England Cricket

Stephen Fleming
इंग्लैंड टेस्ट टीम के मुख्य कोच बनने की दौड़ में स्टीफन फ्लेमिंग सबसे आगे

लंदन, एजेंसियां। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के टेस्ट टीम के नए मुख्य कोच की तलाश अंतिम चरण में पहुंच गई है। पूर्व न्यूजीलैंड कप्तान और चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इंटरव्यू प्रक्रिया में फ्लेमिंग ने ECB अधिकारियों को प्रभावित किया है और वह नियुक्ति की दौड़ में सबसे आगे हैं।   ब्रेंडन मैकुलम की जगह संभाल सकते हैं जिम्मेदारी   रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड ने टेस्ट और व्हाइट-बॉल क्रिकेट के लिए अलग-अलग कोचिंग संरचना अपनाने का फैसला किया है। ऐसे में ब्रेंडन मैकुलम व्हाइट-बॉल टीम के साथ बने रहेंगे, जबकि टेस्ट टीम की जिम्मेदारी फ्लेमिंग को सौंपी जा सकती है। हालांकि, ECB ने अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है और अंतिम अनुबंध प्रक्रिया जारी है।   फ्लेमिंग का शानदार कोचिंग रिकॉर्ड   53 वर्षीय स्टीफन फ्लेमिंग दुनिया के सबसे सफल फ्रेंचाइज़ी कोचों में गिने जाते हैं। उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) को कई आईपीएल खिताब दिलाए हैं और उनकी रणनीतिक सोच की क्रिकेट जगत में काफी सराहना होती है। अंतरराष्ट्रीय टीम को कोचिंग देने का यह उनका पहला बड़ा मौका हो सकता है।   जल्द हो सकता है आधिकारिक ऐलान   यदि अनुबंध प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होती है, तो पाकिस्तान के खिलाफ अगस्त में होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए मार्कस ट्रेस्कोथिक अंतरिम कोच की भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, ECB को उम्मीद है कि फ्लेमिंग दक्षिण अफ्रीका दौरे से पहले टीम की कमान संभाल लेंगे।

anjali kumari जुलाई 30, 2026 0
England club cricket controversy erupts over alleged finger clicking used to influence an umpire's decision
England Club Cricket Scandal: चुटकी बजाकर अंपायर को गुमराह करने का आरोप, ‘क्लिकगेट’ विवाद ने मचाया बवाल

