Gujarat

बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में गुजरात के चार नेताओं को मिली जिम्मेदारी
बीजेपी की नई टीम में गुजरात का दबदबा, चार नेताओं को मिली अहम राष्ट्रीय जिम्मेदारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में गुजरात का दबदबा साफ नजर आया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से घोषित नई टीम में गुजरात के चार नेताओं—वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, जगदीश ईश्वरभाई पटेल, रोहन गुप्ता और डॉ. हेमांग जोशी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।   वर्षाबेन दोशी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी   गुजरात की वरिष्ठ नेता वर्षाबेन दोशी को बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वह वढवाण से दो बार विधायक रह चुकी हैं और गुजरात बीजेपी संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। राष्ट्रीय टीम में उनकी नियुक्ति को पार्टी में गुजरात के अनुभवी नेतृत्व को महत्व देने के तौर पर देखा जा रहा है।   जगदीश पटेल और रोहन गुप्ता बने राष्ट्रीय सचिव   जगदीश ईश्वरभाई पटेल और रोहन गुप्ता को बीजेपी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। जगदीश पटेल अमराईवाड़ी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जबकि रोहन गुप्ता 2024 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। दोनों नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने से गुजरात की राजनीतिक और संगठनात्मक भूमिका और मजबूत हुई है।   हेमांग जोशी को युवा मोर्चे की कमान   गुजरात के वडोदरा से लोकसभा सांसद डॉ. हेमांग जोशी को भारतीय जनता युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। 35 वर्षीय जोशी को युवा नेतृत्व के तौर पर आगे बढ़ाना बीजेपी की संगठनात्मक रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह इससे पहले गुजरात बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में गुजरात के चार नेताओं को जगह मिलने से राज्य का राष्ट्रीय संगठन में प्रभाव और बढ़ा है। पार्टी की नई टीम में अनुभव और युवा नेतृत्व के साथ अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने पर भी जोर दिखाई देता है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
रोहन गुप्ता और जगदीश ईश्वरभाई पटेल को बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में जिम्मेदारी
रोहन गुप्ता और जगदीश पटेल को बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में बड़ी जिम्मेदारी, राष्ट्रीय मंत्री बनाए गए

गांधीनगर, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। गुजरात से रोहन गुप्ता और जगदीश ईश्वरभाई पटेल को राष्ट्रीय टीम में शामिल करते हुए राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं गुजरात के ही सांसद डॉ. हेमांग जोशी को भाजपा युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।   रोहन गुप्ता को मिली राष्ट्रीय जिम्मेदारी   रोहन गुप्ता पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और कांग्रेस के आईटी सेल के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। अब बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में उन्हें राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी में उनके संगठनात्मक और डिजिटल अनुभव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   जगदीश पटेल की भी राष्ट्रीय टीम में एंट्री   अमराईवाड़ी से पूर्व विधायक जगदीश ईश्वरभाई पटेल को भी बीजेपी ने राष्ट्रीय मंत्री बनाया है। उन्हें गुजरात में संगठन के स्तर पर सक्रिय और जमीनी पकड़ रखने वाले नेताओं में माना जाता है। राष्ट्रीय टीम में शामिल किए जाने के साथ अब उनकी भूमिका गुजरात से आगे राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ेगी।   गुजरात से चार नेताओं को मिली जगह   बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में गुजरात से कुल चार नेताओं को जगह मिली है। इनमें रोहन गुप्ता और जगदीश पटेल के अलावा वर्षाबेन दोशी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डॉ. हेमांग जोशी को युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी की नई टीम को आगामी चुनावों और संगठन को मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। गुजरात से चार नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रदेश बीजेपी में भी इसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर रोहन गुप्ता और जगदीश पटेल की नियुक्ति से गुजरात बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में प्रतिनिधित्व को और मजबूती मिली है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
अहमदाबाद में PG की छत पर छात्रा से कथित दुष्कर्म के मामले में पुलिस कार्रवाई
अहमदाबाद में PG की छत पर छात्रा से दरिंदगी, सुरक्षा गार्ड गिरफ्तार

