FIFA World Cup 2026

USA striker Folarin Balogun during a FIFA World Cup 2026 match after his red card was overturned ahead of the Round of 16 clash against Belgium.
ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द, फीफा ने हटाया निलंबन

वॉशिंगटन/सिएटल: फीफा विश्व कप 2026 के बीच अमेरिका के स्टार स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को मिले रेड कार्ड को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फैसले पर सवाल उठाने के बाद फीफा ने रेड कार्ड की समीक्षा की और उसे वापस ले लिया। अब बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले में खेल सकेंगे। ट्रंप ने फैसले को बताया अन्यायपूर्ण डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि फोलारिन बालोगुन अमेरिकी टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं और उन्हें अगले मैच से बाहर करना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ट्रंप ने कहा कि शुरुआत में उन्हें रेड कार्ड के नियमों की जानकारी नहीं थी, लेकिन जब पता चला कि इसके कारण खिलाड़ी अगले मैच में नहीं खेल सकता, तो उन्हें यह फैसला अनुचित लगा। उन्होंने कहा कि मैदान पर यह जानबूझकर किया गया फाउल नहीं था, बल्कि दोनों खिलाड़ी तेज रफ्तार में एक-दूसरे से टकरा गए थे। फीफा से की फैसले की समीक्षा की मांग ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर फीफा अधिकारियों से संपर्क किया और रेड कार्ड की समीक्षा करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी को उस मैच के लिए दंडित करना उचित नहीं है, जो अभी खेला ही नहीं गया। उनके अनुसार, ऐसा निर्णय खेल भावना के अनुरूप नहीं है। फीफा ने हटाया निलंबन फीफा द्वारा मामले की समीक्षा के बाद फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही उन पर लगाया गया एक मैच का प्रतिबंध भी समाप्त हो गया है। अब 25 वर्षीय स्ट्राइकर सोमवार को सिएटल में बेल्जियम के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ-16 मुकाबले में अमेरिकी टीम का हिस्सा होंगे। अमेरिका के लिए अहम खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन इस विश्व कप में अमेरिका के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अब तक तीन गोल किए हैं और टीम के आक्रमण की सबसे मजबूत कड़ी माने जा रहे हैं। उनकी वापसी अमेरिकी मुख्य कोच मौरिसियो पोचेटिनो के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। बेल्जियम फुटबॉल संघ ने जताई आपत्ति फीफा के फैसले पर बेल्जियम फुटबॉल संघ (RBFA) ने नाराजगी व्यक्त की है। संघ ने कहा कि अमेरिका-बेल्जियम मुकाबले से ठीक पहले रेड कार्ड हटाए जाने का फैसला हैरान करने वाला है और वह अपने हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा। टेड क्रूज ने किया ट्रंप का समर्थन अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज ने भी ट्रंप के रुख का समर्थन किया। उन्होंने रेड कार्ड को "बेतुका फैसला" बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने अमेरिकी टीम और उसके खिलाड़ियों के हितों की रक्षा के लिए सही कदम उठाया। खेल के साथ राजनीति पर भी छिड़ी बहस फोलारिन बालोगुन के रेड कार्ड को रद्द किए जाने के बाद विश्व कप के बीच खेल और राजनीति के संबंधों पर नई बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का मानना है कि इस फैसले ने रेफरी के निर्णयों की स्वतंत्रता और खेल प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया के जरिए एक गलत निर्णय को सुधारा गया है।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
FIFA World Cup 2026 Round of 16
फीफा वर्ल्ड कप: बेल्जियम ने अमेरिका को 4-1 से हराकर क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह

सिएटल, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में बेल्जियम ने मेजबान अमेरिका को 4-1 से हराकर शानदार अंदाज में क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। इस हार के साथ अमेरिका का 2002 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप के अंतिम आठ में पहुंचने का सपना टूट गया। साथ ही कनाडा और मेक्सिको के बाद अमेरिका भी टूर्नामेंट से बाहर होने वाला आखिरी सह-मेजबान देश बन गया।   डी केटेलेरे ने चमकाया बेल्जियम का खेल बेल्जियम की जीत के नायक चार्ल्स डी केटेलेरे रहे, जिन्होंने दो गोल दागे। इसके अलावा हंस वनाकेन और स्थानापन्न खिलाड़ी रोमेलु लुकाकू ने एक-एक गोल कर टीम की जीत सुनिश्चित की। बेल्जियम ने पूरे मैच में आक्रामक खेल दिखाते हुए अमेरिका को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।   शानदार फॉर्म में बेल्जियम बेल्जियम की टीम 20 मार्च 2025 के बाद से अजेय बनी हुई है। इस दौरान उसने फीफा विश्व कप, विश्व कप क्वालिफायर, यूईएफए नेशंस लीग प्ले-ऑफ और अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैचों सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में 12 जीत और छह ड्रॉ दर्ज किए हैं। इस अवधि में टीम का गोल अंतर भी +40 रहा है, जो उसकी बेहतरीन फॉर्म को दर्शाता है।   अब स्पेन से होगी भिड़ंत क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम का मुकाबला स्पेन से होगा। स्पेन ने राउंड ऑफ-16 में पुर्तगाल को 1-0 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला 11 जुलाई को लॉस एंजिलिस में खेला जाएगा। मौजूदा फॉर्म को देखते हुए यह मैच टूर्नामेंट के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक माना जा रहा है।   अमेरिका का सपना टूटा, रोनाल्डो का भी हुआ विदाई मैच अमेरिका की हार के साथ उसकी क्वार्टर फाइनल में पहुंचने की उम्मीदें खत्म हो गईं। वहीं, स्पेन से हार के बाद पुर्तगाल के दिग्गज खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो का भी फीफा विश्व कप सफर समाप्त हो गया। अब सभी की निगाहें बेल्जियम और स्पेन के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज क्वार्टर फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Cristiano Ronaldo reacts after Portugal's FIFA World Cup 2026 exit against Spain.
Cristiano Ronaldo ने खेला अपना आखिरी FIFA World Cup, अंतरराष्ट्रीय संन्यास पर अभी नहीं लिया फैसला

स्पेन से हार के बाद भावुक हुए रोनाल्डो, बोले- जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करूंगा Cristiano Ronaldo ने पुष्टि कर दी है कि FIFA World Cup 2026 उनके करियर का आखिरी विश्व कप था। हालांकि, उन्होंने फिलहाल पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम से संन्यास लेने का ऐलान नहीं किया है। 41 वर्षीय दिग्गज फुटबॉलर ने कहा कि वह अपने अंतरराष्ट्रीय भविष्य पर फैसला लेने से पहले परिवार के साथ समय बिताएंगे और शांत मन से सोच-विचार करेंगे। स्पेन के खिलाफ हार के साथ खत्म हुआ विश्व कप सफर Portugal का विश्व कप अभियान प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में Spain के खिलाफ 1-0 की हार के साथ समाप्त हो गया। मुकाबले में दूसरे हाफ के स्टॉपेज टाइम में Mikel Merino ने निर्णायक गोल कर स्पेन को क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया। मैच के बाद रोनाल्डो ने कहा कि टीम ने पूरी कोशिश की, लेकिन किस्मत उनके साथ नहीं थी। उन्होंने कहा, "मैं दुखी हूं कि मेरा विश्व कप सफर इस तरह खत्म हुआ। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और पूरी ईमानदारी से खेला। यह मेरा आखिरी विश्व कप था, लेकिन अभी मैं अपने भविष्य पर कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं लूंगा।" विश्व कप खत्म, लेकिन अंतरराष्ट्रीय करियर अभी नहीं रोनाल्डो ने साफ किया कि विश्व कप में उनका सफर जरूर समाप्त हो गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने पुर्तगाल के लिए अपना आखिरी मैच खेल लिया है। उन्होंने कहा कि भावनाओं में बहकर फैसला लेना सही नहीं होगा और वह कुछ समय बाद तय करेंगे कि राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना जारी रखना है या नहीं। 'स्पेन को किस्मत का साथ मिला' हार के बाद रोनाल्डो ने माना कि मुकाबला बेहद करीबी था और दोनों टीमों के जीतने की बराबर संभावना थी। उनके अनुसार, "स्पेन को थोड़ा भाग्य का साथ मिला। यह ऐसा मैच था जो किसी भी तरफ जा सकता था।" छठा विश्व कप, लेकिन अधूरा रहा सबसे बड़ा सपना रोनाल्डो ने अपने करियर में रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए छठा FIFA World Cup खेला। इस टूर्नामेंट में उन्होंने तीन गोल भी किए, लेकिन वह विश्व कप जीतने का अपना सबसे बड़ा सपना पूरा नहीं कर सके। विश्व फुटबॉल के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाने वाले रोनाल्डो के नाम कई व्यक्तिगत और टीम उपलब्धियां हैं, लेकिन विश्व कप ट्रॉफी उनके करियर की सबसे बड़ी अधूरी उपलब्धि बनकर रह गई। याद दिलाई पुर्तगाल की ऐतिहासिक सफलताएं रोनाल्डो ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में पुर्तगाल ने पहली बार बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते। उन्होंने कहा कि टीम ने UEFA Euro 2016 का खिताब जीता और इसके बाद UEFA Nations League में 2019 और 2025 में भी चैंपियन बनी। रोनाल्डो ने कहा, "मैंने पुर्तगाल के लिए तीन बड़े खिताब जीते। मेरे आने से पहले टीम ने कोई बड़ा खिताब नहीं जीता था। मेरे लिए 2016 की यूरोपीय चैम्पियनशिप विश्व कप जितनी ही महत्वपूर्ण है।" अभी बाकी है अंतिम फैसला फिलहाल इतना तय हो गया है कि रोनाल्डो का विश्व कप अध्याय समाप्त हो चुका है। हालांकि, उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत अभी तय नहीं है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वह जल्दबाजी में संन्यास का फैसला नहीं करेंगे और परिवार के साथ समय बिताने के बाद ही अपने अगले कदम की घोषणा करेंगे।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Folarin Balogun and Belgium players compete during FIFA World Cup 2026 match
FIFA World Cup 2026: ट्रंप के समर्थन के बावजूद नहीं चला फोलारिन बालोगुन का जादू, बेल्जियम ने अमेरिका को 4-1 से हराया

