रांची: झारखंड में पिछले 16-17 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन और सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर भाजपा अब आक्रामक रणनीति अपनाने जा रही है. पार्टी ने झारखंड के छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का फैसला किया है. भाजपा का आरोप है कि छात्रों की मांगों को सुनने के बजाय सरकार ने बल प्रयोग का रास्ता अपनाया. देशभर में भाजपा नेता करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मंगलवार को देश के अलग-अलग राज्यों में पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. इसके जरिए झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद और विधानसभा घेराव के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा. पार्टी ने सभी प्रदेश इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे छात्र आंदोलन के समर्थन में अपनी बात मजबूती से रखें और झारखंड की घटना को देशभर के सामने रखें. राहुल गांधी और कांग्रेस को घेरने की तैयारी भाजपा ने इस पूरे मामले में कांग्रेस और राहुल गांधी को भी निशाने पर लेने की तैयारी की है. पार्टी नेताओं का कहना है कि झारखंड में कांग्रेस गठबंधन की सरकार है और ऐसे में छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर कांग्रेस को जवाब देना चाहिए. भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार युवाओं की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है. पार्टी छात्र आंदोलन, कथित परीक्षा गड़बड़ी और लाठीचार्ज को लेकर सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की तैयारी में है. झारखंड में भाजपा ने बुलाया बंद लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने झारखंड बंद का आह्वान भी किया है. मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ताओं के सड़कों पर उतरने की तैयारी है. भाजपा नेताओं ने छात्रों पर हुए बल प्रयोग की निंदा करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. पार्टी का कहना है कि JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से छात्र आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में उनकी मांगों का समाधान बातचीत और जांच के जरिए किया जाना चाहिए. विधानसभा घेराव के दौरान हुआ था लाठीचार्ज JPSC-JSSC परीक्षा विवाद और नियुक्ति प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्र पिछले करीब दो सप्ताह से आंदोलन कर रहे हैं. सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव के लिए रांची पहुंचे थे. प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी. स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया. इस कार्रवाई में कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आयी. अब भाजपा इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर हमलावर है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर कांग्रेस नेतृत्व को घेरने की रणनीति बना रही है.
गढ़वा: रांची में विधानसभा घेराव के दौरान आंदोलनरत छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को बुलाये गये झारखंड बंद का असर गढ़वा में भी देखने को मिला. बंद के समर्थन में भाजपा नेता और कार्यकर्ता सुबह ही सड़कों पर उतर गये. कार्यकर्ताओं ने शहर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया और छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग की निंदा की. इस दौरान हेमंत सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच कराने की मांग उठायी गयी. सुबह आठ बजे रंका मोड़ पर जुटे भाजपा कार्यकर्ता मंगलवार सुबह करीब आठ बजे भाजपा जिलाध्यक्ष उदय कुशवाहा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शहर के प्रमुख रंका मोड़ स्थित घंटाघर के पास जुटे. यहां से कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में शहर के विभिन्न मार्गों पर निकले. भाजपा कार्यकर्ताओं ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों से बंद का समर्थन करने और दुकानों को बंद रखने की अपील की. इस दौरान कार्यकर्ता सरकार विरोधी नारे लगाते हुए छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते रहे. छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर सरकार पर निशाना प्रदर्शन के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय चौबे ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में उनकी मांगों को सुनने के बजाय लाठीचार्ज करना उचित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है. भाजपा नेताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और छात्राओं पर हुए बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच की मांग की. ‘धांधली के सबूत हैं तो CBI जांच से परहेज क्यों?’ भाजपा नेता विनय चौबे ने सरकार से सवाल किया कि यदि JPSC और JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों की जांच चल रही है और इसके संबंध में सबूत सामने आ रहे हैं, तो सरकार सीबीआई जांच कराने से पीछे क्यों हट रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं से राज्य के लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है. भाजपा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. दर्जनों कार्यकर्ता रहे मौजूद विरोध प्रदर्शन और जुलूस में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए. इनमें वरिष्ठ भाजपा नेता विनय चौबे, उमेश कश्यप, विधायक प्रतिनिधि रिंकू तिवारी, रितेश चौबे समेत दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे. भाजपा नेताओं ने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर पार्टी उनके साथ खड़ी है. नेताओं ने रांची में हुए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और JPSC-JSSC विवाद की निष्पक्ष जांच की मांग दोहरायी. बंद को लेकर प्रशासन भी रहा अलर्ट गढ़वा में बंद के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न हो, इसके लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से भी निगरानी रखी गयी. शहर के प्रमुख इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी गयी. फिलहाल प्रदर्शन के दौरान किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है.
