Forest Department

UP Forest Guard recruitment 2026 notification announces 708 vacancies for Forest Guard and Wildlife Guard posts.
Forest Guard Bharti 2026: यूपी में वन रक्षक और वन्य जीव रक्षक के 708 पदों पर भर्ती, 12वीं पास उम्मीदवार करें आवेदन, ₹63,200 तक मिलेगी सैलरी

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार मौका आया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने वन रक्षक (Forest Guard) और वन्य जीव रक्षक (Wildlife Guard) के कुल 708 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती उन अभ्यर्थियों के लिए विशेष अवसर है, जिन्होंने 12वीं (इंटरमीडिएट) पास की है और UPSSSC PET-2025 परीक्षा में शामिल होकर वैध नॉर्मलाइज्ड स्कोर प्राप्त किया है। चयनित उम्मीदवारों को लेवल-2 पे स्केल के तहत ₹19,900 से ₹63,200 प्रति माह तक वेतन मिलेगा। 708 पदों पर होगी भर्ती भर्ती के तहत विभिन्न श्रेणियों में कुल 708 पद भरे जाएंगे। वन रक्षक (सामान्य) – 318 पद वन्य जीव रक्षक (सामान्य) – 10 पद वन रक्षक (विशेष चयन) – 329 पद वन्य जीव रक्षक (विशेष चयन) – 51 पद कौन कर सकता है आवेदन? आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही अभ्यर्थी ने UPSSSC PET-2025 परीक्षा दी हो और उसका वैध नॉर्मलाइज्ड स्कोरकार्ड उपलब्ध होना चाहिए। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 18 वर्ष अधिकतम आयु: 40 वर्ष आयु की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी। शारीरिक योग्यता पुरुष उम्मीदवार सामान्य/ओबीसी/एससी – न्यूनतम लंबाई 168 सेमी एसटी – न्यूनतम लंबाई 160 सेमी महिला उम्मीदवार सामान्य/ओबीसी/एससी – न्यूनतम लंबाई 152 सेमी एसटी – 147 सेमी (5 सेमी की छूट) महत्वपूर्ण तिथियां ऑनलाइन आवेदन शुरू: 30 जून 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 20 जुलाई 2026 इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन पूरा कर लें। कितना मिलेगा वेतन? चयनित अभ्यर्थियों को लेवल-02 पे स्केल के तहत ₹19,900 से ₹63,200 प्रति माह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा सरकारी नियमों के अनुसार अन्य भत्तों का लाभ भी दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी। PET-2025 स्कोर के आधार पर उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग मुख्य लिखित परीक्षा शारीरिक मानक परीक्षा (PST) शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) मेडिकल परीक्षण अंतिम मेरिट सूची शारीरिक दक्षता परीक्षा में पुरुष अभ्यर्थियों को 10 किलोग्राम वजन के साथ 4 घंटे में 25 किलोमीटर तथा महिला अभ्यर्थियों को 14 किलोग्राम वजन के साथ 4 घंटे में 14 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होगी। आवेदन शुल्क इस भर्ती में सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क ₹25 निर्धारित किया गया है। आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को PET-2025 रोल नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), मूल निवास प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दर्ज करनी होगी। आवेदन से पहले नोटिफिकेशन जरूर पढ़ें उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यानपूर्वक पढ़ें और पात्रता, दस्तावेज तथा चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी सुनिश्चित करने के बाद ही आवेदन करें। किसी भी प्रकार की त्रुटि आवेदन रद्द होने का कारण बन सकती है।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
elephant attack alert
किरीबुरू में जंगली हाथी की दस्तक से दहशत, ड्रोन से निगरानी कर रहा वन विभाग