England Club Cricket Controversy: इंग्लैंड के स्थानीय क्लब क्रिकेट में एक ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने खेल की निष्पक्षता और स्पिरिट ऑफ क्रिकेट पर बहस छेड़ दी है। नॉर्थ यॉर्कशायर एंड साउथ डरहम क्रिकेट लीग डिवीजन-2 के एक मुकाबले में आरोप है कि फील्डर ने उंगली चटकाकर ऐसी आवाज पैदा की, जिससे अंपायर को लगा कि गेंद बल्ले से लगी है और बल्लेबाज को आउट दे दिया गया। सोशल मीडिया पर सामने आए इस मामले को कुछ लोग ‘क्लिकगेट’ और ‘क्लिकी पोंटिंग’ जैसे नाम दे रहे हैं। मामला साल्टबर्न क्रिकेट क्लब सेकेंड XI और नॉर्टन क्रिकेट क्लब के बीच खेले गए मुकाबले से जुड़ा है। हालांकि, घटना को लेकर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच अभी जारी है। आखिर क्या हुआ था? विवाद नॉर्टन के बल्लेबाज नोमन शबीर के विकेट को लेकर है। गेंदबाज की गेंद बल्लेबाज के बल्ले के बेहद करीब से गुजरी, लेकिन बल्लेबाज का दावा था कि गेंद बल्ले से नहीं लगी। इसी दौरान स्लिप में खड़े एक फील्डर की ओर से उंगली चटकाने जैसी आवाज सुनाई दी। गेंद विकेटकीपर के दस्तानों में पहुंचते ही फील्डिंग टीम ने जोरदार अपील की। आवाज सुनकर अंपायर को ऐसा लगा कि गेंद बल्ले का किनारा लेकर निकली है और उन्होंने बल्लेबाज को आउट करार दे दिया। शबीर ने फैसले का विरोध करते हुए संकेत दिया कि गेंद बल्ले से नहीं लगी थी। उन्होंने स्लिप में मौजूद फील्डर की ओर भी इशारा किया, लेकिन अंपायर ने अपना फैसला नहीं बदला। DRS नहीं होने से बढ़ा विवाद स्थानीय क्लब क्रिकेट में इस मुकाबले के दौरान DRS या रिव्यू सिस्टम उपलब्ध नहीं था। ऐसे में अंपायर के फैसले को चुनौती देने का कोई तकनीकी विकल्प नहीं था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद बहस तेज हो गई। कुछ लोगों का आरोप है कि फील्डर ने जानबूझकर उंगली चटकाकर अंपायर को भ्रमित करने की कोशिश की। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि जानबूझकर धोखा देने का आरोप अभी जांच का विषय है और इसे आधिकारिक रूप से साबित नहीं किया गया है। पहले भी सामने आए ऐसे दावे विवाद बढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर कथित तौर पर इसी तरह की अन्य घटनाओं के वीडियो भी सामने आए हैं। मिडिल्सब्रा सेकेंड XI के कप्तान रोरी कॉटरिल ने दावा किया कि सीजन की शुरुआत में साल्टबर्न के खिलाफ उनकी टीम के मैच में भी उंगली चटकाने जैसी दो घटनाएं हुई थीं। उन्होंने कथित घटना का वीडियो भी साझा किया। वॉल्विसटन एफसी के खिलाफ एक अन्य मुकाबले का वीडियो भी ऑनलाइन सामने आया है, जिसमें इसी तरह की स्थिति में एक बल्लेबाज के आउट होने का दावा किया जा रहा है। इन दावों के सामने आने के बाद मामला सिर्फ एक मैच तक सीमित नहीं रह गया और स्थानीय क्रिकेट में खेल भावना तथा निष्पक्ष अंपायरिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई। लीग ने शुरू की जांच विवाद सामने आने के बाद नॉर्थ यॉर्कशायर एंड साउथ डरहम क्रिकेट लीग ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। लीग के मुताबिक डिवीजन-2 के मैच में कथित घटनाओं को लेकर औपचारिक शिकायत मिली है और मामले की पूरी जांच शुरू कर दी गई है। लीग ने यह भी स्पष्ट किया कि औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने तक मामले पर अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की जाएगी। अब जांच पर टिकी नजर इस विवाद का सबसे अहम सवाल यही है कि क्या उंगली चटकाने की आवाज वास्तव में जानबूझकर अंपायर को प्रभावित करने के लिए पैदा की गई थी या यह महज संयोग था। इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल ‘क्लिकगेट’ विवाद ने क्लब क्रिकेट में खेल भावना, अंपायर के निर्णय और तकनीकी सहायता की अनुपस्थिति को लेकर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।  

surbhi जुलाई 29, 2026 0
Brendon McCullum
'अभी नहीं रुकेंगे...' भारत पर 4-0 की जीत के बाद ब्रेंडन मैकुलम का बड़ा बयान, नंबर-1 बनने के बाद भी टीम को दी नई चुनौती

साउथैम्पटन, एजेंसियां। भारत के खिलाफ टी20 सीरीज में 4-0 की शानदार जीत और आईसीसी टी20 रैंकिंग में नंबर-1 बनने के बाद इंग्लैंड के मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि टीम के सफर का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। मैकुलम ने साफ किया कि इंग्लैंड की टीम यहीं रुकने वाली नहीं है और आने वाले समय में भी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम बने रहने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेगी।   'यह सिर्फ शुरुआत है'   मैच के बाद मैकुलम ने कहा कि हाल के दिनों में इंग्लैंड क्रिकेट को लेकर काफी आलोचना और शोर रहा, लेकिन खिलाड़ियों ने उस दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, "हमने दुनिया की नंबर-1 टीम भारत को 4-0 से हराया और शीर्ष रैंकिंग हासिल की है, लेकिन हमारा सफर यहीं खत्म नहीं होता। हम अभी नहीं रुकेंगे।"   खिलाड़ियों की जमकर की तारीफ   मैकुलम ने कप्तान हैरी ब्रूक और जोस बटलर की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने आक्रामक और निडर क्रिकेट खेली। खासकर अंतिम टी20 में बटलर और ब्रूक की रिकॉर्ड साझेदारी ने दिखा दिया कि यह टीम किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।   अब वनडे सीरीज पर नजर   इंग्लैंड के कोच ने कहा कि टी20 सीरीज की सफलता को पीछे छोड़कर अब टीम का पूरा ध्यान भारत के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज पर रहेगा। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि जीत के बाद संतुष्ट होने की बजाय प्रदर्शन का स्तर लगातार ऊंचा रखना होगा, क्योंकि असली चुनौती शीर्ष पर बने रहने की है।

