historical events april 16

Important Events
Important Events: 16 अप्रैल की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

1746 - जैकोबेट राइजिंग 1745 ( कल्लोडेन की लड़ाई, ब्रिटिश मिट्टी पर आखिरी लड़ाई ) क्यूम्बरलैंड के राजा के तहत रॉयलस्ट सैनिकों ने याकूब की सेना को हराया।  1780 - म्यूनस्टर विश्वविद्यालय की , नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया, जर्मनी में स्थापना की गई।  1797 - ब्रिटिश रॉयल नेवी में स्पिटहेड और नॉर्थ विद्रोह शुरू हुआ।  1853 – भारत की पहली रेल बम्बई के विक्टोरिया टर्मिनस स्टेशन से ठाणे के बीच चली। इस ट्रेन की 14 बोगियों में 400 यात्रियों ने सवारी की। 1900 – अमेरिकी डाक कार्यालय ने पोस्टेज स्टांप की किताब जारी की। 1917 - पेट्रोग्राड में रूसी सैनिकों का विद्रोह, रूस में अस्थायी सरकार का गठन, जार निकोलस द्वितीय द्वारा सिंहासन एवं देश का त्याग। 1919 – जलियांवाला बाग हत्याकांड में मरने वालों को श्रद्धांजलि देने को गांधी जी ने उपवास की घोषणा की। 1922 – जर्मनी-रूस के बीच इटली में एक समझौता हुआ जिसे Treaty of Rapallo कहा जाता है। यह समझौता दोनों देशों में डिप्लोमेटिक रिश्ते सुधारने के लिए और आपसी सहयोग के लिए किया गया था। 1925 – बुलगारिया के सोफिया शहर स्थित चर्च पर हुए हमले में 150 लोगों की मौत हुई। 1945 – सोवियत पनडुब्बी के कारण जर्मनी का रिफ्यूजी जहाज डूबा। जिसमें 7000 लोगों की मौत हुई। 1945 – द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिकी सेना जर्मनी के नुरेम्बर्ग इलाके में घुसी। 1945 – रेड आर्मी ने बर्लिन की लड़ाई शुरू की। 1964 – ब्रिटेन के चर्चित अपराधों में शामिल 'द ग्रेट ट्रेन रॉबरी' के लिए 12 लोगों को 307 साल की सजा सुनाई गई। 1970 – यूरोपीय देश फ्रांस में बर्फीले तूफान से 70 लोगों की मौत हुई। 1972 – अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अपोलो 16 का फ्लोरिडा से सफल परीक्षण किया। 1978 – ओडिशा में आए चक्रवती तूफान आने 180 लोगों की मौत हो गई। 1988 – ख़लीलुल वज़ीर नामक विख्यात फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ता की ज़ायोनी शासन के लोगों ने टयूनिशिया में हत्या कर दी। वे बड़े ही देशभक्त फ़िलिस्तीनी थे। 1992 – अफगानिस्तान के राष्ट्रपति नजीबुल्लाह ने अपना इस्तीफा दिया। 1997 – मक्के से 10 किलोमीटर दूर मेना में एक गैस सेलेन्डर फटने से भीषण आग लग गयी जिसके परिणाम स्वरूप 343 हाजी शहीद और 1290 घायल हुए। 1999 - पाकिस्तान ने भारत को हराकर कोका कोला कप त्रिकोणीय टूर्नामेंट (शारजाह) जीता। 1999 - न्यू माइक्रोव नामक सबसे बड़े आकार के जीवाणु का सं.रा. अमेरिका में पता चला । 1999 - अद्वैलाजीज बोतेफ़्लिका अल्जीरिया के नये राष्ट्रपति बने। 2002 - दक्षिण कोरिया में विमान दुर्घटना में 120 मरे। 2004 - भारत में रावलपिंडी में तीसरे टेस्ट मैच में पाकिस्तान को हराकर दोनों देशों के बीच आयोजित शृंखला 2-1 से जीती। 2008 - उत्तर प्रदेश में लोकसभा के पाँच सीटों (आजमगढ़, खलीलाबाद, बिलग्राम, कुरनैलगंज तथा मुरादाबाद) के लिए हुए उप चुनाव में बसपा के प्रत्याशी विजयी रहे।  