कथित स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। एजेंसी की पड़ताल में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें 70 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन और सैकड़ों ‘घोस्ट’ (फर्जी) बैंक अकाउंट्स का नेटवर्क सामने आया है। रूपाली चाकणकर के परिजनों को समन इस मामले में ED ने रूपाली चाकणकर की बहन प्रतिभा चाकणकर और उनके बेटे तन्मय को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। दोनों को अगले सप्ताह एजेंसी के सामने पेश होना होगा संदिग्ध बैंक खातों और लेनदेन को लेकर पूछताछ की जाएगी प्रतिभा चाकणकर ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उनके नाम पर खोले गए खाते फर्जी हैं और उनके जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया है। ‘घोस्ट अकाउंट’ नेटवर्क कैसे काम करता था? जांच में समता नागरी सहकारी पतसंस्था के भीतर एक सुनियोजित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। 134 से अधिक संदिग्ध फर्जी या ‘प्रॉक्सी’ अकाउंट एक ही मोबाइल नंबर से कई खाते संचालित अधिकांश खातों में अशोक खरात को नॉमिनी दिखाया गया ED के अनुसार, इन खातों को खोलने के लिए लोगों के आधार और पैन जैसे KYC दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया। 70 करोड़ से ज्यादा का संदिग्ध ट्रांजेक्शन एजेंसी ने 2022 से 2024 के बीच 70 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की पहचान की है। करीब 100 अकाउंट्स जांच के दायरे में 40 अकाउंट्स को FD की तरह इस्तेमाल किया गया 35.53 करोड़ रुपये जमा और 35.21 करोड़ रुपये निकाले गए इन खातों को कोड नंबर देकर फंड की आवाजाही को नियंत्रित किया जाता था, जिससे यह एक संगठित वित्तीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है। ‘लेयरिंग’ के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का शक ED का मानना है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल ‘लेयरिंग’ तकनीक के लिए किया गया, जिसमें पैसों को कई खातों में घुमाकर उसके असली स्रोत को छिपाया जाता है। जांच में यह भी सामने आया है कि धार्मिक गतिविधियों के नाम पर लोगों से दस्तावेज जुटाकर उनका दुरुपयोग किया गया। बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल एजेंसी ने पतसंस्था के निदेशक संदीप ओमप्रकाश कोयते को भी तलब किया है। जांच का फोकस इस बात पर है कि: एक ही मोबाइल नंबर से इतने खाते कैसे खोले गए? एक ही नॉमिनी होने के बावजूद सिस्टम ने अलर्ट क्यों नहीं किया? सहयोगी ने कबूला रोल जांच में एक अहम खुलासा तब हुआ जब खरात के करीबी सहयोगी अरविंद पांडुरंग बावके ने माना कि उसने खरात के निर्देश पर कई बार इन खातों में नकदी जमा कराई। नासिक तक फैला नेटवर्क मामले की जांच अब जगदंबा माता ग्रामीण बिगर शेती सहकारी पतसंस्था तक पहुंच गई है, जहां 34 संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान हुई है। आगे की कार्रवाई ED आने वाले दिनों में: और संदिग्ध खाताधारकों से पूछताछ करेगी मनी ट्रेल को ट्रैक करेगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच करेगी
झारखंड में ट्रेजरी घोटाला रूकने का नाम ही नहीं ले रहा। हर दिन एक नये कोषागार में गड़बड़ी के खुलासे हो रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक घोटाले की आंच राज्य के 15 जिलों तक पहुंच गई और गड़बड़ी की राशि का आंकड़ा 150 करोड़ पार कर चुका है। मतलब बड़ा घोटाला है ये, पिछले एक दशक से चल रहा था और राज्य को दीमक की तरह चाट रहा था। झारखंड ट्रेजरी घोटाला-2026 एक बड़े वित्तीय संकट और प्रशासनिक विफलता के रूप में उभरा है। यह घोटाला मुख्य रूप से पुलिस विभाग और कोषागार (Treasury) के बीच डेटा हेरफेर और फर्जी वेतन निकासी से जुड़ा है। कैसे होता रहा घोटाला यह घोटाला कोई एकमुश्त डकैती नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर बैठे लोगों द्वारा किया गया एक डिजिटल फ्रॉड है। जांच में ये खुलासे हुएः डेटा हेरफेर: पुलिस विभाग के अकाउंटेंट और कंप्यूटर ऑपरेटरों ने विभागीय कंप्यूटर डेटा में हेरफेर किया। फर्जी वेतन निकासी: मृत पुलिसकर्मियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों या काल्पनिक नामों के आधार पर फर्जी बैंक खाते जोड़े गए और सालों तक उनमें वेतन और भत्ते (TA/DA) भेजे गए। OTP का खेल: आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) के मोबाइल पर आने वाले OTP का दुरुपयोग कर डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए