India Pakistan Relations

Pakistan hints at inviting India for the SCO Summit 2027 in Islamabad amid speculation over PM Modi's participation.
SCO समिट 2027: क्या पाकिस्तान जाएंगे PM मोदी? इस्लामाबाद ने भारत को न्योता देने के दिए संकेत

SCO Summit 2027: साल 2027 में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस बीच पाकिस्तान ने संकेत दिए हैं कि वह सम्मेलन के लिए भारत समेत सभी सदस्य देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजेगा। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन में शामिल होंगे या नहीं, इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान ने क्या कहा? पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि मेजबान देश होने के नाते पाकिस्तान का दायित्व है कि वह SCO के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को सम्मेलन के लिए आमंत्रित करे। उन्होंने कहा कि यह संगठन की निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का हिस्सा है, इसलिए भारत भी आमंत्रित देशों में शामिल होगा। जयशंकर-पाक विदेश मंत्री की मुलाकात पर क्या बोले? मनीला में आसियान (ASEAN) बैठकों के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री के बीच संभावित मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान को भारत की ओर से ऐसी किसी बैठक की जानकारी नहीं मिली है। पाकिस्तान करेगा मेजबानी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 2027 शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। यह संगठन सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर वर्ष शीर्ष स्तर की बैठक आयोजित करता है। SCO में कौन-कौन से देश हैं शामिल? SCO के प्रमुख सदस्य देशों में शामिल हैं— भारत पाकिस्तान चीन रूस कजाकिस्तान किर्गिस्तान ताजिकिस्तान उज्बेकिस्तान ईरान बेलारूस 2001 में हुई थी संगठन की स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना 15 जून 2001 को चीन की राजधानी बीजिंग में हुई थी। संगठन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक सहयोग और आपसी विकास को बढ़ावा देना है। SCO की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट (CHS) है, जिसकी अध्यक्षता हर वर्ष सदस्य देशों के बीच बदलती रहती है। जिस देश के पास अध्यक्षता होती है, वही उस वर्ष शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी करता है। अभी भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं हालांकि पाकिस्तान ने भारत को आमंत्रित करने के संकेत दिए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मेलन में शामिल होने या भारतीय प्रतिनिधिमंडल के स्तर को लेकर भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में पीएम मोदी की संभावित पाकिस्तान यात्रा को लेकर स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
SCO summit backdrop with the flags of India and Pakistan ahead of the 2027 Islamabad meeting
SCO Summit 2027: क्या पाकिस्तान जाएंगे PM मोदी? इस्लामाबाद सम्मेलन को लेकर पाकिस्तान ने दिया बड़ा संकेत

