अदन, एजेंसियां। लाल सागर के रणनीतिक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में खाद्य सामग्री ले जा रहे एक कमर्शियल जहाज पर मिसाइल हमला हुआ है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने इस हमले के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है। हमले में कम से कम छह लोगों की मौत हुई है। तीन बैलिस्टिक मिसाइलों से बनाया निशाना यमन के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, हूतियों ने ‘तिहामा’ नाम के एक छोटे कार्गो जहाज पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जहाज पर खाद्य सामग्री ले जाई जा रही थी। मिसाइल हमले के बाद जहाज में आग लग गई। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती हमले में चार क्रू मेंबर्स की मौत हुई। इनमें तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल थे। चार अन्य क्रू मेंबर्स घायल हुए। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दोबारा हुआ हमला हमले के बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। यमन सरकार के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जहाज को दोबारा निशाना बनाया गया। इस दूसरे हमले को अधिकारियों ने रेस्क्यू टीम और जहाज पर मौजूद लोगों की जान को खतरे में डालने वाली कार्रवाई बताया। बाद में यमन के कोस्ट गार्ड ने पुष्टि की कि मृतकों में दो बचावकर्मी भी शामिल हैं। इस तरह हमले में मरने वालों की कुल संख्या छह हो गई। जहाज के मालिकाना हक को लेकर सामने आई अलग-अलग जानकारी शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया गया था कि हमले की चपेट में आया जहाज सऊदी अरब के स्वामित्व वाला है। हालांकि, समुद्री ट्रैकिंग और खुफिया जानकारी से जुड़ी अलग-अलग रिपोर्टों में जहाज के मालिकाना हक को लेकर अलग जानकारी सामने आई। MarineTraffic के डेटा के अनुसार, ‘तिहामा’ तंजानिया के झंडे के नीचे संचालित हो रहा था और इसके मालिक मिस्र तथा यमन में पंजीकृत कंपनियां बताई गई हैं। जाजान में अरामको रिफाइनरी पर भी हमला इस बीच सऊदी अरब के जाजान इलाके में अरामको रिफाइनरी में आग लगने की घटना भी सामने आई। हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि उनके समूह ने सऊदी अरब द्वारा सादा और हज्जा प्रांतों में किए गए ड्रोन ऑपरेशंस के जवाब में रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाया। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने रिफाइनरी में आग लगने की पुष्टि करते हुए बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है। लाल सागर में इस ताजा हमले के बाद क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और समुद्री यातायात को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है।
नई दिल्ली: लाल सागर के बेहद संवेदनशील बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में एक कमर्शियल कार्गो जहाज पर हुए दोहरे हमले ने समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। यमन सरकार के अनुसार, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने खाद्य सामग्री ले जा रहे मालवाहक जहाज ‘तिहामा’ को दो बार निशाना बनाया। हमले में कम से कम छह लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में जहाज के चालक दल के चार सदस्य और बचाव अभियान में शामिल दो कर्मी शामिल हैं। चालक दल के मृतकों में तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक बताए गए हैं। जहाज पर दागी गईं तीन बैलिस्टिक मिसाइलें यमन के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने तिहामा जहाज पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई और चालक दल के कई सदस्य इसकी चपेट में आ गए। पहले हमले में चार चालक दल सदस्यों की मौत हुई। इनमें तीन पाकिस्तान और एक इंडोनेशिया के नागरिक थे। चार अन्य चालक दल सदस्य और एक बचावकर्मी घायल हुए। हमले के बाद जहाज पर फंसे लोगों को बचाने के लिए खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया था। बचाव अभियान के दौरान फिर हुआ हमला यमन के अधिकारियों के अनुसार, सबसे गंभीर चिंता की बात यह रही कि राहत और बचाव अभियान शुरू होने के दौरान ही जहाज को दोबारा निशाना बनाया गया। दूसरे हमले में बचाव अभियान में शामिल लोगों को भी नुकसान पहुंचा। यमनी तटरक्षक बल ने बाद में पुष्टि की कि मरने वालों में दो बचावकर्मी भी शामिल हैं। इसके बाद मृतकों की कुल संख्या छह हो गई। यह घटनाक्रम लाल सागर में काम कर रहे व्यापारिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा करता है। जाजान की अरामको रिफाइनरी को भी निशाना बनाने का दावा इसी बीच हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जाजान स्थित अरामको रिफाइनरी पर भी ड्रोन हमले का दावा किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी के अनुसार, यह हमला सादा और हज्जा प्रांतों में कथित सऊदी ड्रोन हमलों के जवाब में किया गया। हूती पक्ष ने दावा किया कि हमले के बाद रिफाइनरी में आग लग गई। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने भी रिफाइनरी में आग लगने की पुष्टि की, हालांकि अधिकारियों के अनुसार आग पर बाद में काबू पा लिया गया। लाल सागर में क्यों बढ़ी चिंता? बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां किसी व्यावसायिक जहाज पर हमला केवल जहाज में मौजूद चालक दल की सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक समुद्री व्यापार, बीमा लागत और माल ढुलाई पर भी पड़ सकता है। लगातार हमलों के कारण इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिम बढ़ता है और कंपनियों को वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर विचार करना पड़ सकता है। मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की भी परीक्षा हूती हमलों के बीच हाल में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जाजान पर हमले के बाद इस समझौते की प्रभावशीलता को लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, किसी सैन्य समझौते की वास्तविक क्षमता का आकलन केवल एक घटना के आधार पर करना जल्दबाजी होगी। फिर भी लाल सागर और सऊदी क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे हमले क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती जरूर हैं। समुद्री सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती तिहामा जहाज पर दो बार हुआ हमला इस बात को रेखांकित करता है कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान भी जोखिम से मुक्त नहीं हैं। खासकर तब, जब हमलावर दूसरे हमले के जरिए बचाव अभियान को भी निशाना बनाने की क्षमता रखते हों। लाल सागर में बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना रह सकता है।