अवैध भुगतान को मंजूरी दी गई। पारिवारिक खातों का उपयोग: मुख्य आरोपियों ने सरकारी पैसा सीधे अपनी पत्नियों या रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया। घोटाले की व्यापकता और प्रभावित जिले शुरुआत में यह मामला बोकारो से शुरू हुआ था, लेकिन अब इसकी आंच राज्य के 15 जिलों तक फैल चुकी है: हजारीबाग: यहां सबसे बड़ी अवैध निकासी करीब ₹15-28 करोड़ की बात सामने आई है। बोकारो: करीब ₹6 करोड़ से ज्यादा का गबन पकड़ा गया है। चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम): यहां के पुलिस कोषागार से लगभग ₹26 लाख की अवैध निकासी की पुष्टि हुई है। अन्य जिले: रांची, पलामू, जमशेदपुर, देवघर और रामगढ़ भी जांच के दायरे में हैं। अनुमान है कि यह आंकड़ा ₹150 करोड़ से लेकर ₹500 करोड़ तक जा सकता है। जांच की वर्तमान स्थिति (Status of Investigation)... सरकार ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कई स्तरों पर जांच शुरू की है: CID और SIT पूरे मामले की जांच सीआईडी (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) कर रही है। हजारीबाग, बोकारो और चाईबासा में कई एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं। प्रमुख गिरफ्तारियां अब तक कई छोटे-बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें बोकारो के अकाउंटेंट कौशल कुमार पांडे, चाईबासा के सिपाही अकाउंटेंट देवनारायण मुर्मू और उनके सहयोगी शामिल हैं। 21 से अधिक बैंक खाते फ्रीज सीआईडी ने 21 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। हाई-लेवल कमेटी कर रही जांच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर आईएएस अधिकारियों और एजी (AG) ऑफिस के विशेषज्ञों की एक संयुक्त कमेटी बनाई गई है, जो सभी 24 जिलों की 33 ट्रेजरी का ऑडिट कर रही है। घोटाले का असर वेतन पर रोक: जांच के कारण राज्य के लगभग 70,000 से 80,000 पुलिसकर्मियों का वेतन मार्च 2026 से रुक गया था, क्योंकि डेटा वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा अन्य विभागों का वेतन भुगतान भी लंबित है। विपक्ष का हमला बीजेपी ने इसे "सफेदपोशों" का संरक्षण प्राप्त घोटाला बताते हुए CBI जांच की मांग की है। बाबूलाल मरांडी और अन्य नेताओं ने सरकार पर प्रशासनिक ढिलाई के आरोप लगाए हैं। प्रशासनिक बदलाव सरकार ने आदेश दिया है कि 3 साल से अधिक समय से एक ही ट्रेजरी या विभाग में जमे कर्मचारियों का तुरंत तबादला किया जाए। जांच की आंच कहां तक पहुंची? वर्तमान में जांच केवल निचले स्तर के क्लर्कों या अकाउंटेंट तक ही सीमित नहीं है। सीआईडी इस बात की जांच कर रही है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर निकासी बिना उच्च अधिकारियों (DDO और ट्रेजरी ऑफिसर्स) की मिलीभगत के संभव थी? यह भी खुलासा हुआ है कि राज्य के पांच जिलों के एसपी के खाते में पैसे ट्रांसफर हुए हैं। जांच अब उस 'सिंडिकेट' को खोजने की ओर बढ़ रही है, जो राज्य भर के कोषागारों में एक ही पैटर्न पर फ्रॉड कर रहा था। यदि बड़े अधिकारियों की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कुछ कड़े प्रशासनिक निलंबन देखने को मिल सकते हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोटक महिंद्रा बैंक और नगर निगम पंचकूला से जुड़े कथित 145 करोड़ रुपये के घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत एजेंसी ने हरियाणा और पंजाब के कई शहरों में एक साथ छापेमारी की। 12 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई ईडी ने बुधवार को चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, डेराबस्सी और पटियाला जिले के राजपुरा में कुल 12 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बिक्री-खरीद समझौते और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अहम सबूत बरामद किए। 145 करोड़ रुपये के गबन का आरोप ईडी के मुताबिक, यह मामला पंचकूला नगर निगम के करीब 145 करोड़ रुपये के सरकारी फंड के गबन से जुड़ा है। जांच एजेंसी का दावा है कि बैंक अधिकारियों, नगर निगम कर्मियों और निजी व्यक्तियों ने मिलकर सुनियोजित साजिश के तहत इस घोटाले को अंजाम दिया। फर्जी दस्तावेजों से खोले गए बैंक खाते जांच में सामने आया है कि नगर निगम पंचकूला के नाम पर फर्जी और जाली दस्तावेजों के जरिए अनधिकृत बैंक खाते खोले गए। इसके बाद असली खातों से सरकारी धन को इन फर्जी खातों में ट्रांसफर किया गया। रियल एस्टेट में लगाया गया पैसा ईडी के अनुसार, गबन की गई रकम को कई कंपनियों और व्यक्तियों के जरिए घुमाया गया। बाद में यह पैसा निजी लोगों और रियल एस्टेट फर्मों तक पहुंचाया गया। नगर निगम को धोखा देने के लिए 145 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें भी जारी की गईं। ACB की FIR के बाद शुरू हुई जांच यह जांच पंचकूला एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। जांच में और खुलासों की संभावना ईडी का कहना है कि छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