abhishek singh जुलाई 12, 2026 0
England players celebrate after bowling out India for 76 in the third T20I at Trent Bridge.
IND vs ENG: 76 रन पर ढेर हुई टीम इंडिया, इंग्लैंड ने 125 रन से रौंदा; सीरीज पर किया कब्जा

भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा। ट्रेंट ब्रिज में खेले गए मैच में 202 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया केवल 76 रन पर सिमट गई। इंग्लैंड ने यह मुकाबला 125 रन से जीतकर पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। यह भारत के टी20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास की सबसे बड़ी हार (रनों के अंतर से) मानी जा रही है। साथ ही 76 रन टीम इंडिया का टी20 इंटरनेशनल में दूसरा सबसे कम स्कोर भी है। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने बनाए 201 रन टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 20 ओवर में 201/7 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। ओपनर फिल सॉल्ट ने 44 गेंदों में 70 रन की शानदार पारी खेली, जबकि सैम करन ने नाबाद 41 रन बनाकर टीम को 200 के पार पहुंचाया। भारत की ओर से प्रिंस यादव ने शुरुआती झटके देकर मैच में वापसी की कोशिश की, जबकि हर्षित राणा ने लगातार दो विकेट लेकर इंग्लैंड पर दबाव बनाया। हालांकि अंतिम ओवरों में इंग्लैंड ने तेजी से रन जोड़ते हुए बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया। 202 रन के जवाब में 76 पर सिमटी टीम इंडिया लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। पावरप्ले में ही टीम ने पांच विकेट गंवा दिए और मैच पूरी तरह इंग्लैंड के पक्ष में चला गया। डेब्यू कर रहे वैभव सूर्यवंशी ने दो शानदार छक्कों के साथ कुछ उम्मीद जगाई, लेकिन उनकी पारी 13 रन पर समाप्त हो गई। इसके बाद कोई भी बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं कर सका और पूरी टीम सिर्फ 11.4 ओवर में 76 रन पर ऑलआउट हो गई। आर्चर और टंग ने मचाई तबाही इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। जोफ्रा आर्चर – 3 विकेट जॉश टंग – 4 विकेट दोनों गेंदबाजों की तेज और सटीक गेंदबाजी के सामने भारतीय बल्लेबाज पूरी तरह असहाय नजर आए। सीरीज जीतने के करीब पहुंचा इंग्लैंड पहला मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो गया था। इसके बाद इंग्लैंड ने लगातार दो मैच जीतकर सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है। अब शेष दो मुकाबलों में जीत मिलने पर भी भारत सीरीज अपने नाम नहीं कर सकता। भारतीय टीम के लिए यह हार बल्लेबाजी और रणनीति दोनों मोर्चों पर कई सवाल खड़े करती है। अब टीम अगले मुकाबलों में सम्मान बचाने के इरादे से मैदान पर उतरेगी।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
England playing XI
भारत के खिलाफ पहले टी20 के लिए इंग्लैंड की प्लेइंग XI घोषित, आर्चर और जोश टंग को आराम