दुबई: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई स्थित जेबेल अली औद्योगिक क्षेत्र में मंगलवार देर रात करीब 20 मिनट के भीतर सात जोरदार धमाकों के बाद भीषण आग लग गई। विस्फोटों के बाद पूरे इलाके में काले धुएं का घना गुबार छा गया। हालांकि, यूएई प्रशासन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि घटना किसी हमले का नतीजा थी या औद्योगिक दुर्घटना। फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं हुई है। जेबेल अली क्यों है रणनीतिक रूप से अहम? जेबेल अली दुबई का सबसे बड़ा औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब माना जाता है। यहां दुनिया के सबसे बड़े मानव निर्मित बंदरगाहों में से एक मौजूद है। इसके अलावा फ्री ट्रेड जोन, ईंधन भंडारण केंद्र और अंतरराष्ट्रीय माल परिवहन की महत्वपूर्ण सुविधाएं भी यहीं स्थित हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में हुई घटना ने सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। कार शोरूम हादसे में भारतीय युवक की मौत इसी बीच, दुबई के शेख जायद रोड स्थित एक कार शोरूम में गैस सिलेंडर फटने से केरल के 27 वर्षीय शिजिन पॉल की मौत हो गई। हादसे में पांच अन्य लोग घायल हुए हैं। शिजिन करीब आठ महीने पहले नौकरी के लिए दुबई पहुंचे थे और सोशल मीडिया मैनेजर के रूप में कार्यरत थे। यह घटना खाड़ी देशों में भारतीय कामगारों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े करती है। सऊदी तेल टैंकर पर मिसाइल हमले का दावा यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह के पास एक सऊदी तेल टैंकर पर मिसाइल हमला किया। हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने हमले की जिम्मेदारी ली, हालांकि उन्होंने हमले के समय और नुकसान का कोई विस्तृत विवरण नहीं दिया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। अमेरिकी मिसाइल भंडार पर भी रिपोर्ट मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका अपनी THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली के लगभग 80 प्रतिशत इंटरसेप्टर और पैट्रियट सिस्टम के करीब आधे इंटरसेप्टर इस्तेमाल कर चुका है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो क्षेत्र में लंबे सैन्य अभियान चलाने की अमेरिकी क्षमता और रणनीति पर असर पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर जारी बातचीत इस बीच, वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सामान्य रूप से खोलने के लिए ईरान और ओमान के बीच बातचीत जारी है। दोनों देश जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उम्मीद जताई है कि इस मुद्दे पर जल्द समझौता हो सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा समुद्री मार्गों के साथ एक नए सुरक्षित कॉरिडोर के प्रस्ताव पर भी चर्चा चल रही है।
सना, एजेंसियां। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हालिया सैन्य कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। हूती संगठन ने कहा है कि सऊदी अरब के हमलों का जवाब जरूर दिया जाएगा और यदि हवाई हमले जारी रहे तो उनके ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाएगा। इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हवाई हमलों के बाद बढ़ा तनाव हूती विद्रोहियों का दावा है कि सऊदी अरब समर्थित बलों ने यमन के कई इलाकों, जिनमें सना हवाई अड्डा भी शामिल है, पर हमले किए हैं। इसके जवाब में हूती नेतृत्व ने कहा कि वह "हर हमले का जवाब देगा" और अपने सैन्य अभियान को जारी रखेगा। दूसरी ओर, सऊदी अरब का कहना है कि उसकी कार्रवाई सुरक्षा खतरों को रोकने के लिए की जा रही है। मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा हूती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में सऊदी अरब की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा भी किया है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई हमलों को बीच में ही नाकाम कर दिया। इन घटनाओं के बाद लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। क्षेत्रीय तनाव पर दुनिया की नजर विशेषज्ञों का मानना है कि हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ता टकराव पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका, चीन और अन्य देशों की ओर से तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अब यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की एंट्री ने वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका और बढ़ा दी है। हूती समूह ने घोषणा की है कि वह लाल सागर के बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी अरब के जहाजों को रोकेंगे। इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। लाल सागर में नाकेबंदी की चेतावनी हूती समूह ने कहा कि वह सऊदी जहाजों को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से नहीं गुजरने देगा। यह लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश द्वार है और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अधिक बाधित हो सकती है। होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंदेब पर खतरा पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे में सऊदी अरब अपने तेल निर्यात का कुछ हिस्सा लाल सागर के रास्ते भेज रहा था। लेकिन यदि हूती अपनी धमकी को अमल में लाते हैं, तो सऊदी तेल निर्यात के इस वैकल्पिक मार्ग पर भी संकट गहरा सकता है। हूतियों ने क्या कहा? