Footwear Trends

Chic flat leather sandals for stylish summer outfits, from casual looks to elegant vacation wear
Flip-Flops से हो गए हैं बोर? इस समर ट्राई करें ये 8 Chic Flat Sandals, हर लुक में दिखेंगी स्टाइलिश

गर्मियों में फ्लिप-फ्लॉप भले ही सबसे आरामदायक फुटवियर हों, लेकिन अगर आप अपने समर लुक में थोड़ा एलिगेंस और पॉलिश्ड टच जोड़ना चाहती हैं, तो फ्लैट लेदर सैंडल्स एक बेहतरीन विकल्प हो सकती हैं। ये सैंडल्स फ्लिप-फ्लॉप जैसी हल्की और आरामदायक होती हैं, लेकिन उनका क्लीन और सोफिस्टिकेटेड डिजाइन इन्हें कैजुअल से लेकर स्मार्ट आउटफिट्स तक के लिए परफेक्ट बनाता है। फैशन की दुनिया में इन दिनों मिनिमल फ्लैट सैंडल्स का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। बेहद पतली सोल, सिंपल स्ट्रैप और प्रीमियम लेदर फिनिश वाली ये सैंडल्स बिना ज्यादा मेहनत के पूरे लुक को स्टाइलिश बना देती हैं। फ्लैट सैंडल्स क्यों हैं समर की परफेक्ट चॉइस? फ्लैट लेदर सैंडल्स की सबसे खास बात है इनका सिंपल लेकिन टाइमलेस डिजाइन। इन्हें लिनेन पैंट्स, कॉटन शर्ट, लॉन्ग समर ड्रेस, बैगी जींस या बेसिक टैंक टॉप के साथ आसानी से स्टाइल किया जा सकता है। ऑफिस से लेकर वीकेंड आउटिंग, शॉपिंग और वेकेशन तक, सही डिजाइन वाली फ्लैट सैंडल्स कई मौकों पर काम आ सकती हैं। इस सीजन के 8 Chic Flat Sandals 1. Toteme Textured Leather Slides मिनिमल और प्रीमियम लुक पसंद करने वालों के लिए टेक्सचर्ड लेदर स्लाइड्स एक शानदार विकल्प हैं। कीमत करीब ₹56,975 बताई गई है। 2. Massimo Dutti Flat Woven Leather Sandals वोवन लेदर डिजाइन इन्हें क्लासिक और एलिगेंट बनाता है। इनकी कीमत करीब ₹13,900 है। 3. Charles & Keith Yara Canvas Strappy Sandals स्ट्रैपी डिजाइन के साथ ये सैंडल्स समर आउटिंग और कैजुअल लुक के लिए अच्छी पसंद हो सकती हैं। कीमत करीब ₹9,999 है। 4. Zara Multi-strap Flat Sandals टॉपस्टिचिंग वाले मल्टी-स्ट्रैप सैंडल्स बजट में ट्रेंडी लुक पाने का विकल्प हैं। कीमत करीब ₹2,950 है। 5. Bottega Veneta Riva Intrecciato Leather Sandals इंट्रेचियाटो लेदर डिजाइन के साथ यह लग्जरी ऑप्शन है। इसकी कीमत करीब ₹1,36,740 बताई गई है। 6. Tory Burch Ines Single-band Slides सिंगल-बैंड डिजाइन इसे बेहद क्लीन और सोफिस्टिकेटेड लुक देता है। कीमत करीब ₹32,999 है। 7. Slomotion Milo Sandals सिंपल और आरामदायक डिजाइन वाली Milo sandals रोजमर्रा के समर लुक के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। कीमत करीब ₹5,600 है। 8. Hermès Oran Sandals फ्लैट सैंडल्स की दुनिया में Hermès Oran एक आइकॉनिक नाम है। इसका सिग्नेचर 'H' कट-आउट स्ट्रैप इसे तुरंत पहचान देने वाला डिजाइन बनाता है। यह 1997 से लग्जरी समर फुटवियर का लोकप्रिय विकल्प बना हुआ है। कैसे करें फ्लैट सैंडल्स को स्टाइल? अगर आप effortless chic लुक चाहती हैं, तो फ्लैट सैंडल्स को लूज लिनेन पैंट और oversized shirt के साथ पहन सकती हैं। लॉन्ग, हल्की समर ड्रेस के साथ ये सैंडल्स आपको Mediterranean-inspired लुक देंगी। वहीं, बैगी जींस और व्हाइट टैंक टॉप के साथ इन्हें पहनकर आप बेहद आसान लेकिन स्टाइलिश कैजुअल लुक पा सकती हैं। फ्लिप-फ्लॉप की तुलना में फ्लैट लेदर सैंडल्स आपके लुक को ज्यादा structured और sophisticated बनाती हैं। हालांकि इन्हें पहनने से पहले पैरों की grooming का भी ध्यान रखना जरूरी है।  

surbhi जुलाई 29, 2026 0
Converse Chuck Taylor high-top sneakers return as one of the biggest fashion trends of 2026 with timeless street style appeal.
