Ganesh Puja

Hindu Panchang for 22 July 2026 showing Ashadha Shukla Navami, auspicious timings, Rahu Kaal, and Ganesh worship details.
Aaj Ka Panchang 22 July 2026: आज आषाढ़ शुक्ल नवमी, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा का सही समय

आज बुधवार, 22 जुलाई 2026 को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। आज का दिन भगवान गणेश जी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। पंचांग के अनुसार आज स्वाति नक्षत्र रात्रि 11:03 बजे तक रहेगा, इसके बाद विशाखा नक्षत्र का आरंभ होगा। वहीं साध्य योग सायं 6:42 बजे तक रहेगा, इसके बाद शुभ योग शुरू हो जाएगा। आज चंद्रमा पूरे दिन तुला राशि में संचार करेंगे, जबकि सूर्य कर्क राशि में स्थित रहेंगे। आज का पंचांग (22 जुलाई 2026) वार: बुधवार तिथि: आषाढ़ शुक्ल नवमी (पूरी रात, अगले दिन तक) विक्रम संवत: 2083 शक संवत: 1948 ऋतु: वर्षा अयन: दक्षिणायन नक्षत्र: स्वाति (रात्रि 11:03 बजे तक), फिर विशाखा योग: साध्य (सायं 6:42 बजे तक), फिर शुभ योग करण: बालव (सायं 6:06 बजे तक), फिर कौलव चंद्र राशि: तुला सूर्य राशि: कर्क सूर्योदय और सूर्यास्त का समय सूर्योदय: सुबह 5:37 बजे सूर्यास्त: शाम 7:18 बजे चंद्रोदय: दोपहर 1:31 बजे चंद्रास्त: 23 जुलाई, रात 12:09 बजे आज के शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3:55 बजे से 4:41 बजे तक अमृत काल दोपहर 1:26 बजे से 3:11 बजे तक अभिजीत मुहूर्त आज उपलब्ध नहीं है। आज का चौघड़िया मुहूर्त लाभ: सुबह 5:37 बजे से 7:20 बजे तक अमृत: सुबह 7:20 बजे से 9:02 बजे तक काल: सुबह 9:02 बजे से 10:45 बजे तक शुभ: दोपहर 12:27 बजे से 2:10 बजे तक आज का अशुभ मुहूर्त राहुकाल: दोपहर 12:00 बजे से 1:30 बजे तक गुलिक काल: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक यमगंड: सुबह 7:30 बजे से 9:00 बजे तक आज का विशेष उपाय बुधवार के दिन भगवान श्री गणेश को दूर्वा अर्पित करें, मोदक का भोग लगाएं और श्रद्धापूर्वक गणेश चालीसा का पाठ करें। मान्यता है कि इससे विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi performing Ganesh Puja at Arul Mihu Navasakthi Vinayagar Temple in Victoria, Seychelles with traditional rituals and priest chanting mantras.
हाथ जोड़कर गणपति के दरबार पहुंचे पीएम मोदी, सेशेल्स के प्रसिद्ध विनयगर मंदिर में की पूजा; सामने आया वीडियो

  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिवसीय सेशेल्स दौरे के दौरान राजधानी विक्टोरिया स्थित अरुल मिहू नवशक्ति विनयगर मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान गणेश के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान का वीडियो सामने आया है, जिसमें प्रधानमंत्री पूरे श्रद्धाभाव के साथ मंदिर में पूजा करते नजर आ रहे हैं। यह मंदिर सेशेल्स का एकमात्र तमिल हिंदू मंदिर माना जाता है और भारतीय समुदाय की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा ने भारत और सेशेल्स के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी नई मजबूती दी है। पूरे विधि-विधान से की गणपति की पूजा डीडी न्यूज द्वारा साझा किए गए वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर में प्रवेश करते ही भगवान गणेश के समक्ष नतमस्तक होते दिखाई देते हैं। उनके हाथ में पूजा सामग्री से भरी टोकरी भी नजर आती है। मंदिर के पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रधानमंत्री से पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार पूजा करवाई। पूजा के बाद आरती की गई, जिसे प्रधानमंत्री ने श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया और भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर आशीर्वाद लिया। सेशेल्स का प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थल राजधानी विक्टोरिया में स्थित अरुल मिहू नवशक्ति विनयगर मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है। अपनी आकर्षक द्रविड़ शैली की वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण यह मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ भारतीय मूल के समुदाय के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर सेशेल्स में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जीवंत पहचान माना जाता है। भारत-सेशेल्स के सांस्कृतिक रिश्तों का प्रतीक प्रधानमंत्री मोदी की मंदिर यात्रा को भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रही यह यात्रा केवल रणनीतिक और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित करती है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल मंदिर में पूजा-अर्चना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी पूरे श्रद्धाभाव के साथ पूजा करते और भगवान गणेश का आशीर्वाद लेते दिखाई दे रहे हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Indian men's hockey team celebrates after defeating England in a penalty shootout during the FIH Pro League.
क्रिकेट में निराशा, हॉकी में शानदार जीत! एफआईएच प्रो लीग के आखिरी मैच में भारत ने इंग्लैंड को शूटआउट में हराया