डरहम, एजेंसियां। भारत के खिलाफ टी20 सीरीज के पहले मैच के लिए इंग्लैंड ने अपनी प्लेइंग XI का ऐलान कर दिया है। भारतीय समय के अनुसार बुधवार रात 10 बजे डरहम के चेस्टर-ले-स्ट्रीट में खेले जाने वाले इस मैच में इंग्लैंड की प्लेइंग-11 में दो बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।    कप्तान हैरी ब्रूक ने क्या कहा? इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने सीरीज के पहले मैच से पहले कहा कि इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करना ही उनकी एकमात्र प्राथमिकता है। ब्रूक ने कहा, 'मैंने पूरी तरह से इंग्लैंड क्रिकेट के प्रति खुद को समर्पित कर दिया है। मैंने कहा है कि मैं 'द हंड्रेड' के अलावा कोई भी फ्रेंचाइजी क्रिकेट नहीं खेलना चाहता। मैं जो कुछ भी करता हूं, वह इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलने के मकसद से करता हूं। मैदान के अंदर और बाहर मैं जो कुछ भी करता हूं, उसका मकसद इंग्लैंड के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है। इसीलिए मैं IPL, PSL या किसी अन्य लीग प्रतियोगिता में नहीं खेलता।'   ब्रूक ने आगे कहा कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट न खेलने का मतलब है कि मेरे कैलेंडर में ऐसे समय होते हैं जब मैं कोई मैच नहीं खेल रहा होता. मैं अपनी फिटनेस पर ध्यान देता हूं और तीनों फॉर्मेट में खेलने के लिए तैयार होता हूं, जो बचपन से ही मेरा सपना रहा है। ब्रूक ने टेस्ट कप्तानी को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर कहा कि चाहे मैं टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड का कप्तान बनूं या न बनूं, मुझे बस इंग्लैंड के लिए खेलते रहने में ही खुशी मिलेगी।

anjali kumari जुलाई 1, 2026 0
Daryl Mitchell celebrates his unbeaten century during the third Test against England at Trent Bridge.
डेरिल मिचेल का दमदार शतक, न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को जीत के लिए दिया 373 रन का लक्ष्य

नई दिल्ली: ट्रेंट ब्रिज में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट में डेरिल मिचेल ने शानदार नाबाद शतकीय पारी खेलकर न्यूजीलैंड को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। उनके बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत न्यूजीलैंड ने अपनी दूसरी पारी 228/9 पर घोषित करते हुए इंग्लैंड के सामने 373 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। मिचेल ने दबाव भरे मुकाबले में 241 गेंदों का सामना करते हुए 100 रन* बनाए। उनकी पारी में 10 चौके और 1 छक्का शामिल रहा। मुश्किल हालात में संभाली पारी न्यूजीलैंड ने चौथे दिन की शुरुआत 120/3 के स्कोर से की। इससे पहले तीसरे दिन जोफ्रा आर्चर की तेज गेंदबाजी के सामने कीवी टीम 54/3 के स्कोर पर संघर्ष कर रही थी। इसके बाद रचिन रविंद्र और डेरिल मिचेल ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों ने तीसरे दिन नाबाद साझेदारी की और चौथे दिन भी टीम को मजबूत स्थिति तक पहुंचाया। रविंद्र के आउट होने के बाद मिचेल ने एक छोर संभाले रखा और इंग्लैंड के गेंदबाजों को लंबे समय तक सफलता नहीं मिलने दी। इंग्लैंड की वापसी की कोशिश नाकाम बेन स्टोक्स की कप्तानी वाली इंग्लैंड टीम ने बीच-बीच में विकेट जरूर निकाले, लेकिन मिचेल को आउट नहीं कर सकी। उनकी धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी ने न्यूजीलैंड को बड़ा लक्ष्य खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई। शानदार वापसी का इनाम सीरीज के पहले टेस्ट में डेरिल मिचेल का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था, जहां उन्होंने 12 और 0 रन बनाए थे। हालांकि, दूसरे टेस्ट में उन्होंने 44 और 68 रन की उपयोगी पारियां खेलीं। अब तीसरे टेस्ट में नाबाद शतक लगाकर उन्होंने शानदार अंदाज में फॉर्म में वापसी की है। टेस्ट करियर का छठा शतक इस शतकीय पारी के साथ 33 वर्षीय डेरिल मिचेल ने अपने टेस्ट करियर का छठा शतक पूरा किया। उनके टेस्ट करियर के प्रमुख आंकड़े: 39 टेस्ट मैच 62 पारियां 2411 रन औसत: 43.05 6 शतक 16 अर्धशतक इंग्लैंड के खिलाफ उनका रिकॉर्ड भी शानदार रहा है। उन्होंने इंग्लैंड के विरुद्ध 13 टेस्ट मैचों में 56.71 की औसत से 1191 रन बनाए हैं, जिसमें 4 शतक और 8 अर्धशतक शामिल हैं। अब इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 373 रन का कठिन लक्ष्य है, जबकि न्यूजीलैंड जीत के बेहद करीब दिखाई दे रहा है।  