FIFA World Cup 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल में सह-मेजबान United States को Belgium के खिलाफ 4-1 से करारी हार का सामना करना पड़ा। मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा स्ट्राइकर Folarin Balogun की विवादित वापसी को लेकर थी, लेकिन मैदान पर वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। इस जीत के साथ बेल्जियम ने क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली, जहां उसका सामना Spain से होगा। विवाद के बीच मैदान पर उतरे बालोगुन बालोगुन को पिछले दौर में Bosnia and Herzegovina के खिलाफ मुकाबले में रेड कार्ड मिला था, जिसके कारण उन्हें एक मैच का स्वत: निलंबन झेलना था। हालांकि, मैच से पहले FIFA ने उनके निलंबन को एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया, जिससे वह बेल्जियम के खिलाफ खेलने के पात्र हो गए। इस फैसले ने टूर्नामेंट के दौरान बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। मैदान पर नहीं दिखा असर टूर्नामेंट में पहले ही तीन गोल कर चुके बालोगुन से अमेरिका को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन बेल्जियम की मजबूत रक्षापंक्ति ने उन्हें पूरे मैच में लगभग बेअसर बनाए रखा। पहले हाफ में उन्होंने एक फ्री-किक दिलाई, जिस पर Malik Tillman ने शानदार गोल कर स्कोर 1-1 से बराबर किया। इसके अलावा बालोगुन कोई बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ सके। उनका सबसे अच्छा मौका 82वें मिनट में आया, लेकिन बेल्जियम के गोलकीपर Thibaut Courtois ने शानदार बचाव कर दिया। अतिरिक्त समय में उन्हें बदलकर Haji Wright को मैदान पर उतारा गया। बेल्जियम ने पूरी तरह बनाया दबदबा बेल्जियम की ओर से Charles De Ketelaere ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद अमेरिकी गोलकीपर Matt Freese की एक बड़ी गलती का फायदा उठाकर बेल्जियम ने अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। अंत में Romelu Lukaku ने गोल कर 4-1 की जीत पर मुहर लगा दी। डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप से बढ़ा था विवाद बालोगुन की वापसी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने Gianni Infantino से इस मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया था। ट्रंप का कहना था कि रेड कार्ड का फैसला गलत था और यह फाउल भी नहीं था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने FIFA पर फैसला बदलने का दबाव नहीं बनाया। FIFA ने किया बचाव, UEFA ने जताई नाराजगी FIFA अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो ने कहा कि बालोगुन के मामले में पूरी न्यायिक प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से अपनाई गई और नियमों के अनुसार फैसला लिया गया। दूसरी ओर, UEFA ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि स्वत: निलंबन हटाना प्रतियोगिता की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। वहीं Royal Belgian Football Association ने भी मैच से पहले बालोगुन की पात्रता को चुनौती दी थी, लेकिन FIFA ने उसकी अपील खारिज कर दी। सोशल मीडिया पर भी हुआ तंज मैच जीतने के बाद बेल्जियम टीम ने सोशल मीडिया पर Romelu Lukaku की जश्न मनाते हुए तस्वीर साझा की और उसके साथ लिखा— "Overturn this." इसे बालोगुन के निलंबन हटाने वाले फैसले पर तंज के रूप में देखा गया। तीन गोल के साथ खत्म हुआ टूर्नामेंट हालांकि अमेरिका टूर्नामेंट से बाहर हो गया, लेकिन बालोगुन ने विश्व कप में तीन गोल किए। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने Landon Donovan के 2010 विश्व कप के रिकॉर्ड की बराबरी की। अमेरिका के लिए एक विश्व कप में सबसे ज्यादा चार गोल करने का रिकॉर्ड अब भी Bert Patenaude के नाम दर्ज है।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Union Home Minister Amit Shah addresses a public event in Kolkata on Dr. Syama Prasad Mookerjee's 125th birth anniversary, announcing a committee on UCC and faster implementation of CAA.
बंगाल में अमित शाह का बड़ा ऐलान: UCC लागू करने की तैयारी, CAA प्रक्रिया तेज करने का भरोसा

कोलकाता: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इसके साथ ही नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत पात्र लोगों को नागरिकता देने की प्रक्रिया को तेज करने का भी आश्वासन दिया। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान जो वादे किए थे, उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में "सोनार बांग्ला" के निर्माण की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। UCC लागू करने के लिए बनेगी विशेष समिति गृह मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने के उद्देश्य से एक विशेष समिति का गठन किया गया है। उनके अनुसार यह समिति राज्य में UCC लागू करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी और आगे की प्रक्रिया तय करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है। CAA के तहत नागरिकता प्रक्रिया होगी तेज अमित शाह ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत पात्र शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन लोगों को कानून के तहत नागरिकता मिलने का अधिकार है, उन्हें जल्द इसका लाभ मिलेगा। अवैध घुसपैठ पर सख्त रुख अपने संबोधन में गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकार हर अवैध घुसपैठिए की पहचान करेगी और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध घुसपैठ रोकने के लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा की रखी आधारशिला कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फीट ऊंची प्रस्तावित प्रतिमा की आधारशिला भी रखी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को लेकर दिया गया योगदान देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राजनीतिक संदेश भी दिया अपने संबोधन में अमित शाह ने राष्ट्रीय एकता, नागरिकता, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने सभी चुनावी संकल्पों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और पश्चिम बंगाल में भी विकास तथा सुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Ronaldo World Cup Exit
रोनाल्डो का आखिरी वर्ल्ड कप खत्म, स्पेन ने पुर्तगाल को किया बाहर

