JD Vance

Benjamin Netanyahu on India: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि अमेरिका के अलावा भारत भी इजरायल का एक मजबूत और भरोसेमंद सहयोगी है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब आबादी वाले भारत से उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है। नेतन्याहू का यह ब
अमेरिका ही नहीं, भारत भी हमारे साथ; इजरायली पीएम नेतन्याहू का दावा, भारत से मिल रहा जबरदस्त समर्थन

Benjamin Netanyahu on India: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि अमेरिका के अलावा भारत भी इजरायल का एक मजबूत और भरोसेमंद सहयोगी है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब आबादी वाले भारत से उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र ताकतवर सहयोगी है। 'भारत से मिल रहा है जबरदस्त समर्थन' फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के कई मित्र देश हैं और भारत उनमें प्रमुख है। उन्होंने कहा, "अमेरिका के अलावा हमारे और भी दोस्त हैं। भारत भी उनमें से एक है। 1.4 अरब आबादी वाले इस देश से हमें जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।" नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि उन्हें सोशल मीडिया, विशेष रूप से फेसबुक पर भारतीयों का व्यापक समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत से बड़ी संख्या में समर्थक जुड़े हुए हैं। भारत-इजरायल संबंधों का किया जिक्र इजरायली प्रधानमंत्री ने भारत और इजरायल के बीच मजबूत होते संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों से रणनीतिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी अच्छे संबंध हैं। इसी वर्ष नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना "पर्सनल फ्रेंड" बताया था और भारत को एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति (Global Power) कहा था। जेडी वेंस ने क्या कहा था? नेतन्याहू की यह टिप्पणी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही इस समय ऐसे नेता हैं, जो पूरी मजबूती से इजरायल के साथ खड़े हैं। वेंस ने कहा था कि यदि वह इजरायल की सरकार में होते, तो अपने सबसे बड़े और ताकतवर सहयोगी अमेरिका की सार्वजनिक आलोचना नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में इजरायल की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अधिकांश हथियार अमेरिका में बने हैं और उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं के पैसे से उठाया गया है। पीएम मोदी के इजरायल दौरे का भी किया जिक्र रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2025 में इजरायल का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत पूरी मजबूती और विश्वास के साथ इजरायल के साथ खड़ा है। यह बयान ऐसे समय आया था, जब कुछ दिनों बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी, जिसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था। रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, तकनीक, नवाचार और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देश आतंकवाद विरोधी सहयोग और सामरिक साझेदारी को भी मजबूत करने पर लगातार काम कर रहे हैं। नेतन्याहू का ताजा बयान दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों की एक और पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Iranian Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf speaks during a televised interview, accusing Israel of trying to derail a reported Iran-US agreement amid ongoing regional tensions.
ईरान का दावा- इजरायल बिगाड़ना चाहता है अमेरिका से हुई डील, गालिबाफ बोले- ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद

  तेहरान: ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने दावा किया है कि इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौते को सफल नहीं होने देना चाहता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी इस समझौते को लेकर मतभेद मौजूद हैं। स्विट्जरलैंड की यात्रा से लौटने के बाद एक टीवी इंटरव्यू में गालिबाफ ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुए 14 बिंदुओं वाले "इस्लामाबाद समझौते" को लागू करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इजरायल इसके रास्ते में बाधा डाल रहा है। 'इजरायल समझौते से घबराया हुआ है' ईरानी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि यह समझौता लेबनान में युद्ध समाप्त करने, विस्थापित लोगों की वापसी सुनिश्चित करने और कब्जे वाले क्षेत्रों से सेना हटाने जैसे प्रावधानों पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल इस समझौते का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि यह उसके और अमेरिका के लिए "हार का दस्तावेज" साबित होगा। गालिबाफ ने कहा कि समझौते पर सहमति बनने के बाद इजरायल ने लेबनान में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दीं, ताकि समझौते के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो। लेबनान की संप्रभुता पर दिया जोर ईरानी संसद अध्यक्ष ने कहा कि समझौते के अनुसार लेबनान की सुरक्षा की जिम्मेदारी वहां की सरकार के पास होगी और देश की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सीमाओं का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विस्थापित नागरिकों को अपने घर लौटने का अधिकार मिलना चाहिए और कब्जा किए गए इलाकों से सैन्य बलों की वापसी होनी चाहिए। 'अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी मतभेद' गालिबाफ ने दावा किया कि समझौते को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी अलग-अलग राय है। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और उपराष्ट्रपति JD Vance का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। उनके अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों की कुछ गतिविधियां इस समझौते की भावना के अनुरूप नहीं थीं। दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं ईरान की ओर से किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका या इजरायल की ओर से भी इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्र में जारी तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी घटनाक्रमों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
US airstrikes target Iranian military sites after alleged drone attack on a commercial cargo ship in the Strait of Hormuz
ट्रंप की डील मतलब… छिटपुट हमले! फिर भिड़े ईरान-अमेरिका, बरसाने लगे बारूद; होर्मुज फिर हुआ ब्लॉक

  US-Iran Attack Hormuz Strait: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमले के आरोप के बाद अमेरिका ने ईरान के मिसाइल, ड्रोन भंडारण ठिकानों और तटीय रडार केंद्रों पर हवाई हमले किए। जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। ताजा घटनाक्रम के बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही एक बार फिर बाधित हो गई है। ड्रोन हमले के बाद अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि उसकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स पर सटीक हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार यह कार्रवाई 25 जून को M/V Ever Lovely नामक सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज पर हुए कथित ड्रोन हमले के जवाब में की गई। CENTCOM ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है और अमेरिकी बल लगातार समुद्री यातायात की सुरक्षा के लिए सहयोग कर रहे हैं। कार्रवाई के बाद अमेरिकी सेना ने हमलों का 37 सेकंड का वीडियो भी जारी किया। अमेरिका ने ईरान पर लगाया युद्धविराम उल्लंघन का आरोप अमेरिका का दावा है कि मालवाहक जहाज ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था, तभी उस पर ड्रोन हमला किया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया। CENTCOM ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना नौवहन की स्वतंत्रता पर हमला है और इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है। हमलों की जगह का खुलासा नहीं अमेरिका ने यह नहीं बताया कि ईरान के किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया गया। उधर ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरिक के ताहेरोयेह घाट के पास देर रात विस्फोटों की आवाज सुनी गई। सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा गया कि क्षेत्र में किसी प्रोजेक्टाइल के गिरने से धमाके हुए। ट्रंप बोले- युद्धविराम का 'मूर्खतापूर्ण उल्लंघन' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित ड्रोन हमले को युद्धविराम समझौते का "मूर्खतापूर्ण उल्लंघन" बताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि एक ड्रोन ने बेहद महंगे मालवाहक जहाज को सीधे निशाना बनाया, जबकि तीन अन्य ड्रोन को मार गिराया गया। ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि युद्धविराम का मतलब पूरी तरह गोलीबारी बंद होना नहीं, बल्कि हिंसा में कमी आना है। ताजा घटनाओं ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर बढ़ा दिया है। जेडी वेंस ने दी सख्त चेतावनी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यदि ईरान की ओर से दोबारा हमला किया गया तो अमेरिका उसका कड़ा जवाब देगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि ईरान को समझौते के किसी पहलू पर आपत्ति है तो बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा। ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही समय बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया है। IRGC ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने फिर किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई की तो उसका जवाब पहले से कहीं अधिक व्यापक होगा। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने शांति समझौते के अनुच्छेद-5 का उल्लंघन किया है। ईरान का कहना है कि जिस मालवाहक जहाज को निशाना बनाया गया, उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना अनुमति निर्धारित मार्ग से अलग रास्ता अपनाया था। फिर ठप हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य से होता है। फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद यहां समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया था। बाद में युद्धविराम के बाद सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हुई थी। अब ताजा हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद एक बार फिर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अप्रैल से लागू है युद्धविराम अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है। इसके बावजूद बीच-बीच में समुद्री सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच 17 जून को 14 सूत्रीय शांति समझौते पर सहमति बनी थी, जिसमें सैन्य गतिविधियां रोकने और 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया गया था। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच पहली दौर की वार्ता भी हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 28 और 29 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में दूसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित है, जहां स्थायी शांति समझौते के अगले चरण पर चर्चा की जाएगी।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
US Senate votes on proposal to limit President Trump's military powers regarding Iran conflict.
ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप प्रशासन को झटका, अमेरिकी सीनेट ने सीमित करने वाले प्रस्ताव को दी मंजूरी

  अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य शक्तियों को सीमित करने से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य अभियान में राष्ट्रपति की स्वतंत्र कार्रवाई पर नियंत्रण सुनिश्चित करना है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ संभावित शांति समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर कूटनीतिक प्रयासों में भी जुटा हुआ है। 50-48 वोट से पारित हुआ प्रस्ताव मंगलवार को हुए मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 50 और विरोध में 48 वोट पड़े। दिलचस्प बात यह रही कि राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों—रैंड पॉल, सुसान कॉलिन्स, लिसा मर्कोव्स्की और बिल कैसिडी—ने डेमोक्रेट सांसदों के साथ मिलकर प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं, डेमोक्रेट सांसद जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। इस मतदान ने अमेरिकी राजनीति में ईरान नीति को लेकर दोनों दलों के भीतर मौजूद मतभेदों को भी उजागर कर दिया। प्रतिनिधि सभा से भी मिल चुकी है मंजूरी इससे पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है। वहां यह प्रस्ताव 215-208 वोटों से पारित हुआ था। हाउस में भी कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर इसका समर्थन किया था। प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसकी आलोचना करते हुए समर्थक सांसदों को निशाने पर लिया था। क्या है इस प्रस्ताव का उद्देश्य? यह प्रस्ताव अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच युद्ध संबंधी शक्तियों के संतुलन से जुड़ा हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति किसी बड़े सैन्य संघर्ष में देश को शामिल करने से पहले कांग्रेस की स्वीकृति प्राप्त करें। अमेरिका में लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि सैन्य कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में कांग्रेस की भूमिका को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि युद्ध संबंधी निर्णयों पर लोकतांत्रिक नियंत्रण बना रहे। क्या ट्रंप प्रशासन पर पड़ेगा कोई असर? राजनीतिक रूप से यह प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन कानूनी दृष्टि से इसका प्रभाव सीमित है। यह एक "कॉनकरेंट रिजॉल्यूशन" है, जिसे कानून का दर्जा प्राप्त नहीं होता और न ही इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होती है। व्हाइट हाउस का कहना है कि इस प्रस्ताव का प्रशासन की सैन्य नीति पर कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रशासन के अनुसार, यह केवल एक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश है। व्हाइट हाउस ने बताया प्रतीकात्मक कदम व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने प्रस्ताव को महज राजनीतिक अभिव्यक्ति बताया है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों पर इसका कोई प्रत्यक्ष असर नहीं पड़ेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले पहले की तरह कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे। प्रशासन ने यह भी दावा किया कि वर्तमान में ईरान के साथ किसी सक्रिय सैन्य संघर्ष की स्थिति नहीं है और हालिया युद्धविराम के बाद तनाव में कमी आई है। कांग्रेस में बढ़ रही सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंता सीनेट में हुए इस मतदान ने संकेत दिया है कि कांग्रेस के कई सदस्य मध्य पूर्व में संभावित सैन्य तनाव को लेकर चिंतित हैं। सांसदों का एक वर्ग मानता है कि बिना कांग्रेस की मंजूरी के बड़े सैन्य कदम उठाने से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है और अमेरिका लंबे संघर्ष में उलझ सकता है। इसी वजह से हाल के महीनों में ईरान से जुड़े युद्ध शक्तियों के मुद्दे पर कांग्रेस में कई बार बहस और मतदान हो चुके हैं। अमेरिका-ईरान वार्ता पर बनी हुई है नजर सीनेट के इस फैसले के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच हाल में हुई वार्ताओं को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सीनेट का यह प्रस्ताव भले ही कानूनी रूप से बाध्यकारी न हो, लेकिन यह स्पष्ट संकेत देता है कि अमेरिकी संसद का एक बड़ा वर्ग ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई पर अधिक राजनीतिक और संसदीय निगरानी चाहता है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
US Vice President JD Vance speaks during diplomatic talks as Republican senators criticize Pakistan and Qatar over terrorism concerns.
'आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास', पाकिस्तान पर बरसे अमेरिकी सांसद; J.D. Vance के बयान पर उठाए सवाल

  वॉशिंगटन: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पाकिस्तान के प्रति नरम रुख और "हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं" वाले बयान ने अमेरिका की घरेलू राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। वेंस के बयान के बाद दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने पाकिस्तान और कतर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दोनों देशों पर आतंकवादियों को पनाह देने और चरमपंथी संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। रिक स्कॉट बोले- पाकिस्तान और कतर का आतंकियों को शरण देने का इतिहास Rick Scott ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुनिया को अब यह समझ जाना चाहिए कि अमेरिका के असली सहयोगी कौन हैं। उन्होंने लिखा, "कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है। दोनों देश सार्थक शांति स्थापित करने के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकी नेटवर्क को बढ़ावा देने में अधिक रुचि रखते हैं।" स्कॉट ने यह भी कहा कि ईरान के साथ ऐसा समझौता संभव है जो सभी पक्षों के हित में हो, लेकिन किसी भी स्थिति में तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जेडी वेंस के बयान से बढ़ा विवाद विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब JD Vance ने स्विट्जरलैंड में अमेरिका, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान कहा था कि "हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं।" वेंस उस समय ईरान के साथ संभावित शांति समझौते की तकनीकी और कूटनीतिक बारीकियों पर चर्चा कर रहे थे। उनके इस बयान के बाद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही पाकिस्तान को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। टिम शीही ने दिलाई ओसामा बिन लादेन की याद Tim Sheehy ने भी पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को उसके अतीत को नहीं भूलना चाहिए। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "हमें यह याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान ने एक दशक तक ओसामा बिन लादेन को अपने यहां छिपाकर रखा था।" शीही ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अतीत में ऐसे तत्वों को समर्थन दिया, जिन्होंने अमेरिकी हितों के खिलाफ काम किया। UAE, इजरायल और सऊदी अरब को बातचीत में शामिल करने की मांग सीनेटर शीही ने कहा कि यदि पाकिस्तान और कतर को मध्यस्थ की भूमिका दी जा रही है, तो अमेरिका को अपने पारंपरिक सहयोगियों को भी वार्ता प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा, "संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और सऊदी अरब मध्य पूर्व में अमेरिका के सबसे विश्वसनीय सहयोगी हैं। किसी भी शांति प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।" कतर पर भी लगाए गंभीर आरोप शीही ने कतर पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह वर्षों से विभिन्न चरमपंथी संगठनों के लिए वित्तीय नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा, "यह मान लेना कि पाकिस्तान और कतर पूरी तरह निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे, वास्तविकता से दूर है।" अमेरिका में पाकिस्तान की भूमिका पर फिर छिड़ी बहस रिपब्लिकन सांसदों के बयानों से साफ है कि अमेरिका में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर पुराने सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। जेडी वेंस के हालिया बयान के बाद वॉशिंगटन में यह बहस तेज हो गई है कि मध्य पूर्व की नई कूटनीतिक पहल में पाकिस्तान और कतर की भूमिका कितनी प्रभावी और निष्पक्ष मानी जा सकती है।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
US Vice President JD Vance speaks after Switzerland talks, announcing Iran's willingness to allow IAEA inspectors back into nuclear facilities.
अमेरिका ने ईरानी तेल प्रतिबंधों में दी अस्थायी ढील, वेंस बोले- परमाणु निरीक्षण के लिए तैयार हुआ तेहरान

  वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई दो दिवसीय वार्ता के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को दोबारा अपने परमाणु प्रतिष्ठानों तक पहुंच देने पर सहमत हो गया है। यदि यह सहमति औपचारिक रूप लेती है, तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय निगरानी फिर से शुरू हो सकेगी। इसी बीच, ट्रंप प्रशासन ने ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लगे कुछ प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। इस कदम को दोनों देशों के बीच जारी वार्ता को आगे बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। अगस्त तक ईरानी तेल निर्यात को मिली राहत अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से जारी छूट के तहत अगस्त तक ईरानी कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों की बिक्री, परिवहन और कुछ वित्तीय गतिविधियों को सीमित अनुमति दी गई है। यह हाल के वर्षों में ईरान को दी गई सबसे बड़ी आर्थिक रियायतों में से एक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ईरान की अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में रही है। वेंस का दावा- अमेरिकी किसानों को भी होगा फायदा जेडी वेंस ने कहा कि यदि भविष्य में ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी किया जाता है, तो उसका एक हिस्सा अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "यदि ईरानी संपत्तियां मुक्त होती हैं, तो इससे अमेरिकी किसानों को लाभ मिलेगा और ईरानी लोगों की खाद्य जरूरतें पूरी करने में भी मदद मिलेगी।" वेंस ने यह भी संकेत दिया कि आगामी 60 दिनों के दौरान तकनीकी स्तर की वार्ताएं जारी रहेंगी, जिनका उद्देश्य एक स्थायी समझौते तक पहुंचना है। IAEA निरीक्षण को लेकर उठे सवाल वेंस के दावों पर कई विशेषज्ञों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि IAEA निरीक्षण की व्यवस्था पहले से ही 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) का हिस्सा थी, जिसे 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समाप्त कर दिया था। कई विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा पहल पुराने ढांचे को ही नए स्वरूप में पुनर्जीवित करने की कोशिश है। वार्ता के दौरान दिखा तनाव स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हुई वार्ता के दौरान कई बार तनाव की स्थिति भी बनी। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयानों और लेबनान से जुड़े मुद्दों पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अस्थायी रूप से बैठक छोड़ने की चेतावनी दी थी। उपराष्ट्रपति वेंस के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्ष दोबारा बातचीत की मेज पर लौटे और वार्ता आगे बढ़ सकी। पाकिस्तान और कतर ने निभाई अहम भूमिका पूरी बातचीत के दौरान पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। दोनों देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच संवाद बनाए रखने और संभावित समझौते की दिशा में माहौल तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इजरायल समर्थक खेमे में बढ़ी चिंता ईरानी तेल प्रतिबंधों में ढील और परमाणु निगरानी को लेकर चल रही वार्ता ने अमेरिका के इजरायल समर्थक राजनीतिक वर्ग में चिंता बढ़ा दी है। कई नेताओं का मानना है कि प्रतिबंधों में राहत से ईरान को आर्थिक मजबूती मिल सकती है, जिसका क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, अगले 60 दिन अमेरिका और ईरान के रिश्तों के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं। यदि दोनों पक्ष बातचीत को आगे बढ़ाने में सफल रहते हैं, तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक नई शुरुआत हो सकती है।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
US Vice President JD Vance attends peace talks with Iranian delegates in Switzerland amid efforts to ease Middle East tensions.
अमेरिका ने ईरान के सामने रखी दोस्ती की बड़ी शर्त, मिडिल ईस्ट में शांति के लिए स्विट्जरलैंड में मंथन जारी

  बर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड): मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में स्थायी शांति बहाल करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच अहम शांति वार्ता शुरू हो गई है। इस बातचीत में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव, परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। बैठक के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता को "ऐतिहासिक अवसर" करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका, ईरान के साथ अपने संबंधों को नई और सकारात्मक दिशा देने के लिए तैयार है। ईरान के सामने अमेरिका की बड़ी शर्त जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका, ईरान के साथ संबंध सामान्य करने और दोस्ती का नया अध्याय शुरू करने को तैयार है, लेकिन इसके लिए तेहरान को दो महत्वपूर्ण शर्तों को स्थायी रूप से स्वीकार करना होगा— क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष फैलाने वाली नीतियों का त्याग। परमाणु हथियार हासिल करने की महत्वाकांक्षा को हमेशा के लिए छोड़ना। वेंस ने कहा कि यदि ईरान इन दोनों मुद्दों पर सकारात्मक और स्थायी कदम उठाता है, तो वाशिंगटन उसके साथ रिश्तों को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है। होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु मुद्दे पर प्रगति का दावा अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने जैसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक लक्ष्यों की दिशा में पहले ही महत्वपूर्ण प्रगति हो चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह वार्ता मध्य पूर्व में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए रास्ते खोलेगी। पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना जेडी वेंस ने इस शांति वार्ता को संभव बनाने में पाकिस्तान की भूमिका की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की कूटनीतिक कोशिशों ने अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वेंस ने आसिम मुनीर को "एक महान सैन्य नेता और कुशल राजनयिक" बताया। भारतीय पत्नी और पाकिस्तानी जनरल का किया जिक्र हल्के-फुल्के अंदाज में जेडी वेंस ने कहा कि उनकी जिंदगी में दो बेहद महत्वपूर्ण लोग हैं—एक उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस और दूसरे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में उनकी जनरल मुनीर के साथ लगातार बातचीत हुई है और क्षेत्रीय शांति स्थापित करने के प्रयासों में उनका सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। मिडिल ईस्ट में शांति और ऊर्जा सुरक्षा पर नजर वेंस ने उम्मीद जताई कि स्विट्जरलैंड में जारी यह वार्ता मध्य पूर्व में तनाव कम करने, तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह वार्ता सफल रहती है, तो न केवल क्षेत्रीय संघर्ष कम हो सकते हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
US Vice President JD Vance arrives in Switzerland for talks with Iranian officials on nuclear issues and regional security.
स्विट्जरलैंड पहुंचे जेडी वेंस, ईरान को मिल सकता है 6 अरब डॉलर का फंड; परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज पर होगी अहम वार्ता