2008 - सार्वजनिक क्षेत्र के पावर फायनान्स कार्पोरेशन (पीएफसी) ने वर्ष 2007-08 में 1209 करोड़ का शुछ मुनाफ़ा अर्जित करने के साथ ही चाजू वित्त वर्ष में विभिन्न परियोजनाओं के लिए 69,498 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की। 2008 - लेसेस्टर सिटी काउंसिल (लंदन) ने इस बहुसांस्कृतिक शहर में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा लगाने को मंजूरी प्रदान की। 2010 - ब्रिक सम्मेलन के बाद जारी साझा बयान में ब्रिक के सदस्य राष्ट्रों ब्राजील, रूस, भारत एवं चीन के नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत-ब्राजील की महत्त्वपूर्ण भूमिका और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने वाले सुधार पर बल दिया। 2012  -सीरिया के संघर्ष में 55 लोगों की मौत।  2013 - ईरान में भूकंप से 37 मरे। 2013- भारतीय रेल 160 साल की हुई।  2013 - गूगल (google) ने अपना डूडल (लोगो) भारत की पहली यात्री रेल को समर्पित किया है। इस लोगो में धुआं उड़ाती रेलगाड़ी खजूर के पेड़ों से घिरे रेलमार्ग पर चलती दिख रही है और इन दोनों का मेल गुंबद और मीनार से बने महल जैसा लग रहा है। 2019 - उच्‍चतम न्‍यायालय ने मुस्लिम महिलाओं को नमाज के लिए मस्जिद में प्रवेश की अनुमति देने की याचिका पर केन्‍द्र सरकार से जवाब मांगा। 2019 - पाकिस्‍तान में आंधी-तूफान और भारी बारिश से 26 लोग मरे। 2020 - दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति मून-जेई-इन की वामपंथी झुकाव वाली डेमोक्रेटिक पार्टी ने संसदीय चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। 2021 - ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी। 2022 - भारत में केंद्र सरकार ने एक लाख स्‍वास्‍थ्‍य और देखभाल केन्‍द्रों पर टेलीफोन परामर्श सुविधा ई-संजीवनी प्रारम्‍भ की। 2022 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मोरबी में हनुमान जी की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। 2022 - इनविक्टस गेम्स 2022 की शुरुआत नीदरलैंड में हुई। 2023 - स्पैनिश चरम एथलीट बीट्रिज़ फ्लेमिनी, सामाजिक अलगाव प्रयोग के हिस्से के रूप में, संभावित विश्व रिकॉर्ड में 500 दिन भूमिगत रूप से अलग-थलग रहने के बाद, स्पेन के ग्रेनाडा में एक गहरी गुफा से बाहर निकले। 2023 - बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग ने 16वां वीजा आवेदन केंद्र खोला। 2023 - भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर डिजिटल हेल्थ समिट 2023 का आयोजन किया। 2024 - जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में नाव के झेलम नदी में पलटने से 6 लोगों की मौत हुई जबकि 3 लोग लापता हुए। 2024 - पटना में मेट्रो का काम कर रहे क्रेन और ऑटो में भयंकर टक्कर में सात लोगों की मौत हो गई।   16 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति👉 1844 – फ़्रांस के लेखक और कवि ऐनाटल फ्रैंकस का पेरिस में जन्म हुआ। 1848 - कंदुकूरी वीरेशलिंगम - तेलुगु भाषा के प्रसिद्ध विद्वान, जिन्हें आधुनिक तेलुगु साहित्य में 'गद्य ब्रह्मा' के नाम से ख्याति मिली। 