SCO Summit 2027: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वर्ष 2027 में प्रस्तावित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि वह सम्मेलन के लिए भारत समेत सभी सदस्य देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजेगा। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में शामिल होंगे या नहीं, इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान ने क्या कहा? पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि SCO के नियमों और प्रोटोकॉल के अनुसार मेजबान देश होने के नाते पाकिस्तान सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को सम्मेलन में आमंत्रित करेगा। इसमें भारत भी शामिल है। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य देशों को निमंत्रण भेजना मेजबान देश की जिम्मेदारी है और पाकिस्तान इस प्रक्रिया का पालन करेगा। मोदी की यात्रा पर अभी सस्पेंस पाकिस्तान के बयान के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्लामाबाद जाने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। भारत सरकार की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रधानमंत्री सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे या भारत की ओर से किसी अन्य प्रतिनिधि को भेजा जाएगा। जयशंकर-पाक विदेश मंत्री की मुलाकात पर भी जवाब मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से आसियान (ASEAN) बैठकों के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री के बीच संभावित मुलाकात को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान को भारत की ओर से ऐसी किसी प्रस्तावित बैठक की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। 2027 में पाकिस्तान करेगा मेजबानी वर्ष 2027 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों का शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में आयोजित होना प्रस्तावित है। यह संगठन का सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक मंच माना जाता है, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है। क्या है SCO? शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना 15 जून 2001 को चीन की राजधानी बीजिंग में हुई थी। संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। वर्तमान में SCO के सदस्य देश हैं: भारत पाकिस्तान चीन रूस कजाकिस्तान किर्गिस्तान ताजिकिस्तान उज्बेकिस्तान ईरान बेलारूस SCO की काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट (CHS) संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है, जिसकी अध्यक्षता हर वर्ष अलग-अलग सदस्य देश के पास होती है। अध्यक्ष देश ही उस वर्ष राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है। भारत के फैसले पर रहेगी नजर पाकिस्तान की ओर से निमंत्रण भेजे जाने के संकेत के बाद अब निगाहें भारत सरकार के फैसले पर टिकी हैं। दोनों देशों के बीच मौजूदा द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित यात्रा को लेकर अंतिम निर्णय आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
India's Permanent Representative P. Harish addresses the UN Security Council, responding to Pakistan on terrorism and the Indus Waters Treaty.
UN में पाकिस्तान को भारत का करारा जवाब, कहा- आतंकवाद नहीं रुका तो सिंधु जल संधि बहाल नहीं होगी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद और सिंधु जल संधि के मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने स्पष्ट कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के रूप में बढ़ावा देता रहेगा, तब तक सिंधु जल संधि को बहाल करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और रहेगा। पाकिस्तान ने उठाया सिंधु जल संधि का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में "प्राकृतिक संसाधन प्रशासन: शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नींव" विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के दौरान पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने सिंधु जल संधि और जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने एकतरफा तरीके से सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है। भारत का जवाब- आतंकवाद के बीच सहयोग संभव नहीं भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सिंधु जल संधि आपसी विश्वास और सहयोग की भावना पर आधारित थी, लेकिन जब एक देश लगातार सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो ऐसे माहौल में सामान्य सहयोग संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत का इस मुद्दे पर रुख पहले भी स्पष्ट था और आज भी वही है। जम्मू-कश्मीर पर दो टूक संदेश भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। पी. हरीश ने कहा कि पाकिस्तान इस संवैधानिक और कानूनी सच्चाई को जानबूझकर नजरअंदाज करता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा वास्तविक लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया था फैसला भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। इस हमले में 24 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय कहा था कि "पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते", जिसके बाद पाकिस्तान के साथ कई द्विपक्षीय कदमों की समीक्षा की गई। UN प्रस्ताव का भी किया जिक्र भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 21 अप्रैल 1948 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि उसमें पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर से अपनी सेना हटाने, घुसपैठ रोकने और सशस्त्र समूहों को समर्थन बंद करने को कहा गया था। भारत ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबा रहा है और हाल के महीनों में कई लोगों की मौत हुई है। भारत का स्पष्ट संदेश भारत ने संयुक्त राष्ट्र में दोहराया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कदम नहीं उठाता, तब तक सामान्य संबंधों और सिंधु जल संधि जैसे सहयोगी समझौतों की बहाली संभव नहीं है। साथ ही भारत ने जम्मू-कश्मीर पर अपने पुराने और स्पष्ट रुख को फिर दोहराया।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Indus Waters Treaty
सिंधु जल संधि पर भारत के एक्शन से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता, विश्व बैंक के रुख ने बढ़ाई मुश्किलें

इस्लामाबाद, एजेंसियां। सिंधु जल संधि को लेकर भारत के हालिया कदमों के बाद पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान ने इस मामले में विश्व बैंक से हस्तक्षेप की अपील की, लेकिन विश्व बैंक ने साफ कर दिया कि उसकी भूमिका केवल संधि के तहत तय प्रक्रियाओं तक सीमित है और वह भारत या पाकिस्तान को कोई निर्देश जारी नहीं कर सकता।    विश्व बैंक ने क्या कहा?   विश्व बैंक ने दोहराया कि वह सिंधु जल संधि का पक्षकार नहीं है, बल्कि केवल एक 'फैसिलिटेटर' की भूमिका निभाता है। बैंक ने कहा कि संधि से जुड़े विवादों का समाधान दोनों देशों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही करना होगा।   भारत ने अपनाया सख्त रुख   भारत ने हाल के महीनों में सुरक्षा चिंताओं और सीमा पार आतंकवाद का हवाला देते हुए सिंधु जल संधि की समीक्षा और उसके कुछ प्रावधानों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। भारत का कहना है कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।   पाकिस्तान ने जताई चिंता   पाकिस्तान का कहना है कि भारत के फैसलों का असर उसकी कृषि और जल आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसी को लेकर उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामला उठाने की कोशिश की है और विश्व बैंक से हस्तक्षेप की मांग की।   दोनों देशों के बीच बना हुआ है गतिरोध   सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेद लगातार बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत और कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ सकती हैं।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Pakistan Army Chief General Asim Munir addresses the Corps Commanders Conference amid tensions over the Indus Waters Treaty with India.
सिंधु जल संधि पर फिर बौखलाया पाकिस्तान, सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भारत को दी चेतावनी

इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने कहा है कि देश को मिलने वाले पानी के "वैध हिस्से" की रक्षा के लिए पाकिस्तान हर आवश्यक कदम उठाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर तनाव बना हुआ है। कोर कमांडर्स सम्मेलन में लिया गया फैसला पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी बयान के अनुसार, जनरल आसिम मुनीर की अध्यक्षता में हुई 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में जल सुरक्षा समेत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में कहा गया कि सरकार के निर्देशों और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पाकिस्तान अपने हिस्से का पानी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। एनएससी के पुराने फैसले का दोहराया गया जिक्र बैठक में 24 अप्रैल 2025 को हुई राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) के फैसले का भी उल्लेख किया गया। उस बैठक में पाकिस्तान ने कहा था कि यदि उसके हिस्से का पानी रोका गया या उसका प्रवाह बदला गया, तो इसे "युद्ध जैसी कार्रवाई" माना जाएगा। हालांकि, भारत की ओर से इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था फैसला भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इन्हीं में 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय भी शामिल था। यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे को नियंत्रित करती रही है। भारत का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में सामान्य द्विपक्षीय व्यवस्थाएं प्रभावित होना स्वाभाविक है। अफगानिस्तान को लेकर भी जताई चिंता कोर कमांडर्स सम्मेलन में अफगानिस्तान की स्थिति पर भी चर्चा हुई। पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि अफगान तालिबान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों का इस्तेमाल आतंकी संगठन पाकिस्तान में हमलों के लिए कर रहे हैं और इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। क्षेत्रीय तनाव बरकरार विश्लेषकों का मानना है कि सिंधु जल संधि और सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव फिलहाल कम होने के संकेत नहीं हैं। दोनों देशों के बयानों से यह स्पष्ट है कि जल, सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में भी द्विपक्षीय संबंधों के केंद्र में बने रह सकते हैं।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Pakistan Climate Change Minister Musadik Malik speaks during a press conference amid escalating tensions with India over the Indus Waters Treaty.
'जो पानी रोकेगा, उसके हाथ काट देंगे', सिंधु जल पर पाकिस्तान की भारत को खुली धमकी

  Islamabad: सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत को धमकी भरे लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि "जो पाकिस्तान के हिस्से का पानी छीनने या रोकने की कोशिश करेगा, उसके हाथ काट दिए जाएंगे।" उनके इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे जल विवाद को और गर्मा दिया है। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी चेतावनी पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के फैसलों पर कड़ी आपत्ति जताई। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि भारत सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने की कोशिश कर रहा है। मुसादिक मलिक ने कहा कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा और किसी भी तरह के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत के फैसले के बाद बढ़ा विवाद दरअसल, 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय लिया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच जल संसाधनों को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि भारत संधि के प्रावधानों के विपरीत उसके हिस्से के पानी पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि भारत का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद को देखते हुए उसने अपने हितों के अनुरूप कदम उठाए हैं। पाकिस्तानी अखबार का दावा पाकिस्तानी अखबार Dawn के अनुसार, मुसादिक मलिक ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री के हाथ में "पानी का नल" है और वे पाकिस्तान को एक बूंद पानी भी नहीं देने की बात कर रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सिंधु जल संधि क्यों है अहम? साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार है। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के जल उपयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए हैं। हाल के वर्षों में सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा मुद्दों के कारण इस संधि को लेकर दोनों देशों के संबंधों में लगातार तनाव बना हुआ है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Ministry of External Affairs spokesperson Randhir Jaiswal responds to Pakistan's allegations following the Karachi Sindh Rangers headquarters attack
अपने गिरेबां में झांके पाकिस्तान... कराची हमले पर झूठे आरोपों का भारत ने दिया करारा जवाब

