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गजा कैपिटल के ₹550 करोड़ IPO की जानकारी
गजा कैपिटल का ₹550 करोड़ IPO 19 अगस्त से खुलेगा, प्राइस बैंड ₹152-160 तय

मुंबई, एजेंसियां। वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी गजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट, जो गजा कैपिटल ब्रांड के तहत कारोबार करती है, अपना ₹550 करोड़ का आईपीओ लेकर आ रही है। कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड ₹152 से ₹160 प्रति शेयर तय किया है। सार्वजनिक निर्गम के लिए सब्सक्रिप्शन 19 अगस्त 2026 से शुरू होगा और 21 अगस्त को बंद होगा।   ₹450 करोड़ का फ्रेश इश्यू   आईपीओ में ₹450 करोड़ का फ्रेश इश्यू शामिल है। इसके अलावा मौजूदा शेयरधारक करीब ₹100 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचेंगे। इस तरह आईपीओ का कुल आकार लगभग ₹550 करोड़ है।   19 से 21 अगस्त तक खुलेगा आईपीओ   गजा कैपिटल का आईपीओ 19 अगस्त को खुलेगा और 21 अगस्त को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 18 अगस्त को होगी। कंपनी के शेयरों की BSE और NSE पर 26 अगस्त को लिस्टिंग प्रस्तावित है।   गजा कैपिटल के लिए क्यों अहम है आईपीओ?   यह आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार में एक खास कदम माना जा रहा है, क्योंकि गजा कैपिटल भारत की प्रमुख घरेलू वैकल्पिक निवेश प्रबंधन कंपनियों में शामिल है। कंपनी के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक गोपाल जैन के मुताबिक, सार्वजनिक बाजार में प्रवेश से कंपनी के कारोबार में पारदर्शिता और संस्थागत स्वरूप को बढ़ावा मिल सकता है

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
SEBI की स्टडी में एंकर निवेशकों और FPI की IPO बिक्री का विश्लेषण
एंकर निवेशकों पर SEBI का बड़ा खुलासा, विदेशी निवेशक IPO शेयर जल्दी बेचने में सबसे आगे

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की नई स्टडी में एंकर निवेशकों के शेयर बेचने के व्यवहार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। SEBI ने 13 अगस्त 2026 को मेनबोर्ड IPO में एंकर निवेशकों के बाहर निकलने के पैटर्न पर अध्ययन जारी किया। रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) एंकर निवेशकों में सबसे तेजी से अपनी हिस्सेदारी बेचने वालों में रहे।   30 दिन की लॉक-इन अवधि के बाद बढ़ती है बिकवाली     SEBI की स्टडी में अप्रैल 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच सूचीबद्ध 242 मेनबोर्ड IPO का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि एंकर निवेशकों की 30 दिन की लॉक-इन अवधि खत्म होने के आसपास शेयरों की बिक्री बढ़ जाती है। इस दौरान भारी बिकवाली का असर कई IPO शेयरों की कीमतों पर भी देखा गया।     FPI सबसे ज्यादा शेयर बेचने वाले एंकर निवेशक     अध्ययन के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने म्यूचुअल फंड की तुलना में एंकर निवेश के शेयर अधिक तेजी से बेचे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि छोटे आकार के IPO में एंकर निवेशकों की निकासी और बिक्री की तीव्रता ज्यादा रही।     निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है SEBI की स्टडी?     एंकर निवेशक आमतौर पर IPO खुलने से पहले बड़े संस्थागत निवेश के जरिए कंपनी में भरोसे का संकेत देते हैं। लेकिन लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद यदि बड़ी मात्रा में शेयर बाजार में बिकने लगते हैं, तो इससे शेयर की कीमत पर दबाव बन सकता है। SEBI की स्टडी इसी जोखिम को समझने में निवेशकों के लिए उपयोगी है।     SEBI ने एंकर आवंटन व्यवस्था में किए हैं बदलाव     SEBI की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, एंकर निवेशक आवंटन व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य IPO में दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना रहा है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
KKR द्वारा Medicover India अस्पताल कारोबार का अधिग्रहण
KKR का भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा दांव, Medicover का अस्पताल कारोबार €1.2 अरब में खरीदेगा

नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक निवेश कंपनी KKR ने स्वीडन की हेल्थकेयर कंपनी Medicover के भारत स्थित अस्पताल कारोबार को खरीदने के लिए समझौता किया है। सौदे की एंटरप्राइज वैल्यू €1.2 अरब (करीब $1.39 अरब) बताई गई है। यह सौदा भारत के निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में KKR के बढ़ते निवेश को दर्शाता है।   Medicover का भारत कारोबार KKR के पास जाएगा   Medicover ने अपने भारतीय अस्पताल कारोबार को KKR द्वारा प्रबंधित निवेश फंडों को बेचने पर सहमति जताई है। कंपनी के अनुसार यह सौदा उसके भारत से जुड़े अस्पताल कारोबार के लिए एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है। Medicover अब अपने कारोबार का मुख्य फोकस पोलैंड, जर्मनी और रोमानिया जैसे यूरोपीय बाजारों पर केंद्रित करना चाहती है।   करीब $1.39 अरब का है सौदा   इस सौदे की एंटरप्राइज वैल्यू €1.2 अरब, यानी करीब $1.39 अरब है। इसलिए इसे $1.5 अरब का सौदा कहना थोड़ा अधिक आंकड़ा होगा। भारतीय मुद्रा में इसका मूल्य विनिमय दर के आधार पर करीब ₹12,000 करोड़ के आसपास बैठता है। सौदे के पूरा होने के बाद KKR की भारतीय अस्पताल क्षेत्र में मौजूदगी और मजबूत होगी।   भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में KKR की बढ़ती दिलचस्पी   यह KKR का भारत के अस्पताल क्षेत्र में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण विस्तार है। कंपनी पहले भी भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े निवेश कर चुकी है। Medicover India का अधिग्रहण देश में अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते बाजार में वैश्विक निजी निवेशकों की दिलचस्पी को भी दिखाता है। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग बढ़ने और अस्पताल नेटवर्क के विस्तार के बीच बड़े निवेश फंड इस क्षेत्र में विस्तार के अवसर तलाश रहे हैं। Medicover के भारत कारोबार का अधिग्रहण इसी व्यापक निवेश रुझान का हिस्सा माना जा रहा है।   Medicover का फोकस अब यूरोप पर   इस सौदे के जरिए Medicover अपने कारोबार को चुनिंदा यूरोपीय बाजारों में केंद्रित करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। कंपनी का लक्ष्य भारत के अस्पताल कारोबार से बाहर निकलकर अपने प्रमुख यूरोपीय बाजारों में संसाधनों और निवेश को अधिक केंद्रित करना है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
SBI Mutual Fund का नया NFO
SBI म्यूचुअल फंड का नया NFO लॉन्च, टॉप-100 से बाहर की कंपनियों पर रहेगा फोकस

