विक्टोरिया, एजेंसियां। भारत और सेशेल्स ने डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लागू करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा के दौरान हुए इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच डिजिटल लेनदेन को नई गति मिलने की उम्मीद है। 2026 के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि सेशेल्स में UPI सेवा को वर्ष 2026 के अंत तक परिचालन में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद भारतीय पर्यटक, कारोबारी और प्रवासी भारतीय UPI के जरिए आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा UPI लागू होने से भारत और सेशेल्स के बीच पर्यटन, व्यापार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। भारतीय पर्यटकों को नकदी या कार्ड पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और स्थानीय व्यापारियों को भी तेज एवं सुरक्षित भुगतान प्रणाली का लाभ मिलेगा। डिजिटल सहयोग का नया अध्याय UPI समझौता भारत और सेशेल्स के बीच हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों में शामिल है। दोनों देशों ने स्वास्थ्य, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष सहयोग और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
मुंबई, एजेंसियां। Welcome To The Jungle ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए रिलीज के चौथे दिन दुनियाभर में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। पहले वीकेंड में शानदार कमाई के बाद सोमवार को फिल्म की रफ्तार कुछ धीमी रही, लेकिन इसके बावजूद फिल्म ने 100 करोड़ क्लब में जगह बना ली है । फिल्म में Akshay Kumar , Sunil Shetty के साथ कई बड़े सितारे नजर आ रहे हैं। कॉमेडी और एक्शन से भरपूर इस मल्टीस्टारर फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वीकेंड में फिल्म की कमाई में फिर उछाल देखने को मिल सकता है।
नई दिल्ली: भारत का डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) अब अफ्रीकी द्वीपीय देश सेशेल्स तक पहुंचने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सेशेल्स यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच UPI को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के बाद सेशेल्स भी उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां भारतीय यात्री UPI आधारित डिजिटल भुगतान का लाभ उठा सकेंगे। किन देशों में पहले से उपलब्ध है UPI? सेशेल्स के शामिल होने के बाद भारतीय UPI नेटवर्क का दायरा और बढ़ गया है। इससे पहले भारतीय पर्यटक निम्न देशों में UPI के जरिए मर्चेंट पेमेंट कर सकते हैं— सिंगापुर नेपाल भूटान श्रीलंका मॉरीशस संयुक्त अरब अमीरात कतर फ्रांस कंबोडिया अब इस सूची में सेशेल्स भी शामिल हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सेशेल्स यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इनमें UPI लागू करने, जन औषधि सहयोग, जलवायु परिवर्तन, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी शामिल है। भारतीय यात्रियों को क्या होगा फायदा? इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय पर्यटकों और व्यवसायियों को मिलेगा। मुख्य फायदे: नकद रखने की जरूरत कम होगी। डिजिटल भुगतान पहले से अधिक आसान होगा। भुगतान प्रक्रिया तेज और सुविधाजनक बनेगी। भारत और सेशेल्स के बीच फिनटेक सहयोग मजबूत होगा। सेशेल्स हिंद महासागर का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहां हर वर्ष हजारों भारतीय पर्यटक छुट्टियां मनाने पहुंचते हैं। भारतीयों के लिए वीजा-फ्री डेस्टिनेशन भारतीय नागरिकों को सेशेल्स यात्रा के लिए पहले से वीजा लेने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, पर्यटन उद्देश्य से पहुंचने वाले यात्रियों को आगमन पर Visitor Permit लेना होता है। सेशेल्स में भारतीय मूल के लोगों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति है। भारत से वहां चावल, दवाइयां, वस्त्र, वाहन, मशीनरी, स्पेयर पार्ट्स और प्लास्टिक उत्पादों का निर्यात किया जाता है। भारत की डिजिटल ताकत को मिल रही वैश्विक पहचान पिछले कुछ वर्षों में UPI दुनिया के सबसे सफल डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म में से एक बनकर उभरा है। अब इसका विस्तार लगातार नए देशों तक हो रहा है, जिससे सीमा पार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलने के साथ भारत की फिनटेक क्षमता को भी वैश्विक पहचान मिल रही है।