  नई दिल्ली: कराची में सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों को भारत ने सख्ती से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि बिना किसी सबूत के भारत पर आरोप लगाने के बजाय पाकिस्तान को अपनी धरती पर सक्रिय आतंकी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और भारत उन्हें स्पष्ट रूप से खारिज करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अपने भीतर झांकना चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय कदम उठाने चाहिए। क्या है पूरा मामला? शनिवार रात पाकिस्तान के कराची स्थित सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने दावा किया कि उन्होंने छह आतंकवादियों को मार गिराया, जबकि एक हमलावर को घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया गया। इस हमले में अर्द्धसैनिक बल के चार जवानों की भी मौत हुई। हमले के बाद पाकिस्तान सरकार के कुछ मंत्रियों ने बिना कोई सबूत सार्वजनिक किए भारत पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी हमले की निंदा करते हुए भारत की भूमिका का दावा किया। भारत ने दिया सख्त जवाब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपनी धरती पर मौजूद आतंकी नेटवर्क के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई करनी चाहिए, न कि हर आतंकी घटना के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करनी चाहिए। आतंकवाद पर पाकिस्तान को दी नसीहत भारत ने अपने बयान में यह भी कहा कि पाकिस्तान को "सरकार प्रायोजित आतंकवाद" पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति छोड़नी चाहिए। विदेश मंत्रालय का कहना है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए पाकिस्तान को अपने यहां मौजूद आतंकवादी ढांचे को खत्म करने की दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे। भारत ने दोहराया कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति पर कायम है और किसी भी तरह के निराधार आरोपों को स्वीकार नहीं करता।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Rising tensions over the Indus Waters Treaty spark concerns for Pakistan's economy and regional stability.
सिंधु जल समझौते पर बढ़ा तनाव, पाकिस्तान ने दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी; अर्थव्यवस्था पर गहराया संकट

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि यदि उनके देश की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ, तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर जल संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने के फैसले का असर पाकिस्तान के कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। क्या है विवाद की वजह? अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह फैसला लागू रहेगा। हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के उस बयान के बाद पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई, जिसमें संकेत दिया गया था कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के उपयोग को लेकर भारत अपनी रणनीति मजबूत कर सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर क्यों है असर? सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। देश की लगभग 80 प्रतिशत खेती इसी जल स्रोत पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र— पाकिस्तान की GDP में लगभग 23 प्रतिशत योगदान देता है। कुल कार्यबल के 40 प्रतिशत से अधिक लोगों को रोजगार देता है। ग्रामीण आबादी के बड़े हिस्से की आजीविका का आधार है। कपास और टेक्सटाइल उद्योग पर बढ़ी चिंता पाकिस्तान का टेक्सटाइल उद्योग उसकी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र है। देश के कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा इसी सेक्टर से आता है और इससे अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। कपास की खेती के लिए सिंधु नदी का पानी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो इसका असर कपास उत्पादन और उससे जुड़े पूरे टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ सकता है। बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि जल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दक्षिण एशिया में संवेदनशील विषय हैं और दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार का तनाव क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में कूटनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की भूमिका अहम मानी जाती है।  

surbhi जून 22, 2026 0
US President Donald Trump speaks as tensions rise over Iran and the strategic Strait of Hormuz during talks in Switzerland.
'होर्मुज बंद हुआ तो अपने देश नहीं लौट पाओगे', ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा अमेरिका-ईरान तनाव

  वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी सैन्य चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को बंद करने की कोशिश की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान को ट्रंप की सीधी चेतावनी फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर तुम होर्मुज बंद करने की कोशिश करोगे, तो अपने देश तक भी वापस नहीं पहुंच पाओगे।" उनके इस बयान को ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त चेतावनियों में से एक माना जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बाधित नहीं होने देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का सख्त रुख ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता विफल हो जाती है, तो वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य पर सीधे नियंत्रण स्थापित करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ी तो हम होर्मुज का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकते हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति में अमेरिका वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स या टोल लगाने का कदम उठा सकता है। जहाजों पर 20 प्रतिशत तक टोल लगाने की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान समझौते के रास्ते पर नहीं आता है, तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर उनके तेल कार्गो के मूल्य का लगभग 20 प्रतिशत तक टोल लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा कदम वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। लेबनान और हिज्बुल्लाह का भी किया जिक्र ट्रंप ने ईरान से लेबनान में सक्रिय संगठन हिज्बुल्लाह पर नियंत्रण रखने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों को बढ़ाने वाली गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए और ईरान को अपने सहयोगी समूहों की गतिविधियों को नियंत्रित करना होगा। स्विट्जरलैंड में जारी है अहम वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है। हालांकि, ट्रंप के ताजा बयान के बाद इन वार्ताओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप की चेतावनी केवल ईरान पर दबाव बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर अमेरिकी रणनीतिक पकड़ को मजबूत करने का भी संकेत है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Pakistan Defence Minister Khawaja Asif addresses the media amid rising tensions over the Indus Waters Treaty with India.
पानी को लेकर भारत को युद्ध की धमकी, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान से बढ़ा तनाव