मुंबई, एजेंसियां। SBI Mutual Fund ने निवेशकों के लिए अपनी नई निवेश रणनीति Magnum Equity Ex-Top 100 Long Short Fund लॉन्च की है। यह SBI Mutual Fund की Specialized Investment Fund (SIF) श्रेणी के तहत दूसरी रणनीति है। नए फंड का NFO 7 अगस्त से 20 अगस्त 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा।   टॉप-100 शेयरों से अलग होगा फोकस   नई रणनीति का मुख्य फोकस बाजार पूंजीकरण के आधार पर टॉप-100 कंपनियों से बाहर के इक्विटी और इक्विटी से जुड़े शेयरों पर रहेगा। यानी फंड मुख्य रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप क्षेत्र में निवेश के अवसर तलाशेगा। SBI Mutual Fund का यह कदम ऐसे समय आया है जब निवेशकों की दिलचस्पी बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी बनी हुई है।   Long-Short रणनीति की खासियत   यह फंड सामान्य इक्विटी फंड से अलग है क्योंकि इसमें सीमित मात्रा में इक्विटी डेरिवेटिव के जरिए शॉर्ट पोजीशन लेने की सुविधा भी होगी। इससे फंड मैनेजर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों तरह की परिस्थितियों में अवसर तलाश सकता है। हालांकि, इस तरह की रणनीति में सामान्य इक्विटी म्यूचुअल फंड की तुलना में जोखिम और जटिलता अधिक हो सकती है। निवेशकों को निवेश से पहले योजना से जुड़े दस्तावेज और जोखिम कारकों को ध्यान से देखना चाहिए।   SBI का दूसरा SIF   Magnum Equity Ex-Top 100 Long Short Fund, SBI Mutual Fund की SIF के तहत दूसरी निवेश रणनीति है। SIF ढांचे के तहत फंड हाउस को पारंपरिक म्यूचुअल फंड योजनाओं की तुलना में अधिक विशेष और लचीली निवेश रणनीतियां अपनाने की अनुमति मिलती है। नए NFO की शुरुआत के साथ निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि SBI की यह रणनीति मिडकैप और स्मॉलकैप क्षेत्र में किस तरह के अवसर तलाशती है और आगे इसका प्रदर्शन कैसा रहता है। निवेशकों के लिए जरूरी बात: NFO में निवेश करना केवल इसलिए बेहतर नहीं माना जाता कि यूनिट की शुरुआती कीमत कम है। निवेश से पहले योजना का जोखिम, रणनीति, लागत और निवेश उद्देश्य समझना जरूरी है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड के अंतरराष्ट्रीय फंड्स में SIP और STP पर अस्थायी रोक
PGIM इंडिया ने 3 इंटरनेशनल फंड्स में SIP और STP रजिस्ट्रेशन पर अस्थायी रोक लगाई

मुंबई, एजेंसियां। PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड ने अपने तीन अंतरराष्ट्रीय फंड ऑफ फंड्स में सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के मौजूदा रजिस्ट्रेशन को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला किया है। यह बदलाव 7 अगस्त 2026 से लागू होगा।   इन तीन फंड्स पर पड़ेगा असर     PGIM इंडिया की ओर से जिन योजनाओं में SIP और STP रजिस्ट्रेशन को अस्थायी रूप से रोका गया है, उनमें शामिल हैं:   PGIM India Global Equity Opportunities Fund of Fund PGIM India Emerging Markets Equity Fund of Fund PGIM India Global Select Real Estate Securities Fund of Fund इन योजनाओं में पहले से चल रहे SIP और STP रजिस्ट्रेशन पर नए निर्देशों का असर पड़ेगा।   7 अगस्त से लागू होगा फैसला     म्यूचुअल फंड हाउस का यह निर्णय 7 अगस्त 2026 से प्रभावी होगा। यानी निवेशकों को इन तीन अंतरराष्ट्रीय योजनाओं में SIP और STP के जरिए निवेश जारी रखने को लेकर नए नियमों का सामना करना पड़ेगा।   PGIM इंडिया ने इससे पहले भी अपने अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेश सीमा और SIP से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। इन योजनाओं पर विदेशी निवेश से जुड़ी नियामकीय सीमाओं का प्रभाव रहा है।   अंतरराष्ट्रीय निवेश पर बढ़ा नियामकीय दबाव     भारतीय म्यूचुअल फंड कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेश पर SEBI और विदेशी निवेश की निर्धारित सीमाओं से जुड़े नियमों का असर पड़ता है। इसी वजह से कई फंड हाउस समय-समय पर लंपसम निवेश, SIP और STP की सीमा या उपलब्धता में बदलाव करते रहे हैं।   PGIM इंडिया का ताजा कदम भी उसके अंतरराष्ट्रीय फंड ऑफ फंड्स में निवेश प्रवाह को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे अपने SIP या STP पर लागू नए नियमों की जानकारी फंड हाउस से जरूर जांच लें।   निवेशकों को क्या करना चाहिए     जिन निवेशकों का इन तीन योजनाओं में SIP या STP चल रहा है, उन्हें 7 अगस्त 2026 से लागू होने वाले बदलावों को ध्यान से देखना चाहिए। नई SIP/STP व्यवस्था शुरू करने या मौजूदा निवेश में बदलाव करने से पहले संबंधित योजना के आधिकारिक नोटिस और फंड हाउस की जानकारी देखना बेहतर होगा。   यह फैसला निवेश को खत्म करने या फंड से पैसा निकालने का निर्देश नहीं है, बल्कि SIP और STP रजिस्ट्रेशन से जुड़ा अस्थायी बदलाव है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 6, 2026 0
A-1 Limited penny stock under ₹6 hits upper circuit after strong Q1 FY27 results
Penny Stock: ₹6 से कम का शेयर, लगातार दूसरे दिन अपर सर्किट; Q1 नतीजों के बाद दिखी तेजी