जमशेदपुर: भाजपा द्वारा बुलाये गये झारखंड बंद के बीच मंगलवार को जमशेदपुर में फिलहाल जनजीवन सामान्य नजर आ रहा है. शहर में बस, ऑटो और मिनी बसों का परिचालन जारी है, वहीं निजी और सरकारी स्कूलों में भी सुबह की पाली में पढ़ाई सामान्य रूप से चलती रही. हालांकि, बंद को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिले के 55 प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर 55 दंडाधिकारियों की तैनाती की गयी है. जेपी सेतु बस स्टैंड से बसों का परिचालन जारी मंगलवार सुबह भुइयांडीह स्थित जेपी सेतु बस स्टैंड से रांची, धनबाद, बोकारो, चाईबासा समेत राज्य के अलग-अलग हिस्सों के लिए यात्री बसों का परिचालन जारी रहा. शहर के भीतर भी ऑटो और मिनी बसें सामान्य दिनों की तरह चलती दिखीं. इससे यात्रियों को फिलहाल आवागमन में किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा. वहीं, शहर के निजी और सरकारी स्कूलों में भी सुबह की पाली में पठन-पाठन सामान्य रूप से जारी रहा. बच्चे समय पर स्कूल पहुंचे और शैक्षणिक गतिविधियां भी संचालित होती रहीं. 55 जगहों पर मजिस्ट्रेट तैनात बंद के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. जमशेदपुर के 55 प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गयी है. मानगो, साकची, बिष्टुपुर, जुगसलाई, टेल्को, परसुडीह और बागबेड़ा के अलावा घाटशिला, चाकुलिया और बहरागोड़ा जैसे क्षेत्रों में भी पुलिस और प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गयी है. डिमना चौक और टाटानगर स्टेशन पर विशेष सुरक्षा बंद के दौरान भीड़ या किसी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए डिमना चौक और टाटानगर रेलवे स्टेशन पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गयी है. यहां वाटर कैनन, वज्र वाहन और अश्रुगैस टीमों को तैयार रखा गया है. एसडीओ धालभूम, एसडीओ घाटशिला, सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी समेत वरीय अधिकारी अलग-अलग क्षेत्रों में भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं. पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है. जबरन दुकान बंद करायी तो होगी FIR जिला प्रशासन ने बंद समर्थकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. प्रशासन के अनुसार, बंद के नाम पर जबरन दुकान बंद कराने, एनएच-33 या रेलवे ट्रैक को बाधित करने, सार्वजनिक आवागमन रोकने अथवा सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जायेगी. वीडियोग्राफी से रखी जा रही नजर प्रदर्शन और जुलूस के संभावित मार्गों के साथ प्रमुख चौक-चौराहों पर वीडियोग्राफी भी करायी जा रही है. इसका उद्देश्य उपद्रव या कानून तोड़ने वालों की पहचान करना है. प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा. फिलहाल बंद का असर सीमित मंगलवार सुबह तक जमशेदपुर में बंद का व्यापक असर देखने को नहीं मिला है. बस, ऑटो और मिनी बसों के परिचालन के साथ स्कूल-कॉलेज भी सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं. हालांकि, प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है और संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है.
