Global Energy Crisis

Prime Minister Narendra Modi meets UAE President in Abu Dhabi for major energy and LPG supply agreements.
UAE दौरे में भारत को बड़ी राहत, LPG सप्लाई और तेल भंडार पर हुए दो बड़े समझौते

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के United Arab Emirates दौरे के दौरान भारत और UAE के बीच ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े दो अहम समझौतों पर सहमति बनी है। माना जा रहा है कि इन समझौतों से भारत को LPG और तेल आपूर्ति के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है। अबू धाबी पहुंचे पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार (15 मई) को अपने पांच देशों के दौरे के पहले चरण में UAE की राजधानी Abu Dhabi पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इस दौरान पीएम मोदी और UAE के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। LPG सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता दोनों देशों के बीच एलपीजी सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, इससे भारत को लंबे समय तक स्थिर LPG आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में UAE के साथ यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर भी सहमति भारत और UAE के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) को लेकर भी समझौता हुआ है। इससे भविष्य में वैश्विक संकट या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में भारत को अतिरिक्त ऊर्जा सुरक्षा मिल सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को मजबूत करेगी। पीएम मोदी ने जताया आभार वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने UAE सरकार के स्वागत और सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि UAE वायुसेना द्वारा भारतीय विमान को एस्कॉर्ट किया जाना भारत के लोगों के सम्मान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने हालिया प्राकृतिक आपदा के दौरान UAE द्वारा संवेदनाएं व्यक्त करने पर भी धन्यवाद दिया। UAE पर हमलों की कड़ी निंदा पीएम मोदी ने मध्य-पूर्व के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए UAE पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “यूएई को जिस तरह निशाना बनाया गया, वह किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। कठिन परिस्थितियों में आपने जिस संयम और साहस का परिचय दिया है, वह सराहनीय है।” ‘होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित रहना जरूरी’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का खुला, सुरक्षित और निर्बाध रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत हर स्थिति में UAE के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा और क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए हर संभव सहयोग देगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक तेल संकट और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच भारत-UAE की यह नई ऊर्जा साझेदारी आने वाले समय में भारत के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।  

surbhi मई 15, 2026 0
LPG tanker crossing Hormuz Strait safely amid rising Middle East tensions and maritime security concerns
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत को राहत, दो LPG टैंकरों ने सुरक्षित पार किया होर्मुज स्ट्रेट

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे दो टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र में तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी है और अब तक 13 भारतीय पोत इस अहम समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित भारत की ओर रवाना बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Mukesh Mangal ने बताया कि ‘सिमी’ नाम का एलपीजी टैंकर 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया। वहीं ‘एनवी सनशाइन’ टैंकर ने भी गुरुवार को सुरक्षित रूप से यह मार्ग पार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, दोनों जहाज भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे हैं और उनकी सुरक्षित आवाजाही भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम मानी जा रही है। कांडला और मंगलूरु पहुंचेंगे टैंकर मार्शल द्वीप के ध्वज वाला ‘सिमी’ टैंकर करीब 19,965 टन एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इसके 16 मई को Kandla पहुंचने की संभावना है। वहीं वियतनाम के ध्वज वाला ‘एनवी सनशाइन’ संयुक्त अरब अमीरात की रुवैस रिफाइनरी से 46,427 टन एलपीजी लेकर रवाना हुआ है और इसके 18 मई को Mangaluru पहुंचने की उम्मीद है। दोनों जहाजों में मौजूद एलपीजी Indian Oil Corporation यानी IOC का बताया जा रहा है। अब तक 13 भारतीय जहाजों ने पार किया मार्ग अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद यह समुद्री क्षेत्र कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ था। इसके बावजूद अब तक कुल 13 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। इनमें देश गरिमा, शिवालिक, ग्रीन सान्वी, नंदा देवी, पाइन गैस और एमवी सर्वशक्ति जैसे पोत शामिल हैं। हालांकि अभी भी खाड़ी क्षेत्र में करीब 12 भारतीय जहाज फंसे हुए बताए जा रहे हैं। ओमान के पास हमले में डूबी भारतीय नौका इसी बीच भारत के ध्वज वाली ‘हाजी अली’ नाम की मशीनी पाल नौका ओमान के जलक्षेत्र में हमले का शिकार हो गई। हमले के बाद लकड़ी से बनी इस पारंपरिक नौका में आग लग गई और बाद में यह समुद्र में डूब गई। यह नौका सोमालिया से UAE के शारजाह जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक नौका पर सवार चालक दल के सभी 14 सदस्यों को ओमान तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचा लिया है। चालक दल सुरक्षित, भारत लाने की तैयारी अधिकारियों ने बताया कि सभी चालक दल के सदस्यों को ओमान के डिब्बा बंदरगाह पहुंचाया गया है और उनकी स्थिति सुरक्षित है। भारत सरकार ओमान प्रशासन और भारतीय दूतावास के संपर्क में है और उन्हें जल्द भारत वापस लाने की तैयारी की जा रही है। ऊर्जा आपूर्ति पर बनी हुई है नजर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कई विदेशी जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत लगातार अपनी ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर नजर बनाए हुए है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।    