  इस्लामाबाद/नई दिल्ली: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पानी के मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए भारत के खिलाफ युद्ध की चेतावनी दी है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के अपने फैसले में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। पानी के लिए युद्ध की चेतावनी पाकिस्तानी न्यूज चैनल ARY से बातचीत में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो देश भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, "पानी हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है। अगर हमें लगा कि भारत हमारी जल आपूर्ति को रोकने या प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, तो हम युद्ध का रास्ता भी अपना सकते हैं।" ख्वाजा आसिफ ने यह भी दावा किया कि यदि इस्लामाबाद को ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने की दिशा में कदम उठा रहा है, तो पाकिस्तान उचित जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। भारत ने सिंधु जल संधि निलंबित रखने का फैसला बरकरार रखा भारत ने वर्ष 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के अपने फैसले पर सख्त रुख कायम रखा है। नई दिल्ली का कहना है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, के बाद यह कदम उठाया गया। भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के ढांचे को खत्म करने के लिए ठोस, विश्वसनीय और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि की बहाली पर विचार नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था के लिए अहम है सिंधु जल संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को सिंधु नदी प्रणाली के लगभग 80 प्रतिशत जल के उपयोग का अधिकार प्राप्त है। यह पानी पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। कई जल विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में मौजूदा जल संकट केवल बाहरी कारणों का परिणाम नहीं है। खराब जल प्रबंधन, जल संरक्षण की कमी, पुरानी सिंचाई व्यवस्था और नीतिगत कमजोरियां भी संकट को गंभीर बनाने के लिए जिम्मेदार हैं। पाकिस्तान में गहराता जल संकट पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट, आर्थिक चुनौतियों और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई कृषि क्षेत्रों में जल संसाधनों का समुचित प्रबंधन नहीं होने के कारण पानी की उपलब्धता लगातार घट रही है। ऐसे में ख्वाजा आसिफ का बयान भारत-पाक संबंधों में नई तल्खी पैदा कर सकता है और सिंधु जल संधि को लेकर कूटनीतिक विवाद को और गहरा सकता है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Pakistan raises Indus Waters Treaty issue at international conference seeking talks with India
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की नई अपील, अंतरराष्ट्रीय मंच से भारत से समझौता बहाल करने की मांग

पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत से सिंधु जल संधि बहाल करने की अपील की है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन में पाकिस्तान ने कहा कि इस संधि को रोकना दुनिया के कई देशों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की गुहार सम्मेलन में पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री Musadik Malik ने भारत पर साझा जल संसाधनों को राजनीति से जोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सीमा पार नदियों पर एकतरफा फैसले कई देशों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकते हैं। पाकिस्तान ने भारत से सिंधु जल संधि का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की अपील की। पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था बड़ा फैसला भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए थे। इन्हीं में सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला भी शामिल था। भारत का कहना था कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। इसके बाद से दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर तनाव बना हुआ है। क्या है सिंधु जल संधि? Indus Waters Treaty भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई थी। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुए इस समझौते के तहत सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर नियम तय किए गए थे। यह संधि लंबे समय तक दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे का आधार रही है।   पाकिस्तान ने क्या चेतावनी दी? पाकिस्तान ने कहा कि अगर उसके हिस्से का पानी रोका गया तो इसे गंभीर कदम माना जाएगा। पाकिस्तान का दावा है कि उसकी खेती और पानी की जरूरतें काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर हैं। जल संकट और बढ़ती चिंता सम्मेलन में पाकिस्तान ने जलवायु परिवर्तन का मुद्दा भी उठाया। पाकिस्तान का कहना है कि वह उन देशों में शामिल है जो ग्लोबल वार्मिंग और पानी की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है और आने वाले समय में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और चर्चा में रह सकता है।  

surbhi मई 27, 2026 0
India addresses UN Security Council and criticizes Pakistan over cross-border terrorism
UN में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, आतंकवाद पर सुनाई खरी-खरी