1889 –  विश्व विख्यात कमेडी अभिनेता चार्लज़ का जन्म हुआ। वे चार्ली चैपलिन के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर हुए। 1913 - के. एच. आरा - भारत के प्रसिद्ध चित्रकार थे। 1919 - अर्जन सिंह - भारतीय वायु सेना के सबसे वरिष्ठ और पांच सितारा वाले रैंक तक पहुँचने वाले एकमात्र मार्शल थे। 1934 - राम नाईक, एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे  (2014–2019)। 1940 - बनवारीलाल पुरोहित - एक भारतीय राजनीतिज्ञ और पंजाब के 29वें राज्यपाल। 1961 - जारबोम गामलिन - भारतीय राजनीतिज्ञ थे और वे अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। 1969 - एस. सौम्या - कर्नाटक संगीत की प्रसिद्ध गायिका। 1978 – मशहूर अभिनेत्री और मॉडल लारा दत्ता का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हुआ। 1995 - सरिता मोर हरियाणा के सोनीपत जिले की रहने वाली एक भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान। 16 अप्रॅल को हुए निधन👉 1951 - अद्वैत मल्लबर्मन, प्रसिद्ध बांग्ला लेखक। 1961 - रणधीर सिंह - प्रसिद्ध सिख नेता और क्रांतिकारी थे। 1966 - नंदलाल बोस - भारत के एक प्रसिद्ध चित्रकार। 2011 - महाराजा मानसिंह और महारानी मरुधर कँवर के पुत्र ब्रिगेडियर महाराजा सवाई भवानी सिंह जयपुर के महाराजा थे (महावीर चक्र सम्मानित)। 2019 - यूपी-उत्तराखंड के पूर्व सीएम एनडी तिवारी के पुत्र रोहित शेखर का हृदय गति रुकने से निधन। 2020 - स्वतंत्रता सेनानी आर वी भुस्कुटे का निधन। 2021 - सीबीआई के पूर्व चीफ रंजीत सिन्हा का दिल्ली में निधन हुआ। 2021 - काकरला सुब्बा राव - एक भारतीय रेडियोलॉजिस्ट थे। 2021 - हेलेन एलिजाबेथ मैकक्रॉरी ओबीई - एक अंग्रेजी अभिनेत्री थीं। 2021 - फुटबॉल ओलंपियन अहमद हुसैन लाला (89) का बेंगलुरू में निधन हुआ। 2021 - चार्ल्स मैथ्यू "चक" गेशके एक अमेरिकी व्यापारी और कंप्यूटर वैज्ञानिक , एडोब के सह-संस्थापक और PDF डेवलपर थे। 2022 - किलोई विधानसभा के पूर्व विधायक चौ. हरिचंद हुड्डा (101) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी जैज़ पियानोवादक, संगीतकार, बैंडलाडर और शिक्षक अहमद जमाल (92) का निधन हुआ। 2023 - स्कॉटिश फुटबॉलर एडमंड पीटर स्किरविंग कोलक्हौं (78) का निधन हुआ। 2024 - ब्रिटिश मोटर साइकिल रेसर रॉडने गूल्ड (81) का निधन हुआ।   16 अप्रॅल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव👉 🔅 श्री दुर्गा देवी रथ यात्रा - अंजारले (रत्नागिरी)। 🔅 श्री जारबोम गामलिन जयन्ती। 🔅 राजस्थान पुलिस दिवस। 🔅 भारतीय रेलवे परिवहन दिवस। 🔅 Foursquare Day। 🔅 विश्व आवाज दिवस (World Voice Day)। 🔅 हाथी बचाओ दिवस (Save the Elephant Day)। 🔅 National Healthcare Decisions Day (US). कृपया ध्यान दें जी👉     यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की  कोई जिम्मेदारी नहीं है।

Anjali Kumari अप्रैल 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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ईरान पर सख्त रुख: ‘समझौता पूरा नहीं हुआ तो सेना तैनात रहेगी’ - डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक चेतावनी

surbhi अप्रैल 9, 2026 0