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Important Events
Important Events: 13 जून की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

1420 - जलालुद्दीन फ़िरोजशाह दिल्ली की गद्दी पर बैठा। 1704 - कोरोंको की लड़ाई:ऑस्ट्रियाई और डेनमार्क, प्रशिया, क्रोएशिया, जर्मनी ने उनके सहयोगी द FCलों और वोज्वोदिना कुरुक्स को हराया। 1707 - फ़ेरेंस रकोक्ज़ी द्वितीय ने हंगरी को स्वतंत्र घोषित किया। 1721 - इंग्लैंड ने मैड्रिंड के साथ संघिपत्र पर हस्ताक्षर किया।  1727 - स्पेन ने पेरिस से आर्थिक संधि पर हस्ताक्षर किये। 1753 - ऑस्ट्रिया, ग्रेट ब्रिटेन और मोडेना ने गुप्त सैन्य संधि पर हस्ताक्षर किये। 1886 - कनाडा के वैंकूवर शहर में आग लगने के कारण लगभग 1,000 इमारत जलकर खाक हुयी। 1888 - अमेरिकी कांग्रेस ने श्रम विभाग का गठन किया। 1920 - संयुक्त राज्य अमेरिका के डाक विभाग के नियम के अनुसार बच्चों का पार्सल पोस्ट के माध्यम से नहीं भेजा जायेगा। 1932 - ब्रिटेन और फ्रांस के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। 1943 - स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने पनडुब्बी के द्वारा जर्मनी से टोक्यो की यात्रा शुरू की। 1956 - 72 वर्षों तक अपने नियंत्रण में रखने के बाद ब्रिटेन ने स्वेज नहर का नियंत्रण मिस्र को सौंपा। 1956 - अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन (आईसीपीओ) का गठन किया गया। 1963 - न्यूयॉर्क कमोडिटी एक्सचेंज ने चांदी के वायदा अनुबंधों का कारोबार शुरु किया। 1982 -  फीफा विश्व कप स्पेन में शुरू किया गया। 1991 - यू.एस. ओपन में एक दर्शक बिजली से मरा। 1993 - किम कैंपबेल कनाडा की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। 1997 - दिल्ली के उपहार सिनेमाघऱ में आग लगने से 59 लोगों की मृत्यु हो गई तथा 100 से अधिक लोग घायल हो गए। 2001 - नेपाल शाही परिवार हत्याकांड में दीपेन्द्र की प्रेमिका देवयानी का जांच आयोग के समक्ष गवाही से इन्कार। 2002 - 1972 के एंटी बैलिस्टिक मिसाइल समझौते की समय सीमा समाप्त। 2003 - डेनियल अखमितोव कजाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री नियुक्त।  2004 - लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में राष्ट्रपति जोसेफ़ कबीला के ख़िलाफ़ तख्ता पलट का प्रयास विफल।  2004 - ईराक के विदेश उपमंत्री बासम सालिह कुन्बा की हत्या। 2005 - ईरान 2009 के अन्त से 25 वर्षों के लिए भारत को तरल प्राकृतिक गैस का निर्यात करने पर सहमत। 2005 - पॉप गायक माइकल जैक्सन को 13 साल के बच्चे के यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया गया था। 2006 - नाइजीरिया और कैमरून ने सीमा विवाद पर समझौता किया। 2008 - टेलिकॉम मलेशिया (टीम) ने आइडिया सेलुलर कम्पनी की 15% हिस्सेदारी ख़रीदी। 2008 - चीन और ताइवान ने विमान सेवा शुरू करने के सम्बन्ध में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किये। 2019 - भारतीय वायुसेना के लापता विमान AN-32 का मलबा अरुणाचल प्रदेश में मिला , विमान में सवार सभी 13 लोग शहीद हुए। 2019 - प्रसिद्ध लेखक अमिताव घोष को अंग्रेजी में भारतीय साहित्य के संवर्धन में उनके योगदान के लिए 54 वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे इस प्रकार से सम्मानित होने वाले पहले अंग्रेजी लेखक हैं । 2019 - प्रियंका चोपड़ा को यूनिसेफ द्वारा मानवतावादी पुरस्कार से सम्मानित हुई। 2019 - चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग को किर्गिस्तान के सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार  ‘मानस ऑर्डर ऑफ द फस्र्ट डिग्री’ से सम्मानित किया गया । 2020 - MP: शहडोल खदान धंसने के बाद छह मजदूरों की मौत व चार की हालत गम्भीर हुई।  