Funeral Procession

Thousands of mourners gather in Iraq's holy city of Karbala during the funeral procession of Iran's late Supreme Leader Ali Khamenei before his burial in Mashhad.
कर्बला में उमड़ा जनसैलाब, लाखों लोगों की मौजूदगी में निकली अली खामेनेई की अंतिम यात्रा

इराक के पवित्र शहर करबला में ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में लाखों लोग शामिल हुए। भीड़ इतनी अधिक थी कि कई बार ताबूत लोगों के कंधों पर हवा में तैरता हुआ नजर आया। अब गुरुवार को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की तैयारी है। करबला और नजफ में उमड़ी भारी भीड़ ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान इराक के दो प्रमुख धार्मिक शहरों नजफ और करबला में लाखों श्रद्धालु पहुंचे। अंतिम यात्रा शुरू होने से कई घंटे पहले ही लोग सड़कों और धार्मिक स्थलों के आसपास जमा होने लगे थे। बड़ी संख्या में लोग एक दिन पहले ही अपनी जगह सुरक्षित करने के लिए पहुंच गए थे। कंधों पर उठा ताबूत, भीड़ के बीच झूलता रहा सबसे पहले खामेनेई के पार्थिव शरीर को नजफ स्थित इमाम अली दरगाह ले जाया गया, जहां हजारों लोगों ने श्रद्धांजलि दी। इसके बाद ताबूत को सड़क मार्ग से करबला लाया गया। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि श्रद्धालुओं के कंधों पर उठाया गया ताबूत कई बार एक ओर से दूसरी ओर झूलता दिखाई दिया। लोग ताबूत को छूने और अंतिम दर्शन करने के लिए आगे बढ़ते रहे। नारों से गूंजता रहा पूरा शहर अंतिम यात्रा के दौरान श्रद्धालु ईरान के झंडे और खामेनेई की तस्वीरें लेकर चल रहे थे। पूरे मार्ग में धार्मिक और राजनीतिक नारे गूंजते रहे। लाउडस्पीकरों से लगातार घोषणाएं होती रहीं, जिनका जवाब भीड़ नारों के साथ देती रही। कई स्थानों पर तेहरान समर्थक समूहों के समर्थन में भी नारे लगाए गए। गर्मी के बीच किए गए विशेष इंतजाम भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजाम किए। जगह-जगह पानी का छिड़काव किया गया, पीने के पानी और भोजन के स्टॉल लगाए गए। सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात रहे, जबकि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीमें भी मौके पर मौजूद रहीं। आज मशहद में होगा अंतिम संस्कार अंतिम यात्रा के बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को ईरान ले जाया जाएगा, जहां गुरुवार, 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके अंतिम संस्कार में ईरान के वरिष्ठ नेताओं के अलावा कई मित्र देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है.  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Mourners gather during the funeral procession of former Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei as tributes continue in Qom before ceremonies in Iraq and Mashhad.
8 साल तक जिस इराक से लड़ा युद्ध, अब वहीं ले जाया जाएगा खामेनेई का पार्थिव शरीर

तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया जारी है। अंतिम यात्रा के तहत उनका पार्थिव शरीर ईरान से इराक ले जाया जाएगा, जहां शिया समुदाय के दो सबसे पवित्र शहर नजफ और कर्बला में धार्मिक श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद उनके पैतृक शहर मशहद में अंतिम संस्कार किए जाने की योजना है। यह यात्रा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ईरान और इराक के बीच 1980 से 1988 तक आठ वर्षों तक भीषण युद्ध हुआ था। कोम में उमड़ी श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ सोमवार देर रात ईरान के धार्मिक शहर कोम स्थित जमकरण मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। सरकारी मीडिया के अनुसार, मंगलवार को भी वहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम जारी रहेगा। इससे पहले राजधानी तेहरान में निकली अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। कई लोगों ने शोक जुलूस में अमेरिका विरोधी नारे लगाए। इराक क्यों ले जाया जाएगा पार्थिव शरीर? रिपोर्टों के अनुसार, 8 जुलाई को खामेनेई का पार्थिव शरीर इराक ले जाया जाएगा। वहां नजफ और कर्बला में शिया धर्मगुरु और श्रद्धालु उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देंगे। इन दोनों शहरों का शिया मुस्लिम समुदाय में अत्यंत धार्मिक महत्व है, इसलिए वहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 8 साल तक चला था ईरान-इराक युद्ध ईरान और इराक के बीच 1980 से 1988 तक लंबा और विनाशकारी युद्ध चला था। युद्ध की शुरुआत तब हुई जब इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने 1980 में ईरान पर हमला किया। माना जाता है कि 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति के प्रभाव के इराक के शिया बहुल क्षेत्रों तक फैलने की आशंका भी इस संघर्ष का एक प्रमुख कारण थी। इस युद्ध में दोनों देशों को भारी जन और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। मशहद में होगा अंतिम संस्कार इराक में श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद खामेनेई का पार्थिव शरीर वापस ईरान लाया जाएगा। 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की योजना है। जुलूस के दौरान अमेरिका विरोधी प्रदर्शन अंतिम यात्रा के दौरान कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर के खिलाफ प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में पोस्टरों पर पत्थर फेंकते लोग दिखाई दिए। इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Millions of mourners gather in Tehran as the funeral procession of former Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei begins under tight security.
ईरान में अली खामेनेई की अंतिम यात्रा का सबसे बड़ा दिन आज, करोड़ों लोगों की भीड़ के बीच 1989 जैसी भगदड़ का खतरा

तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा का सबसे अहम चरण सोमवार से शुरू हो गया है। राजधानी तेहरान में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के जुटने की संभावना जताई गई है। प्रशासन का अनुमान है कि अंतिम यात्रा में एक करोड़ से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। इसी वजह से सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दी गई है, ताकि 1989 में देश के पहले सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के दौरान हुई भगदड़ जैसी घटना दोबारा न हो। सुबह से शुरू हुई अंतिम यात्रा दो दिनों तक तेहरान की ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में अंतिम दर्शन के लिए रखे गए अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को सोमवार सुबह करीब 6 बजे अंतिम यात्रा के लिए रवाना किया गया। आयोजकों के अनुसार यह यात्रा पूरे शहर में 10 से 12 घंटे तक चलेगी। पिछले दो दिनों से हजारों लोग मस्जिद पहुंचकर खामेनेई और उनके परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। सोमवार को सबसे बड़ी भीड़ उमड़ने की संभावना के चलते पूरे तेहरान में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। 1989 जैसी त्रासदी दोहराने से बचने की तैयारी ईरानी प्रशासन इस बार विशेष सतर्कता बरत रहा है। वर्ष 1989 में ईरान के पहले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार में करीब एक करोड़ लोग पहुंचे थे। उस दौरान भीड़ बेकाबू हो गई थी, जिसमें 10 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 10 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इतना ही नहीं, भीड़ शव वाहन तक पहुंच गई थी, जिससे कफन फट गया और पार्थिव शरीर जमीन पर गिर गया था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी थी। कंक्रीट बैरियर और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था इस बार ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने अंतिम दर्शन स्थल पर ताबूत और श्रद्धालुओं के बीच बड़े-बड़े कंक्रीट बैरियर लगाए थे। अंतिम यात्रा के दौरान भी सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा घेरे बनाए गए हैं और लोगों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। कई शहरों में होंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम तेहरान में मुख्य अंतिम यात्रा के बाद मंगलवार को धार्मिक शहर क़ोम में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके बाद बुधवार को इराक के पवित्र शहर नजफ़ और कर्बला में भी विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। अंतिम चरण में गुरुवार को अली खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मोजतबा खामेनेई अब भी सार्वजनिक रूप से नहीं आए रविवार को अली खामेनेई के तीन बेटे पहली बार अंतिम संस्कार कार्यक्रम में दिखाई दिए, लेकिन उनके उत्तराधिकारी बनाए गए मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। सूत्रों के अनुसार, 28 फरवरी को हुए हवाई हमलों में मोजतबा भी घायल हुए थे। हालांकि उनकी चोटों की गंभीरता को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। युद्ध के बाद एकजुटता दिखाने का प्रयास अली खामेनेई की अंतिम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे ईरान की राष्ट्रीय एकजुटता और राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ हालिया संघर्ष के बाद ईरानी नेतृत्व इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि देश अब भी एकजुट और मजबूत है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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