मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस के उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए लोगों को पैसे दिए गए थे। आयोजकों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी मांगने और आरोप वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं को भेजा पत्र कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर कहा कि 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया गया था। पत्र में कहा गया कि सिडनी से चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था सामुदायिक सहयोग से की गई थी और इसका खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया और न ही किसी सरकारी एजेंसी ने। क्या था कांग्रेस का आरोप? कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं, जिनमें पवन खेड़ा भी शामिल थे, ने आरोप लगाया था कि यह एक "मैनेज्ड इवेंट" था। उनका दावा था कि लोगों को पैसे देकर कार्यक्रम में बुलाया गया और उनके लिए विशेष चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था की गई। कांग्रेस नेताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया था। आयोजकों ने आरोपों को बताया निराधार कार्यक्रम के आयोजकों में शामिल अमित करंथ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के आरोप पूरी तरह निराधार और निराशाजनक हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोग अपनी इच्छा से पहुंचे थे और किसी को भी पैसे देकर नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों ने अपने यात्रा, रहने और अन्य खर्च स्वयं वहन किए। कुछ लोगों की यात्रा व्यवस्था स्थानीय भारतीय समुदाय के स्वयंसेवकों और सामुदायिक सहयोग से हुई थी। 30 हजार लोगों ने लिया था हिस्सा आयोजकों के अनुसार, 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में करीब 30 हजार लोग शामिल हुए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन ने भी लोगों को संबोधित किया। आयोजकों ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते संबंधों तथा ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के योगदान का उत्सव था। माफी की मांग आयोजकों ने अपने पत्र में कांग्रेस नेताओं से मांग की है कि वे भीड़ को "पैसे देकर जुटाई गई" बताने वाले आरोप वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उनका कहना है कि इस तरह के आरोपों से कार्यक्रम में शामिल हजारों भारतीय मूल के लोगों और स्वयंसेवकों का अपमान हुआ है।
मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय के भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पूरी दुनिया को भारत की रक्षा क्षमता और आतंकवाद के खिलाफ उसकी जीरो-टॉलरेंस नीति का संदेश दिया है। कार्यक्रम के दौरान भारतीय समुदाय में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और पूरा सभागार "मोदी-मोदी" के नारों से गूंज उठा। ऑपरेशन सिंदूर का दुनिया में गया मजबूत संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतता। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकियों के ठिकानों पर की गई कार्रवाई की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी और इससे स्पष्ट संदेश गया कि भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भारत की जीरो-टॉलरेंस नीति केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश ने इसे अपने कार्यों से भी साबित किया है। "हम भारतीय दूध में चीनी की तरह हैं" प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां प्रेम, सहयोग और अपनी संस्कृति की मिठास फैलाते हैं। उन्होंने कहा, "हम भारतीय दूध में चीनी की तरह हैं। हम जहां भी जाते हैं, वहां अच्छाई और अपनापन लेकर जाते हैं।" उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों के घरों में दूध भले ऑस्ट्रेलिया का हो, लेकिन चाय भारतीय ही होती है। उनके इतना कहते ही सभागार "मोदी-मोदी" के नारों से गूंज उठा। 'भजन क्लबिंग' का किया जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय हो रहे 'भजन क्लबिंग' ट्रेंड का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी आधुनिक तरीके से आध्यात्म और संस्कृति को अपना रही है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीयों की भी सराहना करते हुए कहा कि यहां भी सप्ताहांत धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से भरे रहते हैं। उन्होंने कहा कि सत्यनारायण कथा, गुरुद्वारों में अरदास, बच्चों का भांगड़ा और भरतनाट्यम सीखना तथा भारतीय फिल्म महोत्सव जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए हुए हैं। शिक्षा और नवाचार में बढ़ रहा सहयोग प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि हजारों भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं अब ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भी भारत में अपने कैंपस शुरू कर रहे हैं। उन्होंने डीकिन और वोलोंगोंग विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई अन्य संस्थान भी भारत आने की तैयारी में हैं। भारत-ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती दोनों देशों के लिए फायदेमंद कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से अभिवादन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के हित में है। उन्होंने व्यापार समझौते, तकनीक, रक्षा, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को दोनों देशों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। स्टार्टअप