2020 - पुरातत्व सर्वेक्षण टीम ने दावा किया कि महानदी के पानी में डूबा एक 500 साल पुराना मंदिर की खोज की। 2020 - चीन के झेजियांग प्रांत में एक तेल के टैंकर में विस्फोट हो गया जिससे 10 लोगों की मौत हो गई (जो बाद में बढकर 20 से अधिक हो गयी थी) और 100 (बाद में और बढ़े) से ज्यादा लोग घायल हो गए।  2021 - अमरीका और दक्षिण कोरिया ने कोरिया प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से रहित करने के लिए जापान के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। 2022 - रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में "रेलवे के लिए स्टार्ट-अप" का शुभारंभ किया। 2022 - 38वीं भारत-इंडोनेशिया समन्वित गश्त अंडमान सागर और मलक्का जलडमरूमध्य में आयोजित। 2023 - Delhi-NCR में 5.4 तीव्रता का भूकंप आया , उत्तर भारत से लेकर पाकिस्तान , चीन तक धरती हिली। 2023 - ओडिशा के टाटा स्टील प्लांट में भांप लीक होने के कारण 19 कर्मचारी झुलसे। 2023 - कट्टुपल्ली में मैसर्स एल एंड टी के सर्वे वैसल्स (लार्ज) परियोजना के चौथे जहाज 'संशोधक' को लॉन्च किया गया। 2023 - जी20 की भारत की अध्यक्षता के तहत एसएआई20 सहभागिता समूह का एसएआई20 शिखर सम्मेलन गोवा में संपन्न हुआ।   13 जून को जन्मे व्यक्ति   1909 - एलमकुलम मनक्कल सनकरन नंबूदरीपाद एक कम्यूनिस्ट नेता और केरल के पहले मुख्यमंत्री (1906 का भी वर्णन इसलिए कन्फर्म कर लें )। 1923 - प्रेम धवन, हिंदी सिनेमा जगत् के मशहूर गीतकार। 1944 - बान की मून - संयुक्त राष्ट्र संघ के आठवें महासचिव थे। 1964 - पीयूष गोयल - भाजपा के राजनेता और भारत के पूर्व रेलमंत्री और कोयला मंत्रालय, भारत सरकार के प्रमुख मंत्री। 1992 - दिशा पटानी - भारतीय अभिनेत्री । 1994 - दीपिका कुमारी भारतीय महिला तीरंदाज।   13 जून को हुए निधन   1719 - रफ़ीउद्दाराजात - दसवाँ मुग़ल बादशाह था। 1922 - नानक भील - अंग्रेज़ों का विरोध करने वाले क्रांतिकारी विचारों के व्यक्ति थे। 1994 - राज कुमार जयचंद्र सिंह - मणिपुर के भूतपूर्व सातवें मुख्यमंत्री थे। 1999 - मेजर मनोज तलवार - भारतीय सेना के जाबांज सैनिकों में से एक थे। 2008 - कीर्ति चौधरी - तीसरे सप्तक की एकमात्र कवयित्री । 2012 - मेहदी हसन - प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक। 2016 - मुद्राराक्षस - भारत के प्रसिद्ध लेखक, उपन्यासकार, नाटककार, आलोचक तथा व्यंग्यकार थे। 2020 - उत्तराखंड के लोकगायक हीरा सिंह राणा का दिल का दौरा पड़ने से निधन। 2020 - विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) की पूर्व महानिदेशक और सेवानिवृत्त आईआईएस अधिकारी सुरिंदर कौर का 77 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2020 - भारत के सबसे पुराने प्रथम श्रेणी क्रिकेटर वसंत रायजी का 100 वर्ष की आयु में निधन। 2021 - भारतीय महिला वॉलीबॉल टीम की पूर्व कप्तान एवं मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल कौर का कोविड-19 के कारण निधन हुआ। 2021 - उत्तराखंड की दिग्गज राजनेता डॉ. इंदिरा हृदयेश का निधन हुआ। 2021 - दुनिया में सबसे बड़े परिवार के मुखिया जियोंघा का निधन हुआ। 2023 - राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अमेरिकी नाटककार कॉरमैक मैक्कार्थी (89) का निधन हुआ। 2023 - रग्बी यूनियन खिलाड़ी पॉल एंथोनी जॉर्ज रेंडल (69) का निधन हुआ। 2023 - रूसी जिमनास्ट विक्टर निकितोविच लिसित्स्की (83) का निधन हुआ।   13 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   श्री कोलबास्वामी जयंती एवं पुण्य तिथि - धापेवाड़ा (नागपुर)। श्री ई० एम० एस० नंबूदरीपाद जयन्ती (कन्फर्म नहीं )। मेजर मनोज तलवार शहीदी दिवस। श्री राज कुमार जयचंद्र सिंह स्मृति दिवस। अंतर्राष्ट्रीय अल्बिनिज्म ( रंगहीनता ) जागरूकता दिवस। कृपया ध्यान दें  यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