आर्लिंग्टन (टेक्सास), एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में स्पेन ने पुर्तगाल को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। इस हार के साथ स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। 41 वर्षीय रोनाल्डो के लिए यह उनके करियर का आखिरी फीफा वर्ल्ड कप भी साबित हुआ। मैच खत्म होने के बाद रोनाल्डो भावुक नजर आए और मैदान छोड़ते समय स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाकर उनका सम्मान किया।   स्पेन की मजबूत रक्षा बनी जीत की सबसे बड़ी वजह पूरे मुकाबले में स्पेन का डिफेंस बेहद मजबूत नजर आया। पुर्तगाल ने कई बार गोल करने की कोशिश की, लेकिन स्पेनिश गोलकीपर उनाई सिमोन और डिफेंस ने हर प्रयास को नाकाम कर दिया। रोनाल्डो ने पहले हाफ में दो बेहतरीन मौके बनाए, लेकिन सिमोन ने शानदार बचाव करते हुए उन्हें गोल में बदलने नहीं दिया। उनकी एक डाइविंग सेव मैच के सबसे यादगार पलों में शामिल रही।   सिमोन ने बनाया नया विश्व रिकॉर्ड 29 वर्षीय गोलकीपर उनाई सिमोन ने लगातार छठे वर्ल्ड कप मैच में क्लीन शीट रखते हुए नया इतिहास रच दिया। स्पेन अब वर्ल्ड कप इतिहास में लगातार सबसे अधिक मैचों तक गोल नहीं खाने वाली पहली टीम बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड इटली (1990) और स्विट्जरलैंड (2006-10) के नाम था, जिन्होंने लगातार पांच-पांच मैचों में विपक्षी टीम को गोल नहीं करने दिया था।   सिमोन ने व्यक्तिगत उपलब्धि भी हासिल की। उन्होंने लगातार 609 मिनट तक गोल नहीं खाकर इटली के महान गोलकीपर वाल्टर जेंगा का 35 साल पुराना 517 मिनट का रिकॉर्ड तोड़ दिया। मौजूदा टूर्नामेंट में स्पेन की मजबूत रक्षा ने उसे खिताब के सबसे बड़े दावेदारों में शामिल कर दिया है।   रोनाल्डो के शानदार करियर का वर्ल्ड कप अध्याय समाप्त क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 2006 में अपना पहला फीफा वर्ल्ड कप खेला था। उसी टूर्नामेंट में उन्होंने पुर्तगाल को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी, जो उनके वर्ल्ड कप करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। 2018 वर्ल्ड कप में स्पेन के खिलाफ उनकी हैट्रिक आज भी यादगार मुकाबलों में गिनी जाती है।   हालांकि इस बार रोनाल्डो अपने वर्ल्ड कप सफर का अंत जीत के साथ नहीं कर सके। मैच समाप्त होने के बाद उनकी आंखों में निराशा साफ दिखाई दी। मैदान से बाहर निकलते समय उन्होंने दर्शकों का अभिवादन किया, जबकि पूरे स्टेडियम ने तालियां बजाकर इस महान खिलाड़ी को सम्मानजनक विदाई दी।   स्पेन की नजर अब खिताब पर क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुकी स्पेनिश टीम अब अपने मजबूत डिफेंस और शानदार फॉर्म के दम पर विश्व कप जीतने की प्रबल दावेदार मानी जा रही है। लगातार क्लीन शीट और संतुलित प्रदर्शन ने स्पेन को इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत टीमों में शामिल कर दिया है।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
FIFA World Cup 2026
FIFA World Cup 2026: 43°C की तपिश में कैसे खेल रहे फुटबॉलर? क्या 'कूलिंग वेस्ट' हैं इसका राज ?

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेजबानी में खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जहां मैदान पर रोमांचक मुकाबले देखने को मिल रहे हैं, वहीं भीषण गर्मी भी खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। कई मैचों के दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जबकि कुछ स्थानों पर यह 43 डिग्री सेल्सियस के पार भी दर्ज किया गया। ऐसे हालात में खिलाड़ियों को हीट स्ट्रेस और थकान से बचाने के लिए टीमों ने अत्याधुनिक 'क्लाइमाकूल सिस्टम' अपनाया है, जिसमें कूलिंग वेस्ट, इंसुलेटेड जैकेट और कूलिंग ओवरबूट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।   मैदान पर गर्मी से बचाने में मददगार 'कूलिंग वेस्ट' रविवार को फिलाडेल्फिया के लिंकन फाइनेंशियल फील्ड में फ्रांस और पराग्वे के बीच खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान तापमान 43.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। ऐसे हालात को देखते हुए फीफा ने खिलाड़ियों के लिए हाइड्रेशन ब्रेक की व्यवस्था की है। वहीं कई टीमों ने मैच से पहले और हाफ टाइम के दौरान खिलाड़ियों को ठंडा रखने के लिए कूलिंग वेस्ट का इस्तेमाल किया।   इस वेस्ट के अंदर विशेष प्रकार का जेल भरा होता है, जिसे उपयोग से पहले फ्रीज किया जाता है। खिलाड़ी जब इसे पहनते हैं तो यह धीरे-धीरे शरीर की अतिरिक्त गर्मी को सोखता है और शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक शरीर के आंतरिक तापमान को लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस और त्वचा के तापमान को करीब 13 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकती है।   जर्सी और जूतों में भी हाई-टेक बदलाव सिर्फ कूलिंग वेस्ट ही नहीं, खिलाड़ियों की जर्सियों में भी माइक्रो-वेंटिलेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक पसीने को तेजी से बाहर निकालती है और शरीर में हवा का बेहतर प्रवाह बनाए रखती है, जिससे खिलाड़ी लंबे समय तक सहज महसूस करते हैं।   इसके अलावा खिलाड़ियों के जूतों पर विशेष कूलिंग ओवरबूट लगाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य पैरों की गर्मी और सूजन को कम करना है। दावा किया जा रहा है कि इन ओवरबूट्स की मदद से केवल सात मिनट में पैरों का तापमान करीब दो डिग्री सेल्सियस तक घटाया जा सकता है, जिससे रिकवरी भी तेज होती है।   फॉर्मूला-1 से फुटबॉल तक पहुंची तकनीक दिलचस्प बात यह है कि कूलिंग वेस्ट और अन्य उपकरणों को शुरुआत में फॉर्मूला-1 ड्राइवरों के लिए विकसित किया गया था। अब इन्हें फुटबॉल में भी सफलतापूर्वक अपनाया जा रहा है। टीमें इनका उपयोग मैच से पहले, हाफ टाइम और ट्रेनिंग सत्रों के दौरान खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता बनाए रखने के लिए कर रही हैं।   जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में खेल आयोजनों के दौरान अत्यधिक गर्मी अब बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में फीफा वर्ल्ड कप 2026 में खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल प्रोटोकॉल, हाइड्रेशन ब्रेक और आधुनिक कूलिंग तकनीकों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इन उपायों की बदौलत खिलाड़ी भीषण गर्मी के बावजूद अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखने में सफल हो रहे हैं।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
FIFA World Cup 2026
विश्व कप से बाहर होते ही कई देशों में मचा बवाल, कोचों पर गिरी गाज

नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 में कई बड़ी टीमों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि मैदान के बाहर भी विवादों का दौर शुरू हो गया है। कई देशों में प्रशंसकों का गुस्सा फूटा, फुटबॉल संघों पर सवाल उठे और कई कोचों व मैनेजरों को अपने पद छोड़ने पड़े।   हार के बाद कई देशों में बढ़ा विवाद दक्षिण कोरिया के ग्रुप चरण से बाहर होने के बाद देश में भारी नाराजगी देखने को मिली। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने टीम के खराब प्रदर्शन की जांच की मांग करते हुए चयन प्रक्रिया में पक्षपात और भाई-भतीजावाद के आरोपों की जांच की बात कही। वहीं, कोच होंग म्युंग-बो को सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने के बाद सुरक्षा बढ़ानी पड़ी।   सेनेगल सेनेगल में बेल्जियम से हार के बाद खिलाड़ियों के वेतन-बोनस, कोच और फेडरेशन के बीच विवाद तथा टीम की खराब व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे। वहीं, नीदरलैंड्स की हार के बाद पेनल्टी मिस करने वाले खिलाड़ियों को नस्लीय टिप्पणियों का सामना करना पड़ा, जिस पर डच फुटबॉल संघ ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।   चेक गणराज्य में कोच मिरोस्लाव कोउबेक ने मीडिया अभियान का आरोप लगाया, जबकि जर्मनी में कोच यूलियन नगेल्समैन की रणनीति को लेकर तीखी आलोचना हुई। टीम के बाहर होने के बाद प्रशंसकों ने फुटबॉल प्रबंधन पर भी सवाल खड़े किए।   कई कोच और मैनेजरों ने छोड़ा पद विश्व कप में खराब प्रदर्शन का सबसे बड़ा असर कोचिंग स्टाफ पर पड़ा। ट्यूनीशिया के हर्व रेनार्ड, चेक गणराज्य के मिरोस्लाव कोउबेक, इक्वाडोर के सेबेस्टियन बेकासेसे, नीदरलैंड्स के रोनाल्ड कोमैन, दक्षिण कोरिया के होंग म्युंग-बो, स्कॉटलैंड के स्टीव क्लार्क और जर्मनी के यूलियन नगेल्समैन ने अपने पद छोड़ने का एलान कर दिया।   विशेष रूप से जर्मनी में नगेल्समैन के इस्तीफे के बाद पूर्व सफल क्लब कोच Jürgen Klopp के राष्ट्रीय टीम की कमान संभालने की चर्चा तेज हो गई है। विश्व कप के बाद इन घटनाओं ने दिखाया है कि फुटबॉल में हार सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव भी सामने आते हैं।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Cristiano Ronaldo
'23 साल से मुझे खत्म करने की कोशिश हो रही है', आलोचकों पर जमकर बरसे क्रिस्टियानो रोनाल्डो

