JD Vance

US Vice President J D Vance with wife Usha Vance during a public appearance
नई किताब में पत्नी ऊषा को लेकर भावुक हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति

J. D. Vance ने अपनी नई पुस्तक में पत्नी Usha Bala Chilukuri Vance के साथ पहली मुलाकात और प्रेम कहानी का जिक्र किया है। वेंस ने बताया कि येल लॉ स्कूल में ऊषा से मिलने के बाद उन्हें पहली बार “सच्चा प्रेम” महसूस हुआ था। उन्होंने अपने दोस्तों से यहां तक कह दिया था कि “या तो मैं इसी लड़की से शादी करूंगा, या फिर पूरी जिंदगी कुंवारा रहूंगा।” नई किताब में साझा किए निजी अनुभव अपनी नई संस्मरण पुस्तक Communion: Finding My Way Back to Faith में जेडी वेंस ने कॉलेज के दिनों की यादों और निजी जिंदगी के कई पहलुओं का जिक्र किया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस किताब के कुछ अंश प्रकाशित किए गए हैं, जिनमें वेंस ने लिखा कि वह ऊषा की सुंदरता, बुद्धिमत्ता और आत्मविश्वास से बेहद प्रभावित थे। उन्होंने लिखा: “जब मैं पहली बार ऊषा से मिला, तो उनकी कई बातें मुझे असामान्य लगीं।” वेंस के मुताबिक ऊषा बेहद प्रतिस्पर्धी थीं, लेकिन उनमें ईर्ष्या जैसी भावना नहीं थी। उन्होंने इसे ऊषा के आत्मविश्वास का सबसे बड़ा संकेत बताया। “पारंपरिक भूमिकाओं में दिलचस्पी नहीं थी” जेडी वेंस ने लिखा कि जब उन्होंने ऊषा से पूछा कि वह जीवन में क्या करना चाहती हैं, तो उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि उनका पारंपरिक सामाजिक भूमिकाओं में खास झुकाव नहीं था। वेंस ने बताया कि यही बात उन्हें सबसे अलग और आकर्षक लगी। 2014 में हुई थी शादी जेडी वेंस और ऊषा ने 2014 में शादी की थी। यह दंपत्ति अब अपने चौथे बच्चे का स्वागत करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जुलाई में उनके घर नए बच्चे का जन्म हो सकता है। धर्म और जिंदगी को लेकर भी किए खुलासे वेंस ने अपनी किताब में धार्मिक यात्रा के बारे में भी विस्तार से लिखा है। उन्होंने बताया कि वह पहले ईसाई धर्म को मानते थे, बाद में नास्तिक बन गए और फिर धीरे-धीरे Catholic Church की ओर आकर्षित हुए। उन्होंने 2019 में कैथोलिक धर्म अपनाया। वेंस के मुताबिक इस नए विश्वास ने उन्हें जिंदगी का मकसद दिया, जो उन्हें येल यूनिवर्सिटी की पढ़ाई या वित्तीय क्षेत्र में काम करने से नहीं मिला था। “हिलबिली एलेगी” से मिली थी पहचान जेडी वेंस इससे पहले अपनी चर्चित पुस्तक Hillbilly Elegy के कारण भी सुर्खियों में रहे हैं। इस किताब में उन्होंने अपने बचपन, गरीबी, हिंसा और परिवार की संघर्षपूर्ण परिस्थितियों का जिक्र किया था। यह किताब काफी लोकप्रिय हुई थी और बाद में इस पर फिल्म भी बनाई गई थी।  

surbhi मई 13, 2026 0
JD Vance questions Pentagon briefings on Iran war amid tensions with Defense Secretary Pete Hegseth
ईरान युद्ध पर ट्रंप को गलत जानकारी? जेडी वेंस को अपने ही रक्षा मंत्री पर शक

बंद कमरे की बैठकों में उठाए गंभीर सवाल अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेंस को आशंका है कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को युद्ध की वास्तविक स्थिति से अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। बताया जा रहा है कि निजी बैठकों में वेंस ने सवाल उठाया कि क्या पेंटागन ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की वास्तविक स्थिति बता रहा है या केवल सकारात्मक तस्वीर पेश की जा रही है। मिसाइल भंडार को लेकर बढ़ी चिंता वेंस की सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी मिसाइल भंडार को लेकर है। उनका मानना है कि ईरान युद्ध में बड़ी मात्रा में हथियार खर्च हो रहे हैं, जिससे भविष्य में चीन, रूस या उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ संभावित संघर्ष की स्थिति में अमेरिका कमजोर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, वेंस ने यह