  बर्गेनस्टॉक/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance स्विट्जरलैंड पहुंच गए हैं। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच होने वाली इस वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, जमे हुए वित्तीय संसाधनों, लेबनान युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ईरान की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व Mohammad Bagher Ghalibaf कर रहे हैं। इसके अलावा ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi और केंद्रीय बैंक के गवर्नर भी वार्ता में शामिल हैं। ईरान को मिल सकता है 6 अरब डॉलर का फंड रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने पर विचार कर रहा है। शुरुआती चरण में कतर में जमा करीब 6 अरब डॉलर की राशि को मानवीय जरूरतों से जुड़ी खरीदारी के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके बदले अमेरिका चाहता है कि ईरान संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को अपने परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति दे। यही इस वार्ता के प्रमुख एजेंडों में शामिल है। ट्रंप-पेजेशकियन समझौते के बाद पहली बड़ी वार्ता यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद आयोजित की जा रही है। समझौते में 60 दिनों की वार्ता अवधि तय की गई है, जिसका उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करना और स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है। जेडी वेंस बोले- वास्तविक ढांचा तैयार करना लक्ष्य स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले जेडी वेंस ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल बातचीत करना नहीं, बल्कि भविष्य की वार्ताओं के लिए एक "वास्तविक और व्यावहारिक ढांचा" तैयार करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि परमाणु मुद्दे और लेबनान युद्धविराम जैसे संवेदनशील विषयों पर प्रगति संभव है। पाकिस्तान भी निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका सूत्रों के मुताबिक, वार्ता में मध्यस्थ के रूप में Shehbaz Sharif और Asim Munir भी मौजूद हैं। वार्ता स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित होने की संभावना है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बनी रहेगी नजर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक Strait of Hormuz को लेकर भी तनाव बना हुआ है। ईरान पहले कह चुका है कि उसकी मंजूरी के बिना कोई जहाज इस मार्ग से नहीं गुजर सकता। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि जलडमरूमध्य खुला है और जहाजों की आवाजाही जारी है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा है कि 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान और उसके बाद भी इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टोल नहीं लगाया जाएगा। इजरायल से वार्ता प्रभावित होने की आशंका अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि Benjamin Netanyahu की नीतियां और लेबनान में जारी सैन्य गतिविधियां अमेरिका-ईरान वार्ता को प्रभावित कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्विट्जरलैंड में होने वाली यह वार्ता पश्चिम एशिया की राजनीति, परमाणु कूटनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Smoke rises over southern Lebanon after Israeli airstrikes as US-Iran peace talks in Switzerland are postponed.
US-ईरान शांति वार्ता को बड़ा झटका, जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा रद्द; इजरायली हमलों में लेबनान में 16 लोगों की मौत

  वॉशिंगटन/बेरूत: पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते को अंतिम रूप देने के लिए स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित उच्चस्तरीय वार्ता फिलहाल टल गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपना स्विट्जरलैंड दौरा रद्द कर दिया है। इस बीच इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं, जिनमें कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई है। ताजा घटनाक्रम ने अमेरिका-ईरान शांति पहल और पश्चिम एशिया में युद्धविराम की उम्मीदों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्साय समझौते के बाद भी नहीं रुके इजरायली हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में बुधवार को फ्रांस के वर्साय महल में अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रारंभिक 14-सूत्रीय समझौता हुआ था। इस समझौते का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को रोकना और सभी मोर्चों पर तत्काल सैन्य कार्रवाई समाप्त करना था। समझौते के कुछ ही घंटों बाद इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए। इन हमलों में 16 लोगों के मारे जाने की खबर है। नेतन्याहू ने पीछे हटने से किया इनकार इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हिजबुल्लाह का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक इजरायली सेना लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगी। नेतन्याहू के इस रुख ने युद्धविराम और क्षेत्रीय शांति की संभावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। स्विट्जरलैंड में होने वाली तकनीकी वार्ता टली अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक समझौते को स्थायी शांति समझौते में बदलने के लिए शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में तकनीकी स्तर की वार्ता प्रस्तावित थी। इस बैठक का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को करना था, लेकिन उन्होंने अपना स्विट्जरलैंड दौरा रद्द कर दिया, जिसके बाद यह वार्ता अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई। व्हाइट हाउस ने बताई 'लॉजिस्टिक्स' समस्या व्हाइट हाउस ने जेडी वेंस का दौरा रद्द होने के पीछे व्यवस्थागत और लॉजिस्टिक्स संबंधी कारणों का हवाला दिया है। हिजबुल्लाह समर्थक मीडिया संस्थान अल-मायादीन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने लेबनान पर इजरायल के लगातार हो रहे हमलों के विरोध में अपने प्रतिनिधिमंडल को स्विट्जरलैंड भेजने से इनकार कर दिया है। इजरायल को जेडी वेंस की दोटूक चेतावनी शांति समझौते के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि इस समय दुनिया में केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही ऐसे नेता हैं जो इजरायल के प्रति सबसे अधिक सहानुभूति रखते हैं। वेंस के बयान को इजरायल के आक्रामक सैन्य रुख पर अमेरिकी असंतोष और युद्ध रोकने के बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है। अधर में लटका 60 दिनों का युद्धविराम बुधवार को हुए समझौते के तहत कम-से-कम 60 दिनों के लिए संघर्षविराम बढ़ाने पर सहमति बनी थी। लेकिन लेबनान में जारी इजरायली हमलों और स्विट्जरलैंड वार्ता के टलने से पूरा शांति समझौता संकट में पड़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान में हिंसा नहीं रुकी, तो पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की यह बड़ी कूटनीतिक पहल पूरी तरह विफल हो सकती है। पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा अनिश्चितता का माहौल अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद लेबनान में जारी संघर्ष और इजरायल के सख्त रुख ने क्षेत्र में तनाव को फिर बढ़ा दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच कोई नया कूटनीतिक रास्ता निकलेगा या पश्चिम एशिया एक बार फिर व्यापक संघर्ष की ओर बढ़ेगा।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
US Vice President JD Vance speaks on diplomacy and Middle East security amid criticism of the America-Iran agreement from Israeli leaders.
‘हर समस्या का हल युद्ध नहीं’, जेडी वेंस ने इजराइल को दिया दो टूक संदेश; अमेरिका-ईरान समझौते का किया बचाव