2026 का नया फैशन ट्रेंड बने Converse Chuck Taylor स्नीकर्स, हाई-टॉप क्लासिक शूज़ की फिर बढ़ी लोकप्रियता

नई दिल्ली: फैशन की दुनिया में ट्रेंड्स आते-जाते रहते हैं, लेकिन कुछ क्लासिक स्टाइल ऐसे होते हैं जो समय-समय पर दमदार वापसी करते हैं। साल 2026 में ऐसा ही कमबैक Converse Chuck Taylor स्नीकर्स ने किया है। एक समय युवाओं की पहली पसंद रहे ये हाई-टॉप स्नीकर्स अब फिर से फैशन इंडस्ट्री में छा रहे हैं और स्ट्रीट स्टाइल से लेकर सेलिब्रिटी लुक्स तक हर जगह नजर आ रहे हैं। हाल ही में न्यूयॉर्क की सड़कों पर सबसे ज्यादा दिखाई देने वाले स्नीकर्स में Converse Chuck Taylor शामिल रहे। फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोग अब ऐसे फुटवियर पसंद कर रहे हैं जो स्टाइलिश होने के साथ-साथ आरामदायक, भरोसेमंद और लंबे समय तक चलने वाले हों। यही वजह है कि लगभग एक सदी पुराना यह आइकॉनिक डिज़ाइन एक बार फिर चर्चा में है। 100 साल पुराना डिजाइन, लेकिन आज भी ट्रेंड में Converse Chuck Taylor का इतिहास करीब 100 साल पुराना है। इस क्लासिक स्नीकर्स को पहली बार 1922 में नया नाम मिला था और तब से यह दुनिया के सबसे पहचानने योग्य फुटवियर डिजाइनों में शामिल है। Converse की फुटवियर और डिजाइन वाइस प्रेसिडेंट चैवॉन वेबस्टर के अनुसार, आज के उपभोक्ता ऐसे प्रोडक्ट चाहते हैं जो ईमानदार डिजाइन, बहुउपयोगिता और विश्वसनीयता का प्रतीक हों। Chuck Taylor इन सभी खूबियों पर खरा उतरता है। उन्होंने बताया कि इसका हाई-टॉप सिल्हूट, रबर टो कैप, क्लासिक पैच, सिलाई का डिजाइन और वल्केनाइज्ड सोल इसे अन्य स्नीकर्स से अलग पहचान देते हैं। यही कारण है कि यह लगभग हर तरह के आउटफिट के साथ आसानी से मैच हो जाता है। स्पोर्ट्स से शुरू हुआ सफर, पॉप कल्चर का बना हिस्सा Chuck Taylor को शुरुआत में बास्केटबॉल खिलाड़ियों के लिए तैयार किया गया था। इसकी नॉन-स्लिप रबर सोल खिलाड़ियों को बेहतर ग्रिप देने के लिए डिजाइन की गई थी। समय के साथ यह सिर्फ स्पोर्ट्स शू नहीं रहा, बल्कि संगीत, फिल्मों, टेलीविजन और फैशन की दुनिया का अहम हिस्सा बन गया। कई मशहूर कलाकारों, मॉडल्स और हॉलीवुड सितारों ने इसे अपने सिग्नेचर स्टाइल में शामिल किया। टीवी सीरीज Euphoria में अभिनेत्री Zendaya द्वारा पहने गए Chuck Taylor स्नीकर्स भी काफी चर्चा में रहे। इसके अलावा सुपरमॉडल्स और म्यूजिक इंडस्ट्री के कई बड़े नाम इन्हें अपने कैजुअल और स्टेज लुक का हिस्सा बना चुके हैं। हर आउटफिट के साथ आसानी से होता है मैच Converse Chuck Taylor की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुउपयोगिता है। इसे जींस और सफेद टी-शर्ट के साथ पहनना सबसे क्लासिक स्टाइल माना जाता है। वहीं फैशन प्रेमी इसे कार्गो पैंट, डेनिम, शॉर्ट्स, ओवरसाइज ब्लेजर और यहां तक कि ड्रेसेज़ के साथ भी स्टाइल कर रहे हैं। यही कारण है कि यह स्नीकर्स अलग-अलग उम्र और फैशन पसंद रखने वाले लोगों के बीच समान रूप से लोकप्रिय बना हुआ है। 