चिंता सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के सामने भी रखी है। हेगसेथ पर सीधे आरोप से बच रहे वेंस हालांकि, जेडी वेंस ने अब तक सार्वजनिक रूप से पीट हेगसेथ की आलोचना नहीं की है। उन्होंने कई मौकों पर रक्षा मंत्री की तारीफ भी की है। सूत्रों का कहना है कि वेंस इस मुद्दे को व्यक्तिगत टकराव में बदलने से बचना चाहते हैं। लेकिन उनके करीबी मानते हैं कि पेंटागन की तरफ से पेश की जा रही तस्वीर जरूरत से ज्यादा आशावादी है। खुफिया रिपोर्ट और दावों में अंतर पीट हेगसेथ लगातार दावा कर रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान की वायुसेना, नौसेना और रक्षा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन आंतरिक खुफिया आकलनों में तस्वीर कुछ अलग बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब भी अपनी वायुसेना और मिसाइल क्षमता का बड़ा हिस्सा बचाने में सफल रहा है। 2028 की राजनीति पर भी असर विश्लेषकों का मानना है कि जेडी वेंस का राजनीतिक भविष्य भी इस युद्ध के नतीजों से जुड़ा हुआ है। यदि ईरान युद्ध लंबा खिंचता है या अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, तो इसका असर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में वेंस की संभावनाओं पर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन में बढ़ सकती है खींचतान ईरान युद्ध को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर मतभेद सामने आने से साफ है कि ट्रंप प्रशासन के शीर्ष स्तर पर रणनीति को लेकर एकराय नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप अपने उपराष्ट्रपति की चिंताओं को कितना महत्व देते हैं और पेंटागन की रणनीति में कोई बदलाव करते हैं या नहीं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
JD Vance Pakistan visit postponed amid US-Iran nuclear deal tensions and stalled talks
ईरान की चुप्पी से अटकी बातचीत, JD Vance की पाकिस्तान यात्रा टली

  ईरान के जवाब का इंतजार, दौरा फिलहाल स्थगित अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance की पाकिस्तान यात्रा फिलहाल टाल दी गई है। यह दौरा ईरान के साथ न्यूक्लियर डील को लेकर अहम बातचीत के लिए प्रस्तावित था, लेकिन तेहरान की ओर से अमेरिकी प्रस्तावों पर कोई जवाब नहीं मिलने के कारण इसे रोक दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेंस को मंगलवार सुबह इस्लामाबाद के लिए रवाना होना था, जहां बुधवार को वार्ता होनी थी। हालांकि, अब यह यात्रा अनिश्चितकाल के लिए टल गई है। सीजफायर की समयसीमा के बीच बढ़ा दबाव यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम समाप्त होने के करीब था। इसी बीच Donald Trump ने सीजफायर बढ़ाने का ऐलान कर दिया, ताकि बातचीत के लिए और समय मिल सके। अमेरिका का कहना है कि वह अभी भी कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन सैन्य विकल्पों को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भी बरकरार है। ईरान ने ठुकराया दबाव, बातचीत पर सवाल ईरान की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। वरिष्ठ नेताओं ने साफ कहा है कि “धमकी के साए में बातचीत संभव नहीं है।” ईरानी अधिकारियों ने सीजफायर बढ़ाने के फैसले को एक “रणनीतिक चाल” बताया और इसे समय खरीदने की कोशिश करार दिया। वहीं, सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ता में हिस्सा नहीं लिया। आगे क्या? अनिश्चितता के बीच टिकी निगाहें फिलहाल अमेरिका यह संकेत मिलने का इंतजार कर रहा है कि ईरान के वार्ताकार समझौते के लिए पूरी तरह अधिकृत हैं या नहीं। अगर स्थिति स्पष्ट होती है, तो JD Vance की पाकिस्तान यात्रा दोबारा तय की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गतिरोध के चलते क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ सकता है और कूटनीतिक समाधान की राह और कठिन हो सकती है।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