Rajkot में एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब ₹2500 करोड़ के इस घोटाले में निजी बैंकों के अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। पुलिस ने अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं। फर्जी खातों के जरिए होता था खेल पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान के आधार पर कई बैंक खाते खुलवाए। इन खातों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन के लिए किया जाता था, जिससे करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। बैंक अधिकारियों की मिलीभगत जांच में सामने आया है कि Yes Bank, Axis Bank और HDFC Bank के कुछ अधिकारियों ने इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने में मदद की। आरोप है कि इन अधिकारियों ने: संदिग्ध खातों को खोलने और सक्रिय रखने में सहयोग किया बैंक के अलर्ट सिस्टम को नजरअंदाज किया बड़े ट्रांजैक्शन को छिपाने में मदद की 85 खाते चिन्हित, 535 शिकायतें दर्ज पुलिस के अनुसार, अब तक इस रैकेट से जुड़े 85 बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है। वहीं, साइबर क्राइम पोर्टल पर 535 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। हवाला नेटवर्क से जुड़ाव जांच में यह भी सामने आया है कि खातों से निकाली गई रकम को हवाला चैनलों के जरिए आगे ट्रांसफर किया जाता था, जिससे इस घोटाले का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है। पुलिस की कार्रवाई जारी पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को भारत लाने की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। बेल्जियम की एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील ने स्पष्ट संकेत दिया है कि चोकसी को भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है। एंटवर्प कोर्ट ने क्या कहा? बेल्जियम के एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील ने 3 अप्रैल को दिए अपने फैसले में: चोकसी के भारत प्रत्यर्पण की सिफारिश न्याय मंत्रालय से की कहा कि उस पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप प्रथम दृष्टया सही बनते हैं उसके “अपहरण” के दावे को खारिज कर दिया हालांकि, सबूत नष्ट करने से जुड़े एक आरोप को स्थानीय कानून के आधार पर हटा दिया गया। शरण की मांग भी ठुकराई गई चोकसी ने बेल्जियम में शरण लेने की कोशिश की थी, लेकिन अदालत ने उसकी इस याचिका को भी खारिज कर दिया। इससे उसके बचाव के विकल्प और सीमित हो गए हैं। अब आगे क्या? अब अंतिम फैसला बेल्जियम के न्याय मंत्रालय को लेना है। मंत्रालय आने वाले महीनों में तय करेगा कि चोकसी को भारत भेजा जाए या नहीं भारत सरकार पहले से ही उसके प्रत्यर्पण के लिए प्रयासरत है गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया अप्रैल 2025 में बेल्जियम पुलिस ने चोकसी को एंटवर्प में गिरफ्तार किया था दिसंबर 2025 में बेल्जियम की शीर्ष अदालत ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी थी नीरव मोदी को भी झटका इस केस से जुड़े एक और आरोपी नीरव मोदी को भी हाल ही में बड़ा झटका लगा है। ब्रिटेन की अदालत ने उसकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी। क्या मतलब है इस फैसले का? यह फैसला भारत के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। अगर अंतिम मंजूरी मिलती है, तो चोकसी को भारत लाकर PNB घोटाले में कानूनी कार्रवाई तेज हो सकती है।