  वॉशिंगटन/तेल अवीव: अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर इजराइली नेताओं की लगातार आलोचना के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजराइल को स्पष्ट संदेश दिया है कि हर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती का समाधान केवल सैन्य ताकत या युद्ध के जरिए नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत, कूटनीति और राजनीतिक प्रयासों पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में वेंस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति और हालिया अमेरिका-ईरान समझौते का बचाव करते हुए इजराइली नेतृत्व से अमेरिका के कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करने की अपील की। ‘हर समस्या का समाधान लोगों को मारकर नहीं निकाला जा सकता’ जेडी वेंस ने कहा कि इजराइल को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के लिए केवल सैन्य अभियानों और हमलों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप सिर्फ 90 लाख की आबादी वाला देश हैं। आप अपनी हर राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती का समाधान केवल लोगों को मारकर या सैन्य कार्रवाई के जरिए नहीं निकाल सकते।” वेंस ने संकेत दिया कि सुरक्षा संबंधी जटिल समस्याओं के समाधान के लिए कूटनीतिक संवाद और राजनीतिक समझौते जैसे विकल्पों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इजराइली नेताओं की आलोचना के बीच आया बयान जेडी वेंस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और इजराइल के राजनीतिक नेता अमेरिका-ईरान समझौते पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इजराइली नेतृत्व का आरोप है कि इस समझौते में: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पर्याप्त नियंत्रण की व्यवस्था नहीं है। बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से सीमित नहीं किया गया है। लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। अमेरिका की नीति का किया बचाव वेंस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति का उद्देश्य पश्चिम एशिया में तनाव कम करना और संघर्ष के स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका कूटनीतिक माध्यमों से क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने का प्रयास कर रहा है और सहयोगी देशों से भी इसी दिशा में रचनात्मक समर्थन की अपेक्षा रखता है। उन्होंने इशारों में यह भी कहा कि अमेरिका की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना करने के बजाय इजराइल को अपने सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी के साथ समन्वय बढ़ाने की जरूरत है। पश्चिम एशिया की राजनीति में बढ़ सकती है नई बहस विशेषज्ञों का मानना है कि जेडी वेंस का बयान अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान नीति को लेकर उभरते मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने लाता है। अमेरिका जहां कूटनीतिक समाधान और क्षेत्रीय तनाव कम करने पर जोर दे रहा है, वहीं इजराइल ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को लेकर अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता दे रहा है। अमेरिका-ईरान समझौते पर जारी बहस आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति और अमेरिका-इजराइल संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
US President Donald Trump speaks after claiming Iran agreed not to build nuclear weapons and denying reports of a $300 million payment.
Trump on Iran Nuclear Deal: ट्रंप का दावा- ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, 300 मिलियन डॉलर देने की खबर को बताया फेक न्यूज

  वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमति दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका शांति समझौते के तहत ईरान को 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने जा रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, "ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान को 300 मिलियन डॉलर दिए जाने की खबर पूरी तरह फर्जी है और इसे डेमोक्रेट्स द्वारा फैलाया जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से फिर शुरू हुई जहाजों की आवाजाही अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और कई तेल टैंकर सुरक्षित रूप से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से हुए डिजिटल शांति समझौते के बाद सामने आया है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है और इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है। शुक्रवार को हो सकती है अंतिम डील ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर औपचारिक रूप से आमने-सामने हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। 'होर्मुज हमेशा के लिए शुल्क मुक्त रहेगा' 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुए समझौते से यह सुनिश्चित होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य हमेशा के लिए शुल्क मुक्त रहेगा और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की निर्बाध आवाजाही जारी रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलीबाफ के साथ एक कार्यढांचा समझौते (Framework Agreement) पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर भी किए हैं। वैश्विक बाजार की नजर अंतिम समझौते पर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है, वैश्विक तेल आपूर्ति स्थिर हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर अभी भी आगे की वार्ताओं की जरूरत बनी हुई है।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Donald Trump speaks on Iran allegations as tensions rise over Indian ships in Strait of Hormuz
ईरान ने भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला किया? ट्रंप का बड़ा दावा, तेहरान ने आरोपों को बताया झूठ

ट्रंप ने ईरान पर लगाया भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की, जिसे विफल कर दिया गया। उन्होंने इस घटना को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया और ईरान की कड़ी आलोचना की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि भारतीय जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए चिंताजनक है। ओमान तट के पास हमलों के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब इस सप्ताह ओमान तट के पास भारतीय क्रू वाले कई जहाजों पर हमले हुए हैं। इनमें सबसे चर्चित मामला एमटी सेटेबेलो जहाज का रहा, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं को लेकर भारत पहले ही चिंता जता चुका है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नागरिक जहाजों पर हो रहे हमलों को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। ईरान ने ट्रंप के आरोपों को किया खारिज ट्रंप के आरोपों के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत में ईरानी दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। ईरान का कहना है कि यह आरोप लोगों का ध्यान उन घटनाओं से हटाने की कोशिश है, जिनमें हाल के दिनों में अमेरिकी कार्रवाई के दौरान भारतीय जहाज प्रभावित हुए और भारतीय नागरिकों की जान गई। तेहरान ने कहा कि भारत और ईरान के बीच मजबूत संबंध हैं और भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप तथ्यहीन है। प्रस्तावित शांति समझौते पर भी बढ़ा विवाद इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की ओर से सामने आया समझौते का कथित मसौदा वास्तविक सहमति से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा प्रस्तुत जानकारी सच्चाई से दूर है और वार्ता में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व से जल्द स्पष्ट रुख अपनाने की अपील भी की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने दी सफाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी समझौते को लेकर फैल रही अफवाहों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान को कोई नकद भुगतान नहीं किया जा रहा है और न ही सिर्फ समझौते पर हस्ताक्षर करने के बदले आर्थिक सहायता दी जाएगी। उनके अनुसार, किसी भी आर्थिक राहत को ईरान द्वारा तय शर्तों के पालन से जोड़ा गया है। ईरान बोला- समझौता पहले से ज्यादा करीब वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पहले की तुलना में कहीं ज्यादा करीब पहुंच चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत के लिए क्यों अहम है यह पूरा घटनाक्रम? होर्मुज जलडमरूमध्य Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आने वाले तेल और गैस आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव, जहाजों पर हमले और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक खींचतान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर सीधा असर डाल सकती है। इसलिए नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Iranian officials respond to reports of a possible US-Iran agreement amid ongoing diplomatic negotiations.
ट्रंप के समझौता दावे को ईरान ने नकारा, कहा- अभी किसी अंतिम डील पर फैसला नहीं

  अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अभी किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बनी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है और जल्द ही उस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ईरान बोला- समझौते की खबरें अटकलों पर आधारित ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए से बातचीत में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी अंतिम समझौते को लेकर सामने आ रही खबरें केवल अटकलें हैं। उन्होंने कहा कि वार्ता के कई पहलुओं पर प्रगति हुई है और मसौदे का बड़ा हिस्सा पहले ही तैयार किया जा चुका है, लेकिन अभी तक किसी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। बघाई के अनुसार, कतर और पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी रुख पर जताई नाराजगी बघाई ने आरोप लगाया कि वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष लगातार अपना रुख बदलता रहा है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी निर्धारित "रेड लाइन्स" से पीछे नहीं हटेगा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। उनका कहना था कि वार्ता जारी है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी शेष है। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चिंता ईरानी प्रवक्ता ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों के कारण इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा स्थिति प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, जहां किसी भी तनाव का असर वैश्विक तेल बाजारों पर पड़ सकता है। ट्रंप ने किया था समझौते का दावा इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता लगभग तैयार है। ट्रंप ने कहा था कि अब केवल दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है और आने वाले दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि हस्ताक्षर समारोह यूरोप में आयोजित किया जा सकता है और इसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया था कि प्रस्तावित समझौते का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। भारतीय जहाज पर हमले को लेकर अमेरिका पर आरोप इस बीच ओमान के तट के निकट एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले और उसमें भारतीय नागरिकों की मौत के मुद्दे पर भी ईरान ने अमेरिका की आलोचना की है। इस्माइल बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में अमेरिकी कार्रवाई को "राज्य प्रायोजित समुद्री डकैती" और "सशस्त्र लूट" करार दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आगे क्या? अमेरिका और ईरान के बयानों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। जहां वॉशिंगटन समझौते को अंतिम चरण में बता रहा है, वहीं तेहरान का कहना है कि बातचीत जारी है और अभी किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचना बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों की कूटनीतिक गतिविधियां यह तय करेंगी कि दोनों देश वास्तव में किसी व्यापक समझौते के करीब हैं या नहीं।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Donald Trump speaks about a potential US-Iran agreement as diplomatic negotiations continue.
ट्रंप का दावा: अमेरिका-ईरान समझौता अंतिम चरण में, वीकेंड पर यूरोप में हो सकते हैं हस्ताक्षर