और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की नई उड़ान प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने बताया कि अब पहली बार एक भारतीय निजी स्पेस स्टार्टअप अपने स्वयं के रॉकेट से उपग्रह लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि नवाचार, कौशल विकास और तकनीक के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। दुनिया के संकट में सबसे पहले मदद के लिए खड़ा होता है भारत प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत जब भी किसी देश की मदद करता है तो वह किसी का पासपोर्ट, धर्म या रंग नहीं देखता, बल्कि इंसानियत को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में वेनेजुएला में आए भूकंप सहित तुर्किये, सीरिया, म्यांमार और श्रीलंका जैसे देशों में भारत ने तेजी से राहत और बचाव सहायता पहुंचाकर पूरी दुनिया का भरोसा जीता है। उन्होंने कहा कि भारत जितना मजबूत होगा, उतना ही पूरी मानवता को उसका लाभ मिलेगा।
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के तहत ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न पहुंच गए हैं, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने एयरपोर्ट पर उनका अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। वार्षिक शिखर सम्मेलन में होंगे अहम मुद्दों पर मंथन मेलबर्न में प्रधानमंत्री मोदी भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, निवेश, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देशों के बीच कई नए समझौतों और सहयोगी परियोजनाओं पर भी सहमति बनने की संभावना है। 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम रहेगा खास आकर्षण दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय समुदाय के लिए आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए भारत की वैश्विक भूमिका, भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी और दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों पर अपने विचार साझा करेंगे। चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है— शिक्षा और कौशल विकास कृषि एवं खाद्य सुरक्षा पर्यटन ग्रीन एनर्जी और सप्लाई चेन इन क्षेत्रों में संयुक्त निवेश और नई परियोजनाओं के जरिए दोनों देश आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलेगी। स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल तकनीक और स्टार्टअप सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी नई पहल की उम्मीद है। रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत भारत और ऑस्ट्रेलिया पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से करीब आए हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और आपसी रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर भी दोनों देशों के नेताओं के बीच विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी नई दिशा विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊर्जा देगा। व्यापार, निवेश, शिक्षा, ग्रीन एनर्जी और रक्षा सहयोग में बढ़ती साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली के 54वें जन्मदिन के मौके पर निर्माताओं ने उनकी बहुप्रतीक्षित बायोपिक 'दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी' का पहला पोस्टर जारी कर दिया। पोस्टर में राजकुमार राव सौरव गांगुली के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स बालकनी सेलिब्रेशन वाले अंदाज में नजर आ रहे हैं, जहां उन्होंने 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी जीत के बाद अपनी टी-शर्ट लहराई थी। साथ ही फिल्म की रिलीज डेट 14 मई 2027 घोषित की गई है। आइकॉनिक लुक ने बढ़ाया उत्साह पोस्टर में राजकुमार राव का लुक सौरव गांगुली से काफी मिलता-जुलता दिखाई दे रहा है। फिल्म का टैगलाइन "He Didn't Just Play The Game, He Changed It" भी जारी किया गया है, जिसे फैंस सोशल मीडिया पर खूब पसंद कर रहे हैं। क्रिकेट के 'दादा' की प्रेरणादायक कहानी फिल्म में सौरव गांगुली के भारतीय क्रिकेट में योगदान, कप्तानी, टीम इंडिया को नई पहचान दिलाने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की आक्रामक छवि स्थापित करने की कहानी दिखाई जाएगी। फिल्म का निर्देशन Vikramaditya Motwane कर रहे हैं, जबकि मुख्य भूमिका में Rajkummar Rao नजर आएंगे। फैंस में जबरदस्त उत्साह फर्स्ट लुक सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने राजकुमार राव की जमकर तारीफ की। कई यूजर्स ने इसे साल 2027 की सबसे बहुप्रतीक्षित स्पोर्ट्स बायोपिक बताया और फिल्म की रिलीज का बेसब्री से इंतजार शुरू कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित एक भव्य सामुदायिक कार्यक्रम में भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को खास अंदाज में पेश करते हुए बॉलीवुड फिल्म 'कुछ कुछ होता है' का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया में यह फिल्म बेहद लोकप्रिय है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "मैंने राष्ट्रपति प्रबोवो से भी कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो सिर्फ 'कुछ कुछ' नहीं, बल्कि 'बहुत कुछ' होता है।" उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने पर जताया आभार प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किए जाने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय का सम्मान है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच मजबूत मित्रता, विश्वास और लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों का प्रतीक है। राष्ट्रपति प्रबोवो के बयान का किया जिक्र पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "उनमें भारत का DNA है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि यह डीएनए किसी प्रयोगशाला का नहीं, बल्कि दोनों देशों की साझा संस्कृति, सभ्यता, परंपरा और आपसी विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो के इस बयान ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया। भारत और इंडोनेशिया सिर्फ दोस्त नहीं, पड़ोसी भी प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से ही नहीं, बल्कि भौगोलिक रूप से भी बेहद करीब हैं। उन्होंने बताया कि भारत के ग्रेट निकोबार द्वीप और इंडोनेशिया के आचेह प्रांत के बीच केवल 150 किलोमीटर की दूरी है, जो दोनों देशों की निकटता को दर्शाती है। भारत की विकास यात्रा का भी किया जिक्र अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की तेज आर्थिक प्रगति और बुनियादी ढांचे के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में देश में शुरू हुई नई रिफाइनरी में इतना स्टील इस्तेमाल हुआ है कि उससे 40 एफिल टावर या 5 बुर्ज खलीफा बनाए जा सकते हैं। वहीं, इसमें लगी केबल की लंबाई इतनी है कि उससे पूरी पृथ्वी को दो बार लपेटा जा सकता है। पीएम ने कहा कि आज भारत रिफाइनिंग क्षमता के मामले में दुनिया के शीर्ष चार देशों में शामिल है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी दी जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत मात्र 20 रुपये सालाना में 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे करीब 60 करोड़ लोग जुड़े हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि रोजाना करीब डेढ़ रुपये के प्रीमियम पर जीवन बीमा की सुविधा मिल रही है, जो एक कप कॉफी की कीमत से भी कम है। भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगी नई मजबूती प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों की साझेदारी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को नई गति मिलेगी।
जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सोमवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गए। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने हवाई अड्डे पर स्वयं मौजूद रहकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री के विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने सुरक्षा घेरे में लेकर एयर एस्कॉर्ट भी प्रदान किया। यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने किया व्यक्तिगत स्वागत जकार्ता एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया। इस दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनसे मुलाकात की और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया। पीएम मोदी ने जताया आभार इंडोनेशिया पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि जकार्ता पहुंचकर उन्हें बेहद खुशी हुई और एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत से वह प्रभावित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक पहुंचाया था, जिसका लाभ दोनों देशों के नागरिकों को मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से— व्यापार एवं निवेश रक्षा सहयोग समुद्री सुरक्षा डिजिटल अर्थव्यवस्था ऊर्जा सहयोग शिक्षा एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दे शामिल हैं। प्रम्बानन मंदिर परिसर का करेंगे दौरा प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। इस दौरान दोनों नेता भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी जोर देंगे। भारतीय समुदाय से भी करेंगे मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि वह प्रवासी भारतीयों से मिलने को लेकर उत्साहित हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम का लिया आनंद हवाई अड्डे पर स्वागत समारोह के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की पारंपरिक कला और संस्कृति पर आधारित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आनंद लिया। कार्यक्रम के माध्यम से दोनों देशों के सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को प्रदर्शित किया गया। 6 से 8 जुलाई तक रहेगा दौरा प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2018 में उनकी पहली इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाया था और अब उसी साझेदारी को आगे बढ़ाने का यह महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह यात्रा जनवरी 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति प्रबोवो की भारत यात्रा के बाद दोनों नेताओं की पहली द्विपक्षीय मुलाकात है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 से 10 जुलाई 2026 तक ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। ऑस्ट्रेलिया के भारत स्थित हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को नई मजबूती देगा। तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया जाएंगे पीएम मोदी एएनआई के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान मेलबर्न में भारतीय समुदाय के विशेष कार्यक्रम 'मेलबर्न मीट्स मोदी' में भी शामिल होंगे। फिलिप ग्रीन ने बताया कि प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा होगा। चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस फिलिप ग्रीन ने बताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है— शिक्षा कृषि एवं खाद्य क्षेत्र पर्यटन ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन उन्होंने कहा कि दोनों देश इन क्षेत्रों में निवेश, तकनीकी सहयोग और व्यापार को बढ़ाने के लिए नए रोडमैप पर काम कर रहे हैं। व्यापारिक संबंधों में तेज़ी हाई कमिश्नर के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत के कुल वैश्विक निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात करीब 200 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से मजबूत सहयोग है। कोयला, डीजल, एविएशन फ्यूल और एलएनजी जैसे ऊर्जा संसाधनों के व्यापार के अलावा अब स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन सप्लाई चेन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। रक्षा सहयोग को मिलेगी नई दिशा फिलिप ग्रीन ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने का अवसर होगा। व्यापक साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा ऑस्ट्रेलियाई हाई कमिश्नर ने विश्वास जताया कि यह दौरा केवल रक्षा और सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और लोगों के बीच संपर्क को भी नई दिशा देगा। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। पेप्सिको की सबसे बड़ी फ्रेंचाइज़ी कंपनियों में शामिल वरुण बेवरेजेज लिमिटेड ने पूर्वी अफ्रीका में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई VBL Industries (Kenya) Limited ने देवयानी फूड इंडस्ट्रीज़ (केन्या) के वैल्यू-ऐडेड डेयरी बेवरेज, जूस और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर कारोबार का 32 मिलियन डॉलर (करीब ₹305 करोड़) में अधिग्रहण करने का ऐलान किया है। यह सौदा 1 अगस्त 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। पूर्वी अफ्रीका में बढ़ेगी कंपनी की पकड़ कंपनी के अनुसार, इस अधिग्रहण से केन्या और पूरे पूर्वी अफ्रीकी क्षेत्र में उसकी उत्पादन क्षमता और वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। अधिग्रहित कारोबार में 52 एकड़ में फैली आधुनिक विनिर्माण इकाई भी शामिल है, जहां डेयरी पेय, जूस और पैकेज्ड पानी का उत्पादन होता है। कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का भी होगा विस्तार वरुण बेवरेजेज ने कहा कि इस अधिग्रहण के बाद कंपनी केन्या में अपने कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक पोर्टफोलियो का भी विस्तार करेगी। इससे अफ्रीकी बाजार में कंपनी की दीर्घकालिक विकास रणनीति को नई गति मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिवसीय सेशेल्स दौरे के दौरान राजधानी विक्टोरिया स्थित अरुल मिहू नवशक्ति विनयगर मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान गणेश के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान का वीडियो सामने आया है, जिसमें प्रधानमंत्री पूरे श्रद्धाभाव के साथ मंदिर में पूजा करते नजर आ रहे हैं। यह मंदिर सेशेल्स का एकमात्र तमिल हिंदू मंदिर माना जाता है और भारतीय समुदाय की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा ने भारत और सेशेल्स के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी नई मजबूती दी है। पूरे विधि-विधान से की गणपति की पूजा डीडी न्यूज द्वारा साझा किए गए वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर में प्रवेश करते ही भगवान गणेश के समक्ष नतमस्तक होते दिखाई देते हैं। उनके हाथ में पूजा सामग्री से भरी टोकरी भी नजर आती है। मंदिर के पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रधानमंत्री से पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार पूजा करवाई। पूजा के बाद आरती की गई, जिसे प्रधानमंत्री ने श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया और भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर आशीर्वाद लिया। सेशेल्स का प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थल राजधानी विक्टोरिया में स्थित अरुल मिहू नवशक्ति विनयगर मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है। अपनी आकर्षक द्रविड़ शैली की वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण यह मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ भारतीय मूल के समुदाय के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर सेशेल्स में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जीवंत पहचान माना जाता है। भारत-सेशेल्स के सांस्कृतिक रिश्तों का प्रतीक प्रधानमंत्री मोदी की मंदिर यात्रा को भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रही यह यात्रा केवल रणनीतिक और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित करती है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल मंदिर में पूजा-अर्चना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी पूरे श्रद्धाभाव के साथ पूजा करते और भगवान गणेश का आशीर्वाद लेते दिखाई दे रहे हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
