Healthy Drinks

Coconut water and electrolyte drinks compared for hydration after fever, diarrhea, vomiting, exercise and heavy sweating
बुखार, दस्त या एक्सरसाइज के बाद क्या पिएं? नारियल पानी या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक, जानिए किस स्थिति में कौन बेहतर

नई दिल्ली: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में सिर्फ पानी शरीर की जरूरत पूरी नहीं कर पाता। तेज पसीना, लंबे समय तक एक्सरसाइज, दस्त, उल्टी या बुखार के दौरान शरीर से पानी के साथ सोडियम, पोटैशियम और दूसरे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम हो सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि नारियल पानी बेहतर है या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक? इसका जवाब हर व्यक्ति और हर स्थिति के लिए एक जैसा नहीं है। सामान्य हाइड्रेशन के लिए नारियल पानी अच्छा विकल्प हो सकता है, जबकि लंबे समय तक भारी एक्सरसाइज या अत्यधिक पसीने के बाद सोडियम युक्त इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक ज्यादा उपयोगी हो सकती है। वहीं दस्त और उल्टी की स्थिति में ORS को प्राथमिकता देना ज्यादा उचित है। शरीर के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स क्यों जरूरी हैं? इलेक्ट्रोलाइट्स ऐसे मिनरल्स हैं जो शरीर में विद्युत आवेश के साथ काम करते हैं। इनमें सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड, मैग्नीशियम और कैल्शियम प्रमुख हैं। ये शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने के साथ मांसपेशियों के संकुचन, तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज और हृदय की सामान्य धड़कन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब शरीर से बहुत ज्यादा पसीना निकलता है या दस्त, उल्टी और बुखार के दौरान तरल पदार्थ कम होते हैं, तो इलेक्ट्रोलाइट्स की भी कमी हो सकती है। ऐसी स्थिति में केवल पानी पीना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। नारियल पानी में क्या मिलता है? नारियल पानी एक प्राकृतिक पेय है, जिसमें पानी के साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, थोड़ी मात्रा में सोडियम और प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं। ताजा नारियल पानी का फायदा यह है कि इसमें आमतौर पर अतिरिक्त चीनी और कृत्रिम फ्लेवर नहीं होते। इसलिए सामान्य हाइड्रेशन के लिए यह एक पौष्टिक विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसमें सोडियम की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। इसलिए जब शरीर ने बहुत अधिक सोडियम खोया हो, तब नारियल पानी अकेले पर्याप्त इलेक्ट्रोलाइट रिप्लेसमेंट नहीं कर सकता। इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक कब ज्यादा उपयोगी? इलेक्ट्रोलाइट या स्पोर्ट्स ड्रिंक में पानी के साथ सोडियम, पोटैशियम और अक्सर ग्लूकोज या कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं। इनका उद्देश्य पसीने के दौरान खोए हुए तरल और इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करना होता है। लंबे समय तक भारी एक्सरसाइज, गर्म मौसम में ज्यादा पसीना आने या लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि के बाद सोडियम युक्त इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक उपयोगी हो सकती है। लेकिन बाजार में मिलने वाली हर इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक एक जैसी नहीं होती। कुछ में अतिरिक्त चीनी और कैलोरी काफी ज्यादा हो सकती है। इसलिए खरीदने से पहले लेबल पर सोडियम, शुगर और कैलोरी की मात्रा देखना जरूरी है। नारियल पानी बनाम इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक विशेषता नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट/स्पोर्ट्स ड्रिंक पानी अधिक अधिक पोटैशियम अधिक सामान्य से मध्यम सोडियम कम आमतौर पर अधिक अतिरिक्त चीनी ताजा नारियल पानी में नहीं कुछ उत्पादों में अधिक प्रोसेसिंग प्राकृतिक अधिकांश पैक्ड उत्पाद प्रोसेस्ड सामान्य हाइड्रेशन अच्छा विकल्प अच्छा विकल्प अत्यधिक पसीना अकेले पर्याप्त नहीं हो सकता ज्यादा उपयोगी हो सकता है दस्त या उल्टी में क्या पिएं? दस्त और उल्टी में शरीर से पानी के साथ सोडियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से निकल सकते हैं। ऐसी स्थिति में ORS यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन ज्यादा उपयुक्त विकल्प है। नारियल पानी हल्के डिहाइड्रेशन में कुछ मदद कर सकता है, लेकिन गंभीर दस्त, बार-बार उल्टी या स्पष्ट डिहाइड्रेशन में इसे ORS का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यहां एक जरूरी अंतर समझना भी महत्वपूर्ण है: ORS और सामान्य स्पोर्ट्स ड्रिंक एक ही चीज नहीं हैं। ORS को शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने के उद्देश्य से विशेष अनुपात में तैयार किया जाता है। बुखार में नारियल पानी या इलेक्ट्रोलाइट? हल्के बुखार में पर्याप्त तरल लेना महत्वपूर्ण है। पानी और दूसरे तरल पदार्थ लिए जा सकते हैं। अगर बुखार के साथ ज्यादा पसीना, उल्टी या दस्त भी हो रहे हैं, तो इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में ORS उपयोगी हो सकता है। केवल नारियल पानी पर निर्भर रहना सही विकल्प नहीं होगा, खासकर अगर डिहाइड्रेशन के लक्षण मौजूद हों। एक्सरसाइज के बाद क्या बेहतर है? अगर आपने हल्की या सामान्य एक्सरसाइज की है और बहुत ज्यादा पसीना नहीं निकला, तो सादा पानी पर्याप्त हो सकता है। नारियल पानी भी एक अच्छा विकल्प है। लेकिन लंबे समय तक तेज एक्सरसाइज करने या बहुत ज्यादा पसीना निकलने पर शरीर से सोडियम की अधिक मात्रा कम हो सकती है। ऐसे में पर्याप्त सोडियम वाला इलेक्ट्रोलाइट पेय नारियल पानी से ज्यादा उपयोगी हो सकता है। यानी हर एक्सरसाइज के बाद इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक पीना जरूरी नहीं है। इसकी जरूरत एक्सरसाइज की अवधि, तीव्रता, मौसम और पसीने की मात्रा पर निर्भर करती है। किस स्थिति में क्या चुनें? सामान्य हाइड्रेशन: नारियल पानी अच्छा विकल्प हो सकता है। हल्की एक्सरसाइज: पानी या नारियल पानी पर्याप्त हो सकता है। लंबी और भारी एक्सरसाइज: सोडियम वाला इलेक्ट्रोलाइट पेय अधिक उपयोगी हो सकता है। बहुत ज्यादा पसीना: सोडियम और तरल दोनों की भरपाई पर ध्यान दें। दस्त या उल्टी: ORS को प्राथमिकता दें। गंभीर डिहाइड्रेशन: चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। सबसे जरूरी बात नारियल पानी और इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक में से किसी एक को हर परिस्थिति में बेहतर बताना सही नहीं होगा। सही विकल्प इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर ने कितना पानी और कौन से इलेक्ट्रोलाइट खोए हैं। सामान्य हाइड्रेशन के लिए नारियल पानी एक प्राकृतिक विकल्प हो सकता है। अत्यधिक पसीने और लंबे समय तक भारी व्यायाम के बाद सोडियम युक्त इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक उपयोगी हो सकती है। लेकिन दस्त, उल्टी या गंभीर डिहाइड्रेशन में ORS को प्राथमिकता देना चाहिए। अगर बहुत कम पेशाब आ रहा हो, लगातार उल्टी-दस्त हो रहे हों, तेज चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या बेहोशी जैसी समस्या हो, तो केवल घर पर हाइड्रेशन पर निर्भर न रहें और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।  