surbhi मई 15, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi during UAE visit discussions focused on energy security and strategic cooperation
पीएम मोदी का UAE दौरा आज से, एनर्जी सिक्योरिटी पर रह सकता है सबसे बड़ा फोकस

प्रधानमंत्री Narendra Modi शुक्रवार से अपने पांच देशों के दौरे की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस दौरे का पहला पड़ाव United Arab Emirates होगा, जहां वह अबू धाबी में कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए इस दौरे में एनर्जी सिक्योरिटी सबसे बड़ा मुद्दा रहने वाला है। पश्चिम एशिया तनाव के बीच अहम दौरा पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती सख्ती और समुद्री गतिविधियों पर असर से दुनिया भर के तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक सहयोग मजबूत करने की कोशिश में है। UAE के राष्ट्रपति से होगी अहम मुलाकात सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी अबू धाबी में UAE के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात करेंगे। इस दौरान LPG सप्लाई, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। बताया जा रहा है कि भारत और UAE के बीच ऊर्जा क्षेत्र में नए समझौतों पर भी सहमति बन सकती है। LPG और तेल भंडारण पर हो सकते हैं बड़े समझौते मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Indian Oil Corporation और ADNOC के बीच LPG सप्लाई को लेकर रणनीतिक साझेदारी की घोषणा हो सकती है। इसके अलावा इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और ADNOC के बीच तेल भंडारण को लेकर भी अहम डील होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत होगी। छह दिनों में पांच देशों का दौरा विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पीएम मोदी छह दिनों में पांच देशों का दौरा करेंगे। UAE के बाद वह Netherlands जाएंगे। इसके बाद उनका दौरा Sweden, Norway और आखिर में Italy में समाप्त होगा। सरकार का कहना है कि इस दौरे का उद्देश्य सिर्फ ऊर्जा सहयोग नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारी, व्यापार और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना भी है।    

surbhi मई 15, 2026 0
Oil tanker at sea representing global crude trade amid US decision to extend Russia oil purchase waiver
ईरान युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका का बड़ा फैसला: रूस से तेल पर छूट बढ़ाई, वैश्विक बाजार में राहत और विवाद दोनों