नई दिल्ली: एक ओर क्रिकेट में भारतीय टीम को हालिया मुकाबलों में निराशा मिली, वहीं दूसरी ओर भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एफआईएच प्रो लीग के अपने आखिरी मैच में इंग्लैंड को रोमांचक पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर जीत के साथ अभियान का समापन किया। निर्धारित 60 मिनट तक दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला 0-0 से बराबरी पर समाप्त हुआ। इसके बाद शूटआउट में भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन संयम दिखाते हुए जीत अपने नाम कर ली। गोलकीपरों और डिफेंस ने बचाई टीम मैच की शुरुआत से ही इंग्लैंड ने आक्रामक खेल दिखाया और शुरुआती मिनटों में पेनल्टी कॉर्नर भी हासिल किया। हालांकि भारतीय गोलकीपर मोहित शशिकुमार ने शानदार बचाव करते हुए मेजबान टीम को बढ़त लेने से रोक दिया। पहले क्वार्टर में भारत को भी गोल करने का मौका मिला, लेकिन अभिषेक उसे भुना नहीं सके। पहले 15 मिनट का खेल गोलरहित रहा। हाफ टाइम तक दोनों टीमें बराबरी पर दूसरे क्वार्टर में इंग्लैंड लगातार भारतीय सर्कल में दबाव बनाता रहा, लेकिन भारतीय डिफेंस मजबूती से खड़ा रहा। दूसरी ओर भारत ने भी जवाबी हमले किए। जरमनप्रीत सिंह का दमदार प्रयास इंग्लैंड के गोलकीपर ने शानदार बचाव के साथ रोक दिया। हाफ टाइम तक दोनों टीमों का स्कोर 0-0 रहा। तीसरे क्वार्टर में बढ़ा रोमांच तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने ज्यादा आक्रामक रुख अपनाया। कप्तान हार्दिक सिंह ने शानदार मूव बनाते हुए मंदीप सिंह के लिए मौका तैयार किया, लेकिन गोल नहीं हो सका। इसके बाद भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन टीम बढ़त हासिल नहीं कर पाई। इसी दौरान इंग्लैंड को पेनल्टी स्ट्रोक मिला, लेकिन भारत ने वीडियो रेफरल लिया। रिप्ले में भारतीय खिलाड़ी का टैकल सही पाया गया, जिसके बाद अंपायर ने अपना फैसला बदल दिया। यह मैच का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। अंतिम क्वार्टर में भी नहीं टूटा गतिरोध आखिरी क्वार्टर में दोनों टीमों ने लगातार हमले किए, लेकिन दोनों गोलकीपरों और डिफेंस ने शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा ने भी कई महत्वपूर्ण बचाव किए। भारत और इंग्लैंड दोनों को पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। शूटआउट में भारत ने मारी बाजी निर्धारित समय के बाद मुकाबला शूटआउट में पहुंचा, जहां भारत ने 3-2 से जीत दर्ज की। भारत की ओर से शूटआउट में गोल करने वाले खिलाड़ी रहे— अभिषेक शिलानंद लाकड़ा हार्दिक सिंह भारतीय डिफेंस के अहम खिलाड़ी संजय को पूरे मैच में शानदार प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। विश्व कप से पहले बढ़ा आत्मविश्वास एफआईएच प्रो लीग का यह मुकाबला आगामी हॉकी विश्व कप से पहले भारतीय टीम का आखिरी मैच था। इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ दबाव में हासिल की गई यह जीत टीम के आत्मविश्वास को निश्चित रूप से मजबूती देगी।
पेरिस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (18 जून) को फ्रांस की राजधानी पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत तेजी से दुनिया का एक भरोसेमंद और मजबूत साझेदार बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश ऐसे क्षेत्रों में निवेश कर रहा है, जो भविष्य में विकास, नवाचार (Innovation) और नई संभावनाओं को आगे बढ़ाएंगे। पेरिस के प्रतिष्ठित सभागार ‘साल प्लेएल’ (Salle Pleyel) में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की विकास यात्रा इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है और देश की आकांक्षाएं नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। ‘रिश्तों में अब व्यापार के साथ भरोसा भी जरूरी’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले देशों के संबंध मुख्य रूप से व्यापार पर आधारित होते थे, लेकिन बदलते वैश्विक परिदृश्य में भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा, “आज दुनिया ऐसे साझेदारों की तलाश कर रही है, जिन पर भरोसा किया जा सके और भारत एक विश्वसनीय तथा मजबूत साझेदार के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।” ‘जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है’ अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नया भारत उन उपलब्धियों को हासिल कर रहा है, जो कभी केवल सपने हुआ करते थे। उन्होंने कहा, “जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है। जो पहले नामुमकिन लगता था, वह आज मुमकिन हुआ है।” इसके बाद प्रधानमंत्री ने उपस्थित लोगों से पूछा कि यह परिवर्तन किसकी वजह से संभव हुआ है। इस पर सभागार में मौजूद लोगों ने ‘नरेंद्र मोदी’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। ‘यह मोदी के कारण नहीं हुआ’ लोगों के नारों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह बदलाव किसी एक व्यक्ति की वजह से नहीं आया है। उन्होंने कहा, “यह मोदी के कारण नहीं हुआ। यह भारत के लोकतंत्र की ताकत है। इस लोकतंत्र में सबका साथ है और सबका विकास है।” प्रधानमंत्री के इस बयान पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सोशल मीडिया पर साझा किया वीडियो प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन का 4 मिनट 38 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा: “जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है। यही नए भारत की पहचान है!” प्रधानमंत्री के पेरिस संबोधन को भारत की वैश्विक भूमिका, लोकतांत्रिक मूल्यों और देश की विकास यात्रा को रेखांकित करने वाला संदेश माना जा रहा है।