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने टीवी संबोधन में कहा कि यह फैसला यमन पर सऊदी अरब की कथित नाकेबंदी के जवाब में लिया गया है। उन्होंने कहा कि सऊदी जहाजों को बाब अल-मंदेब से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, क्षेत्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि हूतियों का यह कदम केवल यमन की स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ईरान की व्यापक क्षेत्रीय रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है। अमेरिका-ईरान संघर्ष से बढ़ा तनाव इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई लगातार जारी है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर नए हमले किए हैं। ईरान ने उन देशों को निशाना बनाया है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जबकि अमेरिका ने लगातार दसवीं रात ईरान पर हवाई हमले किए। बढ़ रहा है वैश्विक ऊर्जा संकट विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदेब दोनों समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ेगा। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है, जिसका असर दुनिया भर में ईंधन, परिवहन और महंगाई पर देखने को मिल सकता है। अमेरिकी सैनिकों की संख्या भी बढ़ी अमेरिकी सेना ने स्वीकार किया है कि पिछले दो सप्ताह में संघर्ष के दौरान घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर करीब 100 हो गई है। वहीं, हाल के हमलों में कम से कम तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा फारस की खाड़ी के कई देशों और कुवैत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर खतरे ने दुनिया के सामने एक नए ऊर्जा संकट की आशंका खड़ी कर दी है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर लंबे समय तक पड़ सकता है।
वॉशिंगटन/दुबई, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष और तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने लगातार 10वीं रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। वहीं, ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने की घोषणा कर दी है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ईरान के सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, ताजा हवाई हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और सामरिक ठिकानों को निशाना बनाना था। इन हमलों के बाद कई इलाकों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। हूती विद्रोहियों ने सऊदी जहाजों पर दी कार्रवाई की चेतावनी यमन के हूती विद्रोहियों ने घोषणा की है कि वे सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और तेल बाजारों में चिंता बढ़ गई है। वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडराया संकट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाब-अल-मंदेब और होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है। तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। युद्ध के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी लगातार सैन्य कार्रवाई के बावजूद कई मध्यस्थ देशों की ओर से युद्धविराम और बातचीत की कोशिशें जारी हैं। हालांकि फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया है और क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
नई दिल्ली: लाल सागर (Red Sea) में यमन के तट के पास रविवार को एक मालवाहक जहाज (Cargo Ship) पर अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर दिया। इस घटना की पुष्टि ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने की है। फिलहाल हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। यमन के होदेइदा तट के पास हुआ हमला ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, हमला यमन के तटीय शहर होदेइदा से लगभग 30 समुद्री मील (करीब 55 किलोमीटर) दक्षिण-पश्चिम में हुआ। होदेइदा पर वर्तमान में ईरान समर्थित हूती (Houthi) विद्रोहियों का नियंत्रण है। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज के चालक दल ने अज्ञात हथियारबंद हमलावरों द्वारा निशाना बनाए जाने की सूचना सुरक्षा एजेंसियों को दी। जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, हाल के महीनों में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर दोबारा हमले करने की चेतावनी दी थी। फिलहाल इस घटना को लेकर हूती संगठन की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पहले भी निशाने पर रहे हैं जहाज गाजा युद्ध के दौरान हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले कई वाणिज्यिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। इन हमलों के चलते कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने स्वेज नहर का रास्ता छोड़कर अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबी दूरी तय करनी शुरू कर दी थी, जिससे वैश्विक व्यापार और शिपिंग लागत पर असर पड़ा। सोमाली समुद्री डाकुओं की गतिविधियां भी बढ़ीं लाल सागर और अदन की खाड़ी में हाल के दिनों में सोमाली समुद्री डाकुओं की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। 1 जुलाई को यमन के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह बलहाफ से करीब 76 समुद्री मील (140 किलोमीटर) दक्षिण में एक संदिग्ध समुद्री डकैती की घटना सामने आई थी। उस दौरान चार हथियारबंद हमलावरों ने एक छोटी नाव के जरिए एक जहाज के ब्रिज पर हमला किया था, जिससे मामूली नुकसान हुआ था। जांच जारी यूकेएमटीओ और अन्य समुद्री सुरक्षा एजेंसियां घटना की जांच कर रही हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ताजा हमले के पीछे कौन-सा संगठन या समूह शामिल था। लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।