US and Iran officials signaling renewed peace talks amid escalating Middle East tensions and negotiations
US–Iran Peace Talk 2: तारीख तय होने के संकेत, ईरान झुका–ट्रंप ने दी हरी झंडी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच United States और Iran के बीच दूसरी शांति वार्ता (Peace Talk-2) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पहले दौर की बातचीत भले ही बेनतीजा रही थी, लेकिन अब दोनों देशों के बीच समझौते की संभावनाएं फिर से मजबूत होती दिख रही हैं। ट्रंप का बड़ा बयान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा: “ईरान समझौते के लिए उत्सुक है” “हमें उनकी तरफ से संदेश मिला है” “नाकेबंदी जारी रहेगी, अभी कोई ढील नहीं” उन्होंने दोहराया कि: ईरान को कभी भी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं होगी शर्तें नहीं मानी गईं तो कोई समझौता नहीं होगा वेंस बोले–‘प्रगति हुई है’ अमेरिकी उपराष्ट्रपति J. D. Vance ने Fox News को बताया: परमाणु मुद्दे पर बातचीत में “कुछ प्रगति” हुई है अमेरिका इस प्रक्रिया को एक बड़े समझौते के साथ खत्म करना चाहता है “अब आगे बढ़ने के लिए कदम ईरान को उठाना होगा” क्या झुका ईरान? रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान यूरेनियम संवर्धन पर कुछ नरमी दिखाने को तैयार हुआ है पहले जहां पूरी तरह इनकार था, अब सीमित और नियंत्रित कमी पर सहमति के संकेत हैं यही वजह है कि बातचीत का रास्ता फिर से खुलता दिख रहा है। कब और कहां हो सकती है अगली बैठक? रिपोर्ट्स के अनुसार: अगला दौर 16 अप्रैल के आसपास हो सकता है संभावित जगहें: Geneva Islamabad हालांकि, अभी आधिकारिक तौर पर तारीख और स्थान तय नहीं हुए हैं। कौन कर रहा है मध्यस्थता? खबरों के मुताबिक: Turkey दोनों देशों के बीच दूरी कम करने की कोशिश कर रहा है क्षेत्रीय मध्यस्थ भी लगातार बातचीत में लगे हैं क्यों फेल हुई थी पहली वार्ता? पहले दौर में मुख्य विवाद: अमेरिका की मांग: 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन बंद उच्च स्तर का भंडार देश से बाहर हटाना ईरान का प्रस्ताव: सीमित अवधि में नियंत्रित कमी इसी मतभेद के चलते समझौता नहीं हो पाया था। क्या आगे बन सकता है समझौता? ताजा संकेत बताते हैं कि: दोनों पक्ष अब कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन नाकेबंदी और सैन्य दबाव अभी भी जारी है अगर ईरान अपनी शर्तों में और नरमी दिखाता है, तो आने वाले दिनों में एक बड़ा समझौता संभव हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर इस संभावित Peace Talk-2 पर टिकी है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
JD Vance commenting on Iran-US tensions and Strait of Hormuz security concerns during interview
Iran–US Tension: वेंस का आरोप–ईरान कर रहा ‘आर्थिक आतंकवाद’, होर्मुज को लेकर सख्त चेतावनी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच J. D. Vance ने Iran पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को रोककर “आर्थिक आतंकवाद” कर रहा है। ‘आर्थिक आतंकवाद’ का आरोप Fox News को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा: ईरान जहाजों की आवाजाही रोककर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहा है “अगर ईरान आर्थिक आतंकवाद करेगा, तो अमेरिका भी सख्त जवाब देगा” उन्होंने साफ किया कि अमेरिका ऐसी स्थिति में ईरानी जहाजों की आवाजाही भी रोक सकता है। ट्रंप की नीति का हवाला वेंस ने कहा कि Donald Trump ने यह दिखा दिया है कि: “यह खेल दोनों तरफ से खेला जा सकता है” अमेरिका जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है यहां किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है न्यूक्लियर मुद्दे पर भी सख्ती वेंस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी कड़ा रुख अपनाया: ईरान को यूरेनियम