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक बार फिर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरा है। भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान को यह समझना होगा कि सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के परिणाम भुगतने पड़ते हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि Harish Parvathaneni ने पाकिस्तान की टिप्पणियों को निराधार और अनुचित बताया। भारत ने कहा- आतंक से बचाव का पूरा अधिकार सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने कहा कि देश को सीमा पार आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद का इस्तेमाल भारत को कमजोर करने के लिए करता आया है। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना के खिलाफ है। पाकिस्तान ने उठाया कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा बैठक के दौरान पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री Ishaq Dar ने जम्मू-कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन के पुराने रिकॉर्ड को सामने रखा। भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का भी जिक्र किया, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी। भारत ने TRF और लश्कर का लिया नाम भारत ने कहा कि पहलगाम हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन TRF ने ली थी। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से आतंकवादी संगठनों को समर्थन देना क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा है। सुरक्षा परिषद की बैठक में चीन भी मौजूद यह बैठक संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने के मुद्दे पर आयोजित की गई थी। मई महीने के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहे Wang Yi ने बैठक की अध्यक्षता की। भारत ने पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड की याद दिलाई भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने कई बार भारत के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाया है और लगातार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन दिया है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि स्वतंत्र भारत की शुरुआत ही पाकिस्तान की आक्रामकता का सामना करते हुए हुई थी। दुनिया के सामने पाकिस्तान को किया बेनकाब भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि पाकिस्तान की आतंकवाद पर दोहरी नीति अब दुनिया से छिपी नहीं है। भारतीय पक्ष ने साफ कहा कि शांति और स्थिरता की बात करने वाला पाकिस्तान खुद आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है और उसे अब अपनी नीतियों की जिम्मेदारी लेनी होगी।  

surbhi मई 27, 2026 0
Pakistan Foreign Ministry reacts to RSS leaders’ remarks on India-Pakistan dialogue and relations
RSS नेता के ‘पाकिस्तान से संवाद’ वाले बयान पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया, विदेश मंत्रालय ने बताया ‘सकारात्मक’

भारत और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर हाल में आई कुछ अहम टिप्पणियों ने दोनों देशों के बीच संवाद की संभावनाओं पर नई बहस छेड़ दी है। Rashtriya Swayamsevak Sangh के महासचिव Dattatreya Hosabale और पूर्व सेना प्रमुख Manoj Naravane के बयानों पर पाकिस्तान ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ‘संवाद के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं होने चाहिए’ RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख जारी रहना चाहिए। उनके बयान के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने भी लोगों के बीच संपर्क बनाए रखने की वकालत की। उन्होंने कहा, “सीमा के दोनों ओर आम लोग रहते हैं और उनकी रोजमर्रा की समस्याएं काफी हद तक समान हैं। लोगों के बीच संपर्क बेहतर संबंध बनाने में मदद कर सकते हैं।” पाकिस्तान ने क्या कहा? इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए Ministry of Foreign Affairs के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इन्हें “सकारात्मक संकेत” बताया। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारत में समझदारी की आवाजें और मजबूत होंगी। पिछले कई वर्षों से जो आक्रामक बयानबाजी और तनाव देखने को मिला है, वह खत्म होना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान संवाद को एक विकल्प के रूप में स्वीकार किए जाने का स्वागत करता है। बैकचैनल बातचीत पर टिप्पणी से इनकार ताहिर अंद्राबी ने बैकचैनल या अनौपचारिक संपर्कों को लेकर चल रही अटकलों पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “अगर मैं बैकचैनल पर टिप्पणी करूंगा, तो वह बैकचैनल नहीं रहेगा। इस विषय पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता।” पाकिस्तान में RSS को कैसे देखा जाता है? पाकिस्तान में RSS को आमतौर पर एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन के रूप में देखा जाता है, जिसका भारत की मौजूदा सत्तारूढ़ व्यवस्था से करीबी संबंध माना जाता है। ऐसे में RSS नेतृत्व की ओर से संवाद पर दिया गया बयान पाकिस्तान में विशेष रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। क्या बदल सकते हैं भारत-पाक संबंध? विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच फिलहाल कई संवेदनशील मुद्दे मौजूद हैं, जिनमें आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और राजनीतिक तनाव शामिल हैं। हालांकि, संवाद और लोगों के बीच संपर्क को लेकर आई हालिया टिप्पणियां भविष्य में कूटनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। भारत सरकार की ओर से इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Pakistan foreign office reacts to former Indian Army chief’s remarks on India-Pakistan dialogue and peace talks.
पूर्व सेना प्रमुख नरवणे के बयान पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया, बोला- भारत में संवाद की आवाजें सकारात्मक