surbhi अगस्त 13, 2026 0
Sawan Fast Drinks
सावन सोमवार व्रत में कमजोरी से बचाएंगे ये 6 हेल्दी ड्रिंक्स

नई दिल्ली, एजेंसियां। सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और उपवास के लिए खास माना जाता है। इस दौरान कई श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं। लंबे समय तक कुछ न खाने की वजह से कई बार शरीर में कमजोरी, थकान और पानी की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में व्रत के दौरान कुछ पौष्टिक और हाइड्रेटिंग ड्रिंक्स को डाइट में शामिल किया जा सकता है।   1. नारियल पानी देगा तुरंत ताजगी   व्रत के दौरान नारियल पानी एक बेहतर विकल्प माना जाता है। इसमें प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में पानी की कमी को पूरा करने और ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।   2. मखाना मिल्क ड्रिंक से मिलेगी लंबे समय तक एनर्जी   दूध में भुने हुए मखाने मिलाकर तैयार किया गया ड्रिंक व्रत के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। यह पेट को लंबे समय तक भरा रखने के साथ शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है। इसमें स्वाद के लिए इलायची पाउडर भी मिलाया जा सकता है।   3. फ्रूट शेक से मिलेगी प्राकृतिक मिठास   केला, सेब या चीकू जैसे व्रत में खाए जाने वाले फलों से तैयार शेक शरीर को तुरंत ऊर्जा दे सकते हैं। इसमें चीनी मिलाने की बजाय फलों की प्राकृतिक मिठास का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।   4. दूध और ड्राई फ्रूट शेक बढ़ाएगा पोषण   बादाम, खजूर, अखरोट या मखाने को दूध के साथ मिलाकर तैयार किया गया शेक पोषण से भरपूर होता है। यह लंबे समय तक शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकता है।   5. तरबूज-पुदीना स्मूदी रखेगी शरीर को हाइड्रेटेड   तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती है। इसे पुदीने की पत्तियों के साथ मिलाकर तैयार की गई स्मूदी शरीर को ठंडक देने के साथ हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद कर सकती है।   6. केला-खजूर स्मूदी से मिलेगी भरपूर ताकत   व्रत में जल्दी भूख लगने पर केला और खजूर की स्मूदी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। दूध के साथ तैयार यह ड्रिंक शरीर को ऊर्जा देने के साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करती है।   ध्यान रखें: व्रत के दौरान अपनी सेहत और जरूरत के अनुसार ही भोजन व पेय पदार्थों का सेवन करें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को व्रत रखने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

anjali kumari अगस्त 3, 2026 0
Beetroot juice, black coffee, and green tea placed together as healthy drink options for fatty liver support.
Fatty Liver Diet: फैटी लिवर में फायदेमंद हो सकती हैं ये 3 हेल्दी ड्रिंक्स, जानें कब पिएं, हफ्ते में कितनी बार लें और घर पर कैसे करें तैयार

आजकल खराब खानपान, लंबे समय तक बैठे रहने की आदत और बढ़ता मोटापा फैटी लिवर की समस्या को तेजी से बढ़ा रहे हैं। शुरुआती चरण में अक्सर इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन समय रहते खानपान और जीवनशैली में सुधार करके लिवर की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। पोषण विशेषज्ञों और वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार कुछ प्राकृतिक पेय पदार्थ ऐसे हैं, जिनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व लिवर में जमा अतिरिक्त फैट, सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, ये ड्रिंक्स चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं हैं। 1. चुकंदर का जूस घर पर तैयार करने का समय 5–7 मिनट कैसे बनाएं? 1 मध्यम आकार का चुकंदर ½ गाजर (वैकल्पिक) थोड़ा अदरक थोड़ा पानी चाहें तो कुछ बूंदें नींबू की सभी सामग्री को ब्लेंड करके बिना अतिरिक्त चीनी मिलाए ताजा जूस तैयार करें। कब पिएं? सुबह नाश्ते के 30–60 मिनट बाद या मिड-मॉर्निंग। हफ्ते में कितनी बार? 3–4 दिन संभावित फायदे एंटीऑक्सीडेंट्स और नाइट्रेट्स का अच्छा स्रोत ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने में मदद लिवर की सामान्य कार्यक्षमता को सपोर्ट कर सकता है सूजन कम करने में सहायक हो सकता है 2. ब्लैक कॉफी (बिना चीनी) तैयार करने का समय 3–5 मिनट कैसे बनाएं? गर्म पानी में कॉफी मिलाएं। अतिरिक्त चीनी, क्रीम या फ्लेवर्ड सिरप से बचें। कब पिएं? सुबह नाश्ते के बाद या दोपहर के भोजन से पहले। हफ्ते में कितनी बार? 5–7 दिन (1–2 कप प्रतिदिन तक) संभावित फायदे लिवर एंजाइम्स को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। फैटी लिवर के जोखिम को कम करने से जुड़े कई अध्ययन उपलब्ध हैं। लिवर में सूजन कम करने में सहायक हो सकती है। लिवर की सामान्य कार्यक्षमता को सपोर्ट कर सकती है। नोट: उच्च रक्तचाप, गर्भावस्था या कैफीन संवेदनशीलता वाले लोग डॉक्टर से सलाह लें। 3. ग्रीन टी तैयार करने का समय 3–4 मिनट कैसे बनाएं? गर्म (उबलता नहीं) पानी में 2–3 मिनट तक ग्रीन टी बैग या पत्तियां डालें। कब पिएं? दोपहर या शाम के समय भोजन के 1–2 घंटे बाद। हफ्ते में कितनी बार? 5–6 दिन (1–2 कप प्रतिदिन) संभावित फायदे कैटेचिन्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत लिवर में फैट जमा होने को कम करने में मदद मिल सकती है। सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने में सहायक हो सकती है। लिवर की सामान्य कार्यक्षमता को सपोर्ट कर सकती है। केवल ड्रिंक्स से नहीं होगा फायदा अगर फैटी लिवर को बेहतर तरीके से मैनेज करना चाहते हैं, तो इन आदतों को भी अपनाना जरूरी है– ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं। मीठे पेय और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट सीमित करें। साबुत अनाज, दालें, फल और हरी सब्जियां बढ़ाएं। रोज 30–45 मिनट शारीरिक गतिविधि करें। पर्याप्त पानी पिएं। वजन नियंत्रित रखें। पर्याप्त नींद लें। ध्यान दें ये ड्रिंक्स फैटी लिवर को मैनेज करने वाली स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन ये इलाज का विकल्प नहीं हैं। यदि आपको फैटी लिवर, डायबिटीज, किडनी रोग, लिवर की गंभीर बीमारी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो किसी भी नई डाइट या पेय को नियमित रूप से शुरू करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह अवश्य लें।  