अहमदाबाद, एजेंसियां। गुजरात के अहमदाबाद से एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आनंदनगर इलाके में एक PG की छत पर गई इंटीरियर डिजाइनिंग की छात्रा के साथ वहां काम करने वाले सुरक्षा गार्ड ने कथित तौर पर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।   छत पर टहलने गई थी छात्रा     घटना 8 अगस्त की रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है। छात्रा रात में टहलने के लिए PG की छत पर गई थी। उस समय सुरक्षा गार्ड भी वहां मौजूद था।   प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्रा ने आरोपी से बचकर छत से नीचे जाने की कोशिश की। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी ने उसके गले में तार बांध दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद छात्रा को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।   आरोपी की पहचान हुई     पुलिस ने आरोपी की पहचान धर्म सिंह के रूप में की है। वह PG में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करता था और उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने घटना से कुछ दिन पहले ही PG में काम शुरू किया था।     10 पुलिस टीमों ने रातभर की तलाश     घटना की जानकारी मिलने के बाद आनंदनगर पुलिस, स्थानीय अपराध शाखा और अपराध शाखा की टीमों ने आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए 10 टीमें गठित की थीं। टीमों ने रातभर संभावित ठिकानों पर तलाश की और रविवार सुबह धर्म सिंह को गिरफ्तार कर लिया।     CCTV फुटेज जांच में अहम     पुलिस ने PG में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली है। फुटेज में आरोपी को लिफ्ट के जरिए अलग-अलग मंजिलों और छत के बीच आते-जाते देखा गया है। पुलिस इस फुटेज को जांच में अहम साक्ष्य मानकर आगे की पड़ताल कर रही है।   फिलहाल पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। वहीं, पीड़ित छात्रा डॉक्टरों की निगरानी में है और उसका इलाज जारी है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
Chandipura Virus
चांदीपुरा वायरस के प्रकोप की जांच तेज, गुजरात-राजस्थान में केंद्र ने तैनात की राष्ट्रीय टीम

नई दिल्ली, एजेंसियां। चांदीपुरा वायरस (CHPV) के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने जांच और रोकथाम के प्रयास तेज कर दिए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुजरात और राजस्थान में National Joint Outbreak Response Team (NJORT) तैनात की है। टीम का उद्देश्य संक्रमण की स्थिति का आकलन करने के साथ निगरानी, जांच और नियंत्रण उपायों को मजबूत करना है।   गुजरात और राजस्थान में भेजी गई टीम   केंद्र की ओर से तैनात NJORT में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर बीमारी की निगरानी, मामलों की जांच, संक्रमण के संभावित स्रोत और रोकथाम के उपायों पर काम करेगी।   केंद्र ने इसे ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के तहत बहु-संस्थागत जांच का हिस्सा बताया है। इसमें मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पशु और संक्रमण फैलाने वाले वाहकों की निगरानी पर भी ध्यान दिया जा रहा है।   गुजरात में बच्चों में सामने आए गंभीर मामले   ताजा रिपोर्टों के मुताबिक गुजरात में इस मानसून के दौरान चांदीपुरा वायरस से जुड़े मामलों को लेकर चिंता बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार 184 संदिग्ध मामलों में 35 संक्रमण की पुष्टि हुई है और 22 बच्चों की मौत हुई है। राजस्थान में भी कुछ मामले सामने आए हैं।   हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच केवल चांदीपुरा वायरस तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक Acute Encephalitis Syndrome (AES) से जुड़े मामलों के अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रहे हैं।   संक्रमण की जांच और जीनोम सीक्वेंसिंग पर जोर   केंद्र की टीम राज्य की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ संदिग्ध मामलों की जांच और प्रयोगशाला परीक्षणों में सहयोग करेगी। विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों की ओर से भी बीमारी के कारणों और वायरस के प्रसार को समझने के लिए जांच की जा रही है। सरकार का लक्ष्य बीमारी की समय पर पहचान, मामलों की निगरानी और संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्यों के साथ समन्वय मजबूत करना है।   क्या है चांदीपुरा वायरस?   चांदीपुरा वायरस एक ऐसा संक्रमण है जो Acute Encephalitis Syndrome (AES) जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जुड़ सकता है। यह मुख्य रूप से सैंडफ्लाई और कुछ अन्य कीटों के काटने से फैलता है। बच्चों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए बुखार, उल्टी, दौरे या चेतना में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है।   केंद्र सरकार की टीम की तैनाती के बाद अब गुजरात और राजस्थान में बीमारी की निगरानी, वैज्ञानिक जांच और रोकथाम के प्रयास और तेज किए जा रहे हैं।

anjali kumari अगस्त 6, 2026 0
वडोदरा मंझलपुर उपचुनाव में बीजेपी ने सीट बरकरार रखी
वडोदरा के मंझलपुर उपचुनाव में बीजेपी ने सीट बरकरार रखी, जीत का अंतर पहले से घटा