Penny Stock Under ₹6: शेयर बाजार में छोटे भाव वाले पेनी स्टॉक्स में अचानक तेजी अक्सर निवेशकों का ध्यान खींचती है। लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनी A-1 Limited का शेयर भी लगातार दूसरे कारोबारी दिन 5 फीसदी के अपर सर्किट में पहुंच गया। कंपनी ने हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें राजस्व और मुनाफे में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। खुलते ही अपर सर्किट में पहुंचा शेयर बीएसई पर A-1 Limited का शेयर मंगलवार को ₹5.71 पर बंद हुआ था। बुधवार सुबह यह करीब 5 फीसदी की तेजी के साथ ₹5.99 पर खुला और जल्द ही 5 फीसदी के अपर सर्किट पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान शेयर कुछ समय के लिए ₹5.98 तक आया, लेकिन फिर ₹5.99 के स्तर पर लौट गया। कंपनी के शेयर में 5 फीसदी की सर्किट लिमिट लागू है। एक साल में बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा प्रदर्शन इस पेनी स्टॉक का पिछले एक साल का प्रदर्शन काफी अस्थिर रहा है। कंपनी के शेयर का 52-हफ्ते का उच्च स्तर ₹70.41 है, जो नवंबर 2025 में दर्ज हुआ था। वहीं 52-हफ्ते का निचला स्तर ₹5 रहा, जो 5 जुलाई 2026 को दर्ज किया गया। हालिया अवधि में भी शेयर ने काफी उतार-चढ़ाव दिखाया है: 1 सप्ताह: 10 फीसदी से ज्यादा तेजी 1 महीना: करीब 22 फीसदी गिरावट 3 महीने: करीब 52 फीसदी गिरावट 6 महीने: करीब 85 फीसदी गिरावट 1 साल: करीब 65 फीसदी नकारात्मक रिटर्न इससे साफ है कि हाल की तेजी के बावजूद शेयर का लंबी अवधि का प्रदर्शन बेहद अस्थिर रहा है। Q1FY27 में कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा? A-1 Limited ने 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही के नतीजे जारी किए। कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में सालाना आधार पर 170.5 फीसदी की वृद्धि हुई और यह बढ़कर ₹175.01 करोड़ हो गया। कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा यानी PAT भी तेजी से बढ़ा। पिछले साल की समान तिमाही में ₹0.60 करोड़ के मुकाबले इस बार PAT 429.3 फीसदी बढ़कर ₹3.16 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का PAT मार्जिन भी 0.92 फीसदी से बढ़कर 1.81 फीसदी हो गया। क्या सिर्फ अपर सर्किट देखकर खरीदना सही है? पेनी स्टॉक्स में तेज उछाल देखकर निवेशकों का आकर्षित होना स्वाभाविक है, लेकिन ऐसे शेयरों में जोखिम भी काफी ज्यादा हो सकता है। A-1 Limited के मामले में भी हालिया अपर सर्किट को कंपनी के तिमाही नतीजों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन पिछले एक साल में शेयर की भारी गिरावट और अस्थिरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निवेशकों को केवल शेयर की कम कीमत या लगातार लग रहे अपर सर्किट के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार, कर्ज, नकदी प्रवाह, वैल्यूएशन और भविष्य की संभावनाओं का स्वतंत्र विश्लेषण करना चाहिए।  