anjali kumari जून 13, 2026 0
kantara controversy
कांतारा विवाद पर रणवीर सिंह ने मांगी माफी, चामुंडेश्वरी मंदिर पहुंचकर जोड़े हाथ

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनकी किसी फिल्म नहीं, बल्कि “कांतारा मिमिक्री विवाद” को लेकर सार्वजनिक माफी है। कर्नाटक हाई कोर्ट के निर्देश के बाद रणवीर सिंह चामुंडेश्वरी मंदिर पहुंचे और वहां हाथ जोड़कर अपनी गलती के लिए माफी मांगी।   गोवा फिल्म फेस्टिवल में हुआ था विवाद पूरा विवाद पिछले साल गोवा फिल्म फेस्टिवल के दौरान शुरू हुआ था। कार्यक्रम में रणवीर सिंह ने साउथ सुपरस्टार ऋषभ  शेट्टी की चर्चित फिल्म Kantara के “दैव्य” सीन की मिमिक्री की थी। इस पर सोशल मीडिया पर भारी आलोचना हुई और मामला कानूनी विवाद तक पहुंच गया।   विवाद बढ़ने के बाद रणवीर सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। बाद में मामला कर्नाटक हाई कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने उन्हें फटकार लगाते हुए चामुंडेश्वरी मंदिर जाकर माफी मांगने का निर्देश दिया।   सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए रणवीर सिंह मंदिर पहुंचे और जमीन पर बैठकर हाथ जोड़कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। इस दौरान के कई फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स रणवीर के व्यवहार की तारीफ कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि अभिनेता ने अपनी गलती स्वीकार कर अदालत के आदेश का सम्मान किया है। डॉन 3 विवाद से भी चर्चा में रणवीर हाल ही में रणवीर सिंह का नाम Don 3 छोड़ने को लेकर भी चर्चा में रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) की ओर से उन पर प्रतिबंध लगाए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। वर्कफ्रंट की बात करें तो रणवीर जल्द अपनी आगामी फिल्म “प्रलय” में नजर आ सकते हैं। इसके अलावा Shah Rukh Khan की फिल्म “किंग” में कैमियो रोल को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।

Unknown मई 26, 2026 0
Khunti tribal girl
खूंटी की आदिवासी युवती दिल्ली 17 साल बनी रही बंधक, यौन शोषण के बाद गर्भपात भी कराया गया

