Morning Health Tips: सुबह का पहला भोजन पूरे दिन की पाचन क्रिया और ऊर्जा स्तर को प्रभावित करता है। इसलिए दिन की शुरुआत सही खानपान से करना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि खाली पेट कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन करने से एसिडिटी, पेट में जलन, गैस और अपच जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं, सही और संतुलित नाश्ता शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने के साथ पाचन तंत्र को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। सुबह खाली पेट किन 3 चीजों से बचें? 1. खट्टे फल और नींबू पानी डॉक्टरों के अनुसार, खाली पेट अत्यधिक खट्टे फल या नींबू पानी पीने से पेट में एसिड का स्तर बढ़ सकता है। इससे कुछ लोगों में एसिडिटी, जलन और पेट की अंदरूनी परत में असहजता हो सकती है, खासकर जिन लोगों को पहले से गैस्ट्रिक समस्या हो। 2. ब्लैक कॉफी खाली पेट ब्लैक कॉफी पीने से पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ सकता है। इससे गैस, पेट फूलना, जलन और बेचैनी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। यदि कॉफी पीनी हो तो बेहतर है कि हल्का नाश्ता करने के बाद लें। 3. ज्यादा मसालेदार और तला-भुना भोजन सुबह-सुबह कचौड़ी, छोले-भटूरे, पाव भाजी या अन्य मसालेदार और तले हुए खाद्य पदार्थ खाने से पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे एसिडिटी, अपच और पेट में भारीपन की शिकायत हो सकती है। सुबह खाली पेट क्या खाना बेहतर रहेगा? डॉक्टरों के अनुसार, दिन की शुरुआत हल्के, पौष्टिक और आसानी से पचने वाले भोजन से करनी चाहिए। आप इन विकल्पों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं— भीगे हुए बादाम, अखरोट या अन्य नट्स ओट्स या दलिया केला या सेब इडली-सांभर डोसा-सांभर ब्रेड ऑमलेट 2 उबले अंडे दही के साथ फल (यदि आपको एसिडिटी की समस्या न हो) मूंग दाल चीला पोहा या उपमा अंकुरित मूंग सलाद सुबह स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये आदतें उठने के बाद सबसे पहले पर्याप्त मात्रा में सादा या गुनगुना पानी पिएं। नाश्ता कभी भी स्किप न करें। प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन को प्राथमिकता दें। अत्यधिक मीठे, प्रोसेस्ड और जंक फूड से बचें। भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं। ध्यान रखें: हर व्यक्ति की पाचन क्षमता अलग होती है। यदि आपको गैस्ट्रिक अल्सर, एसिडिटी, IBS या कोई अन्य पाचन संबंधी बीमारी है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या पंजीकृत डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।
Weight Loss Healthy Sandwich Recipe: अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं और बार-बार लगने वाली भूख से परेशान हैं, तो अपनी डाइट में हाई-फाइबर और हाई-प्रोटीन सैंडविच शामिल कर सकते हैं। सही सामग्री से तैयार किया गया सैंडविच लंबे समय तक पेट भरा रखने, अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाने और शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे लंबे समय तक तृप्ति (Satiety) बनी रहती है। हालांकि, केवल किसी एक रेसिपी से वजन कम नहीं होता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और कैलोरी नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है। वजन घटाने के लिए 4 हेल्दी सैंडविच रेसिपी 1. चना और पालक सैंडविच सामग्री 1 कप उबले हुए चने 1 कप उबला हुआ पालक 1 छोटा चम्मच नींबू का रस काली मिर्च स्वादानुसार नमक 2 स्लाइस मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं उबले हुए चनों को हल्का मैश करें। इसमें बारीक कटा या उबला हुआ पालक, नींबू का रस, काली मिर्च और थोड़ा नमक मिलाएं। इस मिश्रण को मल्टीग्रेन ब्रेड पर फैलाकर ग्रिल करें। अनुमानित कैलोरी: 260–300 kcal 2. एवोकाडो और चुकंदर सैंडविच सामग्री आधा एवोकाडो ½ कप कद्दूकस किया हुआ चुकंदर काली मिर्च नींबू का रस मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं एवोकाडो को मैश करें और उसमें चुकंदर, नींबू का रस तथा काली मिर्च मिलाकर ब्रेड पर लगाएं। चाहें तो हल्का टोस्ट कर सकते हैं। अनुमानित कैलोरी: 240–280 kcal 3. चना-एवोकाडो प्रोटीन सैंडविच सामग्री ½ कप मैश किए हुए चने ½ एवोकाडो टमाटर के स्लाइस लेट्यूस या पालक काली मिर्च मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं चने और एवोकाडो को मिलाकर स्प्रेड तैयार करें। इसमें टमाटर और पालक की लेयर लगाकर सैंडविच तैयार करें। अनुमानित कैलोरी: 290–330 kcal 4. पालक-चुकंदर हेल्दी सैंडविच सामग्री उबला हुआ पालक कद्दूकस किया हुआ चुकंदर दही (लो-फैट) काली मिर्च मल्टीग्रेन ब्रेड कैसे बनाएं लो-फैट दही में पालक और चुकंदर मिलाकर स्टफिंग तैयार करें और ब्रेड में भरकर हल्का टोस्ट करें। अनुमानित कैलोरी: 220–260 kcal इन चीजों से क्या मिलेगा फायदा? चना: प्रोटीन और फाइबर से भरपूर, लंबे समय तक भूख कम महसूस होती है। एवोकाडो: हेल्दी फैट और फाइबर का अच्छा स्रोत। चुकंदर: फाइबर, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर। पालक: आयरन, फाइबर और विटामिन A, C और K का अच्छा स्रोत। वजन घटाने के लिए एक्सपर्ट टिप्स सफेद ब्रेड की जगह मल्टीग्रेन या होल व्हीट ब्रेड चुनें। मेयोनीज की जगह हंग कर्ड या ग्रीक योगर्ट का इस्तेमाल करें। सैंडविच के साथ शुगर युक्त ड्रिंक्स की बजाय छाछ, ग्रीन टी या सादा पानी लें। रोजाना 30–45 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करें। कुल कैलोरी सेवन का ध्यान रखें। ध्यान रखें :- यह सैंडविच वजन घटाने वाली संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है, लेकिन अकेले इसे खाने से वजन कम होने की गारंटी नहीं है। यदि आपको डायबिटीज, किडनी रोग या किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह जरूर लें।
नई दिल्ली: डायबिटीज (मधुमेह) एक ऐसी बीमारी है, जिसमें ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए दवाओं के साथ-साथ संतुलित खानपान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय भोजन में दालें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स का बेहतरीन स्रोत मानी जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ दालें कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) होने के कारण ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देतीं और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करती हैं। अगर आप टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं, तो मूंग, मसूर, चना, उड़द और अरहर जैसी दालों को अपनी डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। डायबिटीज में दालें क्यों हैं फायदेमंद? दालों में मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट, पौध-आधारित प्रोटीन और भरपूर फाइबर भोजन के पाचन को धीमा करते हैं। इससे ग्लूकोज धीरे-धीरे रक्त में पहुंचता है और ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। साथ ही दालें लंबे समय तक पेट भरा रखती हैं, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या भी कम होती है। 1. मूंग दाल मूंग दाल सबसे हल्की और आसानी से पचने वाली दालों में गिनी जाती है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम और पोटैशियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। फायदे ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाती है। भोजन के बाद शुगर स्पाइक कम करने में मदद करती है। पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखती है। वजन नियंत्रित रखने में सहायक हो सकती है। 2. मसूर दाल मसूर दाल में प्रोटीन और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। यह धीरे-धीरे पचती है, जिससे भोजन के बाद ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता। फायदे ग्लूकोज नियंत्रण में मददगार। आयरन और फोलेट का अच्छा स्रोत। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर। लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करती है। 