नई दिल्ली: एक ओर क्रिकेट में भारतीय टीम को हालिया मुकाबलों में निराशा मिली, वहीं दूसरी ओर भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एफआईएच प्रो लीग के अपने आखिरी मैच में इंग्लैंड को रोमांचक पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर जीत के साथ अभियान का समापन किया। निर्धारित 60 मिनट तक दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला 0-0 से बराबरी पर समाप्त हुआ। इसके बाद शूटआउट में भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन संयम दिखाते हुए जीत अपने नाम कर ली। गोलकीपरों और डिफेंस ने बचाई टीम मैच की शुरुआत से ही इंग्लैंड ने आक्रामक खेल दिखाया और शुरुआती मिनटों में पेनल्टी कॉर्नर भी हासिल किया। हालांकि भारतीय गोलकीपर मोहित शशिकुमार ने शानदार बचाव करते हुए मेजबान टीम को बढ़त लेने से रोक दिया। पहले क्वार्टर में भारत को भी गोल करने का मौका मिला, लेकिन अभिषेक उसे भुना नहीं सके। पहले 15 मिनट का खेल गोलरहित रहा। हाफ टाइम तक दोनों टीमें बराबरी पर दूसरे क्वार्टर में इंग्लैंड लगातार भारतीय सर्कल में दबाव बनाता रहा, लेकिन भारतीय डिफेंस मजबूती से खड़ा रहा। दूसरी ओर भारत ने भी जवाबी हमले किए। जरमनप्रीत सिंह का दमदार प्रयास इंग्लैंड के गोलकीपर ने शानदार बचाव के साथ रोक दिया। हाफ टाइम तक दोनों टीमों का स्कोर 0-0 रहा। तीसरे क्वार्टर में बढ़ा रोमांच तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने ज्यादा आक्रामक रुख अपनाया। कप्तान हार्दिक सिंह ने शानदार मूव बनाते हुए मंदीप सिंह के लिए मौका तैयार किया, लेकिन गोल नहीं हो सका। इसके बाद भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन टीम बढ़त हासिल नहीं कर पाई। इसी दौरान इंग्लैंड को पेनल्टी स्ट्रोक मिला, लेकिन भारत ने वीडियो रेफरल लिया। रिप्ले में भारतीय खिलाड़ी का टैकल सही पाया गया, जिसके बाद अंपायर ने अपना फैसला बदल दिया। यह मैच का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। अंतिम क्वार्टर में भी नहीं टूटा गतिरोध आखिरी क्वार्टर में दोनों टीमों ने लगातार हमले किए, लेकिन दोनों गोलकीपरों और डिफेंस ने शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा ने भी कई महत्वपूर्ण बचाव किए। भारत और इंग्लैंड दोनों को पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। शूटआउट में भारत ने मारी बाजी निर्धारित समय के बाद मुकाबला शूटआउट में पहुंचा, जहां भारत ने 3-2 से जीत दर्ज की। भारत की ओर से शूटआउट में गोल करने वाले खिलाड़ी रहे— अभिषेक शिलानंद लाकड़ा हार्दिक सिंह भारतीय डिफेंस के अहम खिलाड़ी संजय को पूरे मैच में शानदार प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। विश्व कप से पहले बढ़ा आत्मविश्वास एफआईएच प्रो लीग का यह मुकाबला आगामी हॉकी विश्व कप से पहले भारतीय टीम का आखिरी मैच था। इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ दबाव में हासिल की गई यह जीत टीम के आत्मविश्वास को निश्चित रूप से मजबूती देगी।  

surbhi जून 29, 2026 0
Devotees offering prayers to Lord Ganesha with flowers and modaks on Pradyumna Chaturthi.
प्रद्युम्न चतुर्थी पर करें भगवान गणेश के 108 नामों का जाप, हर विघ्न होगा दूर