खूंटी। झारखंड के खूंटी की आदिवासी युवती को 17 साल तक दिल्ली में बंधक बनाकर रखा गया। युवती से घरेलू मजदूरी कराई गयी। साथ ही उसका यौन शोषण भी किया गया। इस दौरान उसका गर्भपात कराये जाने की बात भी सामने आई है। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।  काम दिलाने के बहाने दिल्ली ले जाई गई थी युवती ने बताया कि साल 2009 में जेटा मुंडा नामक व्यक्ति उसे काम दिलाने के बहाने दिल्ली लाया था। उस समय वह 14 साल की थी। उसे कोहाट एन्क्लेव स्थित मधु अग्रवाल के घर पर घरेलू काम के लिए सौंप दिया गया। युवती का आरोप है कि उस दौरान उसे अपने परिवार से बात तक नहीं करने दिया गया और उसके पिता की मौत की खबर भी उससे छिपाई गई।  मालिक की बहू बेटी ने युवती का गर्भपात कराया दिल्ली पुलिस से की गई शिकायत के मुताबिक घर में काम करने वाले एक व्यक्ति ने डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब वह गर्भवती हुई तो मकान मालिक की बहू और बेटी ने उसका गर्भपात करवा दिया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि हाल ही में छत पर नहाते समय एक अन्य युवक ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया। जिसे मालिक ने CCTV में देख लिया था, लेकिन कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। नवंबर 2025 में जब पीड़िता का भाई उसे लेने आया तो उसे 10,000 रुपये देकर वापस भेज दिया गया।  खूंटी पुलिस कर रही जांच अब 9 अप्रैल 2026 को जब परिजन दोबारा आए तो मालिक ने 17 साल की मजदूरी के बदले मात्र 1.40 लाख रुपये का डीडी और 15,000 रुपये नकद देकर मामला खत्म करने का दबाव बनाया। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में जुट गई है। दिल्ली के सुभाष प्लेस थाना में मामला दर्ज होने की सूचना मिलते ही खूंटी पुलिस सक्रिय हो गई है। महिला थाना सह एएचटीयू थाना प्रभारी फुलमनी टोप्पो ने बताया कि दिल्ली में दर्ज शिकायत के आधार पर खूंटी पुलिस भी इस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि यह पुराना मामला है और खूंटी जिले में कभी शिकायत दर्ज नही कराया गया था।

Unknown मई 11, 2026 0
Election officials verifying voter lists in West Bengal during Special Intensive Revision process
वोटर लिस्ट की ‘सफाई’ ने बदली बंगाल की सियासत? SIR प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल

SIR Impact on Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद अब राजनीतिक गलियारों में हार और जीत के कारणों को लेकर गहन चर्चा शुरू हो गयी है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बड़ी हार के पीछे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को एक अहम फैक्टर माना जा रहा है. चुनावी आंकड़ों के विश्लेषण में यह दावा किया जा रहा है कि जिन सीटों पर मतदाता सूची से सबसे ज्यादा नाम हटाये गये, वहां भाजपा को भारी फायदा मिला. मतदाता सूची में बड़े बदलाव और बदला चुनावी गणित चुनाव आयोग की ओर से चलायी गयी SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से मृत, डुप्लीकेट और कथित फर्जी मतदाताओं के नाम हटाये गये. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असर उन सीटों पर पड़ा, जहां तृणमूल कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक मजबूत माना जाता था. बताया जा रहा है कि बंगाल की 177 ऐसी विधानसभा सीटें थीं, जहां हटाये गये मतदाताओं की संख्या 2021 में टीएमसी की जीत के अंतर से अधिक थी. इन सीटों में से 140 से ज्यादा सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की. इससे यह चर्चा तेज हो गयी है कि मतदाता सूची में बदलाव ने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया. 15 हजार से ज्यादा नाम हटे, कई मंत्री हारे विश्लेषण के मुताबिक, करीब 50 सीटों पर 15 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाये गये थे. इन्हीं सीटों पर टीएमसी के कई बड़े नेताओं और मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा. भाजपा ने इन इलाकों में आक्रामक प्रचार और बूथ स्तर पर मजबूत रणनीति अपनायी, जिसका फायदा उसे चुनाव में मिला. SIR प्रक्रिया से कैसे बदला समीकरण? निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया में डिजिटल वेरिफिकेशन, आधार लिंकिंग और रिकॉर्ड मिलान के जरिए मतदाता सूची को अपडेट किया गया. इसके तहत मृत और पलायन कर चुके मतदाताओं के नाम हटाये गये. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इससे कथित फर्जी मतदान की संभावना कम हुई और चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी. दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इसे टीएमसी के चुनावी नेटवर्क पर बड़ा झटका बताया. ममता बनर्जी ने पहले ही जतायी थी आशंका चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी नेताओं ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाये थे. पार्टी का आरोप था कि उनके समर्थकों के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाये जा रहे हैं. हालांकि निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बताया था. अब चुनावी नतीजों के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गयी है. भाजपा का दावा है कि मतदाता सूची की सफाई से वास्तविक जनमत सामने आया, जबकि टीएमसी इसे अपने वोट बैंक को कमजोर करने की रणनीति बता रही है. भाजपा को मिला बड़ा फायदा राज्य में भाजपा ने 207 सीटों तक पहुंचकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIR प्रक्रिया, सत्ताविरोधी माहौल और बूथ स्तर की मजबूत रणनीति ने भाजपा को बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. फिलहाल बंगाल की राजनीति में SIR प्रक्रिया सबसे बड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है.  