सिएटल, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में स्पेन के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले से पहले पुर्तगाल के कप्तान Cristiano Ronaldo ने आलोचकों और पत्रकारों पर तीखा हमला बोला। 41 वर्षीय स्टार फुटबॉलर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले 23 वर्षों से लोग उन्हें "खत्म" करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे आज भी मजबूती से मैदान में डटे हुए हैं।   रोनाल्डो ने कहा रोनाल्डो ने कहा, "आप लोग 23 साल से मुझे खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक समझ जाना चाहिए कि यह बेकार है, लेकिन फिर भी कोशिश जारी है।" उन्होंने माना कि उम्र के साथ उनके खेल में बदलाव आया है, लेकिन वह अब भी टीम के लिए अहम योगदान दे रहे हैं। इस विश्व कप में उनके नाम तीन गोल दर्ज हैं, जिनमें उज्बेकिस्तान के खिलाफ दो और क्रोएशिया के खिलाफ एक पेनल्टी गोल शामिल है।   "मैं कब रुकूंगा, यह मैं तय करूंगा, आप नहीं"  प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे लगातार संन्यास और भविष्य को लेकर सवाल पूछे गए तो रोनाल्डो नाराज दिखे। उन्होंने दो टूक कहा, "मैं कब रुकूंगा, यह मैं तय करूंगा, आप नहीं।" उन्होंने मुस्कुराते हुए एक पत्रकार की ओर इशारा कर कहा कि उन्हें लोगों के चेहरे अच्छी तरह याद रहते हैं और वह जानते हैं कि कौन उन्हें पसंद नहीं करता।   रोनाल्डो ने कहा भावुक अंदाज में रोनाल्डो ने कहा कि उन्होंने फुटबॉल और जिंदगी दोनों में अपना सब कुछ झोंक दिया है। उनके मुताबिक, स्पेन के खिलाफ मैच का नतीजा चाहे जो भी हो, उन्हें अपने करियर पर कोई पछतावा नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 40 वर्ष की उम्र के बाद मिली आलोचनाओं ने उन्हें और मजबूत बनाया है।   स्पेन के खिलाफ मुकाबले को लेकर रोनाल्डो ने इसे कठिन चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि जीत के लिए पुर्तगाल को आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और बहादुरी के साथ खेलना होगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व कप जीतने या हारने से उनकी पहचान नहीं बदलने वाली, क्योंकि उन्होंने हमेशा अपना शत-प्रतिशत दिया है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Morocco Canada
FIFA World Cup 2026: राउंड ऑफ 16 का रोमांच शुरू, आज मोरक्को-कनाडा से होगी नॉकआउट जंग

नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। राउंड ऑफ 32 के मुकाबले समाप्त होने के बाद अब 16 टीमें नॉकआउट चरण के तीसरे दौर यानी राउंड ऑफ 16 में आमने-सामने होंगी। इस चरण की शुरुआत शनिवार (4 जुलाई) को मोरक्को और कनाडा के मुकाबले से होगी। दोनों टीमें जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी।   राउंड ऑफ 32 में कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। कनाडा ने दक्षिण अफ्रीका को 1-0 से हराया, जबकि ब्राजील ने जापान को 2-1 से मात दी। फ्रांस ने स्वीडन को 3-0 से हराया, वहीं इंग्लैंड ने डीआर कांगो को 2-1 से शिकस्त दी। सबसे बड़े उलटफेर में जर्मनी और नीदरलैंड जैसी दिग्गज टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। पराग्वे ने जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में हराया, जबकि मोरक्को ने नीदरलैंड को पेनल्टी में मात देकर सभी को चौंका दिया।   भारतीय समयानुसार भारतीय समयानुसार राउंड ऑफ 16 के प्रमुख मुकाबलों में 4 जुलाई को कनाडा बनाम मोरक्को, 5 जुलाई को पराग्वे बनाम फ्रांस, 6 जुलाई को ब्राजील बनाम नॉर्वे और मेक्सिको बनाम इंग्लैंड के मैच खेले जाएंगे। इसके बाद 7 जुलाई को पुर्तगाल बनाम स्पेन, अमेरिका बनाम बेल्जियम और अर्जेंटीना बनाम मिस्र की टक्कर होगी, जबकि 8 जुलाई को स्विट्जरलैंड और कोलंबिया आमने-सामने होंगे।   इस विश्व कप में पहली बार 48 टीमों ने हिस्सा लिया है। ग्रुप चरण के बाद 32 टीमों ने नॉकआउट में प्रवेश किया और अब केवल 16 टीमें खिताब की दौड़ में बची हैं। राउंड ऑफ 16 के बाद क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे।   लियोनेल मेसी 7 गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे  व्यक्तिगत प्रदर्शन की बात करें तो लियोनेल मेसी 7 गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे हैं। उनके पीछे काइलियन एम्बाप्पे 6 गोल के साथ दूसरे और अर्लिंग हालैंड तथा हैरी केन 5-5 गोल के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं। ऐसे में अब हर मुकाबला न केवल टीमों के लिए बल्कि स्टार खिलाड़ियों के व्यक्तिगत रिकॉर्ड के लिहाज से भी बेहद अहम होगा।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Argentina VS Cape Verde
फीफा वर्ल्ड कप: अर्जेंटीना ने केप वर्डे को 3-2 से हराया, अब प्री-क्वार्टर फाइनल में मिस्र से होगी भिड़ंत

नई दिल्ली, एजेंसियां। डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 के रोमांचक मुकाबले में पहली बार विश्व कप खेल रही केप वर्डे को 3-2 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में जगह बना ली। मियामी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में केप वर्डे ने अर्जेंटीना को कड़ी टक्कर दी और मैच का फैसला एक्स्ट्रा टाइम में जाकर हुआ। अब अर्जेंटीना का अगला मुकाबला मिस्र से होगा, जिसने राउंड ऑफ 32 में ऑस्ट्रेलिया को पेनाल्टी शूटआउट में हराया था। यह मुकाबला भारतीय समयानुसार 7 जुलाई को रात 9:30 बजे खेला जाएगा।   मैच की शुरुआत से ही अर्जेंटीना ने आक्रामक खेल दिखाया  कप्तान लियोनेल मेसी ने 29वें मिनट में शानदार गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। हालांकि, केप वर्डे ने हार नहीं मानी और 59वें मिनट में डुआर्टे ने गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। निर्धारित 90 मिनट में कोई और गोल नहीं होने के कारण मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में पहुंचा।   एक्स्ट्रा टाइम के 92वें मिनट में लिसैंड्रो मार्टिनेज ने अर्जेंटीना को फिर बढ़त दिलाई, लेकिन कुछ ही देर बाद लोपेस कैब्राल ने शानदार गोल कर केप वर्डे की वापसी कराते हुए स्कोर 2-2 कर दिया। आखिरकार 111वें मिनट में मेसी के कॉर्नर पर केप वर्डे के खिलाड़ी से ओन गोल हो गया, जिसने अर्जेंटीना को 3-2 की जीत दिला दी।   मेसी ने टूर्नामेंट का अपना सातवां गोल दागा इस मैच में मेसी ने टूर्नामेंट का अपना सातवां गोल दागा और फीफा वर्ल्ड कप में लगातार आठ मैचों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। मुकाबले के बाद मेसी ने कहा कि नॉकआउट चरण में कोई भी टीम कमजोर नहीं होती और केप वर्डे ने इसे साबित किया। उन्होंने अपनी टीम के जुझारूपन की सराहना करते हुए कहा कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं करने के बावजूद अर्जेंटीना ने जीत का रास्ता तलाश लिया। अब टीम का पूरा फोकस मिस्र के खिलाफ होने वाले अगले मुकाबले पर रहेगा।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Lionel Messi
लियोनेल मेसी ने रचा नया इतिहास, विश्व कप में सात गोल के साथ बनाया अनोखा रिकॉर्ड