Pradyumna Chaturthi 2026: गणपति बप्पा की कृपा पाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए प्रद्युम्न चतुर्थी का दिन बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने और उनके 108 नामों का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में प्रद्युम्न चतुर्थी 18 जून, गुरुवार को मनाई जा रही है। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है और भगवान गणेश को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से गणपति की आराधना करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। क्यों खास है भगवान गणेश के 108 नामों का जाप? धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान गणेश के विभिन्न नाम उनके अलग-अलग स्वरूपों और गुणों का प्रतीक हैं। इन नामों का जाप करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है। कहा जाता है कि पूजा के दौरान 108 नामों का स्मरण करने से साधक को दोगुना पुण्य फल प्राप्त होता है और गणपति बप्पा की विशेष कृपा बनी रहती है। भगवान गणेश के कुछ प्रमुख 108 नाम सुमुख – सुंदर मुख वाले एकदंत – एक दांत वाले गजकर्णक – हाथी जैसे कान वाले लम्बोदर – बड़े उदर वाले विनायक – सभी गणों के नेता वक्रतुण्ड – टेढ़ी सूंड वाले सिद्धिविनायक – सभी सिद्धियां प्रदान करने वाले हेरम्ब – अपने भक्तों की रक्षा करने वाले महागणपति – महान और शक्तिशाली गणपति मोदकप्रिय – मोदक प्रिय करने वाले मंगलमूर्ति – मंगल प्रदान करने वाले बुद्धिप्रिय – बुद्धि और ज्ञान के दाता विघ्नहर्ता – सभी बाधाओं को दूर करने वाले महाकाय – विशाल स्वरूप वाले सर्वज्ञ – सब कुछ जानने वाले भक्तवत्सल – भक्तों पर स्नेह बरसाने वाले अग्रपूज्य – सबसे पहले पूजे जाने वाले पार्वतीसुत – माता पार्वती के पुत्र आनंदमूर्ति – आनंद प्रदान करने वाले सुखकर्ता – सुख देने वाले दुःखनाशक – दुखों का नाश करने वाले चिंतामणि – इच्छाओं को पूर्ण करने वाले ज्ञानमूर्ति – ज्ञान का स्वरूप विघ्नविनाशक – सभी विघ्नों का नाश करने वाले सिद्धिदायक – सफलता और सिद्धि प्रदान करने वाले ऋद्धिपति – समृद्धि के स्वामी विघ्नेश – बाधाओं के देवता गणपति – गणों के अधिपति देवताधिदेव – देवताओं के भी देव इसके अलावा शास्त्रों में भगवान गणेश के कुल 108 नामों का उल्लेख मिलता है, जिनका श्रद्धा और भक्ति के साथ जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। क्या है धार्मिक मान्यता? मान्यता है कि प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, लाल फूल और सिंदूर अर्पित कर उनके नामों का जाप करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है। यह दिन विशेष रूप से नई शुरुआत, व्यापार, शिक्षा और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।  

surbhi जून 18, 2026 0
Ganesh Puja on Vibhuvan Sankashti Chaturthi with flowers, modak and sacred offerings
3 जून को मनाई जाएगी विभुवन संकष्टी चतुर्थी, पूजा से पहले नोट कर लें पूरी सामग्री और विधि