  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है और कई मुद्दों पर बातचीत जारी है। ट्रंप बोले- औपचारिक प्रक्रिया बाकी व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि समझौते के अधिकांश बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ औपचारिक दस्तावेजी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले कुछ दिनों में इन प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देकर समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। ट्रंप के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर का कार्यक्रम इसी सप्ताहांत यूरोप में आयोजित किया जा सकता है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर सकते हैं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ट्रंप ने बताया कि यदि हस्ताक्षर समारोह आयोजित होता है तो वह स्वयं इसमें शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस बयान को अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से चल रही कूटनीतिक बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी जताई उम्मीद ट्रंप ने कहा कि संभावित समझौते से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव कम करने का रास्ता खुल सकता है। उनका मानना है कि समझौते के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर सामान्य गतिविधियां बहाल होने में मदद मिलेगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है और क्षेत्रीय तनाव के कारण यह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है। ईरान ने कहा- अभी अंतिम समझौता नहीं दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के दावों पर सावधानीपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि वार्ता के कई पहलुओं पर प्रगति हुई है, लेकिन अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका की ओर से नई मांगें सामने रखी जा रही हैं, जिससे कुछ मुद्दों पर सहमति बनने में कठिनाई आ रही है। बघाई ने दोहराया कि ईरान अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और निर्धारित "रेड लाइन" से पीछे नहीं हटेगा। आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर नजर ट्रंप के आशावादी बयान और ईरान की सतर्क प्रतिक्रिया के बीच अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर आगामी कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है। यदि दोनों पक्ष शेष मतभेदों को दूर करने में सफल रहते हैं, तो यह समझौता पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Tulsi Gabbard resigns as US Director of National Intelligence after husband cancer diagnosis announcement
ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका, तुलसी गबार्ड ने छोड़ा DNI पद, पति की बीमारी बनी वजह

Tulsi Gabbard ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गबार्ड ने कहा कि उनके पति Abraham Williams को हड्डियों के कैंसर की बेहद दुर्लभ बीमारी का पता चला है, जिसके बाद उन्होंने परिवार को प्राथमिकता देने का फैसला लिया। वह 30 जून तक डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) के पद पर बनी रहेंगी। ओवल ऑफिस में ट्रंप को दी जानकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक Tulsi Gabbard ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति Donald Trump से मुलाकात कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि इस कठिन समय में वह अपने पति के साथ रहना चाहती हैं और सार्वजनिक जीवन से कुछ समय के लिए पीछे हटना जरूरी है। पति को बताया सबसे बड़ा सहारा गबार्ड ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में उनके पति हर कठिन दौर में उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने कहा कि सैन्य सेवा, चुनावी राजनीति और अमेरिकी खुफिया तंत्र की जिम्मेदारी संभालने तक हर चुनौती में Abraham Williams उनका सबसे बड़ा सहारा रहे। इसी वजह से वह उन्हें इस मुश्किल दौर में अकेला नहीं छोड़ सकतीं। ट्रंप ने की पुष्टि, नए कार्यवाहक DNI का ऐलान Donald Trump ने भी उनके इस्तीफे की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि गबार्ड अपने पति के इलाज और देखभाल के लिए पद छोड़ रही हैं। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि अब्राहम जल्द स्वस्थ होंगे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि Aaron Lucas को कार्यवाहक DNI बनाया जाएगा। अमेरिकी नेताओं ने जताई संवेदना अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने गबार्ड को “सच्ची देशभक्त” बताते हुए कहा कि परिवार हमेशा पहले आता है। वहीं Lindsey Graham समेत कई नेताओं ने उनके परिवार के लिए प्रार्थना की। ईरान की प्रतिक्रिया ने खींचा ध्यान इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा ईरान की प्रतिक्रिया को लेकर हुई। Embassy of Iran in Armenia ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि तुलसी गबार्ड कई बार ईरान को लेकर ऐसी बातें कहती थीं जो ट्रंप प्रशासन को पसंद नहीं आती थीं। पोस्ट में उनके पति के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की गई। साथ ही दावा किया गया कि गबार्ड “कभी-कभी अमेरिका के हित में बोलती थीं, न कि इजरायल के प्रभाव में।” कौन हैं तुलसी गबार्ड? 43 वर्षीय Tulsi Gabbard अमेरिकी राजनीति की चर्चित हस्तियों में गिनी जाती हैं। वह अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली हिंदू नेता रही हैं। उनका जन्म अमेरिकन समोआ में हुआ था, लेकिन उनकी मां हिंदू धर्म से प्रभावित थीं और उन्होंने अपने बच्चों के नाम भारतीय परंपराओं से प्रेरित रखे। इसी वजह से भारत और भारतीय समुदाय के बीच तुलसी गबार्ड की खास पहचान रही है। कार्यकाल में लिए कई बड़े फैसले DNI रहते हुए गबार्ड ने अमेरिकी खुफिया तंत्र में कई बड़े बदलाव किए। उन्होंने: एजेंसी का आकार कम किया कई आंतरिक ढांचागत सुधार किए DEI (डाइवर्सिटी, इक्विटी और इंक्लूजन) कार्यक्रमों को खत्म किया लाखों सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक करवाए इन दस्तावेजों में 2016 अमेरिकी चुनाव में रूस हस्तक्षेप जांच और Assassination of John F. Kennedy से जुड़ी फाइलें भी शामिल थीं। ट्रंप प्रशासन में लगातार इस्तीफे गबार्ड का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन में लगातार बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हाल के महीनों में कई वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे और बर्खास्तगी के बाद अब तुलसी गबार्ड का जाना भी अमेरिकी राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।  

surbhi मई 23, 2026 0
US Vice President J D Vance with wife Usha Vance during a public appearance
नई किताब में पत्नी ऊषा को लेकर भावुक हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति

J. D. Vance ने अपनी नई पुस्तक में पत्नी Usha Bala Chilukuri Vance के साथ पहली मुलाकात और प्रेम कहानी का जिक्र किया है। वेंस ने बताया कि येल लॉ स्कूल में ऊषा से मिलने के बाद उन्हें पहली बार “सच्चा प्रेम” महसूस हुआ था। उन्होंने अपने दोस्तों से यहां तक कह दिया था कि “या तो मैं इसी लड़की से शादी करूंगा, या फिर पूरी जिंदगी कुंवारा रहूंगा।” नई किताब में साझा किए निजी अनुभव अपनी नई संस्मरण पुस्तक Communion: Finding My Way Back to Faith में जेडी वेंस ने कॉलेज के दिनों की यादों और निजी जिंदगी के कई पहलुओं का जिक्र किया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस किताब के कुछ अंश प्रकाशित किए गए हैं, जिनमें वेंस ने लिखा कि वह ऊषा की सुंदरता, बुद्धिमत्ता और आत्मविश्वास से बेहद प्रभावित थे। उन्होंने लिखा: “जब मैं पहली बार ऊषा से मिला, तो उनकी कई बातें मुझे असामान्य लगीं।” वेंस के मुताबिक ऊषा बेहद प्रतिस्पर्धी थीं, लेकिन उनमें ईर्ष्या जैसी भावना नहीं थी। उन्होंने इसे ऊषा के आत्मविश्वास का सबसे बड़ा संकेत बताया। “पारंपरिक भूमिकाओं में दिलचस्पी नहीं थी” जेडी वेंस ने लिखा कि जब उन्होंने ऊषा से पूछा कि वह जीवन में क्या करना चाहती हैं, तो उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि उनका पारंपरिक सामाजिक भूमिकाओं में खास झुकाव नहीं था। वेंस ने बताया कि यही बात उन्हें सबसे अलग और आकर्षक लगी। 2014 में हुई थी शादी जेडी वेंस और ऊषा ने 2014 में शादी की थी। यह दंपत्ति अब अपने चौथे बच्चे का स्वागत करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जुलाई में उनके घर नए बच्चे का जन्म हो सकता है। धर्म और जिंदगी को लेकर भी किए खुलासे वेंस ने अपनी किताब में धार्मिक यात्रा के बारे में भी विस्तार से लिखा है। उन्होंने बताया कि वह पहले ईसाई धर्म को मानते थे, बाद में नास्तिक बन गए और फिर धीरे-धीरे Catholic Church की ओर आकर्षित हुए। उन्होंने 2019 में कैथोलिक धर्म अपनाया। वेंस के मुताबिक इस नए विश्वास ने उन्हें जिंदगी का मकसद दिया, जो उन्हें येल यूनिवर्सिटी की पढ़ाई या वित्तीय क्षेत्र में काम करने से नहीं मिला था। “हिलबिली एलेगी” से मिली थी पहचान जेडी वेंस इससे पहले अपनी चर्चित पुस्तक Hillbilly Elegy के कारण भी सुर्खियों में रहे हैं। इस किताब में उन्होंने अपने बचपन, गरीबी, हिंसा और परिवार की संघर्षपूर्ण परिस्थितियों का जिक्र किया था। यह किताब काफी लोकप्रिय हुई थी और बाद में इस पर फिल्म भी बनाई गई थी।  

surbhi मई 13, 2026 0
JD Vance questions Pentagon briefings on Iran war amid tensions with Defense Secretary Pete Hegseth
ईरान युद्ध पर ट्रंप को गलत जानकारी? जेडी वेंस को अपने ही रक्षा मंत्री पर शक

बंद कमरे की बैठकों में उठाए गंभीर सवाल अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेंस को आशंका है कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को युद्ध की वास्तविक स्थिति से अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। बताया जा रहा है कि निजी बैठकों में वेंस ने सवाल उठाया कि क्या पेंटागन ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की वास्तविक स्थिति बता रहा है या केवल सकारात्मक तस्वीर पेश की जा रही है। मिसाइल भंडार को लेकर बढ़ी चिंता वेंस की सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी मिसाइल भंडार को लेकर है। उनका मानना है कि ईरान युद्ध में बड़ी मात्रा में हथियार खर्च हो रहे हैं, जिससे भविष्य में चीन, रूस या उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ संभावित संघर्ष की स्थिति में अमेरिका कमजोर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, वेंस ने यह चिंता सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के सामने भी रखी है। हेगसेथ पर सीधे आरोप से बच रहे वेंस हालांकि, जेडी वेंस ने अब तक सार्वजनिक रूप से पीट हेगसेथ की आलोचना नहीं की है। उन्होंने कई मौकों पर रक्षा मंत्री की तारीफ भी की है। सूत्रों का कहना है कि वेंस इस मुद्दे को व्यक्तिगत टकराव में बदलने से बचना चाहते हैं। लेकिन उनके करीबी मानते हैं कि पेंटागन की तरफ से पेश की जा रही तस्वीर जरूरत से ज्यादा आशावादी है। खुफिया रिपोर्ट और दावों में अंतर पीट हेगसेथ लगातार दावा कर रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान की वायुसेना, नौसेना और रक्षा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन आंतरिक खुफिया आकलनों में तस्वीर कुछ अलग बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब भी अपनी वायुसेना और मिसाइल क्षमता का बड़ा हिस्सा बचाने में सफल रहा है। 2028 की राजनीति पर भी असर विश्लेषकों का मानना है कि जेडी वेंस का राजनीतिक भविष्य भी इस युद्ध के नतीजों से जुड़ा हुआ है। यदि ईरान युद्ध लंबा खिंचता है या अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, तो इसका असर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में वेंस की संभावनाओं पर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन में बढ़ सकती है खींचतान ईरान युद्ध को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर मतभेद सामने आने से साफ है कि ट्रंप प्रशासन के शीर्ष स्तर पर रणनीति को लेकर एकराय नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप अपने उपराष्ट्रपति की चिंताओं को कितना महत्व देते हैं और पेंटागन की रणनीति में कोई बदलाव करते हैं या नहीं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
JD Vance Pakistan visit postponed amid US-Iran nuclear deal tensions and stalled talks
ईरान की चुप्पी से अटकी बातचीत, JD Vance की पाकिस्तान यात्रा टली