संवर्धन पर नियंत्रण देना होगा एक मजबूत जांच प्रणाली लागू होनी चाहिए ताकि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके इस्लामाबाद वार्ता का जिक्र Islamabad में हुई हालिया वार्ता का जिक्र करते हुए वेंस ने कहा: बातचीत में “काफी प्रगति” हुई लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका “अब गेंद ईरान के पाले में है” बढ़ता टकराव इस बयान के बाद साफ है कि: अमेरिका और Iran के बीच तनाव और बढ़ सकता है कूटनीतिक बातचीत जारी है, लेकिन सैन्य और आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है दुनिया की नजर अब इस पर है कि क्या दोनों देश समझौते की दिशा में आगे बढ़ते हैं या टकराव और गहरा होता है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
JD Vance speaking on Iran-US nuclear talks after Islamabad negotiations amid rising Middle East tensions
Iran–US Tension: ‘गेंद अब ईरान के पाले में’, इस्लामाबाद वार्ता के बाद बोले वेंस

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच J. D. Vance ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि Islamabad में हुई शांति वार्ता में “अच्छी प्रगति” हुई है, लेकिन अब अगला कदम Tehran को उठाना होगा। वेंस ने साफ कहा–“गेंद अब ईरान के पाले में है।” 21 घंटे चली वार्ता, लेकिन समझौता नहीं अमेरिका और Iran के बीच वीकेंड पर इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक चली लंबी बातचीत किसी ठोस समझौते पर खत्म नहीं हो सकी। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान ने न्यूक्लियर फ्यूल एनरिचमेंट रोकने की शर्त मानने से इनकार कर दिया। ‘सही दिशा में बढ़ी बातचीत’ Fox News को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि हालात बिगड़े नहीं हैं, बल्कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा: “कुछ पॉजिटिव संकेत मिले हैं” “सामने वाला पक्ष भी आगे बढ़ा” “हालांकि, उम्मीद के मुताबिक प्रगति नहीं हुई” न्यूक्लियर एम्बिशन पर अमेरिका सख्त वेंस ने जोर देकर कहा कि अगर ईरान अपने न्यूक्लियर एम्बिशन पर अमेरिका की शर्तें मान लेता है, तो दोनों देशों के बीच बड़ा समझौता संभव है। उन्होंने कहा, “क्या हम आगे बातचीत करेंगे? क्या समझौता होगा? यह अब ईरान पर निर्भर करता है।” क्यों रुकी बातचीत? वेंस के मुताबिक, ईरानी डेलिगेशन के पास अंतिम फैसला लेने का अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा: “टीम को तेहरान लौटना पड़ा” “अंतिम मंजूरी के लिए शीर्ष नेतृत्व से सहमति जरूरी है” किन नेताओं ने लिया हिस्सा? इस हाई-लेवल वार्ता में दोनों देशों के बड़े नेता शामिल हुए: अमेरिका की ओर से: J. D. Vance, Steve Witkoff, Jared Kushner ईरान की ओर से: Mohammad Bagher Ghalibaf, Abbas Araghchi आगे क्या? इस्लामाबाद वार्ता के बाद अब नजरें तेहरान पर हैं। अगर ईरान अमेरिका की शर्तों पर नरमी दिखाता है, तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है। फिलहाल, कूटनीतिक हल की उम्मीद कायम है, लेकिन स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
US-Iran high-level talks collapse in Islamabad after Strait of Hormuz and nuclear dispute tensions
अमेरिका-ईरान वार्ता फेल: अराघची बोले–“दुश्मनी का जवाब अब दुश्मनी से”

Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली हाई-लेवल बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। इस वार्ता के टूटने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। अराघची का आरोप–अमेरिका ‘वादे से मुकरा’ ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि समझौता लगभग तय था, लेकिन आखिरी समय में अमेरिका ने अपनी शर्तें बदल दीं। उन्होंने ‘मैक्सिमलिज्म’ का आरोप लगाते हुए कहा कि वॉशिंगटन ने जरूरत से ज्यादा मांग रखकर बातचीत को विफल कर दिया। अराघची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर अमेरिका अच्छी नीयत दिखाता, तो जवाब भी वैसा ही मिलता–लेकिन अब “दुश्मनी का जवाब दुश्मनी से दिया जाएगा।” जेडी वेंस का तंज अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance भी इस बैठक में शामिल थे। उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका। वेंस ने कहा कि यह विफलता अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए नुकसानदायक है। किन मुद्दों पर फंसी बात? रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत दो बड़े मुद्दों पर अटक गई: Strait of Hormuz पर नियंत्रण ईरान का परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन ईरानी मीडिया ने अमेरिकी रुख को ‘अवास्तविक’ बताया और कहा कि बुनियादी समझौते का ढांचा तक तैयार नहीं हो पाया। ट्रंप की धमकियों पर ईरान का जवाब ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि Donald Trump की धमकियों का कोई असर नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी–“अगर अमेरिका लड़ाई चाहता है, तो हम भी तैयार हैं, और अगर बातचीत करेगा तो हम भी तर्क से जवाब देंगे।”  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
High-level diplomatic talks between US, Iran and Pakistan delegation in Islamabad discussing ceasefire mediation efforts
‘इस्लामाबाद टॉक्स’ बेनतीजा, फिर भी पाकिस्तान ने दिखाई कूटनीतिक ताकत

पाकिस्तान की मेज़बानी में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हाई-लेवल बातचीत बिना किसी ठोस समझौते के खत्म हो गई। हालांकि, इस वार्ता को पूरी तरह नाकाम नहीं माना जा रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने कहा कि बातचीत “कठिन लेकिन सकारात्मक” रही और दोनों पक्षों ने युद्धविराम की दिशा में प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान आगे भी दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहेगा। वार्ता में शामिल JD Vance और ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान की मेज़बानी की सराहना करते हुए उसे “अच्छा मेज़बान” बताया। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की कूटनीतिक छवि को मजबूती मिली है।  पाकिस्तान को क्या मिला? विशेषज्ञों के मुताबिक, इस वार्ता से पाकिस्तान को कई कूटनीतिक फायदे मिले: वैश्विक छवि मजबूत: पाकिस्तान ने खुद को एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में पेश किया दोनों पक्षों की सराहना: JD Vance और ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान को “अच्छा मेज़बान” बताया डिप्लोमैटिक एक्टिविटी बढ़ी: अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की सक्रियता दिखी इसहाक डार का बयान पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने कहा कि: बातचीत “कठिन लेकिन सकारात्मक” रही दोनों पक्षों ने युद्धविराम की प्रतिबद्धता दिखाई पाकिस्तान आगे भी मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहेगा क्या वाकई बातचीत फेल हुई? विशेषज्ञ Farooq Hasnat के अनुसार: ऐसी वार्ताएं लंबी प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं इसे पूरी तरह विफल नहीं कहा जा सकता असल में दोनों पक्ष अभी अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं निराशा भी, उम्मीद भी हालांकि समझौता न होने से Islamabad में कुछ निराशा जरूर है, लेकिन: वार्ता का मंच तैयार करना ही बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है भविष्य में समझौते की संभावना बनी हुई है आगे क्या? अगर तनाव फिर बढ़ता है, तो पाकिस्तान के सामने चुनौती होगी: मध्यस्थ की भूमिका बनाए रखना दोनों देशों के बीच भरोसा कायम रखना क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देना

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
US Vice President JD Vance arrives in Islamabad for crucial US-Iran peace talks amid Middle East tensions.
अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, शांति की राह पर बड़े सवाल

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच JD Vance के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शनिवार को Islamabad पहुंच गया, जहां United States और Iran के बीच अहम शांति वार्ता होने जा रही है। यह बातचीत छह सप्ताह से जारी संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों के तहत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसने न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है। वार्ता से पहले ही सख्त रुख, ईरान की नई शर्तें औपचारिक बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संकेत दिए हैं कि बातचीत आसान नहीं होगी। ईरानी संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि वार्ता तभी आगे बढ़ेगी जब United States लेबनान में स्थिति और ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करने जैसे मुद्दों पर ठोस आश्वासन देगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका “ईमानदार समझौता” पेश करता है, तो ईरान बातचीत के लिए तैयार है। ट्रंप का सख्त संदेश, वेंस का संतुलित बयान वार्ता से पहले Donald Trump ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान के पास “कोई पत्ते नहीं हैं” और वह सिर्फ बातचीत के जरिए ही स्थिति संभाल सकता है। दूसरी ओर, जेडी वेंस ने उम्मीद जताई कि बातचीत सकारात्मक दिशा में जा सकती है, लेकिन चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने चाल चलने की कोशिश की तो अमेरिका सख्त रुख अपनाएगा। भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल और कड़ी सुरक्षा इस वार्ता की गंभीरता का अंदाजा दोनों पक्षों के बड़े प्रतिनिधिमंडलों से लगाया जा सकता है। ईरान की ओर से करीब 70 सदस्यीय टीम पहुंची है, जबकि अमेरिका की ओर से पहले से ही लगभग 100 अधिकारियों की टीम Islamabad में मौजूद है। पाकिस्तान सरकार ने राजधानी में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की है, जिसमें हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार हाल ही में घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम के बावजूद हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं। Strait of Hormuz में अब भी पाबंदियां बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। वहीं Lebanon में Hezbollah और Israel के बीच झड़पें जारी हैं, जिससे शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर टिकी नजरें इस संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति, तेल कीमतों और वैश्विक व्यापार पर गहरा असर डाला है। ईरान जहां प्रतिबंध हटाने और Strait of Hormuz पर नियंत्रण की मांग कर रहा है, वहीं अमेरिका इस पर सख्त रुख बनाए हुए है। ऐसे में यह वार्ता न केवल क्षेत्रीय शांति बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी निर्णायक साबित हो सकती है। अनिश्चित भविष्य, समझौता या टकराव? दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दों पर अब भी गहरी खाई बनी हुई है। पाकिस्तान के सूत्रों के मुताबिक, वार्ताकारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं - या तो ठोस समझौता करें या बातचीत छोड़ दें। ऐसे में आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह वार्ता शांति की ओर बढ़ेगी या फिर क्षेत्र एक बार फिर संघर्ष की ओर लौटेगा।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
US and Iranian delegations meet in Islamabad for peace talks amid Strait of Hormuz tensions.