surbhi जुलाई 29, 2026 0
President Droupadi Murmu meets Moldova President Maia Sandu in Chisinau
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पहला मोल्दोवा दौरा, यात्रा-व्यापार और निवेश बढ़ाने पर बनी सहमति

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मोल्दोवा की राजधानी चिसिनाउ की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर जोर दिया। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा की पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा है, जिसे भारत-मोल्दोवा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। राष्ट्रपति माइया सांडू ने किया भव्य स्वागत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सांडू ने राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया। इस अवसर पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। एएनआई के मुताबिक, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी में कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने पर जोर राष्ट्रपति मुर्मू और राष्ट्रपति माइया सांडू के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों के सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने, व्यापारिक संबंधों का विस्तार करने और भविष्य में सहयोग के नए अवसर तलाशने पर सहमति जताई। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, यह यात्रा भारत और मोल्दोवा के बीच बढ़ते विश्वास, मित्रता और दीर्घकालिक साझेदारी का प्रतीक है। व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी पर बनी सहमति संयुक्त प्रेस बयान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मोल्दोवा में उन्हें और भारतीय प्रतिनिधिमंडल को मिला गर्मजोशी भरा स्वागत दोनों देशों की मजबूत मित्रता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने: द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहन देने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने, बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने, और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति बनाई है। यूरोप में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा यूरोप में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का अहम संकेत है। हाल के वर्षों में भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। जुलाई 2026 में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की बैठक के बाद भारत और यूरोप के बीच सहयोग को नई गति मिली है। ऐसे में मोल्दोवा के साथ यह नई साझेदारी व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसर खोल सकती है। भविष्य में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोनों देशों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद जारी रखने और आर्थिक, तकनीकी तथा रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। माना जा रहा है कि यह यात्रा भारत-मोल्दोवा संबंधों को नई मजबूती देने के साथ-साथ यूरोप में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को भी और मजबूत करेगी।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Indian Commerce Minister Piyush Goyal and the U.S. Ambassador to India respond to reports on the proposed India-US trade deal, clarifying that negotiations are continuing.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अटकलों के बीच दोनों देशों ने किया खंडन, अमेरिकी राजदूत बोले- 'किसी ने समझौता खारिज नहीं किया'

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर सामने आई उन खबरों को दोनों देशों ने सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि भारत ने इस समझौते को अस्वीकार कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में सकारात्मक बातचीत कर रहे हैं। अमेरिकी राजदूत ने रिपोर्ट को बताया फेक न्यूज भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत द्वारा ट्रेड डील खारिज किए जाने की खबर पूरी तरह गलत है। उन्होंने लिखा कि "फेक न्यूज अलर्ट। किसी ने भी किसी समझौते को खारिज नहीं किया है।" उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर लगातार सकारात्मक बातचीत चल रही है और दोनों पक्ष इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने संबंधित मीडिया रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की खबरें वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं। पीयूष गोयल बोले- रिपोर्ट पूरी तरह भ्रामक केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत द्वारा ट्रेड डील खारिज किए जाने की खबर पूरी तरह निराधार, असत्य और भ्रामक है। उन्होंने बताया कि जून में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के भारत दौरे के दौरान दोनों पक्षों के बीच बेहद सकारात्मक और रचनात्मक बैठकें हुई थीं। गोयल ने कहा कि दोनों देशों की टीमें एक संतुलित और व्यावसायिक रूप से लाभकारी समझौते पर काम कर रही हैं। समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत जारी सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने के लिए सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने दोहराया कि किसी भी पक्ष ने बातचीत से पीछे हटने या समझौते को अस्वीकार करने जैसी कोई बात नहीं कही है। पहले भी कहा था- अंतिम चरण में है डील पिछले महीने यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने उस समय कहा था कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ अंतिम बिंदुओं पर चर्चा बाकी है। उनके अनुसार, समझौते का लगभग पूरा काम हो चुका है और दोनों देश इसे जल्द पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर जोर भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग और बढ़ने की संभावना है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Indian Prime Minister Narendra Modi and New Zealand Prime Minister Christopher Luxon meet in Auckland during Modi's historic visit after nearly four decades.
PM Modi New Zealand Visit: 40 साल बाद न्यूजीलैंड पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