anmol जुलाई 20, 2026 0
Fenugreek Seed Water
मेथी दाना पानी: महिलाओं के लिए वरदान, जानें सही समय और सेवन का तरीका

नई दिल्ली, एजेंसियां। मेथी दाना भारतीय रसोई का एक आम मसाला होने के साथ-साथ आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में भी जाना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं। खासकर महिलाओं के लिए मेथी दाना पानी को बेहद फायदेमंद माना जाता है, जिसे अक्सर डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं।   ब्लड शुगर और पाचन के लिए लाभकारी   विशेषज्ञों के अनुसार, मेथी दाना पानी ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक होता है।   महिलाओं के स्वास्थ्य में मददगार   मेथी दाना पानी हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है। यह पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं और पीसीओएस जैसी स्थितियों में राहत देने में उपयोगी माना जाता है।   वजन घटाने और त्वचा-बालों के लिए फायदेमंद   इसका सेवन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे वजन नियंत्रित रहता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ और बालों को मजबूत बनाने में सहायक हो सकते हैं।   मेथी दाना पानी बनाने का तरीका   एक गिलास पानी में 1–2 चम्मच मेथी दाना रातभर भिगो दें। सुबह इसे छानकर खाली पेट पिएं। चाहें तो भीगे हुए दानों को भी चबाया जा सकता है।   सही समय और जरूरी सावधानी   विशेषज्ञों के अनुसार, मेथी दाना पानी पीने का सबसे अच्छा समय सुबह खाली पेट है। इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें और यदि आप किसी बीमारी या दवा का सेवन कर रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

anjali kumari जुलाई 4, 2026 0
Cup of green tea with fresh leaves highlighting benefits for oral health and brain function.
सिर्फ वजन घटाने के लिए नहीं, दांतों और दिमाग के लिए भी फायदेमंद है ग्रीन टी, जानिए इसके बड़े लाभ