पेरिस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस की राजधानी पेरिस पहुंचने पर प्रवासी भारतीयों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। एयरपोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग हाथों में तिरंगा लेकर उनका इंतजार करते नजर आए। इस दौरान पूरा माहौल 'मोदी-मोदी' और 'भारत माता की जय' के नारों से गूंज उठा। डीडी न्यूज द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी अपने स्वागत के लिए जुटे लोगों के बीच पहुंचते और उनसे आत्मीयता से मिलते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और कई लोगों से हाथ मिलाकर उनका उत्साह बढ़ाया। छोटे बच्चे को दुलारते नजर आए पीएम मोदी स्वागत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की नजर एक छोटे बच्चे पर पड़ी। उन्होंने मुस्कुराते हुए बच्चे को प्यार से दुलारा और फिर आगे बढ़कर अन्य लोगों से मुलाकात की। इस दौरान पीछे बैंड-बाजे पर देशभक्ति गीत 'दिल दिया है, जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए…' बजता रहा, जिसने माहौल को और भावुक बना दिया। 'केम छो' सुनकर मुस्कुराए प्रधानमंत्री लोगों से मिलते हुए अचानक पीछे से किसी ने गुजराती में 'केम छो...' कहकर प्रधानमंत्री मोदी का अभिवादन किया। यह सुनते ही पीएम मोदी मुस्कुरा उठे। वहीं, एक बुजुर्ग महिला ने उनका हाथ पकड़कर उनका स्वागत किया, जिस पर प्रधानमंत्री ने भी आत्मीयता के साथ उनका अभिवादन स्वीकार किया। भारत-फ्रांस साझेदारी को बताया अहम पेरिस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि वैश्विक विकास, स्थिरता और प्रगति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी जताई। प्रधानमंत्री के स्वागत का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रवासी भारतीयों के उत्साह तथा पीएम मोदी के आत्मीय व्यवहार की खूब चर्चा हो रही है।
अमेरिका में भारतीय मूल के एक कारोबारी की नागरिकता खतरे में पड़ गई है। ट्रंप प्रशासन द्वारा शुरू किए गए व्यापक 'डी-नेचुरलाइजेशन' अभियान के तहत उन 17 अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है, जिन पर नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से गलत जानकारी देने, तथ्य छिपाने या धोखाधड़ी करने के आरोप हैं। इन 17 लोगों में भारतीय मूल के व्यवसायी नीरज शर्मा का नाम भी शामिल है। अमेरिकी न्याय विभाग ने उनके खिलाफ नागरिकता रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। कौन हैं नीरज शर्मा? 50 वर्षीय नीरज शर्मा न्यू जर्सी स्थित स्टाफिंग कंपनी मैग्नाविजन एलएलसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रह चुके हैं। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, उन्होंने H-1B वीजा से जुड़े 11 कथित फर्जी आवेदन दाखिल किए थे। आरोप है कि इन आवेदनों में यह दिखाया गया था कि विदेशी कर्मचारियों को एक बड़ी वैश्विक वित्तीय संस्था में नियुक्त किया जाएगा, जबकि दस्तावेजों में कथित रूप से जाली हस्ताक्षर और भ्रामक जानकारियों का इस्तेमाल किया गया था। नागरिकता आवेदन में जानकारी छिपाने का आरोप अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि वर्ष 2017 में नागरिकता के लिए आवेदन करते समय नीरज शर्मा ने ऐसे किसी अपराध में शामिल होने से इनकार किया था, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया हो। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने कभी आव्रजन लाभ हासिल करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों को गलत जानकारी नहीं दी। इसी आधार पर अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने उनका आवेदन मंजूर कर लिया था और दिसंबर 2017 में उन्हें अमेरिकी नागरिकता प्रदान कर दी गई थी। बाद में 2015 से 2017 के बीच की गतिविधियों से जुड़े वीजा धोखाधड़ी मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया। अब न्याय विभाग का कहना है कि यदि नागरिकता आवेदन के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई थी, तो उनकी नागरिकता रद्द की जा सकती है। ट्रंप प्रशासन का बड़ा अभियान नीरज शर्मा का मामला ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, जिसके तहत प्राकृतिक रूप से अमेरिकी नागरिक बने लोगों (Naturalized Citizens) की नागरिकता की समीक्षा की जा रही है। न्याय विभाग के अनुसार, जिन 17 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है, उनमें ऐसे व्यक्ति शामिल हैं जिन पर आव्रजन धोखाधड़ी, वित्तीय अपराध, नाबालिगों के खिलाफ अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप हैं या वे इन मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान उन मामलों पर केंद्रित है, जहां नागरिकता प्राप्त करने के लिए कथित रूप से झूठी जानकारी, फर्जी दस्तावेज या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने का सहारा लिया गया था। क्या है डी-नेचुरलाइजेशन प्रक्रिया? डी-नेचुरलाइजेशन (Denaturalization) वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत किसी व्यक्ति की अमेरिकी नागरिकता रद्द की जा सकती है, यदि यह साबित हो जाए कि उसने नागरिकता प्राप्त करने के दौरान धोखाधड़ी की, महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए या गलत जानकारी दी। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में अंतिम फैसला संघीय अदालतें करती हैं और सरकार को अपने आरोपों को कानूनी रूप से साबित करना होता है। फिलहाल नीरज शर्मा के मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा लिया जाएगा।