नई दिल्ली: भारतीय स्टार्टअप जगत के चर्चित उद्यमी कुणाल शाह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। फिनटेक कंपनी CRED को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के बाद अब वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp की कमान संभालने जा रहे हैं। Meta ने उन्हें WhatsApp का नया ग्लोबल CEO नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ भारतीय उद्यमिता को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली है। हाल ही में कुणाल शाह ने CRED के CEO पद से हटने की घोषणा की थी। कंपनी की दैनिक जिम्मेदारियां अब मितेन संपत संभालेंगे, जबकि कुणाल शाह शेयरधारक और रणनीतिक भूमिका में जुड़े रहेंगे। कौन हैं कुणाल शाह? मुंबई में जन्मे कुणाल शाह एक गुजराती कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता फार्मास्युटिकल व्यवसाय से जुड़े थे। इंजीनियरिंग के बजाय उन्होंने मुंबई के विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने NMIMS से MBA शुरू किया, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़कर उद्यमिता की राह चुन ली। उनका पहला बड़ा वेंचर PaisaBack था। इसके बाद वर्ष 2010 में उन्होंने FreeCharge की सह-स्थापना की। यह कंपनी इतनी सफल रही कि 2015 में Snapdeal ने इसे लगभग 2,800 करोड़ रुपये में खरीद लिया। कैसे बना CRED भारत का बड़ा फिनटेक ब्रांड? FreeCharge की सफलता के बाद कुणाल शाह ने 2018 में CRED की शुरुआत की। कंपनी का उद्देश्य समय पर क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान करने वाले ग्राहकों को रिवॉर्ड देना था। धीरे-धीरे CRED ने भुगतान, लोन, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट और क्रेडिट कार्ड सेवाओं तक अपना विस्तार किया। CRED से जुड़े प्रमुख आंकड़े विवरण आंकड़े स्थापना वर्ष 2018 यूजर्स 1.7 करोड़ से अधिक FY25 राजस्व ₹2,735 करोड़ वैल्यूएशन 4.5 अरब डॉलर Meta की हिस्सेदारी लगभग 20% Meta ने हाल ही में CRED में 90 करोड़ डॉलर (करीब 8,550 करोड़ रुपये) का निवेश भी किया है। WhatsApp में क्या होगी नई भूमिका? रिपोर्ट्स के अनुसार, कुणाल शाह WhatsApp के बिजनेस मॉडल को और मजबूत बनाने पर काम करेंगे। उनकी प्राथमिकता विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन आधारित सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स के विस्तार पर होगी। वह मौजूदा प्रमुख विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्होंने पिछले सात वर्षों में WhatsApp के यूजर बेस को दोगुने से भी अधिक बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। कुणाल शाह का मानना है कि WhatsApp ने अब तक शानदार सफर तय किया है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। कितनी है कुणाल शाह की नेटवर्थ? विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में कुणाल शाह की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 15,000 करोड़ रुपये है। उनकी संपत्ति के प्रमुख स्रोत हैं: CRED में हिस्सेदारी FreeCharge की बिक्री से मिली पूंजी 200 से अधिक स्टार्टअप्स में एंजेल निवेश विभिन्न टेक कंपनियों में निवेश दिलचस्प बात यह है कि कुणाल शाह लंबे समय तक CRED से बेहद कम प्रतीकात्मक वेतन लेने के कारण भी चर्चा में रहे हैं। WhatsApp में उनकी नई भूमिका भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
PFRDA Pension Sahayak: पेंशनधारकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने 'पेंशन सहायक' नाम से एक नया AI-आधारित शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह नया सिस्टम पुराने Central Grievance Management System (CGMS) की जगह लेगा और पेंशन से जुड़ी समस्याओं के समाधान को पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज बनाएगा। यह आधुनिक प्लेटफॉर्म वेब, मोबाइल और व्हाट्सऐप जैसी सेवाओं को एक ही डिजिटल इकोसिस्टम में जोड़ता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव मिलेगा। 22 भारतीय भाषाओं में मिलेगी सुविधा 'पेंशन सहायक' की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें Bhashini AI का इंटीग्रेशन किया गया है। इसके जरिए यूजर्स 22 भारतीय भाषाओं में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इतना ही नहीं, जवाब भी उसी भाषा में मिलेगा और ऑडियो फॉर्मेट में भी सुना जा सकेगा। 'पेंशन सहायक' की 5 बड़ी खूबियां 1. PRAN और पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं अब यूजर्स सिर्फ अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और OTP के जरिए लॉगिन कर सकेंगे। इसके लिए PRAN या पासवर्ड की आवश्यकता नहीं होगी। 