surbhi मई 7, 2026 0
IPL 2026 Punjab vs Hyderabad
IPL 2026- कोनोली का शतक बेकार, पंजाब की लगातार तीसरी हार, हैदराबाद 33 रन से जीता

हैदराबाद, एजेंसियां। सनराइजर्स हैदराबाद ने पंजाब किंग्स को 33 रन से हराकर IPL 2026 पॉइंट्स टेबल में टॉप स्थान हासिल कर लिया। वहीं, पंजाब को इस सीजन में लगातार तीसरी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीम पहले स्थान से खिसककर दूसरे नंबर पर पहुंच गई। राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में पंजाब ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। इसके बाद हैदराबाद ने 20 ओवर में 3 विकेट पर 235 रन बनाए। जवाब में 236 रन के टारगेट का पीछा करते हुए पंजाब की टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर 202 रन ही बना सकी।   हैदराबाद की ओर से 2 फिफ्टी लगी पहले बैटिंग करने उतरी हैदराबाद के लिए हेनरिक क्लासन और ईशान किशन ने अर्धशतक लगाए। क्लासन ने 43 बॉल पर 69 और ईशान ने 32 बॉल पर 55 रन बनाए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 88 रन की साझेदारी हुई। क्लासन और नीतीश रेड्डी (29*) के बीच चौथे विकेट के लिए 63 रन की साझेदारी हुई। इसके अलावा अभिषेक शर्मा (35) और ट्रैविस हेड (38) ने 55 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप की। पंजाब के लिए लॉकी फर्ग्यूसन, विजयकुमार वैशाख, युजवेंद्र चहल को 1-1 विकेट मिला।   काम ना आया कोनोली का शतक पंजाब का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। टीम ने फील्डिंग के दौरान 3 कैच छोड़े, जबकि टारगेट का पीछा करते समय लगातार विकेट गंवाती रही। पंजाब के लिए कूपर कोनोली के अलावा कोई बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका। कोनोली ने 59 बॉल पर नाबाद 107 रन बनाए। उनके अलावा मार्कस स्टोयनिस ने 28 और सूर्यांश शेडगे ने 25 रन का योगदान दिया। हैदराबाद के लिए पैट कमिंस और शिवांग कुमार ने 2-2 विकेट लिए। नीतीश रेड्डी, ईशान मलिंगा और साकिब हुसैन को 1-1 विकेट मिला। पैट कमिंस प्लेयर ऑफ द् मैच चुने गये।

Unknown मई 7, 2026 0
Up government vacancy 2026
यूपी में 708 पदों पर निकली वैकेंसी, फीस मात्र 25 रुपए

लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में फॉरेस्ट गार्ड और वन्य जीव रक्षक (वाइल्ड लाइफ गार्ड) के 708 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इस भर्ती के लिए एग्जाम फीस 30 जून से 20 जुलाई 2026 तक जमा की जा सकेगी। फॉर्म में करेक्शन के लिए 27 जुलाई तक का समय दिया जाएगा। पदों का विवरण : फॉरेस्ट गार्ड : पद का नाम        पदों की संख्या सामान्य    128 अन्य पिछड़ा वर्ग    279 अनुसूचित जाति    199 अनुसूचित जनजाति    10 ईडब्ल्यूएस    31 वाइल्ड लाइफ गार्ड :   पद का नाम        पदों की संख्या सामान्य    4 अन्य पिछड़ा वर्ग    36 अनुसूचित जाति    19 अनुसूचित जनजाति    1 ईडब्ल्यूएस    1 शैक्षणिक योग्यता : 12वीं पास। पीईटी 2025 का स्कोर कार्ड होना चाहिए। शारीरिक योग्यता : जेंडर    कैटेगरी    न्यूनतम हाइट    चेस्ट (फुलाए बिना / फुलाने के बाद )    वजन पुरुष    जनरल,ओबीसी, एससी    168 सेमी    84 cm / 89 cm (min. 5 cm expansion)    – पुरुष    ST    160 सेमी    82 cm / 87 cm (min. 5 cm expansion)    – महिला    General / OBC / SC    152 सेमी    –    45 to 58 kg महिला    एसटी    147 सेमी    –    45 to 58 kg उम्र सीमाः  न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। फीस : सभी वर्ग के लिए 25 रुपए सैलरी : 19,900 - 63,200 रुपए प्रतिमाह परीक्षा प्रणाली : परीक्षा की अवधि : ढाई घंटे टोटल मार्क्स : 200 टोटल क्वेश्चन : 200 पार्ट    सब्जेक्ट    क्वेश्चन नंबर    टोटल मार्क्स पार्ट - 1    सब्जेक्ट रिलेटेड नॉलेज (फॉरेस्ट एंड एनवायरमेंट) 50    50 पार्ट - 2     एलिमेंट्री मैथमेटिक्स एंड बायोलॉजी 15    15 पार्ट - 3    नॉलेज ऑफ कंप्यूटर एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड कंटेम्परेरी टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट एंड इन्नोवेशन 15    15 पार्ट - 4    जनरल इंफॉर्मेशन रिलेटेड टू द स्टेट ऑफ उत्तरप्रदेश 20    20 टोटल        100    100

Unknown अप्रैल 25, 2026 0
Jharkhand Eligibility Test
Jharkhand Eligibility Test: जेट की परीक्षा 29 मार्च को, मई में रिजल्ट

रांची। झारखंड के युवाओं के लिए बड़ी खबर है। असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए जेट परीक्षा की तिथि तय हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में राज्य के विश्वविद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया नहीं होने और जेट की परीक्षा लंबित रखने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी जेट-2024 की परीक्षा 29 मार्च को होगी। परीक्षा की तैयारी पूरी कर ली गई है और परीक्षा का परिणाम मई के दूसरे सप्ताह में जारी कर दिए जाने की संभावना है। जेपीएससी के सचिव ने इस संबंध में कोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई नौ अप्रैल को निर्धारित करते हुए सरकार को प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने परीक्षा तिथि को लेकर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने जेपीएससी सचिव को शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि जेट 2024 की अंतिम परीक्षा तिथि क्या है और इसके आयोजन को लेकर अब तक क्या-क्या ठोस तैयारियां की गई हैं। सुनवाई के दौरान जेपीएससी के अपर सचिव की ओर से मार्च माह में संभावित परीक्षा होने की बात कही गई थी, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया था और इसे टालमटोल का संकेत माना था। 1,75,000 अभ्यर्थियों ने किया आवेदन कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि जब इस परीक्षा के लिए 1,75,000 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है और दिसंबर 2025 में आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है, तो ढाई महीने बीत जाने के बाद भी परीक्षा क्यों नहीं कराई गई। अदालत ने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों से जेट आयोजित नहीं हुई है, जिससे प्रतीत होता है कि आयोग इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है। यह मामला असिस्टेंट प्रोफेसर एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उठा। जेपीएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि जेट 2024 आयोजित की जा रही है और इसका परिणाम शीघ्र जारी किया जाएगा। इसके बाद विश्वविद्यालय शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। आयोग ने यह भी कहा कि जेट के सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर देने के लिए ही अब तक विश्वविद्यालयों में नियुक्ति विज्ञापन जारी नहीं किया गया है। प्रार्थी अनिकेत ओहदार एवं अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि रांची विश्वविद्यालय में लंबे समय से असिस्टेंट प्रोफेसरों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति नहीं की गई है। आरोप है कि संविदा के आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं, जो नियमों के विरुद्ध है। प्रार्थियों ने संविदा नियुक्तियों के बजाय नियमित बहाली की मांग की है।

Unknown मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 8, 2026 0