2026 में क्यों बढ़ी इसकी डिमांड? फैशन विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 के स्नीकर्स ट्रेंड में रेट्रो डिजाइन की वापसी देखने को मिल रही है। 1970 के दशक से प्रेरित स्लिम स्नीकर्स और विंटेज स्टाइल फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं। हालांकि हाल के महीनों में "Sneakerina" जैसे नए हाइब्रिड डिजाइन भी चर्चा में रहे हैं, लेकिन हर कोई एक्सपेरिमेंटल स्टाइल पसंद नहीं करता। ऐसे में Converse Chuck Taylor जैसे क्लासिक स्नीकर्स उन लोगों की पहली पसंद बन रहे हैं जो टाइमलेस फैशन, आराम और बहुमुखी स्टाइल चाहते हैं। फैशन इंडस्ट्री का मानना है कि क्लासिक डिजाइन कभी पूरी तरह आउट ऑफ ट्रेंड नहीं होते और Chuck Taylor इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Collection of trendy Korean shoes including platform shoes, Mary Jane flats, wedge heels, clogs, and hybrid sneakers for 2026 fashion.
2026 में फैशन की दुनिया पर छाए 7 कोरियन शू ट्रेंड्स, जींस से लेकर ड्रेसेज़ तक हर आउटफिट को देंगे स्टाइलिश ट्विस्ट

नई दिल्ली: पिछले कुछ वर्षों में कोरियन फैशन का प्रभाव दुनिया भर में तेजी से बढ़ा है। कपड़ों के बाद अब कोरियन फुटवियर भी फैशन इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना रहा है। साल 2026 में ऐसे कई कोरियन शू ट्रेंड्स सामने आए हैं, जो स्टाइल, कम्फर्ट और मिनिमल डिजाइन का शानदार मेल पेश करते हैं। यही वजह है कि ये फुटवियर फैशन लवर्स की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। अगर आप अपने वॉर्डरोब में ऐसे जूते शामिल करना चाहते हैं जो जींस, स्कर्ट, ड्रेस और कैजुअल आउटफिट्स के साथ आसानी से मैच हो जाएं, तो ये सात कोरियन शू ट्रेंड्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। 1. पॉइंटेड-टो प्लेटफॉर्म शूज़ इस साल पॉइंटेड-टो प्लेटफॉर्म शूज़ सबसे चर्चित ट्रेंड्स में शामिल हैं। इनका डिजाइन पारंपरिक कोरियन Beoseon Toe स्टाइल से प्रेरित है, जिसे आधुनिक लुक के साथ तैयार किया गया है। एलिवेटेड टो, इलास्टिक स्ट्रैप और हैंडमेड फिनिश इन्हें बेहद खास बनाते हैं। यह फुटवियर एंकल-लेंथ जींस, मिडी स्कर्ट और सिंपल ड्रेसेज़ के साथ बेहद आकर्षक दिखाई देता है। इसका मिनिमल डिजाइन पूरे लुक को प्रीमियम टच देता है। 2. ब्रिक-रेड मैरी जेन फ्लैट्स मैरी जेन फ्लैट्स ने 2026 में दमदार वापसी की है। ब्रिक-रेड रंग और डायगोनल स्ट्रैप वाला यह डिजाइन क्लासिक स्टाइल को आधुनिक फैशन से जोड़ता है। करीब 3 सेंटीमीटर की लो हील होने के कारण ये पूरे दिन आरामदायक रहते हैं। फ्लोरल स्कर्ट, लिनेन ड्रेस और सॉलिड कलर आउटफिट्स के साथ इनकी स्टाइलिंग बेहतरीन लगती है। 