लंदन: ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भारतीय मूल के एक परिवार की दर्दनाक मौत ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। भारतीय मूल के राकेश पई, उनकी पत्नी अदिति पारलकर और उनके नौ वर्षीय बेटे सिड की 36वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। घटना की जांच जारी है और स्थानीय पुलिस ने अभी तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह परिवार लंदन के एक हाई-राइज टावर ब्लॉक की 36वीं मंजिल पर स्थित अपार्टमेंट में रहता था। 27 मई को हुई इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। आपातकालीन सेवाओं को तुरंत मौके पर बुलाया गया, लेकिन तीनों को बचाया नहीं जा सका। मुंबई से लंदन तक का सफर रिपोर्ट्स के अनुसार, 47 वर्षीय राकेश पई और 46 वर्षीय अदिति पारलकर वर्ष 2000 के दशक में मुंबई से लंदन चले गए थे। राकेश वित्तीय सलाहकार के रूप में कार्यरत थे, जबकि अदिति निर्माण क्षेत्र में वरिष्ठ पद पर काम कर रही थीं। दोनों ने ब्रिटेन में सफल पेशेवर जीवन स्थापित किया था। उनके बेटे सिड की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं ने परिवार के सामने लगातार चुनौतियां खड़ी कर दी थीं। बताया जाता है कि सिड कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से जूझ रहा था और उसे विशेष शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता थी। बेटे की बीमारी बनी बड़ी चुनौती मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिड किडनी संबंधी गंभीर बीमारी से पीड़ित था और बोलने में भी असमर्थ था। उसकी देखभाल की मुख्य जिम्मेदारी अदिति पारलकर पर थी। उन्होंने बेटे की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसे घर पर ही पढ़ाने और उसकी देखभाल करने का निर्णय लिया था। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि लगातार देखभाल और जिम्मेदारियों का दबाव परिवार के लिए भावनात्मक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। इलाज के लिए भारत लौटे, फिर ब्रिटेन वापस गए करीबी सूत्रों के अनुसार, परिवार करीब छह वर्ष पहले बेहतर इलाज की तलाश में लंदन छोड़कर मुंबई लौट आया था। बाद में चिकित्सा विकल्प सीमित होने के कारण वे दोबारा ब्रिटेन चले गए। इस दौरान परिवार कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था। परिवार के एक मित्र ने ब्रिटिश मीडिया से बातचीत में कहा कि अदिति पर नौकरी, घर और बेटे की देखभाल का भारी दबाव था। उनके अनुसार, ब्रिटेन में परिवार का कोई करीबी सहारा भी मौजूद नहीं था, जिससे हालात और चुनौतीपूर्ण हो गए थे। पुलिस जांच जारी, कारणों पर सस्पेंस इस घटना को लेकर ब्रिटिश मीडिया में विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस ने मामले को फिलहाल "अप्रत्याशित मौत" (Unexplained Death) के रूप में दर्ज किया है। बर्मंडसी और ओल्ड साउथवार्क से सांसद नील कॉयल ने घटना पर दुख जताते हुए इसे बेहद त्रासद बताया। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानीय लोगों ने इस घटना को अपनी आंखों से देखा था और पूरा समुदाय इस घटना से स्तब्ध है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत की परिस्थितियों की जांच की जा रही है और अभी किसी भी संभावना को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मृतकों के परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। जांच पूरी होने का इंतजार परिवार के मित्रों और परिचितों ने घटना को लेकर सामने आ रहे कुछ दावों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिलहाल सभी की नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिससे इस दर्दनाक घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें।
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में 21 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद श्री गणेश हिंदू मंदिर का भव्य उद्घाटन हो गया। प्राण प्रतिष्ठा और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। यह मंदिर न केवल प्रवासी भारतीयों की आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि भारतीय संस्कृति और जर्मन समाज के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच भी साबित होगा। प्रवासी भारतीयों के लिए बना सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र उद्घाटन समारोह में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि यह मंदिर जर्मनी में रहने वाले भारतीयों, छात्रों, आईटी पेशेवरों और नए प्रवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिलन स्थल बनेगा। मंदिर में धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ संगीत, नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक आयोजन भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे विभिन्न समुदायों के बीच आपसी जुड़ाव बढ़ेगा। श्रद्धा और दान से साकार हुआ 21 वर्षों का सपना श्री गणेश हिंदू मंदिर की स्थापना 24 सितंबर 2005 को की गई थी। इसके बाद मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हुआ, जो करीब दो दशक तक चलता रहा। आखिरकार 7 जून 2026 को प्राण प्रतिष्ठा समारोह के साथ मंदिर का औपचारिक उद्घाटन किया गया। मंदिर निर्माण पूरी तरह श्रद्धालुओं के दान, सेवा और सामुदायिक सहयोग से संभव हो पाया। यही कारण है कि इसे प्रवासी हिंदू समाज की सामूहिक आस्था और समर्पण का प्रतीक माना जा रहा है। गंगा और बर्लिन के जल से हुआ विशेष अभिषेक मंदिर उद्घाटन से पहले 3 से 7 जून तक पांच दिवसीय धार्मिक महोत्सव आयोजित किया गया। इस समारोह का सबसे विशेष क्षण तब आया, जब गंगा