मियामी, एजेंसियां। अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर Lionel Messi ने फीफा विश्व कप 2026 में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। केप वर्डे के खिलाफ नॉकआउट मुकाबले में गोल दागते ही मेसी इस विश्व कप में सात गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इसके साथ ही उन्होंने विश्व कप इतिहास में एक नया रिकॉर्ड भी कायम कर दिया।   दो अलग-अलग विश्व कप में सात गोल करने वाले पहले खिलाड़ी   केप वर्डे के खिलाफ मैच के 29वें मिनट में गोल करने के साथ ही मेसी विश्व कप के दो अलग-अलग संस्करणों में सात या उससे अधिक गोल करने वाले पहले फुटबॉलर बन गए। इससे पहले उन्होंने 2022 विश्व कप में भी सात गोल किए थे। यह उपलब्धि उनके शानदार और लगातार बने हुए प्रदर्शन को दर्शाती है।   गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे   सात गोल के साथ मेसी फिलहाल 2026 फीफा विश्व कप के गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। वहीं, इस गोल के साथ उन्होंने लगातार आठ विश्व कप मैचों में गोल करने का विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। अर्जेंटीना की टीम ने यह मुकाबला जीतकर अगले दौर में जगह बना ली है।   रिकॉर्ड्स की झड़ी जारी   39 वर्षीय मेसी पहले ही पुरुष विश्व कप इतिहास के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं। अब उनके खाते में 20 विश्व कप गोल दर्ज हो चुके हैं और वह लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा फॉर्म को देखते हुए मेसी इस विश्व कप में कई और रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Portugal Croatia
फीफा वर्ल्ड कप 2026: पुर्तगाल ने रोमांचक मुकाबले में क्रोएशिया को 2-1 से हराया

टोरंटो, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में पुर्तगाल ने रोमांचक मुकाबले में क्रोएशिया को 2-1 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में अपनी जगह पक्की कर ली। मैच के नायक गोंकालो रामोस रहे, जिन्होंने 81वें मिनट में विजयी गोल दागकर पुर्तगाल को यादगार जीत दिलाई। इससे पहले अनुभवी स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने पेनाल्टी पर गोल कर टीम को बराबरी दिलाई थी। अब पुर्तगाल का अगला मुकाबला स्पेन से होगा।   रोनाल्डो ने दिखाया अनुभव, रामोस बने जीत के हीरो मैच की शुरुआत दोनों टीमों के बीच कड़े संघर्ष के साथ हुई। क्रोएशिया ने 53वें मिनट में इवान पेरिसिक के गोल की बदौलत बढ़त हासिल की। इसके बाद 68वें मिनट में पुर्तगाल को पेनाल्टी मिली, जिसे क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने शानदार अंदाज में गोल में बदलकर स्कोर 1-1 कर दिया। यह रोनाल्डो का विश्व कप नॉकआउट चरण में पहला गोल भी रहा। इसके बाद 81वें मिनट में गोंकालो रामोस ने निर्णायक गोल कर पुर्तगाल को 2-1 की बढ़त दिला दी, जो अंत तक कायम रही।   VAR ने तोड़ी क्रोएशिया की उम्मीद मैच के अंतिम क्षणों में क्रोएशिया ने बराबरी का गोल कर दिया था, लेकिन वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की जांच में मारियो पासालिक को ऑफसाइड पाया गया और गोल रद्द कर दिया गया। इस फैसले से नाराज क्रोएशियाई प्रशंसकों ने स्टेडियम में विरोध जताया और मैदान की ओर बोतलें भी फेंकी।   रोनाल्डो और मोड्रिच की भावुक मुलाकात यह मुकाबला दो दिग्गज खिलाड़ियों क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लुका मोड्रिच के बीच भी खास रहा। रियल मैड्रिड के पूर्व साथी रहे दोनों खिलाड़ियों ने मैच से पहले और बाद में एक-दूसरे को गले लगाकर सम्मान व्यक्त किया। मैच के बाद रोनाल्डो ने कहा कि मोड्रिच आज भी फुटबॉल के महान खिलाड़ियों में से एक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टीम ने बेहतर खेल दिखाया और जीत की पूरी हकदार थी। पुर्तगाल की इस जीत के साथ अब टीम का लक्ष्य स्पेन को हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाना होगा।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Football player taking a penalty while EEG neuroscience technology monitors brain activity during FIFA World Cup 2026 training.
पेनाल्टी में कौन बनेगा हीरो? फीफा विश्व कप 2026 में खिलाड़ियों का दिमाग पढ़ रही न्यूरोसाइंस, दबाव में सबसे मजबूत खिलाड़ी की हो रही पहचान

नई दिल्ली: फुटबॉल में पेनाल्टी शूटआउट अक्सर किसी बड़े मैच की जीत और हार तय करता है। कुछ ही सेकंड में एक खिलाड़ी करोड़ों प्रशंसकों की उम्मीदों का केंद्र बन जाता है। ऐसे में अब केवल तकनीकी कौशल या अनुभव ही नहीं, बल्कि खिलाड़ी की मानसिक क्षमता भी चयन का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। फीफा विश्व कप 2026 के दौरान कई टीमें पेनाल्टी शूटआउट के लिए सबसे उपयुक्त खिलाड़ियों की पहचान करने में न्यूरोसाइंस का सहारा ले रही हैं। अमेरिकी पुरुष फुटबॉल टीम ने जर्मनी की न्यूरोसाइंस कंपनी Neuro11 के साथ साझेदारी की है। इस तकनीक का उद्देश्य यह समझना है कि कौन-सा खिलाड़ी दबाव की स्थिति में सबसे अधिक शांत, केंद्रित और आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बड़े मुकाबलों में जीत केवल शारीरिक क्षमता से नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती से भी तय होती है। दिमाग की गतिविधियों का किया जा रहा वैज्ञानिक विश्लेषण इस शोध में खिलाड़ियों को विशेष ईईजी (Electroencephalography - EEG) उपकरण पहनाए जाते हैं, जो मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं। अभ्यास के दौरान जब खिलाड़ी पेनाल्टी, फ्री-किक या कॉर्नर जैसी परिस्थितियों का सामना करते हैं, तब उनके दिमाग की प्रतिक्रियाओं का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है। वैज्ञानिक इस दौरान यह देखते हैं कि खिलाड़ी दबाव में कितना शांत रहता है, उसका ध्यान कितनी देर तक केंद्रित रहता है और निर्णय लेने की उसकी क्षमता कैसी बनी रहती है। इन आंकड़ों के आधार पर यह समझने की कोशिश की जाती है कि कौन खिलाड़ी मैच के सबसे तनावपूर्ण क्षण में भी अपनी सामान्य क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन कर सकता है। मानसिक दबाव और प्रदर्शन का सीधा संबंध विशेषज्ञों के अनुसार, तनावपूर्ण परिस्थितियों में खिलाड़ियों के मस्तिष्क का वह हिस्सा अधिक सक्रिय हो जाता है जो भविष्य की चिंता, परिणाम और निर्णय लेने से जुड़ा होता है। इसके विपरीत, सफल खिलाड़ियों में शरीर की गतिविधियों और संतुलन को नियंत्रित करने वाले हिस्से अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक केवल यह नहीं देखते कि खिलाड़ी कितना अच्छा शॉट लगाता है, बल्कि यह भी विश्लेषण करते हैं कि दबाव की स्थिति में उसका मानसिक संतुलन कितना मजबूत रहता है। माना जा रहा है कि यही मानसिक अंतर कई बार जीत और हार के बीच निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे तैयार होती है पेनाल्टी विशेषज्ञों की सूची न्यूरोसाइंस से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर टीम प्रबंधन उन खिलाड़ियों की पहचान करता है जो तनावपूर्ण माहौल में भी शांत रहकर बेहतर निर्णय लेते हैं। जिन खिलाड़ियों का ध्यान आसानी से नहीं भटकता और जिनकी मानसिक स्थिरता अधिक होती है, उन्हें पेनाल्टी शूटआउट के लिए प्राथमिकता दी जाती है। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया का उद्देश्य केवल बेहतर पेनाल्टी लेने वाले खिलाड़ी चुनना ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की मानसिक तैयारी को भी मजबूत बनाना है, ताकि वे बड़े मुकाबलों में दबाव को बेहतर तरीके से संभाल सकें। क्लब फुटबॉल में पहले ही मिल चुकी है सफलता न्यूरोसाइंस आधारित यह तकनीक क्लब फुटबॉल में पहले भी प्रभावी साबित हो चुकी है। इंग्लैंड के दिग्गज क्लब लिवरपूल ने भी Neuro11 के साथ मिलकर खिलाड़ियों की मानसिक तैयारी पर काम किया था। क्लब के पूर्व मैनेजर युर्गेन क्लॉप ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि इस प्रणाली ने खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रिपोर्टों के अनुसार, एक बड़े कप फाइनल में लिवरपूल के खिलाड़ियों ने लगातार 11 पेनाल्टी सफलतापूर्वक गोल में बदली थीं, जिसे इस वैज्ञानिक तैयारी की बड़ी उपलब्धि माना गया। फुटबॉल में बढ़ती जा रही है तकनीक की भूमिका आधुनिक फुटबॉल तेजी से तकनीक आधारित खेल बनता जा रहा है। पहले जहां फिटनेस ट्रैकिंग, वीडियो एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ा, वहीं अब न्यूरोसाइंस भी टीमों की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में खिलाड़ियों की मानसिक क्षमता का विश्लेषण टीम चयन, मैच रणनीति और प्रदर्शन सुधार का अहम आधार बनेगा। इससे न केवल खिलाड़ियों की व्यक्तिगत तैयारी मजबूत होगी, बल्कि टीमों को बड़े मुकाबलों में बेहतर निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Mexico
फीफा वर्ल्ड कप में जीत का जश्न बना मातम