वडोदरा, एजेंसियां। गुजरात के वडोदरा की मंझलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने अपना कब्जा बरकरार रखा है। हालांकि, पिछले चुनाव की तुलना में इस बार पार्टी की जीत का अंतर कम हुआ है। नतीजे को भाजपा के लिए सीट बचाने की राहत और कांग्रेस के लिए अपने प्रदर्शन में सुधार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।   भाजपा ने सीट पर कायम रखा कब्जा     मंझलपुर उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार ने जीत दर्ज कर पार्टी के कब्जे वाली सीट को बरकरार रखा। भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय विकास और संगठन की मजबूती को प्रमुख मुद्दा बनाया था। नतीजे सामने आने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाया और इसे मतदाताओं के समर्थन का परिणाम बताया।     पिछले चुनाव की तुलना में घटा जीत का अंतर     भाजपा के लिए इस चुनाव का सबसे अहम पहलू जीत का कम हुआ अंतर रहा। पिछली बार की तुलना में इस बार भाजपा उम्मीदवार को अपेक्षाकृत कम बढ़त मिली। कम अंतर ने विपक्षी दलों को भाजपा के वोट आधार में सेंध लगाने और आगामी चुनावों के लिए अपनी रणनीति मजबूत करने का मौका दिया है।     कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी नजर     कांग्रेस ने मंझलपुर सीट पर भाजपा को कड़ी चुनौती देने की कोशिश की। हालांकि पार्टी सीट जीतने में सफल नहीं हुई, लेकिन वोटों के अंतर में कमी को कांग्रेस अपने लिए सकारात्मक संकेत के तौर पर देख सकती है। उपचुनाव के नतीजे के बाद दोनों प्रमुख दल अब बूथ स्तर पर अपने प्रदर्शन और मतदाताओं के रुझान का विश्लेषण करेंगे।     गुजरात की राजनीति के लिए क्या संकेत?     मंझलपुर सीट भाजपा के पास बने रहने से गुजरात में पार्टी की मजबूत स्थिति कायम रहने का संकेत मिला है। हालांकि, जीत का अंतर घटने से यह भी स्पष्ट है कि विपक्ष के लिए कुछ राजनीतिक जमीन बनने की संभावना मौजूद है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
Indian-origin diamond trader Dhiru Ramani released after kidnapping in Mali
माली में भारतीय मूल के हीरा कारोबारी धीरू रमानी रिहा, ₹44 करोड़ फिरौती के बाद मिली आजादी

Mali Kidnapping: पश्चिम अफ्रीकी देश माली में करीब तीन महीने पहले अगवा किए गए भारतीय मूल के हीरा कारोबारी धीरू रमानी (75) को रिहा कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके परिवार ने लगभग ₹44 करोड़ (4 मिलियन यूरो) की फिरौती चुकाने के बाद उनकी रिहाई सुनिश्चित कराई। पहले मांगे गए थे ₹100 करोड़ रिपोर्ट्स के अनुसार, अपहरणकर्ताओं ने शुरुआत में करीब ₹100 करोड़ की फिरौती की मांग की थी। हालांकि, अमेरिका में रहने वाले धीरू रमानी के परिवार ने लंबी बातचीत के बाद रकम घटाकर 4 मिलियन यूरो (करीब ₹44 करोड़) कर दी, जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। हाल ही में खरीदी थी सोने की खदान धीरू रमानी मूल रूप से गुजरात के अमरेली जिले के रहने वाले हैं और सूरत के हीरा कारोबार से जुड़े रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने हाल ही में माली में एक सोने की खदान खरीदी थी और कुछ समय से वहीं रह रहे थे। इसी दौरान उनका अपहरण कर लिया गया था। रिहाई के बाद माली में ही हैं मौजूद सूत्रों के मुताबिक, रिहाई के बाद धीरू रमानी अभी भी माली में हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां उनसे घटना के संबंध में पूछताछ कर रही हैं। परिवार ने खुद की अपहरणकर्ताओं से बातचीत रिपोर्ट के अनुसार, फिरौती और रिहाई की पूरी बातचीत अमेरिका में रहने वाले उनके परिवार ने सीधे अपहरणकर्ताओं से की। सूत्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया में भारत सरकार की किसी एजेंसी की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रही।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
Surat Rainfall
देशभर में बारिश का कहर: सूरत में रिकॉर्ड वर्षा, कई राज्यों में बाढ़, हादसे और जनजीवन प्रभावित

