता है। साथ ही JEE Advanced क्वालिफाई करना अनिवार्य है। कुछ प्रमुख ब्रांच की कटऑफ (जनरल कैटेगरी) इस प्रकार रही: CSE: 1350 ECE: 2500 Electrical: 3493 Mechanical: 6525 Chemical: 7435 Civil: 9145 Mining: 12572 क्या है इस सफलता का मतलब IIT BHU का यह प्रदर्शन बताता है कि भारत में तकनीकी शिक्षा का स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है। ग्लोबल कंपनियों का भरोसा बढ़ रहा है और भारतीय इंजीनियरिंग टैलेंट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।