पश्चिमी सिंहभूम। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के किरीबुरू में एक जंगली हाथी की लगातार मौजूदगी से लोगों में भय का माहौल है। किरीबुरू-हिलटॉप मुख्य मार्ग स्थित पुराने मैगजीन घर के आसपास हाथी के डेरा डालने की सूचना के बाद वन विभाग अलर्ट हो गया है। इस मार्ग से प्रतिदिन गुजरने वाले सेल (SAIL) के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।   रात में खदान में घुसा हाथी जानकारी के अनुसार, 29 जून की रात जंगली हाथी अचानक सड़क पार करते हुए सेल की मेघाहातुबुरु खदान के मैकेनिकल शॉवेल सेक्शन तक पहुंच गया। रात करीब 11 बजे हाथी को खदान क्षेत्र में देखकर वहां काम कर रहे कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। सभी कर्मी अपनी सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भाग गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हाथी कुछ देर तक खदान परिसर में घूमता रहा और बाद में जंगल की ओर लौट गया। हालांकि उसकी मौजूदगी ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना दिया।   सुबह फिर दिखा हाथी मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे स्थानीय लोगों ने उसी हाथी को पुराने मैगजीन घर के पास दोबारा देखा। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन की मदद लेने का फैसला किया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ड्रोन के जरिए हाथी की सटीक लोकेशन का पता लगाया जाएगा, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से घने जंगल की ओर भेजा जा सके।   वन विभाग की अपील वन विभाग ने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि वे हाथी के पास जाने या उसे किसी भी तरह से परेशान करने की कोशिश न करें। अधिकारियों का कहना है कि जंगली हाथी खुद को खतरे में महसूस करने पर आक्रामक हो सकता है, जिससे जान-माल का नुकसान होने की आशंका रहती है। फिलहाल वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

anjali kumari जून 30, 2026 0
Betla National Park Closure
1 जुलाई से बेतला नेशनल पार्क में नो एंट्री, तीन महीने बंद रहेगी जंगल सफारी

लातेहार। झारखंड के प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क को 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटकों के लिए बंद रखा जाएगा। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के निर्देशानुसार इस अवधि में जंगल सफारी, वाहनों की आवाजाही और पार्क के भीतर होने वाली सभी इको-टूरिज्म गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी। वन विभाग के अनुसार यह निर्णय मानसून और वन्यजीवों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पर्यटक अब 1 अक्टूबर से दोबारा जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे।   पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण पर रहेगा फोकस वन अधिकारियों के मुताबिक, बारिश के मौसम में अधिकांश जंगली जानवरों का प्रजनन काल होता है। ऐसे समय में मानवीय गतिविधियों से उनकी प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। साथ ही मानसून के दौरान जंगल के कच्चे रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं, जिससे सफारी वाहनों के फंसने और हाथी समेत अन्य वन्यजीवों के हमले का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए तीन महीने तक केवल वन विभाग के अधिकारी और पेट्रोलिंग टीम को ही जंगल में प्रवेश की अनुमति रहेगी। पार्क बंद रहने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी भी पहले से अधिक सख्त की जाएगी तथा वॉच टावरों पर वनकर्मियों की तैनाती बढ़ाई जाएगी।   रेस्ट हाउस खुले रहेंगे, आसपास के पर्यटन स्थलों का उठा सकेंगे आनंद हालांकि पार्क के भीतर प्रवेश और सफारी बंद रहेगी, लेकिन पर्यटकों के लिए वन विभाग के रेस्ट हाउस, कैंटीन और अन्य सुविधाएं पहले की तरह संचालित होती रहेंगी। बेतला आने वाले सैलानी आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे केचकी संगम, पलामू किला, मंडल डैम, सतनदिया, ततहा झरना, मिर्चईया फॉल, कोयल व्यू, सुग्गा बांध और लोध फॉल का भ्रमण कर सकेंगे। बेतला रेंज के रेंजर उमेश कुमार दुबे ने बताया कि पार्क बंद रखने के आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा और इस दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा तथा अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गश्त और निगरानी को और मजबूत किया जाएगा।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Snake rescue
पाकुड़ में घर से मोनोकल्ड कोबरा निकलने से हड़कंप, वन विभाग ने किया रेस्क्यू

रांची। झारखंड के पाकुड़ जिले में एक घर से खतरनाक मोनोकल्ड कोबरा मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। मामला महेशपुर प्रखंड मुख्यालय के ग्वालपाड़ा इलाके का है, जहां गुरुवार देर रात सोनू कुमार के घर में कई कोबरा सांप दिखाई दिए। सांपों को देखते ही परिवार और आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। इसके बाद तुरंत वन विभाग को सूचना दी गई।   सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद एक मोनोकल्ड कोबरा का सफल रेस्क्यू किया गया। वनकर्मी असराफुल शेख ने बताया कि पकड़ा गया सांप मोनोकल्ड कोबरा प्रजाति का है और उसकी उम्र लगभग पांच वर्ष आंकी गई है। उन्होंने कहा कि बारिश और गर्मी के मौसम में सांप अक्सर शिकार की तलाश में घरों में घुस जाते हैं।   बेहद खतरनाक माना जाता है मोनोकल्ड कोबरा स्नेक एक्सपर्ट्स के अनुसार, मोनोकल्ड कोबरा बेहद आक्रामक और खतरनाक प्रजाति का सांप होता है। यह अपने जहर को दूर तक फेंक सकता है, जिससे इंसानों और जानवरों दोनों को खतरा रहता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर इसका जहर जानलेवा भी साबित हो सकता है। वन विभाग की टीम ने बताया कि इलाके में और भी कोबरा के बच्चे होने की आशंका है। कुछ छोटे सांप आसपास कहीं छिप गए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है ताकि उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।   लोगों को दी गई सावधानी बरतने की सलाह वनकर्मियों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि सांप दिखने पर उससे दूर रहें और खुद पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। किसी को सांप काटने पर झाड़-फूंक या ओझागुनी के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह दी गई है। वन विभाग ने यह भी कहा कि वन्यजीवों के साथ छेड़छाड़ करना खतरनाक हो सकता है, इसलिए ऐसे मामलों में तुरंत विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

