नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में जुलाई 2026 निवेशकों के लिए बेहद व्यस्त और रोमांचक रहने वाला है। लंबे समय बाद प्राइमरी मार्केट में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। अगले महीने 12 से अधिक कंपनियां अपना आईपीओ (IPO) लॉन्च करने की तैयारी में हैं और इनका कुल लक्ष्य करीब ₹45,000 करोड़ जुटाने का है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं में कमी और घरेलू निवेशकों के बढ़ते भरोसे ने कंपनियों को अब पूंजी जुटाने के लिए अनुकूल माहौल दिया है। SBI फंड्स मैनेजमेंट का हो सकता है सबसे बड़ा IPO जुलाई में आने वाले संभावित आईपीओ में सबसे ज्यादा चर्चा SBI Funds Management की है। कंपनी का आईपीओ करीब ₹12,000 से ₹13,000 करोड़ का हो सकता है, जो अगले महीने का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बनने की संभावना रखता है। यह इश्यू निवेशकों के लिए खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि SBI समूह की कंपनियों में निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत रहा है। Manipal Health और Zepto भी तैयार हेल्थकेयर सेक्टर की प्रमुख कंपनी Manipal Health Enterprises भी बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। कंपनी का आईपीओ लगभग ₹11,000 करोड़ का हो सकता है। वहीं क्विक-कॉमर्स क्षेत्र की चर्चित कंपनी Zepto करीब ₹8,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इन तीन कंपनियों के आईपीओ से ही लगभग ₹32,000 करोड़ जुटने का अनुमान है। जुलाई की IPO पाइपलाइन में कौन-कौन? जुलाई में जिन अन्य कंपनियों के बाजार में आने की संभावना है, उनमें शामिल हैं— Gaja Capital NAC Packaging Innovative View इसके अलावा भी कई मध्यम और बड़े आकार की कंपनियां बाजार में दस्तक देने की तैयारी कर रही हैं। क्यों लौट रही है IPO बाजार में तेजी? विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां थीं, जिनमें भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की सतर्कता शामिल थी। इसी वजह से आईपीओ बाजार की रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि अब परिस्थितियां बेहतर होती दिख रही हैं— सेंसेक्स और निफ्टी में स्थिरता घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी वैश्विक तनाव में कमी कॉर्पोरेट सेक्टर का बढ़ता आत्मविश्वास इन कारणों से कंपनियां फिर से पूंजी बाजार की ओर रुख कर रही हैं। मई में नहीं आया था एक भी IPO दिलचस्प बात यह है कि इस वर्ष अप्रैल तक 18 आईपीओ बाजार में आए थे, लेकिन मई में एक भी नया आईपीओ लॉन्च नहीं हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और बाजार की स्थिति सुधरने के बाद अब कंपनियां अपने लिस्टिंग प्लान को आगे बढ़ा रही हैं। निवेशक क्या देख रहे हैं? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अब निवेशक केवल चर्चित ब्रांड्स पर नहीं बल्कि मजबूत बिजनेस मॉडल, मुनाफे की संभावना और दीर्घकालिक विकास क्षमता वाली कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भी IPO बाजार को मजबूती दे रही है। SEBI के पास बड़ी पाइपलाइन तैयार 19 जून तक करीब 173 कंपनियों को Securities and Exchange Board of India से आईपीओ के जरिए लगभग ₹2.7 लाख करोड़ जुटाने की मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा 64 अन्य कंपनियां अभी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। इनमें संभावित रूप से शामिल हैं— National Stock Exchange of India का लगभग ₹30,000 करोड़ का आईपीओ Jio Platforms का बहुप्रतीक्षित आईपीओ यदि ये इश्यू भी बाजार में आते हैं, तो भारतीय IPO बाजार नए रिकॉर्ड बना सकता है।
घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली। एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार दबाव में रहे और इसका सबसे बड़ा असर आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि देश की दिग्गज आईटी कंपनियां टीसीएस और इन्फोसिस अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गईं। इस तेज गिरावट से निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹1.35 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई। टीसीएस और इन्फोसिस को सबसे बड़ा झटका देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का शेयर करीब 7 प्रतिशत टूटकर ₹2,060.50 तक पहुंच गया, जो इसका 52 सप्ताह का निचला स्तर है। वहीं इन्फोसिस का शेयर लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,030.35 