1638 – काॅर्नलीस एस गोयर ने मॉरिशस पर कब्जा किया। 1663 – लंदन में ड्रूरी लेन स्थित 'रॉयल' नाम का पहला थियेटर खुला। 1664 – फ्रांस के सम्राट लुई चौदहवें ने ‘वर्साय पैलेस’ का उद्घाटन किया। 1727 – रूस की महारानी कैथरीन प्रथम ने यूक्रेन से यहूदियों को बाहर करने का आदेश दिया। 1748 - फ्रेंच सैनिकों ने ऑस्ट्रियाई उत्तराधिकार के युद्ध में मास्ट्रिच को जीता। 1763 - मुख्य पोंटिआक ने फोर्ट डेट्रॉइट में ब्रिटिश बलों पर हमला करके "पोंटिक का षडयंत्र" शुरू किया। 1771 - शमूएल हर्न ने कनाडा की कॉपर मीन नदी की खोज की । 1775 – तुर्की राज्य बुकोविना आस्ट्रिया से अलग हुआ। 1785 – फ़्राँसिसी नागरिक जॉन प्येर फ़्राँसुआ ब्लनशार ने अमरीकी नागरिक जॉन जैफ़्रिज के साथ पहली बार एक गुब्बारे में बैठकर इंगलिश चैनल को पार किया। 1800 – अमेरिका में इंडियाना प्रांत का गठन किया गया। 1832 - लंदन की संधि ग्रीस को स्वतंत्र राज्य बनाया, ओटो ऑफ़ विटल्सबैच, बावरिया के राजकुमार को राजा चुना गया। इस प्रकार आधुनिक ग्रीस का इतिहास शुरू हुआ। 1875 - जापान और रूस के बीच सेंट पीटर्सबर्ग की संधि पर हस्ताक्षर किए गए। 1875 – सिसली द्वीप के पास जर्मनी का जहाज डूबा, जिसमें 312 लोग मारे गए। 1895 – रूस के पितेरबुर्ग (सेण्ट पीटर्सबर्ग) नगर में एक इलैक्ट्रिक इंजीनियर अलेक्सान्दर पपोफ़ ने रेडियो की तरह के एक उपकरण का प्रदर्शन किया था। 1907 – बम्बई (वर्तमान में मुबई) में पहली विद्युत ट्राम कार चलाई गई। 1934 – फिलीपींस ने विश्व में सबसे बड़े आकार का मोती प्राप्त हुआ। 1940 – विस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने। 1945 – सुबह 2 बजकर 41 मिनट पर रैम्स नगर में जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण किया। जिसके बाद दूसरा विश्व-युद्ध ख़त्म हुआ। 1952 – इंटीग्रेटेड सर्किट का कॉन्सेप्ट पहली बार जेफ्री डमर ने प्रकाशित किया। 1960 - भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की स्थापना की। 1973 – अरुणाचल प्रदेश की नई राजधानी ईटानगर बनायी गयी। 1975 – अमेरिका ने वियतनाम युद्ध के समाप्ती की घोषणा की। 1976 - एलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल को अपने आविष्कार का पेटेंट मिला जिसे उन्होंने "टेलीफ़ोन" (दूरभाष) का नाम दिया। 1989 - भारतीय मूल के लेखक सलमान रश्दी के ख़िलाफ़ ईरानी फ़तवे के बाद ब्रिटेन और ईरान के बीच राजनयिक सम्पर्क टूट गया। 1999 - स्काटलैंड संसदीय चुनावों में लेबर पार्टी को सफलता। 2001 - पूर्वोत्तर ईरान में बाढ़। 2002 - गुजरात की हिंसा पर अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने गम्भीर चिंता जताई। 2004 - नेपाल के प्रधानमंत्री सूर्य बहादुर थापा ने इस्तीफ़ा दिया। 2008 - रूस के पूर्व राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने देश के 10वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली (कन्फर्म नहीं)। 2008 - पाकिस्तान ने परमाणु क्षमता से लैस मिसाइल हत्फ़-8 का परीक्षण किया। 2010 - चिली ओईसीडी का 31 वा सदस्य बना। 2019 - अमेरिका ने चीन पर व्यापार और सम्बंधित मुद्दों पर वार्ता से पिछे हटने का आरोप लगाया। 2020 - आंध्रप्रदेश के विशाखापटनम में एक निजी पालीमर कंपनी में गैस रिसाव से 11 लोगों की मौत। 2020 - इराक के खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख मुस्तफा अल- काधेमी ने 07 मई 2020 को देश के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली। 2021 - WHO ने चीन के कोविड रोधी वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी । 2021 - चेन्नई एयरपोर्ट पर 100 करोड़ रुपए के हेरोइन के साथ तंजानिया के दो नागरिक गिरफ्तार किए गए। 2022 - इंदौर की दो मंजिला इमारत में लगी भयंकर आग से 7 लोग जिंदा जले व 11 घायल हुए। 2022 - झारखंड स्थित जमेशदपुर के टाटा स्टील प्लांट में जोरदार धमाका हुआ व कर्मचारियों को तत्काल सुरक्षित बाहर निकाला गया। 2022 - यूक्रेन के शहर खार्कीव पर कब्जे के लिए रूसी सेना ने बड़े हमले में तीन पुल उड़ाए व अमेरिकी और यूरोपीय देशों के हथियारों का भंडार नष्ट किया। 2022 - मथुरा में यमुना एक्सप्रेस वे पर कार - वाहन की टक्कर में 7 लोगों की मौत व 2 घायल हुए। 2022 - नेपाल के कामी रीता शेरपा ने 26वीं बार माउंट एवरेस्ट फतह कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। 2022 - भारत के पहले क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की पहली ट्रेन को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) को सौंपा गया। 2023 - केरल के मलप्पुरम में नाव पलटने से छह बच्चों सहित 21 लोगों की मौत हुई। 2023 - यूपी के मुरादाबाद में भीषण सड़क हादसे में 10 लोगों की दर्दनाक मौत हुई व लगभग 15 लोग घायल हुए। 2023 - सीरिया को फिर से प्रभावशाली अरब लीग में शामिल कर लिया गया। 2023 - टेक्सास के ब्राउन्सविले में प्रवासियों के समूह पर एक व्यक्ति के कार चढ़ाने से 8 की मौत व कम से कम 10 घायल हुए। 7 मई को जन्मे व्यक्ति 1861 – बांग्ला कवि, नाटककार, दार्शनिक, साहित्यकार और चित्रकार रबींद्रनाथ टैगोर का कलकत्ता में जन्म। टैगोर एशिया के पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। 1880 - पांडुरंग वामन काणे - महान् भारतीय संस्कृतज्ञ और विद्वान् पंडित। 1889 - एन. एस. हार्डिकर - प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तथा 'हिन्दुस्तानी सेवादल' के संस्थापक। 1912- पन्नालाल पटेल- गुजराती भाषा के जानेमाने साहित्यकार थे। 1955 - प्रमोद मुथु हिन्दी फ़िल्मों के एक कलाकार। 1968 - केशव प्रसाद मौर्य - भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञों में से एक। 7 मई को हुए निधन 1924 - अल्लूरी सीताराम राजू - प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी 2001- प्रेम धवन, हिंदी सिनेमा जगत् के मशहूर गीतकार। 2014 - समर्थलाल मीणा - भारतीय राज्य राजस्थान के राजनीतिज्ञ थे। 2020 - कोडावा फैमिली हॉकी टूर्नामेंट के संस्थापक पंडांडा कुट्टप्पा का निधन। 2021 - मशहूर संगीतकार वनराज भाटिया (93) का निधन हुआ। 2021 - वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह का कोरोना वायरस के कारण निधन हुआ। 2022 - दुनिया के सबसे उम्रदराज शतरंज ग्रैंडमास्टर 'यूरी एवरबख' (100) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी पेशेवर गोल्फ खिलाड़ी डॉन जैन्युअरी (93) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी ओपेरा गायक ग्रेस बम्ब्री (86) का निधन हुआ। 2023 - कनाडाई हॉकी खिलाड़ी विक स्टेसियक (93) का निधन हुआ। 7 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव मेला आनी (कुल्लू , 7-9 मई )। भगवान श्री नमिनाथ जी मोक्ष कल्याणक ( जैन , बैशाख कृष्ण चतुर्दशी )। श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर जयन्ती (163वीं)। विश्व एथलेटिक्स दिवस। सीमा सड़क संगठन (BRO) स्थापना दिवस (65वां)। विश्व अस्थमा दिवस (मई महीने के पहले मंगलवार को)। World AIDS Orphans' Day. कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।