Unknown मई 29, 2026 0
Bokaro Elephant Attack
बोकारो में हाथियों के झुंड ने व्यक्ति को कुचला, अस्पताल में भर्ती

बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड स्थित कुसुमडीह क्षेत्र में हाथियों के हमले में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल की पहचान केरी (टीकाहारा) निवासी 40 वर्षीय कार्तिक बेसरा के रूप में हुई है। उनका इलाज रामगढ़ के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।   जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में तीन हाथियों का झुंड घूम रहा था। वन विभाग की ओर से लोगों को सतर्क करते हुए उस रास्ते से पैदल नहीं गुजरने की चेतावनी दी गई थी। बावजूद इसके कार्तिक बेसरा देर रात अपने घर लौटने के लिए पैदल निकल पड़े।   मंदिर के पास हाथियों से हुआ सामना बताया जा रहा है कि दामोदर नदी पर बने पुल को पार करने के बाद जैसे ही कार्तिक बेसरा कुसुमडीह स्थित मंदिर के पास पहुंचे, उनका सामना हाथियों के झुंड से हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक हाथी ने उन्हें पटक दिया और कमर के बाईं ओर कुचल दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।   रिश्तेदार के घर से लौट रहे थे कार्तिक मिली जानकारी के मुताबिक कार्तिक बेसरा अपनी पत्नी के साथ गोला प्रखंड के शीशाटांड़ स्थित एक रिश्तेदार के घर गए थे। किसी बात को लेकर विवाद होने के बाद वे रात में ही पैदल घर लौटने निकल पड़े थे। इसी दौरान यह हादसा हुआ।   घटना की सूचना मिलने के बाद राज्य सरकार में मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने अस्पताल प्रबंधन को घायल के बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए सतर्क रहें और वन विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

Unknown मई 28, 2026 0
Massive forest fire blazing across Digaria hills in Deoghar with smoke engulfing trees and rescue efforts underway
महुआ चुनने की लापरवाही बनी खतरा: देवघर के डिगरिया पहाड़ में फिर भड़की भीषण जंगल आग