  ईरान के जवाब का इंतजार, दौरा फिलहाल स्थगित अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance की पाकिस्तान यात्रा फिलहाल टाल दी गई है। यह दौरा ईरान के साथ न्यूक्लियर डील को लेकर अहम बातचीत के लिए प्रस्तावित था, लेकिन तेहरान की ओर से अमेरिकी प्रस्तावों पर कोई जवाब नहीं मिलने के कारण इसे रोक दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेंस को मंगलवार सुबह इस्लामाबाद के लिए रवाना होना था, जहां बुधवार को वार्ता होनी थी। हालांकि, अब यह यात्रा अनिश्चितकाल के लिए टल गई है। सीजफायर की समयसीमा के बीच बढ़ा दबाव यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम समाप्त होने के करीब था। इसी बीच Donald Trump ने सीजफायर बढ़ाने का ऐलान कर दिया, ताकि बातचीत के लिए और समय मिल सके। अमेरिका का कहना है कि वह अभी भी कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन सैन्य विकल्पों को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भी बरकरार है। ईरान ने ठुकराया दबाव, बातचीत पर सवाल ईरान की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। वरिष्ठ नेताओं ने साफ कहा है कि “धमकी के साए में बातचीत संभव नहीं है।” ईरानी अधिकारियों ने सीजफायर बढ़ाने के फैसले को एक “रणनीतिक चाल” बताया और इसे समय खरीदने की कोशिश करार दिया। वहीं, सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ता में हिस्सा नहीं लिया। आगे क्या? अनिश्चितता के बीच टिकी निगाहें फिलहाल अमेरिका यह संकेत मिलने का इंतजार कर रहा है कि ईरान के वार्ताकार समझौते के लिए पूरी तरह अधिकृत हैं या नहीं। अगर स्थिति स्पष्ट होती है, तो JD Vance की पाकिस्तान यात्रा दोबारा तय की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गतिरोध के चलते क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ सकता है और कूटनीतिक समाधान की राह और कठिन हो सकती है।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
US and Iran officials signaling renewed peace talks amid escalating Middle East tensions and negotiations
US–Iran Peace Talk 2: तारीख तय होने के संकेत, ईरान झुका–ट्रंप ने दी हरी झंडी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच United States और Iran के बीच दूसरी शांति वार्ता (Peace Talk-2) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पहले दौर की बातचीत भले ही बेनतीजा रही थी, लेकिन अब दोनों देशों के बीच समझौते की संभावनाएं फिर से मजबूत होती दिख रही हैं। ट्रंप का बड़ा बयान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा: “ईरान समझौते के लिए उत्सुक है” “हमें उनकी तरफ से संदेश मिला है” “नाकेबंदी जारी रहेगी, अभी कोई ढील नहीं” उन्होंने दोहराया कि: ईरान को कभी भी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं होगी शर्तें नहीं मानी गईं तो कोई समझौता नहीं होगा वेंस बोले–‘प्रगति हुई है’ अमेरिकी उपराष्ट्रपति J. D. Vance ने Fox News को बताया: परमाणु मुद्दे पर बातचीत में “कुछ प्रगति” हुई है अमेरिका इस प्रक्रिया को एक बड़े समझौते के साथ खत्म करना चाहता है “अब आगे बढ़ने के लिए कदम ईरान को उठाना होगा” क्या झुका ईरान? रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान यूरेनियम संवर्धन पर कुछ नरमी दिखाने को तैयार हुआ है पहले जहां पूरी तरह इनकार था, अब सीमित और नियंत्रित कमी पर सहमति के संकेत हैं यही वजह है कि बातचीत का रास्ता फिर से खुलता दिख रहा है। कब और कहां हो सकती है अगली बैठक? रिपोर्ट्स के अनुसार: अगला दौर 16 अप्रैल के आसपास हो सकता है संभावित जगहें: Geneva Islamabad हालांकि, अभी आधिकारिक तौर पर तारीख और स्थान तय नहीं हुए हैं। कौन कर रहा है मध्यस्थता? खबरों के मुताबिक: Turkey दोनों देशों के बीच दूरी कम करने की कोशिश कर रहा है क्षेत्रीय मध्यस्थ भी लगातार बातचीत में लगे हैं क्यों फेल हुई थी पहली वार्ता? पहले दौर में मुख्य विवाद: अमेरिका की मांग: 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन बंद उच्च स्तर का भंडार देश से बाहर हटाना ईरान का प्रस्ताव: सीमित अवधि में नियंत्रित कमी इसी मतभेद के चलते समझौता नहीं हो पाया था। क्या आगे बन सकता है समझौता? ताजा संकेत बताते हैं कि: दोनों पक्ष अब कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन नाकेबंदी और सैन्य दबाव अभी भी जारी है अगर ईरान अपनी शर्तों में और नरमी दिखाता है, तो आने वाले दिनों में एक बड़ा समझौता संभव हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर इस संभावित Peace Talk-2 पर टिकी है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
JD Vance commenting on Iran-US tensions and Strait of Hormuz security concerns during interview
Iran–US Tension: वेंस का आरोप–ईरान कर रहा ‘आर्थिक आतंकवाद’, होर्मुज को लेकर सख्त चेतावनी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच J. D. Vance ने Iran पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को रोककर “आर्थिक आतंकवाद” कर रहा है। ‘आर्थिक आतंकवाद’ का आरोप Fox News को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा: ईरान जहाजों की आवाजाही रोककर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहा है “अगर ईरान आर्थिक आतंकवाद करेगा, तो अमेरिका भी सख्त जवाब देगा” उन्होंने साफ किया कि अमेरिका ऐसी स्थिति में ईरानी जहाजों की आवाजाही भी रोक सकता है। ट्रंप की नीति का हवाला वेंस ने कहा कि Donald Trump ने यह दिखा दिया है कि: “यह खेल दोनों तरफ से खेला जा सकता है” अमेरिका जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है यहां किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है न्यूक्लियर मुद्दे पर भी सख्ती वेंस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी कड़ा रुख अपनाया: ईरान को यूरेनियम संवर्धन पर नियंत्रण देना होगा एक मजबूत जांच प्रणाली लागू होनी चाहिए ताकि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके इस्लामाबाद वार्ता का जिक्र Islamabad में हुई हालिया वार्ता का जिक्र करते हुए वेंस ने कहा: बातचीत में “काफी प्रगति” हुई लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका “अब गेंद ईरान के पाले में है” बढ़ता टकराव इस बयान के बाद साफ है कि: अमेरिका और Iran के बीच तनाव और बढ़ सकता है कूटनीतिक बातचीत जारी है, लेकिन सैन्य और आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है दुनिया की नजर अब इस पर है कि क्या दोनों देश समझौते की दिशा में आगे बढ़ते हैं या टकराव और गहरा होता है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
JD Vance speaking on Iran-US nuclear talks after Islamabad negotiations amid rising Middle East tensions
Iran–US Tension: ‘गेंद अब ईरान के पाले में’, इस्लामाबाद वार्ता के बाद बोले वेंस

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच J. D. Vance ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि Islamabad में हुई शांति वार्ता में “अच्छी प्रगति” हुई है, लेकिन अब अगला कदम Tehran को उठाना होगा। वेंस ने साफ कहा–“गेंद अब ईरान के पाले में है।” 21 घंटे चली वार्ता, लेकिन समझौता नहीं अमेरिका और Iran के बीच वीकेंड पर इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक चली लंबी बातचीत किसी ठोस समझौते पर खत्म नहीं हो सकी। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान ने न्यूक्लियर फ्यूल एनरिचमेंट रोकने की शर्त मानने से इनकार कर दिया। ‘सही दिशा में बढ़ी बातचीत’ Fox News को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि हालात बिगड़े नहीं हैं, बल्कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा: “कुछ पॉजिटिव संकेत मिले हैं” “सामने वाला पक्ष भी आगे बढ़ा” “हालांकि, उम्मीद के मुताबिक प्रगति नहीं हुई” न्यूक्लियर एम्बिशन पर अमेरिका सख्त वेंस ने जोर देकर कहा कि अगर ईरान अपने न्यूक्लियर एम्बिशन पर अमेरिका की शर्तें मान लेता है, तो दोनों देशों के बीच बड़ा समझौता संभव है। उन्होंने कहा, “क्या हम आगे बातचीत करेंगे? क्या समझौता होगा? यह अब ईरान पर निर्भर करता है।” क्यों रुकी बातचीत? वेंस के मुताबिक, ईरानी डेलिगेशन के पास अंतिम फैसला लेने का अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा: “टीम को तेहरान लौटना पड़ा” “अंतिम मंजूरी के लिए शीर्ष नेतृत्व से सहमति जरूरी है” किन नेताओं ने लिया हिस्सा? इस हाई-लेवल वार्ता में दोनों देशों के बड़े नेता शामिल हुए: अमेरिका की ओर से: J. D. Vance, Steve Witkoff, Jared Kushner ईरान की ओर से: Mohammad Bagher Ghalibaf, Abbas Araghchi आगे क्या? इस्लामाबाद वार्ता के बाद अब नजरें तेहरान पर हैं। अगर ईरान अमेरिका की शर्तों पर नरमी दिखाता है, तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है। फिलहाल, कूटनीतिक हल की उम्मीद कायम है, लेकिन स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0