पर पहुंच गया। इस गिरावट से कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन में करीब ₹40,000 करोड़ की कमी आई और उसका कुल मार्केट कैप घटकर लगभग ₹3.63 लाख करोड़ रह गया। अन्य आईटी कंपनियों में भी बिकवाली केवल टीसीएस और इन्फोसिस ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में भी भारी दबाव देखने को मिला। विप्रो के शेयर में 4 प्रतिशत से अधिक गिरावट एचसीएल टेक में 5 प्रतिशत से ज्यादा कमजोरी टेक महिंद्रा में भी 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आखिर क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? इस बिकवाली की मुख्य वजह ग्लोबल आईटी दिग्गज Accenture का कमजोर आउटलुक माना जा रहा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान की ऊपरी सीमा को 5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया है। इसके अलावा चौथी तिमाही के लिए कंपनी का राजस्व अनुमान भी बाजार की अपेक्षाओं से कम रहा। इससे निवेशकों के बीच यह चिंता बढ़ गई कि वैश्विक कंपनियां आईटी कंसल्टिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स पर खर्च कम कर सकती हैं। भारतीय आईटी कंपनियों पर क्यों पड़ा असर? भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा कारोबार उत्तरी अमेरिका से आता है। ऐसे में यदि अमेरिकी और वैश्विक कंपनियां तकनीकी सेवाओं पर खर्च घटाती हैं, तो इसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों की आय पर पड़ सकता है। इसी आशंका के कारण निवेशकों ने आईटी शेयरों में जमकर बिकवाली की। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 6% की गिरावट शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे कमजोर सेक्टर इंडेक्स रहा। निवेशकों की चिंता और वैश्विक संकेतों के दबाव में पूरे आईटी सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी बाजार और वैश्विक आईटी खर्च से जुड़े संकेतों पर बनी रहेगी।
वैश्विक बाजारों में कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को भारी गिरावट के साथ शुरुआत की। हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के साथ बाजार ने कुछ हद तक रिकवरी दिखाई और शुरुआती नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की। शुरुआत में 500 अंकों से ज्यादा टूटा सेंसेक्स कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह करीब 9:20 बजे सेंसेक्स 284.51 अंक यानी 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,061.66 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 67.25 अंक यानी 0.29 प्रतिशत टूटकर 23,338.35 अंक पर पहुंच गया। हालांकि दिन चढ़ने के साथ खरीदारी लौटने लगी और बाजार में सुधार देखने को मिला। बाद में सेंसेक्स करीब 100 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। इन शेयरों में दिखी मजबूती शुरुआती कमजोरी के बावजूद कुछ प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इनमें शामिल रहे— इटरनल टाइटन अडानी पोर्ट्स एशियन पेंट्स टेक महिंद्रा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स टीसीएस एनटीपीसी हिंदुस्तान यूनिलीवर इन शेयरों में आई मजबूती ने बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई। इन दिग्गज शेयरों पर रहा दबाव सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 शेयर गिरावट के साथ खुले। सबसे ज्यादा दबाव ट्रेंट पर देखने को मिला। गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे— ट्रेंट इन्फोसिस एचडीएफसी बैंक बजाज फिनसर्व इंडिगो सन फार्मा कोटक महिंद्रा बैंक एचसीएल टेक व्यापक बाजार का हाल मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.22 प्रतिशत की गिरावट निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 0.15 प्रतिशत की गिरावट सेक्टोरल सूचकांकों में सूचना प्रौद्योगिकी, रियल्टी और निजी बैंकिंग शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखा गया। वहीं दूसरी ओर— उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु क्षेत्र तेल एवं गैस क्षेत्र रसायन क्षेत्र में सकारात्मक कारोबार देखने को मिला। रुपये में हल्की मजबूती इस बीच भारतीय मुद्रा में भी मामूली सुधार देखने को मिला। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 95.69 के स्तर पर खुला। बाजार में गिरावट की वजह क्या रही? विश्लेषकों के अनुसार बाजार पर सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का रहा। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, जिसका असर शेयर बाजारों पर दिखाई देता है। इसके अलावा निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के नतीजों पर भी टिकी हुई है। ब्याज दरों और आर्थिक वृद्धि को लेकर आने वाले फैसले बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में वैश्विक घटनाक्रम बाजार की चाल को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों और दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू शेयर बाजार ने शानदार शुरुआत की। वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के चलते निवेशकों का सेंटीमेंट मजबूत हुआ, जिसका असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 863 अंक से ज्यादा की तेजी के साथ 76,278 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 256 अंकों की बढ़त लेकर 23,975 के करीब कारोबार करता दिखा। कुछ समय बाद सेंसेक्स 900 अंक तक उछल गया, जबकि निफ्टी भी 24 हजार के करीब पहुंच गया। ऑटो और बैंकिंग सेक्टर में खरीदारी बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली। महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, लार्सन एंड टुब्रो और इंटरग्लोब एविएशन जैसे शेयरों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। वहीं टीसीएस और सन फार्मा के शेयरों में हल्की कमजोरी देखने को मिली। कच्चे तेल में गिरावट बनी बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट है। ब्रेंट क्रूड करीब 5.5 प्रतिशत टूटकर 97 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। हाल के दिनों में यह 100-105 डॉलर के स्तर पर बना हुआ था। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों से तेल बाजार में नरमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल के दाम घटने से भारत को बड़ा फायदा हो सकता है। इससे महंगाई का दबाव कम होगा, आयात लागत घटेगी और कंपनियों के मुनाफे में सुधार होगा। वैश्विक बाजारों का भी मिला समर्थन एशियाई बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। जापान का निक्केई इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा, जबकि ऑस्ट्रेलिया और चीन के बाजार भी बढ़त में रहे। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका-ईरान वार्ता सफल रहती है और कच्चे तेल की कीमतें नीचे बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में आगे भी तेजी जारी रह सकती है।
मुंबई: ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने HDFC Asset Management Company (HDFC AMC) के शेयर पर अपनी सकारात्मक राय दोहराते हुए ‘BUY’ रेटिंग बनाए रखी है। 16 अप्रैल 2026 की अपनी रिसर्च रिपोर्ट में फर्म ने इस स्टॉक के लिए ₹3000 का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। तिमाही प्रदर्शन रहा थोड़ा कमजोर रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC AMC की Q4FY26 तिमाही अपेक्षा से थोड़ी नरम रही। कंपनी की कोर इनकम ₹8.4 बिलियन रही, जो अनुमान से 2.3% कम है। इसका मुख्य कारण राजस्व में कमी बताया गया है। मैनेजमेंट के अनुसार, चौथी तिमाही में कम दिनों (90 दिन) की वजह से आय पर असर पड़ा, जबकि पिछली तिमाही Q3FY26 में 92 दिन थे। GST और नए TER नियमों का असर कंपनी ने संकेत दिया है कि नए TER (Total Expense Ratio) दिशानिर्देशों के तहत GST का असर लगभग 3-4 बेसिस पॉइंट (bps) तक हो सकता है। हालांकि, इस अतिरिक्त लागत को डिस्ट्रीब्यूटर्स तक पास किया जा सकता है, जिससे कंपनी के मार्जिन पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। मजबूत इक्विटी प्रदर्शन से बढ़त HDFC AMC का इक्विटी सेगमेंट में प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। FY26 में नेट फ्लो में कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी 15% रही, जो उद्योग में दूसरी सबसे बड़ी है। Q4FY26 में इक्विटी मार्केट शेयर 6 bps बढ़कर 13% हो गया। आगे की रणनीति और अनुमान ब्रोकरेज का मानना है कि HDFC AMC अपने मजबूत ब्रांड और ट्रैक रिकॉर्ड के चलते नए नियमों के प्रभाव को बेहतर तरीके से संभाल सकती है। रिपोर्ट में FY26 से FY28 के बीच इक्विटी यील्ड में हर साल 1 bps की गिरावट का अनुमान लगाया गया है। इसके बावजूद, कंपनी के मजबूत फंडामेंटल को देखते हुए वैल्यूएशन मल्टीपल को 36x (मार्च 2028 के अनुमानित EPS पर) रखा गया है और ₹3000 का टारगेट कायम रखा गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।