ऑकलैंड: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दशक बाद न्यूजीलैंड की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। इससे पहले वर्ष 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने न्यूजीलैंड का दौरा किया था। ऑकलैंड पहुंचने पर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने का संकल्प लिया। 40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री के न्यूजीलैंड पहुंचने से दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद जताई जा रही है। रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार दौरे के दौरान न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की घोषणा की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, नवाचार, कृषि, तकनीक और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। प्रधानमंत्री लक्सन ने बताया कि दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद आर्थिक संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर तक निवेश करने की प्रतिबद्धता रखता है। युवा उद्यमियों के लिए मोदी का विशेष प्रस्ताव ऑकलैंड में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के युवा कारोबारियों के बीच सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि 35 वर्ष से कम आयु के युवा उद्यमियों का प्रतिनिधिमंडल नियमित रूप से भारत और न्यूजीलैंड के बीच आदान-प्रदान करे, ताकि उन्हें नए व्यापारिक अवसरों, नवाचार और निवेश के क्षेत्र में सीखने का मौका मिल सके। उद्योग जगत और प्रवासी भारतीयों से करेंगे मुलाकात अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के प्रमुख उद्योगपतियों, निवेशकों और खेल जगत की हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह ऑकलैंड में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे, जिसमें बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों के शामिल होने की उम्मीद है। लक्सन ने जताया आभार न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने पिछले वर्ष भारत यात्रा के दौरान मिले स्वागत को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने में प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रिश्तों में नए अध्याय की उम्मीद विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रक्षा, शिक्षा, कृषि, तकनीक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को भी नई गति देगा। दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी भविष्य में आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत कर सकती है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
ICICI Prudential Multi-Asset Active Fund of Funds offering diversified exposure to equity, debt, gold, and silver investments.
Mutual Fund NFO: ICICI Prudential ने लॉन्च किया Multi-Asset Active FoF, एक ही फंड में मिलेगा इक्विटी, डेट, गोल्ड और सिल्वर का फायदा