3. चना दाल चना दाल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम से मध्यम श्रेणी में माना जाता है, इसलिए यह डायबिटीज मरीजों के लिए अच्छा विकल्प है। फायदे ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद। इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर बनाने में सहायक। फाइबर और प्रोटीन से भरपूर। वजन नियंत्रण में मददगार। 4. उड़द दाल उड़द दाल में प्रोटीन, आयरन, फाइबर और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। फायदे ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद। ब्लड शुगर नियंत्रण में सहायक। शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करती है। मांसपेशियों के लिए लाभदायक। 5. अरहर दाल अरहर दाल भारतीय घरों में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली दालों में से एक है। फायदे ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद। पोटैशियम और फोलेट से भरपूर। हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक। संतुलित भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा। डायबिटीज मरीज दाल खाते समय रखें ये बातें दाल का सेवन सीमित मात्रा में करें। दाल के साथ हरी सब्जियां और सलाद जरूर लें। ज्यादा तेल और घी का इस्तेमाल न करें। सफेद चावल की जगह मल्टीग्रेन रोटी या ब्राउन राइस के साथ दाल खाएं। व्यक्तिगत डाइट प्लान के लिए डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लें।
Healthy Recipe for Diabetes: अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और ऐसा भोजन चाहते हैं जो पौष्टिक होने के साथ ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद कर सके, तो मेथी-मूंग स्प्राउट्स सलाद एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह प्रोटीन, फाइबर और विटामिन से भरपूर है और इसे नाश्ते, लंच या शाम के स्नैक में शामिल किया जा सकता है। डायबिटीज में क्यों फायदेमंद है मेथी-मूंग स्प्राउट्स सलाद? डायबिटीज में ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना बेहतर माना जाता है जो लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI) वाले हों और जिनमें फाइबर व प्रोटीन भरपूर मात्रा में हो। अंकुरित मूंग (Sprouted Moong) और मेथी की पत्तियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। यह संयोजन लंबे समय तक पेट भरा रखने, ऊर्जा बनाए रखने और संतुलित आहार का हिस्सा बनने में मदद कर सकता है। आवश्यक सामग्री 1 कप अंकुरित मूंग 1 कप बारीक कटी ताजी मेथी 1 छोटा खीरा (कटा हुआ) 1 छोटा टमाटर (बीज निकालकर कटा हुआ) 1 छोटा प्याज (वैकल्पिक) 1 बड़ा चम्मच भुने कद्दू के बीज 1 छोटा चम्मच भुना अलसी पाउडर 1 बड़ा चम्मच नींबू का रस काली मिर्च पाउडर सेंधा नमक या सामान्य नमक (सीमित मात्रा में) बनाने की विधि अंकुरित मूंग को 2–3 मिनट हल्का स्टीम कर लें। अब एक बड़े बाउल में मूंग, मेथी, खीरा, टमाटर और प्याज मिलाएं। इसमें भुने कद्दू के बीज, अलसी पाउडर, नींबू का रस, काली मिर्च और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छी तरह टॉस करें। हेल्दी सलाद तैयार है। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 170–210 kcal प्रोटीन: 11–13 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 18–22 ग्राम फाइबर: 8–10 ग्राम फैट: 5–7 ग्राम संभावित फायदे हाई फाइबर और प्रोटीन से भरपूर। लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रखने वाली डाइट का हिस्सा बन सकता है। पाचन और वजन प्रबंधन में सहायक। एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन से भरपूर। कब खाएं? सुबह के नाश्ते में दोपहर के भोजन के साथ शाम के हेल्दी स्नैक के रूप में ध्यान दें : यह रेसिपी डायबिटीज-फ्रेंडली संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यह डायबिटीज का इलाज नहीं है। यदि आप डायबिटीज की दवा या इंसुलिन लेते हैं, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।
Hair Growth Diet During Monsoon: मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं बढ़ती नमी और स्कैल्प में पसीना बालों से जुड़ी कई समस्याओं को भी बढ़ा सकता है। इस मौसम में हेयर फॉल, डैंड्रफ और बालों की कमजोर जड़ों की शिकायत आम हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल हेयर केयर प्रोडक्ट्स ही नहीं बल्कि संतुलित और पोषक आहार भी बालों की सेहत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। प्रोटीन, आयरन, बायोटिन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, जिंक और विटामिन C से भरपूर खाद्य पदार्थ बालों को अंदर से पोषण देने में मदद कर सकते हैं। अगर आप मानसून में अपने बालों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं, तो इन 5 हेल्दी रेसिपीज को अपनी डेली डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। 1. मूंग दाल और पालक चीला आवश्यक सामग्री 1 कप भीगी हुई मूंग दाल 1 कप बारीक कटा पालक अदरक हरी मिर्च जीरा नमक बनाने की विधि : भीगी हुई मूंग दाल को पीस लें। इसमें पालक और बाकी सामग्री मिलाकर बैटर तैयार करें। नॉन-स्टिक तवे पर हल्का तेल लगाकर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें। अनुमानित पोषण (2 चीला) कैलोरी: 220–250 kcal प्रोटीन: 14–16 ग्राम आयरन: अच्छी मात्रा फाइबर: 7–8 ग्राम संभावित फायदे प्रोटीन और आयरन से भरपूर बालों की जड़ों को पोषण देने में सहायक लंबे समय तक पेट भरा रखने में मददगार 2. दही, अलसी और मिक्स सीड्स बाउल आवश्यक सामग्री 1 कप दही 1 बड़ा चम्मच अलसी 1 बड़ा चम्मच कद्दू के बीज 1 बड़ा चम्मच सूरजमुखी के बीज मौसमी फल बनाने की विधि : दही में सभी बीज और कटे हुए फल मिलाकर तुरंत सर्व करें। अनुमानित पोषण कैलोरी: 240–280 kcal प्रोटीन: 10–12 ग्राम हेल्दी फैट: 12–15 ग्राम संभावित फायदे ओमेगा-3 और जिंक का अच्छा स्रोत स्कैल्प हेल्थ को सपोर्ट करने में मददगार पाचन के लिए भी लाभदायक 3. चना स्प्राउट्स सलाद आवश्यक सामग्री 1 कप अंकुरित काला चना खीरा टमाटर गाजर नींबू काला नमक हरा धनिया बनाने की विधि : सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर ताजा सलाद तैयार करें। अनुमानित पोषण कैलोरी: 180–220 kcal प्रोटीन: 11–13 ग्राम फाइबर: 8–10 ग्राम संभावित फायदे प्रोटीन और आयरन से भरपूर इम्यूनिटी और बालों की मजबूती में सहायक 4. बाजरा-ओट्स वेज उपमा आवश्यक सामग्री बाजरा ओट्स गाजर मटर शिमला मिर्च करी पत्ता राई बनाने की विधि : हल्के तेल में तड़का लगाकर सब्जियां भूनें और बाजरा व ओट्स डालकर पकाएं। अनुमानित पोषण कैलोरी: 260–300 kcal फाइबर: 8–10 ग्राम प्रोटीन: 8–10 ग्राम संभावित फायदे ऊर्जा देने वाला हेल्दी नाश्ता फाइबर और मिनरल्स से भरपूर 5. पालक-पनीर बेसन चीला आवश्यक सामग्री 1 कप बेसन पालक पनीर अदरक जीरा हरी मिर्च बनाने की विधि : सभी सामग्री मिलाकर बैटर तैयार करें और हल्का तेल लगाकर तवे पर सेंक लें। अनुमानित पोषण कैलोरी: 250–300 kcal प्रोटीन: 15–18 ग्राम कैल्शियम: अच्छी मात्रा संभावित फायदे प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत बालों और हड्डियों के लिए लाभदायक मानसून में बालों की सेहत के लिए अपनाएं ये आदतें पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। रोजाना प्रोटीन युक्त भोजन लें। मौसमी फल और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। अधिक तला-भुना और जंक फूड सीमित रखें। पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम करें। ध्यान दें: बालों का झड़ना कई कारणों से हो सकता है, जैसे पोषण की कमी, हार्मोनल बदलाव, तनाव या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं। केवल किसी एक रेसिपी से बालों की वृद्धि की गारंटी नहीं दी जा सकती। यदि अत्यधिक हेयर फॉल हो रहा है, तो त्वचा विशेषज्ञ या योग्य चिकित्सक से सलाह लें।