पटना: बिहार की राजधानी पटना में करोड़ों की ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड राहुल कालरा और उनकी पत्नी रुचिका कालरा को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक होटल से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर कपड़ा धुलाई कंपनी की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप है। विदेश भागने की तैयारी में थे आरोपी पटना पुलिस के मुताबिक, राहुल कालरा और उनकी पत्नी विदेश फरार होने की फिराक में थे। इसी दौरान पुलिस को इनकी लोकेशन मिली और छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब ट्रांजिट रिमांड पर उन्हें पटना लाकर पूछताछ की जाएगी। फ्रेंचाइजी के नाम पर करोड़ों की ठगी जांच में सामने आया है कि राहुल कालरा खुद को एक प्रतिष्ठित वॉशिंग (कपड़ा/वाहन धुलाई) कंपनी का संचालक बताकर लोगों को फ्रेंचाइजी देने का झांसा देता था। कई कारोबारियों ने इस झांसे में आकर करोड़ों रुपये निवेश किए, लेकिन: न तो कोई यूनिट स्थापित की गई न मशीनें उपलब्ध कराई गईं और न ही निवेशकों को पैसा वापस मिला पटना समेत कई शहरों में दर्ज केस इस मामले में गांधी मैदान थाना में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। एक केस साल 2025 में दूसरा जनवरी 2026 में दर्ज हुआ एक पीड़ित ने 1.85 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा एसके पुरी थाना में भी मामला दर्ज है। देशभर में फैला था ठगी का नेटवर्क जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने बिहार के अलावा अन्य राज्यों में भी लोगों को निशाना बनाया। भागलपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी निवेशकों से ठगी के मामले सामने आए हैं। पुलिस को शक है कि यह एक बड़ा संगठित नेटवर्क है। कौन है राहुल कालरा? राहुल कालरा पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी में रह चुका है खुद को एक निजी कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) बताता था कपड़ा और वाहन धुलाई से जुड़ा कारोबार चलाने का दावा करता था इसी कारोबार की फ्रेंचाइजी के नाम पर लोगों को निवेश के लिए फंसाता था इस पूरे खेल में उसकी पत्नी रुचिका कालरा और अन्य सहयोगियों की भी भूमिका सामने आई है। ठिकाना बदल-बदल कर छिप रहे थे आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों लगातार अपना ठिकाना बदल रहे थे। आखिरकार पुलिस को इनकी जानकारी गुरुग्राम के एक होटल में मिली, जहां से उन्हें दबोच लिया गया। पुलिस करेगी बड़ा खुलासा पटना पुलिस इस पूरे मामले का विस्तृत खुलासा करने की तैयारी में है। पूछताछ के बाद ठगी के नेटवर्क और अन्य शामिल लोगों के बारे में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
झारखंड के गुमला में सनसनीखेज मामला झारखंड के गुमला जिले से दोस्ती और भरोसे को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला शिक्षक ने अपनी ही करीबी दोस्त पर 32 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया है। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और लोग हैरान हैं कि किस तरह भरोसे का फायदा उठाकर इतनी बड़ी धोखाधड़ी की गई। साधारण पहचान से गहरी दोस्ती, फिर हुआ धोखा पीड़िता (परिवर्तित नाम प्रमिला) एक आर्मी स्कूल में शिक्षिका हैं। उन्होंने सदर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी रेखा मिंज मूल रूप से गुमला की रहने वाली है और फिलहाल रांची के अरगोड़ा इलाके में रहती है। दोनों के बीच पहले सामान्य जान-पहचान थी, जो समय के साथ गहरी दोस्ती में बदल गई। कोयला कारोबार में निवेश का दिया झांसा आरोप है कि रेखा मिंज ने प्रमिला को कोयला कारोबार में निवेश करने का लालच दिया। उसने कम समय में अधिक मुनाफा दिलाने का भरोसा दिलाया। भरोसे में आकर प्रमिला ने अलग-अलग किस्तों में पैसे देना शुरू किया, जो बढ़ते-बढ़ते 32 लाख रुपये तक पहुंच गया। कर्ज लेकर और जमीन बेचकर जुटाई रकम इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़िता ने इतनी बड़ी रकम जुटाने के लिए कर्ज लिया और अपनी जमीन तक बेच दी। उसे उम्मीद थी कि निवेश से उसे अच्छा मुनाफा मिलेगा, लेकिन न तो कोई फायदा मिला और न ही मूल रकम वापस हुई। पैसे मांगने पर आरोपी ने तोड़ा संपर्क जब पीड़िता ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए, तो आरोपी लगातार टालमटोल करती रही। बाद में उसने संपर्क भी बंद कर दिया। इससे पीड़िता को यकीन हो गया कि वह ठगी का शिकार हो चुकी है, जिसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जांच में जुटी, पूछताछ जारी मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर थाना पुलिस ने आरोपी को पूछताछ के लिए बुलाया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह तो शामिल नहीं है। लोगों के लिए चेतावनी यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि आर्थिक मामलों में बिना जांच-पड़ताल के किसी पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी निवेश से पहले पूरी जानकारी लें और जल्दबाजी में फैसला न करें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।