देवघर: झारखंड के जंगलों में इन दिनों महुआ चुनने की परंपरा पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। देवघर जिले के डिगरिया पहाड़ की चोटी पर स्थित जंगलों में लगी भीषण आग ने एक बार फिर वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। महुआ इकट्ठा करने के लिए लगाई गई छोटी सी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।   डिगरिया पहाड़ पर दो दिनों से सुलग रही आग देवघर के बाबूडीह गांव की ओर स्थित डिगरिया पहाड़ी क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सोमवार को दिन में वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत कर आग पर काबू पाया था, लेकिन शाम होते-होते आग ने फिर से तेजी पकड़ ली और पूरे इलाके में फैल गई।   शाम होते ही तेज हुई आग की रफ्तार स्थानीय लोगों के अनुसार, दिन में आग पर नियंत्रण पा लिया गया था, लेकिन शाम के समय तेज हवा और सूखी झाड़ियों के कारण आग तेजी से फैलने लगी। कुछ ही देर में जंगल का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। स्थिति गंभीर होते ही वन विभाग को सूचना दी गई, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।   महुआ चुनने के लिए लगाई जाती है आग ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में बार-बार आग लगने की सबसे बड़ी वजह महुआ चुनने का तरीका है। कई लोग पेड़ों के नीचे गिरी सूखी पत्तियों को साफ करने के लिए आग लगा देते हैं, ताकि महुआ आसानी से दिख सके। लेकिन यही तरीका जंगल के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है और छोटी चिंगारी बड़े हादसे में बदल जा रही है।   चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद काबू वन विभाग की टीम और पशु रक्षकों ने मिलकर करीब चार घंटे तक लगातार प्रयास किया। कठिन पहाड़ी इलाका और ऊंचाई के कारण आग बुझाने में काफी परेशानी आई, लेकिन स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक तरीकों की मदद से देर रात तक आग पर नियंत्रण पा लिया गया।   पर्यावरण और वन्यजीवों पर गहरा असर इस आग से जंगल की वनस्पतियों, औषधीय जड़ी-बूटियों और दुर्लभ पौधों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही कई छोटे वन्यजीव और पक्षी भी इसकी चपेट में आकर मारे गए। इस तरह की घटनाएं पर्यावरण संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।   जागरूकता अभियान चला रहा वन विभाग वन विभाग ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। नुक्कड़ नाटक, ग्राम सभाएं और हाट-बाजारों में प्रचार के जरिए लोगों से अपील की जा रही है कि जंगल में आग न लगाएं। विभाग का कहना है कि स्थानीय सहयोग के बिना इस समस्या पर पूरी तरह काबू पाना मुश्किल है।   अधिकारियों की अपील वन विभाग के सब  बीट ऑफिसर राजीव रंजन ने बताया कि टीम ने कड़ी मेहनत से आग पर नियंत्रण पाया। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि महुआ चुनने के लिए आग का इस्तेमाल न करें। इसके बजाय महुआ इकट्ठा करने के लिए जाल, पुरानी साड़ी या धोती का उपयोग करें।   सतर्कता ही है समाधान डिगरिया पहाड़ की यह घटना साफ संकेत देती है कि थोड़ी सी लापरवाही कितनी बड़ी आपदा बन सकती है। जरूरत है कि लोग जागरूक हों और जंगलों की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित रखा जा सके।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Venomous Kharish snake captured by villagers in Mohra village of Jamtara Jharkhand and kept inside drum
जामताड़ा के मोहड़ा गांव में दिखा खतरनाक ‘खरिश’ सांप, ग्रामीणों ने सूझबूझ से पकड़ा; वन विभाग की देरी पर उठे सवाल

  झारखंड के जामताड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत मोहड़ा गांव में सोमवार रात उस समय हड़कंप मच गया, जब गांव में एक अत्यंत विषैला ‘खरिश’ सांप दिखाई दिया। सांप को देखते ही ग्रामीणों में दहशत फैल गई और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, ग्रामीणों की सूझबूझ और साहस के कारण बड़ा हादसा टल गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।   गांव में फैली दहशत, लोगों ने संभाली स्थिति ग्रामीणों के अनुसार, यह सांप बेहद खतरनाक माना जाता है और इसके काटने से कुछ ही समय में जान जाने का खतरा रहता है। जैसे ही सांप नजर आया, शुरुआती समय में लोग घबरा गए। लेकिन बाद में गांव के कुछ युवाओं ने हिम्मत दिखाते हुए स्थिति को संभाला और सावधानी के साथ सांप को पकड़ने की योजना बनाई। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने पहले सांप को एक बोरे में बंद किया। इसके बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे एक बड़े ड्रम में डाल दिया गया, ताकि वह बाहर निकलकर किसी को नुकसान न पहुंचा सके।   वन विभाग को सौंपने की थी योजना ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सांप को मारना नहीं था। वे उसे सुरक्षित तरीके से पकड़कर वन विभाग को सौंपना चाहते थे, ताकि उसे जंगल में छोड़ दिया जाए। इसी वजह से सांप को पकड़ने के तुरंत बाद वन विभाग को सूचना दी गई।   वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल हालांकि, इस घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव के निवासी नबीब अंसारी ने बताया कि सांप पकड़े जाने के बाद सोमवार शाम से ही वन विभाग को कई बार फोन किया गया, लेकिन अधिकारियों की ओर से संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग की ओर से यह कहा गया कि सिर्फ एक सांप के लिए तत्काल कर्मचारी भेजना संभव नहीं है।   16 घंटे बाद भी नहीं पहुंची रेस्क्यू टीम सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि सोमवार रात से लेकर मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे तक, यानी लगभग साढ़े 16 घंटे बीत जाने के बाद भी वन विभाग की कोई रेस्क्यू टीम गांव नहीं पहुंची। इस दौरान सांप ड्रम के अंदर ही बंद रहा और पूरी रात ग्रामीणों में भय का माहौल बना रहा। संभावित खतरे के कारण कई लोग रातभर सो भी नहीं सके और अनहोनी की आशंका में जागते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों में वन विभाग को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0