Vitamin B12 Rich Diet: अगर आप फिटनेस को लेकर गंभीर हैं या हर उम्र में एक्टिव और हेल्दी रहना चाहते हैं, तो दही के साथ ये 4 हेल्दी कॉम्बिनेशन आपकी डेली डाइट को ज्यादा पौष्टिक बना सकते हैं। शाकाहारी लोगों के लिए दही Vitamin B12 के प्राकृतिक स्रोतों में से एक माना जाता है। हर उम्र के Fitness Freaks के लिए क्यों जरूरी है Vitamin B12? आज की व्यस्त जिंदगी में सिर्फ एक्सरसाइज करना ही काफी नहीं है, बल्कि सही पोषण भी उतना ही जरूरी है। Vitamin B12 शरीर में रेड ब्लड सेल्स के निर्माण, नर्वस सिस्टम के सामान्य कामकाज और ऊर्जा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर थकान, कमजोरी और शरीर में सुस्ती महसूस हो सकती है। अगर आप शाकाहारी हैं और अपनी डाइट को ज्यादा न्यूट्रिशियस बनाना चाहते हैं, तो दही के साथ ये 4 हेल्दी कॉम्बिनेशन ट्राई कर सकते हैं। 1. दही और लौकी का रायता उबली हुई लौकी में ताजा दही, भुना जीरा, काली मिर्च और हल्का तड़का मिलाकर हेल्दी रायता तैयार करें। यह पाचन के लिए भी अच्छा माना जाता है। 2. दही और चिया सीड्स भीगे हुए चिया सीड्स को दही में मिलाकर खाने से फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड और कई जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। 3. दही और अलसी के बीज भुनी और पिसी हुई अलसी को दही में मिलाने से हेल्दी फैट, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स मिलते हैं, जो संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। 4. दही और गुड़ अगर मीठा पसंद है, तो चीनी की जगह थोड़ी मात्रा में गुड़ मिलाकर दही खाएं। इससे स्वाद के साथ कुछ अतिरिक्त पोषक तत्व भी मिल सकते हैं। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 140–180 kcal प्रोटीन: 6–8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 15–18 ग्राम फैट: 4–6 ग्राम कैल्शियम: अच्छी मात्रा में डाइट में शामिल करने के फायदे दही Vitamin B12 के प्राकृतिक डेयरी स्रोतों में शामिल है। शरीर को प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है। प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को सपोर्ट करते हैं। हेल्दी और फिट लाइफस्टाइल बनाए रखने में मदद मिल सकती है। रोजमर्रा की संतुलित डाइट का अच्छा हिस्सा बन सकता है। ध्यान दें: Vitamin B12 की कमी की पुष्टि केवल ब्लड टेस्ट से होती है। यदि लगातार थकान, कमजोरी या अन्य लक्षण महसूस हों, तो डॉक्टर से जांच और उचित सलाह जरूर लें।
Healthy Indian Snacks: मुरमुरा भेल, ढोकला, इडली, पोहा, भुना चना और स्प्राउटेड मूंग चाट जैसे पारंपरिक स्नैक्स कम कैलोरी के साथ बेहतर पोषण देते हैं। जानें सामग्री, कैलोरी और सेहत के फायदे। जब भी हल्की भूख लगती है, ज्यादातर लोग चिप्स, नमकीन या तले-भुने स्नैक्स खा लेते हैं। लेकिन अगर आप स्वाद के साथ सेहत भी चाहते हैं, तो भारत के पारंपरिक स्नैक्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं। ये स्नैक्स कम कैलोरी, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। 1. मुरमुरा भेल मुख्य सामग्री मुरमुरा प्याज टमाटर हरी मिर्च हरा धनिया नींबू अनुमानित कैलोरी: 120–150 kcal प्रति सर्विंग फायदा: कम कैलोरी, फाइबर से भरपूर और शाम की भूख के लिए बेहतरीन। 2. ढोकला मुख्य सामग्री बेसन दही राई करी पत्ता हरी मिर्च अनुमानित कैलोरी: 140–170 kcal प्रति सर्विंग फायदा: स्टीम्ड, कम तेल वाला और पाचन के लिए अच्छा। 3. इडली मुख्य सामग्री चावल उड़द दाल नमक अनुमानित कैलोरी: 130–160 kcal (2 इडली) फायदा: हल्की, आसानी से पचने वाली और सांभर के साथ प्रोटीन से भरपूर। 4. पोहा मुख्य सामग्री पोहा प्याज मूंगफली करी पत्ता हल्दी नींबू अनुमानित कैलोरी: 220–250 kcal प्रति सर्विंग फायदा: आयरन और ऊर्जा का अच्छा स्रोत। 5. भुना चना मुख्य सामग्री भुना चना अनुमानित कैलोरी: 120–140 kcal (30 ग्राम) फायदा: हाई प्रोटीन, हाई फाइबर और वजन कंट्रोल में मददगार। 6. स्प्राउटेड मूंग चाट मुख्य सामग्री अंकुरित मूंग प्याज टमाटर नींबू हरा धनिया चाट मसाला अनुमानित कैलोरी: 150–180 kcal प्रति सर्विंग फायदा: प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर हेल्दी स्नैक। निष्कर्ष:- अगर आप बार-बार लगने वाली भूख में हेल्दी विकल्प तलाश रहे हैं, तो ये 6 पारंपरिक भारतीय स्नैक्स आपकी डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। ये स्वादिष्ट होने के साथ कम कैलोरी और पोषण से भरपूर हैं।
Karela Bitterness Tips: अगर घर के बच्चे या बड़े करेले की कड़वाहट की वजह से उसे खाने से बचते हैं, तो कुछ आसान किचन ट्रिक्स अपनाकर उसका स्वाद बेहतर बनाया जा सकता है। नमक, हल्दी, नींबू और सही कुकिंग तकनीक से करेला स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी बन सकता है। करेला की कड़वाहट करें कम, स्वाद बढ़ाएं आसान तरीकों से करेला पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी है, लेकिन इसकी कड़वाहट के कारण कई लोग इसे खाने से बचते हैं। हालांकि, कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इसकी कड़वाहट काफी हद तक कम की जा सकती है। इससे करेला स्वादिष्ट बनता है और बच्चे भी बिना ज्यादा नखरे के इसे खा सकते हैं। कड़वाहट कम करने के आसान तरीके 1. नमक और हल्दी का इस्तेमाल करें कटे हुए करेले पर नमक और हल्दी लगाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद हल्का निचोड़कर धो लें। इससे कड़वा रस काफी हद तक निकल जाता है। 2. नींबू का रस लगाएं करेले पर नींबू का रस डालकर 20–30 मिनट रखें। इससे स्वाद संतुलित होता है और हल्की खटास कड़वाहट को कम महसूस कराती है। 3. हल्का उबाल लें पानी में थोड़ा नमक डालकर करेले को 2 मिनट तक उबालें और तुरंत ठंडे पानी में डाल दें। इससे इसका स्वाद नरम हो जाता है। 4. बीज और खुरदुरा हिस्सा हटाएं करेले के बीज और ऊपरी खुरदुरी परत में ज्यादा कड़वाहट होती है। इन्हें हटाने से स्वाद काफी बेहतर हो जाता है। 5. हल्का फ्राई या गुड़ का इस्तेमाल करें पतले स्लाइस बनाकर हल्का फ्राई करने से करेला कुरकुरा बनता है। वहीं, सूखी सब्जी में थोड़ा-सा गुड़ डालने से स्वाद संतुलित हो जाता है। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण (100 ग्राम) कैलोरी: 17–20 kcal प्रोटीन: 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 4 ग्राम फैट: 0.2 ग्राम फाइबर: 2–3 ग्राम विटामिन C: अच्छी मात्रा में करेला खाने के फायदे विटामिन C से इम्यूनिटी को सपोर्ट मिलता है। फाइबर पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। कम कैलोरी होने के कारण वजन नियंत्रित रखने वाली डाइट में शामिल किया जा सकता है। आयरन और मैग्नीशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराता है। शरीर को हाइड्रेटेड और संतुलित आहार देने में सहायक माना जाता है। ध्यान दें: यदि आप ब्लड शुगर की दवा लेते हैं या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, तो नियमित रूप से अधिक मात्रा में करेला खाने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।
ड्रैगन फ्रूट अपनी आकर्षक गुलाबी रंगत और अनोखे स्वाद के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह केवल देखने में ही खूबसूरत नहीं, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। इसमें फाइबर, विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और पानी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर स्वास्थ्य को कई तरह से लाभ पहुंचा सकता है। हालांकि, किसी भी एक फल को चमत्कारी इलाज नहीं माना जाना चाहिए। इसके फायदे संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ ही बेहतर रूप से मिलते हैं। 1. शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद ड्रैगन फ्रूट में पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद मिल सकती है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम मात्रा में मौजूद होते हैं। 2. पाचन और आंतों की सेहत के लिए फायदेमंद इसमें मौजूद फाइबर प्रीबायोटिक की तरह काम करता है, जो आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देने में मदद कर सकता है। इससे पाचन बेहतर रहने और कब्ज जैसी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है। 3. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ड्रैगन फ्रूट में बेटालेन्स, फ्लेवोनॉयड्स और अन्य एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने और कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं। 