मेक्सिको सिटी, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मेजबान मेक्सिको की ऐतिहासिक जीत का जश्न उस समय मातम में बदल गया, जब राजधानी मेक्सिको सिटी में जश्न मना रहे तीन फुटबॉल प्रशंसकों की दम घुटने से मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब राउंड ऑफ 32 में मेक्सिको की जीत के बाद लाखों समर्थक सड़कों पर उतर आए और पूरे शहर में उत्सव का माहौल बन गया।   'एंजेल ऑफ इंडिपेंडेंस' स्मारक के पास हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेक्सिको सिटी के प्रतिष्ठित 'एंजेल ऑफ इंडिपेंडेंस' स्मारक के आसपास बड़ी संख्या में लोग जीत का जश्न मना रहे थे। इसी दौरान दो महिलाएं और एक पुरुष बेहोशी की हालत में पाए गए। सूचना मिलते ही आपातकालीन चिकित्सा दल मौके पर पहुंचा, लेकिन तीनों की मौत हो चुकी थी। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि मृतकों की उम्र क्रमशः 48, 44 और 19 वर्ष थी। फिलहाल उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है और घटना के कारणों की विस्तृत जांच जारी है।   मेयर ने लोगों से संयम बरतने की अपील की मेक्सिको सिटी की मेयर क्लारा ब्रुगाडा ने सोशल मीडिया के जरिए घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि तीन लोगों के बेहोश होने की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल तुरंत मौके पर भेजा गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि सार्वजनिक समारोहों और बड़े आयोजनों के दौरान जिम्मेदारी, सावधानी और संवेदनशीलता के साथ जश्न मनाएं। मेयर के अनुसार, जीत का जश्न मनाने के लिए करीब 10 लाख लोग शहर की सड़कों पर एकत्र हुए थे।   40 साल बाद मिली नॉकआउट जीत मेजबान मेक्सिको ने राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में इक्वाडोर को 2-0 से हराकर इतिहास रच दिया। टीम की ओर से जूलियन क्विनोन्स और राउल जिमेनेज ने गोल किए। इस जीत के साथ मेक्सिको ने 1986 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप नॉकआउट चरण में जीत दर्ज की और राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। अब अगले दौर में उसका सामना इंग्लैंड से होगा। ऐतिहासिक सफलता के बीच हुई यह दुखद घटना पूरे देश के लिए गहरे शोक का कारण बन गई।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Edin Džeko captains Bosnia and Herzegovina during a FIFA World Cup 2026 knockout match, setting an age record.
40 की उम्र के करीब भी कायम है एडिन जेको का जलवा, फीफा विश्व कप 2026 में बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 में अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। इसी कड़ी में बोस्निया-हर्जेगोविना के कप्तान एडिन जेको ने विश्व फुटबॉल के इतिहास में एक और यादगार उपलब्धि अपने नाम कर ली है। 39 वर्षीय स्टार स्ट्राइकर ने अमेरिका के खिलाफ राउंड ऑफ-32 मुकाबले में शुरुआती एकादश का हिस्सा बनते ही पुरुष फीफा विश्व कप के नॉकआउट चरण में खेलने वाले सबसे उम्रदराज़ आउटफील्ड खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उनकी बेहतरीन फिटनेस, अनुशासन, अनुभव और खेल के प्रति समर्पण का भी प्रतीक मानी जा रही है। दो दशक से अधिक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर चुके जेको ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मंच पर अनुभव की अहमियत आज भी बरकरार है। अंतरराष्ट्रीय करियर में जुड़ा एक और स्वर्णिम अध्याय एडिन जेको लंबे समय से बोस्निया-हर्जेगोविना फुटबॉल टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। कप्तान के रूप में उन्होंने वर्षों तक टीम का नेतृत्व किया और कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में अपनी छाप छोड़ी। विश्व कप 2026 में भी उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे फुटबॉल इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। 39 वर्ष की उम्र में विश्व कप जैसे सबसे बड़े मंच पर नॉकआउट मुकाबले में शुरुआती एकादश का हिस्सा बनना इस बात का प्रमाण है कि फिटनेस, मानसिक मजबूती और पेशेवर प्रतिबद्धता किसी भी खिलाड़ी के करियर को लंबा बना सकती है। अमेरिका के खिलाफ मुकाबले में अनुभव बना सबसे बड़ी ताकत बोस्निया-हर्जेगोविना के लिए अमेरिका के खिलाफ मुकाबला आसान नहीं था। हालांकि मैच का परिणाम अपनी जगह महत्वपूर्ण रहा, लेकिन जेको का मैदान पर उतरना ही अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण बन गया। उन्होंने यह दिखाया कि उम्र बढ़ने के बावजूद शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना संभव है, यदि खिलाड़ी अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को लगातार बनाए रखे। उनकी मौजूदगी ने युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश दिया कि मेहनत और अनुशासन के दम पर लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेला जा सकता है। रिकॉर्ड पर जल्द मंडरा सकता है खतरा हालांकि जेको ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है, लेकिन यह रिकॉर्ड ज्यादा समय तक उनके पास रहे, इसकी संभावना कम मानी जा रही है। विश्व कप 2026 में अभी कई अनुभवी खिलाड़ी नॉकआउट चरण में अपनी टीमों के लिए खेल रहे हैं। यदि वे अपने अगले मुकाबले में शुरुआती एकादश में शामिल होते हैं, तो जेको का यह रिकॉर्ड टूट भी सकता है। इसके बावजूद उनका नाम विश्व कप इतिहास में हमेशा एक खास स्थान रखेगा, क्योंकि उन्होंने उम्र के इस पड़ाव पर भी दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर अपनी उपयोगिता साबित की है। रोनाल्डो के बाद अब जेको के नाम नई उपलब्धि विश्व कप 2026 अनुभवी खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का गवाह बन रहा है। इससे पहले क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने विश्व कप में मैच की शुरुआत करने वाले सबसे उम्रदराज़ आउटफील्ड खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड बनाया था। अब एडिन जेको ने नॉकआउट चरण में सबसे उम्रदराज़ आउटफील्ड खिलाड़ी के रूप में नया इतिहास रच दिया है। इन दोनों दिग्गजों की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि आधुनिक फुटबॉल में उम्र सफलता की बाधा नहीं है। सही फिटनेस, अनुभव और निरंतर मेहनत के दम पर खिलाड़ी लंबे समय तक विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाए रख सकते हैं।  

surbhi जुलाई 2, 2026 0
Players representing their ancestral countries during the FIFA World Cup 2026 despite being born in different nations.
FIFA World Cup 2026: अपनी जन्मभूमि नहीं, पूर्वजों के देश के लिए खेल रहे करीब 290 फुटबॉलर, फ्रांस और नीदरलैंड बने दुनिया की 'टैलेंट फैक्ट्री'