  अमेरिका ने फिर बढ़ाई रूस से तेल खरीद की अनुमति वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक अहम और चर्चित फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन ने रूस से प्रतिबंधित कच्चे तेल की खरीद पर दी गई अस्थायी छूट को एक बार फिर बढ़ा दिया है। इस निर्णय के तहत कई देश, जिनमें भारत भी शामिल है, सीमित समय के लिए रूस से तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीद सकेंगे। यह छूट अब 16 मई तक प्रभावी रहेगी और इसे ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। किन शर्तों के साथ मिली छूट अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह अनुमति केवल उन्हीं तेल शिपमेंट्स पर लागू होगी जो शुक्रवार तक जहाजों में लोड किए जा चुके हैं। इसके अलावा, इस छूट से ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े किसी भी प्रकार के व्यापार को पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका रूस से तेल व्यापार पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय उसे सीमित और नियंत्रित तरीके से जारी रखना चाहता है। ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने की कोशिश यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और मध्य पूर्व में युद्ध जैसे हालात के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर हो गया है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस कदम के जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति को अचानक झटके से बचाना चाहता है, ताकि कीमतें बहुत अधिक न बढ़ें। एशियाई देशों की मांग का असर रिपोर्ट्स के अनुसार, एशिया के कई देशों ने अमेरिका पर दबाव बनाया था कि उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों तक पहुंच दी जाए। भारत जैसे बड़े आयातक देशों ने रूस से सस्ती तेल आपूर्ति को जारी रखने की मांग की थी, ताकि घरेलू ऊर्जा कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके। इसी दबाव और वैश्विक आपूर्ति संकट को देखते हुए अमेरिका ने यह अस्थायी राहत दी है। पहले के रुख से बदलाव दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ दो दिन पहले अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने संकेत दिया था कि यह छूट आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। लेकिन अचानक लिए गए इस फैसले ने अमेरिकी नीति में बदलाव को दर्शाया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। तेल कीमतों में भारी गिरावट इसी बीच, ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से खोलने के बाद वैश्विक तेल बाजार में लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिरता अस्थायी हो सकती है, क्योंकि क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। राजनीतिक विवाद भी तेज अमेरिकी संसद के कई सदस्यों ने इस फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे रूस को आर्थिक रूप से फायदा मिलेगा, जबकि वह यूक्रेन युद्ध में शामिल है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ ने भी प्रतिबंधों में ढील देने का विरोध जताया है। ईरान युद्ध, हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच अमेरिका का यह कदम वैश्विक ऊर्जा नीति को नई दिशा दे सकता है। हालांकि यह फैसला अस्थायी राहत देता है, लेकिन इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव आने वाले समय में और अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
US Navy deployment in Strait of Hormuz amid rising tensions between America and Iran affecting global oil supply
पाकिस्तान वार्ता फेल: ट्रंप का ईरान पर बड़ा वार, हॉर्मुज में घेराबंदी से तेल संकट गहराया