4. त्वचा की सेहत को मिल सकता है समर्थन विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा में कोलेजन बनने की प्रक्रिया को समर्थन देते हैं। साथ ही, पर्याप्त पानी त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करता है, जिससे त्वचा स्वस्थ दिख सकती है। 5. ब्लड शुगर संतुलित रखने में सहायक ड्रैगन फ्रूट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर ग्लूकोज के अवशोषण की गति को धीमा करने में मदद कर सकता है। हालांकि, मधुमेह के मरीज इसे दवा का विकल्प न मानें और डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही सेवन करें। 6. आयरन के अवशोषण में मदद ड्रैगन फ्रूट में मौजूद विटामिन C शरीर को पौधों से मिलने वाले आयरन को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद कर सकता है। इसे दाल, हरी पत्तेदार सब्जियों या बीन्स जैसे आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के साथ खाया जा सकता है। 7. रोग प्रतिरोधक क्षमता को मिल सकता है समर्थन फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सामान्य रूप से बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर यह लंबे समय तक स्वास्थ्य को समर्थन दे सकता है। एक दिन में कितना ड्रैगन फ्रूट खाना चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए 150 से 200 ग्राम (लगभग एक कप) ड्रैगन फ्रूट प्रतिदिन संतुलित आहार के हिस्से के रूप में खाया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को एलर्जी या पाचन संबंधी समस्या है, तो इसे धीरे-धीरे आहार में शामिल करना बेहतर माना जाता है। इन बातों का रखें ध्यान ड्रैगन फ्रूट वजन घटाने या शरीर को "डिटॉक्स" करने का कोई चमत्कारी उपाय नहीं है। इसे किसी बीमारी की दवा का विकल्प न समझें। अधिकतम लाभ के लिए इसे संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ शामिल करें।
नई दिल्ली: अंडे को दुनिया के सबसे संपूर्ण और पौष्टिक खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। इसमें हाई क्वालिटी प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, हेल्दी फैट्स और कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर के विभिन्न अंगों और कार्यों को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। यदि संतुलित आहार के साथ लगातार 30 दिनों तक रोज़ाना दो अंडे खाए जाएं, तो शरीर में कई सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। डाइटिशियन गिन्नी कालरा के अनुसार, अंडे कोई जादुई भोजन नहीं हैं, लेकिन नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है, जिससे मांसपेशियों, दिमाग, आंखों, हड्डियों और त्वचा की सेहत में सुधार देखने को मिल सकता है। मसल्स होंगे मजबूत, रिकवरी होगी तेज दो अंडों से लगभग 12–13 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन मिलता है। इसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी नौ अमीनो एसिड मौजूद होते हैं, जो मांसपेशियों के विकास, टिश्यू रिपेयर और रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित व्यायाम करने वाले, बुजुर्ग और बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए यह विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है। देर तक नहीं लगेगी भूख अंडे में मौजूद प्रोटीन और हेल्दी फैट्स धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है। अगर नाश्ते में दो अंडे शामिल किए जाएं तो बार-बार स्नैकिंग की आदत कम हो सकती है और वजन नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है। दिमाग रहेगा अधिक सक्रिय अंडों में कोलीन (Choline) नामक पोषक तत्व पाया जाता है, जो मस्तिष्क, याददाश्त और नर्वस सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। यह एसिटाइलकोलीन नामक न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जिससे सीखने की क्षमता, एकाग्रता और मानसिक सतर्कता बेहतर हो सकती है। आंखों की सेहत को मिलेगा फायदा अंडे में मौजूद ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट आंखों की रेटिना की सुरक्षा करते हैं। ये बढ़ती उम्र और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक माने जाते हैं। हड्डियां होंगी मजबूत अंडे प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी का स्रोत हैं, जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। इससे हड्डियों और दांतों की मजबूती के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी समर्थन मिलता है। हालांकि, केवल अंडों से पूरी विटामिन-डी की आवश्यकता पूरी नहीं होती, लेकिन यह कुल पोषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। त्वचा, बाल और नाखूनों में दिख सकता है सुधार अंडों में बायोटिन, सेलेनियम, विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स और प्रोटीन मौजूद होते हैं, जो बालों, त्वचा और नाखूनों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। संतुलित आहार के साथ नियमित सेवन करने पर कुछ सप्ताह में सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। क्या अंडे खाने से बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल? यह सबसे आम सवालों में से एक है। हाल के वर्षों में हुई कई रिसर्च बताती हैं कि अधिकांश स्वस्थ लोगों में सीमित मात्रा में अंडे खाने से हृदय रोग का खतरा नहीं बढ़ता। शरीर स्वयं कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को नियंत्रित करता है और अंडों से मिलने वाला डाइटरी कोलेस्ट्रॉल पहले की तुलना में कम प्रभाव डालता है। हालांकि, जिन लोगों को अनियंत्रित डायबिटीज, फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया या पहले से हृदय संबंधी गंभीर बीमारी है, उन्हें नियमित रूप से अंडे खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। क्या रोज़ दो अंडे पर्याप्त हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए रोज़ाना दो अंडे पर्याप्त माने जाते हैं। इससे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और हेल्दी फैट्स की संतुलित मात्रा मिल जाती है। हालांकि, बेहतर परिणाम के लिए अंडों के साथ फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भी आहार में शामिल करना जरूरी है। ध्यान रहे कि 30 दिनों में कोई चमत्कारी परिवर्तन नहीं होता, लेकिन नियमित और संतुलित जीवनशैली के साथ दो अंडों का सेवन शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में निश्चित रूप से सहायक हो सकता है।
नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम में रात के खाने के बाद ठंडी और मीठी आइसक्रीम खाना कई लोगों की पसंद होती है। कुछ लोग इसे दिनभर की थकान दूर करने का तरीका मानते हैं, तो कुछ के लिए यह डेजर्ट का अहम हिस्सा होती है। लेकिन क्या रोजाना डिनर के बाद आइसक्रीम खाना सेहत के लिए सही है? विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभार सीमित मात्रा में आइसक्रीम खाना नुकसानदायक नहीं माना जाता, लेकिन अगर इसे रोजाना और अधिक मात्रा में खाया जाए तो इससे पाचन, वजन, ब्लड शुगर और नींद पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। डिनर के बाद आइसक्रीम खाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है? आइसक्रीम में शुगर, सैचुरेटेड फैट और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। जब भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन किया जाता है, तो शरीर को एक साथ ज्यादा फैट और शुगर को पचाने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। रात के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म दिन की तुलना में थोड़ा धीमा हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त कैलोरी और शुगर शरीर में जमा होने लगती है, जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पाचन प्रक्रिया हो सकती है धीमी अगर आपने ऑयली या भारी भोजन किया है और उसके तुरंत बाद आइसक्रीम खा लेते हैं, तो इससे: पेट भारी लगना गैस बनना ब्लोटिंग एसिडिटी पेट दर्द सुस्ती महसूस होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फैट और शुगर पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे भोजन को पूरी तरह पचने में अधिक समय लग सकता है। ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर सामान्य आइसक्रीम में मौजूद अधिक शुगर ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकती है। खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए रात में मीठी आइसक्रीम का सेवन जोखिम बढ़ा सकता है। ब्लड शुगर अचानक बढ़ने और फिर गिरने की वजह से: देर रात भूख लगना थकान महसूस होना सुस्ती बढ़ना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। नींद की गुणवत्ता भी हो सकती है प्रभावित रात में हाई-फैट और हाई-शुगर फूड खाने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। पेट में गैस, एसिडिटी या भारीपन की वजह से नींद बार-बार टूट सकती है। कुछ लोगों में ठंडी चीजें खाने के बाद शरीर की अलर्टनेस भी बढ़ जाती है, जिससे आसानी से नींद नहीं आती। किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए? रात में आइसक्रीम खाने से इन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए: लैक्टोज इनटॉलरेंस से पीड़ित लोग डायबिटीज के मरीज मोटापे से परेशान लोग एसिडिटी या गैस की समस्या वाले लोग कमजोर पाचन वाले लोग क्या पूरी तरह आइसक्रीम छोड़ देनी चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, डिनर के बाद कभी-कभार सीमित मात्रा में आइसक्रीम खाना सामान्य रूप से सुरक्षित माना जा सकता है। लेकिन रोजाना और ज्यादा मात्रा में इसका सेवन पाचन, वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। अगर आपको पहले से डायबिटीज, मोटापा या पाचन संबंधी समस्या है, तो रात में हाई-कैलोरी और अधिक मीठे डेजर्ट से दूरी बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
हम अक्सर इस बात पर ध्यान देते हैं कि क्या खाना है, लेकिन यह कम लोग जानते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थ एक-दूसरे के साथ मिलकर ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट तभी शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं जब उन्हें सही खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए। फैमिली फिजिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सिल्जा शेफर के मुताबिक, कोई एक सुपरफूड या फूड कॉम्बिनेशन खराब खानपान की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन कुछ खास संयोजन शरीर को पोषक तत्वों का अधिक लाभ दिलाने में मदद करते हैं। 1. गाजर या कद्दू के साथ ऑलिव ऑयल गाजर और कद्दू में बीटा-कैरोटीन पाया जाता है, जो शरीर में विटामिन A में बदलता है। यह पोषक तत्व वसा की मौजूदगी में बेहतर तरीके से अवशोषित होता है। फायदा: आंखों, त्वचा और इम्यून सिस्टम के लिए लाभकारी। 2. टमाटर के साथ एवोकाडो या अच्छा तेल टमाटर में मौजूद लाइकोपीन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। इसे शरीर में बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए हेल्दी फैट की जरूरत होती है। फायदा: हृदय और कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद। 3. सब्जियों पर नट्स और बीजों की टॉपिंग बादाम, अखरोट, चिया सीड्स या कद्दू के बीज जैसी चीजें हेल्दी फैट और फाइबर प्रदान करती हैं। फायदा: फैट-सॉल्युबल विटामिन्स के अवशोषण में मदद और अतिरिक्त पोषण। 4. प्रोटीन और विटामिन C का संयोजन कोलेजन के निर्माण के लिए शरीर को प्रोटीन के साथ विटामिन C की भी आवश्यकता होती है। बेहतरीन उदाहरण: दही और बेरीज दाल और शिमला मिर्च मछली और नींबू फायदा: त्वचा, कनेक्टिव टिश्यू और घाव भरने की प्रक्रिया को समर्थन। 5. ओट्स के साथ बेरीज या सेब ओट्स में मौजूद प्लांट-बेस्ड आयरन विटामिन C के साथ ज्यादा अच्छी तरह अवशोषित होता है। फायदा: आयरन की कमी से बचाव में मदद। 6. दाल या बीन्स के साथ टमाटर और शिमला मिर्च दालों में मौजूद नॉन-हीम आयरन को शरीर बेहतर तरीके से उपयोग कर सके, इसके लिए विटामिन C जरूरी है। फायदा: शाकाहारी लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी। 7. हल्दी के साथ काली मिर्च हल्दी में मौजूद करक्यूमिन अपने आप में कम अवशोषित होता है, लेकिन काली मिर्च में मौजूद पाइपरीन इसकी जैव उपलब्धता को कई गुना बढ़ा देता है। फायदा: सूजन और इंफ्लेमेशन से जुड़ी समस्याओं में मददगार। 8. प्रीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स का साथ प्रीबायोटिक्स (फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ) अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करते हैं, जबकि प्रोबायोटिक्स सीधे फायदेमंद बैक्टीरिया प्रदान करते हैं। बेहतरीन उदाहरण: दही या केफिर के साथ फल दलिया और योगर्ट फायदा: आंतों के स्वास्थ्य और माइक्रोबायोम को बेहतर बनाने में मदद। सिर्फ फूड कॉम्बिनेशन ही नहीं, संतुलित जीवनशैली भी जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि पोषक तत्वों का अवशोषण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। आंतों का स्वास्थ्य, हार्मोनल बदलाव, तनाव और कुछ बीमारियां भी इस प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। इसलिए संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और तनाव नियंत्रण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
नई दिल्ली: गर्मियों का मौसम आते ही बाजार में आमों की बहार दिखाई देने लगती है। फलों के राजा कहे जाने वाले आम का स्वाद हर किसी को पसंद होता है, लेकिन कई बार जल्दी मुनाफा कमाने के लिए व्यापारियों द्वारा आमों को कृत्रिम तरीके से पकाकर बाजार में उतार दिया जाता है। ऐसे आम स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने लोगों को केमिकल से पके आमों की पहचान करने के लिए कुछ आसान तरीके बताए हैं। कैल्शियम कार्बाइड से पकाए जाते हैं कई आम एफएसएसएआई के अनुसार, कुछ व्यापारी आमों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल करते हैं। इस रसायन से एसिटिलीन गैस निकलती है, जिसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। कई शोधों में इसके अंदर मौजूद विषैले तत्वों को शरीर के लिए खतरनाक बताया गया है। केमिकल से पके आम की 5 पहचान पूरा आम एक समान चमकीले पीले रंग का दिखाई देता है। आम में प्राकृतिक खुशबू नहीं होती। बाहर से मुलायम लेकिन अंदर से सख्त महसूस होता है। स्वाद फीका या असामान्य होता है। छिलके पर सफेद पाउडर जैसे कण दिखाई दे सकते हैं। प्राकृतिक रूप से पके आम की 5 पहचान आम पर हरे और पीले रंग के मिश्रित पैच दिखाई देते हैं। डंठल के पास मीठी और प्राकृतिक खुशबू आती है। हल्का दबाने पर आम थोड़ा नरम महसूस होता है। स्वाद मीठा और रसदार होता है। छिलके पर प्राकृतिक काले धब्बे दिखाई दे सकते हैं। क्यों खतरनाक है कैल्शियम कार्बाइड? विशेषज्ञों के अनुसार, कैल्शियम कार्बाइड में आर्सेनिक और अन्य विषैले तत्वों की अशुद्धियां हो सकती हैं। कुछ शोधों में ऐसे रसायनों के लंबे समय तक संपर्क को कैंसर, डायबिटीज और थायरॉइड संबंधी समस्याओं के बढ़ते जोखिम से भी जोड़ा गया है। इसलिए आम खरीदते समय केवल उसका रंग देखकर फैसला न करें, बल्कि उसकी खुशबू, बनावट और स्वाद पर भी ध्यान दें। थोड़ी सी सावधानी आपकी सेहत को सुरक्षित रख सकती है।
गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। तेज धूप, पसीना और खानपान में बदलाव के कारण कई लोगों को कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में तरबूज एक ऐसा मौसमी फल है, जो न सिर्फ शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है बल्कि गट हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जिससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में सहायता करते हैं। गर्मियों में क्यों खास है तरबूज? तरबूज को समर सुपरफूड माना जाता है। यह हल्का, ताजगी देने वाला और आसानी से पचने वाला फल है। इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट से जुड़ी कई परेशानियों से राहत मिल सकती है। गट हेल्थ के लिए तरबूज के 5 बड़े फायदे 1. पाचन तंत्र को रखता है बेहतर तरबूज में मौजूद भरपूर पानी पाचन क्रिया को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है। यह मल को नरम बनाता है और नियमित मल त्याग में सहायक होता है। 2. आसानी से पच जाता है यह फल हल्का होता है और शरीर इसे जल्दी पचा लेता है। इसलिए जिन लोगों को अपच, पेट फूलना या एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए यह फायदेमंद माना जाता है। 3. फाइबर का अच्छा स्रोत तरबूज में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या को कम करने में सहायता मिल सकती है। 4. शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ने पर एसिडिटी और पेट में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। तरबूज का कूलिंग इफेक्ट शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है। 5. हल्की ऊर्जा भी देता है इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है, लेकिन पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती। किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए? हालांकि तरबूज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन पेट फूलने, गैस या दस्त जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसे सीमित मात्रा में खाएं और भारी भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन करने से बचें।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग प्रोटीन पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन फाइबर को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश लोग रोजाना जितना फाइबर लेना चाहिए, उससे काफी कम मात्रा में इसका सेवन करते हैं। फाइबर न सिर्फ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है, बल्कि दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करने में मदद करता है। फाइबर आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है, जिससे शरीर में सूजन कम होती है और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। फाइबर क्यों है जरूरी? पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है कब्ज की समस्या कम करता है ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है लंबे समय तक पेट भरा रखता है वजन नियंत्रण में सहायक होता है हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है विशेषज्ञों के मुताबिक एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 30 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। फाइबर से भरपूर 13 बेहतरीन खाद्य पदार्थ 1. हरी मटर (Green Peas) उबली हुई एक कप मटर में लगभग 9 ग्राम फाइबर और 8.5 ग्राम प्रोटीन होता है। यह शाकाहारियों के लिए शानदार विकल्प है। 2. नाशपाती (Pear) एक मध्यम आकार की नाशपाती में 6 ग्राम से अधिक फाइबर होता है। यह पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज से राहत देने में मदद कर सकती है। 3. सेब (Apple) सेब को छिलके सहित खाने से अधिक फाइबर मिलता है। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। 4. मसूर दाल (Lentils) एक कप पकी हुई मसूर दाल में लगभग 15.5 ग्राम फाइबर और 18 ग्राम प्रोटीन होता है। 5. प्रीबायोटिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थ लहसुन, प्याज, लीक, शतावरी (Asparagus), आर्टिचोक और बीन्स जैसे खाद्य पदार्थ आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। 6. राई ब्रेड (Pumpernickel Rye Bread) इसकी एक स्लाइस में लगभग 6 ग्राम फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। 7. ब्लैक बीन्स फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत। यह आंतों के माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में मदद करता है। 8. रास्पबेरी (Raspberries) फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल पाचन और इम्युनिटी दोनों के लिए लाभकारी है। 9. साबुत अनाज (Whole Grains) क्विनोआ, जौ, बाजरा, बकव्हीट और स्पेल्ट जैसे साबुत अनाज फाइबर का उत्कृष्ट स्रोत हैं। 10. एवोकाडो (Avocado) स्वस्थ वसा और फाइबर से भरपूर एवोकाडो लंबे समय तक पेट भरा रखने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करता है। 11. चिया सीड्स (Chia Seeds) 100 ग्राम चिया सीड्स में लगभग 34 ग्राम फाइबर पाया जाता है। यह वजन नियंत्रण और पाचन दोनों के लिए फायदेमंद है। 12. क्रूसिफेरस सब्जियां ब्रोकली, फूलगोभी, पत्ता गोभी, केल और ब्रसेल्स स्प्राउट्स जैसी सब्जियां घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर से भरपूर होती हैं। 13. पॉपकॉर्न बिना ज्यादा तेल के बनाया गया पॉपकॉर्न एक हेल्दी होल ग्रेन स्नैक है और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। क्या फाइबर सप्लीमेंट लेना चाहिए? अगर आपकी डाइट में पर्याप्त फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें शामिल नहीं हैं, तो डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह पर फाइबर सप्लीमेंट लिया जा सकता है। हालांकि प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला फाइबर हमेशा बेहतर माना जाता है।
बेहतर पाचन और लंबी उम्र के लिए जापानी खानपान बना प्रेरणा दुनियाभर में जापान को लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ अच्छी आनुवंशिकता नहीं, बल्कि उनकी संतुलित जीवनशैली और पोषण से भरपूर खानपान भी बड़ी वजह है। जापान के लोग वर्षों से ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते आ रहे हैं जो एंटीऑक्सीडेंट्स, प्रोबायोटिक्स और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ये न केवल आंतों की सेहत को बेहतर बनाते हैं बल्कि शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करने में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं उन 5 खास जापानी सुपरफूड्स के बारे में जो गट हेल्थ और माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में सहायक माने जाते हैं। 1. फर्मेंटेड पत्ता गोभी (सॉकरक्राउट) जापानी भोजन में फर्मेंटेड फूड्स का महत्वपूर्ण स्थान है। फर्मेंटेड पत्ता गोभी, जिसे सॉकरक्राउट भी कहा जाता है, प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है। यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करती है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बढ़ावा देती है। साथ ही इसमें विटामिन C की अच्छी मात्रा होती है, जो इसे एक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट बनाती है। इसे भोजन से पहले छोटी मात्रा में सलाद या साइड डिश के रूप में खाया जा सकता है। 2. कुजु (Kuzu) कुजु एक पारंपरिक जापानी आटा है जो कुडज़ू पौधे की जड़ से तैयार किया जाता है। इसे प्राकृतिक थिकनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पाचन तंत्र को आराम पहुंचाने, रक्त शर्करा को संतुलित रखने और शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। कुजु का उपयोग सूप, सॉस और हर्बल पेय बनाने में किया जाता है। 3. उमेबोशी पेस्ट उमेबोशी एक विशेष प्रकार के जापानी फल से तैयार किया गया फर्मेंटेड पेस्ट है। यह प्रोबायोटिक गुणों से भरपूर माना जाता है। कम कैलोरी और कम वसा वाला यह खाद्य पदार्थ पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है। कई लोग इसे भोजन से पहले थोड़ी मात्रा में लेते हैं, जबकि कुछ इसे हर्बल ड्रिंक या चाय में मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं। 4. कुकिचा चाय जापान में लोकप्रिय कुकिचा चाय साधारण चाय की पत्तियों से नहीं, बल्कि पौधे की टहनियों और डंठलों से बनाई जाती है। इसमें कैफीन की मात्रा बेहद कम होती है, जबकि विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चाय पाचन में मदद करती है और शरीर के एसिड-बेस संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकती है। 5. मिसो सूप मिसो सूप जापान के सबसे लोकप्रिय पारंपरिक खाद्य पदार्थों में से एक है। कई जापानी परिवार इसे नाश्ते में भी शामिल करते हैं। फर्मेंटेड सोयाबीन, समुद्री नमक और कोजी से तैयार मिसो प्रोबायोटिक्स का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने और पाचन तंत्र को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, विटामिन और कई आवश्यक खनिज भी पाए जाते हैं। क्यों जरूरी है स्वस्थ माइक्रोबायोम? विशेषज्ञों के अनुसार, आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया केवल पाचन ही नहीं बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को भी प्रभावित करते हैं। संतुलित माइक्रोबायोम सूजन को कम करने, पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण और शरीर की समग्र कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। डाइट में धीरे-धीरे करें शामिल हालांकि ये सभी खाद्य पदार्थ स्वास्थ्यवर्धक माने जाते हैं, लेकिन किसी भी नए फर्मेंटेड या विशेष खाद्य पदार्थ को डाइट में धीरे-धीरे शामिल करना बेहतर होता है। जिन लोगों को विशेष स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें आहार में बड़े बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। जापानी खानपान से जुड़े ये सुपरफूड्स दिखाते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली केवल महंगे सप्लीमेंट्स से नहीं, बल्कि सही और संतुलित भोजन से भी हासिल की जा सकती है।