3. ब्राउन वेज हील्स अगर आपको हील्स पहनना पसंद है लेकिन कम्फर्ट भी उतना ही जरूरी है, तो ब्राउन वेज हील्स शानदार विकल्प हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें कई घंटों तक आसानी से पहना जा सकता है। 2026 में ब्राउन शेड सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले रंगों में शामिल है। हल्के रंग के कपड़ों के साथ ये शूज़ पूरे लुक का आकर्षण बन जाते हैं। 4. ब्लैक स्ट्रैपी फ्लैट्स ब्लैक फ्लैट्स हमेशा से फैशन का हिस्सा रहे हैं, लेकिन कोरियन डिजाइन इन्हें बिल्कुल नया रूप देता है। क्रिंकल्ड लेदर, आकर्षक स्ट्रैप्स और क्लासिक डिजाइन इन्हें ऑफिस, कैजुअल आउटिंग, डेट या किसी भी सेमी-फॉर्मल मौके के लिए परफेक्ट बनाते हैं। यह ऐसा फुटवियर है जो लंबे समय तक ट्रेंड में बना रह सकता है। 5. जेली फिनिश थॉन्ग सैंडल Y2K फैशन की वापसी के साथ जेली फिनिश वाली थॉन्ग सैंडल्स भी एक बार फिर लोकप्रिय हो गई हैं। हल्की, रंग-बिरंगी और बेहद आरामदायक ये सैंडल्स समर सीजन, बीच वेकेशन और कैजुअल आउटिंग के लिए शानदार विकल्प हैं। इनका ट्रेंडी लुक युवाओं के बीच खासा पसंद किया जा रहा है। 6. 'अग्ली' क्लॉग्स ओवरसाइज और चंकी फुटवियर का ट्रेंड 2026 में भी जारी है। इसी ट्रेंड का हिस्सा हैं 'अग्ली' क्लॉग्स, जो अपने अलग डिजाइन और बेहतरीन कम्फर्ट के लिए चर्चा में हैं। बैगी जींस, कार्गो पैंट और ओवरसाइज टी-शर्ट के साथ इनकी स्टाइलिंग बेहद आकर्षक लगती है। स्ट्रीट फैशन पसंद करने वालों के लिए यह बेहतरीन विकल्प माना जा रहा है। 7. हाइब्रिड एथलेटिक शूज़ स्नीकर और स्पोर्ट्स सैंडल का मिश्रण कहे जाने वाले हाइब्रिड एथलेटिक शूज़ उन लोगों के लिए बनाए गए हैं जो स्टाइल के साथ-साथ पूरे दिन आराम भी चाहते हैं। इनमें शानदार ग्रिप, हल्का वजन और ट्रैवल-फ्रेंडली डिजाइन मिलता है। ब्राउन और ऑलिव ग्रीन जैसे अर्थी शेड्स इस साल सबसे ज्यादा ट्रेंड में हैं और लगभग हर तरह के कैजुअल आउटफिट के साथ आसानी से मैच हो जाते हैं। आखिर क्यों बढ़ रही है कोरियन शूज़ की लोकप्रियता? कोरियन फुटवियर की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई वजहें हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं— मिनिमल और मॉडर्न डिजाइन प्रीमियम लेदर और बेहतर क्वालिटी स्टाइल के साथ बेहतरीन कम्फर्ट जींस, स्कर्ट, ड्रेसेज़ और ट्राउजर समेत लगभग हर आउटफिट के साथ आसान मैचिंग लंबे समय तक चलने वाली मजबूत क्वालिटी कोरियन फुटवियर की खासियत यह है कि ये सिर्फ फैशनेबल दिखने के लिए नहीं बनाए जाते, बल्कि पूरे दिन आरामदायक अनुभव देने पर भी बराबर ध्यान दिया जाता है। यही वजह है कि 2026 में ये दुनिया भर के फैशन ट्रेंड्स में अपनी मजबूत जगह बना चुके हैं और स्टाइल के साथ कम्फर्ट चाहने वालों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0