मुंबई: निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो को विविध (Diversified) बनाने का एक नया विकल्प सामने आया है। ICICI Prudential Mutual Fund ने अपना नया ICICI Prudential Multi-Asset Active Fund of Funds (FoF) लॉन्च किया है। यह एक ओपन-एंडेड फंड ऑफ फंड्स (FoF) स्कीम है, जिसका उद्देश्य निवेशकों को एक ही फंड के माध्यम से इक्विटी, डेट, गोल्ड ETF और सिल्वर ETF जैसे अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश का अवसर देना है। यह न्यू फंड ऑफर (NFO) निवेश के लिए खुल चुका है और इसमें 14 जुलाई 2026 तक निवेश किया जा सकता है। क्या है Multi-Asset Active FoF? यह स्कीम सीधे शेयर या बॉन्ड में निवेश नहीं करती, बल्कि ICICI Prudential की विभिन्न एक्टिव इक्विटी स्कीम, डेट स्कीम और गोल्ड/सिल्वर ETF की यूनिट्स में निवेश करती है। इसका उद्देश्य अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश कर जोखिम को संतुलित करना और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना तैयार करना है। बाजार के अनुसार बदलेगा निवेश का अनुपात ICICI Prudential का कहना है कि यह फंड बाजार की मौजूदा परिस्थितियों, वैल्यूएशन और व्यापक आर्थिक (Macro-economic) संकेतकों के आधार पर अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश का अनुपात समय-समय पर बदलता रहेगा। यानी यदि किसी समय इक्विटी आकर्षक लगेगी तो उसका हिस्सा बढ़ाया जा सकता है, जबकि बाजार में जोखिम बढ़ने पर डेट या गोल्ड का आवंटन बढ़ाया जा सकता है। कंपनी ने क्या कहा? ICICI Prudential Asset Management Company के Executive Director और Chief Investment Officer (CIO) एस. नरेन के अनुसार, अलग-अलग आर्थिक और बाजार चक्रों में प्रत्येक एसेट क्लास का प्रदर्शन अलग होता है। ऐसे में अनुशासित एसेट एलोकेशन लंबी अवधि के निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह स्कीम निवेशकों को रिसर्च आधारित रणनीति के माध्यम से इक्विटी, डेट और कीमती धातुओं में संतुलित निवेश का अवसर प्रदान करती है, जिससे बदलते बाजार में पोर्टफोलियो अधिक संतुलित रह सकता है। कैसे काम करेगा एसेट एलोकेशन? यह फंड किसी एक एसेट क्लास पर निर्भर रहने के बजाय उनकी आकर्षकता के आधार पर निवेश का अनुपात तय करेगा। संभावित एसेट एलोकेशन इस प्रकार रहेगा— एक्टिव इक्विटी स्कीम: 30% से 80% एक्टिव डेट स्कीम: 10% से 60% गोल्ड ETF और/या सिल्वर ETF: 10% से 30% निवेशकों को क्या मिलेंगे फायदे? इस स्कीम का उद्देश्य तीन प्रमुख निवेश लक्ष्यों को एक साथ पूरा करना है— इक्विटी के जरिए लंबी अवधि में पूंजी वृद्धि (Wealth Creation) डेट स्कीम के माध्यम से अपेक्षाकृत स्थिर आय और कम उतार-चढ़ाव गोल्ड और सिल्वर ETF के जरिए पोर्टफोलियो में विविधता और महंगाई के प्रभाव से संभावित सुरक्षा इस तरह निवेशकों को एक ही फंड में कई एसेट क्लास का एक्सपोजर मिल सकता है। न्यूनतम निवेश कितना? इस NFO में निवेश की शुरुआत ₹1,000 से की जा सकती है। इसके बाद निवेश ₹1,000 के गुणकों में किया जा सकेगा। निवेशकों के लिए इसमें डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान दोनों विकल्प उपलब्ध हैं। फंड मैनेजर और बेंचमार्क इस स्कीम का प्रबंधन अनुभवी फंड मैनेजरों की टीम करेगी, जिसमें शामिल हैं— धर्मेश कक्कड़ मनीष बंथिया अखिल कक्कड़ शर्मिला डी'सिल्वा गौरव चिकने इसका बेंचमार्क निम्नलिखित मिश्रित इंडेक्स पर आधारित होगा— 55% निफ्टी 200 TRI 35% निफ्टी कंपोजिट डेट इंडेक्स 7% घरेलू गोल्ड प्राइस 3% घरेलू सिल्वर प्राइस निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान हालांकि मल्टी-एसेट फंड्स पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर देते हैं, लेकिन किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश अवधि का आकलन करना जरूरी है। यदि आवश्यक हो तो किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना बेहतर रहेगा।  

surbhi जुलाई 2, 2026 0
Aditya Birla Group branding alongside an industrial facility, symbolizing West Bengal's appeal for fresh investments to boost the state's industrial growth.
बंगाल ने पांच दशक बाद बढ़ाया बिड़ला समूह की ओर दोस्ती का हाथ, निवेश के लिए किया आग्रह