नदी और बर्लिन से लाए गए जल से मंदिर के 17 मीटर ऊंचे विमानम (शिखर) का अभिषेक किया गया। क्रेन की सहायता से शिखर पर जल चढ़ाकर पारंपरिक वैदिक विधि से अनुष्ठान सम्पन्न किया गया। इस अनूठे आयोजन ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और स्थानीय संस्कृति के संगम का संदेश दिया। यूरोप के प्रमुख हिंदू मंदिरों में शामिल आज यह मंदिर यूरोप के बड़े हिंदू मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर का संचालन 10 स्वयंसेवी बोर्ड सदस्यों और तीन पुजारियों द्वारा किया जाता है। जर्मनी के कर विभाग ने इसे आधिकारिक रूप से एक पंजीकृत गैर-लाभकारी संस्था का दर्जा दिया है, जिससे धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों को संस्थागत आधार मिला है। सभी हिंदू परंपराओं के लिए खुले हैं द्वार बर्लिन के हाजेनहाइड क्षेत्र में स्थित यह मंदिर प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। यहां नियमित रूप से सुबह और शाम आरती आयोजित की जाती है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, यह किसी एक संप्रदाय तक सीमित नहीं है। वैष्णव, शैव, शाक्त और स्मार्ट सहित सभी हिंदू परंपराओं के अनुयायी यहां पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय जर्मन नागरिक, छात्र, शोधार्थी और विभिन्न धर्मों के लोग भी मंदिर में स्वागत योग्य हैं। तमिलनाडु के पत्थरों से बनी अनूठी वास्तुकला मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली पर आधारित है। वर्ष 2015 में इसके भव्य गोपुरम का निर्माण शुरू हुआ था। तमिलनाडु से मंगाए गए काले ग्रेनाइट पत्थरों को भारतीय शिल्पकारों ने हाथों से तराशकर मंदिर को विशिष्ट पहचान दी। आज यह विशाल गोपुरम बर्लिन के सांस्कृतिक परिदृश्य का एक नया प्रतीक बन चुका है और दूर से ही श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करता है। जर्मनी में हिंदू उपस्थिति को मिली नई पहचान श्री गणेश हिंदू मंदिर का उद्घाटन जर्मनी में भारतीय और हिंदू समुदाय की बढ़ती उपस्थिति का प्रतीक माना जा रहा है। इससे पहले 2014 में बर्लिन के ब्रिट्ज क्षेत्र में भगवान मुरुगन को समर्पित मंदिर की स्थापना हुई थी। अब श्री गणेश मंदिर के खुलने के साथ बर्लिन में हिंदू धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका में आव्रजन नियमों के उल्लंघन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत करीब 30 भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, ये लोग अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे थे और कमर्शियल ट्रक ड्राइवर के रूप में काम कर रहे थे। कार्रवाई एरिजोना में चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन चेकमेट’ के दौरान की गई। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान कुल 52 अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 36 लोग कमर्शियल ट्रक चलाते पाए गए। जांच में इनमें से लगभग 30 लोगों के भारतीय नागरिक होने की पुष्टि हुई है। अधिकारियों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें भारत भेजा जा सकता है। कई राज्यों के ड्राइविंग लाइसेंस मिले गिरफ्तार किए गए ट्रक ड्राइवरों में भारतीयों के अलावा मेक्सिको, अल सल्वाडोर और रूस के नागरिक भी शामिल हैं। जांच में पाया गया कि कुछ लोगों के पास कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, वर्जीनिया और वॉशिंगटन जैसे राज्यों के कमर्शियल ड्राइवर लाइसेंस थे, जबकि कुछ बिना किसी वैध लाइसेंस के वाहन चला रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, अधिकांश लोगों के पास रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज (Employment Authorization Documents) थे, जो पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में जारी किए गए थे, लेकिन अब वैध नहीं माने जा रहे हैं। क्या है ‘ऑपरेशन चेकमेट’? ‘ऑपरेशन चेकमेट’ अमेरिकी एजेंसियों का एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य अवैध रूप से रह रहे ऐसे लोगों की पहचान करना है जो कमर्शियल वाहनों का संचालन कर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि बिना वैध दस्तावेजों के ट्रक या बस चलाने वाले लोग सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। अमेरिकी सीमा गश्त के युमा सेक्टर के कार्यवाहक प्रमुख डस्टिन कॉडल ने कहा कि इस अभियान का मकसद सड़कों को सुरक्षित बनाना और आव्रजन कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना है। ट्रंप प्रशासन ने अपनाया सख्त रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हाल के महीनों में अवैध प्रवास और कमर्शियल वाहन संचालन को लेकर सख्ती बढ़ाई है। प्रशासन ने परिवहन विभाग को निर्देश दिया है कि अयोग्य विदेशी नागरिकों को ट्रक और बस चलाने के लिए कमर्शियल लाइसेंस जारी न किए जाएं। अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऐसे मामलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पिछले कुछ समय में भारतीय मूल के कुछ ट्रक ड्राइवरों से जुड़े सड़क हादसों और कानूनी मामलों ने भी इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया था। कानूनी प्रक्रिया के बाद होगी आगे की कार्रवाई अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी लोगों के दस्तावेजों और आव्रजन स्थिति की जांच की जा रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके खिलाफ निर्वासन (डिपोर्टेशन) समेत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।