ईरान को ट्रंप की दो टूक: बिना समझौते भी खुलेगा होर्मुज, वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचे जेडी वेंस

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए साफ कहा है कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को हर हाल में खोला जाएगा - चाहे इसके लिए किसी समझौते का इंतजार करना पड़े या नहीं। “डील हो या न हो, रास्ता खुलेगा” अमेरिका के जॉइंट बेस एंड्रयूज में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान अब सैन्य रूप से कमजोर हो चुका है और अमेरिका इस रणनीतिक जलडमरूमध्य को खोलने के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर बातचीत में देरी होती है, तो अमेरिका “दूसरे विकल्प” अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगा। पाकिस्तान में शांति वार्ता की पहल इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय टीम Islamabad पहुंच चुकी है। इस टीम में Steve Witkoff Jared Kushner जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यह प्रतिनिधिमंडल ईरान के साथ शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ईरान की दो सख्त शर्तें दूसरी ओर, ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान पहुंच चुका है। ईरान ने बातचीत से पहले दो बड़ी शर्तें रखी हैं: लेबनान में तत्काल सीजफायर ईरान के रोके गए फंड की रिहाई ईरानी टीम में विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। सीजफायर पर उलझन बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर अब भी मतभेद बने हुए हैं। Islamic Republic of Iran Broadcasting के अनुसार, ईरान चाहता है कि लेबनान में इजरायली हमले भी इस समझौते में शामिल हों। हालांकि, अमेरिका और इजरायल ने साफ किया है कि Hezbollah के खिलाफ ऑपरेशन इस सीजफायर का हिस्सा नहीं होगा। दुनिया की नजर इस्लामाबाद बैठक पर व्हाइट हाउस के मुताबिक, 11 अप्रैल को Islamabad में पहली औपचारिक बैठक है। इस बातचीत को पश्चिम एशिया में जारी तनाव को खत्म करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब सवाल यही है - क्या ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा रहेगा या बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता निकलेगा? पूरी दुनिया की नजरें इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग पर टिकी हैं।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
US Vice President JD Vance amid discussions on Iran-US conflict and possible Pakistan visit
ईरान युद्ध खत्म करने की कोशिश तेज: 3 दिन में पाकिस्तान जा सकते हैं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच युद्धविराम की कोशिशें अब तेज होती नजर आ रही हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, JD Vance (अमेरिका के उपराष्ट्रपति) अगले तीन दिनों के भीतर Pakistan का दौरा कर सकते हैं। इस संभावित यात्रा का उद्देश्य Iran और United States के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाना बताया जा रहा है। क्या कहती हैं रिपोर्ट्स? अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन पाकिस्तान में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें जेडी वेंस की भागीदारी संभव है। हालांकि, अभी तक इस यात्रा की तारीख, स्थान और भागीदारी को लेकर अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। ईरान ने किनसे बातचीत से किया इनकार? सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने Steve Witkoff और Jared Kushner जैसे अमेरिकी दूतों के साथ दोबारा बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके बाद पाकिस्तान ने नए चेहरे के तौर पर जेडी वेंस का नाम आगे बढ़ाया है, जिससे वार्ता को नई दिशा मिल सके। पाकिस्तान क्यों बना रहा है खुद को मध्यस्थ? Shehbaz Sharif ने हाल ही में कहा था कि उनका देश “सार्थक और निर्णायक बातचीत” को संभव बनाने के लिए तैयार है। पाकिस्तान लगातार यह कोशिश कर रहा है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाए और इस्लामाबाद को बातचीत का केंद्र बनाया जाए। व्हाइट हाउस का क्या रुख? व्हाइट हाउस ने फिलहाल इस यात्रा को लेकर कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं की है। प्रेस सचिव ने कहा कि जेडी वेंस पहले से ही राष्ट्रीय सुरक्षा टीम का अहम हिस्सा हैं, लेकिन उनकी भूमिका में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। साथ ही, अमेरिका ने यह भी साफ नहीं किया कि वह ईरान से किस स्तर पर बातचीत कर रहा है। क्या जल्द खत्म होगा युद्ध? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान में यह वार्ता होती है, तो यह युद्धविराम की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच अविश्वास और सख्त रुख को देखते हुए बातचीत आसान नहीं मानी जा रही।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0