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच राज्य सरकार ने देश के प्रमुख औद्योगिक घरानों में से एक Aditya Birla Group से राज्य में निवेश करने का आग्रह किया है। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब राज्य में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए नई रणनीतियों पर जोर दिया जा रहा है। शमिक भट्टाचार्य ने दी जानकारी Shamik Bhattacharya ने कोलकाता में आयोजित 'बिजनेस अपॉर्च्युनिटी प्लेटफॉर्म' कार्यक्रम में कहा कि राज्य सरकार ने आदित्य बिड़ला समूह से पश्चिम बंगाल में निवेश बढ़ाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल का बिड़ला समूह के साथ ऐतिहासिक संबंध रहा है और अब राज्य एक बार फिर इस औद्योगिक घराने को निवेश के लिए आमंत्रित कर रहा है। मुख्यालय कभी कोलकाता में था शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि आज से करीब पांच दशक पहले आदित्य बिड़ला समूह का मुख्यालय कोलकाता में हुआ करता था, लेकिन उस समय श्रमिक अशांति और औद्योगिक माहौल के कारण समूह को अपना मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस दौर में कई बड़े औद्योगिक समूहों ने भी पश्चिम बंगाल से अपने मुख्यालय अन्य राज्यों में स्थानांतरित किए थे। 1978 की घटना का किया उल्लेख भट्टाचार्य ने वर्ष 1978 की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित तौर पर तत्कालीन परिस्थितियों के कारण उद्योगपति आदित्य बिड़ला को कोलकाता स्थित Reserve Bank of India कार्यालय के पास अपनी कार से उतरकर पैदल जाना पड़ा था। उन्होंने दावा किया कि इसी तरह की घटनाओं और असुरक्षा की भावना के बाद समूह ने अपने व्यवसाय के विस्तार और सुरक्षा के लिए मुंबई जाने का फैसला किया। उनके अनुसार, बाद में कई अन्य उद्योगपति भी अपने मुख्यालय पश्चिम बंगाल से बाहर ले गए। बंगाल से पूरी तरह नहीं टूटा था रिश्ता भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित होने के बावजूद आदित्य बिड़ला समूह ने पश्चिम बंगाल में अपने औद्योगिक परिचालन पूरी तरह बंद नहीं किए और राज्य में अपनी व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखीं। निवेश आकर्षित करने पर सरकार का जोर पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न औद्योगिक समूहों से संपर्क कर रही है। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश से राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Japanese Prime Minister Sanae Takaichi arrives in New Delhi on a three-day official visit and is welcomed by Union Minister Jitendra Singh at Palam Technical Airport ahead of the India-Japan Annual Summit.
जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची तीन दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचीं, पीएम मोदी के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन में लेंगी हिस्सा

नई दिल्ली: Sanae Takaichi बुधवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचीं। नई दिल्ली के पालम टेक्निकल एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने भारत सरकार की ओर से उनका स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि भारत सरकार की ओर से जापानी प्रधानमंत्री का स्वागत करना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने इस यात्रा को भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में होंगी शामिल अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री तकाइची 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगी। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। बैठक में दोनों नेता व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा करेंगे। साथ ही दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य की रूपरेखा पर भी विचार किया जाएगा। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली भारत यात्रा भारत पहुंचने के बाद जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है और व्यक्तिगत रूप से भी वह पहली बार भारत आई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बैठक में वैश्विक और द्विपक्षीय महत्व के कई मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी तथा दोनों देशों के सहयोग को नई दिशा देने पर जोर रहेगा। रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई गति भारत और जापान के बीच हाल के वर्षों में आर्थिक, रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, मुक्त एवं समावेशी समुद्री व्यवस्था और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0