पाकिस्तान में हुई लंबी शांति वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है कि ईरान बातचीत की मेज पर लौटता है या नहीं, और दावा किया कि तेहरान की स्थिति इस समय बेहद कमजोर है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी कदम अमेरिकी नौसेना ने Strait of Hormuz में घेराबंदी की तैयारी शुरू कर दी है। इस रणनीतिक मार्ग से गुजरने वाले उन जहाजों को रोका जाएगा, जो ईरान के बंदरगाहों से जुड़े हैं। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है फैसले के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई न्यूक्लियर हथियार पर अमेरिका की दो टूक ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। अमेरिका की प्रमुख मांगें हैं: यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पूरी तरह बंद हो क्षेत्रीय हथियारबंद समूहों को समर्थन रोका जाए सूत्रों के मुताबिक, वार्ता के दौरान ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने के संकेत दिए थे, जिससे गतिरोध और गहरा गया। NATO पर भी ट्रंप का हमला अमेरिकी राष्ट्रपति ने NATO पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा: अमेरिका संगठन पर भारी खर्च करता है लेकिन संकट के समय सहयोग नहीं मिलता NATO की भूमिका की फिर से समीक्षा की जाएगी ईरान की चेतावनी ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर हॉर्मुज क्षेत्र में कोई सैन्य हस्तक्षेप हुआ, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। स्थिति को संभालने के लिए Pakistan, European Union, Oman और Russia कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव इस पूरे घटनाक्रम के बीच Israel की लेबनान में सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर लंबे समय तक पड़ सकता है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
South Pars gas field flames after attack amid rising Iran-Israel conflict tensions
ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले से बढ़ा तनाव: डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख, इजरायल पर डाला जिम्मा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच Iran के सबसे बड़े गैस भंडार South Pars Gas Field पर हुए हमले ने वैश्विक तनाव को और बढ़ा दिया है। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए खुद को इस हमले से अलग बताया और इसके लिए सीधे Israel को जिम्मेदार ठहराया। “हमारा कोई हाथ नहीं”-ट्रंप की सफाई डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट किया कि अमेरिका को इस हमले की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह हमला इजरायल की ओर से किया गया कदम था और इसमें Qatar की भी कोई भूमिका नहीं थी। ट्रंप के मुताबिक, इस हमले में साउथ पार्स गैस फील्ड का एक सीमित हिस्सा प्रभावित हुआ है, लेकिन इसके प्रभाव व्यापक हो सकते हैं क्योंकि यह दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस स्रोतों में से एक है। ईरान की चेतावनी-ऊर्जा ठिकानों पर हमला बर्दाश्त नहीं ईरान ने इस हमले को गंभीर उकसावे की कार्रवाई बताते हुए साफ कहा है कि अगर उसके ऊर्जा क्षेत्र को दोबारा निशाना बनाया गया, तो वह “कड़ा जवाब” देगा। ईरान का यह भी आरोप है कि हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। कतर पर हमले को लेकर ट्रंप की कड़ी चेतावनी स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब ईरानी मिसाइलों ने जवाबी कार्रवाई में कतर के LNG प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इस पर ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर Qatar की गैस सुविधाओं पर दोबारा हमला हुआ, तो अमेरिका “किसी भी हद तक जाकर जवाब देगा” और पूरे साउथ पार्स गैस फील्ड को नष्ट करने से भी पीछे नहीं हटेगा। “हिंसा नहीं चाहता, लेकिन जवाब देंगे” ट्रंप ने यह भी कहा कि वह इस स्तर की हिंसा और विनाश को अधिकृत नहीं करना चाहते, क्योंकि इसका दीर्घकालिक असर ईरान के भविष्य पर पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने यह साफ कर दिया कि अगर हालात और बिगड़े, तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करने में हिचकेगा नहीं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल इस हमले और बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी साफ दिख रहा है। गैस और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर साउथ पार्स जैसे बड़े गैस फील्ड पर खतरा बना रहा, तो यह पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi urges people to avoid LPG supply rumours amid global energy concerns.
PM Narendra Modi का संदेश: LPG को लेकर अफवाहों से सावधान रहें, भारत की तैयारियां मजबूत

  देश में LPG आपूर्ति को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे जनता के साथ लगातार संपर्क में रहें और किसी भी तरह की गलत जानकारी या घबराहट फैलाने की कोशिशों पर कड़ी नजर रखें। सूत्रों के अनुसार हाल ही में हुई बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सबसे अहम है कि सरकार और मंत्री सीधे लोगों तक सही जानकारी पहुंचाएं, ताकि किसी तरह की अफवाह या भ्रम की स्थिति न बने।   जनता से संपर्क बनाए रखने पर जोर बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों से लगातार संवाद बनाए रखें। जनता की चिंताओं को सुनें, उन्हें वास्तविक स्थिति से अवगत कराएं और जमीनी स्तर पर हालात की निगरानी करते रहें।   ‘भारत की तैयारियां मजबूत हैं’ प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि देश इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत की तैयारियां कई पड़ोसी देशों और अन्य राष्ट्रों की तुलना में अधिक मजबूत हैं और सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।   वैश्विक परिस्थिति से जुड़ी चुनौती प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती है। ऐसे में भारत की रणनीति भी वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय की जा रही है।   अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर बैठक में यह भी कहा गया कि जो लोग मौजूदा स्थिति को लेकर अनावश्यक घबराहट फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उन पर विशेष निगरानी रखी जाए। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी को तुरंत रोका जाए और सही तथ्य लोगों तक पहुंचाए जाएं।   सोशल मीडिया पर तथ्य आधारित जवाब देने के निर्देश प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विपक्ष या अन्य स्रोतों से फैलाए जा रहे दावों का तुरंत और तथ्य आधारित जवाब दिया जाए, ताकि गलत सूचनाओं से माहौल खराब न हो।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0