surbhi जून 29, 2026 0
England batter Joe Root celebrates after reaching a milestone during a Test cricket match.
जो रूट के नाम अद्भुत रिकॉर्ड, विराट कोहली और रोहित शर्मा भी पीछे, सचिन तेंदुलकर का बड़ा रिकॉर्ड निशाने पर

इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जो रूट टेस्ट क्रिकेट में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। फैब-4 का हिस्सा रहे रूट अब बल्लेबाजी के साथ-साथ अपने ऑलराउंड प्रदर्शन की बदौलत कई दिग्गज खिलाड़ियों से आगे निकलते दिखाई दे रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनके आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि वह मौजूदा दौर के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में से एक हैं। बल्ले और गेंद दोनों से कमाल करीब 14 साल लंबे टेस्ट करियर में जो रूट ने 164 मैचों की 300 पारियों में 13,952 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने 41 शतक और 66 अर्धशतक लगाए हैं। हालांकि, उनकी खासियत सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है। ऑफ स्पिन गेंदबाजी के जरिए रूट अब तक 74 विकेट भी अपने नाम कर चुके हैं। यही आंकड़ा उन्हें कई बड़े बल्लेबाजों से अलग बनाता है। जो रूट: 13,952 रन और 74 विकेट सचिन तेंदुलकर: 15,921 रन और 46 विकेट विराट कोहली: टेस्ट में कोई विकेट नहीं शुभमन गिल: टेस्ट में कोई विकेट नहीं रोहित शर्मा: सीमित विकेट, लेकिन रूट से काफी पीछे बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में योगदान देने के कारण रूट का यह रिकॉर्ड बेहद खास माना जा रहा है। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड निशाने पर टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम है। सचिन ने 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन बनाए थे। वहीं, जो रूट फिलहाल 13,952 रन तक पहुंच चुके हैं और उन्हें सचिन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने के लिए 1,969 रनों की जरूरत है। 35 वर्षीय रूट शानदार फॉर्म में हैं और क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वह अगले कुछ वर्षों तक इसी लय में खेलते रहे तो सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को चुनौती दे सकते हैं। फैब-4 में सबसे आगे निकले रूट एक समय विराट कोहली, स्टीव स्मिथ, केन विलियमसन और जो रूट को फैब-4 का हिस्सा माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में रूट ने लगातार रन बनाकर टेस्ट क्रिकेट में खुद को सबसे आगे स्थापित किया है। उनकी निरंतरता और लंबी पारियां खेलने की क्षमता ने उन्हें आधुनिक दौर के महान बल्लेबाजों की सूची में शामिल कर दिया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ संभाल सकते हैं बड़ी जिम्मेदारी 17 जून से इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच दूसरा टेस्ट मुकाबला खेला जाना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नियमित कप्तान बेन स्टोक्स की अनुपस्थिति में जो रूट को टीम की कमान सौंपी जा सकती है। रूट इससे पहले इंग्लैंड के लिए 64 टेस्ट मैचों में कप्तानी कर चुके हैं, जिनमें टीम को 27 मुकाबलों में जीत मिली थी। अगर रूट आने वाले मुकाबलों में अपनी मौजूदा फॉर्म बरकरार रखते हैं, तो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक और बड़ा रिकॉर्ड उनके नाम हो सकता है।  

surbhi जून 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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