ग्रीन टी को आमतौर पर वजन कम करने और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने वाले पेय के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसके फायदे केवल वेट लॉस तक सीमित नहीं हैं। इसमें मौजूद कैटेचिन, पॉलीफेनॉल, ईजीसीजी (EGCG) और एल-थीनिन जैसे शक्तिशाली तत्व शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। खासकर यह दांतों, मसूड़ों और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। ग्रीन टी में क्यों होते हैं इतने फायदे? ग्रीन टी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं। फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कई पुरानी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनॉल और ईजीसीजी शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं। दांतों और ओरल हेल्थ के लिए ग्रीन टी के फायदे 1. कैविटी का खतरा कम कर सकती है ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन ऐसे बैक्टीरिया की गतिविधि को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो दांतों में सड़न और कैविटी का कारण बनते हैं। इससे दांतों की सतह पर बैक्टीरिया के चिपकने का जोखिम भी कम हो सकता है। 2. मसूड़ों को रख सकती है स्वस्थ ग्रीन टी के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मसूड़ों की सूजन और ब्लीडिंग को कम करने में मदद कर सकते हैं। नियमित सेवन से पीरियोडोंटल डिजीज का जोखिम कम होने की संभावना भी बताई गई है। 3. मुंह की बदबू से दिला सकती है राहत मुंह की दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में ग्रीन टी मददगार हो सकती है। इससे ओरल हाइजीन बेहतर बनी रहती है और सांसों की बदबू कम हो सकती है। दिमाग और याददाश्त के लिए भी फायदेमंद 1. बढ़ा सकती है एकाग्रता ग्रीन टी में मौजूद कैफीन और एल-थीनिन का संयोजन मानसिक सतर्कता और फोकस को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। यह दिमाग को सक्रिय बनाए रखने में सहायक माना जाता है। 2. याददाश्त को दे सकती है मजबूती कुछ अध्ययनों के अनुसार, ग्रीन टी का नियमित सेवन मूड को बेहतर बनाने और उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त में होने वाली गिरावट के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। ध्यान रखें ग्रीन टी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकती है, लेकिन इसे किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली के साथ सीमित मात्रा में ग्रीन टी का सेवन बेहतर परिणाम दे सकता है।  

surbhi जून 19, 2026 0
Fresh coconut water served in summer highlighting hydration and health benefits during hot weather
गर्मियों में नारियल पानी पीने का सही समय क्या है? एक्सपर्ट्स ने बताए बड़े फायदे

भीषण गर्मी, पसीना और डिहाइड्रेशन के बीच नारियल पानी एक नेचुरल एनर्जी ड्रिंक बनकर उभर रहा है। इलेक्ट्रोलाइट्स, पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ पाचन और स्किन हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। अब एक्सपर्ट्स ने बताया है कि इसे किस समय पीना सबसे ज्यादा असरदार हो सकता है। सुबह खाली पेट पीना क्यों फायदेमंद? इंटीग्रेटिव न्यूट्रिशनिस्ट्स के मुताबिक, सुबह खाली पेट नारियल पानी पीने से शरीर को नेचुरल डिटॉक्स सपोर्ट मिलता है। यह पाचन को बेहतर बनाने, शरीर का pH बैलेंस बनाए रखने और दिनभर की हाइड्रेशन जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है। क्लिनिकल डाइटिशियन वेदिका प्रेमानी के अनुसार, गर्मियों में शरीर से पसीने के जरिए तेजी से इलेक्ट्रोलाइट्स निकलते हैं। ऐसे में नारियल पानी उन्हें प्राकृतिक तरीके से रिप्लेस करने में मदद करता है। इससे स्किन हाइड्रेटेड रहती है और थकान भी कम महसूस होती है। वर्कआउट और गर्मी के बाद भी असरदार एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेज धूप, लंबे सफर या वर्कआउट के बाद नारियल पानी पीना शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद कर सकता है। यह बाजार में मिलने वाले शुगर-लोडेड ड्रिंक्स की तुलना में हल्का और ज्यादा हेल्दी विकल्प माना जाता है। कितना नारियल पानी पीना सही? विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में दिन में 1 से 2 गिलास यानी करीब 200-300ml नारियल पानी पर्याप्त माना जाता है। हालांकि, ज्यादा गर्मी या भारी फिजिकल एक्टिविटी के दौरान इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है। लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। खासकर किडनी रोग या डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद ही नियमित सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसमें पोटैशियम और नेचुरल शुगर मौजूद होती है। स्वाद और फायदे बढ़ाने के आसान तरीके एक्सपर्ट्स नारियल पानी में चिया सीड्स, नींबू या खीरा मिलाने की सलाह भी देते हैं। इससे फाइबर, विटामिन C और अतिरिक्त हाइड्रेशन का फायदा मिल सकता है। नारियल पानी के प्रमुख फायदे शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद पाचन और पेट की समस्याओं में राहत स्किन हेल्थ को सपोर्ट वर्कआउट के बाद रिकवरी में मदद गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाता है शुगर ड्रिंक्स का हेल्दी विकल्प

surbhi मई 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0