भगवान गणेश को समर्पित विभुवन संकष्टी चतुर्थी इस वर्ष 3 जून 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। विभुवन संकष्टी चतुर्थी को वर्ष भर में आने वाली संकष्टी चतुर्थियों में सबसे दुर्लभ और विशेष माना जाता है, क्योंकि यह केवल तीन वर्ष में एक बार आती है। यह ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। विभुवन संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव हैं। विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, कार्यों में सफलता मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। विशेष रूप से संतान सुख, आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति की कामना करने वाले भक्त इस व्रत को बड़ी श्रद्धा के साथ करते हैं। पूजा के लिए आवश्यक सामग्री विभुवन संकष्टी चतुर्थी की पूजा शुरू करने से पहले सभी सामग्री एकत्र कर लेना शुभ माना जाता है। आवश्यक पूजा सामग्री भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र लाल या पीला वस्त्र दूर्वा घास लाल पुष्प अक्षत (चावल) रोली कुमकुम पीला चंदन धूप अगरबत्ती दीपक कपूर घी कलश गंगाजल पान के पत्ते सुपारी लौंग इलायची कलावा मौसमी फल मिठाई या मोदक तांबे, पीतल या चांदी का लोटा पूजा विधि व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान गणेश का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान गणेश को रोली, चंदन का तिलक लगाएं और 21 दूर्वा तथा लाल पुष्प अर्पित करें। इसके बाद धूप, दीप और अगरबत्ती जलाकर पूजा प्रारंभ करें। गणेश जी को फल, मिठाई, अक्षत, लौंग, इलायची तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। पूजा के दौरान गणेश मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें और विभुवन संकष्टी व्रत कथा का पाठ या श्रवण अवश्य करें। अंत में कपूर या दीपक से भगवान गणेश की आरती करें। चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। रात्रि में चंद्रमा के दर्शन होने पर लोटे में जल, दूध और चंदन मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश का प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें। मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं।  

surbhi जून 1, 2026 0
Devotees performing Ganesh Puja with idol, flowers, and lamps seeking blessings for prosperity and success.
Ganesh Puja: क्यों प्रथम पूजनीय हैं भगवान गणेश? जानिए पूजा के 7 प्रमुख आध्यात्मिक लाभ

सनातन धर्म में हर शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करना परंपरा का अहम हिस्सा है। “श्री गणेश” से कार्य प्रारंभ करने का अर्थ ही है कि उस कार्य में सफलता, शुभता और बाधा-रहित मार्ग की कामना की जा रही है। गणपति को ऋद्धि-सिद्धि, बुद्धि, विवेक और शुभ-लाभ का देवता माना जाता है, इसलिए उन्हें “प्रथम पूजनीय” का दर्जा प्राप्त है। गणपति प्रथम पूजनीय क्यों हैं? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार सभी देवी-देवताओं के बीच यह प्रतियोगिता हुई कि जो सबसे पहले पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगाएगा, वही प्रथम पूजनीय होगा। जहां अन्य देवता अपने-अपने वाहनों पर सवार होकर ब्रह्मांड की यात्रा पर निकल पड़े, वहीं भगवान गणेश ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए अपने माता-पिता–भगवान शिव और माता पार्वती–की परिक्रमा की। गणेश जी के अनुसार, माता-पिता ही उनका संपूर्ण ब्रह्मांड हैं। उनकी इस सूझबूझ से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें प्रथम पूजनीय होने का वरदान दिया। गणपति पूजा के 7 प्रमुख लाभ 1. नवग्रह दोषों से मुक्ति गणेश जी की विधिपूर्वक पूजा करने से कुंडली के नवग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 2. सफलता और समृद्धि की प्राप्ति लंबोदर रूप में पूजे जाने वाले गणपति की कृपा से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और आर्थिक उन्नति मिलती है। 3. विघ्नों का नाश विघ्नहर्ता गणेश की आराधना से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और योजनाएं सफलतापूर्वक पूर्ण होती हैं। 4. नकारात्मकता और दोषों का अंत गणपति की पूजा व्यक्ति के भीतर के अहंकार को समाप्त कर उसे विनम्र बनाती है, साथ ही नकारात्मक शक्तियों को भी दूर करती है। 5. बुद्धि और विवेक का आशीर्वाद गणेश जी को ज्ञान और बुद्धि का देवता माना जाता है। उनकी कृपा से व्यक्ति सही निर्णय लेने में सक्षम होता है। 6. वास्तु दोष से मुक्ति घर में गणपति की मूर्ति या चित्र रखने से वास्तु दोष दूर होते हैं और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। 7. सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति सच्चे मन से की गई गणपति पूजा जीवन के कष्टों को दूर कर इच्छाओं की पूर्ति करती है और घर में सुख-समृद्धि बनाए रखती है। भगवान गणेश की पूजा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, सकारात्मक और सफल बनाने का मार्ग भी मानी जाती है। उनकी आराधना व्यक्ति को मानसिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक रूप से सशक्त बनाती है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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