पीरियड्स के दौरान या उससे पहले अचानक चॉकलेट, चिप्स, नमकीन स्नैक्स या मीठी चीजें खाने की इच्छा होना महिलाओं में बेहद सामान्य बात है। अक्सर इसे सिर्फ मूड स्विंग या भावनात्मक बदलाव से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे शरीर की वास्तविक पोषण संबंधी जरूरतें और हार्मोनल परिवर्तन भी जिम्मेदार होते हैं। रेनबो हॉस्पिटल के रोजवॉक की सीनियर कंसल्टेंट-OBGY और इंफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. वैशाली शर्मा के मुताबिक, पीरियड्स के दौरान होने वाली फूड क्रेविंग्स शरीर का एक प्राकृतिक संकेत हैं। ये हार्मोन, ब्रेन केमिस्ट्री, पोषण की जरूरतों और भावनात्मक बदलावों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम होती हैं। पीरियड्स के दौरान क्यों बढ़ती है क्रेविंग? मासिक धर्म चक्र के ल्यूटियल फेज में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में तेजी से बदलाव आता है। इसका असर मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन नामक केमिकल पर पड़ता है, जो मूड और मानसिक संतुलन को नियंत्रित करता है। जब सेरोटोनिन का स्तर कम होता है, तब शरीर शुगर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थों की मांग करता है। यही कारण है कि इस दौरान मीठा, चॉकलेट और कंफर्ट फूड्स खाने की इच्छा बढ़ जाती है। चॉकलेट की क्रेविंग का क्या मतलब है? चॉकलेट, विशेष रूप से डार्क चॉकलेट, मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत होती है। मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देने, मूड को संतुलित रखने और थकान कम करने में मदद करता है। पीरियड्स के दौरान कुछ महिलाओं में मैग्नीशियम का स्तर कम हो सकता है, जिससे चॉकलेट खाने की इच्छा बढ़ती है। इसके अलावा चॉकलेट खाने से डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे "फील-गुड" हार्मोन रिलीज होते हैं, जो तनाव, चिड़चिड़ापन और थकान को कम करने में मदद करते हैं। नमकीन चीजें खाने की इच्छा क्यों होती है? कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान चिप्स, अचार, फ्राइज या अन्य नमकीन स्नैक्स खाने का मन करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर में फ्लूइड बैलेंस और इलेक्ट्रोलाइट्स के बदलाव का संकेत हो सकता है। हालांकि अत्यधिक नमक का सेवन ब्लोटिंग और वॉटर रिटेंशन को बढ़ा सकता है। ऐसे में प्रोसेस्ड स्नैक्स की बजाय रोस्टेड नट्स, बीज और घर के बने हेल्दी स्नैक्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं। मीठा और कार्बोहाइड्रेट की क्रेविंग क्यों होती है? पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को केक, पेस्ट्री, ब्रेड, पास्ता या अन्य कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजें खाने का मन करता है। ये खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाकर अस्थायी रूप से ऊर्जा और बेहतर मूड का एहसास कराते हैं। लेकिन यह असर ज्यादा देर तक नहीं रहता और बाद में थकान व चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। इसलिए ओट्स, साबुत अनाज, फल और शकरकंद जैसे कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट बेहतर विकल्प माने जाते हैं। रेड मीट या आयरन युक्त भोजन की इच्छा क्यों होती है? जिन महिलाओं को ज्यादा ब्लीडिंग होती है, उनमें आयरन की कमी होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में शरीर आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों की मांग कर सकता है। पालक, दालें, फलियां, खजूर, चुकंदर और लीन मीट जैसे खाद्य पदार्थ आयरन की कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। इमोशनल ईटिंग और वास्तविक जरूरत में फर्क समझना जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि हर क्रेविंग सिर्फ पोषण की कमी का संकेत नहीं होती। तनाव, चिंता, मूड स्विंग और भावनात्मक बदलाव भी खाने की इच्छा को प्रभावित करते हैं। ऐसे में संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी है। अपनी पसंदीदा चीजें सीमित मात्रा में खाना गलत नहीं है, लेकिन अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए। क्रेविंग कम करने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें। नियमित व्यायाम करें। संतुलित और पौष्टिक भोजन लें। भोजन छोड़ने की आदत से बचें। अधिक प्रोसेस्ड और जंक फूड का सेवन कम करें। विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभार होने वाली क्रेविंग सामान्य है। लेकिन यदि अत्यधिक खाने की इच्छा, गंभीर मूड स्विंग, अत्यधिक थकान, चक्कर या भारी ब्लीडिंग जैसी समस्याएं लगातार बनी रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
आजकल “फाइबर” सिर्फ पोषण से जुड़ा शब्द नहीं रह गया है, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर को स्वस्थ रखने और कई गंभीर बीमारियों से बचाने में पर्याप्त फाइबर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद ज्यादातर लोग अपनी रोजाना की जरूरत के अनुसार फाइबर का सेवन नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त फाइबर लेने से: पाचन तंत्र बेहतर रहता है ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद मिलती है दिल स्वस्थ रहता है लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा कम हो सकता है US Food and Drug Administration के अनुसार एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना लगभग 28 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। लेकिन कई शोध बताते हैं कि अधिकतर लोग इस लक्ष्य से काफी पीछे हैं। आइए जानते हैं रोजाना फाइबर बढ़ाने के 7 आसान और असरदार तरीके। 1. फलों और सब्जियों का छिलका न हटाएं विशेषज्ञों का कहना है कि कई फलों और सब्जियों के छिलकों में अंदरूनी हिस्से से ज्यादा फाइबर होता है। उदाहरण के तौर पर, अगर सेब को छिलके सहित खाया जाए तो लगभग 2 ग्राम अतिरिक्त फाइबर मिलता है। जहां संभव हो, पूरे फल खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। 2. दाल और बीन्स को भोजन में शामिल करें मसूर दाल, राजमा, चना और दूसरी दालें फाइबर का बेहतरीन स्रोत मानी जाती हैं। इन्हें: सलाद सूप चावल पास्ता जैसे भोजन में मिलाकर आसानी से खाया जा सकता है। इससे खाना ज्यादा पौष्टिक और पेट भरने वाला बनता है। 3. बीज और मेवे का सेवन बढ़ाएं Chia seed, अलसी के बीज और दूसरे पौष्टिक बीज फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक: चिया सीड्स में लगभग 10 ग्राम फाइबर अलसी में करीब 8 ग्राम फाइबर पाया जाता है। इन्हें दही, दलिया, सलाद या स्मूदी में मिलाकर खाया जा सकता है। 4. मिठाई के साथ फल खाएं अगर आपको मीठा पसंद है तो मिठाई के साथ ताजे फल खाना बेहतर विकल्प हो सकता है। कुछ ज्यादा फाइबर वाले फल: नाशपाती सेब रसभरी ये शरीर को विटामिन और खनिज भी प्रदान करते हैं। 5. ज्यादा फाइबर वाले स्नैक्स चुनें तले-भुने और प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह ऐसे विकल्प चुनें जिनमें प्राकृतिक फाइबर ज्यादा हो, जैसे: भुना चना पॉपकॉर्न मेवे बीज उदाहरण के तौर पर, बिना ज्यादा तेल वाला पॉपकॉर्न फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। 