2. एक मोबाइल नंबर से जुड़े सभी अकाउंट एक साथ दिखेंगे अगर किसी व्यक्ति के एक ही मोबाइल नंबर से कई PRAN जुड़े हैं, तो लॉगिन के बाद सभी अकाउंट्स एक ही स्क्रीन पर दिखाई देंगे। अटल पेंशन योजना (APY) के वे सदस्य जिन्होंने अपना PRAN नंबर भूल गए हैं, वे भी आसानी से उसे खोज सकेंगे। 3. स्थानीय भाषा में वॉइस कमांड से शिकायत दर्ज करने की सुविधा यूजर्स अपनी पसंदीदा भाषा में बोलकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं और उसी भाषा में जवाब भी प्राप्त कर सकते हैं। 4. शिकायत का स्वतः एस्केलेशन यदि तय समय सीमा के भीतर शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो सिस्टम स्वतः ही मामले को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा देगा। 5. समाधान से असंतुष्ट होने पर एक क्लिक में आगे बढ़ेगा मामला अगर यूजर दिए गए समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो वह केवल एक क्लिक के जरिए मामले को ओम्बड्समैन या NPS ट्रस्ट के पास भेज सकता है। साथ ही समाधान की गुणवत्ता को रेटिंग देने की सुविधा भी उपलब्ध है। पुराने सिस्टम से कितना अलग है नया प्लेटफॉर्म? पुराना CGMS सिस्टम अपेक्षाकृत पारंपरिक था और उपयोगकर्ताओं को तकनीकी जानकारी की आवश्यकता होती थी। वहीं नया 'पेंशन सहायक' पूरी तरह AI-संचालित, वॉइस-सक्षम और यूजर-फ्रेंडली प्लेटफॉर्म है। अब पेंशनधारकों को सिर्फ अपनी समस्या बतानी होगी, बाकी का काम सिस्टम खुद संभालेगा। इससे शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आसान बनने की उम्मीद है।
Turtlemint Fintech IPO: इंश्योरटेक सेक्टर की प्रमुख कंपनी टर्टलमिंट फिनटेक सॉल्यूशंस का बहुप्रतीक्षित आईपीओ 19 जून 2026 से आम निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। कंपनी ने इस सार्वजनिक निर्गम का आकार 883 करोड़ रुपये रखा है और इसके लिए प्रति शेयर 144 रुपये से 152 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया है। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया 18 जून को शुरू हो चुकी है। ₹883 करोड़ का है आईपीओ टर्टलमिंट फिनटेक इस आईपीओ के जरिए कुल 883 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसमें: 660.72 करोड़ रुपये के नए शेयर (Fresh Issue) जारी किए जाएंगे। 221.95 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत बेचे जाएंगे। ऊपरी प्राइस बैंड 152 रुपये के आधार पर कंपनी का अनुमानित मार्केट वैल्यूएशन करीब 4,500 करोड़ रुपये आंका गया है। कब तक लगा सकेंगे बोली? रिटेल निवेशकों के लिए यह इश्यू: ओपनिंग डेट: 19 जून 2026 क्लोजिंग डेट: 23 जून 2026 तक खुला रहेगा। वहीं एंकर निवेशकों ने 18 जून को ही इसमें निवेश के लिए बोली लगाई। न्यूनतम कितना निवेश करना होगा? कंपनी ने आईपीओ का लॉट साइज 98 शेयर तय किया है। एक शेयर का अधिकतम मूल्य: ₹152 एक लॉट का निवेश: ₹14,896 निवेशकों को कम से कम एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा, जबकि इसके बाद उसी के गुणक में अतिरिक्त बोली लगाई जा सकेगी। किस वर्ग के लिए कितना आरक्षण? इश्यू में विभिन्न निवेशक श्रेणियों के लिए आरक्षण इस प्रकार है: 75% – क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) 15% – नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) 10% – रिटेल निवेशक ग्रे मार्केट में कैसा है माहौल? ग्रे मार्केट में फिलहाल टर्टलमिंट आईपीओ का प्रीमियम लगभग 1.32% बताया जा रहा है। मौजूदा संकेतों के अनुसार, ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर शेयर में लगभग ₹2 प्रति शेयर की संभावित लिस्टिंग गेन का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, जीएमपी समय के साथ बदल सकता है और इसे निवेश का एकमात्र आधार नहीं माना जाना चाहिए। महत्वपूर्ण तारीखें इवेंट तारीख एंकर बुक ओपन 18 जून 2026 आईपीओ ओपन 19 जून 2026 आईपीओ क्लोज 23 जून 2026 अलॉटमेंट 24 जून 2026 रिफंड प्रक्रिया 25 जून 2026 डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट 25 जून 2026 लिस्टिंग 29 जून 2026 क्या काम करती है Turtlemint? टर्टलमिंट एक टेक्नोलॉजी-आधारित इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म है, जो ग्राहकों, इंश्योरेंस कंपनियों और डिजिटल पार्टनर्स को एक मंच पर जोड़ता है। 30 सितंबर 2025 तक: कंपनी के पास 6 लाख से अधिक डिजिटल पार्टनर्स थे। इनमें करीब 4.85 लाख PoSPs (Point of Sales Persons) शामिल थे। अप्रैल 2022 से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने 1.97 करोड़ इंश्योरेंस पॉलिसियों के वितरण में मदद की।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।