रांची: JPSC-JSSC परीक्षा विवाद और विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में आजसू पार्टी ने भाजपा द्वारा आहूत झारखंड बंद का समर्थन किया है. बंद के दौरान आजसू सुप्रीमो और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित बापू वाटिका में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरने पर बैठेंगे. पार्टी ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जताने का निर्णय लिया है. ‘लाठी के बल पर छात्रों की आवाज दबाना लोकतंत्र का अपमान’ आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश महतो ने कहा कि छात्रों की आवाज को लाठी के बल पर दबाने की कोशिश लोकतंत्र का अपमान है. उन्होंने कहा कि राज्य के युवा लंबे समय से रोजगार, निष्पक्ष परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में उनकी समस्याओं का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए. सुदेश महतो ने कहा कि युवाओं के सवालों का जवाब लाठी, आंसू गैस और वाटर कैनन से नहीं दिया जा सकता. सरकार को आंदोलनरत छात्रों के साथ बातचीत करनी चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. छात्रों पर लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय जांच की मांग आजसू पार्टी ने विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं है. पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करायी जाये और यदि पुलिस कार्रवाई में किसी अधिकारी की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये. ‘सरकार छात्रों से तत्काल शुरू करे संवाद’ आजसू ने सरकार से आंदोलनरत छात्रों के साथ तत्काल सकारात्मक और सम्मानजनक बातचीत शुरू करने की भी मांग की है. पार्टी नेताओं का कहना है कि JPSC और JSSC से जुड़े विवाद ने राज्य के हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है. ऐसे में सरकार को उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में पहल करनी चाहिए. सुदेश महतो ने कहा कि आजसू पार्टी छात्रों और युवाओं के मुद्दे पर उनके साथ खड़ी है. बापू वाटिका में धरने के माध्यम से पार्टी सरकार तक यह संदेश पहुंचाने की कोशिश करेगी कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए.
जमशेदपुर: JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी तथा रांची में विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा की ओर से बुलाये गये झारखंड बंद का असर मंगलवार सुबह जमशेदपुर में देखने को मिला. शहर के कई प्रमुख चौक-चौराहों पर भाजपा कार्यकर्ता पार्टी का झंडा लेकर सड़कों पर उतरे और बंद को सफल बनाने की अपील की. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक वाहनों के परिचालन का विरोध किया और दुकानदारों से प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की. गोलमुरी चौक पर सड़क पर उतरे भाजपा कार्यकर्ता बंद के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ता सुबह से ही गोलमुरी चौक पर जुटने लगे. कार्यकर्ताओं ने हाथों में पार्टी के झंडे और बैनर लेकर प्रदर्शन किया. इस दौरान सार्वजनिक वाहनों के परिचालन को रोकने का प्रयास किया गया. इससे कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात प्रभावित हुआ. कार्यकर्ताओं ने लोगों से बंद को समर्थन देने की अपील की. टेल्को में कई दुकानें बंद बंद का असर टेल्को क्षेत्र में भी देखने को मिला. सुबह कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों के शटर बंद नजर आये. टेल्को के खड़ंगझार मार्केट में भी बंद का असर दिखा. हालांकि, शहर के सभी इलाकों में बंद का एक जैसा असर नहीं रहा. कई जगह दुकानें खुली रहीं और सामान्य गतिविधियां भी जारी रहीं. बस और ऑटो का परिचालन रहा कम बंद के कारण शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित रही. आम दिनों की तुलना में मंगलवार सुबह बसों, ऑटो और अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट की संख्या कम रही. इससे ऑफिस, अस्पताल और जरूरी कामों के लिए घर से निकले लोगों को कुछ परेशानी का सामना करना पड़ा. कई यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा. संवेदनशील इलाकों में पुलिस की तैनाती बंद के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस-प्रशासन भी अलर्ट रहा. शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती की गयी. पुलिस की टीम लगातार स्थिति पर नजर रखती रही, ताकि बंद के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो. JPSC-JSSC मुद्दे और लाठीचार्ज के विरोध में बंद भाजपा नेताओं ने कहा कि बंद का आह्वान JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा छात्रों के आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के विरोध में किया गया है. पार्टी नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है. उनका कहना है कि झारखंड के युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए और परीक्षा विवाद की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए. फिलहाल जमशेदपुर में बंद का असर आंशिक रहा. कुछ इलाकों में दुकानें और सार्वजनिक परिवहन प्रभावित रहे, जबकि कई क्षेत्रों में रोजमर्रा की गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहीं.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।