6. “पकाएं और ठंडा करें” तरीका अपनाएं विशेषज्ञों के अनुसार आलू, चावल, पास्ता और कुछ दालों को पकाकर ठंडा करने से उनमें “रेजिस्टेंट स्टार्च” बनता है। यह तरीका: ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद करता है कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक हो सकता है पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है लंबे समय तक पेट भरा रखता है 7. जूस की बजाय पूरा फल खाएं फलों के रस की तुलना में पूरा फल ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि उसमें फाइबर सुरक्षित रहता है। पूरा फल: पाचन को धीमा करता है ज्यादा देर तक पेट भरा रखता है अचानक शुगर बढ़ने की संभावना कम करता है इसीलिए विशेषज्ञ जूस की जगह पूरे फल खाने की सलाह देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे बदलाव करके भी रोजाना फाइबर का सेवन काफी बढ़ाया जा सकता है। संतुलित आहार के साथ फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना लंबे समय तक अच्छी सेहत बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में इन दिनों कोरियन ड्रामा और के-पॉप के साथ-साथ कोरियन खाने का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ रहा है। कोरियन डिशेज में ‘किमची’ सबसे लोकप्रिय मानी जाती है। आमतौर पर यह फर्मेंटेड पत्तागोभी से बनाई जाती है, जिसे तैयार होने में कई दिन लग जाते हैं। लेकिन अगर आप तुरंत कुछ तीखा, चटपटा और क्रंची खाना चाहते हैं, तो खीरे की किमची यानी ‘ओई किमची’ एक शानदार विकल्प हो सकती है। यह डिश बनाने में बेहद आसान है और खास बात यह है कि इसे तैयार करने के लिए किसी महंगी सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती। घर में मौजूद साधारण चीजों से ही कुछ मिनटों में स्वादिष्ट किमची तैयार की जा सकती है। स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद खीरे की किमची सिर्फ स्वाद में ही बेहतरीन नहीं होती, बल्कि सेहत के लिए भी काफी लाभकारी मानी जाती है। खीरे में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है। वहीं इसमें इस्तेमाल होने वाला लहसुन, अदरक और सिरका पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में सहायक माने जाते हैं। यह लो-कैलोरी डिश है, इसलिए वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोग भी इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। गर्मियों में यह एक हल्का और हेल्दी स्नैक विकल्प बन सकती है। किमची बनाने के लिए जरूरी सामग्री खीरे की किमची तैयार करने के लिए 2 से 3 ताजे खीरे, नमक, लहसुन, अदरक, सोया सॉस, सफेद सिरका या नींबू का रस, लाल मिर्च पाउडर, थोड़ा शहद या चीनी और भुने हुए सफेद तिल की जरूरत होती है। ऐसे तैयार करें क्रंची किमची सबसे पहले खीरे को काटकर उसमें नमक मिलाएं और 15 से 20 मिनट तक छोड़ दें, ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए। इसके बाद लहसुन, अदरक, सोया सॉस, सिरका, मिर्च पाउडर और शहद मिलाकर मसाला तैयार करें। खीरे का पानी निकालकर उसमें यह मसाला अच्छी तरह मिलाएं और ऊपर से सफेद तिल डाल दें। यह किमची तुरंत खाई जा सकती है, लेकिन 1-2 घंटे फ्रिज में रखने से इसका स्वाद और बढ़ जाता है। इसे फ्राइड राइस, नूडल्स या शाम के हेल्दी स्नैक के रूप में परोसा जा सकता है।
सोने से पहले एक छोटा टुकड़ा बन सकता है हेल्दी आदत अगर आपको रात में मीठा खाने की आदत है, तो डार्क चॉकलेट आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने से पहले थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने से शरीर को रिलैक्स महसूस हो सकता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो बेहतर नींद और मानसिक शांति से जुड़े होते हैं। मेलाटोनिन और रिलैक्सेशन में कैसे करती है मदद? डार्क चॉकलेट में ट्रिप्टोफैन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के निर्माण में मदद करता है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो शरीर की स्लीप साइकिल को नियंत्रित करता है। वहीं सेरोटोनिन मूड को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में होता है। यह मिनरल मांसपेशियों को रिलैक्स करने और तनाव कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर को आराम महसूस होता है। ब्लड सर्कुलेशन और मूड पर भी असर विशेषज्ञों के मुताबिक, डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है और मानसिक शांति महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग रात में थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने के बाद अधिक रिलैक्स महसूस करते हैं। क्या रात में चॉकलेट खाने से नींद खराब भी हो सकती है? हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है। डार्क चॉकलेट में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी मौजूद होती है। ऐसे में जो लोग कैफीन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उन्हें रात में इसे खाने से नींद आने में परेशानी हो सकती है या बेचैनी महसूस हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आपको कॉफी या कैफीन वाली चीजों से जल्दी असर होता है, तो रात में बहुत ज्यादा डार्क चॉकलेट खाने से बचना चाहिए। वजन बढ़ने का डर कितना सही? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट खाना वजन बढ़ाने का बड़ा कारण नहीं बनता। करीब 10 ग्राम डार्क चॉकलेट में लगभग 60 कैलोरी होती है। अगर इसे संतुलित मात्रा में लिया जाए, तो यह लो-कैलोरी डाइट में भी शामिल की जा सकती है। डार्क या मिल्क चॉकलेट, कौन बेहतर? डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट आमतौर पर 65-70 प्रतिशत या उससे ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट को बेहतर मानते हैं, क्योंकि इसमें चीनी कम और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। हालांकि इसमें कैफीन की मात्रा मिल्क चॉकलेट से थोड़ी अधिक होती है। अगर आपको कैफीन से दिक्कत नहीं होती, तो डार्क चॉकलेट बेहतर विकल्प मानी जाती है। वहीं कैफीन से संवेदनशील लोग कम मात्रा में मिल्क चॉकलेट चुन सकते हैं।
आज मनाई जा रही है अपरा एकादशी आज 13 मई 2026 को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में यह एकादशी भगवान Vishnu को समर्पित मानी जाती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अपार पुण्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। पहली बार व्रत रखने वालों के लिए पूजा विधि, नियम और सावधानियों की जानकारी बेहद जरूरी मानी जाती है। अपरा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: 14 मई 2026, सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक उदयातिथि के अनुसार आज यानी 13 मई को व्रत रखा जा रहा है। इस बार अपरा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये रंग और भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। प्रिय फूल पीले गेंदे के फूल कमल पीले गुलाब प्रिय भोग पीले फल केसरिया भात पीले रंग की मिठाइयां भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है। अपरा एकादशी पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। फिर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें। पूजा में पीले फूल, पीला चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप करें और बाद में विष्णु चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ अपरा एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान चावल खाना माना जाता है वर्जित एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाना अशुभ माना गया है। सात्विक भोजन करें घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। व्रत में सेंधा नमक का ही उपयोग करें। तुलसी दल न तोड़ें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लेना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचें इस दिन शांत मन से भगवान विष्णु का ध्यान करें। किसी की निंदा या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। दिन में न सोएं धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस समय को भजन-कीर्तन और धार्मिक पाठ में लगाना शुभ माना गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।