Pakistan ने भारत में पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत करने वाली आवाजों का स्वागत किया है। पाकिस्तान ने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति, सुरक्षा और साझा समृद्धि के लिए संवाद और रचनात्मक सहयोग जरूरी हैं। यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब भारत के पूर्व सेना प्रमुख Manoj Naravane ने Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के नेता दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान का समर्थन किया था, जिसमें पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रखने की बात कही गई थी। पाकिस्तान ने क्या कहा? पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता Tahir Andrabi ने कहा कि भारत के भीतर संवाद पर जोर देने वाली आवाजें “सकारात्मक घटनाक्रम” हैं। उन्होंने कहा, “हम आशा करते हैं कि भारत में समझदारी बढ़ेगी। अब यह देखना होगा कि इन आवाजों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।” हालांकि, उन्होंने दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे किसी तरह की बातचीत की पुष्टि या खंडन करने से इनकार कर दिया। ‘गोपनीय बातचीत पर टिप्पणी नहीं’ ताहिर अंद्राबी ने कहा कि अगर किसी बैकचैनल या गोपनीय बातचीत पर सार्वजनिक टिप्पणी की जाए, तो उसका उद्देश्य ही खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कूटनीति, संप्रभुता के सम्मान और सार्थक अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है। भारत का रुख अब भी सख्त भारत सरकार पहले कई बार साफ कर चुकी है कि “आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।” केंद्र सरकार का कहना रहा है कि सीमा पार आतंकवाद खत्म होने के बाद ही संबंधों में सामान्य स्थिति संभव है। LOC और क्षेत्रीय हालात पर भी बयान पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तानी सैनिक हर स्थिति के लिए सतर्क हैं और किसी भी युद्धविराम उल्लंघन का जवाब देने के लिए तैयार रहते हैं। अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी बोला पाकिस्तान अंद्राबी ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति प्रयासों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस प्रक्रिया में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है और दोनों पक्षों के बीच स्थायी शांति की उम्मीद रखता है। फिर उठा कश्मीर मुद्दा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दा उठाया। प्रवक्ता ने भारतीय प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए और कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहेगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान एक तरफ बातचीत की बात कर रहा है, लेकिन दूसरी तरफ कश्मीर को केंद्र में रखकर अपने पुराने रुख पर कायम है। ऐसे में दोनों देशों के रिश्तों में तत्काल नरमी की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Pakistan raises remarks on Muslims, Urdu and Kashmir, sparking political row in India
भारत पर पाकिस्तान की टिप्पणी से सियासी तकरार तेज, मुस्लिम-उर्दू और कश्मीर पर उठाए सवाल

पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के आंतरिक मुद्दों पर टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भारत में मुस्लिम समुदाय, उर्दू भाषा और कश्मीर को लेकर कई आरोप लगाए। जामिया कार्यक्रम को लेकर आपत्ति अंद्राबी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े कार्यक्रम को लेकर आपत्ति जताई, जो जामिया मिलिया इस्लामिया में आयोजित होने वाला था। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी विचारधारा का “प्रचार” चिंता का विषय है और इससे संस्थानों की मूल पहचान प्रभावित हो सकती है। मुस्लिम पहचान पर चिंता जताई पाकिस्तानी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत में मुस्लिम समुदाय की पहचान और उनकी भाषा पर दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की और कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। ‘हेट स्पीच’ पर भी उठाए सवाल अंद्राबी ने भारतीय नेताओं के कथित बयानों को “हेट स्पीच” करार दिया और कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं और इन पर रोक लगनी चाहिए। कश्मीर और उर्दू पर आरोप जम्मू और कश्मीर को लेकर भी पाकिस्तान ने आरोप दोहराए। अंद्राबी के मुताबिक, वहां “जनसांख्यिकीय बदलाव” किए जा रहे हैं और उर्दू भाषा तथा मुस्लिम संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर उठाने की बात कही। भारत के आंतरिक मामलों में दखल पर सवाल भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू और कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकते हैं। पाकिस्तान की स्थिति पर भी उठते सवाल विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान में खुद अल्पसंख्यक समुदायों–जैसे हिंदू, ईसाई, शिया और अहमदिया–की स्थिति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में भारत के आंतरिक मुद्दों पर उसकी टिप्पणी को लेकर भी बहस छिड़ जाती है।  

surbhi मई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0