नई दिल्ली: फीफा वर्ल्ड कप 2026 सिर्फ दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल टीमों के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि यह प्रवास, पहचान, नागरिकता और पारिवारिक विरासत की भी एक अनोखी कहानी बनकर सामने आया है। इस बार के टूर्नामेंट में बड़ी संख्या में ऐसे खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनका जन्म उस देश में नहीं हुआ है जिसकी राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनकर वे मैदान में उतर रहे हैं। टूर्नामेंट में शामिल कुल 1,248 खिलाड़ियों में से लगभग 290 खिलाड़ी ऐसे हैं, जो अपनी जन्मभूमि की बजाय अपने माता-पिता, दादा-दादी या पूर्वजों के देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यानी विश्व कप का लगभग हर चौथा खिलाड़ी प्रवासी पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। यह आंकड़ा वैश्विक प्रवास और दोहरी पहचान के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है। फ्रांस और नीदरलैंड बने दुनिया के सबसे बड़े 'फुटबॉल एक्सपोर्टर' फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सबसे अधिक खिलाड़ियों को दूसरे देशों की राष्ट्रीय टीमों तक पहुंचाने वाले देशों में फ्रांस और नीदरलैंड सबसे आगे हैं। आंकड़ों के अनुसार: फ्रांस में जन्मे 75 खिलाड़ी इस विश्व कप में अन्य देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। नीदरलैंड में जन्मे 42 खिलाड़ी अलग-अलग राष्ट्रीय टीमों की ओर से खेल रहे हैं। इसके बाद जर्मनी के 23, इंग्लैंड के 21, बेल्जियम के 11, स्पेन के 11 और स्वीडन के 10 खिलाड़ी अन्य देशों की जर्सी पहनकर मैदान में उतर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों की मजबूत फुटबॉल अकादमियां, आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था और युवा खिलाड़ियों के विकास पर विशेष ध्यान देने की वजह से यहां बड़ी संख्या में प्रतिभाएं तैयार होती हैं। हालांकि राष्ट्रीय टीम में सीमित स्थान होने के कारण कई खिलाड़ी अपने पारिवारिक मूल वाले देशों के लिए खेलने का विकल्प चुनते हैं। क्यूरासाओ और डीआर कांगो की टीमों में प्रवासी खिलाड़ियों का दबदबा इस विश्व कप में क्यूरासाओ और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DR Congo) प्रवासी खिलाड़ियों के सबसे बड़े उदाहरण बनकर सामने आए हैं। क्यूरासाओ की पूरी टीम ऐसे खिलाड़ियों से बनी है जिनका जन्म नीदरलैंड में हुआ। डीआर कांगो के 20 खिलाड़ी फ्रांस, बेल्जियम, इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में जन्मे हैं। इसके अलावा: मोरक्को के 19 खिलाड़ी हैती के 16 खिलाड़ी अल्जीरिया के 15 खिलाड़ी केप वर्दे के 13 खिलाड़ी भी प्रवासी परिवारों से जुड़े हुए हैं। इन खिलाड़ियों ने अपने पूर्वजों के देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए इन टीमों को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में नई पहचान दिलाई है। भारतीय मूल के चार खिलाड़ी भी विश्व कप में हालांकि भारतीय फुटबॉल टीम इस बार फीफा वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी, लेकिन भारतीय मूल के चार खिलाड़ी अलग-अलग देशों की ओर से टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें शामिल हैं: न्यूजीलैंड के सरप्रीत सिंह ऑस्ट्रेलिया के निशान वेलुपिल्लै डीआर कांगो के सैमुअल मूटूसामी कतर के तहसीन मोहम्मद जमशीद इन खिलाड़ियों की मौजूदगी भारतीय मूल के खिलाड़ियों की वैश्विक फुटबॉल में बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाती है। आखिर क्यों बढ़ रही है यह प्रवृत्ति? फीफा के नियम खिलाड़ियों को यह अधिकार देते हैं कि यदि उनके माता-पिता, दादा-दादी या पारिवारिक जड़ें किसी अन्य देश से जुड़ी हैं, तो वे निर्धारित पात्रता पूरी करने पर उस देश की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। इतिहास भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फ्रांस और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों का कभी अफ्रीका, कैरेबियन और एशिया के कई क्षेत्रों पर औपनिवेशिक शासन रहा था। बेहतर शिक्षा, रोजगार और जीवन की तलाश में इन देशों के लाखों लोग 20वीं सदी के दौरान यूरोप जाकर बस गए। उनकी अगली पीढ़ी वहीं पैदा हुई, वहीं फुटबॉल सीखी और पेशेवर खिलाड़ी बनी। बाद में उनमें से कई खिलाड़ियों ने अपने जन्म के देश की बजाय अपने पूर्वजों के देश के लिए खेलने का फैसला किया। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक फुटबॉल में यह रुझान आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है। वैश्वीकरण, दोहरी नागरिकता और अंतरराष्ट्रीय प्रवास ने राष्ट्रीय टीमों की तस्वीर को पहले से कहीं अधिक विविध और बहुसांस्कृतिक बना दिया है।  

surbhi जुलाई 2, 2026 0
FIFA World Cup 2026
FIFA World Cup 2026: किलियन एम्बाप्पे ने रचा इतिहास, वर्ल्ड कप नॉकआउट में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने

नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में स्वीडन के खिलाफ 3-0 की जीत में उन्होंने दो गोल दागकर न सिर्फ टीम को अगले दौर में पहुंचाया, बल्कि विश्व कप इतिहास में एक नया कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया। 27 वर्षीय स्टार फॉरवर्ड अब वर्ल्ड कप के नॉकआउट मुकाबलों में सबसे ज्यादा 10 गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने 88 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए इतिहास रच दिया।   रोनाल्डो और लियोनिडास को छोड़ा पीछे इससे पहले विश्व कप के नॉकआउट चरण में सबसे अधिक गोल करने का संयुक्त रिकॉर्ड ब्राजील के महान खिलाड़ियों लियोनिडास और रोनाल्डो के नाम था, जिन्होंने आठ-आठ गोल किए थे। एम्बाप्पे ने स्वीडन के खिलाफ दो गोल कर अपने नॉकआउट गोलों की संख्या 10 तक पहुंचा दी और दोनों दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।   एम्बाप्पे ने 2018 विश्व कप में अर्जेंटीना के खिलाफ दो गोल और फाइनल में क्रोएशिया के खिलाफ एक गोल किया था। 2022 विश्व कप में उन्होंने पोलैंड के खिलाफ दो गोल और अर्जेंटीना के खिलाफ फाइनल में हैट्रिक लगाई थी। 2026 संस्करण में स्वीडन के खिलाफ दो गोल के साथ उनका रिकॉर्ड और भी मजबूत हो गया है।   गोल्डन बूट की दौड़ में बढ़त स्वीडन के खिलाफ दो गोल के बाद एम्बाप्पे के मौजूदा टूर्नामेंट में छह गोल हो चुके हैं। वह गोलों के मामले में लियोनेल मेसी के बराबर पहुंच गए हैं, लेकिन दो असिस्ट के कारण गोल्डन बूट की रेस में उनसे आगे निकल गए हैं।   वहीं, विश्व कप इतिहास में एम्बाप्पे के कुल गोलों की संख्या अब 18 हो गई है। उन्होंने जर्मनी के दिग्गज मिरोस्लाव क्लोज के 16 गोल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस सूची में अब उनसे आगे केवल लियोनेल मेसी हैं, जिनके नाम 19 गोल दर्ज हैं। अब राउंड ऑफ 16 में पैराग्वे के खिलाफ होने वाले मुकाबले में एम्बाप्पे के पास इस रिकॉर्ड की बराबरी या उसे तोड़ने का सुनहरा मौका होगा।

anjali kumari जुलाई 1, 2026 0
Ronald Koeman
FIFA World Cup 2026: वर्ल्ड कप से बाहर होते ही नीदरलैंड्स के कोच रोनाल्ड कोमैन ने छोड़ा पद

नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 में नीदरलैंड्स के अभियान का अंत टीम के लिए दोहरी निराशा लेकर आया। राउंड ऑफ 32 में मोरक्को से मिली हार के बाद जहां टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई, वहीं मुख्य कोच Ronald Koeman ने भी अपने पद से हटने का ऐलान कर दिया। इस फैसले के साथ डच राष्ट्रीय टीम के साथ उनका दूसरा कार्यकाल भी समाप्त हो गया।   हार के बाद लिया बड़ा फैसला मोरक्को के खिलाफ मिली हार के बाद कोमैन ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि उन्होंने डच राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पूरी टीम का सपना विश्व कप में इतिहास रचने का था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने हार की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय टीम का कोच होने के नाते यह जिम्मेदारी उनकी भी थी।   दो कार्यकाल में कई उपलब्धियां कोमैन ने पहली बार 2018 में नीदरलैंड्स की कमान संभाली थी और 2020 तक टीम का नेतृत्व किया। इसके बाद 2023 में उन्होंने दोबारा राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच का पद संभाला। उनकी कोचिंग में नीदरलैंड्स ने UEFA Euro 2024 के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। इसके अलावा टीम ने यूरो 2021, यूरो 2024 और फीफा विश्व कप 2026 के लिए भी क्वालीफाई किया। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने टीम को 2019 में UEFA Nations League Final तक पहुंचाया था।   परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा कोमैन ने अपने बयान में कहा कि विश्व कप अभियान का इतनी जल्दी समाप्त होना बेहद निराशाजनक है। हालांकि, जब वह पीछे मुड़कर देखेंगे तो उन्हें टीम के साथ बिताए गए शानदार पल और सहयोग हमेशा याद रहेंगे। उन्होंने सभी खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और प्रशंसकों का आभार जताते हुए कहा कि अब वह अपनी पत्नी, बच्चों और पोते-पोतियों के साथ अधिक समय बिताना चाहते हैं। वहीं Royal Dutch Football Association ने भी पुष्टि की कि कोमैन अपना मौजूदा अनुबंध समाप्त होने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ाएंगे।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
FIFA World Cup 2026
FIFA वर्ल्ड कप 2026 का नॉकआउट स्टेज शुरू

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेले जा रहे FIFA वर्ल्ड कप 2026 का ग्रुप चरण समाप्त हो चुका है। अब टूर्नामेंट का सबसे रोमांचक दौर राउंड ऑफ 32 यानी नॉकआउट स्टेज शुरू होने जा रहा है। इस चरण में जीतने वाली टीमें प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में प्रवेश करेंगी, जबकि हारने वाली टीमों का विश्व कप अभियान यहीं समाप्त हो जाएगा।   16 टीमें हुईं बाहर, 32 टीमों ने बनाई जगह 48 टीमों वाले इस विश्व कप में ग्रुप स्टेज के बाद 16 टीमें बाहर हो चुकी हैं। इनमें दक्षिण कोरिया, उरुग्वे, ईरान, सऊदी अरब, कतर, स्कॉटलैंड, न्यूजीलैंड, तुर्किये, पनामा और उज्बेकिस्तान जैसी टीमें शामिल हैं। वहीं, 32 टीमों ने नॉकआउट चरण के लिए क्वालिफाई किया है।   मेसी और रोनाल्डो के मैच कब हैं?   फुटबॉल प्रेमियों की नजरें एक बार फिर लियोनेल मेसी की अर्जेंटीना और क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल पर टिकी हैं। पुर्तगाल बनाम क्रोएशिया – 3 जुलाई, भारतीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे अर्जेंटीना बनाम केप वर्डे – 4 जुलाई, भारतीय समयानुसार सुबह 3:30 बजे दोनों मुकाबले अपने-अपने सुपरस्टार खिलाड़ियों की वजह से सबसे ज्यादा चर्चित माने जा रहे हैं।   इन मुकाबलों पर भी रहेंगी निगाहें राउंड ऑफ 32 में कई हाई-वोल्टेज मुकाबले देखने को मिलेंगे। ब्राजील बनाम जापान का मैच तकनीक और आक्रामक फुटबॉल का दिलचस्प मुकाबला माना जा रहा है। वहीं फ्रांस बनाम स्वीडन में मौजूदा दावेदार फ्रांस के सामने स्वीडन की अनुशासित टीम बड़ी चुनौती पेश कर सकती है।   इसके अलावा नीदरलैंड बनाम मोरक्को, इंग्लैंड बनाम डीआर कांगो, स्पेन बनाम ऑस्ट्रिया और जर्मनी बनाम पैराग्वे जैसे मुकाबले भी रोमांच बढ़ाएंगे। अब हर मैच 'करो या मरो' का होगा, जहां एक छोटी सी गलती भी किसी टीम के विश्व कप जीतने के सपने को खत्म कर सकती है। ऐसे में नॉकआउट स्टेज में फुटबॉल प्रशंसकों को रोमांच, कड़े मुकाबले और कई यादगार पल देखने को मिलने की उम्मीद है।

abhishek singh जून 30, 2026 0
FIFA World Cup 2026
FIFA World Cup: मोरक्को का बड़ा उलटफेर, नीदरलैंड्स को पेनल्टी शूटआउट में हराकर किया बाहर

नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में मोरक्को ने रोमांचक मुकाबले में नीदरलैंड्स को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में जगह बना ली। निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय तक दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर रहीं, जिसके बाद मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ। इस जीत के साथ मोरक्को ने टूर्नामेंट में अपना शानदार अभियान जारी रखा, जबकि नीदरलैंड्स का सफर यहीं समाप्त हो गया।   आखिरी मिनट में बराबरी कर बदला मैच का रुख मुकाबले में नीदरलैंड्स ने 72वें मिनट में कोडी गैकपो के गोल की बदौलत बढ़त हासिल कर ली थी। ऐसा लग रहा था कि टीम जीत दर्ज कर लेगी, लेकिन इंजरी टाइम के 91वें मिनट में इस्सा डियोप ने शानदार गोल दागकर मोरक्को को बराबरी दिला दी। इसके बाद स्टॉपेज टाइम और 30 मिनट के अतिरिक्त समय में दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला पेनल्टी शूटआउट तक पहुंच गया।   शूटआउट में मोरक्को ने दिखाई सटीकता पेनल्टी शूटआउट में मोरक्को के सूफियान रहीमी, चेम्सदीन तालबी और इस्माइल सैबारी ने गोल दागकर टीम को 3-2 से जीत दिलाई। वहीं नीदरलैंड्स की ओर से ट्यून कूपमीनर्स और वाउट वेघोर्स्ट ही सफल हो सके। मोरक्को के गोलकीपर और खिलाड़ियों के संयम ने टीम को यादगार जीत दिलाई।   टूटा नीदरलैंड्स का रिकॉर्ड नीदरलैंड्स की टीम इससे पहले लगातार 11 विश्व कप में कम से कम राउंड ऑफ 16 तक पहुंचने में सफल रही थी। पिछले विश्व कप में टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी, लेकिन इस बार उसे शुरुआती नॉकआउट चरण में ही बाहर होना पड़ा। दूसरी ओर, पिछले विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचने वाला मोरक्को एक बार फिर मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहा है।   अब राउंड ऑफ 16 में मोरक्को का सामना 4 जुलाई को कनाडा से होगा। भारतीय समयानुसार यह मुकाबला रात 10:30 बजे खेला जाएगा। शानदार फॉर्म में चल रही मोरक्को की टीम इस जीत के बाद पूरे आत्मविश्वास के साथ अगले दौर में उतरेगी।

anjali kumari जून 30, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0