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे गंभीर स्थिति गुजरात के सूरत में है, जहां पिछले 36 घंटों में 18 इंच बारिश दर्ज की गई। इस बारिश ने जुलाई 1941 में बने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। शहर के अधिकांश हिस्से जलमग्न हो गए हैं। सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में पानी भर गया, जबकि कई स्थानों पर वाहन पानी के तेज बहाव में बहते दिखाई दिए।   सूरत में नौ लोगों की मौत, हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया भारी बारिश के दौरान करंट लगने, पेड़ गिरने और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में नौ लोगों की मौत हो गई। प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर करीब 3,400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। सूरत और नवसारी में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं तथा लोगों से केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की गई है।   मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में भी बारिश का असर मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार शाम एक पांच मंजिला इमारत ढह गई, जबकि राजस्थान के जालोर में एक जीप नदी में पलट गई। चित्तौड़गढ़ में आकाशीय बिजली गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हरियाणा के गुरुग्राम में भारी बारिश के कारण दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) का एक हिस्सा धंस गया, जिससे करीब 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। कई इलाकों में जलभराव के बीच एक स्कूल बस भी नाले में फंस गई। पुलिस ने कंपनियों से कर्मचारियों को कुछ दिनों तक वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने की अपील की है।   अरुणाचल और कर्नाटक में भी अलर्ट अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से 26 जिलों के 94 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक चार लोगों की मौत, 21 लोगों के घायल होने और दो महिलाओं के लापता होने की सूचना है। वहीं कर्नाटक के बेलगावी और शिवमोगा जिलों में एहतियात के तौर पर स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे गए हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चला रहा है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Firefighters respond to a major fire at a motel in Wooster, Ohio, where three members of an Indian family from Gujarat died due to smoke inhalation.
अमेरिका में दर्दनाक हादसा: ओहायो के मोटल में आग से गुजरात के दंपति और बेटी की मौत, दम घुटने से गई जान

नई दिल्ली/ओहायो: अमेरिका के ओहायो राज्य के वूस्टर शहर में हुए एक भीषण अग्निकांड में गुजरात के एक परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में गुजरात के खेड़ा जिले के नडियाद निवासी हितेशभाई सुथार, उनकी पत्नी हिनाबेन सुथार और 20 वर्षीय बेटी ईशानी सुथार की दम घुटने से जान चली गई। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। बेहतर भविष्य की तलाश में गए थे अमेरिका मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हितेशभाई सुथार अपने परिवार के साथ करीब दो वर्ष पहले बेहतर रोजगार और भविष्य की उम्मीद में अमेरिका गए थे। वे ओहायो के वूस्टर स्थित इकोनो लॉज मोटल में कार्यरत थे और परिवार भी वहीं रह रहा था। रात डेढ़ बजे लगी आग पुलिस के मुताबिक, बुधवार देर रात करीब 1:30 बजे मोटल में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग तेजी से पूरे भवन में फैलने लगी। हालात बिगड़ते देख परिवार ने मोटल के फ्रंट डेस्क पर फोन कर मदद मांगी। बताया गया कि उन्हें तत्काल बाथरूम में जाकर पानी चालू रखने और वहीं सुरक्षित रहने की सलाह दी गई। इसके बाद तीनों बाथरूम में चले गए और बचाव दल का इंतजार करने लगे। धुएं से दम घुटने से हुई मौत अग्निशमन विभाग के मौके पर पहुंचने तक आग काफी फैल चुकी थी। बचाव दल जब परिवार तक पहुंचा, तब तक बाथरूम में जहरीले धुएं और गैस के कारण तीनों की दम घुटने से मौत हो चुकी थी। अधिकारियों ने बताया कि आग पर काबू पाने में समय लगने के कारण परिवार को समय रहते बाहर नहीं निकाला जा सका। गुजरात में शोक की लहर इस दर्दनाक घटना की खबर मिलते ही गुजरात के खेड़ा जिले के नडियाद में परिवार के रिश्तेदारों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने परिवार के निधन पर गहरा दुख जताया है। आग लगने के कारणों की जांच जारी अमेरिकी प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आग किस कारण लगी और क्या मोटल में सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन किया गया था या नहीं। शव भारत लाने की प्रक्रिया शुरू परिवार के शवों को भारत लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने में सहायता कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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